गाँव घूमिए, पंचायत चुनिए, सूखा गाँव हरा कीजिए
शुरुआत
राज्य और देश की सरकार पिछले अध्याय में देखी। अब सबसे पास वाली सरकार — गाँव की। इस अध्याय में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय सरकार को चलाकर समझिए; नगरों की बारी अगले अध्याय में।

“असली भारत, गाँवों में बसता है।”
अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 163)
- पंचायती राज संस्थाएँ क्या हैं?
- उनके क्या कार्य हैं?
- शासन और लोकतंत्र में ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1लक्ष्मणपुर चलिए
हिमालय की तराई में बसा छोटा-सा गाँव लक्ष्मणपुर: 200 घर, लगभग 700 लोग, ज़्यादातर किसान। लोग अपनी ज़मीन पर खेती करते हैं, गाय या बकरियाँ पालते हैं। कुछ के संबंधी सेना में हैं; कुछ युवा काम की खोज में नगर चले गए हैं (पृ. 163–164)।
पंचायती राज = स्व-शासन (पृ. 164)
पंचायत यानी ग्राम परिषद। यह स्थानीय समस्याएँ हल करती है, विकास के कामों को आगे बढ़ाती है, और सरकारी योजनाओं का लाभ जनसाधारण तक पहुँचाती है।
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1लक्ष्मणपुर में कितने घर हैं?
पृ. 163: 200 घर, लगभग 700 लोग।
2पंचायती राज को स्व-शासन का रूप क्यों कहा गया है?
पृ. 164।
2त्रिस्तरीय व्यवस्था
पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों पर, नीचे से ऊपर, काम करती है — ग्राम, खंड और जिला। इसे "त्रिस्तरीय" प्रणाली कहते हैं (पृ. 165)।
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1पंचायती राज के तीन स्तर, नीचे से ऊपर:
पृ. 165।
2मंडल परिषद किस स्तर का एक नाम है?
चित्र 11.1, पृ. 164।
3ग्राम सभा और ग्राम पंचायत
ग्राम सभा = गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वे वयस्क जो मतदाता के रूप में नामांकित हैं। ग्राम सभा में स्त्री और पुरुष अपने क्षेत्र के सभी मामलों पर चर्चा करते हैं और निर्णय लेते हैं (पृ. 165)।
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1ग्राम पंचायत के सदस्यों को कौन सीधे चुनता है?
पृ. 165।
2गाँव के भू-अभिलेख कौन सँभालता है?
पृ. 167।
4आदर्श सरपंच
पुस्तक तीन आदर्श सरपंचों की कहानी बताती है (पृ. 166)। कार्ड पलटिए।
पुस्तक में ज़िले का पुराना नाम "अहमदनगर" छपा है। महाराष्ट्र सरकार ने 8 अक्टूबर 2024 की अधिसूचना से इसका नाम अहिल्यानगर किया। अधिसूचना देखिए (महाराष्ट्र ग्राम विकास विभाग) ↗
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1हिवरे बाज़ार किस वजह से हरा-भरा हुआ?
पृ. 166।
2वंदना बहादुर मैदा किस समुदाय से हैं?
पृ. 166।
5बच्चों की भी सुनवाई
पंचायत को सबकी बात सुननी होती है — बच्चों की भी। बाल हितैषी पंचायत की पहल से बच्चों को अपनी भलाई से जुड़े मामलों पर अपनी राय रखने का अवसर मिलता है। कई राज्यों में बाल सभाएँ और बाल पंचायतें नियमित रूप से हों, इसके लिए क़दम उठाए गए हैं (पृ. 167)।
महाराष्ट्र की बाल पंचायतें (पृ. 167)
कुछ बाल पंचायतों ने बाल-श्रम और बाल-विवाह ख़त्म करने पर काम किया। उनके सदस्य मिलकर माता-पिता और बड़ों को समझाते हैं कि बच्चों को फिर से विद्यालय भेजें, और पढ़ने की उम्र में लड़कियों का विवाह न करें।
कक्षा में आज़माइए (पृ. 169): चार-पाँच विद्यार्थी बाल पंचायत बनें, बाक़ी ग्रामवासी। ग्राम सभा किन विषयों पर चर्चा करेगी? कौन-सी चुनौतियाँ आएँगी? कौन-से समाधान सुझाए जाएँगे?
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1बाल संसद में किस आयु के बच्चे भाग लेते हैं?
पृ. 168।
2सांगखू राधू खांडू पंचायत ने विद्यालयों में रसोईघर क्यों बनवाए?
पृ. 168।
6पंचायत समिति और जिला परिषद
खंड स्तर पर पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है। इन संस्थाओं के सदस्य स्थानीय लोग चुनते हैं, पर इनमें क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य जैसे दूसरे सदस्य भी हो सकते हैं (पृ. 169)।
हर राज्य थोड़ा अलग (पृ. 170)
पंचायती राज संस्थाओं का गठन और काम राज्यों में कुछ अलग हो सकता है, क्योंकि इन पर राज्यों का अधिकार है। पर लक्ष्य एक है — ग्रामवासी अपने गाँव और क्षेत्र के प्रबंधन और विकास में सक्रिय भाग ले सकें।
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1ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी कौन है?
पृ. 169।
2पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान है?
पृ. 169।
7कौटिल्य का ढाँचा
"अर्थशास्त्र" शासन पर एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसे लगभग 2300 वर्ष पहले कौटिल्य (जिन्हें बाद में चाणक्य भी कहा गया) ने लिखा। इसमें राज्य का गठन और संचालन, अर्थव्यवस्था की समृद्धि, शासक के कर्तव्य और युद्ध के बारे में विस्तार से बताया गया है (पृ. 170)।
"राजा प्रत्येक 10 गाँवों पर एक 'संग्रहण' (उप-जिला मुख्यालय); प्रत्येक 100 गाँवों पर 'कार्वटिक' (जिला मुख्यालय), प्रत्येक 400 गाँवों पर 'द्रोणमुख' और प्रत्येक 800 गाँवों पर 'स्थानीय' (प्रांतीय मुख्यालय) स्थापित करे।" (पृ. 170)
पुस्तक का प्रश्न (पृ. 170): आज की भाषा में हम इन चार प्रवर्गों को क्या नाम देंगे? क्या यह आश्चर्य की बात नहीं कि इतने पहले ऐसी संरचना सोची गई थी? कक्षा में चर्चा कीजिए।
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1कौटिल्य के अनुसार 100 गाँवों पर कौन-सा मुख्यालय?
पृ. 170।
2800 गाँवों में कौटिल्य के नियम से कितने संग्रहण बनेंगे?
800 ÷ 10 = 80 (पृ. 170 का अनुपात)।
8सार और अभ्यास
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 171)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
सोचिए (प्र. 4, पृ. 171)
आपका विद्यालय राजमार्ग के पास है और विद्यार्थियों को सड़क पार करने में कठिनाई होती है। समाधान के क्या विकल्प हो सकते हैं? पंचायती राज की कौन-सी संस्थाएँ मदद कर सकती हैं? विद्यार्थी क्या कर सकते हैं?
आख़िरी जाँच✓ पड़ाव पूरा
1पंचायती राज में लोकतंत्र किस तरह काम करता है?
पृ. 171।
2पंचायत संस्थाओं के गठन में राज्यों में अंतर क्यों हो सकता है?
पृ. 170।
आठों पड़ाव पूरे! अगले अध्याय में नगरों की स्थानीय सरकार देखेंगे।