हर काम को पहचानिए, कुर्सी बनाइए, गली साफ़ कीजिए
शुरुआत
लोग दिन भर तरह-तरह के काम करते हैं — कुछ पैसे के लिए, कुछ प्यार, सेवा या कृतज्ञता से। इस अध्याय में देखिए कि हर तरह के काम का हमारे जीवन में क्या मूल्य है।

“जब आप कोई काम कर रहे हों, उससे बाहर कुछ न सोचें। उसे पूजा की तरह करें, सबसे बड़ी पूजा की तरह और उस समय अपना पूरा जीवन उसे समर्पित कर दें।”
अध्याय इन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 183)
- लोग किन-किन प्रकार की गतिविधियों में शामिल होते हैं?
- हमारे दैनिक जीवन में इनका क्या योगदान है?
इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1अनु और कबीर का मोहल्ला
अनु और कबीर पार्क में खेल रहे थे, तभी पड़ोस की गीता मौसी टैक्सी से उतरीं — नौकरी से लौटती हुई, अपनी यूनिफ़ॉर्म में (पृ. 183)। फिर दोनों बच्चे अपने घर के लोगों के बारे में बताने लगे।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1गीता मौसी क्या करती हैं?
पृ. 183।
2कबीर के दादाजी किस बल से सेवानिवृत्त हुए हैं?
पृ. 183।
2आर्थिक और गैर-आर्थिक
ऐसी सभी गतिविधियाँ दो समूहों में बाँटी जाती हैं: आर्थिक गतिविधियाँ और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ (पृ. 185)।
सोचिए (पृ. 187)
कबीर के दादाजी आस-पास के बच्चों को स्वेच्छा से निःशुल्क पढ़ाते हैं। यह आर्थिक गतिविधि है या गैर-आर्थिक? यह आपके अध्यापक के विद्यालय में पढ़ाने से किस तरह अलग है? साथियों से चर्चा कीजिए।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1कृतज्ञता, स्नेह, सेवा और आदर से की जाने वाली गतिविधियाँ कहलाती हैं:
पृ. 186।
2डॉक्टर या वकील को सलाह या सेवा के बदले दिया गया भुगतान:
पृ. 185।
3भुगतान के तरीक़े
काव्या अपनी चाची के गाँव कमलापुर जा रही थी। रास्ते में गाँव के पास एक राजमार्ग (हाइवे) बन रहा था — खुदाई की मशीनें और बुलडोज़र तकनीशियन चला रहे थे (पृ. 188)।
सोचिए (पृ. 189)
आज घर से विद्यालय आते हुए आपने लोगों को कौन-कौन-सी आर्थिक गतिविधियाँ करते देखा? आपके विचार से उन्हें किस तरह भुगतान मिलता होगा?
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1साहिल को आमों के रूप में मिला भुगतान क्या कहलाता है?
पृ. 189।
2नए राजमार्ग से नगर तक का समय कितना हो जाएगा?
पृ. 188।
4मूल्य संवर्धन
आर्थिक गतिविधियों में किसी चीज़ को दूसरे रूप में बदलने के हर चरण पर उसका मूल्य बढ़ता है। इसे मूल्य संवर्धन कहते हैं (पृ. 189)।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1राजेश ₹600 की लकड़ी से कुर्सी बनाकर ₹1,000 में बेचते हैं। उन्होंने कितना मूल्य जोड़ा?
पृ. 190: ₹1,000 − ₹600।
2किसी चीज़ को दूसरे रूप में बदलने के हर चरण पर मूल्य बढ़ना कहलाता है:
पृ. 189।
5सेवा
गैर-आर्थिक गतिविधियों में पैसा शामिल नहीं होता, फिर भी उनसे बनने वाला मूल्य हमारे जीवन में महत्व रखता है (पृ. 191)।
सेवा: निःस्वार्थ सेवा (पृ. 191–192)
मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और गिरजाघरों में सेवा कार्य दिखते हैं। जैसे गुरुद्वारे में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को "लंगर" या सामुदायिक रसोई में निःशुल्क भोजन कराया जाता है। इन सेवा कार्यों से संतुष्टि और कृतज्ञता की अनुभूति होती है, और ये बिना कुछ बदले में चाहे समाज में योगदान देते हैं।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1गुरुद्वारे की सामुदायिक रसोई, जहाँ सबको निःशुल्क भोजन मिलता है, क्या कहलाती है?
पृ. 191।
2सेवा कार्यों से कैसी अनुभूति होती है?
पृ. 192।
6सामुदायिक सहभागिता
सामुदायिक सहभागिता की शक्ति के दो उदाहरण पुस्तक देती है (पृ. 192–193)।
सोचिए (पृ. 193)
त्योहारों पर लोग मिलकर सजावट करते हैं और व्यंजन बनाकर बाँटते हैं। क्या ये गैर-आर्थिक गतिविधियाँ हैं? इनमें कौन-से जीवन-मूल्य छिपे हैं? अपने क्षेत्र की ऐसी सामुदायिक परंपराएँ और विद्यालय के सामुदायिक कार्यक्रम पहचानिए।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1वन महोत्सव किसलिए मनाया जाता है?
पृ. 192–193।
2स्वच्छ भारत अभियान किस पर आधारित है?
पृ. 192।
7सार और अभ्यास
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 193)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
प्रश्न (पृ. 193)
सामुदायिक सेवा गतिविधियों में लगे लोग अत्यधिक सम्माननीय हैं — इस कथन पर टिप्पणी कीजिए। और: अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों के लिए लोगों को किस-किस तरह पारिश्रमिक मिलता है? उदाहरण दीजिए।
आख़िरी जाँच✓ पड़ाव पूरा
1आर्थिक और गैर-आर्थिक गतिविधियों में मुख्य अंतर क्या है?
पृ. 185–186।
2गैर-आर्थिक गतिविधियाँ किसमें योगदान देती हैं?
पृ. 193।
सातों पड़ाव पूरे! अब आप हर काम का मूल्य पहचानते हैं — पैसे वाला भी, सेवा वाला भी।