अध्याय 11आधारभूत लोकतंत्र — भाग 2: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

पाठ योजना15 मिनटस्रोत जाँचे गए

पाठ योजना — चार कालांश

कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 163–172 प्रत्येक कालांश 40 मिनट का माना गया है। श्रुतलेख के खंड-क्रमांक 13-Dictation-Notes.md से मेल खाते हैं — दोनों साथ ले जाइए।

! यह अध्याय 10 का सीधा अगला भाग है — शीर्षक में ही ‘भाग 2’ लिखा है। कालांश 1 अध्याय 10 के पिरामिड से ही शुरू होना चाहिए। वरना बच्चों को पता ही नहीं चलता कि वे उसी पिरामिड के सबसे नीचे वाले हिस्से में उतर रहे हैं।

पूरे अध्याय की रीढ़ — और उसका सबसे बड़ा जाल★★

इस अध्याय में भी एक पिरामिड है, और उसमें भी तीन स्तर हैं। पर वे अध्याय 10 वाले नहीं हैं।

बोर्ड पर दोनों पिरामिड साथ-साथ बनाइए — कालांश 1 में, और अंत तक मत मिटाइए

चित्र 10.4 (पिछला अध्याय)चित्र 11.1 (यह अध्याय)
केंद्र सरकारजिला पंचायत / जिला परिषद
राज्य सरकारखंड पंचायत / पंचायत समिति / मंडल परिषद
स्थानीय सरकारग्राम परिषद / ग्राम पंचायत

★★और यह एक वाक्य कक्षा में कम से कम तीन बार बोलिए

“पिछला पिरामिड पूरे देश का था। यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है।”

! यह भेद न बनाने पर बच्चा परीक्षा में लिखता है — “पंचायती राज के तीन स्तर हैं: केंद्र, राज्य और स्थानीय।” यह इस अध्याय की सबसे आम भूल है।

और दूसरा भेद, जो उतना ही ज़रूरी है

ग्राम सभाग्राम पंचायत
गाँव के सभी वयस्क मतदाताचुने हुए सदस्य
चुनती हैचुनी जाती है
प्रत्यक्ष लोकतंत्रप्रतिनिधि लोकतंत्र

★यह तालिका भी बोर्ड पर रहनी चाहिए। और पुस्तक इसे पृष्ठ 171 पर स्वयं जोड़ देती है — “पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र जनता द्वारा प्रत्यक्ष भागीदारी और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा कार्य करता है।”

कालांश 1 — लक्ष्मणपुर, और पंचायती राज व्यवस्था (पृ. 163–165)

लक्ष्य: विद्यार्थी बता सके कि स्थानीय सरकार क्यों चाहिए, और पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था के तीनों स्तर गिना सके।

समयगतिविधि
0–4 मि.★अध्याय 10 का पिरामिड बोर्ड पर बनाइए (केंद्र, राज्य, स्थानीय) और उसके सबसे नीचे वाले हिस्से पर घेरा लगाइए। कहिए: “पिछले अध्याय में किताब ने वादा किया था कि इसे आगे के दो अध्यायों में समझाएगी। आज हम उसी में उतर रहे हैं — और इस अध्याय में केवल गाँवों की बात होगी। शहरों की बात अगले अध्याय में।”
4–9 मि.गाँधी का उद्धरण पढ़िए — “असली भारत, गाँवों में बसता है।” फिर आँकड़े बोर्ड पर बड़े अक्षरों में: लगभग 6,00,000 गाँव · 8,000 कस्बे · 4,000 से अधिक नगर · जनसंख्या 1.4 अरब पार · दो-तिहाई ग्रामीण। ★‘दो-तिहाई’ पर रुकिए: “तो गाँधी जी की बात आँकड़ों से भी सही निकलती है।” फिर तीन महत्वपूर्ण प्रश्न बोर्ड पर लिखकर छोड़ दीजिए।
9–17 मि.★★लक्ष्मणपुर की कहानी सुनाइए (पढ़कर नहीं — सुनाकर): हिमालय की तराई, 200 घर, लगभग 700 लोग, अधिकांश किसान, कुछ संबंधी सेना में, कुछ युवा नगर चले गए। फिर आवश्यकताएँ कक्षा से निकलवाइए: “ऐसे गाँव को क्या-क्या चाहिए होगा?” — और पुस्तक की तीनों से मिलाइए: खेतों के लिए पानी · खराब सड़क का रख-रखाव · प्राथमिक विद्यालय का रख-रखाव।
17–22 मि.★★अब पुस्तक का निर्णायक प्रश्न पूछिए: “क्या ऐसी हर समस्या के लिए गाँव के लोग राज्य या राष्ट्र की राजधानी जा सकते हैं?” उत्तर आने दीजिए — ‘नहीं’। “तो फिर क्या करें?” और वहीं से ‘पंचायत’ शब्द निकलने दीजिए। ! शब्द पहले मत दीजिए।
22–30 मि.तीन परिभाषाएँ लिखवाइए — पंचायत = ‘पंचायत’ नामक स्थानीय शासन व्यवस्था, जिसे एक ग्रामीण परिषद कह सकते हैं; और ★★पंचायती राज = स्व-शासन का एक रूप। फिर तीन भूमिकाएँ अलग-अलग लिखवाइए — स्थानीय समस्याओं को हल करना · विकास कार्यों को आगे बढ़ाना · सरकारी योजनाओं के लाभ को जनसाधारण तक पहुँचाना।
30–36 मि.★★चित्र 11.1 का पिरामिड बोर्ड पर बनाइए, अध्याय 10 वाले के बग़ल में। तीनों स्तर और सभी नाम लिखिए। फिर वह वाक्य बोलिए: “पिछला पिरामिड पूरे देश का था। यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है।” और शब्द दीजिए — ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली, जो “निम्न से उच्च स्तर तक” कार्य करती है।
36–40 मि.आठ कार्यों की सूची उतरवाइए (बोर्ड से) — कृषि · आवास · सड़कों का रख-रखाव · जल संसाधनों का प्रबंधन · शिक्षा · स्वास्थ्य · सामाजिक कल्याण · सांस्कृतिक गतिविधियाँ। ★फिर लक्ष्मणपुर की तीनों आवश्यकताओं से मिलवाइए — पानी → जल संसाधन; सड़क → सड़कों का रख-रखाव; विद्यालय → शिक्षा।

गृहकार्य: अपने आस-पास के किसी गाँव या मोहल्ले की तीन आवश्यकताएँ लिखिए, और बताइए कि वे आठ कार्यों में से किस-किस के अंतर्गत आती हैं।

कालांश 2 — ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, और तीन सरपंच (पृ. 165–167)

यह अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण कालांश है।

लक्ष्य: विद्यार्थी ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का अंतर स्पष्ट कर सके, और तीनों आदर्श सरपंच के उदाहरण बता सके।

समयगतिविधि
0–4 मि.गृहकार्य सुनिए — आवश्यकताएँ और उनके कार्य-वर्ग। बोर्ड पर जोड़ते जाइए।
4–14 मि.★★★अध्याय का सबसे ज़रूरी भेद। पहले पृष्ठ 165 का चित्र दिखाइए (ग्राम सभा की बैठक) और पूछिए: “कुर्सी पर कौन बैठे हैं और ज़मीन पर कौन?” फिर बताइए — ज़मीन पर बैठे सब लोग मिलकर ग्राम सभा हैं। अब बोर्ड पर दो-स्तंभ वाली तालिका बनवाइए: ग्राम सभा = सभी वयस्क मतदाता, कोई चुनाव नहीं ↔ ग्राम पंचायत = चुने हुए सदस्य। ★और वह एक वाक्य: “ग्राम सभा चुनती है; ग्राम पंचायत चुनी जाती है।”
14–19 मि.★अब अध्याय 10 से जोड़िए (यह जोड़ इस कालांश का शिखर है): “ग्राम सभा में हर वयस्क स्वयं निर्णय में भाग लेता है — यह कौन-सा लोकतंत्र हुआ?” → प्रत्यक्ष। “और ग्राम पंचायत में?” → प्रतिनिधि। “तो एक ही गाँव में दोनों एक साथ चल रहे हैं।” फिर सरपंच/प्रधान लिखवाइए — एक ही पद के दो नाम — और वह पंक्ति: “गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं।”
19–32 मि.★★तीनों आदर्श सरपंच — पृष्ठ 166 का पूरा पृष्ठ दिखाइए। हर कहानी के बाद रुकिए: (1) दयानेश्वर कांबले — 2017, सोलापुर का तरंगफल गाँव, छह अन्य उम्मीदवारों को हराया, आदर्श वाक्य ‘लोक सेवा, ग्राम सेवा’। (2) वंदना बहादुर मैदा — मध्य प्रदेश का खानखांडवी, भील समुदाय, गाँव की पहली महिला सरपंच, शिक्षा एवं स्वच्छता के मुद्दे। (3) पोपटराव बागुजी पवार — हिवरे बाजार, अन्ना हजारे का मॉडल, 2020 में पद्मश्री।
32–37 मि.★अब कक्षा से पूछिए: “इन तीनों में क्या समान है?” उत्तर आने दीजिए। (अपेक्षित दिशा: तीनों किसी न किसी रूप में ‘बाहर’ से आए — और तीनों ने गाँव बदल दिया।) ★और अध्याय 9 से जोड़िए: “हलमा याद है? वहाँ भी जल-संचयन था, वहाँ भी पद्मश्री मिला — 2019 में। यहाँ 2020 में।”
37–40 मि.पंचायत सचिव और पटवारी लिखवाइए — सचिव = बैठकों का आयोजन और अभिलेखों का रख-रखाव · पटवारी = भू-अभिलेखों का रख-रखाव, और कई जगह पीढ़ियों पुराने मानचित्र। ★पूछिए: “क्या ये दोनों चुने जाते हैं?” (नहीं — ये नियुक्त होते हैं। सरपंच चुना जाता है।)

गृहकार्य: आइए विचार करें (पृ. 167) — “क्या ये पुराने मानचित्र हमारे किसी काम आ सकते हैं? क्या यह अतीत और वर्तमान के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं?”

★यह गृहकार्य अध्याय 4 से जुड़ता है — इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत। भू-अभिलेख भी एक ऐतिहासिक स्रोत हैं।

कालांश 3 — बाल हितैषी पंचायत (पृ. 167–169)

यह सबसे आनंददायक कालांश है, क्योंकि यह पूरा बच्चों के बारे में है।

लक्ष्य: विद्यार्थी बाल पंचायत की पहल के तीनों उदाहरण बता सके, और स्वयं एक बाल पंचायत चलाकर दिखा सके।

समयगतिविधि
0–4 मि.गृहकार्य सुनिए — पुराने मानचित्र किस काम आ सकते हैं। (अच्छे उत्तर: पुरानी सीमाएँ, पुराने रास्ते, पुराने तालाब, कौन-सी ज़मीन किसकी थी।)
4–9 मि.पुस्तक की पहली पंक्ति पढ़िए — “पंचायतों को सभी ग्रामवासियों की बात सुननी होती है — जिसमें बच्चे भी सम्मिलित हैं।” ★इस पर रुकिए। फिर बाल सभा और बाल पंचायत शब्द दीजिए, और वह वाक्य: “जहाँ गाँव के बड़े-बुजुर्ग उनकी समस्याओं के समाधान ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं।”
9–15 मि.तीनों उदाहरण, एक-एक करके। महाराष्ट्र — बाल पंचायतों ने बाल-श्रम और बाल-विवाह पर काम किया; सदस्य अभिभावकों को समझाते हैं कि बच्चों को पुन: विद्यालय भेजें, बालिकाओं को पढ़ाएँ, और पढ़ने की आयु में विवाह न करें। सिक्किम — सांगखू राधू खांडू, पश्चिमी सिक्किम: विद्यालयों के परिसर की दीवारें और रसोईघर (मध्याह्न भोजन के लिए) → बाल हितैषी ग्राम पंचायत घोषित।
15–24 मि.★★राजस्थान की ‘बाल संसद’ — बंकर रॉय, ‘बेयरफुट कॉलेज’, 8–14 वर्ष के बच्चे, रात्रि विद्यालय, संसद जैसे चुनाव, मतदाता पहचान-पत्र और प्रचार-प्रसार, निर्वाचित प्रतिनिधि ‘मंत्रिमंडल’ बनाते हैं, जो विद्यालय प्रबंधन का निरीक्षण करता है। ★और 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड।
24–36 मि.★★★पृष्ठ 169 की गतिविधि — इसे सचमुच कीजिए, यह इस अध्याय का सबसे अच्छा काम है। चार-पाँच विद्यार्थी ‘बाल पंचायत’ बनें; बाक़ी पूरी कक्षा ‘ग्राम सभा’ बने। (★यहीं कालांश 2 का भेद काम आता है — यह ज़रूर कहिए।) ग्राम सभा तीन समस्याएँ रखे; बाल पंचायत समाधान सुझाए। समय पर नज़र रखिए — 12 मिनट पर्याप्त हैं।
36–40 मि.★चर्चा समेटिए। बोर्ड पर लिखिए कि कक्षा ने कौन-सी समस्याएँ उठाईं और कौन-से समाधान सुझाए। फिर पुस्तक का निष्कर्ष पढ़िए — “ये पहल बच्चों में नेतृत्व के गुण और सामाजिक जागरूकता को विकसित करती है, जिससे बच्चे सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने में समर्थ होते हैं और परिवर्तन की पैरोकारी कर सकते हैं।”

गृहकार्य: अपनी बाल पंचायत की एक संक्षिप्त ‘कार्यवाही’ लिखिए — कौन-सी तीन समस्याएँ उठीं, और हर एक के लिए क्या सुझाया गया।

कालांश 4 — ऊपर के दो स्तर, अर्थशास्त्र, और समापन (पृ. 169–172)

लक्ष्य: विद्यार्थी पंचायत समिति और जिला परिषद की भूमिका बता सके, आरक्षण का प्रावधान बता सके, और पूरे अध्याय को अध्याय 10 से जोड़ सके।

समयगतिविधि
0–4 मि.गृहकार्य सुनिए — बाल पंचायत की कार्यवाही। दो-तीन पढ़वाइए।
4–13 मि.★पंचायत समिति (खंड स्तर) — “ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी”। ! और यह वाक्य ज़रूर पढ़िए: सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं, “परंतु उसमें क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य भी हो सकते हैं।” ★‘विधान सभा के सदस्य’ पर रुकिए: “यह शब्द पिछले अध्याय में आया था — विधायक। यानी स्तर आपस में जुड़े हुए हैं, कटे हुए नहीं।”
13–20 मि.तीन काम लिखवाइए — (1) सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके जिला या राज्य स्तर पर प्रस्तुत करना; (2) धनराशि के आवंटन में मदद — जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना; (3) कड़ी बनना। ★ग्राम सड़क योजना पर रुकिए और लक्ष्मणपुर की ओर लौटिए: “याद है, पहले दिन लक्ष्मणपुर की खराब सड़क की बात हुई थी? उसका उत्तर यह है।”
20–27 मि.★★आरक्षण। लिखवाइए: तीनों स्तरों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे वंचित वर्गों के लिए विशेष नियम; और एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित। ★फिर तीनों को जोड़िए — “गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं” + वंदना बहादुर मैदा + एक-तिहाई आरक्षण। “ये तीन अलग बातें नहीं हैं — ये एक ही कहानी के तीन हिस्से हैं।” फिर आइए विचार करें पर चर्चा (वंचित वर्गों पर अधिक ध्यान क्यों)। ! यह मत का प्रश्न है — खुला रहने दीजिए।
27–33 मि.★अर्थशास्त्र वाला बॉक्स। कौटिल्य / चाणक्य · लगभग 2300 वर्ष पहले। ग्रंथ में क्या है — राज्य का गठन, संचालन, अर्थव्यवस्था, शासक के कर्तव्य, युद्ध। फिर चारों प्रवर्ग बोर्ड पर: संग्रहण = 10 गाँव · करवाटिका = 100 · द्रोणमुख = 400 · स्थानीय = 800। ★और पुस्तक का प्रश्न पूछिए: “आधुनिक भाषा में हम इन चारों को क्या नाम देंगे?” ! पर यह मत कहिए कि आज की पंचायत इसी से ‘निकली’ है — पुस्तक भी नहीं कहती।
33–40 मि.★★समापन — और यही पूरे दो अध्यायों को बाँधता है। ‘आगे बढ़ने से पहले’ के तीनों बिंदु पढ़िए, और दूसरे पर रुकिए: “पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र जनता द्वारा प्रत्यक्ष भागीदारी और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा कार्य करता है।” फिर बोर्ड की उस तालिका की ओर लौटिए जो कालांश 2 में बनी थी — ग्राम सभा ↔ ग्राम पंचायत। “किताब ने वही बात यहाँ लिख दी है।” और अंत में: “अगले अध्याय में हम शहरों की स्थानीय सरकार पढ़ेंगे।”

गृहकार्य: प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ (पृ. 171) के चारों प्रश्न। विशेषकर दूसरा — सरपंच को पत्र। और पृष्ठ 172 का ‘नूडल्स’ पृष्ठ: चित्र 11.1 का पिरामिड अपने हाथ से बनाइए, तीनों स्तरों के सभी नामों के साथ।

मूल्यांकन का क्रम

कबक्या
कालांश 2 के बाद06-Flashcards.md के समूह 1–7 से मौखिक प्रश्नोत्तरी
कालांश 3 के बाद15-Student-Worksheet.md का भाग क और ख
कालांश 4 के बाद05-Question-Bank.md से लिखित परीक्षा
अलग से08-PARAKH-Question-Bank.md — योग्यता-आधारित, नए प्रकरणों पर

पूर्व-ज्ञान — किन अध्यायों से जुड़ता है

अध्यायकड़ी
★★अध्याय 10चित्र 10.4 का पिरामिड और ‘आधारभूत लोकतंत्र’ की परिभाषा — यह अध्याय उसी का विस्तार है; प्रत्यक्ष ↔ प्रतिनिधि लोकतंत्र; विधायक
अध्याय 9हलमा और जल-संचयन ↔ हिवरे बाजार; समुदाय के अलिखित नियम ↔ स्व-शासन
अध्याय 8एक चीज़, अनेक नाम ↔ चित्र 11.1 में हर स्तर के दो-तीन नाम
अध्याय 4ऐतिहासिक स्रोत ↔ पटवारी के पीढ़ियों पुराने मानचित्र
आगे — अध्याय 12नगरीय क्षेत्रों की स्थानीय सरकार

आवश्यक सामग्री

  • बोर्ड का एक कोना या चार्ट पेपर — दोनों पिरामिड साथ-साथ (चित्र 10.4 और 11.1), और ग्राम सभा ↔ ग्राम पंचायत वाली तालिका; चारों कालांश टँगी रहें
  • पृष्ठ 165 का चित्र (ग्राम सभा की बैठक) — कालांश 2 के लिए अनिवार्य
  • पृष्ठ 166 का पूरा पृष्ठ (तीनों सरपंच) — कालांश 2 के लिए
  • पृष्ठ 168 का चित्र (बच्चों की सभा) — कालांश 3 के लिए
  • भारत का मानचित्र — महाराष्ट्र (सोलापुर, अहमदनगर) · मध्य प्रदेश · पश्चिमी सिक्किम · राजस्थान दिखाने के लिए
  • कालांश 3 की गतिविधि के लिए खुली जगह या कुर्सियों की एक घेरेदार व्यवस्था, यदि संभव हो