अध्याय 1पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

इंटरैक्टिव अध्याय35 मिनट

NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 1 (पृ. 7–26)।

नक्शा खोलिए, ग्लोब घुमाइए, घड़ी चलाइए

शुरुआत

इस पन्ने पर अध्याय पढ़ना नहीं, करना है। हर पड़ाव पर कुछ घुमाइए, कुछ टैप कीजिए, और आख़िर में एक छोटी जाँच। सातों पड़ाव पूरे कीजिए तो पूरा अध्याय आपके हाथ में होगा।

“पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है।”

— आर्यभट्ट (लगभग 500 सा.सं.) — अध्याय का आरंभ, पृ. 7

अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 7)

  1. मानचित्र क्या है और हम इसका उपयोग कैसे करते हैं? इसके मुख्य घटक क्या हैं?
  2. निर्देशांक क्या हैं? पृथ्वी पर किसी स्थान को अंकित करने के लिए अक्षांश और देशांतर का उपयोग कैसे किया जा सकता है?
  3. देशांतर से स्थानीय समय और मानक समय कैसे संबंधित हैं?

एक वाक्य में पूरा अध्यायपृथ्वी पर हर स्थान की स्थिति दो संख्याओं — अक्षांश और देशांतर — से ठीक-ठीक बताई जा सकती है, और देशांतर से ही समय भी तय होता है।

आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।

1मानचित्र: दूरी, दिशा, प्रतीक

मानचित्र किसी भी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है। इसमें सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे ऊपर से देख रहे हों (पृ. 9)। हर मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं — दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।

दूरीदिशाप्रतीक चिह्न

झील

यह हमारा बनाया एक काल्पनिक कस्बा है, पुस्तक का चित्र 1.1 नहीं। स्केल: 1 खाना = 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर (पुस्तक के लघु नगर वाला स्केल, पृ. 9–10)।

चार प्रधान दिशाएँ — ऊपर उत्तर, फिर घड़ी की सुई की तरह पूर्व, दक्षिण, पश्चिम। बीच की चार मध्यवर्ती दिशाएँ हैं (पृ. 10)।

खेल का मैदान, तीन स्केल पर

पुस्तक का क्रियाकलाप (पृ. 10): 40 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा मैदान, 1 सेंटीमीटर = 10 मीटर के स्केल पर बनाइए और विकर्ण नापिए। नीचे स्केल बदलकर देखिए — कागज़ पर मैदान छोटा-बड़ा होता है, असली मैदान नहीं।

मीटर

प्रतीक चिह्नों के संक्षेप

बड़े नगर या देश के नक्शे पर हर भवन का चित्र बनाने की जगह नहीं होती, इसलिए चिह्न लगाते हैं — थोड़ी जगह में बहुत सारी बात (पृ. 11)। भारत में चिह्नों का संकलन भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तय किया है। चित्र 1.2 के ये चार संक्षेप जोड़िए — पहले बाईं ओर, फिर दाईं ओर टैप कीजिए।

जाँच पड़ाव

  1. 1मानचित्र के तीन मुख्य घटक कौन-से हैं?

  2. 2मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह को क्या कहते हैं?

  3. 3पर्वत, महासागर और नदियाँ मुख्य रूप से कौन-सा मानचित्र दिखाता है?

2गोल पृथ्वी, चपटा कागज़

पृथ्वी लगभग गोलाकार है — पूरी गोल नहीं, ध्रुवों पर थोड़ी चपटी (पृ. 12)। गोल चीज़ को समतल कागज़ पर ज्यों का त्यों उतारना संभव नहीं।

संतरे का प्रयोग (पृ. 12)

पुस्तक कहती है: संतरे को छीलिए कि छिलके के तीन-चार टुकड़े बनें, फिर उन्हें मेज़ पर चपटा कीजिए। स्लाइडर खिसकाकर यही देखिए।

  • ग्लोब एक गोल आकृति है जिस पर मानचित्र बना होता है — धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड का।
  • ग्लोब चंद्रमा, मंगल ग्रह, तारों और तारा-मंडल का भी हो सकता है।
  • ग्लोब और पृथ्वी का आकार एक-सा है, इसलिए ग्लोब समतल मानचित्र से बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।

जाँच पड़ाव

  1. 1समतल मानचित्र की तुलना में ग्लोब पृथ्वी को बेहतर क्यों दिखाता है?

  2. 2पृथ्वी की आकृति कैसी है?

3निर्देशांक

दो संख्याओं से किसी जगह को ठीक-ठीक बताने को निर्देशांक प्रणाली कहते हैं। पुस्तक यह विचार दो रोज़मर्रा के उदाहरणों से बनाती है (पृ. 12–13)। मानचित्र पर भी यही प्रणाली चलती है।

बाजार की दुकान

पुस्तक का वाक्य: "प्रवेश द्वार से 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान पर सायं 6 बजे मुझसे मिलें।"

प्रवेश द्वार से 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान पर टैप कीजिए।

654321▲ प्रवेश द्वार

शतरंज का पटल

खानों पर अक्षर "क" से "ज" तक और अंक 1 से 8 तक। पुस्तक के चित्र में सफ़ेद पक्ष का प्यादा "घ" 2 से "घ" 4 पर गया है (पृ. 12–13)।

87654321कखगघङचछज

जाँच पड़ाव

  1. 1शतरंज के पटल पर खानों के नाम किनसे बनते हैं?

  2. 2किसी स्थान को ठीक-ठीक बताने के लिए निर्देशांक प्रणाली में कितने मान चाहिए?

4अक्षांश और देशांतर

ग्लोब को उँगली से घुमाइए, या नीचे के स्लाइडर चलाइए। अक्षांश भूमध्य रेखा से दूरी का माप है, देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का (पृ. 13–15)। दोनों मिलकर किसी जगह के दो निर्देशांक हैं।

आप यहाँ हैं29° उ., 77° पू.

इस अक्षांश का वृत्त, भूमध्य रेखा के सामने

ध्रुव की ओर बढ़िए — वृत्त छोटा होता जाता है। सबसे बड़ा वृत्त भूमध्य रेखा है (पृ. 13–14)।

अक्षांश और जलवायु (पृ. 14)

भूमध्य रेखा के आसपास — गरम (उष्ण)भूमध्य रेखा से दूर, ध्रुव की ओर — शीतोष्णध्रुव के पास — शीत (ठंडी)

पुस्तक इन तीनों के बीच कोई पक्की सीमा-रेखा नहीं देती, इसलिए यहाँ रंग धीरे-धीरे बदलता है।

पुस्तक की जगहें और रेखाएँ

भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटती है; प्रमुख याम्योत्तर पूर्वी और पश्चिमी में (चित्र 1.4, पृ. 16)।

सही या गलत? (अभ्यास प्र. 7)

  1. अक्षांशों के सभी समानांतरों की लंबाई समान होती है।

  2. देशांतर के एक याम्योत्तर की लंबाई भूमध्य रेखा की आधी होती है।

  3. दक्षिण ध्रुव का अक्षांश 90° द. है।

  4. भूमध्य रेखा एक अक्षांश वृत्त भी है।

जाँच पड़ाव

  1. 1अक्षांश किससे दूरी का माप है?

  2. 2प्रमुख याम्योत्तर को अंतर्राष्ट्रीय मानक किस वर्ष माना गया?

  3. 3देशांतर की रेखाएँ (याम्योत्तर) कैसी होती हैं?

5उज्जयिनी की मध्य रेखा

ग्रिनिच याम्योत्तर पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर नहीं है। यूरोप से कई शताब्दी पहले भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर थी — मध्य रेखा — जो उज्जयिनी (आज का उज्जैन) से गुज़रती थी (पृ. 16)।

देशांतर की पट्टी: ग्रिनिच से भारत तक

020406080100ग्रिनिच 0°65°70°75°80°85°90°95°100°उज्जयिनी75.8° पू.दिल्ली77° पू.भारत 68°–97° पू.

पट्टी पैमाने पर है, पर यह नक्शा नहीं — सिर्फ़ पुस्तक में दिए देशांतर। भारत का फैलाव 68° पू. से 97° पू. (पृ. 18); उज्जयिनी याम्योत्तर 75.8° पू. (चित्र 1.5, पृ. 17)।

  • उज्जैन कई शताब्दियों तक खगोल विद्या का प्रतिष्ठित केंद्र रहा।
  • लगभग 1500 वर्ष पहले खगोलविद वराहमिहिर यहीं रहे और काम किया।
  • भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश-देशांतर से परिचित थे।
  • उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं का प्रमुख संदर्भ बन गया।

पुराना नाम, आज का नाम (चित्र 1.5)

मध्य रेखा पर बसे जिन नगरों का खगोलीय ग्रंथों में उल्लेख है, उनके नाम जोड़िए।

चित्र 1.5 में कुछ नगर रेखा के बहुत पास हैं, कुछ थोड़ा हटकर — क्योंकि देशांतर नापने के लिए सही समय रखना पड़ता है, और तब यह आज जितना सटीक नहीं था (पृ. 16)।

जाँच पड़ाव

  1. 1भारत की प्राचीन प्रमुख याम्योत्तर को क्या कहते थे?

  2. 2चित्र 1.5 में उज्जयिनी याम्योत्तर का देशांतर कितना है?

6देशांतर से समय

पृथ्वी 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है, यानी 360°। तो हर घंटे 15° — क्योंकि 15 × 24 = 360 (पृ. 19)। इसी से देशांतर समय बताने लगता है।

पृथ्वी को घुमाइए

यह पृथ्वी उत्तर ध्रुव के ऊपर से दिख रही है। सूरज दाईं ओर है — जिस याम्योत्तर पर सूरज सामने है, वहाँ दोपहर 12 बजे। स्लाइडर से पृथ्वी घुमाइए और चारों जगहों का स्थानीय समय देखिए।

  • ग्रिनिच
  • दिल्ली
  • टोक्यो
  • न्यूयॉर्क

हिसाब: 15° = 1 घंटा, तो 1° = 60 ÷ 15 = 4 मिनट। पूर्व की ओर समय जुड़ता है, पश्चिम की ओर घटता है।

ये स्थानीय समय हैं — सूरज के हिसाब से। देश की घड़ियाँ मानक समय चलाती हैं, जो नीचे है।

पुस्तक की सीढ़ी (पृ. 19)

ग्रिनिच पर दोपहर 12 बजे हों तो —

  1. 30° प.प्रातः 10
  2. 15° प.प्रातः 11
  3. 0°दोपहर 12
  4. 15° पू.दोपहर 1
  5. 30° पू.दोपहर 2

देशांतर का अंतर → समय का अंतर

अंतर डालिए, घंटे निकलिए। पुस्तक के दो सवाल और उसका 15° वाला नियम बटनों पर हैं।

स्थानीय समय और मानक समय

हर शहर अपना स्थानीय समय चलाए तो एक देश में कई घड़ियाँ हो जाएँ — यह ठीक नहीं। इसलिए अधिकतर देश अपने बीच से गुज़रने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय अपनाते हैं (पृ. 20)। भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.), ग्रिनिच मीन टाइम (जी.एम.टी.) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

पोरबंदर (गुजरात)
+2 घंटे
तिनसुकिया (असम)

तिनसुकिया का स्थानीय समय पोरबंदर से 2 घंटे आगे।

घड़ियों पर लिखा समय सिर्फ़ उदाहरण है; पुस्तक दोनों शहरों का अंतर देती है, घड़ी का समय नहीं।

जी.एम.टी. से आई.एस.टी.

लंदन (ग्रिनिच) की घड़ी चलाइए। अभ्यास प्र. 2: लंदन में दोपहर 12 बजे, भारत में सायं 5:30।

ग्रिनिच (जी.एम.टी.)

भारत (आई.एस.टी.)

समय क्षेत्रों का नक्शा (चित्र 1.8 और 1.9)

हर पट्टी एक समय क्षेत्र है। उस पर लिखी संख्या बताती है कि वहाँ की घड़ी ग्रिनिच से कितने घंटे आगे (+) या पीछे (−) है: + हो तो जी.एम.टी. में जोड़िए, − हो तो घटाइए (पृ. 20)। किसी पट्टी पर टैप कीजिए या स्लाइडर चलाइए।

−11−10−9−8−7−6−5−4−3−2−10+1+2+3+4+5+6+7+8+9+10+11−12+12भारत
बीच में ग्रिनिच (0°)। संख्याएँ बारी-बारी से ऊपर और नीचे लिखी हैं।

प्रमुख याम्योत्तर (0°)अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

ग्रिनिच

यहाँ पट्टियाँ सीधी 15° की हैं, जैसे चित्र 1.7 में। असली समय क्षेत्रों की रेखाएँ देशों की सीमाओं के साथ मुड़ती हैं (पृ. 20), इसलिए किसी देश का समय इस नक्शे से मत पढ़िए। सीमाएँ नहीं बनाई गई हैं।

बहुत छोटे द्वीप इस नाप के नक्शे पर नहीं दिखते। तट-रेखाएँ: नेचुरल अर्थ (सार्वजनिक डेटा)।

टेढ़ी रेखाएँ, कई क्षेत्र

समय क्षेत्र मोटे तौर पर 15° की पट्टियाँ हैं, पर उनकी रेखाएँ सीधी नहीं — वे देशों की सीमाओं के साथ चलती हैं (पृ. 20)। और हर देश में एक ही मानक समय हो, ज़रूरी नहीं: संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं (पृ. 21)।

रूस में पूर्व से पश्चिम की यात्रा

क्षेत्र 1 / 11 · घड़ी 0 बार बदली

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

प्रमुख याम्योत्तर के ठीक उलटी ओर, लगभग 180° पर। +12 और −12 समय क्षेत्र यहीं एक-दूसरे को छूते हैं। इसे पार करते ही तिथि एक दिन बदल जाती है (पृ. 21–22)।

नाव को खींचिए या स्लाइडर चलाइए। या पहले अंदाज़ा लगाइए: रेखा पार होते ही नाव पर कौन-सा दिन होगा? उत्तर चुनते ही नाव चल पड़ेगी।

−11−10−9−8−7+7+8+9+10+11180°+12−12तिथि रेखासोमवार

नाव पश्चिम में है, वहाँ सोमवार है। पूर्व की ओर रेखा पार करेगी तो कौन-सा दिन होगा?

पुस्तक का नियम (पृ. 22)

पूर्व की ओर पार कीजिए → एक दिन घटाइए

पश्चिम की ओर पार कीजिए → एक दिन जोड़िए

रेखा टेढ़ी-मेढ़ी चलती है, ताकि किसी देश के भीतर एक ही दिन दो तिथियों में न बँटे (पृ. 22)।

रेखा जिन छोटे द्वीपों के पास से मुड़ती है, उनमें से कई इस नाप के नक्शे पर नहीं दिखते। तट-रेखाएँ: नेचुरल अर्थ (सार्वजनिक डेटा)।

जाँच पड़ाव

  1. 1पृथ्वी एक घंटे में कितने अंश घूमती है?

  2. 2आई.एस.टी., जी.एम.टी. से कितना आगे है?

  3. 3तिथि रेखा को पूर्व की ओर से पार करने पर —

7सार और आख़िरी जाँच

पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 22–23)

हर कार्ड पर टैप कीजिए। पहले खुद याद कीजिए, फिर पलटिए।

आख़िरी जाँच

  1. 1रूस में कितने समय क्षेत्र हैं?

  2. 2भारत का अक्षांशीय विस्तार लगभग कितना है?

  3. 3दिल्ली और बेंगलुरु का देशांतर लगभग एक (77° पू.) है। उनके स्थानीय समय में अंतर?