नक्शा खोलिए, ग्लोब घुमाइए, घड़ी चलाइए
शुरुआत
इस पन्ने पर अध्याय पढ़ना नहीं, करना है। हर पड़ाव पर कुछ घुमाइए, कुछ टैप कीजिए, और आख़िर में एक छोटी जाँच। सातों पड़ाव पूरे कीजिए तो पूरा अध्याय आपके हाथ में होगा।

“पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है।”
अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 7)
- मानचित्र क्या है और हम इसका उपयोग कैसे करते हैं? इसके मुख्य घटक क्या हैं?
- निर्देशांक क्या हैं? पृथ्वी पर किसी स्थान को अंकित करने के लिए अक्षांश और देशांतर का उपयोग कैसे किया जा सकता है?
- देशांतर से स्थानीय समय और मानक समय कैसे संबंधित हैं?
एक वाक्य में पूरा अध्यायपृथ्वी पर हर स्थान की स्थिति दो संख्याओं — अक्षांश और देशांतर — से ठीक-ठीक बताई जा सकती है, और देशांतर से ही समय भी तय होता है।
आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1मानचित्र: दूरी, दिशा, प्रतीक
मानचित्र किसी भी क्षेत्र का प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है। इसमें सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे ऊपर से देख रहे हों (पृ. 9)। हर मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं — दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।
दूरीदिशाप्रतीक चिह्न
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1मानचित्र के तीन मुख्य घटक कौन-से हैं?
पृ. 9: दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न — इसी क्रम में याद रखिए।
2मानचित्रों की पुस्तक या संग्रह को क्या कहते हैं?
पृ. 9: एटलस यानी मानचित्रावली।
3पर्वत, महासागर और नदियाँ मुख्य रूप से कौन-सा मानचित्र दिखाता है?
पृ. 9: भौतिक मानचित्र प्राकृतिक आकृतियाँ दिखाता है; राजनैतिक सीमाएँ और नगर।
2गोल पृथ्वी, चपटा कागज़
पृथ्वी लगभग गोलाकार है — पूरी गोल नहीं, ध्रुवों पर थोड़ी चपटी (पृ. 12)। गोल चीज़ को समतल कागज़ पर ज्यों का त्यों उतारना संभव नहीं।
- ग्लोब एक गोल आकृति है जिस पर मानचित्र बना होता है — धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड का।
- ग्लोब चंद्रमा, मंगल ग्रह, तारों और तारा-मंडल का भी हो सकता है।
- ग्लोब और पृथ्वी का आकार एक-सा है, इसलिए ग्लोब समतल मानचित्र से बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।
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1समतल मानचित्र की तुलना में ग्लोब पृथ्वी को बेहतर क्यों दिखाता है?
पृ. 12: आकार एक समान होने से ग्लोब बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।
2पृथ्वी की आकृति कैसी है?
पृ. 12: लगभग गोलाकार — ध्रुवों पर थोड़ी चपटी।
3निर्देशांक
दो संख्याओं से किसी जगह को ठीक-ठीक बताने को निर्देशांक प्रणाली कहते हैं। पुस्तक यह विचार दो रोज़मर्रा के उदाहरणों से बनाती है (पृ. 12–13)। मानचित्र पर भी यही प्रणाली चलती है।
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1शतरंज के पटल पर खानों के नाम किनसे बनते हैं?
पृ. 12–13: एक अक्षर और एक अंक — दो निर्देशांक।
2किसी स्थान को ठीक-ठीक बताने के लिए निर्देशांक प्रणाली में कितने मान चाहिए?
पृ. 13: दो निर्देशांकों से दुकान और शतरंज का खाना, दोनों तय हो जाते हैं।
4अक्षांश और देशांतर
ग्लोब को उँगली से घुमाइए, या नीचे के स्लाइडर चलाइए। अक्षांश भूमध्य रेखा से दूरी का माप है, देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का (पृ. 13–15)। दोनों मिलकर किसी जगह के दो निर्देशांक हैं।
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1अक्षांश किससे दूरी का माप है?
पृ. 13: अक्षांश = भूमध्य रेखा से दूरी का माप।
2प्रमुख याम्योत्तर को अंतर्राष्ट्रीय मानक किस वर्ष माना गया?
पृ. 15: वर्ष 1884 में कुछ देशों ने ग्रिनिच याम्योत्तर को मानक माना।
3देशांतर की रेखाएँ (याम्योत्तर) कैसी होती हैं?
पृ. 14–15: याम्योत्तर एक ध्रुव से दूसरे तक जाने वाले अर्धवृत्त हैं।
5उज्जयिनी की मध्य रेखा
ग्रिनिच याम्योत्तर पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर नहीं है। यूरोप से कई शताब्दी पहले भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर थी — मध्य रेखा — जो उज्जयिनी (आज का उज्जैन) से गुज़रती थी (पृ. 16)।
- उज्जैन कई शताब्दियों तक खगोल विद्या का प्रतिष्ठित केंद्र रहा।
- लगभग 1500 वर्ष पहले खगोलविद वराहमिहिर यहीं रहे और काम किया।
- भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश-देशांतर से परिचित थे।
- उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं का प्रमुख संदर्भ बन गया।
चित्र 1.5 में कुछ नगर रेखा के बहुत पास हैं, कुछ थोड़ा हटकर — क्योंकि देशांतर नापने के लिए सही समय रखना पड़ता है, और तब यह आज जितना सटीक नहीं था (पृ. 16)।
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1भारत की प्राचीन प्रमुख याम्योत्तर को क्या कहते थे?
पृ. 16: मध्य रेखा, जो उज्जयिनी से गुज़रती थी।
2चित्र 1.5 में उज्जयिनी याम्योत्तर का देशांतर कितना है?
पृ. 17: 75.8° पू.
6देशांतर से समय
पृथ्वी 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है, यानी 360°। तो हर घंटे 15° — क्योंकि 15 × 24 = 360 (पृ. 19)। इसी से देशांतर समय बताने लगता है।
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1पृथ्वी एक घंटे में कितने अंश घूमती है?
पृ. 19: 360° ÷ 24 घंटे = 15° प्रति घंटा।
2आई.एस.टी., जी.एम.टी. से कितना आगे है?
पृ. 20: 5 घंटे 30 मिनट आगे।
3तिथि रेखा को पूर्व की ओर से पार करने पर —
पृ. 22: पूर्व की ओर से — एक दिन घटाइए (सोमवार से रविवार)।
7सार और आख़िरी जाँच
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 22–23)
हर कार्ड पर टैप कीजिए। पहले खुद याद कीजिए, फिर पलटिए।
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1रूस में कितने समय क्षेत्र हैं?
पृ. 21: रूस में 11, संयुक्त राज्य अमेरिका में 6।
2भारत का अक्षांशीय विस्तार लगभग कितना है?
पृ. 18: लगभग 8° उ. से 37° उ.; 68°–97° तो देशांतर है।
3दिल्ली और बेंगलुरु का देशांतर लगभग एक (77° पू.) है। उनके स्थानीय समय में अंतर?
अभ्यास प्र. 6: समय देशांतर से तय होता है, अक्षांश से नहीं।
सातों पड़ाव पूरे! अब रिवीजन नोट्स और प्रश्न बैंक से पक्का कीजिए।