सफ़र कीजिए, चढ़िए, खोदिए, बहाइए
शुरुआत
ज़मीन हर जगह एक जैसी नहीं होती — कहीं ऊँचे पर्वत, कहीं समतल ऊँचा पठार, कहीं दूर तक फैला मैदान। इस अध्याय में देखिए कि ये स्थलरूप कैसे दिखते हैं, कैसे बनते हैं, और वहाँ के लोग कैसे जीते हैं।

“मनुष्यों के भार से मुक्त; अनेक प्रकार की ऊँचाइयों, ढलानों तथा विशाल समतल भूमि से युक्त … पृथ्वी मेरी माता है तथा मैं उसकी संतान।”
अध्याय इन दो प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 41)
- स्थलरूपों के प्रमुख प्रकार कौन-से हैं और जीवन तथा संस्कृति के लिए इनका क्या महत्व है?
- प्रत्येक स्थलरूप के साथ संबंधित जीवन की क्या चुनौतियाँ एवं अवसर हैं?
स्थलरूप किसे कहते हैं? (पृ. 42)
स्थलरूप पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप है। स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं। इन्हें मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है — पर्वत, पठार और मैदान।
इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1एक यात्रा, तीन स्थलरूप
पुस्तक एक सफ़र से शुरू करती है: झारखंड के छोटा नागपुर क्षेत्र से सड़क से चलकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, और फिर उत्तराखंड में अल्मोड़ा तक। रास्ते में तीन अलग-अलग स्थलरूप मिलते हैं (पृ. 42)। स्लाइडर से बस चलाइए।
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1स्थलरूपों की तीन मुख्य श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
पृ. 42: पर्वत, पठार और मैदान।
2मैदान सामान्यतः समुद्र तल से कितने मीटर से अधिक ऊँचे नहीं होते?
पृ. 53: सामान्यतः 300 मीटर से अधिक नहीं।
2पर्वत
पर्वत आस-पास की भूमि से काफ़ी ऊँचे होते हैं। कम ऊँचे, कम खड़ी ढलान और गोल शिखर वाले ऊँचे स्थानों को पहाड़ी कहते हैं (पृ. 42–43)। ऊँचे पर्वतों पर हिम जमी रहती है; कम ऊँचाई पर गर्मी में हिम पिघलकर नदियों में पहुँचती है।
एवरेस्ट: 8,848 मीटर (पृ. 51)
विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत। तिब्बती लोग इसे "चोमोलुंगमा" (जगत जननी) कहते हैं, नेपाली "सागरमाथा" (आकाश की देवी)। तिब्बत का कैलाश पर्वत हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्म के लोगों के लिए पवित्र है।
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1कम ऊँचाई, कम खड़ी ढलान और गोल शिखर वाले ऊँचे स्थान को क्या कहते हैं?
पृ. 43: इन्हें पहाड़ी कहते हैं।
2अरावली जैसे पर्वत गोलाकार क्यों हैं?
पृ. 46: बहुत पुराने हैं और अपरदन से गोल हो गए हैं।
3दक्षिण भारत का सबसे ऊँचा पर्वत कौन-सा है?
पृ. 45: अनाईमुडी (केरल), जिसे "अनाई शिखर" भी कहते हैं।
3पर्वत पर चढ़िए
पर्वत पर ऊपर चढ़िए और देखिए कि पेड़-पौधे कैसे बदलते हैं (पृ. 46)। स्लाइडर को नीचे से ऊपर ले जाइए।
तुंगता (एल्टीट्यूड)
समुद्र तल से किसी वस्तु की ऊँचाई — पर्वत की, उड़ती चिड़िया की, विमान की या उपग्रह की (पृ. 42)।
पर्वतों के कुछ जीव-जंतु (चित्र 3.4, पृ. 47–48)
गोल्डन ईगल · पेरेग्रिन फाल्कन · कैनेडियन लिंक्स · हिम तेंदुआ · आइबेक्स · हिमालयन तहर · पर्वतीय खरगोश · याक · ग्रे फॉक्स · भालू
ध्यान रखें: गंगा (पृ. 48)
हिमालय से निकलने वाली नदियों में गंगा सबसे बड़ी है — लगभग 2,500 कि.मी. लंबी। यमुना और घाघरा जैसी सहायक नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं; सोन विंध्याचल से निकलती है।
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1पर्वतीय वन में कौन-से पेड़ आम हैं?
पृ. 46: शंकुधारी पेड़ — चीड़, फर, स्प्रूस, देवदार।
2ढलान को काटकर सीढ़ियाँ बनाकर की जाने वाली खेती क्या कहलाती है?
पृ. 48–49: वेदिका (सीढ़ीदार) कृषि।
4पर्वतीय जीवन
पर्वतों पर जीवन में अवसर भी हैं और चुनौतियाँ भी (पृ. 49–50)। स्वच्छ हवा और सुंदर दृश्य पर्यटकों को खींचते हैं, पर बहुत ज़्यादा पर्यटक आएँ तो नाज़ुक पर्वतीय पर्यावरण पर दबाव पड़ता है।
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1एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला कौन थीं?
पृ. 49: बछेंद्री पाल, 1984 में।
2"बादल फटना" का अर्थ क्या है?
पृ. 50 की परिभाषा।
5पठार
पठार आस-पास की भूमि से उठा होता है और ऊपर से लगभग चपटा; कुछ किनारे खड़ी ढलान वाले होते हैं। ऊँचाई कुछ सौ मीटर से कई हज़ार मीटर तक हो सकती है (पृ. 51)।
तिब्बत का पठार — "विश्व की छत" (पृ. 51)
विश्व का सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा पठार। औसत ऊँचाई 4,500 मीटर। पूर्व से पश्चिम लगभग 2,500 किलोमीटर — यानी चंडीगढ़ से कन्याकुमारी जितना।
दक्कन का पठार (पृ. 51)
मध्य और दक्षिण भारत का पठार, विश्व के सबसे पुराने पठारों में से एक — लाखों वर्ष पहले ज्वालामुखी की सक्रियता से बना। ऐसे लावा पठारों में अक्सर उपजाऊ काली मिट्टी होती है (पृ. 52)।
पठार पर खेती? (पृ. 52)
कई पठारों की मिट्टी चट्टानी है, इसलिए वे मैदानों से कम उपजाऊ हैं। अपवाद: लावा पठार, जिनकी काली मिट्टी उपजाऊ होती है।
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1विश्व का सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा पठार कौन-सा है?
पृ. 51: तिब्बत का पठार, "विश्व की छत"।
2पठारों को क्या कहा गया है?
पृ. 51: खनिजों का भंडार-गृह।
3नोहकालीकाई जल प्रपात किस पठार से गिरता है?
पृ. 52: चेरापूंजी पठार से 340 मीटर नीचे।
6मैदान
मैदान विस्तृत, सपाट या हल्का लहरदार धरातल होता है — कोई ऊँची पहाड़ी या गहरी घाटी नहीं। सामान्यतः समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक ऊँचा नहीं (पृ. 53)।
गंगा का मैदान: हर 4 भारतीयों में 1 से अधिक (पृ. 54–55)
लगभग 40 करोड़ लोग — भारत की कुल जनसंख्या के एक-चौथाई से अधिक — गंगा के मैदान में रहते हैं। हज़ारों वर्ष पहले आरंभिक सभ्यताएँ भी नदियों के उपजाऊ मैदानों के पास ही विकसित हुई थीं।
संगम स्थल (पृ. 55)
दो या अधिक नदियों के मिलने का स्थान। बहुत से समुदाय नदी के स्रोत और संगम को पवित्र मानते हैं; मैदान की हल्की ढलान से नौका चलाना आसान होता है।
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1नदियाँ जो चट्टानों के कण, रेत और गाद लाती हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
पृ. 53: तलछट।
2गंगा के मैदान में लगभग कितने लोग रहते हैं?
पृ. 55: लगभग 40 करोड़, भारत की जनसंख्या के एक-चौथाई से अधिक।
3सिंचाई बढ़ने से कौन-सी चुनौती आई?
पृ. 55: भूमिगत जलस्तर में गिरावट।
7मरुस्थल और टिनै
तीन मुख्य स्थलरूपों के अलावा विशेषज्ञ कुछ और भी बताते हैं, जैसे मरुस्थल — बहुत कम वर्षा वाले बड़े सूखे क्षेत्र, जिनके पेड़-पौधे और जीव-जंतु विलक्षण होते हैं (पृ. 56)।
थार और हम (पृ. 56)
थार में रहने वाले या वहाँ से गुज़रने वाले समुदायों ने लोकगीतों और किंवदंतियों जैसी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर सँजोई है। कठिन हालात में भी ढल जाना — यही मानव का लचीलापन है।
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1इनमें से ठंडा मरुस्थल कौन-सा है?
पृ. 56: गोबी (एशिया)।
2तमिल टिनै "मरुदम" किस दृश्यभूमि का है?
पृ. 57: उपजाऊ कृषि के मैदान — कृषि।
8सार और अभ्यास
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 57)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
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1तिब्बत के पठार की औसत ऊँचाई कितनी है?
पृ. 51: 4,500 मीटर।
2गंगा नदी लगभग कितनी लंबी है?
पृ. 48: लगभग 2,500 कि.मी.।
3दक्कन का पठार कैसे बना?
पृ. 51: लाखों वर्ष पहले ज्वालामुखी की सक्रियता से।
आठों पड़ाव पूरे! अब अभ्यास प्र. 1 पर सोचिए: आपका गाँव या शहर किस स्थलरूप पर है?