अध्याय 6भारतीय सभ्यता का प्रारंभ

इंटरैक्टिव अध्याय40 मिनट

NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 6 (पृ. 85–104)।

नगर बसाइए, जलाशय नापिए, मुहर गढ़िए

शुरुआत

लगभग 2600 सा.सं.पू. से उत्तर-पश्चिम भारत में ईंटों के सुनियोजित नगर, सड़कों के नीचे नालियाँ और समुद्र पार तक व्यापार था। इस अध्याय में भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता को खोलकर देखिए।

(2600 सा.सं.पू. से 2024 तक: 2600 + 2024 − 1 = 4,623 वर्ष — अध्याय 4 का हिसाब।)

“भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता, जो हड़प्पा, सिंधु अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जानी जाती है, वास्तव में कई मायनों में एक अनूठी सभ्यता थी… संक्षेप में, हड़प्पा के सामाजिक परिदृश्य में शोषण नहीं, बल्कि आपसी सामंजस्य दिखाई देता है।”

— बी.बी. लाल — अध्याय का आरंभ, पृ. 85

अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 85)

  1. सभ्यता क्या है?
  2. भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता कौन-सी थी?
  3. उसकी मुख्य उपलब्धियाँ क्या थीं?

पहला चित्र (पृ. 85)

धौलावीरा के "किला" क्षेत्र का उत्तरी प्रवेश द्वार।

इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।

1सभ्यता क्या है?

अध्याय 4 के अंत में हमने देखा कि मनुष्य एक जगह बसने लगे, खेती करने लगे, कुछ तकनीकें (भवन निर्माण, धातु विज्ञान, यातायात) विकसित कीं। "सभ्यता" शब्द मानव समाज के उन्नत चरण के लिए आता है। पुस्तक कहती है कि एक सभ्यता में कम से कम ये सात विशेषताएँ होनी चाहिए (पृ. 86)।

सभ्यता के सात लक्षण

हर लक्षण पर टैप कीजिए — वह नगर के चित्र में जगह ले लेगा।

हर लक्षण पर टैप कीजिए — वह नगर के चित्र में जगह ले लेगा।

चित्र हमारा बनाया है।

सभ्यता कब शुरू हुई? (पृ. 87)

विश्व के अलग-अलग भागों में अलग-अलग समय पर। मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक और सीरिया) में लगभग 6,000 वर्ष पहले, और उसके कुछ शताब्दियों बाद प्राचीन मिस्र में। सिंधु-सरस्वती सभ्यता का समय: लगभग 2600 से 1900 सा.सं.पू. (चित्र 6.2)।

जाँच पड़ाव

  1. 1पुस्तक के अनुसार सभ्यता की इनमें से कौन-सी विशेषता है?

  2. 2मेसोपोटामिया में सभ्यता लगभग कब शुरू हुई?

2गाँव से नगर

पंजाब (आज भारत और पाकिस्तान में बँटा) और सिंध (अब पाकिस्तान में) के विशाल मैदानों को सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियाँ सींचती हैं, जिससे वे उपजाऊ बने। थोड़ा पूर्व में, कुछ सहस्राब्दियों पहले, सरस्वती नदी हिमालय की तलहटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ भागों से होकर बहती थी (पृ. 88)।

गाँव से नगर, नगर से महानगर

स्लाइडर से समय आगे बढ़ाइए।

चित्र हमारा बनाया है और सिर्फ़ विचार दिखाता है; तिथियाँ पुस्तक की हैं।

एक सभ्यता, कई नाम (पृ. 88)

पुरातत्ववेत्ताओं ने इसे सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता, सिंधु-सरस्वती सभ्यता जैसे नाम दिए; पुस्तक सभी का प्रयोग करती है। निवासी "हड़प्पावासी" कहलाते हैं, क्योंकि हड़प्पा (आज पाकिस्तान का पंजाब) इस सभ्यता का पहला उत्खनित नगर था — 1920–21 में। हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो की पहचान 1924 में हुई (पृ. 88, 90)।

"घाटी" शब्द क्यों नहीं? (पृ. 91)

शुरू में सिंधु के मैदानों में स्थल मिलने से इसे "सिंधु घाटी सभ्यता" कहा गया। अब हम जानते हैं कि यह सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली थी।

मानचित्र पर नगर (चित्र 6.3, पृ. 89)

तालिका के पाँचों नगर इस मानचित्र पर ढूँढिए, फिर नीचे उन्हें आज के राज्य या प्रदेश से जोड़िए। पुस्तक के चित्र की तरह, पर्वत श्रृंखलाओं से बनी प्राकृतिक सीमाएँ भी देखिए।

हड़प्पाकालीबंगाराखीगढ़ीगँवेरीवालामोहनजो-दड़ोधौलावीरालोथलहिंदुकुशसुलेमान श्रेणीहिमालयअरावली श्रेणीसिंधु नदीसरस्वती नदी
यह मानचित्र आज की कोई सीमा नहीं दिखाता, ठीक पुस्तक के मानचित्र की तरह। नाम और उनकी जगहें चित्र 6.3 (पृ. 89) से हैं, और सरस्वती नदी की रेखा भी वहीं से उतारी गई है। चित्र की बाकी छोटी बस्तियाँ यहाँ नहीं हैं।

Relief map: Natural Earth (public domain).

नगर और आज का राज्य/प्रदेश (पृ. 90)

पुस्तक की तालिका: हर हड़प्पाई नगर को आज के राज्य या प्रदेश से जोड़िए।

सरस्वती नदी (पृ. 90–91)

दोनों समय देखिए।

ऋग्वेद में सरस्वती को देवी के रूप में, और पर्वत से निकलकर समुद्र तक बहने वाली नदी के रूप में — दोनों तरह पूजा गया है। बाद के ग्रंथों में इसके सूखने और अंत में लुप्त होने का वर्णन है।

इसकी द्रोणी (बेसिन) में दो महानगर — राखीगढ़ी और गँवेरीवाला — और फरमाना (हरियाणा), कालीबंगा (राजस्थान), बनावली (हरियाणा) जैसे कई छोटे नगर हैं।

चित्र हमारा बनाया है और सिर्फ़ विचार दिखाता है।

जाँच पड़ाव

  1. 1इसके निवासियों को "हड़प्पावासी" क्यों कहते हैं?

  2. 2आज सरस्वती नदी भारत में किस नाम से जानी जाती है?

3नगर-योजना

बड़े हड़प्पाई नगर सुनियोजित योजना से बने थे (पृ. 91)। नीचे एक नगर का सरल चित्र है — किसी एक असली नगर का नक्शा नहीं, बल्कि पुस्तक में बताई गई बातों को एक जगह दिखाता है।

नगर में घूमिए

चमकते बिंदुओं पर टैप कीजिए।

चमकते बिंदुओं पर टैप कीजिए।

  1. 1किलेबंदी
  2. 2ऊपरी नगर
  3. 3निचला नगर
  4. 4चौड़ी सड़कें
  5. 5गोदाम
  6. 6घर
  7. 7नालियाँ
  8. 8कुआँ

चित्र हमारा बनाया है; किसी एक नगर का नक्शा नहीं।

मोहनजो-दड़ो का महास्नानागार (पृ. 91–93)

लगभग 12 × 7 मीटर का एक छोटा पर विस्तृत कुंड। ईंटों पर जल रोकने के लिए प्राकृतिक बिटुमन (डामर) की परत, चारों ओर छोटे कमरे — एक में कुआँ — और कोने में पानी खाली करने की नाली, ताकि समय-समय पर साफ़ पानी भरा जा सके। चित्र के हिस्सों पर टैप कीजिए।

यह किसलिए बना होगा?

पुरातत्ववेत्ताओं की तीन व्याख्याएँ हैं (पृ. 93)। हर एक पर टैप करके देखिए पुस्तक क्या कहती है।

याद रखिए: यहाँ इतिहास के दूसरे स्रोत हैं ही नहीं — न कोई शिलालेख, न कोई ग्रंथ, न किसी यात्री का विवरण (पृ. 93)।

जाँच पड़ाव

  1. 1ऊपरी नगर में संभवतः कौन रहते थे?

  2. 2महास्नानागार के "सार्वजनिक स्नानागार" होने की व्याख्या क्यों नहीं मानी जाती?

4जल प्रबंधन

हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे (पृ. 94)। मोहनजो-दड़ो में ईंटों से बने लगभग 700 कुएँ गिने गए हैं — लगता है उनका नियमित रख-रखाव हुआ और कई शताब्दियों तक वे काम आए (अभ्यास प्र. 7, पृ. 104)। धौलावीरा (गुजरात, कच्छ के रन में) में पत्थरों से, और चट्टान काटकर भी, कम से कम छह विशाल जलाशय बने; अधिकांश भूमिगत नालियों से जुड़े थे (पृ. 95)।

नापिए और तुलना कीजिए (पृ. 95)

पुस्तक का क्रियाकलाप: फ़ीते से अपनी कक्षा की लंबाई नापिए और यहाँ मीटर में लिखिए।

  • आपकी कक्षा8 मी
  • महास्नानागार (मोहनजो-दड़ो) (पृ. 91)12 मी
  • चट्टान काटकर बना जलाशय (धौलावीरा) (पृ. 95)33 मी
  • सबसे बड़ा जलाशय (धौलावीरा) (पृ. 95)73 मी
  • विशाल बेसिन (लोथल) (पृ. 98)217 मी

महास्नानागार की लंबाई "लगभग 12 मीटर" है; बाक़ी तीनों पुस्तक की संख्याएँ।

आइए विचार करें (पृ. 96)

इतने जलाशय बनाने में बहुत श्रमिक लगे होंगे। उन्हें निर्देश किसने दिए? मज़दूरी कैसे मिली (संकेत: तब आज जैसी मुद्रा नहीं थी)? सफ़ाई और रख-रखाव का ज़िम्मा किसका था? पुस्तक कहती है — पुरातत्ववेत्ता भी इन प्रश्नों पर चर्चा करते हैं, और उत्तर हमेशा निर्णायक नहीं होते।

जाँच पड़ाव

  1. 1धौलावीरा का सबसे बड़ा जलाशय कितना लंबा था?

  2. 2हड़प्पाई नालियाँ सामान्यतः कहाँ चलती थीं?

5हड़प्पावासी क्या खाते थे?

हड़प्पावासियों ने अपनी कई बस्तियाँ नदियों के किनारे बसाईं — जल के लिए भी, और इसलिए भी कि नदियाँ आस-पास की भूमि उपजाऊ बनाती हैं। यूरेशिया में कपास उगाने वाले वे सबसे पहले थे, और उससे कपड़ा बुनते थे। उन्होंने हल सहित खेती के उपकरण बनाए (पृ. 96)।

हड़प्पा की रसोई: पता कैसे चला?

हर खाने की चीज़ को उस प्रमाण के डिब्बे में डालिए जिससे उसका पता चला।

आइए पता लगाएँ (पृ. 97)

मान लीजिए आप हड़प्पा के एक घर में खाना बना रहे हैं। ऊपर की चीज़ों से आप कौन-से व्यंजन बनाएँगे?

जाँच पड़ाव

  1. 1यूरेशिया में सबसे पहले कौन-सी फ़सल हड़प्पावासियों ने उगाई?

  2. 2बर्तनों की जाँच में कौन-सा "अप्रत्याशित" अवशेष मिला?

6सक्रिय व्यापार

हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के नगरों से ही नहीं, भारत के भीतर और बाहर की दूसरी सभ्यताओं से भी सक्रिय व्यापार करते थे — स्थल मार्ग, नदियाँ, और दूर के लिए समुद्री रास्ते। यह भारत की पहली गहन समुद्री गतिविधि थी (पृ. 97–98)।

क्या भेजा, क्या मँगाया?

हर वस्तु को सही डिब्बे में डालिए।

लोथल का बेसिन (पृ. 98)

गुजरात की छोटी बस्ती लोथल में 217 मीटर लंबा और 36 मीटर चौड़ा बेसिन — लंबाई फ़ुटबॉल के दो मैदानों से थोड़ी अधिक। यहाँ बंदरगाह जैसी संरचना रही होगी, जहाँ नावों से सामान आता-जाता था।

अपनी मुहर गढ़िए

इतने बड़े व्यापार में व्यापारियों को अपना सामान — और एक-दूसरे को — पहचानना था। खुदाई में हज़ारों छोटी मुहरें मिली हैं: मुलायम पत्थर स्टीऐटाइट की, गरम करके कठोर बनाई गईं, सिर्फ़ कुछ सेंटीमीटर की। ऊपर लेखन के कुछ संकेत, नीचे किसी पशु का चित्र (पृ. 98–99)। पशु चुनिए।

मुहर का चित्र हमारा बनाया है; संकेत असली लिपि के नहीं। असली मुहरें पुस्तक के चित्र 6.13 में देखिए।

तांबा + टिन = ?

हड़प्पावासी मुलायम धातु तांबे की कारीगरी में कुशल थे (पृ. 98)। भट्टी में धातुएँ डालिए।

जाँच पड़ाव

  1. 1हड़प्पाई मुहरें किस पत्थर की बनी थीं?

  2. 2तांबे में टिन मिलाने से क्या बनता है?

7अंत या नई शुरुआत?

प्राचीन जीवन: वस्तुएँ पहचानिए (पृ. 100–101)

पुस्तक इन्हें दो समूहों में रखती है। हर वस्तु को सही समूह में डालिए।

1900 सा.सं.पू. के आस-पास, सारी उपलब्धियों के बावजूद, इस सभ्यता का ह्रास हो गया। नगर एक-एक करके खाली होते गए; जो रहे, उन्होंने बदले वातावरण में ग्रामीण जीवन अपनाया। लगता है पहले वाला शासन या प्रशासन नहीं रहा। हड़प्पावासी सैकड़ों, शायद हज़ारों, छोटी बस्तियों में बिखर गए (पृ. 102)।

ह्रास क्यों हुआ? प्रमाण जाँचिए

हर कारण को सही डिब्बे में डालिए।

अंत, या नई शुरुआत? (पृ. 103)

नगर लुप्त हो गए, पर हड़प्पा की संस्कृति और तकनीक का बड़ा भाग बचा रहा और भारतीय सभ्यता के अगले चरण तक पहुँचा।

पूरी कहानी, क्रम से

सबसे पुरानी घटना सबसे ऊपर।

▲ सबसे पुरानी

  1. 12200 सा.सं.पू. से — जलवायु बदली, वर्षा घटी
  2. 21920–21 सा.सं. — हड़प्पा का उत्खनन
  3. 33500 सा.सं.पू. से — गाँव कस्बे बनने लगे
  4. 4लगभग 1900 सा.सं.पू. — नगर खाली होने लगे
  5. 5लगभग 2600 सा.सं.पू. — कस्बे नगर बने

▼ सबसे नई

जाँच पड़ाव

  1. 1सिंधु-सरस्वती सभ्यता का ह्रास लगभग कब हुआ?

  2. 2नगर छोड़कर लोग कहाँ गए?

8सार और अभ्यास

पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 103)

पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।

चर्चा के लिए (अभ्यास, पृ. 103–104)

  1. इस सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं? उनका महत्व क्या है?
  2. हड़प्पा से कालीबंगा तक जाना हो, तो आपके पास कौन-कौन से रास्ते हैं? हर एक में कितना समय लगेगा?
  3. हड़प्पा का कोई व्यक्ति आज की भारतीय रसोई में आ जाए तो उसे कौन-सी चार-पाँच बातें सबसे ज़्यादा चौंकाएँगी?
  4. धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली कैसी सोच दिखाती है?
  5. कहा जाता है कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। क्या आप सहमत हैं? आज के महानगरों से तुलना कीजिए।

आख़िरी जाँच

  1. 1इनमें से कौन-सा इस सभ्यता का नाम नहीं है?

  2. 2लोथल का बेसिन किस काम आता होगा?

  3. 3हड़प्पाई नगरों के ज़्यादातर भवन किससे बने थे?