नगर बसाइए, जलाशय नापिए, मुहर गढ़िए
शुरुआत
लगभग 2600 सा.सं.पू. से उत्तर-पश्चिम भारत में ईंटों के सुनियोजित नगर, सड़कों के नीचे नालियाँ और समुद्र पार तक व्यापार था। इस अध्याय में भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता को खोलकर देखिए।
(2600 सा.सं.पू. से 2024 तक: 2600 + 2024 − 1 = 4,623 वर्ष — अध्याय 4 का हिसाब।)

“भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता, जो हड़प्पा, सिंधु अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जानी जाती है, वास्तव में कई मायनों में एक अनूठी सभ्यता थी… संक्षेप में, हड़प्पा के सामाजिक परिदृश्य में शोषण नहीं, बल्कि आपसी सामंजस्य दिखाई देता है।”
अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 85)
- सभ्यता क्या है?
- भारतीय उपमहाद्वीप की आरंभिक सभ्यता कौन-सी थी?
- उसकी मुख्य उपलब्धियाँ क्या थीं?
पहला चित्र (पृ. 85)
धौलावीरा के "किला" क्षेत्र का उत्तरी प्रवेश द्वार।
इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1सभ्यता क्या है?
अध्याय 4 के अंत में हमने देखा कि मनुष्य एक जगह बसने लगे, खेती करने लगे, कुछ तकनीकें (भवन निर्माण, धातु विज्ञान, यातायात) विकसित कीं। "सभ्यता" शब्द मानव समाज के उन्नत चरण के लिए आता है। पुस्तक कहती है कि एक सभ्यता में कम से कम ये सात विशेषताएँ होनी चाहिए (पृ. 86)।
सभ्यता कब शुरू हुई? (पृ. 87)
विश्व के अलग-अलग भागों में अलग-अलग समय पर। मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक और सीरिया) में लगभग 6,000 वर्ष पहले, और उसके कुछ शताब्दियों बाद प्राचीन मिस्र में। सिंधु-सरस्वती सभ्यता का समय: लगभग 2600 से 1900 सा.सं.पू. (चित्र 6.2)।
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1पुस्तक के अनुसार सभ्यता की इनमें से कौन-सी विशेषता है?
पृ. 86: अभिलेख रखने और संवाद के लिए लेखन का कोई रूप।
2मेसोपोटामिया में सभ्यता लगभग कब शुरू हुई?
पृ. 87: लगभग 6,000 वर्ष पहले।
2गाँव से नगर
पंजाब (आज भारत और पाकिस्तान में बँटा) और सिंध (अब पाकिस्तान में) के विशाल मैदानों को सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियाँ सींचती हैं, जिससे वे उपजाऊ बने। थोड़ा पूर्व में, कुछ सहस्राब्दियों पहले, सरस्वती नदी हिमालय की तलहटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ भागों से होकर बहती थी (पृ. 88)।
एक सभ्यता, कई नाम (पृ. 88)
पुरातत्ववेत्ताओं ने इसे सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता, सिंधु-सरस्वती सभ्यता जैसे नाम दिए; पुस्तक सभी का प्रयोग करती है। निवासी "हड़प्पावासी" कहलाते हैं, क्योंकि हड़प्पा (आज पाकिस्तान का पंजाब) इस सभ्यता का पहला उत्खनित नगर था — 1920–21 में। हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो की पहचान 1924 में हुई (पृ. 88, 90)।
"घाटी" शब्द क्यों नहीं? (पृ. 91)
शुरू में सिंधु के मैदानों में स्थल मिलने से इसे "सिंधु घाटी सभ्यता" कहा गया। अब हम जानते हैं कि यह सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली थी।
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1इसके निवासियों को "हड़प्पावासी" क्यों कहते हैं?
पृ. 88: 1920–21 में पहला उत्खनित नगर।
2आज सरस्वती नदी भारत में किस नाम से जानी जाती है?
पृ. 90: भारत में घग्गर, पाकिस्तान में हाकरा।
3नगर-योजना
बड़े हड़प्पाई नगर सुनियोजित योजना से बने थे (पृ. 91)। नीचे एक नगर का सरल चित्र है — किसी एक असली नगर का नक्शा नहीं, बल्कि पुस्तक में बताई गई बातों को एक जगह दिखाता है।
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1ऊपरी नगर में संभवतः कौन रहते थे?
पृ. 91: संभवतः अभिजात वर्ग।
2महास्नानागार के "सार्वजनिक स्नानागार" होने की व्याख्या क्यों नहीं मानी जाती?
पृ. 93: नगर के अधिकांश घरों में स्नानागार थे।
4जल प्रबंधन
हड़प्पावासी जल प्रबंधन और स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे (पृ. 94)। मोहनजो-दड़ो में ईंटों से बने लगभग 700 कुएँ गिने गए हैं — लगता है उनका नियमित रख-रखाव हुआ और कई शताब्दियों तक वे काम आए (अभ्यास प्र. 7, पृ. 104)। धौलावीरा (गुजरात, कच्छ के रन में) में पत्थरों से, और चट्टान काटकर भी, कम से कम छह विशाल जलाशय बने; अधिकांश भूमिगत नालियों से जुड़े थे (पृ. 95)।
आइए विचार करें (पृ. 96)
इतने जलाशय बनाने में बहुत श्रमिक लगे होंगे। उन्हें निर्देश किसने दिए? मज़दूरी कैसे मिली (संकेत: तब आज जैसी मुद्रा नहीं थी)? सफ़ाई और रख-रखाव का ज़िम्मा किसका था? पुस्तक कहती है — पुरातत्ववेत्ता भी इन प्रश्नों पर चर्चा करते हैं, और उत्तर हमेशा निर्णायक नहीं होते।
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1धौलावीरा का सबसे बड़ा जलाशय कितना लंबा था?
पृ. 95: 73 मीटर।
2हड़प्पाई नालियाँ सामान्यतः कहाँ चलती थीं?
पृ. 94: सड़कों के नीचे।
5हड़प्पावासी क्या खाते थे?
हड़प्पावासियों ने अपनी कई बस्तियाँ नदियों के किनारे बसाईं — जल के लिए भी, और इसलिए भी कि नदियाँ आस-पास की भूमि उपजाऊ बनाती हैं। यूरेशिया में कपास उगाने वाले वे सबसे पहले थे, और उससे कपड़ा बुनते थे। उन्होंने हल सहित खेती के उपकरण बनाए (पृ. 96)।
आइए पता लगाएँ (पृ. 97)
मान लीजिए आप हड़प्पा के एक घर में खाना बना रहे हैं। ऊपर की चीज़ों से आप कौन-से व्यंजन बनाएँगे?
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1यूरेशिया में सबसे पहले कौन-सी फ़सल हड़प्पावासियों ने उगाई?
पृ. 96: कपास।
2बर्तनों की जाँच में कौन-सा "अप्रत्याशित" अवशेष मिला?
पृ. 97: हल्दी, अदरक, केला अप्रत्याशित; दुग्ध उत्पाद अपेक्षित।
6सक्रिय व्यापार
हड़प्पावासी अपनी सभ्यता के नगरों से ही नहीं, भारत के भीतर और बाहर की दूसरी सभ्यताओं से भी सक्रिय व्यापार करते थे — स्थल मार्ग, नदियाँ, और दूर के लिए समुद्री रास्ते। यह भारत की पहली गहन समुद्री गतिविधि थी (पृ. 97–98)।
लोथल का बेसिन (पृ. 98)
गुजरात की छोटी बस्ती लोथल में 217 मीटर लंबा और 36 मीटर चौड़ा बेसिन — लंबाई फ़ुटबॉल के दो मैदानों से थोड़ी अधिक। यहाँ बंदरगाह जैसी संरचना रही होगी, जहाँ नावों से सामान आता-जाता था।
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1हड़प्पाई मुहरें किस पत्थर की बनी थीं?
पृ. 98–99: मुलायम पत्थर स्टीऐटाइट।
2तांबे में टिन मिलाने से क्या बनता है?
पृ. 98: कांस्य, जो तांबे से कठोर है।
7अंत या नई शुरुआत?
1900 सा.सं.पू. के आस-पास, सारी उपलब्धियों के बावजूद, इस सभ्यता का ह्रास हो गया। नगर एक-एक करके खाली होते गए; जो रहे, उन्होंने बदले वातावरण में ग्रामीण जीवन अपनाया। लगता है पहले वाला शासन या प्रशासन नहीं रहा। हड़प्पावासी सैकड़ों, शायद हज़ारों, छोटी बस्तियों में बिखर गए (पृ. 102)।
अंत, या नई शुरुआत? (पृ. 103)
नगर लुप्त हो गए, पर हड़प्पा की संस्कृति और तकनीक का बड़ा भाग बचा रहा और भारतीय सभ्यता के अगले चरण तक पहुँचा।
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1सिंधु-सरस्वती सभ्यता का ह्रास लगभग कब हुआ?
पृ. 102: 1900 सा.सं.पू. के आस-पास।
2नगर छोड़कर लोग कहाँ गए?
पृ. 102: सैकड़ों, शायद हज़ारों, छोटी ग्रामीण बस्तियों में।
8सार और अभ्यास
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 103)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
चर्चा के लिए (अभ्यास, पृ. 103–104)
- इस सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं? उनका महत्व क्या है?
- हड़प्पा से कालीबंगा तक जाना हो, तो आपके पास कौन-कौन से रास्ते हैं? हर एक में कितना समय लगेगा?
- हड़प्पा का कोई व्यक्ति आज की भारतीय रसोई में आ जाए तो उसे कौन-सी चार-पाँच बातें सबसे ज़्यादा चौंकाएँगी?
- धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली कैसी सोच दिखाती है?
- कहा जाता है कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। क्या आप सहमत हैं? आज के महानगरों से तुलना कीजिए।
आख़िरी जाँच✓ पड़ाव पूरा
1इनमें से कौन-सा इस सभ्यता का नाम नहीं है?
पृ. 88: पहले तीनों इसी सभ्यता के नाम हैं; मेसोपोटामिया अलग सभ्यता है (पृ. 87)।
2लोथल का बेसिन किस काम आता होगा?
पृ. 98: बंदरगाह जैसी संरचना।
3हड़प्पाई नगरों के ज़्यादातर भवन किससे बने थे?
पृ. 91: सामान्यतः ईंटें; धौलावीरा में नींव पत्थरों की।
आठों पड़ाव पूरे! अब अभ्यास प्र. 2 आज़माइए: इस सभ्यता की उपलब्धियों पर 150–200 शब्दों की रिपोर्ट।
