कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 163–172 परीक्षा से एक दिन पहले यही पढ़िए। सब कुछ यहाँ है, और क्रम में है।
एक पंक्ति में पूरा अध्याय
गाँव के लोग हर छोटी बात के लिए राजधानी नहीं जा सकते — इसलिए शासन उनके पास आ जाता है, तीन स्तरों पर, और उसे चलाने वाले वे स्वयं होते हैं। यही ‘स्व-शासन’ है।
यह तालिका याद कर लीजिए — यही पूरा अध्याय है★★
| स्तर | संस्था का नाम |
|---|---|
| जिला स्तर | जिला पंचायत / जिला परिषद |
| खंड स्तर | खंड पंचायत / पंचायत समिति / मंडल परिषद |
| ग्राम स्तर | ग्राम परिषद / ग्राम पंचायत |
यह ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली कहलाती है, और यह “निम्न से उच्च स्तर तक” कार्य करती है।
!! सबसे बड़ी भूल — दो पिरामिड मिला देना
चित्र 10.4 (पिछला अध्याय) चित्र 11.1 (यह अध्याय) केंद्र · राज्य · स्थानीय जिला · खंड · ग्राम पूरे देश के स्तर केवल पंचायती राज के स्तर ★एक वाक्य में: पिछला पिरामिड पूरे देश का था; यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है।
1. अध्याय का आरंभ (पृ. 163)
उद्धरण
“असली भारत, गाँवों में बसता है।” — मोहनदास करमचंद गाँधी
तीन महत्वपूर्ण प्रश्न
- पंचायती राज संस्थाएँ क्या हैं?
- उनके क्या कार्य हैं?
- शासन और लोकतंत्र में ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आँकड़े — सबसे परीक्षा-योग्य★★
| क्या | कितना |
|---|---|
| गाँव | लगभग 6,00,000 |
| कस्बे | 8,000 |
| नगर | 4,000 से अधिक |
| जनसंख्या | लगभग 1.4 अरब पार |
| ★ग्रामीण क्षेत्रों में | दो-तिहाई भाग |
और पुस्तक का प्रश्न: “इस प्रकार की विविधता वाले समाज में हम अपना शासन किस प्रकार चलाते हैं?”
★यह अध्याय केवल गाँवों के बारे में है — “अगले अध्याय में हम नगरीय क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे।”
2. लक्ष्मणपुर (पृ. 164)★
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | हिमालय की तराई में बसा एक छोटा-सा गाँव |
| घर | 200 |
| जनसंख्या | लगभग 700 |
| अधिकांश लोग | कृषक — अपनी भूमि पर खेती; गाय या बकरियाँ पालते हैं |
| कुछ संबंधी | सेना में |
| कुछ युवा | आजीविका की खोज में नगर चले गए |
गाँव की तीन आवश्यकताएँ — शब्दश:
- खेतों के लिए पानी
- भारी वर्षा से खराब हुई मुख्य सड़क का रख-रखाव
- गाँव के प्राथमिक विद्यालय का रख-रखाव
और निर्णायक प्रश्न★★
“क्या ऐसी प्रत्येक समस्याओं के लिए गाँव के लोग राज्य या राष्ट्र की राजधानी जा सकते हैं?”
उत्तर: नहीं। और इसीलिए स्थानीय सरकार चाहिए।
3. पंचायती राज व्यवस्था (पृ. 164)★★
तीन परिभाषाएँ — शब्दश:
पंचायत — “‘पंचायत’ नामक स्थानीय शासन व्यवस्था, जिसे एक ग्रामीण परिषद कह सकते हैं।”
पंचायत करती क्या है — “पंचायत, शासन को लोगों के समीप लाती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी संभव बनाती है।”
★★और इसीलिए — “पंचायती व्यवस्था, जिसे पंचायती राज के नाम से भी जाना जाता है, स्व-शासन का एक रूप है।”
पंचायत की तीन भूमिकाएँ
- स्थानीय समस्याओं को हल करने में
- विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में
- सरकारी योजनाओं के लाभ को जनसाधारण तक पहुँचाने में
★‘स्व-शासन’ अध्याय 10 की ‘आधारभूत लोकतंत्र’ वाली परिभाषा का ही दूसरा नाम है।
4. त्रिस्तरीय प्रणाली और आठ कार्य (पृ. 165)★
“पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों — ग्राम, खंड और जिला स्तर — पर निम्न से उच्च स्तर तक कार्य करती है। यह ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली कहलाती है।”
आठ कार्य — पुस्तक की पूरी सूची
कृषि · आवास · सड़कों का रख-रखाव · जल संसाधनों का प्रबंधन · शिक्षा · स्वास्थ्य · सामाजिक कल्याण · सांस्कृतिक गतिविधियाँ
★लक्ष्मणपुर से मिलाइए: पानी → जल संसाधन · सड़क → सड़कों का रख-रखाव · विद्यालय → शिक्षा
5. ग्राम सभा और ग्राम पंचायत — अध्याय का सबसे बड़ा भेद (पृ. 165)★★★
| ग्राम सभा | ग्राम पंचायत | |
|---|---|---|
| कौन है | मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का समूह | चुने हुए सदस्यों की परिषद |
| कैसे बनती है | कोई चुनाव नहीं — मतदाता होना ही सदस्यता है | ग्राम सभा उसे सीधे चुनती है |
| वहाँ क्या होता है | स्त्री एवं पुरुष सभी मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं और निर्णय लेते हैं | प्रमुख का चयन, और गाँव के काम |
| प्रमुख | — | सरपंच या प्रधान |
| कौन-सा लोकतंत्र | प्रत्यक्ष | प्रतिनिधि |
★★एक वाक्य में: ग्राम सभा चुनती है; ग्राम पंचायत चुनी जाती है।
और पुस्तक की वह पंक्ति: “गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं।”
★‘सरपंच’ और ‘प्रधान’ एक ही पद के दो नाम हैं।
6. आदर्श सरपंच — तीन उदाहरण (पृ. 166)★
(क) दयानेश्वर कांबले — महाराष्ट्र
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कब | 2017 |
| कहाँ | सोलापुर जिले का तरंगफल गाँव |
| समुदाय | किन्नर |
| आदर्श वाक्य | ‘लोक सेवा, ग्राम सेवा’ — “गाँव की सेवा, जनता की सेवा है” |
| ★चुनाव | छह अन्य उम्मीदवारों को हराया |
(ख) वंदना बहादुर मैदा — मध्य प्रदेश
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | खानखांडवी गाँव |
| समुदाय | भील |
| क्या किया | पितृसत्तात्मक मान्यताओं के विरुद्ध जाकर गाँव की पहली महिला सरपंच बनीं |
| फिर | गाँव की महिलाओं को सभा की बैठकों में आने के लिए प्रेरित किया |
| मुद्दे | शिक्षा एवं स्वच्छता |
| पुस्तक का निष्कर्ष | ”…महिलाएँ ग्रामीण भारत को बदलने में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकती हैं।” |
(ग) पोपटराव बागुजी पवार — महाराष्ट्र
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | अहमदनगर जिले का गाँव हिवरे बाजार |
| समस्या | बार-बार सूखा और कम कृषि उपज |
| क्या किया | अन्ना हजारे के वर्षा जल-संचयन, जल-संरक्षण और लाखों पेड़ लगाने के मॉडल को लागू किया |
| कैसे | उनके प्रयास और ग्रामवासियों के सहयोग से |
| परिणाम | “कुछ ही वर्षों में हरा-भरा और समृद्ध गाँव बन गया” |
| सम्मान | 2020 में पद्मश्री |
★अध्याय 9 से जोड़: वहाँ हलमा था (भील समुदाय, झाबुआ, महेश शर्मा, पद्मश्री 2019); यहाँ हिवरे बाजार है (पोपटराव पवार, पद्मश्री 2020)।
7. पंचायत सचिव और पटवारी (पृ. 167)
| पंचायत सचिव | पटवारी | |
|---|---|---|
| क्या करता है | बैठकों का आयोजन और अभिलेखों का रख-रखाव | गाँव के भू-अभिलेखों का रख-रखाव |
| और | — | कई जगह पीढ़ियों पुराने मानचित्र भी रखे होते हैं |
★दोनों नियुक्त होते हैं, चुने नहीं जाते। सरपंच चुना जाता है।
पुस्तक का प्रश्न: “क्या आप सोचते हैं कि ये पुराने मानचित्र हमारे किसी काम आ सकते हैं? क्या यह अतीत और वर्तमान के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं?”
8. बाल हितैषी पंचायत (पृ. 167–168)★★
“पंचायतों को सभी ग्रामवासियों की बात सुननी होती है — जिसमें बच्चे भी सम्मिलित हैं।”
अनेक राज्यों में — बाल सभाएँ और बाल पंचायतें, “जहाँ गाँव के बड़े-बुजुर्ग उनकी समस्याओं के समाधान ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं।”
उदाहरण 1 — महाराष्ट्र
कुछ बाल पंचायतों ने बाल-श्रम और बाल-विवाह को समाप्त करने पर कार्य किया। सदस्य अभिभावकों को समझाते हैं कि — बच्चों को पुन: विद्यालय भेजें · बालिकाओं को पढ़ाएँ · पढ़ने की आयु में उनका विवाह न करें।
उदाहरण 2 — पश्चिमी सिक्किम
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कौन | सांगखू राधू खांडू ग्राम पंचायत |
| क्या किया | विद्यालयों के परिसर की दीवारें बनवाईं (बच्चों की सुरक्षा के लिए) |
| और | विद्यालयों में रसोईघर, ताकि मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) वहीं सफाई से बना मिले |
| परिणाम | गाँव को बाल हितैषी ग्राम पंचायत घोषित किया गया |
उदाहरण 3 — राजस्थान की ‘बाल संसद’★★
| क्या | विवरण |
|---|---|
| किसने शुरू की | बंकर रॉय ने, कुछ दशक पूर्व |
| किसकी शाखा | ‘बेयरफुट कॉलेज’ की |
| किसके लिए | ग्रामीण राजस्थान के वंचित वर्ग के बच्चे |
| उम्र | 8–14 वर्ष |
| कहाँ | रात्रि विद्यालय |
| कैसे | संसद की तरह के चुनावों के माध्यम से |
| क्या सीखते हैं | शासन की प्रक्रियाएँ, लोकतंत्र और सामाजिक दायित्व |
| उनकी ‘संसद’ | मतदाता के पहचान-पत्र और प्रचार-प्रसार सहित सभी औपचारिक प्रक्रियाएँ |
| निर्वाचित प्रतिनिधि | ‘मंत्रिमंडल’ बनाते हैं — जो विद्यालय प्रबंधन का निरीक्षण और सामुदायिक आवश्यकताओं का समर्थन करता है |
| ★सम्मान | वर्ष 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड सहित कई पुरस्कार |
और पुस्तक का निष्कर्ष:
“ये पहल बच्चों में नेतृत्व के गुण और सामाजिक जागरूकता को विकसित करती है, जिससे बच्चे सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने में समर्थ होते हैं और परिवर्तन की पैरोकारी कर सकते हैं।”
9. पंचायत समिति और जिला परिषद (पृ. 169)★
पंचायत समिति — एक कड़ी
“खंड स्तर पर पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है।”
इसके सदस्य कौन
“इन संस्थाओं के सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं, परंतु उसमें क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य भी हो सकते हैं।”
★‘विधान सभा के स्थानीय सदस्य’ = विधायक (अध्याय 10 से)। यानी स्तर आपस में जुड़े हुए हैं।
इसके काम
| # | काम |
|---|---|
| 1 | सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके जिला या राज्य स्तर पर प्रस्तुत करना |
| 2 | धनराशि के आवंटन में मदद — जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (बारहमासी सड़कों के लिए) |
| 3 | ग्राम पंचायत ↔ जिला परिषद की कड़ी बनना |
और गठन: “पंचायत समिति का गठन राज्य-दर-राज्य भिन्न होता है, परंतु स्थानीय जनता की भागीदारी मजबूत करने की उनकी भूमिका समान रहती है।”
आरक्षण — तीनों स्तरों पर★★
“सभी तीनों स्तरों पर विशेष नियम बनाए गए हैं ताकि… अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे वंचित वर्ग के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और उनकी समस्याएँ सुनी जा सकें।”
★“इन संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का भी प्रावधान है।”
! ‘एक-तिहाई’ सबसे परीक्षा-योग्य आँकड़ा है — और यह तीनों स्तरों पर लागू है।
10. राज्य-दर-राज्य विविधता (पृ. 170)
“पूरे देश के विभिन्न राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं के गठन और कार्यों में विविधताएँ हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन संस्थानों पर राज्यों का अधिकार है, किंतु उनके लक्ष्य समान हैं — यह ग्रामवासियों को अपने गाँवों और स्थानीय क्षेत्रों में प्रबंधन और विकास के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम बनाती हैं।”
★इसीलिए चित्र 11.1 में हर स्तर के दो-तीन नाम हैं।
11. ध्यान रखें — अर्थशास्त्र (पृ. 170)★
| क्या | विवरण |
|---|---|
| ग्रंथ | ‘अर्थशास्त्र’ — शासन पर एक प्राचीन ग्रंथ |
| कब | लगभग 2300 वर्ष पहले |
| किसने लिखा | ‘कौटिल्य’ — “जिन्हें बाद में ‘चाणक्य’ नाम से भी जाना गया” |
| इसमें क्या है | राज्य के गठन, संचालन, अर्थव्यवस्था कैसे समृद्ध हो, शासक के कर्तव्य, और युद्ध किस प्रकार किए जाएँ |
प्रशासनिक ढाँचा — शब्दश:★★
“राजा प्रत्येक 10 गाँवों पर एक ‘संग्रहण’ (उप-जिला मुख्यालय); प्रत्येक 100 गाँवों पर ‘करवाटिका’ (जिला मुख्यालय), प्रत्येक 400 गाँवों पर ‘द्रोणमुख’ और प्रत्येक 800 गाँवों पर ‘स्थानीय’ (प्रांतीय मुख्यालय) स्थापित करे।”
| इकाई | कितने गाँवों पर |
|---|---|
| संग्रहण | 10 |
| करवाटिका | 100 |
| द्रोणमुख | 400 |
| स्थानीय | 800 |
और पुस्तक का प्रश्न: “आधुनिक भाषा में हम उक्त चार प्रवर्गों को क्या नाम देंगे? क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है कि बहुत पहले इसी प्रकार की संरचना के बारे में सोचा गया था?”
! पुस्तक यह नहीं कहती कि आज की पंचायती राज व्यवस्था इसी से ‘निकली’ है।
12. आगे बढ़ने से पहले (पृ. 171)
- “ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार को एक त्रिस्तरीय व्यवस्था के अंतर्गत गठित किया जाता है।”
- ★★“पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र जनता द्वारा प्रत्यक्ष भागीदारी और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा कार्य करता है।”
- “पंचायती राज संस्थाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वशासन का अधिकार देती हैं ताकि वे अपने मामले स्वयं सुलझा सकें और विकासात्मक कार्यों में सहयोग दें।”
★दूसरा बिंदु ग्राम सभा ↔ ग्राम पंचायत वाला भेद ही है, पुस्तक के अपने शब्दों में।
⚡ अंतिम दस मिनट — केवल यह पढ़िए
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| अध्याय का उद्धरण किसका | मोहनदास करमचंद गाँधी — “असली भारत, गाँवों में बसता है।” |
| भारत में गाँव / कस्बे / नगर | ~6,00,000 · 8,000 · 4,000 से अधिक |
| जनसंख्या और ग्रामीण भाग | 1.4 अरब पार; दो-तिहाई ग्रामीण |
| यह अध्याय किसके बारे में | केवल ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय सरकार |
| लक्ष्मणपुर — घर और जनसंख्या | 200 घर · लगभग 700 |
| वहाँ के लोग क्या करते हैं | अधिकांश कृषक; कुछ संबंधी सेना में; कुछ युवा नगर चले गए |
| गाँव की तीन आवश्यकताएँ | खेतों के लिए पानी · खराब मुख्य सड़क का रख-रखाव · प्राथमिक विद्यालय का रख-रखाव |
| पंचायत क्या है | ‘पंचायत’ नामक स्थानीय शासन व्यवस्था — एक ग्रामीण परिषद |
| ★पंचायती राज क्या है | स्व-शासन का एक रूप |
| पंचायत की तीन भूमिकाएँ | स्थानीय समस्याएँ हल करना · विकास कार्य आगे बढ़ाना · सरकारी योजनाओं के लाभ जनसाधारण तक पहुँचाना |
| ★तीन स्तर | ग्राम · खंड · जिला |
| ★प्रणाली का नाम | ‘त्रिस्तरीय’ प्रणाली |
| ग्राम स्तर की संस्था | ग्राम परिषद / ग्राम पंचायत |
| खंड स्तर की संस्था | खंड पंचायत / पंचायत समिति / मंडल परिषद |
| जिला स्तर की संस्था | जिला पंचायत / जिला परिषद |
| आठ कार्य | कृषि · आवास · सड़कों का रख-रखाव · जल संसाधनों का प्रबंधन · शिक्षा · स्वास्थ्य · सामाजिक कल्याण · सांस्कृतिक गतिविधियाँ |
| ★★ग्राम सभा क्या है | मतदाता के रूप में नामांकित गाँव के वयस्कों का समूह |
| ★★ग्राम पंचायत क्या है | ग्राम सभा द्वारा सीधे चुने गए सदस्यों की परिषद |
| ★दोनों में अंतर एक वाक्य में | ग्राम सभा चुनती है; ग्राम पंचायत चुनी जाती है |
| कौन-सा प्रत्यक्ष, कौन-सा प्रतिनिधि | ग्राम सभा = प्रत्यक्ष · ग्राम पंचायत = प्रतिनिधि |
| पंचायत का प्रमुख | सरपंच या प्रधान (एक ही पद के दो नाम) |
| दयानेश्वर कांबले | 2017 · सोलापुर का तरंगफल गाँव · किन्नर · छह उम्मीदवारों को हराया |
| उनका आदर्श वाक्य | ‘लोक सेवा, ग्राम सेवा’ |
| वंदना बहादुर मैदा | मध्य प्रदेश का खानखांडवी · भील समुदाय · गाँव की पहली महिला सरपंच |
| उन्होंने कौन-से मुद्दे उठाए | शिक्षा एवं स्वच्छता |
| पोपटराव बागुजी पवार | हिवरे बाजार, अहमदनगर · अन्ना हजारे का मॉडल · पद्मश्री 2020 |
| पंचायत सचिव | बैठकों का आयोजन और अभिलेखों का रख-रखाव |
| पटवारी | भू-अभिलेखों का रख-रखाव; कई जगह पीढ़ियों पुराने मानचित्र भी |
| महाराष्ट्र की बाल पंचायतें | बाल-श्रम और बाल-विवाह समाप्त करने पर काम |
| सिक्किम की पंचायत | सांगखू राधू खांडू — दीवारें और रसोईघर; बाल हितैषी घोषित |
| बाल संसद किसने शुरू की | बंकर रॉय — ‘बेयरफुट कॉलेज’ की शाखा |
| किस उम्र के बच्चे | 8–14 वर्ष |
| ★बाल संसद को कब, कौन-सा पुरस्कार | 2001 में वर्ल्ड चिल्ड्रन ऑनरेरी अवार्ड |
| पंचायत समिति क्या है | ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी |
| उसमें और कौन हो सकते हैं | गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य |
| कौन-सी योजना का नाम आया | प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (बारहमासी सड़कों के लिए) |
| ★★महिलाओं के लिए आरक्षण | एक-तिहाई सीटें — तीनों स्तरों पर |
| किन वर्गों के लिए विशेष नियम | अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति |
| राज्य-दर-राज्य अंतर क्यों | क्योंकि इन संस्थानों पर राज्यों का अधिकार है — पर लक्ष्य समान हैं |
| अर्थशास्त्र किसने लिखा, कब | कौटिल्य (चाणक्य) — लगभग 2300 वर्ष पहले |
| ★चार प्रवर्ग | संग्रहण = 10 · करवाटिका = 100 · द्रोणमुख = 400 · स्थानीय = 800 गाँव |
| अध्याय का अंतिम विचार | लोकतंत्र प्रत्यक्ष भागीदारी और निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा कार्य करता है |
और अंत में यह याद रखिए — पिछला पिरामिड पूरे देश का था। यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है। और उसमें ग्राम सभा चुनती है, ग्राम पंचायत चुनी जाती है।