रेल चलाइए, साड़ी बुनिए, एक कथा को अनेक बनते देखिए
शुरुआत
भारत में भाषाएँ, भोजन, पहनावे, त्योहार — सब में अपार विविधता है। फिर भी इनके भीतर एक एकता है। इस अध्याय में देखिए कि "एक में अनेक" का अर्थ क्या है।

“हे ईश्वर! मेरी यह प्रार्थना स्वीकार करें कि मैं अनेकता में एकता के स्पर्श का आनंद कभी न गवाँ सकूँ।”
“…विविधता में एकता का सिद्धांत सदैव से भारत के लिए स्वाभाविक रहा है… एक में अनेक का यह भाव भारत को उसके स्वभाव व स्वधर्म की सुनिश्चित नींव पर स्थापित करेगा।”
अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 125)
- भारतीय परिदृश्य में "विविधता में एकता" का क्या अर्थ है?
- भारत की विविधता के कौन-से पक्ष सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं?
- हम विविधता में निहित एकता का कैसे पता लगाते हैं?
इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। आपकी प्रगति सिर्फ़ इसी ब्राउज़र में रहती है। कहीं भेजी नहीं जाती।
1समृद्ध विविधता
"भारत के लोग" परियोजना (पृ. 126)
20वीं शताब्दी के अंत में भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण ने सभी राज्यों के समुदायों का व्यापक सर्वेक्षण किया। उसमें यह भी पाया गया कि अनेक भारतीय प्रवासी कहे जा सकते हैं — यानी वे अपने जन्म-स्थान के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ नहीं रहते।
4,635समुदाय सर्वेक्षण में
325भाषाएँ गिनी गईं
25लिपियाँ
जनसंख्या (पृ. 126)
1.4 अरब से अधिक निवासी — विश्व की जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत। ऐसे देश में इतनी विविधता आश्चर्यजनक नहीं।
एक इतिहासकार का प्रश्न (पृ. 126)
"इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है? …इस प्रश्न का उत्तर इस तथ्य में निहित है कि भारत 'विविधता में एकता' प्रदर्शित करता है।" — ब्रिटिश इतिहासकार विंसेंट स्मिथ, एक शताब्दी से भी अधिक पहले
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1"भारत के लोग" परियोजना में कितनी भाषाएँ गिनी गईं?
पृ. 126: 325 भाषाएँ, 25 लिपियाँ।
2भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का लगभग कितना भाग है?
पृ. 126: लगभग 18 प्रतिशत।
2सभी के लिए भोजन
भारत में हज़ारों — शायद लाखों — व्यंजन हैं। फिर भी कुछ अनाज लगभग पूरे भारत में खाए जाते हैं; ये अधिकांश भारतीयों का प्रमुख भोजन हैं, इसलिए "मुख्य अनाज" कहलाते हैं (पृ. 127–128)।
आइए पता लगाएँ (पृ. 128)
कोई एक हरी सब्ज़ी लीजिए: उससे आप कितने प्रकार के व्यंजन बना सकते हैं? अपने घर की सामग्रियों (अनाज, मसाले आदि) की सूची भी बनाइए।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1इनमें से कौन-सा मोटा अनाज (मिलेट) है?
पृ. 127: बाजरा, ज्वार, रागी।
2पुस्तक के अनुसार "एकता" भोजन में कहाँ दिखती है?
पृ. 128: एक ही सामग्री से अनगिनत व्यंजन।
3वस्त्र एवं परिधान
हर क्षेत्र और समुदाय ने अपनी शैली के पहनावे विकसित किए। फिर भी कुछ पारंपरिक पहनावों में एक समानता है। इसका साफ़ उदाहरण है "साड़ी" — बिना सिला एक लंबा वस्त्र, जो भारत के अधिकांश भागों में पहना जाता है (पृ. 128)।
रेशमी साड़ियों के कुछ प्रसिद्ध प्रकार (पृ. 128)
साड़ी का लंबा इतिहास (पृ. 129)
वैशाली (आज के बिहार में) से मिली पत्थर पर उकेरी गई एक आकृति, जिसमें एक स्त्री साड़ी पहने है, कुछ शताब्दी सा.सं.पू. की है। साड़ी पहनने के अनेक तरीक़े हैं, और नए तरीक़े आज भी खोजे जा रहे हैं — पर अंततः वह एक ही परिधान है: साड़ी।
आइए पता लगाएँ (पृ. 130–131)
पुस्तक के चित्र 8.4 में साड़ी के छह और उपयोग हैं — पहचानिए वे क्या हैं। फिर धोती के अलग-अलग कपड़ों और उपयोगों की सूची बनाइए: आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1साड़ी किस प्रकार का वस्त्र है?
पृ. 128।
2छींट के आयात पर किन देशों ने प्रतिबंध लगाया?
पृ. 129।
4त्योहारों की विविधता
कुछ त्योहार लगभग एक ही समय पर पूरे भारत में मनाए जाते हैं, पर उनके नाम अलग-अलग होते हैं। पुस्तक एक उदाहरण लेती है: 14 जनवरी के आस-पास का पर्व, जो भारत के कई भागों में फ़सल कटाई के मौसम की शुरुआत का सूचक है (पृ. 131)।
आइए पता लगाएँ (पृ. 133)
अक्टूबर-नवंबर में भारत में कई प्रमुख त्योहार होते हैं। उनमें से कुछ की, और देश के अलग-अलग भागों में उनके नामों की, सूची बनाइए।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1चित्र 8.5 वाला पर्व लगभग कब मनाया जाता है?
पृ. 131।
2यह पर्व भारत के कई भागों में किसका सूचक है?
पृ. 131: फ़सल कटाई के मौसम की शुरुआत।
5एक कथा-संग्रह, अनेक रूप
साहित्य विविधता में एकता का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है। भाषा, लेखन-शैली की तकनीक आदि में अंतर के बावजूद भारतीय साहित्य ने सदियों से महत्वपूर्ण विषय और चिंताएँ साझा की हैं (पृ. 133)।
अभ्यास प्र. 2 (पृ. 136): पंचतंत्र की कुछ कहानियाँ चुनिए — उनका संदेश आज भी कैसे सही है? क्या आप अपने क्षेत्र की ऐसी कहानियाँ जानते हैं?
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1पंचतंत्र की कथाओं के मुख्य पात्र कौन हैं?
पृ. 133।
2पंचतंत्र का मूल पाठ किस भाषा में है?
पृ. 133।
6महाकाव्य का विस्तार
सबसे प्रभावशाली उदाहरण हैं भारत के दो महाकाव्य — रामायण और महाभारत। मूल संस्करणों में लगभग 7,000 पृष्ठों के ये दोनों संस्कृत महाकाव्य ऐसे नायकों की कथाएँ हैं जो धर्म की पुनःस्थापना के लिए युद्ध करते हैं (पृ. 133)।
मानवविज्ञानी के.एस. सिंह: "लोककथाओं के अनुसार इस देश में शायद ही ऐसा कोई स्थान हो जहाँ महानायक पांडव न गए हों।" यही बात रामायण के बारे में भी कही जा सकती है। सदियों से इन दो महाकाव्यों ने भारत और एशिया के कई भागों के बीच सांस्कृतिक संबंधों का एक घना जाल बुना।
जाँच पड़ाव✓ पड़ाव पूरा
1महाभारत में पांडव किससे युद्ध करते हैं?
पृ. 133।
2नीलगिरि का "पंच पांडव" पत्थर कौन सँभालता है?
चित्र 8.7।
7सार और अभ्यास
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 136)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
"हर जगह मुझे एक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि मिली, जिसने उनके जीवन पर प्रभावशाली असर डाला। …निरक्षर ग्रामीणों को भी सैकड़ों श्लोक कंठस्थ थे…"
और अभ्यास (पृ. 136)
- पाठ के आरंभ के दोनों उद्धरणों पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
- अपने क्षेत्र की कुछ लोककथाएँ इकट्ठी कीजिए और उनके संदेशों पर चर्चा कीजिए।
- क्या आपने किसी प्राचीन कहानी को कला — मूर्ति, चित्र, नृत्य, फ़िल्म — में दिखाते देखा है?
आख़िरी जाँच✓ पड़ाव पूरा
1पुस्तक के अनुसार विविधता क्या करती है?
पृ. 136।
2"भारत विविधता में एकता प्रदर्शित करता है" — यह किसने कहा?
पृ. 126।
3रामायण और महाभारत मूल रूप से किस भाषा के महाकाव्य हैं?
पृ. 133।
सातों पड़ाव पूरे! "एक में अनेक" — अब अपने आस-पास इसके उदाहरण खोजिए।
