कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 149–162 परीक्षा से एक दिन पहले यही पढ़िए। सब कुछ यहाँ है, और क्रम में है।
एक पंक्ति में पूरा अध्याय
यह अध्याय दो बार ‘तीन’ गिनाता है — सरकार के तीन अंग और सरकार के तीन स्तर — और फिर बताता है कि इन दोनों के चारों ओर जो घेरा है, उसका नाम लोकतंत्र है।
यह तालिका याद कर लीजिए — यही पूरा अध्याय है★★
| तीन अंग (चित्र 10.3 — पहिया) | तीन स्तर (चित्र 10.4 — पिरामिड) |
|---|---|
| विधायिका — कानून बनाती है | केंद्र सरकार — राष्ट्रीय स्तर |
| कार्यपालिका — कानून लागू करती है | राज्य सरकार — राज्य स्तर |
| न्यायपालिका — तय करती है कि कानून टूटा या नहीं | स्थानीय सरकार — नगर/ग्राम स्तर |
!! सबसे बड़ी भूल — ‘अंग’ और ‘स्तर’ को एक समझ लेना
अंग = कौन क्या करता है (काम का बँटवारा) स्तर = कौन कहाँ तक (क्षेत्र का बँटवारा) और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं।
1. अध्याय का आरंभ (पृ. 149)
दो उद्धरण — दोनों याद रखिए
“राजानां धर्मगोप्तारं धर्मो रक्षति रक्षितः” “शासक धर्म की रक्षा करता है और जो धर्म की रक्षा करते हैं, धर्म उनकी रक्षा करता है।” — महाभारत
“न्याय के बिना शांति नहीं; समानता के बिना न्याय नहीं; विकास के बिना समानता नहीं; संस्कृति और लोगों की पहचान और सम्मान के बिना लोकतंत्र नहीं।” — रिगोबर्टा मेन्चु तुम
! ‘धर्म’ का अर्थ यहाँ ‘कर्तव्य’ है, religion नहीं — जैसा अध्याय 9 में था।
तीन महत्वपूर्ण प्रश्न
- ‘शासन’ का अर्थ क्या है?
- हमें सरकार की आवश्यकता क्यों होती है?
- ‘लोकतंत्र’ का अर्थ क्या है? यह क्यों महत्वपूर्ण है?
2. नियम, और तीन परिभाषाएँ (पृ. 150)★★
नियम क्यों
“जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तब असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में, समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम अनिवार्य हो जाते हैं।”
नियम कहाँ-कहाँ हैं: घर · विद्यालय (कुछ विद्यार्थियों के लिए, कुछ शिक्षकों के लिए) · परीक्षा · सड़क (यातायात के नियम) · नौकरी।
★और यह पंक्ति सबसे अधिक छूटती है: ”…जबकि नियोक्ता को भी उन सभी नियमों का पालन करना पड़ता है जो उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले लोगों के लिए बनाए हैं।” यानी नियम बनाने वाला भी नियम से बँधा होता है।
और यदि कोई नियम न माने?
“समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाएगा।”
तीन परिभाषाएँ — शब्दश: याद कीजिए★★
| पद | पुस्तक की परिभाषा |
|---|---|
| शासन | “निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना ही शासन कहलाता है।” |
| सरकार | “उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को कहते हैं जो नियम बनाते और इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।” |
| कानून | “कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है।” |
★तीनों का अंतर एक वाक्य में: शासन एक प्रक्रिया है। सरकार एक तंत्र है। कानून एक अधिक महत्वपूर्ण नियम है।
नियम बदले भी जा सकते हैं (पृ. 150–151)
“इसका यह तात्पर्य कदापि नहीं है कि जो नियम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लिए बन गए।”
घर → माता-पिता से चर्चा · विद्यालय → विद्यार्थी संघ या प्रबंधन से · समाज → “कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं।”
★और पुस्तक यहीं वादा करती है — “हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है।” यह वादा पृष्ठ 160 पर ‘आधारभूत लोकतंत्र’ के रूप में पूरा होता है।
3. दो चित्र (पृ. 151–152)
चित्र 10.1 — दो सड़कें
| ऊपर वाला चित्र | नीचे वाला चित्र |
|---|---|
| चौराहा · यातायात संकेतक · ज़ेब्रा क्रॉसिंग · वाहन अपनी लेन में | खचाखच भरी सड़क · वाहन हर दिशा में · पैदल यात्री बीच में |
| व्यवस्था | अव्यवस्था |
चित्र 10.2 — दस लोक सेवाएँ
सड़क निर्माण · रेल · सेना और सीमा · अस्पताल · अग्निशमन और बचाव · यातायात पुलिस · सर्वोच्च न्यायालय · विद्यालय · डाक सेवा · सरकारी कार्यालय
यही अध्याय के दूसरे महत्वपूर्ण प्रश्न — “हमें सरकार की आवश्यकता क्यों होती है?” — का उत्तर है।
4. सरकार के तीन अंग (पृ. 153–154)★★
पुस्तक इसे एक कहानी से खोलती है
पहले — तीस साल पहले तक: लोग डाकघर की पंक्ति में लगकर मनी ऑर्डर भेजते थे, या बैंक की पंक्ति में लगकर डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर डाक से भेजते थे।
फिर — डिजिटल तकनीक: “डिजिटल तकनीक ने विशेष प्रकार के अपराधियों को भी जन्म दिया है जो अपने स्थान पर बैठे-बैठे डिजिटल माध्यमों से लोगों की धनराशि चुराने के तरीके ढूँढ़ते हैं।” — साइबर क्राइम।
और उसी एक कहानी में तीनों अंग दिखते हैं★
| क्या हुआ | कौन-सा अंग |
|---|---|
| “अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए हैं” | विधायिका |
| साइबर पुलिस ने गिरफ़्तार किया | कार्यपालिका |
| “न्यायालय द्वारा उन्हें दोषी ठहराया गया” — आर्थिक दंड + जेल की सजा | न्यायपालिका |
तीनों परिभाषाएँ — शब्दश:★★
| अंग | परिभाषा |
|---|---|
| विधायिका | “वह अंग है जो नए कानून बनाती है और कभी-कभी पुराने कानूनों में संशोधन तथा वर्तमान कानून को निरस्त भी करती है। यह कार्य जनता के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा किया जाता है।” |
| कार्यपालिका | “वह अंग है जो कानूनों को लागू करती है। इसके अंतर्गत राष्ट्र-राज्य के प्रमुख (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री), मंत्रीगण और ऐसे अभिकरण (एजेंसी) आते हैं जिनका दायित्व कानून को लागू करवाना होता है।” |
| न्यायपालिका | “न्यायालयों की प्रणाली है जो इस बात का निर्णय करती है कि क्या किसी ने कानून तोड़ा है और यदि तोड़ा है, तो उस पर क्या कार्रवाई की जाए? या फिर, यदि आवश्यक हो, तो उसे क्या दंड दिया जाए?” |
! विधायिका में तीन क्रियाएँ हैं, एक नहीं — बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना।
और न्यायपालिका का दूसरा काम — यह सबसे अधिक छूटता है★★
“कभी-कभी यह इस बात की भी जाँच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं; अथवा विधायिका द्वारा पारित किया गया कोई कानून भली-भाँति परखा गया है और सभी के हित में है या नहीं।” (पृ. 154)
यानी न्यायपालिका केवल नागरिकों को नहीं परखती — वह बाक़ी दो अंगों को भी परखती है।
5. शक्तियों का पृथक्करण (पृ. 154)★★
“सुशासन के किसी भी तंत्र में इन तीनों अंगों को निश्चित रूप से पृथक रखा जाता है, जबकि ये तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं। यह विभाजन ‘शक्तियों का पृथक्करण’ कहलाता है।”
उद्देश्य — शब्दश:
“इसका उद्देश्य पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना है, अर्थात सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है तथा यदि कोई अंग अपनी अपेक्षित भूमिका से परे जाकर कार्य कर रहा है, तो उसे नियंत्रित कर पुन: संतुलन स्थापित कर सकता है।”
! ‘पृथक’ का अर्थ ‘अलग-अलग काम’ है, ‘एक-दूसरे से कटे हुए’ नहीं। पुस्तक स्वयं कहती है कि वे “एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं।”
चित्र 10.3 — पहिया
बीच में — शासन। चारों ओर तीन खंड — विधायिका · कार्यपालिका · न्यायपालिका। और तीनों के बीच दोनों दिशाओं वाले तीर।
★तीर दोनों दिशाओं में हैं — क्योंकि हर अंग दूसरे की निगरानी करता है। कोई ऊपर नहीं है।
6. सरकार के तीन स्तर (पृ. 155–156)★★
“भारत सहित अनेक देशों में यह तीन स्तरों पर कार्य करती है — स्थानीय स्तर, राज्य या प्रादेशिक स्तर और राष्ट्रीय स्तर। प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है।”
उपमा 1 — घर का बल्ब
बल्ब, स्विच, फ्यूज़ → बिजली मिस्त्री → बिजली विभाग में शिकायत
“यहाँ भी समस्या के समाधान के तीन स्तर हैं।”
उपमा 2 — बाढ़(यह सबसे परीक्षा-योग्य तालिका है)★★
| बाढ़ कितनी बड़ी | कौन-सा स्तर | क्या करता है |
|---|---|---|
| “ज्यादा भीषण नहीं” | स्थानीय प्राधिकारी | स्थिति स्वयं सँभाल लेते हैं |
| अनेक नगर और बहुत से गाँव प्रभावित | राज्य सरकार | जिम्मेदारी उठाती है, बचाव दल भेजती है |
| “भयानक रूप” और “विशाल क्षेत्र” | केंद्र सरकार | राहत सामग्री और सेना भेजती है |
★पूरा सिद्धांत एक पंक्ति में: ऊपर का स्तर तभी आता है जब नीचे का स्तर सँभाल न सके।
चित्र 10.4 — पिरामिड
| परत | कौन | कहाँ |
|---|---|---|
| ऊपर | केंद्र सरकार | राष्ट्रीय स्तर पर |
| बीच | राज्य सरकार | राज्य स्तर पर |
| नीचे (आधार) | स्थानीय सरकार | नगर अथवा ग्राम स्तर पर |
★★स्थानीय सरकार पिरामिड का आधार है — और यही ‘आधारभूत लोकतंत्र’ का अर्थ है। (पृष्ठ 160 पर पुस्तक स्वयं यह जोड़ बनाती है।)
7. ध्यान रखें — दो आदर्श वाक्य (पृ. 156)
| संस्था | आदर्श वाक्य | अर्थ |
|---|---|---|
| भारत सरकार | ‘सत्यमेव जयते’ | “सत्य की ही विजय होती है” |
| सर्वोच्च न्यायालय | ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ | “जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है” |
“हमारे अनेक संस्थानों के आदर्श वाक्य हमारे प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से प्रेरित हैं।”
और एक सूचना जो पुस्तक स्वयं देती हैध्यान
- चित्र 10.5 की तालिका में स्थानीय सरकार नहीं है — “क्योंकि हम आगे के दो अध्यायों में इसे विस्तार से समझेंगे।”
- विधान सभाओं की निश्चित भूमिका — कक्षा 7 में।
8. चित्र 10.5 — पूरी तालिका (पृ. 157)★★
न्यायपालिका
| अखिल भारत | राज्य स्तर | |
|---|---|---|
| न्यायपालिका | भारत का सर्वोच्च न्यायालय | उच्च न्यायालय |
विधायिका
| राष्ट्रीय स्तर | राज्य स्तर | |
|---|---|---|
| विधायिका | दो सदन — लोकसभा और राज्य सभा | विधान सभा (कुछ राज्यों में विधान परिषद भी) |
कार्यपालिका
| संघ सरकार | राज्य सरकार | |
|---|---|---|
| औपचारिक प्रमुख | राष्ट्रपति — और तीनों सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर | राज्यपाल |
| कार्यपालिका के प्रमुख | प्रधानमंत्री | मुख्यमंत्री |
कार्य और दायित्व(पुस्तक कहती है — “यह विस्तृत सूची नहीं है”)
| संघ सरकार | राज्य सरकार |
|---|---|
| रक्षा · विदेशी मामले · परमाणु ऊर्जा | पुलिस, कानून व्यवस्था |
| संचार · मुद्रा · अंतर्राज्यीय वाणिज्य | केंद्र के कानूनों को अपनाना और कार्यान्वयन |
| शिक्षा · राष्ट्रीय नीतियों का प्रतिपादन | जन-स्वास्थ्य · शिक्षा · कृषि · सिंचाई · स्थानीय सरकार |
★ध्यान दीजिए — ‘शिक्षा’ दोनों तरफ़ है। यह छपाई की भूल नहीं है। कुछ विषयों पर केंद्र और राज्य, दोनों काम करते हैं।
हाशिये की दो परिभाषाएँ
| पद | परिभाषा |
|---|---|
| सदन | “ऐसी सभा जहाँ कानूनों पर चर्चा की जाती है अथवा उन्हें पारित किया जाता है।” |
| औपचारिक | “हमारे यहाँ राष्ट्रपति और राज्यपाल वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते हैं। विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, पर वे सामान्यत: केंद्र या राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं।” |
! ‘औपचारिक’ का अर्थ ‘प्रभावहीन’ नहीं है। दोनों हेज ध्यान रखिए — “विशेष परिस्थितियों में” और “सामान्यत:”।
9. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पृ. 158)
| क्या | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 1931 · रामेश्वरम, तमिलनाडु · एक सामान्य परिवार में |
| पहचान | सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक · ‘मिसाइल मैन’ |
| किसलिए | अंतरिक्ष कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमताओं के विकास में भूमिका |
| पद | भारत के 11वें राष्ट्रपति |
| कब | 2002 से 2007 तक |
★★यह बॉक्स यहाँ क्यों है — यह प्रश्न परीक्षा में आ सकता है। पिछले ही पृष्ठ पर पुस्तक ने कहा था कि राष्ट्रपति ‘औपचारिक’ प्रमुख होते हैं। और यहाँ वह कहती है — “भले ही राष्ट्रपति के रूप में उनकी स्थिति सांकेतिक है, फिर भी वे असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” यानी ‘औपचारिक’ का अर्थ ‘प्रभावहीन’ नहीं होता।
तीन संक्षेप — सबसे प्रसिद्ध उद्धरण से
| संक्षेप | अर्थ |
|---|---|
| FAIL | फर्स्ट एटेम्प्ट इन लर्निंग — सीखने की दिशा में पहला प्रयास |
| END | एफर्ट नेवर डाइज़ — प्रयास कभी निरर्थक नहीं होते |
| NO | नेक्स्ट अपॉरचुनिटी — अगले अवसर के लिए तैयार रहें |
और एक और: “स्वप्न का अर्थ सोते समय स्वप्न देखना नहीं है, बल्कि स्वप्न वे हैं जो आपको सोने न दें।”
10. लोकतंत्र (पृ. 159–160)★★
शब्द की जड़
| ग्रीक शब्द | अर्थ |
|---|---|
| डेमोस | लोग |
| क्रेटोस | शासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति |
शाब्दिक अर्थ — लोक-शासन या गणतंत्र (लोगों का शासन)।
और फिर पुस्तक का प्रश्न
“परंतु क्या सभी लोग एक साथ शासन कर सकते हैं? स्पष्ट है कि यह संभव नहीं है।”
उत्तर — कक्षा वाला उदाहरण: पूरी कक्षा प्रधानाचार्य के पास नहीं जा सकती, इसलिए मॉनीटर या कक्षा-प्रतिनिधि चुना जाता है। “यही सिद्धांत राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू होता है।”
प्रतिनिधि और उनके दो नाम★
| स्तर | क्या कहलाते हैं | कहाँ |
|---|---|---|
| राज्य | विधायक | विधान सभा |
| राष्ट्र | सांसद | लोक सभा |
वे वहाँ क्या करते हैं: “कानूनों पर चर्चा… समस्याओं और समाधानों पर विचार-विमर्श… मतभेद की स्थिति में एक-दूसरे से संवाद और तर्क-वितर्क द्वारा समस्या का हल करने का प्रयास।”
भारत के आँकड़े
| क्या | विवरण |
|---|---|
| कैसा लोकतंत्र | ‘जन प्रतिनिधि’ आधारित |
| किस वर्ष के परिप्रेक्ष्य में | 2024 |
| मतदाता | लगभग 97 करोड़ |
| विश्व में | सबसे बड़ा लोकतंत्र |
| मतदान की आयु | 18 वर्ष से ऊपर |
11. दो प्रकार का लोकतंत्र (पृ. 160)★★
पिकनिक वाला उदाहरण
दो स्थान ‘क’ और ‘ख’; कक्षा दूरी, समय, खर्च, मूलभूत आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श करती है; सहमति नहीं बनती; शिक्षक मतदान कराते हैं — हाथ उठाकर; जिस विकल्प को सबसे ज़्यादा हाथ मिले, वही चुना जाता है।
“यह प्रक्रिया मतदान (वोटिंग) कहलाती है। यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण है, जहाँ स्थान निश्चित करने में प्रत्येक विद्यार्थी की राय ली गई।”
दोनों प्रकार — यही परीक्षा का प्रश्न है★★
| प्रत्यक्ष लोकतंत्र | प्रतिनिधि लोकतंत्र | |
|---|---|---|
| कौन निर्णय लेता है | हर व्यक्ति स्वयं | चुने हुए प्रतिनिधि |
| पुस्तक का उदाहरण | पिकनिक का मतदान | कक्षा-मॉनीटर · विधायक · सांसद |
| कब चलता है | जब समूह छोटा हो | जब समूह बड़ा हो |
आधारभूत / धरातलीय लोकतंत्र — अध्याय का शीर्षक-शब्द★★
“आधारभूत/धरातलीय लोकतंत्र उस तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है, जैसे कि पृष्ठ 155 पर चित्र 10.4 में दिखाए गए पिरामिड का आधार है। इस प्रकार के तंत्र में नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”
★यह ठीक वही वादा है जो पुस्तक ने पृष्ठ 151 पर किया था — “कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात रख सकते हैं। हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है।” वादा पृष्ठ 151 पर, उत्तर पृष्ठ 160 पर।
12. आगे बढ़ने से पहले (पृ. 160)
- “सरकार और शासन के बिना कोई भी देश नहीं चल सकता।”
- “आधुनिक सरकार के तीन अंग हैं — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — जिन्हें एक साथ कार्य करने की आवश्यकता होती है।”
- “भारत सरकार तीन स्तरों पर कार्य करती है — संघीय अथवा राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर और स्थानीय स्तर।”
- “लोकतंत्र इस प्रणाली की पूरी रूपरेखा है। यह राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तर पर चयनित प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य करती है।”
⚡ अंतिम दस मिनट — केवल यह पढ़िए
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| अध्याय के दो उद्धरण किनके | महाभारत और रिगोबर्टा मेन्चु तुम |
| ‘शासन’ क्या है | “निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना” |
| ‘सरकार’ क्या है | “व्यक्तियों का समूह या तंत्र जो नियम बनाते और उनका अनुपालन सुनिश्चित करते हैं” |
| ‘कानून’ क्या है | “कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियम” |
| तीन अंग | विधायिका · कार्यपालिका · न्यायपालिका |
| विधायिका के तीन काम | कानून बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना |
| विधायिका यह काम कहाँ करती है | जनता के प्रतिनिधियों की सभा में |
| कार्यपालिका क्या करती है | कानूनों को लागू करती है |
| कार्यपालिका में कौन आते हैं | राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और अभिकरण (एजेंसियाँ) |
| न्यायपालिका क्या है | न्यायालयों की प्रणाली |
| ★न्यायपालिका का दूसरा काम | कार्यपालिका के निर्णय और विधायिका के कानून की भी जाँच |
| साइबर अपराध में तीनों अंग | नए कानून (विधायिका) · साइबर पुलिस की गिरफ़्तारी (कार्यपालिका) · न्यायालय का दोषी ठहराना (न्यायपालिका) |
| ‘शक्तियों का पृथक्करण’ का उद्देश्य | “पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना” |
| चित्र 10.3 क्या है | पहिया — बीच में शासन, चारों ओर तीन अंग, दोनों दिशाओं वाले तीर |
| तीन स्तर | स्थानीय · राज्य या प्रादेशिक · राष्ट्रीय |
| बल्ब वाली उपमा | बल्ब/स्विच/फ्यूज़ → बिजली मिस्त्री → बिजली विभाग |
| छोटी बाढ़ | स्थानीय प्राधिकारी |
| अनेक नगर और गाँव प्रभावित | राज्य सरकार — बचाव दल |
| भयानक बाढ़, विशाल क्षेत्र | केंद्र सरकार — राहत सामग्री और सेना |
| चित्र 10.4 क्या है | पिरामिड — नीचे स्थानीय, बीच राज्य, ऊपर केंद्र |
| भारत सरकार का आदर्श वाक्य | ‘सत्यमेव जयते’ — “सत्य की ही विजय होती है” |
| सर्वोच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य | ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ — “जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है” |
| अखिल भारत / राज्य न्यायपालिका | सर्वोच्च न्यायालय / उच्च न्यायालय |
| राष्ट्रीय विधायिका | दो सदन — लोकसभा और राज्य सभा |
| राज्य विधायिका | विधान सभा (कुछ राज्यों में विधान परिषद भी) |
| ‘सदन’ क्या है | “ऐसी सभा जहाँ कानूनों पर चर्चा की जाती है अथवा उन्हें पारित किया जाता है” |
| ★औपचारिक प्रमुख | राष्ट्रपति (केंद्र) · राज्यपाल (राज्य) |
| ★कार्यपालिका के प्रमुख | प्रधानमंत्री (केंद्र) · मुख्यमंत्री (राज्य) |
| राष्ट्रपति और क्या हैं | तीनों सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर |
| ★तालिका में कौन-सा शब्द दोनों तरफ़ है | शिक्षा |
| डॉ. कलाम — जन्म | 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु |
| वे कौन-से राष्ट्रपति थे | 11वें — 2002 से 2007 तक |
| उनका उपनाम | ‘मिसाइल मैन’ |
| FAIL · END · NO | फर्स्ट एटेम्प्ट इन लर्निंग · एफर्ट नेवर डाइज़ · नेक्स्ट अपॉरचुनिटी |
| डेमोस / क्रेटोस | लोग / शासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति |
| डेमोक्रेसी का शाब्दिक अर्थ | लोक-शासन या गणतंत्र (लोगों का शासन) |
| राज्य / राष्ट्र के प्रतिनिधि | विधायक / सांसद |
| 2024 में मतदाता | लगभग 97 करोड़ — विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र |
| मतदान की आयु | 18 वर्ष से ऊपर |
| प्रत्यक्ष लोकतंत्र | पिकनिक वाला मतदान — हर एक की राय ली गई |
| प्रतिनिधि लोकतंत्र | मॉनीटर · विधायक · सांसद |
| ★आधारभूत लोकतंत्र | वह तंत्र जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी प्रोत्साहित और सुनिश्चित की जाती है — पिरामिड का आधार |
और अंत में यह याद रखिए — तीन अंग = कौन क्या करता है। तीन स्तर = कौन कहाँ तक। और दोनों के चारों ओर जो घेरा है, उसका नाम लोकतंत्र है।