अध्याय 8विविधता में एकता या 'एक में अनेक'

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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 125–136 परीक्षा से एक दिन पहले यही पढ़िए। सब कुछ यहाँ है, और क्रम में है।

एक पंक्ति में पूरा अध्याय

पुस्तक एक ही बात चार बार सिद्ध करती है — भोजन से, साड़ी से, त्योहार से, और महाकाव्य से: बाहर से अनेक, भीतर से एक।

यह तालिका याद कर लीजिए — यही पूरा अध्याय है★★

उदाहरणएक (एकता)अनेक (विविधता)
भोजनएक ही सामग्री — अनाज, दालें, मसालेहजारों व्यंजन और पकवान
साड़ीएक ही परिधान, और वह भी बिना सिलासैकड़ों रूप, अनेक बाँधने के तरीके, छह अन्य उपयोग
त्योहारएक ही तिथि, एक ही पर्व — फसल की कटाईतेरह नाम
महाकाव्यएक कथाअनगिनत लोक संस्करण; तमिलनाडु में ही 100 से अधिक

★और पुस्तक ने यह साँचा स्वयं पृ. 128 पर लिख दिया है: “कैसे एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते हैं।”

1. अध्याय का आरंभ (पृ. 125)

दो उद्धरण — दोनों याद रखिए★

कौनक्या कहा
रवींद्रनाथ टैगोर“हे ईश्वर! मेरी यह प्रार्थना स्वीकार करें कि मैं अनेकता में एकता के स्पर्श का आनंद कभी न गवाँ सकूँ।”
श्री अरविंद”…विविधता में एकता का सिद्धांत सदैव से भारत के लिए स्वाभाविक रहा है और यह उसकी प्रकृति एवं अस्तित्व के लिए आवश्यक है। एक में अनेक का यह भाव भारत को उसके स्वभाव व स्वधर्म की सुनिश्चित नींव पर स्थापित करेगा।”

★अध्याय का शीर्षक — ‘एक में अनेक’ — श्री अरविंद के इसी उद्धरण से आया है। और वही श्री अरविंद अध्याय 5 के आरंभ में भी थे।

आवरण-चित्र: पत्थर की बारह अलग-अलग जालियों की एक पट्टी — सब एक ही दीवार की, पर हर नमूना अलग।

तीन महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. भारतीय परिदृश्य में ‘विविधता में एकता’ का क्या अर्थ है?
  2. भारत की विविधता के कौन-से पक्ष सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं?
  3. हम विविधता में निहित एकता का कैसे पता लगाते हैं?

2. समृद्ध विविधता (पृ. 126)★

रेल-यात्रा वाला उदाहरण: “यदि आप रेल द्वारा भारत की यात्रा करते हैं, तो आप न केवल बदलते भूदृश्यों को देखेंगे, बल्कि विभिन्न प्रकार के परिधान और भोजन का भी अनुभव करेंगे। …आप परिचित एवं अपरिचित भाषाएँ सुनेंगे और विभिन्न लिपियों को देखेंगे।”

  • यहाँ तक कि अपने क्षेत्र में भी आप विभिन्न भागों से आए अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं वाले लोगों से मिलेंगे।
  • “यही भारत की समृद्ध विविधता है” — और यही वह पहला पक्ष है जो पर्यटकों को प्रभावित करता है।

‘भारत के लोग’ परियोजना — सबसे परीक्षा-योग्य आँकड़े★★

आँकड़ाकिसका
1.4 अरब से भी अधिकभारत के निवासी
लगभग 18 प्रतिशतविश्व की जनसंख्या में भारत का भाग
20वीं शताब्दी के अंत मेंकब सर्वेक्षण हुआ
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षणवह राष्ट्रीय संगठन जिसने सर्वेक्षण किया
‘भारत के लोग’ परियोजनापरियोजना का नाम
4,635समुदाय, जिनका देश के सभी राज्यों में सर्वेक्षण हुआ
325भाषाएँ, जिनकी गणना की गई
25लिपियाँ, जिनका ये भाषाएँ उपयोग करती हैं
  • सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि अपने जन्म स्थान के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ न रहने के कारण अनेक भारतीयों को प्रवासी भी कहा जा सकता है।

! 325 और 25 आपस में मत बदलिए — भाषाएँ अधिक, लिपियाँ कम। (क्योंकि एक ही लिपि अनेक भाषाएँ लिख सकती है — जैसे देवनागरी हिंदी, मराठी और संस्कृत तीनों के लिए।)

विंसेंट स्मिथ का प्रश्न (पृ. 126)★

“विविधता वास्तव में सुंदर है, परंतु इसका अर्थ निकालना इतना सरल नहीं है।”

एक शताब्दी से भी अधिक पहले ब्रिटिश इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने विस्मयपूर्वक कहा —

“इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है? …इस प्रश्न का उत्तर इस तथ्य में निहित है कि भारत ‘विविधता में एकता’ प्रदर्शित करता है।”

3. उदाहरण 1 — सभी के लिए भोजन (पृ. 127–128)

  • “हमारे देश भारत में आप, लाखों न सही, किंतु हजारों प्रकार के व्यंजनों और पकवानों का स्वाद चख सकते हैं।”
  • फिर भी कुछ निश्चित अनाजों का लगभग पूरे भारत में उपयोग होता है।
श्रेणीनाम
अनाजचावल · जौ · गेहूँ · बाजरा · ज्वार · रागी
दालेंविभिन्न प्रकार की दालें
सामान्य मसालेहल्दी · जीरा · इलायची · अदरक
  • “ये सभी अधिकांश भारतीयों का प्रमुख भोजन हैं, इसलिए इन्हें ‘मुख्य अनाज’ भी कहा जाता है।”
  • इस सूची को साग-सब्जियों और तेलों के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

अध्याय का सूत्र-वाक्य★★

“इस तरह हम देखते हैं कि कैसे एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते हैं।”

चित्र 8.1 — अनाजों और दालों का मानचित्र (पृ. 127)

कैप्शन: “भारत के विभिन्न क्षेत्रों से अनाजों और दालों के कुछ उदाहरण” (मानचित्र पर: “पैमाने पर आधारित नहीं है।”)

कुछ नाम: राजमा · लोबिया · बासमती · मूंग दाल · मसूर दाल · चना दाल · अरहर दाल · छोले/चना · बाजरा · मक्का · ज्वार · सोना मसूरी · पोन्नी चावल · कोलम चावल

★इस मानचित्र पर चावल चार बार है — पर हर बार अलग नाम से: बासमती, सोना मसूरी, पोन्नी चावल, कोलम चावल। यही ‘एक में अनेक’ है, मानचित्र पर।

! पर मानचित्र के सारे नाम याद करने की आवश्यकता नहीं — पुस्तक इन्हें “कुछ उदाहरण” कहती है।

4. उदाहरण 2 — वस्त्र एवं परिधान (पृ. 128–131)★

  • “भारत के प्रत्येक क्षेत्र के लोगों ने वस्त्रों और परिधानों की अपनी स्वयं की शैली विकसित की है। फिर भी, हम कुछ पारंपरिक भारतीय परिधानों में एक समानता पाते हैं।”

साड़ी

बातविवरण
क्या हैभारत के अधिकांश भागों में पहना जाने वाला, विभिन्न सूत या धागे से बना एक लंबा परिधान
★विशेषतायह बिना सिला वस्त्र है
सामग्रीमुख्यत: कपास अथवा रेशम; आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) कपड़ों से भी
रेशमी प्रकारबनारसी · कांजीवरम · पैठनी · पाटन पटोला · मूगा · मैसूर
और“सूती साड़ियों के और भी प्रकार होते हैं।”
कुल“सैकड़ों प्रकार के रूप होते हैं।”

विविधता कहाँ से आती है

  • बुनाई एवं डिजाइन की विभिन्न विधियाँ।
  • कुछ डिजाइन कपड़े का ही हिस्सा होते हैं, जबकि कुछ को बुनाई के उपरांत छापा जाता है।
  • रंगों में अनेक विविधताएँ, जो कई प्रकार के रंगों से उत्पन्न की जाती हैं।

चित्र 8.2 — साड़ी का लंबा इतिहास

“कुछ शताब्दी सा.सं.पू. वैशाली (आज के बिहार) में पत्थर पर उकेरी गई आकृति में साड़ी पहनी हुई स्त्री को दर्शाया गया है।”

उकेरी गई आकृति = एक डिजाइन जो समतल सतह के ऊपर उकेरी गई हो। यह पत्थर, लकड़ी, मृत्तिका (सेरेमिक) या अन्य सामग्री की बनी हो सकती है।

★वैशाली — यही नगर अध्याय 7 में महावीर के जन्मस्थान के रूप में आया था।

ध्यान रखें — ‘छींट’ की कहानी (पृ. 129)★★

“बहुत लंबे समय तक भारत, विश्व में सर्वाधिक महीन सूत का उत्पादन करता रहा और उन कपड़ों का यूरोप जैसे सुदूर स्थानों तक निर्यात करता रहा। 17वीं शताब्दी में एक सूती कपड़े पर छपा हुआ डिजाइन ‘छींट’, यूरोप में इतना अधिक लोकप्रिय हुआ कि इसके कारण यूरोपीय परिधानों की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आई। अंतत: अपने स्वयं के उत्पादों के संरक्षण के लिए इंग्लैंड और फ्रांस को भारत से ‘छींट’ के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लेना पड़ा।”

चार बातें याद रखिए: (1) भारत — सर्वाधिक महीन सूत; (2) 17वीं शताब्दी; (3) ‘छींट’ = सूती कपड़े पर छपा डिजाइन; (4) इंग्लैंड और फ्रांस ने आयात पर प्रतिबंध लगाया।

चित्र 8.4 — साड़ी के छह अन्य उपयोग (पृ. 130–131)★

#उपयोग
1बच्चे के लिए झूला
2मछली पकड़ने का जाल
3अनाज छानने/ओसाने में
4सिर पर घड़ा रखने के लिए गद्दी
5वर्षा से बचाव
6ज़मीन पर बिछाकर लेटने के लिए

“विगत शताब्दियों में भारत आने वाले विभिन्न विदेशी यात्री इसकी सादगी, सुलभता और पहनने के विविध तरीकों को देखकर अभिभूत हुए।”

★यह सब इसलिए संभव है क्योंकि साड़ी बिना सिला वस्त्र है।

खंड का निचोड़★★

“साड़ी को पहनने के अनेक तरीके हैं… वास्तव में, इसे बाँधने व पहनने के नए-नए तरीके अभी भी खोजे जा रहे हैं, लेकिन अंततोगत्वा यह एक ही प्रकार का परिधान — ‘साड़ी’ है।”

5. उदाहरण 3 — त्योहारों की विविधता (पृ. 131–133)★★

“भारत में त्योहारों की अपार विविधता है। आपने देखा होगा कि कुछ त्योहार एक ही समय पर पूरे भारत में मनाए जाते हैं, हालाँकि उनके नाम अलग-अलग होते हैं।”

उदाहरण: मकर संक्रांति — 14 जनवरी के आस-पास। “यह पर्व भारत के विभिन्न भागों में फसलों की कटाई का सूचक है।”

चित्र 8.5 — तेरह नाम, एक त्योहार (पृ. 132)

कैप्शन: “मानचित्र लगभग एक ही तिथि पर एक ही त्योहार के विभिन्न नामों को प्रदर्शित करता है।”

क्षेत्र-क्रमनाम
सबसे उत्तरशिशुर सेंक्रात
उत्तर-पश्चिममाघी / लोहड़ी
उत्तरी मैदानखिचड़ी पर्व
पूर्वोत्तरमाघ बिहू
मध्य भारतमकर संक्रांत
पश्चिमउत्तरायण · मकर संक्रांति
पूर्वपौष साँग क्रान्ति · मकर संक्रांति
दक्षिणपेड्डा पंडुगा · मकर संक्रमण · पोंगल · मकर विलांक्कु

★इन नामों में भी एक साझी जड़ है — ध्यान से देखिए: मकर संक्रांत · मकर संक्रांति · मकर संक्रमण · मकर विलांक्कु · शिशुर सेंक्रात · पौष साँग क्रान्ति — कई नामों में ‘मकर’ या ‘संक्रांति’ किसी न किसी रूप में है।

! तेरहों नाम रटने की आवश्यकता नहीं। चार-पाँच पर्याप्त हैं — लोहड़ी · माघ बिहू · उत्तरायण · पोंगल · खिचड़ी पर्व। समझ यह है कि एक त्योहार, अनेक नाम।

6. उदाहरण 4 — महाकाव्य का विस्तार (पृ. 133–135)★

  • “साहित्य, विविधता में एकता का एक अन्य उत्कृष्ट उदाहरण है।”
  • “भारतीय साहित्य बहुत विविध है एवं विश्व के सबसे धनी साहित्यों में से एक है।”
  • “भाषा, लेखन शैली की तकनीक आदि में अंतर होने के बावजूद सदियों से भारतीय साहित्य ने विश्व के महत्वपूर्ण विषयों एवं चिंताओं को साझा किया है।”

पंचतंत्र

बातविवरण
क्या हैपशुओं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग्रह, जो महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाता है
मूल संस्कृत पाठलगभग 2,200 वर्ष पुराना
भारत मेंलगभग हर भारतीय भाषा में रूपांतरण
भारत से बाहरदक्षिण-पूर्वी एशिया, अरब देशों तथा यूरोप में भी पढ़ा जाता है
★अनुमान50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण

★और पुस्तक का सूत्र: “यह प्रदर्शित करता है कि ‘एक’ कहानियों का संग्रह किस प्रकार ‘अनेक’ में परिवर्तित हो गया।”

दो महाकाव्य

“यद्यपि भारत के सबसे प्रभावशाली दो महाकाव्य रामायण एवं महाभारत हैं।”

महाकाव्य = सामान्यत: एक लंबी कविता जो अतीत के महान नायकों एवं योद्धाओं की कथाओं का व्याख्यान करती है।

बातविवरण
आकारमूल संस्करण में लगभग 7,000 पृष्ठ
भाषासंस्कृत
साझा विषयनायक धर्म की पुनर्स्थापना के लिए युद्ध करते हैं
महाभारतपांडव, श्री कृष्ण की सहायता से अपने चचेरे भाइयों ‘कौरवों’ से अपने राज्य की प्राप्ति के लिए युद्ध करते हैं
रामायणश्री राम, अपने भाई लक्ष्मण एवं हनुमान की सहायता से राक्षस रावण को पराजित करते हैं, जिसने सीता का अपहरण किया था

★और यह पंक्ति ध्यान से पढ़िए: “इन कथाओं में कई और छोटी कथाएँ/उपकथाएँ भी हैं, जो नैतिक मूल्यों पर केंद्रित हैं और लगातार प्रश्न पूछती हैं कि क्या सत्य और क्या असत्य।” यह अध्याय 7 की उपनिषद्-कथाओं वाली बात से सीधी जुड़ती है।

चित्र 8.6 (पृ. 134)

कैप्शन: “रामायण का युद्धकांड, साहिबदीन, मेवाड़, 1652, इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदन”

चारों बातें परीक्षा-योग्य हैं: चित्रकार · स्थान · वर्ष · आज कहाँ।

अनगिनत लोक संस्करण★★

  • “दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से इन दो महाकाव्यों का भारत एवं भारत से बाहर अनुवाद व रूपांतरण किया जाता रहा है। इसके साथ ही इनके अनगिनत लोक संस्करण भी हैं।”
  • ★“कुछ वर्ष पूर्व एक विद्वान ने केवल तमिलनाडु में किए गए अपने सर्वेक्षण में लोक कथाओं के रूप में महाभारत के 100 से अधिक स्वरूपों को पाया।”
  • “अब आप अनुमान लगाइए कि पूरे भारत में इन लोक कथाओं की कितनी संख्या होगी!”

जनजातीय संस्करण

  • “बहुत से समुदायों में रामायण एवं महाभारत के अपने संस्करण भी हैं।”
  • भील, गोंड, मुंडा जैसे कई जनजाति समुदायों के संदर्भ में ये विशेष रूप से सत्य है।
  • भारत के पूर्वोत्तर तथा हिमालय क्षेत्र (जिसमें कश्मीर भी सम्मिलित है) की अधिकांश जनजातियों के पास अपनी लोककथा भी है।
  • ★“ये जनजातीय रूपांतरण मौखिक रूप से प्रसारित हुए।”
  • साथ ही किंवदंतियाँ भी फैलीं कि पांडव, उनकी पत्नी द्रौपदी, कभी-कभी उनके शत्रु दुर्योधन एवं चचेरे भाई — उनकी जनजातियों के क्षेत्रों में आए।

के.एस. सिंह का कथन (पृ. 135)★

मानवविज्ञानी के.एस. सिंह, जिन्होंने ‘भारत के लोग’ परियोजना का निर्देशन किया (वही परियोजना जो पृ. 126 पर आई थी), महाभारत के बारे में कहते हैं —

“लोककथाओं के अनुसार इस देश में शायद ही ऐसा कोई स्थान हो जहाँ महानायक पांडव न गए हों।”

“और यही बात रामायण के संदर्भ में भी कही जा सकती है।”

चित्र 8.7: “पंच पांडव, तमिलनाडु के नीलगिरि के जंगलों में पाँच पांडवों को दर्शाता नक्काशीदार पत्थर। इरूला जनजाति द्वारा मंदिर में इस पत्थर को सुरक्षित रखा गया है।”

★नीलगिरि — यही पर्वत अध्याय 7 में टोडा जनजाति के संदर्भ में आया था।

खंड का निष्कर्ष

“सदियों से, किसी अन्य साहित्य की अपेक्षा इन दो महाकाव्यों ने भारत एवं एशिया के विभिन्न भागों के मध्य एक सांस्कृतिक सूत्र के गहन तंत्र को विकसित किया। यह विविधता में एकता का एक अन्य उदाहरण है।”

7. अध्याय का समापन (पृ. 135–136)

पुस्तक आगे का रास्ता भी बताती है: भारतीय शास्त्रीय कलाओं (जिसमें शास्त्रीय वास्तुकला सम्मिलित है) में भी विविधता एवं एकता को सरलता से देखा जा सकता है — “आप इन क्षेत्रों का अध्ययन कला पाठ्यचर्या के दौरान करेंगे।”

अंतिम पंक्ति★★

“अंत में हमें यह याद रखना चाहिए कि भारतीय संस्कृति विविधता को संपन्नता के रूप में प्रचारित करती है, किंतु साथ ही विविधता को पोषित करने वाली अंतर्निहित एकता को भी दृष्टि से ओझल नहीं होने देती।”

आगे बढ़ने से पहले — पुस्तक का अपना सार (पृ. 136)

  1. भारत में विभिन्न परिदृश्यों, व्यक्तियों, भाषाओं, परिधानों, भोजन, त्योहारों एवं परंपराओं की विविधता है।
  2. विभिन्न क्षेत्रों में विविधता दृष्टिगोचर होती है, परंतु इसमें अंतर्निहित एकता भी है।
  3. ★भारतीय एकता, विविधता का उत्सव मनाती है क्योंकि विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।

⚡ अंतिम दस मिनट — केवल यह पढ़िए

प्रश्नउत्तर
दो उद्धरण किसके?रवींद्रनाथ टैगोर और श्री अरविंद
‘एक में अनेक’ किसका पद?श्री अरविंद का — और यही अध्याय का शीर्षक है
भारत के निवासी1.4 अरब से भी अधिक
विश्व की जनसंख्या में भागलगभग 18 प्रतिशत
सर्वेक्षण किसने कियाभारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण
परियोजना का नाम‘भारत के लोग’
कब20वीं शताब्दी के अंत में
समुदाय4,635
भाषाएँ325
लिपियाँ25
‘प्रवासी’ किसे कहा जा सकता हैजो अपने जन्म स्थान के निकट या मूल समुदाय के साथ नहीं रहते
विंसेंट स्मिथ कौन थेब्रिटिश इतिहासकार — जिन्होंने ‘विविधता में एकता’ वाला उत्तर दिया
‘मुख्य अनाज’चावल · जौ · गेहूँ · बाजरा · ज्वार · रागी और दालें
सामान्य मसालेहल्दी · जीरा · इलायची · अदरक
साड़ी की सामग्रीकपास · रेशम; आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) भी
रेशमी साड़ियों के प्रकारबनारसी · कांजीवरम · पैठनी · पाटन पटोला · मूगा · मैसूर
साड़ी की विशेषतायह बिना सिला वस्त्र है
चित्र 8.2 कहाँ सेवैशाली (आज का बिहार), कुछ शताब्दी सा.सं.पू.
‘उकेरी गई आकृति’एक डिजाइन जो समतल सतह के ऊपर उकेरी गई हो
‘छींट’ क्या हैएक सूती कपड़े पर छपा हुआ डिजाइन
छींट कब लोकप्रिय हुआ17वीं शताब्दी में, यूरोप में
किसने प्रतिबंध लगायाइंग्लैंड और फ्रांस — अपने उत्पादों के संरक्षण के लिए
साड़ी के छह उपयोगझूला · मछली का जाल · अनाज ओसाना · सिर की गद्दी · वर्षा से बचाव · बिछौना
मकर संक्रांति कब14 जनवरी के आस-पास
यह किसका सूचक हैफसलों की कटाई का
कितने नामतेरह (चित्र 8.5)
कुछ नामलोहड़ी · माघ बिहू · उत्तरायण · पोंगल · खिचड़ी पर्व · पेड्डा पंडुगा
पंचतंत्र क्या हैपशुओं के माध्यम से कथाओं का संग्रह, जो जीवन-कौशल सिखाता है
पंचतंत्र की आयुमूल संस्कृत पाठ लगभग 2,200 वर्ष पुराना
पंचतंत्र के रूपांतरण50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक
‘महाकाव्य’ क्या हैएक लंबी कविता जो अतीत के महान नायकों एवं योद्धाओं की कथाओं का व्याख्यान करती है
दो महाकाव्यरामायण और महाभारत
उनका आकारमूल संस्करण में लगभग 7,000 पृष्ठ
चित्र 8.6युद्धकांड · साहिबदीन · मेवाड़ · 1652 · इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदन
तमिलनाडु में महाभारत के लोक स्वरूप100 से अधिक
कौन-सी जनजातियाँ बताई गईंभील · गोंड · मुंडा; और इरूला (चित्र 8.7)
के.एस. सिंह कौनमानवविज्ञानी, ‘भारत के लोग’ परियोजना के निर्देशक
उनका कथन“लोककथाओं के अनुसार इस देश में शायद ही ऐसा कोई स्थान हो जहाँ महानायक पांडव न गए हों।”
अध्याय की अंतिम बात“विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”

और अंत में यह याद रखिए — तेरह नाम, एक त्योहार। सैकड़ों रूप, एक साड़ी। सौ कहानियाँ, एक महाभारत। यही ‘एक में अनेक’ है।