अध्याय 3स्थलरूप एवं जीवन

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NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 3, पृ. 41–58

हर पद पुस्तक के अपने शब्दों में है। पर्याय मत लिखिए।


एक वाक्य में पूरा अध्याय

पृथ्वी की सतह तीन मुख्य रूप लेती है — पर्वत, पठार और मैदान — और मनुष्य ने हर रूप के अनुसार स्वयं को ढाल लिया है; हर स्थलरूप अपने साथ चुनौतियाँ भी लाता है और अवसर भी।

और अध्याय का साँचा — यह तीन बार लौटता है

चरणपर्वतपठारमैदान
परिभाषाआस-पास से ऊँचा; चौड़ा आधार, खड़ी ढलान, सँकरे शिखरउठा हुआ, सतह प्राय: चपटी, कुछ पार्श्व सीधी ढलान वालेविस्तृत सपाट/हल्का तरंगित; समुद्र तल से 300 मी. से अधिक नहीं
परिवेशपर्वतीय वन, शंकुधारी वृक्ष; ऊपर घास, मॉस, लाइकेनचट्टानी मिट्टी (लावा पठार में काली मिट्टी)उपजाऊ मिट्टी; विविध वनस्पति और जीव-जंतु
जीवनघाटियों में कृषि, वेदिका कृषि, पशुपालन, पर्यटनखनन मुख्य गतिविधिकृषि मुख्य व्यवसाय; मत्स्य पालन
चुनौतियाँबाढ़, भूस्खलन, हिमस्खलन, हिमपात, ठंड, पर्यटकों का दबावकृषि के लिए कम अनुकूलगिरता भूमिगत जलस्तर, जनसंख्या, प्रदूषण

अध्याय के दो महत्वपूर्ण प्रश्न (पृ. 41)

  1. स्थलरूपों के प्रमुख प्रकार कौन-से हैं और जीवन तथा संस्कृति के लिए इनका क्या महत्व है?
  2. प्रत्येक स्थलरूप के साथ संबंधित जीवन की क्या चुनौतियाँ एवं अवसर हैं?

इनसे बाहर की कोई बात इस अध्याय में नहीं है।

भाग 1 — स्थलरूप की मूल बातें (पृ. 42)

  • स्थलरूप = पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप।
  • स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं।
  • पर्यावरण तथा जीवन के साथ इनका महत्वपूर्ण संबंध है।
  • तीन श्रेणियाँ — पर्वत, पठार और मैदान (चित्र 3.1)।
  • हर स्थलरूप में अलग जलवायु, अलग पेड़-पौधे, अलग जीव-जंतु।
  • मानव ने सभी स्थलरूपों के अनुसार स्वयं को ढाला है, पर रहने वालों की संख्या भिन्न-भिन्न है।

दो माप-पद

पदपरिभाषा
तुंगता (एल्टीट्यूड)समुद्र तल से किसी वस्तु/लक्ष्य की ऊँचाई — पर्वत की, उड़ती चिड़िया या वायुयान की, उपग्रह की
समुद्र तलसमुद्र की सतह का औसत स्तर; ‘माध्य समुद्र तल’ भी कहते हैं

🧭 अध्याय की यात्रा — यही अभ्यास-प्रश्न 2 है

पड़ावराज्यस्थलरूप
छोटा नागपुरझारखंडपठार
प्रयागराजउत्तर प्रदेशमैदान
अल्मोड़ाउत्तराखंडपर्वत

भाग 2 — पर्वत (पृ. 42–43)

परिभाषा और तीन पहचान

पर्वत वे स्थलरूप हैं जो आस-पास की भूमि से कुछ अधिक ऊँचे होते हैं — चौड़ा आधार • खड़ी ढलान (चढ़ाई) • सँकरे शिखर (चोटियाँ)

पर्वत बनाम पहाड़ी — सबसे आम भ्रम★

पर्वतपहाड़ी (छोटे पहाड़ / हिल)
ऊँचाईअधिककम
चढ़ाईखड़ीकम खड़ी
शीर्षसँकरे शिखरगोल आकार

हिम, तुंगता और नदियाँ

  • ग्रीष्म ऋतु में कम तुंगता पर हिम पिघल जाती है → जल बनकर नदियों में पहुँचती है।
  • बहुत अधिक ऊँचाइयों पर हिम कभी नहीं पिघलती → ये पर्वत स्थायी रूप से हिम से ढँके रहते हैं।
  • वर्षण = वायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल का गिरना → वर्षा, हिमपात, ओले।
  • हिम और ओले का गिरना वास्तव में जल का ठोस रूप में गिरना है।

भाग 3 — विश्व के छह पर्वत और शृंखलाएँ (पृ. 44–46)

पर्वत शृंखलाएँ

  • विश्व के अधिकांश पर्वत पर्वत शृंखलाओं के रूप में वर्गीकृत हैं।
  • एशिया — हिमालय • यूरोप — आल्प्स • दक्षिणी अमेरिका — एंडीज
  • कुछ शृंखलाएँ हजारों किलोमीटर तक फैली हैं।

छह पर्वत — यह तालिका पूरी परीक्षा-योग्य है★

गिरिशृंगस्थितिविशेषता
एवरेस्टनेपाल तथा तिब्बत के बीचहिमालय की सबसे ऊँची चोटियों में; 8848 मीटर
कंचनजुंगासिक्किम (भारत) और नेपाल के बीचहिमालय की दो सबसे ऊँची चोटियों में दूसरी
अकोंकागुआदक्षिणी अमेरिकाएंडीज की सबसे ऊँची चोटी
किलिमंजारोपूर्वी अफ्रीकापृथक पर्वत — किसी शृंखला का भाग नहीं
ब्लांकपश्चिमी यूरोपआल्प्स का सबसे ऊँचा शिखर
अनाईमुडीकेरलदक्षिण भारत का सबसे ऊँचा; ‘अनाई शिखर’ भी

चित्र 3.3 केवल सापेक्ष ऊँचाई दिखाता है। पुस्तक ने एवरेस्ट के अतिरिक्त किसी की ऊँचाई अंकों में नहीं दी — इसलिए वैसा कोई प्रश्न बनता ही नहीं।

नवीन बनाम प्राचीन पर्वत★

नवीन (युवा)प्राचीन
उदाहरणहिमालयअरावली शृंखला
ऊँचाईऊँचेछोटे
चोटियाँनुकीलीगोलाकार
कारणहाल ही में निर्मितअपरदन से घिसकर गोल
  • हिमालय नवीन है, फिर भी उसे बने लाखों वर्ष हो चुके हैं।
  • उन्नयन और अपरदन आज भी चल रहे हैं; हिमालय की ऊँचाई आज भी बढ़ रही है।

भाग 4 — पर्वतीय परिवेश (पृ. 46–48)

वनस्पति — ऊँचाई के साथ बदलती है

शंकुधारी वन → (और ऊपर) → घास, मॉस, लाइकेन

  • पर्वतीय वन — पर्वतों की ढलानों पर उगने वाले वनों का एक प्रकार।
  • शंकुधारी वृक्ष — पाइन (चीड़), फर, स्प्रूस, देवदार; ऊँचे, शंकु के आकार, पत्तियाँ पतली, नोंकदार।
  • मॉस (काई) — फूलों और वास्तविक जड़ों से रहित छोटा हरा पौधा; मखमली आवरण की तरह फैलता है।
  • लाइकेन — पौधे के समान जीव, जो चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपके होते हैं।

जीव-जंतु (पृ. 48)

पर्वतों में घने वन, बहती नदियाँ, झीलें, घास के मैदान और कंदराएँ अनेक जीवों को आश्रय देते हैं — गोल्डन ईगल (सुनहरा गरुड़) · पेरेग्रिन फाल्कन (घुमंतू बाज) · कैनेडियन लिंक्स · हिम तेंदुआ · आइबेक्स (जंगली भेड) · हिमालयन तहर · पर्वतीय खरगोश · याक · ग्रे फॉक्स · भालू

गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (बॉक्स, पृ. 48)★

नदीस्रोतसंबंध
गंगाहिमालयहिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में विशालतम; लगभग 2500 कि.मी.
यमुनाहिमालयगंगा की सहायक नदी
घाघराहिमालयगंगा की सहायक नदी
सोनविंध्यांचल की शृंखलाएँ (गंगा के मैदान के दक्षिण में)गंगा की सहायक

सहायक नदी = मुख्य नदी में आकर मिलने वाली अन्य नदी। इसीलिए “गंगा, यमुना की सहायक नदी है” गलत है — उलटा है।

कालिदास का ‘कुमारसंभव’ (पृ. 46)

  • कम से कम 1500 वर्ष पूर्व के महान कवि कालिदास।
  • ग्रंथ ‘कुमारसंभव’ हिमालय की स्तुति से आरंभ होता है।
  • हिमालय = पर्वतों का राजा, जो पश्चिमी से पूर्वी समुद्र तक फैला है; पृथ्वी को नापने का मापदंड।

भाग 5 — पर्वतीय जीवन (पृ. 49)

कृषि

  • पर्वतीय भूभाग खड़े ढलानों के साथ ऊबड़-खाबड़ → कुछ ही घाटियों में नियमित कृषि।
  • वेदिका कृषि = ढलान की भूमि को काटकर सीढ़ीनुमा स्थान पर कृषि करना।
  • अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की जगह पशुपालन को अधिक महत्व दिया जाता है।

पर्यटन — एक ही चीज़, दोनों पक्ष★

अवसरचुनौती
आय का महत्वपूर्ण साधनबहुत सारे पर्यटक एक साथ आते हैं
स्वच्छ हवा, मनोरम प्राकृतिक दृश्यपर्वतों के पर्यावरण पर दबाव
स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण, पैरा ग्लाइडिंगसही संतुलन बनाए रखना कठिन
शताब्दियों से तीर्थयात्रा

दो पर्वतारोही — चार वर्ष अलग-अलग रखिए

नामउपलब्धिसम्मान
बछेंद्री पाल1984 में एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला; महिला अभियानों का नेतृत्वपद्मश्री 1984, पद्मभूषण 2019
अरुणिमा सिन्हा22 वर्ष की आयु में दुर्घटना में एक पैर गया; 2013 में एवरेस्ट; विंसन सहित सभी महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियाँपद्मश्री 2015

अरुणिमा को बछेंद्री पाल से ही प्रोत्साहन और प्रशिक्षण मिला था।

भाग 6 — पर्वतीय चुनौतियाँ (पृ. 50)★

चार परिभाषाएँ — चारों परीक्षा-योग्य

पदपरिभाषा
आकस्मिक बाढ़स्थान विशेष में अकस्मात बाढ़ आना; बहुधा बादल फटने से
भूस्खलनपर्वतीय भूखंड के एक बड़े भाग या एक चट्टान का अकस्मात टूटकर गिरना
हिमस्खलन (एवलांश)पर्वत से अकस्मात हिम का गिरना; प्राय: तब जब हिम का पिघलना आरंभ होता है
बादल फटनाअचानक प्रचंड तूफ़ान सहित वर्षा होना

दो कारण-श्रृंखलाएँ — दीर्घ उत्तर में यही अंक दिलाती हैं

बादल फटना → आकस्मिक बाढ़ हिम का पिघलना आरंभ होना → हिमस्खलन

सात चुनौतियाँ — छह प्राकृतिक, एक मानव-निर्मित

प्राकृतिकमानव-निर्मित
आकस्मिक बाढ़ · भूस्खलन · हिमस्खलन (एवलांश) · भारी हिमपात · बादल फटना · ठंडा मौसमपर्यटकों का अनियंत्रित रूप से आ जाना

पर्वत और पवित्रता (पृ. 51)

  • विश्व-भर के अनेक पारंपरिक समुदाय पर्वतों को पवित्र मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं।
  • एवरेस्ट — 8848 मीटर, विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर।
  • चोमोलुंगमा — तिब्बती नाम, अर्थ ‘जगत जननी’।
  • सागरमाथा — नेपाली नाम, अर्थ ‘आकाश की देवी’।
  • कैलाश पर्वत (तिब्बत) — हिंदू दर्शन, बौद्ध मत, जैन मत और बॉन के अनुयायी पवित्र मानते हैं।

भाग 7 — पठार (पृ. 51–52)

परिभाषा

  • आस-पास की भूमि से उठी स्थलाकृति, सतह प्राय: चपटी।
  • कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले।
  • कुछ पठार नवीन, कुछ प्राचीन।
  • ऊँचाई कुछ सौ मीटर से कई हजार मीटर तक।

दो पठार जो नाम से याद रखने हैं

पठारतथ्य
तिब्बत का पठारविश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा; औसत ऊँचाई 4500 मीटर; इसीलिए ‘विश्व की छत’; पूर्व-पश्चिम लगभग 2500 किलोमीटर (= चंडीगढ़ से कन्याकुमारी की दूरी)
दक्कन का पठारमध्य और दक्षिण भारत; विश्व के सबसे पुराने पठारों में से एक; कई लाख वर्ष पहले ज्वालामुखी की सक्रियता से बना

पुस्तक दूसरा उदाहरण ‘दक्षिणी पठार’ भी देती है।

खनिज — पठार का सबसे बड़ा तथ्य★

  • पठारों में खनिजों का प्रचुर जमाव → इन्हें ‘खनिजों का भंडार-गृह’ कहा जाता है।
  • खनन पठारों की मुख्य गतिविधि है; विश्व की सबसे बड़ी खानें यहीं मिलती हैं।
पठारखनिज
पूर्वी अफ्रीका का पठारसोना और हीरा
छोटा नागपुर का पठारलौह, कोयला और मैंगनीज

कृषि — नियम और उसका अपवाद★

मिट्टीकृषि
अधिकांश पठारचट्टानी मिट्टीकम अनुकूल
लावा पठार (ज्वालामुखी क्रियाओं से निर्मित)समृद्ध काली मिट्टीउपजाऊ

चार जल प्रपात

जल प्रपातनदीस्थान
विक्टोरियाजम्बेजीअफ्रीका
हुंडरूसुवर्ण रेखाछोटा नागपुर पठार
जोगशरावतीपश्चिमी घाट
नहकालीकाई—चेरापूंजी (मेघालय) — 340 मीटर की ऊँचाई से गिरता है

भाग 8 — मैदान (पृ. 53–56) सबसे अधिक अंक वाला भाग★

परिभाषा

  • विस्तृत सपाट अथवा हल्का तरंगित धरातल।
  • कोई ऊँची पहाड़ियाँ अथवा गहरी घाटियाँ नहीं।
  • सामान्यत: समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं।

मैदान कैसे बनते हैं — इसी क्रम में लिखिए★

पर्वत शृंखलाओं से नदियाँ निकलती हैं → उनकी बाढ़ से समतल भूमि बनती है → नदियाँ रेत, चट्टानों के कण और गाद एकत्र करती हैं (= तलछट) → उन्हें बहाकर समतल भूमि में जमा कर देती हैं → मिट्टी उपजाऊ बनती है → मैदान सभी प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त हो जाते हैं → लोगों का मुख्य आर्थिक व्यवसाय कृषि हो जाता है।

  • तलछट = रेत + चट्टानों के कण + गाद।
  • मैदान विविध प्रकार की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का भी भरण-पोषण करते हैं।

मैदानी जीवन

  • हजारों वर्ष पहले आरंभिक सभ्यताएँ नदियों के उपजाऊ मैदानों के आस-पास विकसित हुई थीं।
  • आज भी विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में रहती है।
  • भारत की कुल जनसंख्या की एक-चौथाई से अधिक — लगभग 40 करोड़ — गंगा के मैदान में रहती है।
  • मुख्य व्यवसाय — मत्स्य पालन और कृषि।
फसल-वर्गनाम
खाद्य फसलेंचावल, गेहूँ, मक्का, जौ, मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी)
रेशेदार फसलेंकपास, जूट और सन

सिंचाई — फिर वही दो पक्ष★

लाभकीमत
परंपरागत कृषि वर्षा पर निर्भर थीभूमिगत जलस्तर में गिरावट
अब नहरों का जाल (नेटवर्क)कृषि के भविष्य पर चुनौतीपूर्ण स्थिति
भूमिगत जल पंप से निकालकर सिंचाईअन्य समस्याएँ — बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण
कृषि उत्पादन में वृद्धि

नदियाँ और संस्कृति

  • विश्व में बहने वाली नदियाँ बहुत से सांस्कृतिक मूल्यों का वहन करती हैं।
  • बहुत से समुदाय नदी के स्रोत और संगम स्थल को पवित्र मानते हैं।
  • भारत में इन स्थानों पर त्योहार, समारोह और धार्मिक कृत्य किए जाते हैं।
  • संगम स्थल = दो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान।
  • मैदान में हल्की ढलान → नौका-संचालन सुगम → आर्थिक गतिविधियों को सहायता।

भाग 9 — मरुस्थल : चौथा स्थलरूप (पृ. 56)

पुस्तक स्वयं कहती है कि तीन श्रेणियाँ पर्याप्त नहीं हैं।

  • मरुस्थल यदा-कदा वर्षा प्राप्त करते हैं; दूर-दूर तक शुष्कता का फैलाव।
  • उनका वनस्पति जगत और प्राणि जगत विलक्षण होता है।
प्रकारउदाहरण
गर्मसहारा (अफ्रीका) • थार (भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में)
ठंडागोबी (एशिया)
विशेषज्ञों का मतकुछ अंटार्कटिक महाद्वीप को भी मरुस्थल मानते हैं
  • कठिन परिस्थितियों के बाद भी लोगों ने मरुस्थलों के पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढाल लिया है।
  • थार के समुदाय लोक गीतों और किंवदंतियों या दंत कथाओं जैसी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर सँजोकर रखते हैं।

अध्याय का समापन-वाक्य★

“मानव ने जिस प्रकार सभी स्थलाकृतियों में विभिन्न प्रकार से अपने घर बनाए हैं, वह हमारे अनुकूलन अर्थात स्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेने और लचीलेपन का साक्षी है।”

  • अनुकूलन = स्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेना।
  • लचीलापन (रेजिलियंस) = चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने अथवा उनके अनुसार ढलने की क्षमता।

भाग 10 — तमिल संगम की पाँच तिणै (पृ. 57)

तिणैदृश्यभूमिमुख्य व्यवसाय
कुरिंजीपर्वतीय क्षेत्रआखेट और संग्रह करना
मुल्लाईघास के मैदान और वनपशु पालन
मरूदमउपजाऊ कृषि के मैदानकृषि
नेयदलतटीय क्षेत्रमत्स्य पालन और समुद्री यात्रा
पालैशुष्क, मरुस्थल जैसे प्रदेशघुमंतू और युद्धरत
  • ये भिन्न प्रकार का वर्गीकरण हैं।
  • ये विविधता वाले प्रदेशों और उनकी विशेषताओं के प्रति गहन जागरूकता दिखाते हैं।
  • ये हमारे और पर्यावरण के बीच गहन संबंध को दर्शाते हैं।

! पुस्तक का अपना निर्देश: “आपको तिणै के विवरण को याद रखने की आवश्यकता नहीं है, परंतु उससे प्रतिबिंबित अवधारणाओं को समझने की आवश्यकता है।”

पुस्तक का अपना सार — “आगे बढ़ने से पहले…” (पृ. 57)

  1. स्थलरूप तीन प्रकार के होते हैं — पर्वत, पठार और मैदान। उनकी भौतिक विशेषताएँ और पर्यावरण बहुत अलग-अलग प्रकार के होते हैं।
  2. ऐतिहासिक समय से लोगों द्वारा किए जाने वाले क्रियाकलाप उस स्थलरूप से संबधित होते हैं जिसमें वे निवास करते हैं। ये स्थलरूप विश्व की संस्कृति के अभिन्न भाग हैं; विशेष रूप से भारतीय संस्कृति विविध प्रकार से उन्हें मनाती रही है।
  3. प्रत्येक स्थलरूप, विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के साथ-साथ अवसरों को भी प्रस्तुत करता है।

दीर्घ उत्तर का आरंभ और अंत इन्हीं तीन वाक्यों से कीजिए।

अंतिम दस मिनट — रटने की सूची

संख्याएँ एवरेस्ट 8848 मी. · तिब्बत का पठार 4500 मी. औसत, लगभग 2500 कि.मी. पूर्व-पश्चिम · गंगा लगभग 2500 कि.मी. · नहकालीकाई 340 मी. · मैदान 300 मी. से अधिक नहीं · गंगा का मैदान लगभग 40 करोड़ (जनसंख्या का एक-चौथाई से अधिक) · कालिदास 1500 वर्ष पूर्व · बछेंद्री पाल 1984 / 1984 / 2019 · अरुणिमा सिन्हा 22 वर्ष / 2013 / 2015

जोड़ियाँ हिमालय–नुकीली/नवीन · अरावली–गोल/प्राचीन · किलिमंजारो–पृथक · ब्लांक–आल्प्स · अकोंकागुआ–एंडीज · अनाईमुडी–दक्षिण भारत · यमुना–गंगा की सहायक · सोन–विंध्यांचल · छोटा नागपुर–लौह/कोयला/मैंगनीज · पूर्वी अफ्रीका–सोना/हीरा · जोग–शरावती · हुंडरू–सुवर्ण रेखा · विक्टोरिया–जम्बेजी · नहकालीकाई–चेरापूंजी · गोबी–ठंडा · सहारा व थार–गर्म · चोमोलुंगमा–तिब्बती · सागरमाथा–नेपाली

परिभाषाएँ जो शब्दश: याद हों स्थलरूप · तुंगता · समुद्र तल · पर्वत · पहाड़ी · वर्षण · मॉस · लाइकेन · भूभाग · घाटी · आकस्मिक बाढ़ · भूस्खलन · हिमस्खलन · बादल फटना · पठार · मैदान · तलछट · सहायक नदी · संगम स्थल · लचीलापन

पाँच जालियाँ जिनमें बच्चे गिरते हैं

  1. पर्वत और पहाड़ी को एक मान लेना।
  2. हिमालय की चोटियाँ गोल बता देना।
  3. भूस्खलन और हिमस्खलन को उलट देना।
  4. गंगा को यमुना की सहायक कह देना।
  5. सभी मरुस्थल गर्म मान लेना (गोबी ठंडा है)।