हर पद पुस्तक के अपने शब्दों में है। पर्याय मत लिखिए।
एक वाक्य में पूरा अध्याय
यह अध्याय इतिहास नहीं पढ़ाता — वह इतिहास पढ़ने के औज़ार देता है: समय नापने का तरीक़ा (सा.सं.पू./सा.सं., शताब्दी, सहस्राब्दी) और अतीत का पता लगाने के स्रोत — और फिर आदिमानव की कहानी पर उन्हें आज़माता है।
अध्याय का ढाँचा — चार भाग, चार प्रश्न
| भाग | प्रश्न | पृष्ठ |
|---|---|---|
| 1 | अतीत का अध्ययन कौन और कैसे करता है? | 60–61 |
| 2 | ★समय की गणना कैसे होती है? | 61–65 |
| 3 | इतिहास के स्रोत क्या-क्या हैं? | 65–69 |
| 4 | आदिमानव कैसे रहते थे? | 70–73 |
अध्याय के तीन महत्वपूर्ण प्रश्न (पृ. 59)
- हम ऐतिहासिक काल की गणना किस प्रकार करते हैं?
- इतिहास को समझने के लिए विभिन्न स्रोत हमारी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?
- आदिमानव किस प्रकार रहते थे?
उद्धरण (पृ. 59): इतिहास “अतीत एवं वर्तमान के मध्य एक अनवरत संवाद है।” — ई.एच. कार
भाग 1 — इतिहास और उसके अध्ययनकर्ता (पृ. 60–61)
- इतिहास = मानव के अतीत का अध्ययन।
- पृथ्वी का इतिहास बहुत लंबा है, और उसमें मानवों का इतिहास नवीनतम और एक छोटा-सा भाग है।
चार विशेषज्ञ — यह तालिका पूरी परीक्षा-योग्य है★
| विशेषज्ञ | क्या अध्ययन करते हैं |
|---|---|
| भू-विज्ञानी | पृथ्वी के भौतिक स्वरूप — मृदा, पत्थर, पहाड़ियाँ, पर्वत, नदियाँ, महासागर |
| जीवाश्म विज्ञानी | जीवाश्म — करोड़ों वर्ष पूर्व के पेड़ों, पशुओं एवं मानवों के अवशेष |
| मानव विज्ञानी | मानव समाज एवं संस्कृतियाँ, अतीत से लेकर वर्तमान तक |
| पुरातत्व विज्ञानी | उत्खनन से प्राप्त अवशेष — उपकरण, घड़े, पात्र, मनके, मूर्तियाँ, खिलौने, हड्डियाँ, दाँत, जले हुए अनाज, घरों एवं ईंटों के हिस्से |
तीन परिभाषाएँ
| पद | अर्थ |
|---|---|
| जीवाश्म | जीव-जंतुओं के पदचिह्न या पौधों के अवशेष चिह्न, जो मृदा अथवा शिलाओं की परतों के बीच संरक्षित पाए जाते हैं |
| इतिहासकार | ऐसा व्यक्ति जो अतीत का अध्ययन करता है एवं उसके विषय में लिखता है |
| आनुवांशिकी | जीव विज्ञान की वह शाखा जो अध्ययन करती है कि गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कैसे पहुँचते हैं |
चित्र 4.1 (पृ. 60) — पृथ्वी पर जीवन की समय-रेखा
| मान | घटना |
|---|---|
| 4.54 अरब वर्ष पूर्व | पृथ्वी; प्रथम कोशिकाएँ |
| 2.33 अरब वर्ष पूर्व | वातावरणीय ऑक्सीजन |
| 1,00,00,000 वर्ष पूर्व | आदिमानव |
| 10,00,000 वर्ष पूर्व | अग्नि |
| 3,00,000 वर्ष पूर्व | होमो सेपियंस (मानव) |
| 6,500 वर्ष पूर्व | लेखन |
यह चित्र अनुपात दिखाने के लिए है, संख्याएँ रटाने के लिए नहीं। केवल 3,00,000 याद रखिए — वही पाठ में भी दोहराया गया है।
भाग 2 — समय की गणना सबसे अधिक अंक वाला भाग (पृ. 61–65)★
युग और कैलेंडर
- प्रत्येक समाज एवं संस्कृति के पास समय की गणना करने की अपनी प्रणालियाँ रही हैं।
- युग = समय का एक निश्चित कालखंड। किसी व्यक्ति विशेष का जन्म अथवा किसी शासक के शासन का आरंभ नया युग माना जाता रहा है।
- भारत में ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, चीनी तिथिपत्र भी चलते हैं।
ग्रेगोरियन कैलेंडर और अधिवर्ष
| बात | विवरण |
|---|---|
| दिन और माह | 365 दिन मिलकर बारह माह |
| अधिवर्ष | प्रत्येक चार वर्ष में एक |
| शताब्दी वर्ष का नियम | तभी अधिवर्ष जब 400 से विभाजित हो सकें |
| परिणाम | 1800, 1900, 2000 में से केवल 2000 ही लीप वर्ष है |
सा.सं.पू. और सा.सं.★
| पहले | अब (अंग्रेज़ी) | इस पुस्तक में |
|---|---|---|
| ए.डी. (लैटिन शब्द-संक्षेप, ईसा के जन्म के बाद) | सी.ई. — कॉमन एरा | सा.सं. — सामान्य संवत |
| बी.सी. | बी.सी.ई. — बिफोर कॉमन एरा | सा.सं.पू. — सामान्य संवत पूर्व |
- सा.सं. — ईसा मसीह के जन्म वर्ष से आगे के वर्ष।
- सा.सं.पू. — उससे पूर्व के वर्ष, गिनती उल्टे (अवरोही) क्रम में।
- उदाहरण: भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ — 1947 ई. / ई. सन् 1947 / 1947 सी.ई.
शून्य वर्ष और अध्याय का एकमात्र सूत्र★★
- ग्रेगोरियन तिथिपत्र में कोई भी वर्ष ‘शून्य’ के रूप में चिह्नित नहीं है।
- वर्ष 1 सा.सं., 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद आता है।
- इसीलिए 2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक केवल 3 वर्ष होते हैं।
सूत्र
किसी भी सा.सं.पू. तथा सा.सं. की तिथियों के बीच के वर्षों की गणना करते समय सदैव दोनों को जोड़कर उनके योग में से 1 घटा देना चाहिए।
2 + 2 − 1 = 3 · और 560 + 2024 − 1 = 2583
अर्थ: यदि हम 2024 सा.सं. में हैं, तो 560 सा.सं.पू. में जन्मे बुद्ध का जन्म 2583 वर्ष पूर्व हुआ था।
सूत्र कबनहीं लगता — यहीं आधी कक्षा गिरती हैध्यान
| स्थिति | क्या करें | उदाहरण |
|---|---|---|
| एक तिथि सा.सं.पू., दूसरी सा.सं. | जोड़िए, फिर 1 घटाइए | 560 + 2024 − 1 = 2583 |
| दोनों सा.सं.पू. | सीधा घटाइए | 560 − 320 = 240 |
| दोनों सा.सं. | सीधा घटाइए | 1947 − 1828 = 119 |
कारण याद रखिए: −1 इसलिए घटता है क्योंकि शून्य वर्ष नहीं है — और वह समस्या तभी आती है जब आप शून्य के आर-पार जा रहे हों। एक ही ओर की दो तिथियों में शून्य बीच में आता ही नहीं।
समय-रेखा
- समय-रेखा घटनाओं को चिह्नित करने का सुविधाजनक उपकरण है, क्योंकि यह तिथियों और घटनाओं का अनुक्रम दिखाती है।
- बिंदुकृत हिस्सा छोड़े गए कालखंड को दर्शाता है — अन्यथा चित्र 4.3 की समय-रेखा लगभग 3 मीटर लंबी हो जाती।
- तिथियाँ देखे बिना भी क्रम दिख जाता है — जैसे बुद्ध का जन्म ईसा मसीह के जन्म से पहले हुआ था।
दशक, शताब्दी, सहस्राब्दी★
| इकाई | वर्ष | वर्तमान | सीमा |
|---|---|---|---|
| दशक | 10 | — | — |
| शताब्दी | 100 | 21वीं | 2001 से 2100 |
| सहस्राब्दी | 1000 | तीसरी | 2001 से 3000 |
सा.सं.पू. में गिनती उल्टी चलती है — 1 सा.सं.पू. से पीछे की ओर:
| इकाई | सीमा |
|---|---|
| तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. | 300 से 201 सा.सं.पू. |
| प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. | 1 से 1000 सा.सं.पू. |
| आठवीं सहस्राब्दी सा.सं.पू. | 8000 से 7001 सा.सं.पू. |
| 20वीं शताब्दी सा.सं. | 1901 से 2000 |
पंचांग — भारत की अपनी प्रणाली
- अनेक भारतीय तिथिपत्र महीनों एवं दिनों के निर्धारण के लिए सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
- ‘पंचांग’ तालिकाओं की एक पुस्तक है जिसमें प्रत्येक माह के दिनों के साथ-साथ संबंधित खगोलीय आँकड़े सूचीबद्ध किए जाते हैं।
- यह सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, सूर्योदय एवं सूर्यास्त का सटीक आकलन करता है।
- मौसम के पूर्वानुमान, त्योहारों की तिथियों और समय-निर्धारण के लिए आज भी भारत में इसका बड़े स्तर पर उपयोग होता है।
भाग 3 — इतिहास के स्रोत (पृ. 65–69)
परिभाषा
इतिहास का स्रोत = कोई स्थान, व्यक्ति, लेख अथवा वस्तु, जिसके माध्यम से हम अतीत की किसी घटना अथवा कालखंड से संबंधित जानकारी एकत्र करते हैं।
अध्याय का हृदय — जिग्सॉ वाला विचार (पृ. 67)★
प्रत्येक वस्तु अथवा संरचना एक कहानी बताती है और वह चित्र-खंड पहेली (जिग्सॉ) के हिस्से की तरह होती है… एक बात सदैव याद रखनी चाहिए कि इतिहास के मामले में पहेली के कुछ हिस्से गायब रह सकते हैं।
चार श्रेणियाँ — आरेख (पृ. 67)★★
| श्रेणी | उप-शाखा | उसमें क्या आता है |
|---|---|---|
| 1. पुरातात्विक स्रोत | शिलालेख | पांडुलिपि · ताम्रपत्र · सिक्के |
| संरचना | स्मारक · टीला | |
| उत्खनन | मानव, पशु तथा पौधों के अवशेष · उपकरण एवं हथियार · मूर्तियाँ एवं आभूषण · मृदभांड एवं खिलौने · निवास स्थान एवं शवाधान | |
| 2. मौखिक स्रोत | — | वंशावली · लोक साहित्य |
| 3. साहित्यिक स्रोत | भारतीय साहित्य | वेद एवं इतिहास · कविता एवं नाटक · ऐतिहासिक लेख · कहानियों का संग्रह · वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेख |
| विदेशी विवरण | यात्रा वृत्तांत · ऐतिहासिक वृत्तांत | |
| 4. कलात्मक स्रोत | — | चित्रकला · मूर्तिकला · पट्टिका (पैनल) |
! पुस्तक की अपनी छूट (पृ. 68): “आपको अभी इन सभी को याद रखने की आवश्यकता नहीं है।” चार श्रेणियाँ और उनके उदाहरण पर्याप्त हैं — पूरा आरेख रटने की चीज़ नहीं है।
इतिहासकार कैसे काम करता है (पृ. 68)★
अधिक से अधिक स्रोतों से जानकारी संकलित → कभी स्रोत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं (टुकड़े मेल खाते हैं), कभी विपरीत सूचना देते हैं (टुकड़े मेल नहीं खाते) → तब निर्णय लेना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए → इस प्रकार इतिहास का पुनर्निर्माण होता है।
इतिहास में कौन-कौन योगदान देता है
| कौन | क्या करता है |
|---|---|
| इतिहासकार | अतीत का अध्ययन एवं लेखन |
| पुरातत्व विज्ञानी | उत्खनन |
| पुरालेखशास्त्री | प्राचीन अभिलेख पढ़ना |
| मानव विज्ञानी | मानव समाज व संस्कृतियों का अध्ययन |
| साहित्य व भाषा के विशेषज्ञ | — |
पिछले 50 वर्षों में वैज्ञानिक अध्ययनों का योगदान बढ़ा है: प्राचीन जलवायु का अध्ययन · उत्खनित सामग्री का रासायनिक अध्ययन · प्राचीन मानव की आनुवांशिकी — जिसने एक नया दृष्टिकोण दिया है और पूरक स्रोत दिए हैं।
आधुनिक इतिहास (साधारणत: पिछली दो अथवा तीन शताब्दियों का इतिहास) के लिए — समाचार-पत्र; और पिछले कुछ दशकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टी.वी., इंटरनेट)।
भाग 4 — मानव इतिहास का प्रारंभ (पृ. 70–73)
आदिमानव का जीवन
- मानव (होमो सेपियंस) लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व से पृथ्वी पर रह रहे हैं — फिर भी यह पृथ्वी के इतिहास का एक छोटा-सा अंश मात्र है।
- आदिमानव को प्रकृति से अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
- एक-दूसरे की सहायता करने के लिए वे टोलियों अथवा समूहों में रहते थे।
- वे मुख्यत: आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे; भोजन एवं आश्रय की निरंतर खोज करते रहते थे।
- वे अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों अथवा गुफाओं में रहते थे।
- वे जिन भाषाओं में संवाद करते थे, वे अब लुप्त हो चुकी हैं।
- उनके प्राकृतिक तत्वों को लेकर कुछ विश्वास थे, और संभवत: मरणोपरांत जीवन को लेकर भी कुछ धारणाएँ थीं।
उनकी उपलब्धियाँ
- अग्नि का उपयोग किया।
- पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियाँ एवं ब्लेड्स, नुकीले तीर और अन्य उपकरण बनाए — इनसे जीवन सरल हुआ।
- शैल-चित्र बनाए — संपूर्ण विश्व की सैकड़ों गुफाओं में; कुछ साधारण आकृतियों एवं प्रतीकों के, कुछ अधिक विस्तृत जिनमें पशुओं एवं मानवों के दृश्य हैं।
- पत्थर एवं मनकों की माला, पशुओं के दाँतों के पेंडेंट जैसे साधारण आभूषण बनाए और कभी-कभी दूसरे समूहों के साथ इनका आदान-प्रदान करने लगे।
हिम युग
- एक समय पृथ्वी पर बहुत ठंड थी और उसका एक बड़ा भाग हिमाच्छादित (बर्फ से ढँका हुआ) था — इसे ‘हिम युग’ कहा जाता था।
- हिम युग लगभग 1,00,000 वर्ष पूर्व से लेकर 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।
- जब जलवायु गरम होने लगी तो हिम का कुछ भाग पिघल गया, जिससे तत्कालीन नदियों में जलभराव हो गया जो बाद में समुद्रों में समाहित हो गईं।
पहली उपज — कारण-श्रृंखला★
हिम युग के बाद जीने योग्य परिस्थितियों में सुधार → लोगों ने एक स्थान पर बसना तथा अनाज उगाना आरंभ किया → गाय, बकरी आदि का घरेलूकरण किया → भोजन की अधिक उपलब्धता → समूह आकार व संख्या में बढ़ गए → वे नदियों के किनारे बसने लगे।
! और यहीं पुस्तक का ‘लेकिन’ है: “लेकिन इसका एकमात्र कारण जल की उपलब्धता नहीं थी, अपितु यहाँ की मृदा का अधिक उपजाऊ होना भी था। इससे अन्न उगाने की प्रक्रिया अधिक सरल हो गई।” — दो कारण हैं, एक नहीं। यह वाक्य परीक्षा में आता है।
समाज जटिल कैसे हुआ (पृ. 73)
- जैसे-जैसे समुदायों का विकास हुआ, समाज जटिल होता गया।
- सरदार अथवा मुखिया लोगों के कल्याण के लिए उत्तरदायी थे; सभी सामूहिक रूप से सामुदायिक कल्याण के लिए कार्य करते थे।
- निजी स्वामित्व का भाव नहीं था और भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी।
- पल्ली (उप-ग्राम) → बड़े गाँव → कुछ छोटे कस्बे।
- गाँव भोजन, वस्त्र एवं उपकरण का आदान-प्रदान करने लगे; संप्रेषण एवं आवागमन का तंत्र विकसित हुआ।
- मृदभांड एवं मिट्टी की वस्तुएँ बनाने तथा धातुओं के उपयोग — पहले तांबा और फिर लोहा — की तकनीक से टिकाऊ उपकरण, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ एवं आभूषण बनाना सरल हो गया।
| पद | अर्थ |
|---|---|
| कल्याण | स्वास्थ्य, समृद्धि और भलाई |
| पल्ली | एक छोटी बस्ती अथवा छोटा गाँव |
अध्याय का समापन (पृ. 73)
मानव सभ्यता को विकास के इन प्रारंभिक चरणों में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था… कुछ कठिन क्षण भी आए, जब कुछ पूर्ववर्ती प्रजातियों की भाँति मानव सभ्यता भी लुप्त हो सकती थी।
(सभ्यता के उदय के बारे में अध्याय 6 में, और बुद्ध के बारे में अध्याय 7 में पढ़ेंगे।)
पुस्तक का अपना सार — “आगे बढ़ने से पहले…” (पृ. 73)
- हमने अपने अतीत के बारे में और अधिक जानने के कुछ तरीकों का पता लगाया। समय-रेखा की अवधारणा हमें भिन्न-भिन्न समय पर ऐतिहासिक घटनाओं के अनुक्रम को समझने में सहायता करती है।
- समय की गणना की विभिन्न विधियाँ हैं — वर्ष, दशक, शताब्दी, सहस्राब्दी।
- इतिहास के विभिन्न स्रोत हैं। ये ऐतिहासिक घटनाओं को समझने व उनका पुनर्निर्माण करने में सहायक होते हैं।
- हमने आरंभिक मानव जीवन को संक्षेप में समझा और यह भी जाना कि मानव-समाज कैसे समय के साथ जटिल होता गया।
अंतिम दस मिनट — रटने की सूची
★सबसे पहले — सूत्र और उसकी शर्त आर-पार (एक सा.सं.पू. + एक सा.सं.) → जोड़कर 1 घटाइए एक ही ओर (दोनों सा.सं.पू. या दोनों सा.सं.) → सीधा घटाइए 2 + 2 − 1 = 3 · 560 + 2024 − 1 = 2583 · 560 − 320 = 240 · 1947 − 1828 = 119
गिनतियाँ दशक 10 · शताब्दी 100 · सहस्राब्दी 1000 · 21वीं शताब्दी = 2001–2100 · तीसरी सहस्राब्दी = 2001–3000 · 20वीं शताब्दी = 1901–2000 · तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. = 300–201 · प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. = 1–1000
संख्याएँ कैलेंडर 365 दिन, 12 माह, हर 4 वर्ष अधिवर्ष, शताब्दी वर्ष के लिए 400 · बुद्ध 560 सा.सं.पू. · स्वतंत्रता 1947 · होमो सेपियंस 3,00,000 वर्ष पूर्व · हिम युग 1,00,000 से 12,000 वर्ष पूर्व · वैज्ञानिक योगदान पिछले 50 वर्ष · आधुनिक इतिहास 2–3 शताब्दियाँ · समय-रेखा लगभग 3 मीटर
चार-चार की सूचियाँ विशेषज्ञ — भू-विज्ञानी, जीवाश्म विज्ञानी, मानव विज्ञानी, पुरातत्व विज्ञानी स्रोत — पुरातात्विक, मौखिक, साहित्यिक, कलात्मक सार के बिंदु — समय-रेखा, गणना की विधियाँ, स्रोत, आरंभिक मानव जीवन
परिभाषाएँ जो शब्दश: याद हों इतिहास · इतिहासकार · जीवाश्म · आनुवांशिकी · युग · मांगलिक · इतिहास के स्रोत · समय-रेखा · मरणोपरांत जीवन · हिमाच्छादित · कल्याण · पल्ली
★छह जालियाँ जिनमें बच्चे गिरते हैं
- सूत्र हर जगह लगा देना — 240 की जगह 239 लिख देना।
- 21वीं शताब्दी को 2100–2199 समझ लेना।
- सा.सं.पू. में छोटी संख्या को पुराना समझ लेना।
- शताब्दी और सहस्राब्दी की संख्या मिला देना (21वीं शताब्दी पर तीसरी सहस्राब्दी)।
- जीवाश्म विज्ञानी और पुरातत्व विज्ञानी को एक मान लेना।
- नदी किनारे बसने का केवल एक कारण (जल) लिख देना — उपजाऊ मृदा भूल जाना।