अध्याय 8विविधता में एकता या 'एक में अनेक'

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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT, पृ. 125–136 14 समूह · 46 कार्ड। हर समूह के तुरंत बाद उसके उत्तर हैं।

कैसे उपयोग करें: प्रश्न वाला भाग खुला रखिए, उत्तर वाला भाग हथेली या काग़ज़ से ढँक लीजिए। पहले उत्तर मन में सोचिए, फिर मिलाइए।

समूह 1 — अध्याय का आरंभ

#प्रश्नउत्तर
1टैगोर ने क्या प्रार्थना की?कि वे अनेकता में एकता के स्पर्श का आनंद कभी न गवाँ सकें
2‘एक में अनेक’ पद किसका?श्री अरविंद का — और अध्याय का शीर्षक भी इसी से आया है

समूह 2 — रेल-यात्रा में विविधता

#प्रश्नउत्तर
3रेल-यात्रा में क्या बदलता दिखता है?बदलते भूदृश्य · विभिन्न परिधान और भोजन · परिचित एवं अपरिचित भाषाएँ · विभिन्न लिपियाँ

समूह 3 — ‘भारत के लोग’ परियोजना

#प्रश्नउत्तर
4भारत की जनसंख्या, और विश्व में भाग?1.4 अरब से भी अधिक; विश्व की जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत
5परियोजना किसने और कब चलाई?भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण ने, 20वीं शताब्दी के अंत में
6कितने समुदायों का सर्वेक्षण?4,635 — देश के सभी राज्यों में
7कितनी भाषाएँ, कितनी लिपियाँ?25 लिपियों का उपयोग करने वाली 325 भाषाएँ

समूह 4 — प्रवासी और विंसेंट स्मिथ

#प्रश्नउत्तर
8‘प्रवासी’ किसे कहा जा सकता है?जो अपने जन्म स्थान के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ नहीं रहते
9विंसेंट स्मिथ कौन थे, और क्या पूछा?ब्रिटिश इतिहासकार; “इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है?”
10विंसेंट स्मिथ ने स्वयं क्या उत्तर दिया?कि भारत ‘विविधता में एकता’ प्रदर्शित करता है
11भारत की विविधता के बारे में क्या कहा गया है?कि वह सुंदर है, पर उसका अर्थ निकालना इतना सरल नहीं

समूह 5 — भोजन

#प्रश्नउत्तर
12‘मुख्य अनाज’ कौन-से?चावल · जौ · गेहूँ · बाजरा · ज्वार · रागी और विभिन्न दालें
13इन्हें ‘मुख्य अनाज’ क्यों कहते हैं?क्योंकि ये अधिकांश भारतीयों का प्रमुख भोजन हैं
14कोई चार सामान्य मसाले?हल्दी · जीरा · इलायची · अदरक
15★भोजन के उदाहरण का सूत्र-वाक्य?कि एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन बनाए जा सकते हैं

समूह 6 — अनाज और दालें

#प्रश्नउत्तर
16कोई चार दालें?राजमा · लोबिया · मूंग दाल · मसूर दाल · चना दाल · अरहर दाल · छोले/चना
17चावल के कौन-से नाम प्रसिद्ध हैं?बासमती · सोना मसूरी · पोन्नी चावल · कोलम चावल
18अनाजों और चावल के इतने नामों से क्या पता चलता है?कि एक ही अनाज के अनेक नाम और प्रकार हैं — यही ‘एक में अनेक’ है

समूह 7 — साड़ी

#प्रश्नउत्तर
19साड़ी क्या है?भारत के अधिकांश भागों में पहना जाने वाला, विभिन्न सूत या धागे से बना एक लंबा, बिना सिला परिधान
20किन धागों से बनती है?मुख्यत: कपास अथवा रेशम; आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) से भी
21रेशमी साड़ियों के कोई चार प्रकार?बनारसी · कांजीवरम · पैठनी · पाटन पटोला · मूगा · मैसूर
22साड़ी के कितने प्रकार के रूप होते हैं?सैकड़ों

समूह 8 — साड़ी की विविधता और इतिहास

#प्रश्नउत्तर
23साड़ी में विविधता कहाँ से आती है?बुनाई एवं डिजाइन की विभिन्न विधियों से, और रंगों की अनेक विविधताओं से
24साड़ी के डिजाइन के दो प्रकार?कुछ कपड़े का ही हिस्सा होते हैं; कुछ बुनाई के उपरांत छापे जाते हैं
25‘उकेरी गई आकृति’ किसे कहते हैं?एक डिजाइन जो समतल सतह के ऊपर उकेरी गई हो — पत्थर, लकड़ी, मृत्तिका या अन्य सामग्री की

समूह 9 — ‘छींट’ की कहानी

#प्रश्नउत्तर
26भारत किसका सर्वाधिक उत्पादन करता रहा?विश्व में सर्वाधिक महीन सूत का — और यूरोप तक निर्यात करता रहा
27‘छींट’ क्या है, कब लोकप्रिय हुआ?एक सूती कपड़े पर छपा हुआ डिजाइन; 17वीं शताब्दी में यूरोप में
28छींट के कारण यूरोप पर क्या असर हुआ?यूरोपीय परिधानों की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आई
29यूरोप में कपड़ों की कीमतें गिरने के बाद फिर क्या हुआ?इंग्लैंड और फ्रांस ने अपने उत्पादों के संरक्षण के लिए आयात पर प्रतिबंध लगाया

समूह 10 — साड़ी के अन्य उपयोग

#प्रश्नउत्तर
30साड़ी के कोई तीन अन्य उपयोग?झूला · मछली का जाल · अनाज ओसाना · सिर की गद्दी · वर्षा से बचाव · बिछौना
31साड़ी के इतने उपयोग क्यों संभव हैं?क्योंकि साड़ी बिना सिला वस्त्र है
32★साड़ी वाले खंड का निष्कर्ष?“नए-नए तरीके अभी भी खोजे जा रहे हैं, लेकिन अंततोगत्वा यह एक ही प्रकार का परिधान — ‘साड़ी’ है।”

समूह 11 — त्योहार

#प्रश्नउत्तर
33त्योहारों के बारे में क्या कहा गया है?कि कुछ त्योहार एक ही समय पर पूरे भारत में मनाए जाते हैं, हालाँकि उनके नाम अलग-अलग होते हैं
34मकर संक्रांति कब, और किसकी सूचक?14 जनवरी के आस-पास; फसलों की कटाई की सूचक
35मकर संक्रांति के कोई चार अन्य नाम?लोहड़ी/माघी · माघ बिहू · उत्तरायण · पोंगल · खिचड़ी पर्व · पेड्डा पंडुगा · मकर संक्रमण · मकर विलांक्कु

समूह 12 — पंचतंत्र

#प्रश्नउत्तर
36पंचतंत्र क्या है?पशुओं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग्रह, जो महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाता है
37पंचतंत्र का मूल संस्कृत पाठ कितना पुराना है?लगभग 2,200 वर्ष
38पंचतंत्र के कितने रूपांतरण, कितनी भाषाओं में?50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण
39पंचतंत्र भारत से बाहर कहाँ पढ़ा जाता है?दक्षिण-पूर्वी एशिया · अरब देश · यूरोप

समूह 13 — दो महाकाव्य

#प्रश्नउत्तर
40‘महाकाव्य’ किसे कहते हैं?सामान्यत: एक लंबी कविता जो अतीत के महान नायकों एवं योद्धाओं की कथाओं का व्याख्यान करती है
41दो महाकाव्य, और उनका आकार?रामायण और महाभारत; मूल संस्करण में लगभग 7,000 पृष्ठ
42महाकाव्यों की उपकथाएँ किस पर केंद्रित हैं?नैतिक मूल्यों पर — और वे लगातार प्रश्न पूछती हैं कि क्या सत्य और क्या असत्य

समूह 14 — लोक संस्करण और निष्कर्ष

#प्रश्नउत्तर
43केवल तमिलनाडु में महाभारत के कितने लोक स्वरूप?100 से अधिक
44किन तीन जनजाति समुदायों के महाभारत के अपने स्वरूप हैं?भील · गोंड · मुंडा
45के.एस. सिंह कौन, और क्या कहा?मानवविज्ञानी, ‘भारत के लोग’ परियोजना के निर्देशक; “लोककथाओं के अनुसार इस देश में शायद ही ऐसा कोई स्थान हो जहाँ महानायक पांडव न गए हों।”
46भारतीय एकता विविधता का उत्सव क्यों मनाती है?“भारतीय एकता, विविधता का उत्सव मनाती है क्योंकि विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”

⚡ छह कार्ड जिन पर सबसे अधिक ग़लती होती है

प्रश्नउत्तर
325 या 25?325 = भाषाएँ। 25 = लिपियाँ। (भाषाएँ अधिक — क्योंकि एक ही लिपि अनेक भाषाएँ लिख सकती है।)
4,635 क्या है?समुदायों की संख्या — भाषाओं की नहीं।
2,200 या 7,000?2,200 वर्ष = पंचतंत्र की आयु। 7,000 पृष्ठ = महाकाव्यों का आकार। (एक आयु, दूसरा आकार।)
50 या 200?50 से अधिक = भाषाएँ। 200 से अधिक = रूपांतरण।
विंसेंट स्मिथ या के.एस. सिंह?स्मिथ = ब्रिटिश इतिहासकार (पृ. 126)। सिंह = मानवविज्ञानी, ‘भारत के लोग’ के निर्देशक (पृ. 135)।
100 से अधिक कहाँ?केवल तमिलनाडु में — पूरे भारत में नहीं।

और वह कार्ड जो सबसे ज़्यादा काम आता है★

प्रश्न: अध्याय के चारों उदाहरणों में क्या समान है?

उदाहरणएकअनेक
भोजनएक ही सामग्रीहजारों व्यंजन
साड़ीएक ही परिधान, बिना सिलासैकड़ों रूप
त्योहारएक ही दिन, एक ही पर्वतेरह नाम
महाकाव्यएक कथासौ से अधिक लोक स्वरूप

उत्तर: चारों में बाहर से अनेक हैं, और भीतर से एक। यही ‘विविधता में एकता’ है — और यही ‘एक में अनेक’।