अध्याय 3स्थलरूप एवं जीवन

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NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 3, पृ. 41–58

हर पद पुस्तक के अपने शब्दों में है। पर्याय मत लिखिए — परीक्षक वही शब्द ढूँढ़ता है जो पाठ्यपुस्तक में छपा है।


1. स्थलरूप के मूल पद

पदअर्थपृ.
स्थलरूप (लैंडफ़ॉर्म)पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप। लाखों वर्षों में आकार लेता है और पर्यावरण तथा जीवन से इसका महत्वपूर्ण संबंध है।42
दृश्यभूमि (लैंडस्केप)किसी क्षेत्र का दिखाई देने वाला भू-दृश्य; एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में यह बदलता है।42
स्थलाकृतिभूमि की आकृति; पुस्तक इस शब्द का प्रयोग पठार और मैदान की परिभाषा में करती है।51, 53
भूभागभौतिक आकृतियों की दृष्टि से भूमि का एक खंड।49
तुंगता (एल्टीट्यूड)समुद्र तल से किसी वस्तु/लक्ष्य की ऊँचाई। उदाहरणार्थ — पर्वत की ऊँचाई, उड़ती हुई चिड़िया अथवा उड़ते वायुयान की ऊँचाई, उपग्रह की ऊँचाई।42
समुद्र तलसमुद्र की सतह का औसत स्तर; इसे ‘माध्य समुद्र तल’ भी कहते हैं।53
उन्नयनपर्वत के ऊपर उठने की प्रक्रिया, जो हिमालय में आज भी चल रही है।46
अपरदनघिसने की वह प्रक्रिया जिससे प्राचीन पर्वत, जैसे अरावली, गोल आकार के हो गए।46

तीन श्रेणियाँ, एक ही क्रम में याद रखिए — पर्वत, पठार और मैदान। पुस्तक इसी क्रम में पढ़ाती है (पृ. 42) और इसी क्रम में सार देती है (पृ. 57)।

2. पर्वत से जुड़े पद

पदअर्थपृ.
पर्वतवे स्थलरूप जो आस-पास की भूमि से कुछ अधिक ऊँचे होते हैं; चौड़ा आधार, खड़ी ढलान (चढ़ाई) और सँकरे शिखर (चोटियाँ)।42
पहाड़ी (छोटे पहाड़ / हिल)कम ऊँचाई वाले ऊँचे स्थान, जहाँ कम खड़ी चढ़ाइयाँ और गोल आकार के शीर्ष होते हैं।43
पर्वत शृंखलावह रूप जिसमें विश्व के अधिकांश पर्वत वर्गीकृत हैं; कुछ शृंखलाएँ हजारों किलोमीटर तक फैली हैं।45
गिरिशृंग / शिखर / चोटीपर्वत का सबसे ऊँचा भाग।44–45
नवीन (युवा) पर्वतपृथ्वी के इतिहास में हाल ही में निर्मित पर्वत — ऊँचे और नुकीली चोटियों वाले, जैसे हिमालय।46
प्राचीन पर्वतपुराने, छोटे और गोलाकार पर्वत, जो अपरदन से घिस गए — जैसे अरावली शृंखला।46
घाटीपहाड़ों के बीच का एक निचला क्षेत्र, जिसमें प्राय: नदी अथवा जलधारा बहती है।49
वेदिका कृषि (सीढ़ीदार कृषि)ढलान की भूमि को काटकर सीढ़ीनुमा स्थान पर कृषि करना; पर्वतीय ढलानों की प्रचलित प्रथा।49
पर्वतारोहणपर्वत पर चढ़ने का साहसिक खेल।49

3. पर्वतीय परिवेश — वनस्पति के पद

पदअर्थपृ.
पर्वतीय वनपर्वतीय क्षेत्र में उगने वाले वनों का एक प्रकार; पर्वतों की ढलानों पर प्राय: यही होता है।46
शंकुधारी वृक्षपाइन (चीड़), फर, स्प्रूस, देवदार आदि — ऊँचे, शंकु के आकार के, पतली नोंकदार पत्तियों वाले।46
मॉस (काई)फूलों और वास्तविक जड़ों से रहित छोटा हरा पौधा या वनस्पति, जो बहुधा मखमली आवरण की तरह फैलता है।46
लाइकेनपौधे के समान जीव, जो सामान्यत: चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपके हुए होते हैं।46

ऊँचाई के साथ वनस्पति बदलती है: शंकुधारी वन → (और ऊपर) → घास, मॉस और लाइकेन। यह एक-पंक्ति की शृंखला ही इस उपशीर्षक का पूरा उत्तर है।

4. वर्षण और आपदा से जुड़े पद

पदअर्थपृ.
वर्षणवायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल का गिरना — वर्षा, हिमपात और ओले गिरना इसके सामान्य रूप हैं।43
हिमजल का ठोस रूप, जो बहुत ऊँचे और ठंडे स्थानों पर गिरता है और वहाँ नरम व सुंदर आवरण बना देता है।43
आकस्मिक बाढ़स्थान विशेष में अकस्मात बाढ़ आना; बहुधा ऐसा बादल फटने से होता है।50
भूस्खलनपर्वतीय भूखंड के एक बड़े भाग या एक चट्टान का अकस्मात टूटकर गिरना।50
हिमस्खलन (एवलांश)पर्वत से अकस्मात हिम का गिरना, हिमपात अथवा चट्टानें टूटकर गिरना; ऐसा प्राय: तब होता है जब हिम का पिघलना आरंभ होता है।50
बादल फटनाअचानक प्रचंड तूफ़ान सहित वर्षा होना।50

कारण और परिणाम अलग-अलग रखिए: बादल फटना → आकस्मिक बाढ़। हिम का पिघलना आरंभ होना → हिमस्खलन। दीर्घ उत्तर में यही जोड़ी अंक दिलाती है।

5. पठार से जुड़े पद

पदअर्थपृ.
पठारऐसी स्थलाकृति जो आस-पास की भूमि से उठी होती है और जिसकी सतह प्राय: चपटी होती है; इसके कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं।51
लावा पठारज्वालामुखी क्रियाओं से निर्मित पठार, जो उपजाऊ होता है क्योंकि उसमें समृद्ध काली मिट्टी पाई जाती है।52
चट्टानी मिट्टीकई पठारों की मिट्टी, जो उन्हें मैदानी मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ बनाती है।52
खनिजों का भंडार-गृहपठारों को दिया गया नाम, क्योंकि उनमें खनिजों का प्रचुर मात्रा में जमाव होता है।51
खननपठारों की मुख्य गतिविधि; विश्व की सबसे बड़ी खानें पठारों में पाई जाती हैं।51
जल प्रपातपठारों की एक आकर्षक विशेषता; ऊँचाई से गिरता जल।52
‘विश्व की छत’तिब्बत के पठार को दिया गया नाम, क्योंकि उसकी औसत ऊँचाई 4500 मीटर है।51

6. मैदान और नदी से जुड़े पद

पदअर्थपृ.
मैदानऐसी स्थलाकृति जिसका विस्तृत सपाट अथवा हल्का तरंगित धरातल होता है; इसमें कोई ऊँची पहाड़ियाँ अथवा गहरी घाटियाँ नहीं पाई जातीं।53
तलछटनदियों द्वारा एकत्र किए गए रेत, चट्टानों के कण और गाद; ये जमा होकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।53
सहायक नदीमुख्य नदी में आकर मिलने वाली अन्य नदी — जैसे यमुना और घाघरा गंगा की सहायक नदियाँ हैं।48
संगम स्थलदो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान; अनेक समुदाय इसे पवित्र मानते हैं।55
नदी का स्रोतवह स्थान जहाँ से नदी निकलती है; इसे भी अनेक समुदाय पवित्र मानते हैं।55
नौका-संचालनमैदान में हल्की ढलान होने के कारण सुगम; इससे आर्थिक गतिविधियों को सहायता मिलती है।55
मोटे अनाजज्वार, बाजरा, रागी।55
रेशेदार फसलेंकपास, जूट और सन।55
सिंचाईनहरों के जाल (नेटवर्क) द्वारा और भूमिगत जल को पंप से निकालकर खेतों को जल देना।55
भूमिगत जलस्तरज़मीन के नीचे के जल का स्तर — सिंचाई बढ़ने से इसमें गिरावट आई है।55

7. मरुस्थल और समापन के पद

पदअर्थपृ.
मरुस्थलयदा-कदा वर्षा प्राप्त करने वाला, दूर-दूर तक शुष्कता के फैलाव वाला स्थलरूप; इसका वनस्पति जगत और प्राणि जगत विलक्षण होता है।56
गर्म मरुस्थलसहारा (अफ्रीका), थार (भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में)।56
ठंडा मरुस्थलगोबी (एशिया)। कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिक महाद्वीप को भी मरुस्थल मानते हैं।56
किंवदंती / दंत कथापीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाने वाली कथाएँ; थार की सांस्कृतिक धरोहर का भाग।56
अनुकूलनस्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेना।56
लचीलापन (रेजिलियंस)चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने अथवा उनके अनुसार ढलने की क्षमता।56
तिणैप्राचीन तमिल संगम कविता की पाँच दृश्यभूमियाँ — कुरिंजी, मुल्लाई, मरूदम, नेयदल, पालै।57

8. याद रखने योग्य नाम और सूचियाँ

विश्व के छह पर्वत (चित्र 3.2 व 3.3, पृ. 44–45)

गिरिशृंगस्थितिविशेषता
एवरेस्टनेपाल तथा तिब्बत के बीचहिमालय की सबसे ऊँची चोटियों में से एक; 8848 मीटर
कंचनजुंगाभारत के सिक्किम राज्य और नेपाल के बीचहिमालय की दो सबसे ऊँची चोटियों में दूसरी
अकोंकागुआदक्षिणी अमेरिकाएंडीज की सबसे ऊँची चोटी
किलिमंजारोपूर्वी अफ्रीकापृथक पर्वत — किसी शृंखला का भाग नहीं
ब्लांकपश्चिमी यूरोपआल्प्स का सबसे ऊँचा शिखर
अनाईमुडीकेरलदक्षिण भारत का सबसे ऊँचा गिरिशृंग; ‘अनाई शिखर’ भी

तीन पर्वत शृंखलाएँ जो पुस्तक नाम से गिनाती है (पृ. 45)

शृंखलाकहाँ
हिमालयएशिया
आल्प्सयूरोप
एंडीजदक्षिणी अमेरिका

एवरेस्ट के नाम (पृ. 51)

नामकिसकाअर्थ
चोमोलुंगमातिब्बती लोग‘जगत जननी’
सागरमाथानेपाल निवासी‘आकाश की देवी’

कैलाश पर्वत — चार परंपराएँ (पृ. 51)

हिंदू दर्शन · बौद्ध मत · जैन मत · बॉन (तिब्बत का एक प्राचीन धर्म)

पर्वतीय जीव-जंतु (पृ. 47–48)

गोल्डन ईगल (सुनहरा गरुड़) · पेरेग्रिन फाल्कन (घुमंतू बाज) · कैनेडियन लिंक्स · हिम तेंदुआ · आइबेक्स (जंगली भेड) · हिमालयन तहर · पर्वतीय खरगोश · याक · ग्रे फॉक्स · भालू

गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (पृ. 48)

नदीकहाँ से निकलती है
गंगाहिमालय — हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में विशालतम
यमुनाहिमालय — गंगा की सहायक
घाघराहिमालय — गंगा की सहायक
सोनविंध्यांचल की शृंखलाएँ (गंगा के मैदान के दक्षिण में)

पर्वतीय जीवन की सात चुनौतियाँ (चित्र 3.6, पृ. 50)

चुनौतीप्रकार
आकस्मिक बाढ़प्राकृतिक
भूस्खलनप्राकृतिक
हिमस्खलन (एवलांश)प्राकृतिक
भारी हिमपातप्राकृतिक
बादल फटनाप्राकृतिक
ठंडा मौसमप्राकृतिक
पर्यटकों का अनियंत्रित रूप से आ जानामानव-निर्मित

साहसिक खेल जो पुस्तक गिनाती है (पृ. 49)

स्कीइंग · हाइकिंग · पर्वतारोहण · पैरा ग्लाइडिंग

दो पर्वतारोही (पृ. 49)

नामउपलब्धिसम्मान
बछेंद्री पाल1984 में एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला; महिला अभियानों का नेतृत्वपद्मश्री (1984), पद्मभूषण (2019)
अरुणिमा सिन्हा22 वर्ष की आयु में दुर्घटना में एक पैर गया; 2013 में एवरेस्ट; विंसन सहित सभी महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियाँपद्मश्री (2015)

पठार और खनिज (पृ. 51)

पठारखनिज
पूर्वी अफ्रीका का पठारसोना और हीरा
छोटा नागपुर का पठारलौह, कोयला और मैंगनीज

चार जल प्रपात (पृ. 52)

जल प्रपातनदीस्थान
विक्टोरियाजम्बेजीदक्षिण अफ्रीका (पुस्तक के शब्द)
हुंडरूसुवर्ण रेखाछोटा नागपुर पठार
जोगशरावतीपश्चिमी घाट
नहकालीकाई—चेरापूंजी (मेघालय) का पठार — 340 मीटर

गंगा के मैदान की फसलें (पृ. 55)

वर्गफसलें
खाद्यचावल, गेहूँ, मक्का, जौ, मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी)
रेशेदारकपास, जूट, सन

तमिल संगम की पाँच तिणै (पृ. 57)

तिणैदृश्यभूमिमुख्य व्यवसाय
कुरिंजीपर्वतीय क्षेत्रआखेट और संग्रह करना
मुल्लाईघास के मैदान और वनपशु पालन
मरूदमउपजाऊ कृषि के मैदानकृषि
नेयदलतटीय क्षेत्रमत्स्य पालन और समुद्री यात्रा
पालैशुष्क, मरुस्थल जैसे प्रदेशघुमंतू और युद्धरत

पुस्तक का अपना निर्देश: “आपको तिणै के विवरण को याद रखने की आवश्यकता नहीं है, परंतु उससे प्रतिबिंबित अवधारणाओं को समझने की आवश्यकता है।” — यह तालिका रटने के लिए नहीं है।

चित्र 3.8 का विश्व-मानचित्र (पृ. 53)

रंगश्रेणीमानचित्र पर अंकित नाम
नारंगीपर्वत शृंखलाअलास्का, रॉकीज़, एंडीज़, एटलस, यूराल, हिमालय
भूरापठारमंगोलियन, तिब्बत, पूर्वी अफ्रीकी, पैटागोनियन
हरानदियों के मैदानमिसिसीपी, अमेजन, नील, सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र, यांगत्सी

पुस्तक का अपना निर्देश: “आपको मानचित्र में दिए नाम स्मरण करने की आवश्यकता नहीं है।” जो अभ्यास करना है वह रंग का कोड पहचानना है।

9. मुख्य संख्याएँ

मानकिसकापृ.
3स्थलरूपों की प्रमुख श्रेणियाँ — पर्वत, पठार, मैदान42, 57
लाखों वर्षस्थलरूपों को आकार लेने में लगा समय42
8848 मीटरएवरेस्ट गिरिशृंग की ऊँचाई51
लगभग 2500 कि.मी.गंगा की लंबाई48
4500 मीटरतिब्बत के पठार की औसत ऊँचाई51
लगभग 2500 किलोमीटरतिब्बत के पठार की पूर्व-से-पश्चिम लंबाई51
कई लाख वर्ष पहलेदक्कन के पठार का ज्वालामुखी सक्रियता से बनना51
340 मीटरनहकालीकाई जल प्रपात की ऊँचाई52
300 मीटर से अधिक नहींमैदान की समुद्र तल से ऊँचाई53
कुछ सौ से कई हजार मीटरपठारों की ऊँचाई का परिसर51
लगभग 40 करोड़गंगा के मैदान की जनसंख्या55
एक-चौथाई से अधिकभारत की जनसंख्या का वह भाग जो गंगा के मैदान में रहता है55
कम से कम 1500 वर्ष पूर्वकालिदास का काल46
1984बछेंद्री पाल — एवरेस्ट और पद्मश्री49
2019बछेंद्री पाल — पद्मभूषण49
22 वर्षअरुणिमा सिन्हा की आयु, जब दुर्घटना हुई49
2013अरुणिमा सिन्हा — एवरेस्ट49
2015अरुणिमा सिन्हा — पद्मश्री49
50 किलोमीटरगतिविधि में दी गई दूरी42
6चित्र 3.2 व 3.3 के पर्वत44–45
7चित्र 3.6 की चुनौतियाँ50
5तमिल संगम की तिणै57
4कैलाश को पवित्र मानने वाली परंपराएँ51

! दो ‘2500’ एक ही अध्याय में हैं: गंगा की लंबाई (पृ. 48) और तिब्बत के पठार की पूर्व-पश्चिम लंबाई (पृ. 51)। इन्हें कभी एक साथ मत रटिए।

10. भ्रमित करने वाले युग्म — परीक्षक ठीक यही पूछता है

युग्मअंतर जो अंक दिलाता है
पर्वत बनाम पहाड़ीपर्वत — अधिक ऊँचा, खड़ी चढ़ाई, सँकरा शिखर। पहाड़ी — कम ऊँची, कम खड़ी चढ़ाई, गोल शीर्ष।
नवीन बनाम प्राचीन पर्वतनवीन — हिमालय, नुकीली चोटियाँ। प्राचीन — अरावली, गोल आकार (अपरदन से)।
भूस्खलन बनाम हिमस्खलनभूस्खलन में चट्टान/भूखंड गिरता है; हिमस्खलन में हिम गिरती है।
बादल फटना बनाम आकस्मिक बाढ़बादल फटना = कारण; आकस्मिक बाढ़ = परिणाम।
गंगा बनाम यमुनायमुना गंगा की सहायक नदी है — उलटा नहीं।
यमुना/घाघरा बनाम सोनयमुना व घाघरा हिमालय से; सोन विंध्यांचल से।
सामान्य पठार बनाम लावा पठारसामान्य पठार — चट्टानी मिट्टी, कम उपजाऊ। लावा पठार — समृद्ध काली मिट्टी, उपजाऊ।
किलिमंजारो बनाम शेष पर्वतकिलिमंजारो किसी शृंखला का भाग नहीं — पृथक पर्वत।
एवरेस्ट बनाम कंचनजुंगा (स्थिति)एवरेस्ट — नेपाल–तिब्बत के बीच। कंचनजुंगा — सिक्किम–नेपाल के बीच।
चोमोलुंगमा बनाम सागरमाथाचोमोलुंगमा — तिब्बती, ‘जगत जननी’। सागरमाथा — नेपाली, ‘आकाश की देवी’।
गर्म बनाम ठंडा मरुस्थलगर्म — सहारा, थार। ठंडा — गोबी।
तुंगता बनाम समुद्र तलतुंगता = ऊँचाई का माप। समुद्र तल = वह आधार-रेखा जिससे तुंगता नापी जाती है।
वर्षण बनाम वर्षावर्षण बड़ा पद है — इसमें वर्षा, हिमपात और ओले तीनों आते हैं।
मॉस बनाम लाइकेनमॉस — छोटा हरा पौधा। लाइकेन — पौधे के समान जीव, चट्टानों/दीवारों/पेड़ों से चिपका।
तलछट बनाम गादतलछट = रेत + चट्टानों के कण + गाद; गाद उसका एक अवयव है।
स्थलरूप बनाम दृश्यभूमिस्थलरूप = सतह का भौतिक स्वरूप। दृश्यभूमि = दिखाई देने वाला दृश्य।
कुरिंजी बनाम पालैकुरिंजी — पर्वतीय, आखेट व संग्रह। पालै — शुष्क/मरुस्थल जैसा, घुमंतू व युद्धरत।
अनुकूलन बनाम लचीलापनअनुकूलन = स्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेना। लचीलापन = कठिनाई का सामना करने की क्षमता। पुस्तक दोनों को एक ही वाक्य में जोड़ती है (पृ. 56)।