Chapter 8विविधता में एकता या 'एक में अनेक'

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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT, पृ. 125–136 बाईं ओर पाठ्यपुस्तक का शब्द है — परीक्षा में यही लिखा जाना चाहिए। दाईं ओर की सरल भाषा केवल समझने के लिए है।


क. अध्याय के मूल पद

पदअर्थपृष्ठ
विविधता में एकताअध्याय का मुख्य विचार — बाहर से अनेक, भीतर से एक125
‘एक में अनेक’श्री अरविंद का पद, जो अध्याय के शीर्षक में है125
समृद्ध विविधताभारत में परिदृश्यों, परिधानों, भोजन, भाषाओं, लिपियों और परंपराओं की अपार भिन्नता126
प्रवासीवह व्यक्ति जो अपने जन्म स्थान के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ नहीं रहता126
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षणवह राष्ट्रीय संगठन जिसने ‘भारत के लोग’ परियोजना चलाई126
‘भारत के लोग’ परियोजना20वीं शताब्दी के अंत में देश के सभी राज्यों में किया गया व्यापक सर्वेक्षण126

ख. भोजन से जुड़े पद

पदअर्थपृष्ठ
मुख्य अनाजवे अनाज जो अधिकांश भारतीयों का प्रमुख भोजन हैं — चावल, जौ, गेहूँ, बाजरा, ज्वार, रागी और दालें128
सामान्य मसालेहल्दी · जीरा · इलायची · अदरक — जिनका उपयोग पूरे देश में होता है128

ग. वस्त्र से जुड़े पद

पदअर्थपृष्ठ
साड़ीभारत के अधिकांश भागों में पहना जाने वाला और विभिन्न प्रकार के सूत या धागे से बना एक लंबा परिधान — और वह बिना सिला होता है128
बिना सिला वस्त्रवह कपड़ा जिसे सिया नहीं गया — इसीलिए वह किसी भी रूप में ढल सकता है129
उकेरी गई आकृतिएक डिजाइन जो समतल सतह के ऊपर उकेरी गई हो; यह पत्थर, लकड़ी, मृत्तिका (सेरेमिक) या अन्य सामग्री की बनी हो सकती है129
छींटएक सूती कपड़े पर छपा हुआ डिजाइन, जो 17वीं शताब्दी में यूरोप में बहुत लोकप्रिय हुआ129
कृत्रिम (सिंथेटिक)वह कपड़ा जो प्राकृतिक रेशे से नहीं, बनाकर तैयार किया जाता है128

रेशमी साड़ियों के प्रसिद्ध प्रकार(पृ. 128)

बनारसी · कांजीवरम · पैठनी · पाटन पटोला · मूगा · मैसूर (और सूती साड़ियों के और भी प्रकार होते हैं।)

घ. त्योहार से जुड़े पद

पदअर्थपृष्ठ
मकर संक्रांति14 जनवरी के आस-पास मनाया जाने वाला पर्व, जो भारत के विभिन्न भागों में फसलों की कटाई का सूचक है131

मकर संक्रांति के तेरह नाम(चित्र 8.5, पृ. 132)★

क्षेत्र-क्रमनाम
सबसे उत्तरशिशुर सेंक्रात
उत्तर-पश्चिममाघी / लोहड़ी
उत्तरी मैदानखिचड़ी पर्व
पूर्वोत्तरमाघ बिहू
मध्य भारतमकर संक्रांत
पश्चिमउत्तरायण · मकर संक्रांति
पूर्वपौष साँग क्रान्ति · मकर संक्रांति
दक्षिणपेड्डा पंडुगा · मकर संक्रमण · पोंगल · मकर विलांक्कु

★ध्यान दीजिए कि कई नामों में ‘मकर’ या ‘संक्रांति’ किसी न किसी रूप में मौजूद है — मकर संक्रांत, मकर संक्रांति, मकर संक्रमण, मकर विलांक्कु, शिशुर सेंक्रात, पौष साँग क्रान्ति। अर्थात नाम भी पूरी तरह अलग नहीं हैं।

! तेरहों नाम याद करने की आवश्यकता नहीं — चार-पाँच पर्याप्त हैं।

ङ. साहित्य से जुड़े पद

पदअर्थपृष्ठ
महाकाव्यसामान्यत: एक लंबी कविता जो अतीत के महान नायकों एवं योद्धाओं की कथाओं का व्याख्यान करती है133
पंचतंत्रमुख्य पात्रों के रूप में पशुओं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग्रह, जो महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाता है133
रामायणवह महाकाव्य जिसमें श्री राम, लक्ष्मण एवं हनुमान की सहायता से रावण को पराजित करते हैं133
महाभारतवह महाकाव्य जिसमें पांडव, श्री कृष्ण की सहायता से कौरवों से युद्ध करते हैं133
उपकथामहाकाव्य के भीतर की छोटी कथा, जो नैतिक मूल्यों पर केंद्रित होती है133
किंवदंतीपरंपरा से चली आ रही कथा134
लोक संस्करणमहाकाव्यों के मौखिक रूप से प्रसारित स्थानीय रूप134
रूपांतरणकिसी कृति का दूसरी भाषा या रूप में ढाला गया संस्करण133

च. मुख्य संख्याएँ

संख्याकिसकी
1.4 अरब से भी अधिकभारत के निवासी
लगभग 18 प्रतिशतविश्व की जनसंख्या में भारत का भाग
20वीं शताब्दी के अंत में‘भारत के लोग’ परियोजना का सर्वेक्षण
4,635समुदाय, जिनका सर्वेक्षण हुआ
325भाषाएँ, जिनकी गणना की गई
25लिपियाँ, जिनका ये भाषाएँ उपयोग करती हैं
एक शताब्दी से भी अधिक पहलेजब विंसेंट स्मिथ ने वह कथन कहा
14 जनवरी के आस-पासमकर संक्रांति
तेरहचित्र 8.5 में दिखाए गए मकर संक्रांति के नाम
17वीं शताब्दीजब ‘छींट’ यूरोप में लोकप्रिय हुआ
सैकड़ोंसाड़ी के रूपों की संख्या
छहचित्र 8.4 में साड़ी के अन्य उपयोगों के चित्र
लगभग 2,200 वर्षपंचतंत्र के मूल संस्कृत पाठ की आयु
50 से अधिकवे भाषाएँ, जिनमें पंचतंत्र के रूपांतरण हैं
200 से अधिकपंचतंत्र के रूपांतरण
लगभग 7,000 पृष्ठरामायण और महाभारत के मूल संस्करण
दो सहस्राब्दियों से अधिकजब से महाकाव्यों का अनुवाद-रूपांतरण होता रहा है
100 से अधिककेवल तमिलनाडु में मिले महाभारत के लोक स्वरूप
1652चित्र 8.6 का वर्ष (साहिबदीन, मेवाड़)

छ. नाम और स्थान

व्यक्ति

नामपरिचय
रवींद्रनाथ टैगोरअध्याय के पहले उद्धरण के लेखक
श्री अरविंदअध्याय के दूसरे उद्धरण के लेखक; ‘एक में अनेक’ पद उन्हीं का
विंसेंट स्मिथब्रिटिश इतिहासकार, जिन्होंने ‘विविधता में एकता’ वाला उत्तर दिया (पृ. 126)
के.एस. सिंहमानवविज्ञानी, ‘भारत के लोग’ परियोजना के निर्देशक (पृ. 135)
साहिबदीनचित्र 8.6 के चित्रकार — रामायण का युद्धकांड, मेवाड़, 1652
जवाहरलाल नेहरूभारत के प्रथम प्रधानमंत्री, जिनका कथन अभ्यास प्रश्न 5 में है

स्थान

स्थानइस अध्याय में क्यों
वैशाली (वर्तमान बिहार)जहाँ से साड़ी पहने स्त्री की उकेरी गई आकृति मिली (चित्र 8.2)
मेवाड़जहाँ चित्र 8.6 बना, 1652 में
इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदनजहाँ चित्र 8.6 आज है
तमिलनाडुजहाँ महाभारत के 100 से अधिक लोक स्वरूप पाए गए
नीलगिरि (तमिलनाडु)जहाँ ‘पंच पांडव’ का नक्काशीदार पत्थर है (चित्र 8.7)

जनजाति समुदाय

नामसंदर्भ
भील · गोंड · मुंडाजिनमें रामायण और महाभारत के अपने संस्करण हैं
इरूलानीलगिरि की जनजाति, जिसने ‘पंच पांडव’ का पत्थर मंदिर में सुरक्षित रखा है

ज. चित्र-सूची

क्रमांकपृष्ठविषय
आवरण125पत्थर की बारह अलग-अलग जालियों की पट्टी
चित्र 8.1127भारत के विभिन्न क्षेत्रों से अनाजों और दालों के कुछ उदाहरण
चित्र 8.2128वैशाली से प्राप्त साड़ी पहने स्त्री की उकेरी गई आकृति
चित्र 8.3129रंगीन पारंपरिक भारतीय कपड़ों के कुछ उदाहरण
चित्र 8.4130–131छह चित्र — साड़ी के अन्य उपयोग (दक्षिण भारत से)
चित्र 8.5132मकर संक्रांति के तेरह नामों का मानचित्र
चित्र 8.6134रामायण का युद्धकांड · साहिबदीन · मेवाड़ · 1652 · इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदन
चित्र 8.7135‘पंच पांडव’ — नीलगिरि, इरूला जनजाति द्वारा संरक्षित पत्थर

झ. चित्र 8.1 के अनाज और दालें

क्षेत्र-क्रमनाम
सबसे उत्तरराजमा (दो बार) · लोबिया
उत्तरी मैदानबासमती · मूंग दाल · मसूर दाल · चावल
पूर्वोत्तरचावल · अरहर दाल
पश्चिमचना दाल · छोले/चना · अरहर दाल
मध्य और पूर्वबाजरा · मक्का (दो बार) · छोले/चना · चावल
दक्षिणअरहर दाल · ज्वार · बाजरा · सोना मसूरी · पोन्नी चावल · कोलम चावल

★ध्यान दीजिए कि चावल इस मानचित्र पर चार बार आता है, पर हर बार अलग नाम से — बासमती, सोना मसूरी, पोन्नी चावल, कोलम चावल। यही ‘एक में अनेक’ है, मानचित्र पर।

! ये नाम याद करने की आवश्यकता नहीं — पुस्तक इन्हें “कुछ उदाहरण” कहती है।

ञ. वे शब्द और संख्याएँ जिन पर सबसे अधिक ग़लती होती हैध्यान

भ्रमसही बात
325 और 25325 = भाषाएँ। 25 = लिपियाँ। भाषाएँ अधिक, लिपियाँ कम — क्योंकि एक ही लिपि अनेक भाषाएँ लिख सकती है (जैसे देवनागरी में हिंदी, मराठी, संस्कृत)।
4,635 और 3254,635 = समुदाय। 325 = भाषाएँ।
1.4 अरब और 18 प्रतिशत1.4 अरब = भारत के निवासी। 18% = विश्व की जनसंख्या में भारत का भाग।
2,200 और 7,0002,200 वर्ष = पंचतंत्र के मूल पाठ की आयु। 7,000 पृष्ठ = महाकाव्यों का आकार।
50 और 20050 से अधिक = भाषाएँ। 200 से अधिक = रूपांतरण।
100 से अधिकयह केवल तमिलनाडु में मिले महाभारत के लोक स्वरूप हैं — पूरे भारत के नहीं।
विंसेंट स्मिथ और के.एस. सिंहस्मिथ = ब्रिटिश इतिहासकार (पृ. 126)। सिंह = मानवविज्ञानी, ‘भारत के लोग’ के निर्देशक (पृ. 135)।
दो उद्धरणपहला — टैगोर। दूसरा — श्री अरविंद। ‘एक में अनेक’ श्री अरविंद का है।
‘छींट’ किसने रोकाइंग्लैंड और फ्रांस ने — अपने स्वयं के उत्पादों के संरक्षण के लिए।
साड़ी की सामग्रीमुख्यत: कपास अथवा रेशम; आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) से भी।
रेशमी प्रकारबनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा, मैसूर — ये सब रेशमी हैं; सूती के और भी प्रकार हैं।
चित्र 8.6 का विवरणसाहिबदीन (चित्रकार) · मेवाड़ (स्थान) · 1652 (वर्ष) · इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदन (आज कहाँ)।
वैशालीयहाँ साड़ी वाली उकेरी आकृति के लिए (पृ. 128) — अध्याय 7 में यह महावीर के जन्मस्थान के रूप में आया था। दोनों सही हैं।
नीलगिरियहाँ इरूला जनजाति के लिए (पृ. 135) — अध्याय 7 में टोडा जनजाति के लिए। दोनों अलग जनजातियाँ हैं।
! ‘विविधता में एकता’ का अर्थयह ‘एकरूपता’ नहीं है। पुस्तक कहती है — “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।” अर्थात अनेकता है, और वह अच्छी है।