हर पद पुस्तक के अपने शब्दों में है। पर्याय मत लिखिए — परीक्षक वही शब्द ढूँढ़ता है जो पाठ्यपुस्तक में छपा है।
1. स्थलरूप के मूल पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| स्थलरूप (लैंडफ़ॉर्म) | पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप। लाखों वर्षों में आकार लेता है और पर्यावरण तथा जीवन से इसका महत्वपूर्ण संबंध है। | 42 |
| दृश्यभूमि (लैंडस्केप) | किसी क्षेत्र का दिखाई देने वाला भू-दृश्य; एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में यह बदलता है। | 42 |
| स्थलाकृति | भूमि की आकृति; पुस्तक इस शब्द का प्रयोग पठार और मैदान की परिभाषा में करती है। | 51, 53 |
| भूभाग | भौतिक आकृतियों की दृष्टि से भूमि का एक खंड। | 49 |
| तुंगता (एल्टीट्यूड) | समुद्र तल से किसी वस्तु/लक्ष्य की ऊँचाई। उदाहरणार्थ — पर्वत की ऊँचाई, उड़ती हुई चिड़िया अथवा उड़ते वायुयान की ऊँचाई, उपग्रह की ऊँचाई। | 42 |
| समुद्र तल | समुद्र की सतह का औसत स्तर; इसे ‘माध्य समुद्र तल’ भी कहते हैं। | 53 |
| उन्नयन | पर्वत के ऊपर उठने की प्रक्रिया, जो हिमालय में आज भी चल रही है। | 46 |
| अपरदन | घिसने की वह प्रक्रिया जिससे प्राचीन पर्वत, जैसे अरावली, गोल आकार के हो गए। | 46 |
तीन श्रेणियाँ, एक ही क्रम में याद रखिए — पर्वत, पठार और मैदान। पुस्तक इसी क्रम में पढ़ाती है (पृ. 42) और इसी क्रम में सार देती है (पृ. 57)।
2. पर्वत से जुड़े पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| पर्वत | वे स्थलरूप जो आस-पास की भूमि से कुछ अधिक ऊँचे होते हैं; चौड़ा आधार, खड़ी ढलान (चढ़ाई) और सँकरे शिखर (चोटियाँ)। | 42 |
| पहाड़ी (छोटे पहाड़ / हिल) | कम ऊँचाई वाले ऊँचे स्थान, जहाँ कम खड़ी चढ़ाइयाँ और गोल आकार के शीर्ष होते हैं। | 43 |
| पर्वत शृंखला | वह रूप जिसमें विश्व के अधिकांश पर्वत वर्गीकृत हैं; कुछ शृंखलाएँ हजारों किलोमीटर तक फैली हैं। | 45 |
| गिरिशृंग / शिखर / चोटी | पर्वत का सबसे ऊँचा भाग। | 44–45 |
| नवीन (युवा) पर्वत | पृथ्वी के इतिहास में हाल ही में निर्मित पर्वत — ऊँचे और नुकीली चोटियों वाले, जैसे हिमालय। | 46 |
| प्राचीन पर्वत | पुराने, छोटे और गोलाकार पर्वत, जो अपरदन से घिस गए — जैसे अरावली शृंखला। | 46 |
| घाटी | पहाड़ों के बीच का एक निचला क्षेत्र, जिसमें प्राय: नदी अथवा जलधारा बहती है। | 49 |
| वेदिका कृषि (सीढ़ीदार कृषि) | ढलान की भूमि को काटकर सीढ़ीनुमा स्थान पर कृषि करना; पर्वतीय ढलानों की प्रचलित प्रथा। | 49 |
| पर्वतारोहण | पर्वत पर चढ़ने का साहसिक खेल। | 49 |
3. पर्वतीय परिवेश — वनस्पति के पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| पर्वतीय वन | पर्वतीय क्षेत्र में उगने वाले वनों का एक प्रकार; पर्वतों की ढलानों पर प्राय: यही होता है। | 46 |
| शंकुधारी वृक्ष | पाइन (चीड़), फर, स्प्रूस, देवदार आदि — ऊँचे, शंकु के आकार के, पतली नोंकदार पत्तियों वाले। | 46 |
| मॉस (काई) | फूलों और वास्तविक जड़ों से रहित छोटा हरा पौधा या वनस्पति, जो बहुधा मखमली आवरण की तरह फैलता है। | 46 |
| लाइकेन | पौधे के समान जीव, जो सामान्यत: चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपके हुए होते हैं। | 46 |
ऊँचाई के साथ वनस्पति बदलती है: शंकुधारी वन → (और ऊपर) → घास, मॉस और लाइकेन। यह एक-पंक्ति की शृंखला ही इस उपशीर्षक का पूरा उत्तर है।
4. वर्षण और आपदा से जुड़े पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| वर्षण | वायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल का गिरना — वर्षा, हिमपात और ओले गिरना इसके सामान्य रूप हैं। | 43 |
| हिम | जल का ठोस रूप, जो बहुत ऊँचे और ठंडे स्थानों पर गिरता है और वहाँ नरम व सुंदर आवरण बना देता है। | 43 |
| आकस्मिक बाढ़ | स्थान विशेष में अकस्मात बाढ़ आना; बहुधा ऐसा बादल फटने से होता है। | 50 |
| भूस्खलन | पर्वतीय भूखंड के एक बड़े भाग या एक चट्टान का अकस्मात टूटकर गिरना। | 50 |
| हिमस्खलन (एवलांश) | पर्वत से अकस्मात हिम का गिरना, हिमपात अथवा चट्टानें टूटकर गिरना; ऐसा प्राय: तब होता है जब हिम का पिघलना आरंभ होता है। | 50 |
| बादल फटना | अचानक प्रचंड तूफ़ान सहित वर्षा होना। | 50 |
कारण और परिणाम अलग-अलग रखिए: बादल फटना → आकस्मिक बाढ़। हिम का पिघलना आरंभ होना → हिमस्खलन। दीर्घ उत्तर में यही जोड़ी अंक दिलाती है।
5. पठार से जुड़े पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| पठार | ऐसी स्थलाकृति जो आस-पास की भूमि से उठी होती है और जिसकी सतह प्राय: चपटी होती है; इसके कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं। | 51 |
| लावा पठार | ज्वालामुखी क्रियाओं से निर्मित पठार, जो उपजाऊ होता है क्योंकि उसमें समृद्ध काली मिट्टी पाई जाती है। | 52 |
| चट्टानी मिट्टी | कई पठारों की मिट्टी, जो उन्हें मैदानी मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ बनाती है। | 52 |
| खनिजों का भंडार-गृह | पठारों को दिया गया नाम, क्योंकि उनमें खनिजों का प्रचुर मात्रा में जमाव होता है। | 51 |
| खनन | पठारों की मुख्य गतिविधि; विश्व की सबसे बड़ी खानें पठारों में पाई जाती हैं। | 51 |
| जल प्रपात | पठारों की एक आकर्षक विशेषता; ऊँचाई से गिरता जल। | 52 |
| ‘विश्व की छत’ | तिब्बत के पठार को दिया गया नाम, क्योंकि उसकी औसत ऊँचाई 4500 मीटर है। | 51 |
6. मैदान और नदी से जुड़े पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| मैदान | ऐसी स्थलाकृति जिसका विस्तृत सपाट अथवा हल्का तरंगित धरातल होता है; इसमें कोई ऊँची पहाड़ियाँ अथवा गहरी घाटियाँ नहीं पाई जातीं। | 53 |
| तलछट | नदियों द्वारा एकत्र किए गए रेत, चट्टानों के कण और गाद; ये जमा होकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। | 53 |
| सहायक नदी | मुख्य नदी में आकर मिलने वाली अन्य नदी — जैसे यमुना और घाघरा गंगा की सहायक नदियाँ हैं। | 48 |
| संगम स्थल | दो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान; अनेक समुदाय इसे पवित्र मानते हैं। | 55 |
| नदी का स्रोत | वह स्थान जहाँ से नदी निकलती है; इसे भी अनेक समुदाय पवित्र मानते हैं। | 55 |
| नौका-संचालन | मैदान में हल्की ढलान होने के कारण सुगम; इससे आर्थिक गतिविधियों को सहायता मिलती है। | 55 |
| मोटे अनाज | ज्वार, बाजरा, रागी। | 55 |
| रेशेदार फसलें | कपास, जूट और सन। | 55 |
| सिंचाई | नहरों के जाल (नेटवर्क) द्वारा और भूमिगत जल को पंप से निकालकर खेतों को जल देना। | 55 |
| भूमिगत जलस्तर | ज़मीन के नीचे के जल का स्तर — सिंचाई बढ़ने से इसमें गिरावट आई है। | 55 |
7. मरुस्थल और समापन के पद
| पद | अर्थ | पृ. |
|---|---|---|
| मरुस्थल | यदा-कदा वर्षा प्राप्त करने वाला, दूर-दूर तक शुष्कता के फैलाव वाला स्थलरूप; इसका वनस्पति जगत और प्राणि जगत विलक्षण होता है। | 56 |
| गर्म मरुस्थल | सहारा (अफ्रीका), थार (भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में)। | 56 |
| ठंडा मरुस्थल | गोबी (एशिया)। कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिक महाद्वीप को भी मरुस्थल मानते हैं। | 56 |
| किंवदंती / दंत कथा | पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाने वाली कथाएँ; थार की सांस्कृतिक धरोहर का भाग। | 56 |
| अनुकूलन | स्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेना। | 56 |
| लचीलापन (रेजिलियंस) | चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने अथवा उनके अनुसार ढलने की क्षमता। | 56 |
| तिणै | प्राचीन तमिल संगम कविता की पाँच दृश्यभूमियाँ — कुरिंजी, मुल्लाई, मरूदम, नेयदल, पालै। | 57 |
8. याद रखने योग्य नाम और सूचियाँ
विश्व के छह पर्वत (चित्र 3.2 व 3.3, पृ. 44–45)
| गिरिशृंग | स्थिति | विशेषता |
|---|---|---|
| एवरेस्ट | नेपाल तथा तिब्बत के बीच | हिमालय की सबसे ऊँची चोटियों में से एक; 8848 मीटर |
| कंचनजुंगा | भारत के सिक्किम राज्य और नेपाल के बीच | हिमालय की दो सबसे ऊँची चोटियों में दूसरी |
| अकोंकागुआ | दक्षिणी अमेरिका | एंडीज की सबसे ऊँची चोटी |
| किलिमंजारो | पूर्वी अफ्रीका | पृथक पर्वत — किसी शृंखला का भाग नहीं |
| ब्लांक | पश्चिमी यूरोप | आल्प्स का सबसे ऊँचा शिखर |
| अनाईमुडी | केरल | दक्षिण भारत का सबसे ऊँचा गिरिशृंग; ‘अनाई शिखर’ भी |
तीन पर्वत शृंखलाएँ जो पुस्तक नाम से गिनाती है (पृ. 45)
| शृंखला | कहाँ |
|---|---|
| हिमालय | एशिया |
| आल्प्स | यूरोप |
| एंडीज | दक्षिणी अमेरिका |
एवरेस्ट के नाम (पृ. 51)
| नाम | किसका | अर्थ |
|---|---|---|
| चोमोलुंगमा | तिब्बती लोग | ‘जगत जननी’ |
| सागरमाथा | नेपाल निवासी | ‘आकाश की देवी’ |
कैलाश पर्वत — चार परंपराएँ (पृ. 51)
हिंदू दर्शन · बौद्ध मत · जैन मत · बॉन (तिब्बत का एक प्राचीन धर्म)
पर्वतीय जीव-जंतु (पृ. 47–48)
गोल्डन ईगल (सुनहरा गरुड़) · पेरेग्रिन फाल्कन (घुमंतू बाज) · कैनेडियन लिंक्स · हिम तेंदुआ · आइबेक्स (जंगली भेड) · हिमालयन तहर · पर्वतीय खरगोश · याक · ग्रे फॉक्स · भालू
गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (पृ. 48)
| नदी | कहाँ से निकलती है |
|---|---|
| गंगा | हिमालय — हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में विशालतम |
| यमुना | हिमालय — गंगा की सहायक |
| घाघरा | हिमालय — गंगा की सहायक |
| सोन | विंध्यांचल की शृंखलाएँ (गंगा के मैदान के दक्षिण में) |
पर्वतीय जीवन की सात चुनौतियाँ (चित्र 3.6, पृ. 50)
| चुनौती | प्रकार |
|---|---|
| आकस्मिक बाढ़ | प्राकृतिक |
| भूस्खलन | प्राकृतिक |
| हिमस्खलन (एवलांश) | प्राकृतिक |
| भारी हिमपात | प्राकृतिक |
| बादल फटना | प्राकृतिक |
| ठंडा मौसम | प्राकृतिक |
| पर्यटकों का अनियंत्रित रूप से आ जाना | मानव-निर्मित |
साहसिक खेल जो पुस्तक गिनाती है (पृ. 49)
स्कीइंग · हाइकिंग · पर्वतारोहण · पैरा ग्लाइडिंग
दो पर्वतारोही (पृ. 49)
| नाम | उपलब्धि | सम्मान |
|---|---|---|
| बछेंद्री पाल | 1984 में एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला; महिला अभियानों का नेतृत्व | पद्मश्री (1984), पद्मभूषण (2019) |
| अरुणिमा सिन्हा | 22 वर्ष की आयु में दुर्घटना में एक पैर गया; 2013 में एवरेस्ट; विंसन सहित सभी महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियाँ | पद्मश्री (2015) |
पठार और खनिज (पृ. 51)
| पठार | खनिज |
|---|---|
| पूर्वी अफ्रीका का पठार | सोना और हीरा |
| छोटा नागपुर का पठार | लौह, कोयला और मैंगनीज |
चार जल प्रपात (पृ. 52)
| जल प्रपात | नदी | स्थान |
|---|---|---|
| विक्टोरिया | जम्बेजी | दक्षिण अफ्रीका (पुस्तक के शब्द) |
| हुंडरू | सुवर्ण रेखा | छोटा नागपुर पठार |
| जोग | शरावती | पश्चिमी घाट |
| नहकालीकाई | — | चेरापूंजी (मेघालय) का पठार — 340 मीटर |
गंगा के मैदान की फसलें (पृ. 55)
| वर्ग | फसलें |
|---|---|
| खाद्य | चावल, गेहूँ, मक्का, जौ, मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी) |
| रेशेदार | कपास, जूट, सन |
तमिल संगम की पाँच तिणै (पृ. 57)
| तिणै | दृश्यभूमि | मुख्य व्यवसाय |
|---|---|---|
| कुरिंजी | पर्वतीय क्षेत्र | आखेट और संग्रह करना |
| मुल्लाई | घास के मैदान और वन | पशु पालन |
| मरूदम | उपजाऊ कृषि के मैदान | कृषि |
| नेयदल | तटीय क्षेत्र | मत्स्य पालन और समुद्री यात्रा |
| पालै | शुष्क, मरुस्थल जैसे प्रदेश | घुमंतू और युद्धरत |
पुस्तक का अपना निर्देश: “आपको तिणै के विवरण को याद रखने की आवश्यकता नहीं है, परंतु उससे प्रतिबिंबित अवधारणाओं को समझने की आवश्यकता है।” — यह तालिका रटने के लिए नहीं है।
चित्र 3.8 का विश्व-मानचित्र (पृ. 53)
| रंग | श्रेणी | मानचित्र पर अंकित नाम |
|---|---|---|
| नारंगी | पर्वत शृंखला | अलास्का, रॉकीज़, एंडीज़, एटलस, यूराल, हिमालय |
| भूरा | पठार | मंगोलियन, तिब्बत, पूर्वी अफ्रीकी, पैटागोनियन |
| हरा | नदियों के मैदान | मिसिसीपी, अमेजन, नील, सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र, यांगत्सी |
पुस्तक का अपना निर्देश: “आपको मानचित्र में दिए नाम स्मरण करने की आवश्यकता नहीं है।” जो अभ्यास करना है वह रंग का कोड पहचानना है।
9. मुख्य संख्याएँ
| मान | किसका | पृ. |
|---|---|---|
| 3 | स्थलरूपों की प्रमुख श्रेणियाँ — पर्वत, पठार, मैदान | 42, 57 |
| लाखों वर्ष | स्थलरूपों को आकार लेने में लगा समय | 42 |
| 8848 मीटर | एवरेस्ट गिरिशृंग की ऊँचाई | 51 |
| लगभग 2500 कि.मी. | गंगा की लंबाई | 48 |
| 4500 मीटर | तिब्बत के पठार की औसत ऊँचाई | 51 |
| लगभग 2500 किलोमीटर | तिब्बत के पठार की पूर्व-से-पश्चिम लंबाई | 51 |
| कई लाख वर्ष पहले | दक्कन के पठार का ज्वालामुखी सक्रियता से बनना | 51 |
| 340 मीटर | नहकालीकाई जल प्रपात की ऊँचाई | 52 |
| 300 मीटर से अधिक नहीं | मैदान की समुद्र तल से ऊँचाई | 53 |
| कुछ सौ से कई हजार मीटर | पठारों की ऊँचाई का परिसर | 51 |
| लगभग 40 करोड़ | गंगा के मैदान की जनसंख्या | 55 |
| एक-चौथाई से अधिक | भारत की जनसंख्या का वह भाग जो गंगा के मैदान में रहता है | 55 |
| कम से कम 1500 वर्ष पूर्व | कालिदास का काल | 46 |
| 1984 | बछेंद्री पाल — एवरेस्ट और पद्मश्री | 49 |
| 2019 | बछेंद्री पाल — पद्मभूषण | 49 |
| 22 वर्ष | अरुणिमा सिन्हा की आयु, जब दुर्घटना हुई | 49 |
| 2013 | अरुणिमा सिन्हा — एवरेस्ट | 49 |
| 2015 | अरुणिमा सिन्हा — पद्मश्री | 49 |
| 50 किलोमीटर | गतिविधि में दी गई दूरी | 42 |
| 6 | चित्र 3.2 व 3.3 के पर्वत | 44–45 |
| 7 | चित्र 3.6 की चुनौतियाँ | 50 |
| 5 | तमिल संगम की तिणै | 57 |
| 4 | कैलाश को पवित्र मानने वाली परंपराएँ | 51 |
! दो ‘2500’ एक ही अध्याय में हैं: गंगा की लंबाई (पृ. 48) और तिब्बत के पठार की पूर्व-पश्चिम लंबाई (पृ. 51)। इन्हें कभी एक साथ मत रटिए।
10. भ्रमित करने वाले युग्म — परीक्षक ठीक यही पूछता है
| युग्म | अंतर जो अंक दिलाता है |
|---|---|
| पर्वत बनाम पहाड़ी | पर्वत — अधिक ऊँचा, खड़ी चढ़ाई, सँकरा शिखर। पहाड़ी — कम ऊँची, कम खड़ी चढ़ाई, गोल शीर्ष। |
| नवीन बनाम प्राचीन पर्वत | नवीन — हिमालय, नुकीली चोटियाँ। प्राचीन — अरावली, गोल आकार (अपरदन से)। |
| भूस्खलन बनाम हिमस्खलन | भूस्खलन में चट्टान/भूखंड गिरता है; हिमस्खलन में हिम गिरती है। |
| बादल फटना बनाम आकस्मिक बाढ़ | बादल फटना = कारण; आकस्मिक बाढ़ = परिणाम। |
| गंगा बनाम यमुना | यमुना गंगा की सहायक नदी है — उलटा नहीं। |
| यमुना/घाघरा बनाम सोन | यमुना व घाघरा हिमालय से; सोन विंध्यांचल से। |
| सामान्य पठार बनाम लावा पठार | सामान्य पठार — चट्टानी मिट्टी, कम उपजाऊ। लावा पठार — समृद्ध काली मिट्टी, उपजाऊ। |
| किलिमंजारो बनाम शेष पर्वत | किलिमंजारो किसी शृंखला का भाग नहीं — पृथक पर्वत। |
| एवरेस्ट बनाम कंचनजुंगा (स्थिति) | एवरेस्ट — नेपाल–तिब्बत के बीच। कंचनजुंगा — सिक्किम–नेपाल के बीच। |
| चोमोलुंगमा बनाम सागरमाथा | चोमोलुंगमा — तिब्बती, ‘जगत जननी’। सागरमाथा — नेपाली, ‘आकाश की देवी’। |
| गर्म बनाम ठंडा मरुस्थल | गर्म — सहारा, थार। ठंडा — गोबी। |
| तुंगता बनाम समुद्र तल | तुंगता = ऊँचाई का माप। समुद्र तल = वह आधार-रेखा जिससे तुंगता नापी जाती है। |
| वर्षण बनाम वर्षा | वर्षण बड़ा पद है — इसमें वर्षा, हिमपात और ओले तीनों आते हैं। |
| मॉस बनाम लाइकेन | मॉस — छोटा हरा पौधा। लाइकेन — पौधे के समान जीव, चट्टानों/दीवारों/पेड़ों से चिपका। |
| तलछट बनाम गाद | तलछट = रेत + चट्टानों के कण + गाद; गाद उसका एक अवयव है। |
| स्थलरूप बनाम दृश्यभूमि | स्थलरूप = सतह का भौतिक स्वरूप। दृश्यभूमि = दिखाई देने वाला दृश्य। |
| कुरिंजी बनाम पालै | कुरिंजी — पर्वतीय, आखेट व संग्रह। पालै — शुष्क/मरुस्थल जैसा, घुमंतू व युद्धरत। |
| अनुकूलन बनाम लचीलापन | अनुकूलन = स्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेना। लचीलापन = कठिनाई का सामना करने की क्षमता। पुस्तक दोनों को एक ही वाक्य में जोड़ती है (पृ. 56)। |