कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 125–136 हर प्रश्न के तुरंत बाद उसका उत्तर है — शिक्षक के मूल्यांकन और कक्षा-प्रश्नोत्तरी के लिए। योग्यता-आधारित, प्रकरण वाले प्रश्नों के लिए
08-PARAKH-Question-Bank.mdदेखिए।
खंड क — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1अध्याय के आरंभ में दिए गए दो उद्धरण किनके हैं?
उत्तर देखिए
रवींद्रनाथ टैगोर और श्री अरविंद के।
2‘एक में अनेक’ पद किसका है?
उत्तर देखिए
श्री अरविंद का — और अध्याय का शीर्षक भी इसी से आया है।
3भारत की जनसंख्या कितनी है, और वह विश्व की जनसंख्या का कितना भाग है?
उत्तर देखिए
1.4 अरब से भी अधिक; विश्व की जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत।
4‘भारत के लोग’ परियोजना किस संगठन ने चलाई?
उत्तर देखिए
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण ने।
5यह सर्वेक्षण कब हुआ?
उत्तर देखिए
20वीं शताब्दी के अंत में।
6इस सर्वेक्षण में कितने समुदायों का अध्ययन किया गया?
उत्तर देखिए
4,635 समुदायों का।
7इसमें कितनी भाषाओं और कितनी लिपियों की गणना हुई?
उत्तर देखिए
25 लिपियों का उपयोग करने वाली 325 भाषाओं की।
8‘प्रवासी’ किसे कहा जा सकता है?
उत्तर देखिए
उन्हें, जो अपने जन्म स्थान के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ नहीं रहते।
9विंसेंट स्मिथ कौन थे?
उत्तर देखिए
एक ब्रिटिश इतिहासकार।
10‘मुख्य अनाज’ कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
चावल, जौ, गेहूँ, बाजरा, ज्वार और रागी तथा विभिन्न प्रकार की दालें।
11पूरे देश में उपयोग होने वाले कोई चार सामान्य मसाले लिखिए।
उत्तर देखिए
हल्दी, जीरा, इलायची और अदरक।
12साड़ी किन धागों से बनती है?
उत्तर देखिए
मुख्यत: कपास अथवा रेशम के धागे से; आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) कपड़ों से भी।
13रेशमी साड़ियों के कोई चार प्रसिद्ध प्रकार लिखिए।
उत्तर देखिए
बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा या मैसूर (कोई चार)।
14‘उकेरी गई आकृति’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
एक डिजाइन जो समतल सतह के ऊपर उकेरी गई हो; यह पत्थर, लकड़ी, मृत्तिका (सेरेमिक) या अन्य सामग्री की बनी हो सकती है।
15चित्र 8.2 कहाँ से प्राप्त है और वह कितनी पुरानी है?
उत्तर देखिए
वैशाली (वर्तमान बिहार में) से; कुछ शताब्दी सा.सं.पू. की।
16‘छींट’ क्या है?
उत्तर देखिए
एक सूती कपड़े पर छपा हुआ डिजाइन।
17‘छींट’ किस शताब्दी में यूरोप में लोकप्रिय हुआ?
उत्तर देखिए
17वीं शताब्दी में।
18किन दो देशों ने ‘छींट’ के आयात पर प्रतिबंध लगाया, और क्यों?
उत्तर देखिए
इंग्लैंड और फ्रांस ने — अपने स्वयं के उत्पादों के संरक्षण के लिए।
19मकर संक्रांति कब मनाई जाती है, और वह किसकी सूचक है?
उत्तर देखिए
14 जनवरी के आस-पास; यह भारत के विभिन्न भागों में फसलों की कटाई का सूचक है।
20चित्र 8.5 क्या दर्शाता है?
उत्तर देखिए
लगभग एक ही तिथि पर एक ही त्योहार के विभिन्न नामों को।
21मकर संक्रांति के कोई चार अन्य नाम लिखिए।
उत्तर देखिए
लोहड़ी/माघी, माघ बिहू, उत्तरायण, पोंगल, खिचड़ी पर्व, पेड्डा पंडुगा, मकर संक्रमण, मकर विलांक्कु, शिशुर सेंक्रात, पौष साँग क्रान्ति (कोई चार)।
22पंचतंत्र क्या है?
उत्तर देखिए
मुख्य पात्रों के रूप में पशुओं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग्रह, जो महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाता है।
23पंचतंत्र का मूल संस्कृत पाठ कितना पुराना है?
उत्तर देखिए
लगभग 2,200 वर्ष पुराना।
24पंचतंत्र के कितने रूपांतरण और कितनी भाषाओं में उपलब्ध हैं?
उत्तर देखिए
50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण।
25‘महाकाव्य’ की परिभाषा लिखिए।
उत्तर देखिए
सामान्यत: एक लंबी कविता जो अतीत के महान नायकों एवं योद्धाओं की कथाओं का व्याख्यान करती है।
26भारत के सबसे प्रभावशाली दो महाकाव्य कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
रामायण एवं महाभारत।
27इन दोनों महाकाव्यों का मूल संस्करण कितने पृष्ठों में समाहित है?
उत्तर देखिए
लगभग 7,000 पृष्ठों में।
28चित्र 8.6 का चित्रकार कौन है, और वह कहाँ तथा कब बना?
उत्तर देखिए
साहिबदीन; मेवाड़ में, 1652 में। (आज वह इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदन में है।)
29केवल तमिलनाडु में महाभारत के कितने लोक स्वरूप पाए गए?
उत्तर देखिए
100 से अधिक।
30के.एस. सिंह कौन थे?
उत्तर देखिए
एक मानवविज्ञानी, जिन्होंने ‘भारत के लोग’ परियोजना का निर्देशन किया।
31चित्र 8.7 किस जनजाति से संबंधित है और कहाँ का है?
उत्तर देखिए
इरूला जनजाति से; तमिलनाडु के नीलगिरि के जंगलों का।
32अध्याय में किन तीन जनजाति समुदायों का नाम रामायण-महाभारत के अपने संस्करणों के संदर्भ में
आया है?
उत्तर देखिए
भील, गोंड और मुंडा।
खंड ख — लघु उत्तरीय (2–3 अंक)
1अध्याय के दोनों उद्धरणों का सार लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
टैगोर“हे ईश्वर! मेरी यह प्रार्थना स्वीकार करें कि मैं अनेकता में एकता के स्पर्श का आनंद कभी न गवाँ सकूँ।”
श्री अरविंद“विविधता में एकता का सिद्धांत सदैव से भारत के लिए स्वाभाविक रहा है और यह उसकी प्रकृति एवं अस्तित्व के लिए आवश्यक है। एक में अनेक का यह भाव भारत को उसके स्वभाव व स्वधर्म की सुनिश्चित नींव पर स्थापित करेगा।”
★अध्याय का शीर्षक श्री अरविंद के इसी उद्धरण से आया है।
2★रेल-यात्रा वाले उदाहरण से पुस्तक क्या दर्शाना चाहती है? (3)
उत्तर देखिए
पुस्तक कहती है कि रेल द्वारा यात्रा करने पर आप न केवल बदलते भूदृश्यों को देखेंगे, बल्कि विभिन्न प्रकार के परिधान और भोजन का भी अनुभव करेंगे; आप परिचित एवं अपरिचित भाषाएँ सुनेंगे और विभिन्न लिपियों को देखेंगे। यहाँ तक कि अपने क्षेत्र में भी आप भारत के विभिन्न भागों से आए अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं वाले लोगों से मिलेंगे। यही भारत की समृद्ध विविधता है, और सामान्यत: यही वह पहला पक्ष है जो हमारे देश में आने वाले पर्यटकों को प्रभावित करता है।
3★‘भारत के लोग’ परियोजना के बारे में लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
20वीं शताब्दी के अंत में भारत के एक राष्ट्रीय संगठन, भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण ने ‘भारत के लोग’ परियोजना के अंतर्गत देश के सभी राज्यों में 4,635 समुदायों का एक व्यापक सर्वेक्षण किया। इसमें 25 लिपियों का उपयोग करने वाली 325 भाषाओं की गणना की गई। इस सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि अपने जन्म स्थान के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ न रहने के कारण अनेक भारतीयों को प्रवासी भी कहा जा सकता है।
4विंसेंट स्मिथ ने क्या कहा था? (2)
उत्तर देखिए
“इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है? …इस प्रश्न का उत्तर इस तथ्य में निहित है कि भारत ‘विविधता में एकता’ प्रदर्शित करता है।”
5★★भोजन के उदाहरण से एकता और विविधता कैसे दिखती है? (3)
उत्तर देखिए
भारत में हजारों प्रकार के व्यंजनों और पकवानों का स्वाद चखा जा सकता है — यह विविधता है। फिर भी कुछ निश्चित अनाज — चावल, जौ, गेहूँ, बाजरा, ज्वार और रागी तथा विभिन्न दालें — लगभग पूरे भारत में उपयोग होते हैं, और इसीलिए इन्हें ‘मुख्य अनाज’ कहा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, जीरा, इलायची और अदरक जैसे मसालों का उपयोग भी पूरे देश में होता है — यह एकता है।
★पुस्तक का अपना वाक्य: “कैसे एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते हैं।”
6★साड़ी का उदाहरण एकता और विविधता को कैसे प्रतिबिंबित करता है? (3)
(यह पुस्तक का ‘आइए पता लगाएँ’ प्रश्न भी है — पृ. 129)
उत्तर देखिए
एकता साड़ी एक ही प्रकार का परिधान है — भारत के अधिकांश भागों में पहना जाने वाला एक लंबा, बिना सिला वस्त्र। पुस्तक कहती है — “अंततोगत्वा यह एक ही प्रकार का परिधान — ‘साड़ी’ है।”
विविधता इसके सैकड़ों प्रकार के रूप होते हैं — कपास, रेशम और अब कृत्रिम कपड़ों से;
बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा, मैसूर जैसे रेशमी प्रकार; बुनाई और डिजाइन की विभिन्न विधियाँ; रंगों की अनेक विविधताएँ; और पहनने के अनेक तरीके, जो क्षेत्र और
समुदाय के साथ बदलते हैं — “इसे बाँधने व पहनने के नए-नए तरीके अभी भी खोजे जा रहे हैं।”
7★‘छींट’ की कहानी लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
बहुत लंबे समय तक भारत, विश्व में सर्वाधिक महीन सूत का उत्पादन करता रहा और उन कपड़ों का यूरोप जैसे सुदूर स्थानों तक निर्यात करता रहा। 17वीं शताब्दी में एक सूती कपड़े पर छपा हुआ डिजाइन ‘छींट’, यूरोप में इतना अधिक लोकप्रिय हुआ कि इसके कारण यूरोपीय परिधानों की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आई। अंतत: अपने स्वयं के उत्पादों के संरक्षण के लिए इंग्लैंड और फ्रांस को भारत से ‘छींट’ के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लेना पड़ा।
8★चित्र 8.4 में साड़ी के कौन-से अन्य उपयोग दिखाए गए हैं? (3)
उत्तर देखिए
छह चित्रों के माध्यम से — (1) बच्चे के लिए झूला, (2) मछली पकड़ने का जाल, (3) अनाज छानने या ओसाने में, (4) सिर पर घड़ा रखने के लिए गद्दी, (5) वर्षा से बचाव, और (6) ज़मीन पर बिछाकर लेटने के लिए।
★यह सब इसलिए संभव है क्योंकि साड़ी एक बिना सिला वस्त्र है।
9★★त्योहारों के उदाहरण से ‘विविधता में एकता’ कैसे सिद्ध होती है? (3)
उत्तर देखिए
पुस्तक कहती है कि कुछ त्योहार एक ही समय पर पूरे भारत में मनाए जाते हैं, हालाँकि उनके नाम
अलग-अलग होते हैं। उदाहरण है मकर संक्रांति, जो 14 जनवरी के आस-पास मनाया जाता है और भारत के
विभिन्न भागों में फसलों की कटाई का सूचक है। चित्र 8.5 इसी एक त्योहार के तेरह अलग-अलग नाम
दर्शाता है — जैसे शिशुर सेंक्रात, लोहड़ी, खिचड़ी पर्व, माघ बिहू, उत्तरायण, पेड्डा पंडुगा,
पोंगल और मकर विलांक्कु। अर्थात एक ही तिथि, एक ही पर्व, एक ही कारण — पर अनेक नाम।
10पंचतंत्र के बारे में लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
पंचतंत्र मुख्य पात्रों के रूप में पशुओं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग्रह है, जो हमें महत्वपूर्ण जीवन-कौशल सिखाता है। इसका मूल संस्कृत पाठ लगभग 2,200 वर्ष पुराना है, परंतु इसका रूपांतरण लगभग हर भारतीय भाषा में किया जा चुका है। यह भारत से बाहर दक्षिण-पूर्वी एशिया, अरब देशों तथा यूरोप में भी पढ़ा जाता है। ऐसा अनुमान है कि इसके 50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण उपलब्ध हैं।
★पुस्तक कहती है कि यह प्रदर्शित करता है कि ‘एक’ कहानियों का संग्रह किस प्रकार ‘अनेक’ में परिवर्तित हो गया।
11दोनों महाकाव्यों की कथा का सार लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
अपने मूल संस्करण में लगभग 7,000 पृष्ठों में समाहित ये दोनों संस्कृत के महाकाव्य हैं, जिसमें नायक धर्म की पुनर्स्थापना के लिए युद्ध करते हैं। महाभारत में पांडव, श्री कृष्ण की सहायता से अपने चचेरे भाइयों ‘कौरवों’ से अपने राज्य की प्राप्ति के लिए युद्ध करते हैं। रामायण में श्री राम अपने भाई लक्ष्मण एवं हनुमान की सहायता से उस राक्षस रावण को पराजित करते हैं, जिसने उनकी पत्नी सीता का अपहरण किया था। इन कथाओं में कई और छोटी कथाएँ/उपकथाएँ भी हैं, जो नैतिक मूल्यों पर केंद्रित हैं और लगातार प्रश्न पूछती हैं कि क्या सत्य और क्या असत्य।
12★महाकाव्यों के लोक और जनजातीय संस्करणों के बारे में लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से इन महाकाव्यों का अनुवाद व रूपांतरण होता रहा है, और इनके अनगिनत लोक संस्करण भी हैं। कुछ वर्ष पूर्व एक विद्वान ने केवल तमिलनाडु में किए गए सर्वेक्षण में महाभारत के 100 से अधिक लोक स्वरूपों को पाया। बहुत से समुदायों में इनके अपने संस्करण हैं — भील, गोंड, मुंडा जैसे जनजाति समुदायों में, और पूर्वोत्तर तथा हिमालय क्षेत्र (जिसमें कश्मीर भी सम्मिलित है) की अधिकांश जनजातियों में। ये जनजातीय रूपांतरण मौखिक रूप से प्रसारित हुए।
13के.एस. सिंह ने महाभारत के बारे में क्या कहा? (2)
उत्तर देखिए
मानवविज्ञानी के.एस. सिंह, जिन्होंने ‘भारत के लोग’ परियोजना का निर्देशन किया, कहते हैं — “लोककथाओं के अनुसार इस देश में शायद ही ऐसा कोई स्थान हो जहाँ महानायक पांडव न गए हों।” और पुस्तक जोड़ती है कि यही बात रामायण के संदर्भ में भी कही जा सकती है।
14महाकाव्यों ने क्या विकसित किया? (2)
उत्तर देखिए
“सदियों से, किसी अन्य साहित्य की अपेक्षा इन दो महाकाव्यों ने भारत एवं एशिया के विभिन्न भागों के मध्य एक सांस्कृतिक सूत्र के गहन तंत्र को विकसित किया। यह विविधता में एकता का एक अन्य उदाहरण है।”
15‘आगे बढ़ने से पहले’ के तीन बिंदु लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
भारत में विभिन्न परिदृश्यों, व्यक्तियों, भाषाओं, परिधानों, भोजन, त्योहारों एवं परंपराओं की विविधता है। (2) विभिन्न क्षेत्रों में विविधता दृष्टिगोचर होती है, परंतु इसमें अंतर्निहित एकता भी है। (3) भारतीय एकता, विविधता का उत्सव मनाती है क्योंकि विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।
खंड ग — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)
1★★‘विविधता में एकता’ का क्या अर्थ है? अध्याय के चारों उदाहरणों से इसे समझाइए।
उत्तर देखिए
अर्थ भारत में बाहर से देखने पर अनेक प्रकार की चीज़ें दिखती हैं, पर भीतर एक साझा सूत्र होता है। पुस्तक ने यह साँचा स्वयं लिखा है — “कैसे एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते हैं।”
चारों उदाहरण
| उदाहरण | एक | अनेक |
|---|---|---|
| भोजन | एक ही सामग्री — मुख्य अनाज, दालें, मसाले | हजारों व्यंजन और पकवान |
| साड़ी | एक ही परिधान, और वह भी बिना सिला | सैकड़ों रूप; अनेक बाँधने के तरीके; छह अन्य उपयोग |
| त्योहार | एक ही तिथि, एक ही पर्व — फसल की कटाई | तेरह नाम (चित्र 8.5) |
| महाकाव्य | एक कथा | अनगिनत लोक संस्करण; केवल तमिलनाडु में 100 से अधिक |
निष्कर्ष पुस्तक की अंतिम पंक्ति — “भारतीय संस्कृति विविधता को संपन्नता के रूप में प्रचारित करती है, किंतु साथ ही विविधता को पोषित करने वाली अंतर्निहित एकता को भी दृष्टि से ओझल नहीं होने देती।” और “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”
2★भारत की विविधता के आँकड़े और उनका महत्व समझाइए।
उत्तर देखिए
आँकड़े भारत में 1.4 अरब से भी अधिक निवासी हैं, जो विश्व की जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत है।
20वीं शताब्दी के अंत में भारत के एक राष्ट्रीय संगठन, भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण ने
‘भारत के लोग’ परियोजना के अंतर्गत देश के सभी राज्यों में 4,635 समुदायों का व्यापक
सर्वेक्षण किया। इसमें 25 लिपियों का उपयोग करने वाली 325 भाषाओं की गणना की गई। सर्वेक्षण में
यह भी पाया गया कि अनेक भारतीयों को प्रवासी भी कहा जा सकता है, क्योंकि वे अपने जन्म स्थान
के निकट या अपने मूल समुदाय के साथ नहीं रहते।
महत्व पुस्तक कहती है कि “इस प्रकार की विविधता आश्चर्यजनक नहीं है” — इतने बड़े देश में
यह स्वाभाविक है। पर यही विविधता वह प्रश्न खड़ा करती है जिससे अध्याय शुरू होता है: ब्रिटिश इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने पूछा था — “इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है?” — और उन्होंने स्वयं उत्तर दिया कि भारत ‘विविधता में एकता’ प्रदर्शित करता है।
3★साड़ी पर एक विस्तृत उत्तर लिखिए।
उत्तर देखिए
क्या हैभारत के अधिकांश भागों में पहना जाने वाला और विभिन्न प्रकार के सूत या धागे से बना एक लंबा परिधान — और वह बिना सिला होता है।
सामग्रीमुख्यत: कपास अथवा रेशम के धागे से; आजकल कृत्रिम (सिंथेटिक) कपड़ों से भी।
प्रकारबनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा, मैसूर — ये रेशमी साड़ियों के कुछ
प्रसिद्ध प्रकार हैं; सूती साड़ियों के और भी प्रकार होते हैं। कुल मिलाकर सैकड़ों प्रकार के रूप।
विविधता कहाँ सेबुनाई एवं डिजाइन की विभिन्न विधियाँ — कुछ डिजाइन कपड़े का ही हिस्सा
होते हैं, कुछ बुनाई के बाद छापे जाते हैं; और रंगों में अनेक विविधताएँ।
इतिहासकुछ शताब्दी सा.सं.पू. वैशाली (आज के बिहार) में पत्थर पर उकेरी गई आकृति में
साड़ी पहनी हुई स्त्री दर्शाई गई है (चित्र 8.2)।
अन्य उपयोगविदेशी यात्री इसकी सादगी, सुलभता और पहनने के विविध तरीकों को देखकर अभिभूत हुए। चित्र 8.4 में छह चित्रों के माध्यम से इसके रचनात्मक उपयोग दिखाए गए हैं —
झूला, मछली का जाल, अनाज ओसाना, सिर की गद्दी, वर्षा से बचाव, और बिछौना।
★निष्कर्ष“इसे बाँधने व पहनने के नए-नए तरीके अभी भी खोजे जा रहे हैं, लेकिन अंततोगत्वा यह एक ही प्रकार का परिधान — ‘साड़ी’ है।”
4★★महाकाव्यों के विस्तार पर विस्तृत उत्तर लिखिए।
उत्तर देखिए
पंचतंत्र यह पशुओं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग्रह है, जो महत्वपूर्ण जीवन-कौशल
सिखाता है। इसका मूल संस्कृत पाठ लगभग 2,200 वर्ष पुराना है, और इसका रूपांतरण लगभग हर भारतीय भाषा में हुआ है। यह दक्षिण-पूर्वी एशिया, अरब देशों तथा यूरोप में भी पढ़ा जाता है।
50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण उपलब्ध हैं। “यह प्रदर्शित करता है कि ‘एक’ कहानियों का संग्रह किस प्रकार ‘अनेक’ में परिवर्तित हो गया।”
दो महाकाव्यरामायण और महाभारत — मूल संस्करण में लगभग 7,000 पृष्ठ, संस्कृत में,
जिनमें नायक धर्म की पुनर्स्थापना के लिए युद्ध करते हैं। इनमें छोटी कथाएँ/उपकथाएँ भी हैं,
जो नैतिक मूल्यों पर केंद्रित हैं और लगातार प्रश्न पूछती हैं कि क्या सत्य और क्या असत्य।
विस्तारदो सहस्राब्दियों से अधिक समय से इनका भारत एवं भारत से बाहर अनुवाद व रूपांतरण
होता रहा है, और इनके अनगिनत लोक संस्करण भी हैं। केवल तमिलनाडु में एक विद्वान ने
महाभारत के 100 से अधिक लोक स्वरूप पाए।
जनजातीय संस्करणभील, गोंड, मुंडा जैसे समुदायों में, और पूर्वोत्तर तथा हिमालय क्षेत्र (कश्मीर सहित) की अधिकांश जनजातियों में इनकी अपनी लोककथाएँ हैं। ये जनजातीय रूपांतरण मौखिक रूप से प्रसारित हुए, और इनके साथ किंवदंतियाँ भी फैलीं कि पांडव, द्रौपदी, कभी-कभी दुर्योधन उनके क्षेत्रों में आए। चित्र 8.7 में नीलगिरि के जंगलों का ‘पंच पांडव’
पत्थर है, जिसे इरूला जनजाति ने मंदिर में सुरक्षित रखा है।
★के.एस. सिंह का कथन“लोककथाओं के अनुसार इस देश में शायद ही ऐसा कोई स्थान हो जहाँ महानायक पांडव न गए हों।”
निष्कर्ष“सदियों से, किसी अन्य साहित्य की अपेक्षा इन दो महाकाव्यों ने भारत एवं एशिया के विभिन्न भागों के मध्य एक सांस्कृतिक सूत्र के गहन तंत्र को विकसित किया।”
5नेहरू के कथन पर विचार-विमर्श कीजिए। (अभ्यास प्रश्न 5)
उत्तर देखिए
कथन“हर जगह मुझे एक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि मिली, जिसने उनके जीवन पर प्रभावशाली असर डाला। …भारत के महाकाव्य, रामायण एवं महाभारत और अन्य प्राचीन पुस्तकें, लोकप्रिय अनुवादों और व्याख्याओं में जनता के बीच व्यापक रूप से जानी जाती थीं… निरक्षर ग्रामीणों को भी सैकड़ों श्लोक कंठस्थ थे एवं उनकी आपसी बातचीत में इन महाकाव्यों… के संदर्भों की प्रचुरता होती थी जो नैतिकता को प्रतिस्थापित करती थीं।”
★मुख्य बिंदु नेहरू कह रहे हैं कि यह सांस्कृतिक सूत्र लिखित शिक्षा पर नहीं, मौखिक परंपरा पर टिका था — “निरक्षर ग्रामीणों को भी सैकड़ों श्लोक कंठस्थ थे।” अर्थात यह विरासत
केवल पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित नहीं थी।
और दूसरी बात“हर जगह मुझे एक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि मिली” — यानी यह पृष्ठभूमि पूरे देश में एक जैसी मिली, चाहे वे कहीं भी गए। यही ‘विविधता में एकता’ का प्रत्यक्ष अनुभव है।
(★इसे अध्याय 7 की मौखिक परंपरा वाली बात से जोड़ने वाले उत्तर को अतिरिक्त मान्यता दीजिए।)
खंड घ — मानचित्र और चित्र आधारित
1चित्र 8.5 के आधार पर मकर संक्रांति के कोई छह नाम लिखिए और बताइए कि यह मानचित्र क्या
सिद्ध करता है। (4)
उत्तर देखिए
छह नाम (कोई भी छह): शिशुर सेंक्रात · माघी/लोहड़ी · खिचड़ी पर्व · माघ बिहू · मकर संक्रांत · उत्तरायण · मकर संक्रांति · पौष साँग क्रान्ति · पेड्डा पंडुगा · मकर संक्रमण · पोंगल · मकर विलांक्कु।
यह मानचित्र सिद्ध करता है कि “लगभग एक ही तिथि पर एक ही त्योहार” के भारत में अनेक नाम हैं
— अर्थात एक में अनेक।
2चित्र 8.1 के आधार पर कोई छह अनाज या दालें लिखिए। (3)
उत्तर देखिए
राजमा · लोबिया · बासमती · मूंग दाल · मसूर दाल · चना दाल · अरहर दाल · छोले/चना · बाजरा · मक्का · ज्वार · सोना मसूरी · पोन्नी चावल · कोलम चावल (कोई छह)।
★ध्यान दीजिए कि इस मानचित्र पर चावल चार बार है, पर हर बार अलग नाम से।
3चित्र 8.6 का पूरा विवरण लिखिए। (2)
उत्तर देखिए
रामायण का युद्धकांड · चित्रकार साहिबदीन · स्थान मेवाड़ · वर्ष 1652 · आज इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी, लंदन में।
शिक्षक के लिए — तीन चेतावनियाँध्यान
1. नाम रटाने में मत उलझिए — यह इस अध्याय का सबसे बड़ा जोखिम है। यह अध्याय नामों से भरा है, पर पुस्तक स्वयं इन्हें “कुछ उदाहरण” कहती है (चित्र 8.1 का कैप्शन)। प्रश्न बनाते समय “कोई चार” या “कोई छह” लिखिए — पूरी सूची कभी मत माँगिए। याद कराने योग्य वास्तव में केवल आँकड़े हैं और वह ढाँचा जो खंड ग, प्रश्न 1 की तालिका में है।
2. ! 325 और 25 का भेद हर बार जाँचिए। 325 = भाषाएँ। 25 = लिपियाँ। विद्यार्थी इन्हें आपस में बदल देते हैं। कक्षा में यह कारण बता दीजिए — “एक ही लिपि अनेक भाषाएँ लिख सकती है, इसलिए लिपियाँ कम हैं।” कारण बताने से यह भूलता नहीं।
3. ★‘विविधता में एकता’ को ‘एकरूपता’ मत बनने दीजिए। कुछ विद्यार्थी उत्तर में लिख देते हैं कि “पूरे भारत में सब एक जैसा है।” यह अध्याय की बात नहीं है। पुस्तक कहती है कि विविधता है, और वह अच्छी है — “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।” पूरे अंक केवल उस उत्तर को दीजिए जो दोनों बातें कहे — अनेकता भी, और उसके भीतर का साझा सूत्र भी।