Chapter 8विविधता में एकता या 'एक में अनेक'

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NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 8, पृ. 125–136।

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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · मध्य स्तर (कक्षा 6–8)

PARAKH — Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NCERT की एक स्वतंत्र संघटक इकाई है, जो 8 फरवरी 2023 की अधिसूचना से स्थापित हुई। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 4.4.1 के अंतर्गत विद्यार्थी-मूल्यांकन के मानक और दिशानिर्देश तय करती है।

इस प्रश्न बैंक की अलग बात क्या है

05-Question-Bank.md याद रखने की जाँच करता है — नाम, आँकड़े, तिथियाँ। वह बोर्ड-शैली का है और आवश्यक है।

यह फ़ाइल वह नहीं करती। यहाँ हर प्रश्न विद्यार्थी को एक नई स्थिति देता है और पूछता है कि अध्याय का साँचा वहाँ लगाकर दिखाओ।

यहाँ नहीं मिलेगायहाँ मिलेगा
“मकर संक्रांति के तेरह नाम लिखिए।”एक नया उदाहरण देकर — “क्या यह भी ‘एक में अनेक’ है? कैसे?”
“साड़ी के छह उपयोग लिखिए।”एक नया परिधान देकर — “इस पर वही साँचा लगाकर दिखाइए।”
“4,635 क्या है?”आँकड़े देकर — “इनसे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?”

मूल्यांकन का नियम: जिस प्रश्न का उत्तर पुस्तक की किसी एक पंक्ति से सीधे उठाया जा सके, वह योग्यता-आधारित प्रश्न नहीं है।

जाँची जा रही योग्यताएँ

कोडयोग्यता
यो-1साँचा लगाना — ‘एक और अनेक’ के ढाँचे को किसी नई चीज़ पर लागू करना
यो-2आँकड़ा पढ़ना — संख्याओं और मानचित्रों से अर्थ निकालना
यो-3भेद करना — ‘एकता’ और ‘एकरूपता’ में अंतर पहचानना
यो-4कारण खोजना — किसी तथ्य के पीछे का कारण समझना
यो-5अपने अनुभव से जोड़ना — अध्याय की बात अपने घर और क्षेत्र में देखना

खंड क — प्रकरण-आधारित प्रश्न

प्रकरण 1 — एक नया उदाहरण

यो-1 · कुल 9 अंक

पुस्तक ने चार उदाहरण दिए — भोजन, साड़ी, त्योहार और महाकाव्य।

अब यह पढ़िए —

“भारत में नमस्ते करने का ढंग लगभग हर जगह एक ही है — दोनों हाथ जोड़कर। पर उसे कहते अलग-अलग हैं — कहीं नमस्ते, कहीं नमस्कार, कहीं वणक्कम, कहीं नोमोश्कार, कहीं सत श्री अकाल, कहीं खम्मा घणी।”

1.1★पुस्तक ने जो साँचा दिया है, उसे इस उदाहरण पर लगाइए 3 अंक

उत्तर देखिए

यहाँ ‘एक’ क्या है और ‘अनेक’ क्या?

एकनमस्ते करने का ढंग — दोनों हाथ जोड़कर — लगभग हर जगह एक ही है। अनेक: उसे कहने के अनेक नाम — नमस्ते, नमस्कार, वणक्कम, नोमोश्कार, सत श्री अकाल, खम्मा घणी। (2 अंक: यदि दोनों बताए जाएँ पर स्पष्ट रूप से ‘एक’ और ‘अनेक’ में न बाँटे जाएँ।)

1.2★यह उदाहरण अध्याय के किस उदाहरण से सबसे अधिक मिलता-जुलता है, और क्यों? 3 अंक

उत्तर देखिए

त्योहार वाले उदाहरण से — क्योंकि वहाँ भी एक ही चीज़ (एक ही तिथि, एक ही पर्व) के अनेक नाम हैं, ठीक वैसे ही जैसे यहाँ एक ही अभिवादन के अनेक नाम हैं। (★यदि कोई विद्यार्थी साड़ी वाले उदाहरण से जोड़े — “एक ही चीज़, अनेक रूप” — तो उसे भी पूरे अंक दीजिए, यदि कारण दिया हो।)

1.3पुस्तक ने भोजन वाले उदाहरण में जो वाक्य लिखा है, वह याद कीजिए और यहाँ के लिए वैसा ही एक वाक्य बनाइए। 2 अंक

उत्तर देखिए

कोई भी वाक्य जो पुस्तक के साँचे का पालन करे, जैसे — “इस तरह हम देखते हैं कि कैसे एक ही अभिवादन (एकता) को विभिन्न भाषाओं में (विविधता) अनेक नामों से कहा जाता है।”

1.4क्या आप अपने आस-पास से ऐसा ही एक और उदाहरण सोच सकते हैं? एक पंक्ति में लिखिए। 1 अंक

उत्तर देखिए

किसी भी तर्कसंगत उदाहरण पर पूरा अंक। (जैसे — शादी में फेरे लगभग हर जगह होते हैं, पर रीति अलग; या पतंग सब जगह उड़ती है, पर नाम और मौसम अलग।)

प्रकरण 2 — तीन आँकड़े

यो-2 · यो-4 · कुल 8 अंक

‘भारत के लोग’ परियोजना ने तीन आँकड़े दिए —

4,635 समुदाय · 325 भाषाएँ · 25 लिपियाँ

2.1इन तीनों में से सबसे बड़ी संख्या किसकी है और सबसे छोटी किसकी? 1 अंक

उत्तर देखिए

सबसे बड़ी: 4,635 (समुदाय)। सबसे छोटी: 25 (लिपियाँ)।

2.2★★भाषाएँ 325 हैं, पर लिपियाँ केवल 25। ऐसा क्यों? (संकेत — सोचिए कि हिंदी, मराठी और संस्कृत किस लिपि में लिखी जाती हैं।) 3 अंक

उत्तर देखिए

पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि एक ही लिपि में अनेक भाषाएँ लिखी जा सकती हैं — इसलिए लिपियों की संख्या भाषाओं से कम होगी। ★उदाहरण देने पर अतिरिक्त मान्यता: देवनागरी में हिंदी, मराठी, संस्कृत, नेपाली — सब लिखी जाती हैं। (2 अंक: यदि केवल “एक लिपि से कई भाषाएँ लिखी जाती हैं” कहा जाए, बिना उदाहरण के।)

★यह इस प्रकरण का सबसे अच्छा प्रश्न है — यह जाँचता है कि विद्यार्थी ने संख्याओं को रटा या समझा।

2.3★इन आँकड़ों को इस अध्याय में क्यों रखा गया है? वे अध्याय की मुख्य बात से कैसे
जुड़ते हैं? 2 अंक

उत्तर देखिए

क्योंकि ये आँकड़े भारत की विविधता को ठोस रूप में दिखाते हैं। पुस्तक इन्हीं के बाद वह प्रश्न उठाती है कि “इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है?” — यानी ये आँकड़े ही उस प्रश्न का आधार बनाते हैं जिससे पूरा अध्याय शुरू होता है।

2.4पुस्तक कहती है कि भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत है।
इस एक वाक्य से आप क्या समझते हैं? 2 अंक

उत्तर देखिए

कि दुनिया के लगभग हर छठे व्यक्ति में से एक भारत में रहता है — अर्थात भारत बहुत बड़ा है, और इसीलिए “इस प्रकार की विविधता आश्चर्यजनक नहीं है।” (किसी भी तर्कसंगत व्याख्या पर पूरे अंक।)

प्रकरण 3 — बिना सिला कपड़ा

यो-4 · कुल 8 अंक

पुस्तक साड़ी को “बिना सिला वस्त्र” कहती है।

और फिर चित्र 8.4 में छह चित्रों के माध्यम से दिखाती है कि महिलाएँ उसका उपयोग झूला, मछली का जाल, अनाज ओसाने, सिर की गद्दी, वर्षा से बचाव और बिछौने के रूप में भी करती हैं।

3.1★★यह सब क्यों संभव है? (संकेत — पुस्तक का एक शब्द ध्यान से पढ़िए।) 3 अंक

उत्तर देखिए

क्योंकि साड़ी बिना सिला वस्त्र है। पूरे अंक का उत्तर यह जोड़ता है कि बिना सिला होने के कारण वह केवल एक ही आकार में बँधा नहीं है — उसे मोड़ा, बाँधा, तानकर या बिछाकर किसी भी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। (2 अंक: यदि केवल “बिना सिला है” कहा जाए, बिना कारण जोड़े।)

3.2★क्या एक सिली हुई कमीज़ या पैंट के साथ यह सब किया जा सकता है? कारण सहित लिखिए। 2 अंक

उत्तर देखिए

नहीं। क्योंकि सिला हुआ कपड़ा एक निश्चित आकार में बँध जाता है — कमीज़ कमीज़ ही रहेगी; उसे न झूला बनाया जा सकता है, न जाल, न बिछौना।

3.3पुस्तक कहती है कि विदेशी यात्री साड़ी की “सादगी, सुलभता और पहनने के विविध तरीकों” को
देखकर अभिभूत हुए। इन तीनों में से कौन-सी बात इन छह उपयोगों को संभव बनाती है? 2 अंक

उत्तर देखिए

‘सुलभता’ (अर्थात लचीलापन और सहजता से किसी भी रूप में ढल जाना)। (यदि कोई विद्यार्थी ‘सादगी’ कहे और कारण दे कि सादा कपड़ा किसी भी काम आ सकता है, तो उसे भी मान्यता दीजिए।)

3.4साड़ी वाले खंड का अंतिम वाक्य लिखिए। 1 अंक

उत्तर देखिए

“इसे बाँधने व पहनने के नए-नए तरीके अभी भी खोजे जा रहे हैं, लेकिन अंततोगत्वा यह एक ही प्रकार का परिधान — ‘साड़ी’ है।”

प्रकरण 4 — दो मानचित्र

यो-1 · यो-2 · कुल 7 अंक

इस अध्याय में दो मानचित्र हैं —

चित्र 8.1 — भारत के विभिन्न क्षेत्रों से अनाजों और दालों के कुछ उदाहरण। चित्र 8.5 — मकर संक्रांति के तेरह नाम।

4.1★दोनों मानचित्र एक ही बात सिद्ध करते हैं। वह क्या है? 2 अंक

उत्तर देखिए

दोनों यह सिद्ध करते हैं कि भारत में एक ही चीज़ के अनेक रूप या नाम हैं — अर्थात ‘एक में अनेक’।

4.2★★चित्र 8.1 पर चावल चार बार आता है — बासमती, सोना मसूरी, पोन्नी चावल, कोलम चावल। यह किस बात का उदाहरण है, और यह चित्र 8.5 से कैसे मिलता है? 3 अंक

उत्तर देखिए

यह ‘एक ही चीज़, अनेक नाम’ का उदाहरण है — चावल एक ही अनाज है, पर उसके बासमती, सोना मसूरी, पोन्नी और कोलम जैसे अलग-अलग नाम और प्रकार हैं। ★और यह चित्र 8.5 से ठीक वैसे ही मिलता है — वहाँ एक ही त्योहार के तेरह नाम हैं। दोनों मानचित्रों की बनावट एक ही है। (2 अंक: यदि केवल पहली बात कही जाए, पर चित्र 8.5 से जोड़ न बने।)

4.3दोनों मानचित्रों पर लिखा है — “पैमाने पर आधारित नहीं है।” इसका क्या अर्थ है, और इन मानचित्रों में यह ठीक क्यों है? 2 अंक

उत्तर देखिए

इसका अर्थ है कि मानचित्र पर दूरियाँ और आकार वास्तविक अनुपात में नहीं हैं। यहाँ यह ठीक है क्योंकि इन मानचित्रों का उद्देश्य दूरी नापना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि कौन-सी चीज़ लगभग किस क्षेत्र में मिलती है।

खंड ख — अभिकथन एवं कारण

निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है। · (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं है। (ग) A सही, R गलत। · (घ) A गलत, R सही।

1A: ‘भारत के लोग’ सर्वेक्षण में भाषाओं की संख्या लिपियों से अधिक निकली।
R: एक ही लिपि में अनेक भाषाएँ लिखी जा सकती हैं। 1 अंक

उत्तर देखिए

(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है

2A: इंग्लैंड और फ्रांस को ‘छींट’ के आयात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।
R: भारतीय छींट यूरोप में इतना लोकप्रिय हुआ कि यूरोपीय परिधानों की कीमतों में बड़ी गिरावट
आई। 1 अंक

उत्तर देखिए

(क) — दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है

3A: साड़ी का उपयोग झूले और मछली के जाल के रूप में भी किया जा सकता है।
R: साड़ी एक बिना सिला वस्त्र है। 1 अंक

उत्तर देखिए

(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है

4A: मकर संक्रांति के भारत में अनेक नाम हैं।
R: ये सब अलग-अलग त्योहार हैं, जो अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाते हैं। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ग) — A सही; R ग़लत — ये अलग त्योहार नहीं हैं; पुस्तक कहती है कि यह एक ही त्योहार, लगभग एक ही तिथि पर है

5A: पंचतंत्र के 50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण हैं।
R: पंचतंत्र भारत से बाहर दक्षिण-पूर्वी एशिया, अरब देशों तथा यूरोप में भी पढ़ा जाता है। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ख) — दोनों सही, पर R, A की व्याख्या नहीं है — विदेशों में पढ़ा जाना और रूपांतरणों की संख्या दो अलग तथ्य हैं

6A: पुस्तक कहती है कि विविधता समृद्ध करती है।
R: पुस्तक चाहती है कि पूरे भारत में सब कुछ एक जैसा हो जाए। 1 अंक

उत्तर देखिए

(ग) — A सही; R ग़लत — पुस्तक एकरूपता की नहीं, विविधता के भीतर के साझे सूत्र की बात करती है

खंड ग — पाठ एवं आरेख व्याख्या

1★★नीचे अध्याय के चारों उदाहरण दिए हैं। तालिका पूरी कीजिए। 4 अंक

उदाहरणएक (एकता)अनेक (विविधता)
भोजन
साड़ी
त्योहार
महाकाव्य
उत्तर देखिए

प्रत्येक पंक्ति 1 अंक; पूरा अंक तभी जब दोनों स्तंभ भरे जाएँ।

उदाहरणएकअनेक
भोजनएक ही सामग्री — मुख्य अनाज, दालें, मसालेहजारों व्यंजन और पकवान
साड़ीएक ही परिधान, और वह बिना सिलासैकड़ों रूप; अनेक बाँधने के तरीके; छह अन्य उपयोग
त्योहारएक ही तिथि, एक ही पर्व — फसल की कटाईतेरह नाम
महाकाव्यएक कथाअनगिनत लोक संस्करण; तमिलनाडु में ही 100 से अधिक

2★पुस्तक ने भोजन वाले खंड में यह वाक्य लिखा है 3 अंक

“इस तरह हम देखते हैं कि कैसे एक ही प्रकार की सामग्री (एकता) से विभिन्न प्रकार के (विविधता) अनगिनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते हैं।”

2.1 पुस्तक ने कोष्ठक में ‘एकता’ और ‘विविधता’ क्यों लिख दिए? (2) 2.2 यह वाक्य अध्याय के बाक़ी तीन उदाहरणों पर भी लागू होता है — एक उदाहरण से दिखाइए। (1)

उत्तर देखिए
  • 2.1 (2) — ताकि पाठक को यह साफ़ दिख जाए कि इस उदाहरण में ‘एकता’ कहाँ है और ‘विविधता’ कहाँ। यह वाक्य पूरे अध्याय का साँचा है, और कोष्ठक उसे स्पष्ट कर देते हैं।
  • 2.2 (1) — कोई भी एक, जैसे — “एक ही परिधान (एकता) के सैकड़ों रूप (विविधता) होते हैं।”

3★नीचे दो कथन हैं। बताइए कि कौन-सा अध्याय की बात कहता है और कौन-सा नहीं, और
क्यों। 3 अंक

कथन A: “भारत में सब एक जैसे हैं — एक ही भोजन, एक ही परिधान, एक ही त्योहार।” कथन B: “भारत में बहुत विविधता है, और उसी विविधता के भीतर एक साझा सूत्र भी है।”

उत्तर देखिए

कथन B अध्याय की बात कहता है। (1 अंक) कारण (2 अंक): कथन A ग़लत है क्योंकि अध्याय यह कहीं नहीं कहता कि सब एक जैसे हैं — वह तो शुरू ही विविधता से होता है (अलग परिधान, अलग भोजन, अलग भाषाएँ, 325 भाषाएँ, तेरह नाम)। अध्याय की बात यह है कि विविधता है, और उसके भीतर एक साझा सूत्र भी है — “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”

★यह प्रश्न इस पूरी फ़ाइल का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है — क्योंकि कथन A ठीक वह ग़लती है जो विद्यार्थी सबसे अधिक करते हैं।

खंड घ — मुक्त-उत्तर एवं अनुप्रयोग

1★★पुस्तक का अंतिम वाक्य है — “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”
अपने शब्दों में समझाइए कि विविधता कैसे ‘समृद्ध’ करती है। एक उदाहरण भी दीजिए। 4 अंक

उत्तर देखिए

पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि विविधता से चुनाव, स्वाद, विचार और अनुभव बढ़ते हैं — अर्थात अधिक चीज़ें उपलब्ध होती हैं, कम नहीं।

अंककसौटी
4‘समृद्ध करना’ का अर्थ अपने शब्दों में और एक ठोस उदाहरण (जैसे — एक ही सब्ज़ी से दस व्यंजन मिलते हैं, एक से नहीं; या एक ही त्योहार तेरह तरीक़ों से मनाया जाता है, जिससे सीखने को अधिक मिलता है)
2–3अर्थ सही, पर उदाहरण नहीं
1केवल पुस्तक का वाक्य दोहराया

2★मान लीजिए कोई कहता है — “अगर पूरे भारत में एक ही त्योहार, एक ही नाम से, एक ही तरीक़े से मनाया जाता, तो देश ज़्यादा एक होता।”
क्या आप सहमत हैं? अध्याय के आधार पर कारण सहित उत्तर लिखिए। 4 अंक

उत्तर देखिए

किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पर सबसे अच्छा उत्तर यह पहचानता है कि प्रश्न में एक छिपी हुई ग़लती है — वह एकता को एकरूपता समझ रहा है।

अध्याय के अनुसार भारत पहले से ही एक है — मकर संक्रांति पूरे देश में लगभग एक ही दिन, एक ही कारण से मनाई जाती है। नाम अलग होने से वह एकता टूटती नहीं। और पुस्तक स्पष्ट कहती है कि “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”

अंककसौटी
4पक्ष और कारण और यह पहचानना कि नाम अलग होने से एकता नहीं टूटती
2–3पक्ष और कारण, पर यह भेद नहीं पकड़ा
1केवल पक्ष, कोई कारण नहीं

3★पुस्तक कहती है कि ‘छींट’ इतना लोकप्रिय हुआ कि इंग्लैंड और फ्रांस को उसके आयात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।
इस एक तथ्य से आप उस समय के भारतीय कारीगरों के बारे में क्या समझते हैं? 3 अंक

उत्तर देखिए

पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि भारतीय कारीगर उस समय दुनिया के सबसे कुशल कारीगरों में थे — उनका कपड़ा इतना अच्छा और इतना सस्ता था कि यूरोप के अपने कारीगर उससे मुक़ाबला नहीं कर पा रहे थे, और इसीलिए सरकारों को क़ानून बनाकर उसे रोकना पड़ा।

★जो विद्यार्थी यह कहता है कि “प्रतिबंध लगाना ही इस बात का सबूत है कि भारतीय कपड़ा बेहतर था” — उसने सबसे अच्छा उत्तर दिया है। यह उलटी दिशा से निकाला गया निष्कर्ष है, और यही इस प्रश्न की योग्यता है।

4आपके घर में जो भोजन बनता है, उसकी मुख्य सामग्री क्या है? और उसी सामग्री से आपके राज्य में या किसी दूसरे राज्य में कौन-कौन से अलग व्यंजन बनते हैं? 4 अंक

उत्तर देखिए

इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।

अंककसौटी
4मुख्य सामग्री बताई और उसी से बनने वाले कम से कम तीन अलग व्यंजन, जिनमें कम से कम एक दूसरे राज्य का हो
2–3सामग्री और व्यंजन बताए, पर सब अपने ही क्षेत्र के
1केवल सामग्री बताई

5★आपके क्षेत्र का कोई एक त्योहार लीजिए। वह कैसे मनाया जाता है? और यदि आप जानते
हों, तो भारत के किसी दूसरे भाग में उसे किस नाम से मनाया जाता है? 3 अंक

उत्तर देखिए

यह भी स्थानीय है और हर कक्षा में अलग होगा।

अंककसौटी
3त्योहार और मनाने का ढंग और दूसरे भाग का नाम (यदि पता हो) — या यह कहना कि “मुझे नहीं पता, पर मैं पता करूँगा”, जो एक ईमानदार उत्तर है
2त्योहार और मनाने का ढंग
1केवल नाम

★जो विद्यार्थी लिखता है कि “मुझे दूसरे नाम का पता नहीं है” — उसे अंक काटिए मत।

अध्याय की गतिविधि का उद्देश्य ही पता लगाना है, पहले से जानना नहीं।

उत्तर एवं अंकन योजना

सामान्य नियम: इन प्रश्नों में कारण पर अंक हैं। जहाँ विद्यार्थी का उत्तर पुस्तक से भिन्न शब्दों में हो पर तर्क सही हो, पूरे अंक दीजिए।

खंड क

प्रकरण 1 (9)

  • 1.1 (3) — एक: नमस्ते करने का ढंग — दोनों हाथ जोड़कर — लगभग हर जगह एक ही है। अनेक: उसे कहने के अनेक नाम — नमस्ते, नमस्कार, वणक्कम, नोमोश्कार, सत श्री अकाल, खम्मा घणी। (2 अंक: यदि दोनों बताए जाएँ पर स्पष्ट रूप से ‘एक’ और ‘अनेक’ में न बाँटे जाएँ।)
  • 1.2 (3) — त्योहार वाले उदाहरण से — क्योंकि वहाँ भी एक ही चीज़ (एक ही तिथि, एक ही पर्व) के अनेक नाम हैं, ठीक वैसे ही जैसे यहाँ एक ही अभिवादन के अनेक नाम हैं। (★यदि कोई विद्यार्थी साड़ी वाले उदाहरण से जोड़े — “एक ही चीज़, अनेक रूप” — तो उसे भी पूरे अंक दीजिए, यदि कारण दिया हो।)
  • 1.3 (2) — कोई भी वाक्य जो पुस्तक के साँचे का पालन करे, जैसे — “इस तरह हम देखते हैं कि कैसे एक ही अभिवादन (एकता) को विभिन्न भाषाओं में (विविधता) अनेक नामों से कहा जाता है।”
  • 1.4 (1) — किसी भी तर्कसंगत उदाहरण पर पूरा अंक। (जैसे — शादी में फेरे लगभग हर जगह होते हैं, पर रीति अलग; या पतंग सब जगह उड़ती है, पर नाम और मौसम अलग।)

प्रकरण 2 (8)

  • 2.1 (1) — सबसे बड़ी: 4,635 (समुदाय)। सबसे छोटी: 25 (लिपियाँ)।
  • 2.2 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि एक ही लिपि में अनेक भाषाएँ लिखी जा सकती हैं — इसलिए लिपियों की संख्या भाषाओं से कम होगी। ★उदाहरण देने पर अतिरिक्त मान्यता: देवनागरी में हिंदी, मराठी, संस्कृत, नेपाली — सब लिखी जाती हैं। (2 अंक: यदि केवल “एक लिपि से कई भाषाएँ लिखी जाती हैं” कहा जाए, बिना उदाहरण के।)

    ★यह इस प्रकरण का सबसे अच्छा प्रश्न है — यह जाँचता है कि विद्यार्थी ने संख्याओं को रटा या समझा।

  • 2.3 (2) — क्योंकि ये आँकड़े भारत की विविधता को ठोस रूप में दिखाते हैं। पुस्तक इन्हीं के बाद वह प्रश्न उठाती है कि “इस अचंभित करने वाली विविधता में भारत का इतिहास किस प्रकार लिखा जा सकता है?” — यानी ये आँकड़े ही उस प्रश्न का आधार बनाते हैं जिससे पूरा अध्याय शुरू होता है।
  • 2.4 (2) — कि दुनिया के लगभग हर छठे व्यक्ति में से एक भारत में रहता है — अर्थात भारत बहुत बड़ा है, और इसीलिए “इस प्रकार की विविधता आश्चर्यजनक नहीं है।” (किसी भी तर्कसंगत व्याख्या पर पूरे अंक।)

प्रकरण 3 (8)

  • 3.1 (3) — क्योंकि साड़ी बिना सिला वस्त्र है। पूरे अंक का उत्तर यह जोड़ता है कि बिना सिला होने के कारण वह केवल एक ही आकार में बँधा नहीं है — उसे मोड़ा, बाँधा, तानकर या बिछाकर किसी भी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। (2 अंक: यदि केवल “बिना सिला है” कहा जाए, बिना कारण जोड़े।)
  • 3.2 (2) — नहीं। क्योंकि सिला हुआ कपड़ा एक निश्चित आकार में बँध जाता है — कमीज़ कमीज़ ही रहेगी; उसे न झूला बनाया जा सकता है, न जाल, न बिछौना।
  • 3.3 (2) — ‘सुलभता’ (अर्थात लचीलापन और सहजता से किसी भी रूप में ढल जाना)। (यदि कोई विद्यार्थी ‘सादगी’ कहे और कारण दे कि सादा कपड़ा किसी भी काम आ सकता है, तो उसे भी मान्यता दीजिए।)
  • 3.4 (1) — “इसे बाँधने व पहनने के नए-नए तरीके अभी भी खोजे जा रहे हैं, लेकिन अंततोगत्वा यह एक ही प्रकार का परिधान — ‘साड़ी’ है।”

प्रकरण 4 (7)

  • 4.1 (2) — दोनों यह सिद्ध करते हैं कि भारत में एक ही चीज़ के अनेक रूप या नाम हैं — अर्थात ‘एक में अनेक’।
  • 4.2 (3) — यह ‘एक ही चीज़, अनेक नाम’ का उदाहरण है — चावल एक ही अनाज है, पर उसके बासमती, सोना मसूरी, पोन्नी और कोलम जैसे अलग-अलग नाम और प्रकार हैं। ★और यह चित्र 8.5 से ठीक वैसे ही मिलता है — वहाँ एक ही त्योहार के तेरह नाम हैं। दोनों मानचित्रों की बनावट एक ही है। (2 अंक: यदि केवल पहली बात कही जाए, पर चित्र 8.5 से जोड़ न बने।)
  • 4.3 (2) — इसका अर्थ है कि मानचित्र पर दूरियाँ और आकार वास्तविक अनुपात में नहीं हैं। यहाँ यह ठीक है क्योंकि इन मानचित्रों का उद्देश्य दूरी नापना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि कौन-सी चीज़ लगभग किस क्षेत्र में मिलती है।

खंड ख — अभिकथन एवं कारण

#उत्तरकारण
1(क)दोनों सही, और R ही A का कारण है
2(क)दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है
3(क)दोनों सही, और R ही A का कारण है
4(ग)A सही; R ग़लत — ये अलग त्योहार नहीं हैं; पुस्तक कहती है कि यह एक ही त्योहार, लगभग एक ही तिथि पर है
5(ख)दोनों सही, पर R, A की व्याख्या नहीं है — विदेशों में पढ़ा जाना और रूपांतरणों की संख्या दो अलग तथ्य हैं
6(ग)A सही; R ग़लत — पुस्तक एकरूपता की नहीं, विविधता के भीतर के साझे सूत्र की बात करती है

खंड ग

1 (4) — प्रत्येक पंक्ति 1 अंक; पूरा अंक तभी जब दोनों स्तंभ भरे जाएँ।

उदाहरणएकअनेक
भोजनएक ही सामग्री — मुख्य अनाज, दालें, मसालेहजारों व्यंजन और पकवान
साड़ीएक ही परिधान, और वह बिना सिलासैकड़ों रूप; अनेक बाँधने के तरीके; छह अन्य उपयोग
त्योहारएक ही तिथि, एक ही पर्व — फसल की कटाईतेरह नाम
महाकाव्यएक कथाअनगिनत लोक संस्करण; तमिलनाडु में ही 100 से अधिक

2 (3)

  • 2.1 (2) — ताकि पाठक को यह साफ़ दिख जाए कि इस उदाहरण में ‘एकता’ कहाँ है और ‘विविधता’ कहाँ। यह वाक्य पूरे अध्याय का साँचा है, और कोष्ठक उसे स्पष्ट कर देते हैं।
  • 2.2 (1) — कोई भी एक, जैसे — “एक ही परिधान (एकता) के सैकड़ों रूप (विविधता) होते हैं।”

3 (3) — कथन B अध्याय की बात कहता है। (1 अंक) कारण (2 अंक): कथन A ग़लत है क्योंकि अध्याय यह कहीं नहीं कहता कि सब एक जैसे हैं — वह तो शुरू ही विविधता से होता है (अलग परिधान, अलग भोजन, अलग भाषाएँ, 325 भाषाएँ, तेरह नाम)। अध्याय की बात यह है कि विविधता है, और उसके भीतर एक साझा सूत्र भी है — “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”

★यह प्रश्न इस पूरी फ़ाइल का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है — क्योंकि कथन A ठीक वह ग़लती है जो विद्यार्थी सबसे अधिक करते हैं।

खंड घ — रूब्रिक

1 (4) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि विविधता से चुनाव, स्वाद, विचार और अनुभव बढ़ते हैं — अर्थात अधिक चीज़ें उपलब्ध होती हैं, कम नहीं।

अंककसौटी
4‘समृद्ध करना’ का अर्थ अपने शब्दों में और एक ठोस उदाहरण (जैसे — एक ही सब्ज़ी से दस व्यंजन मिलते हैं, एक से नहीं; या एक ही त्योहार तेरह तरीक़ों से मनाया जाता है, जिससे सीखने को अधिक मिलता है)
2–3अर्थ सही, पर उदाहरण नहीं
1केवल पुस्तक का वाक्य दोहराया

2 (4) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पर सबसे अच्छा उत्तर यह पहचानता है कि प्रश्न में एक छिपी हुई ग़लती है — वह एकता को एकरूपता समझ रहा है।

अध्याय के अनुसार भारत पहले से ही एक है — मकर संक्रांति पूरे देश में लगभग एक ही दिन, एक ही कारण से मनाई जाती है। नाम अलग होने से वह एकता टूटती नहीं। और पुस्तक स्पष्ट कहती है कि “विविधता विभाजित नहीं, अपितु समृद्ध करती है।”

अंककसौटी
4पक्ष और कारण और यह पहचानना कि नाम अलग होने से एकता नहीं टूटती
2–3पक्ष और कारण, पर यह भेद नहीं पकड़ा
1केवल पक्ष, कोई कारण नहीं

3 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि भारतीय कारीगर उस समय दुनिया के सबसे कुशल कारीगरों में थे — उनका कपड़ा इतना अच्छा और इतना सस्ता था कि यूरोप के अपने कारीगर उससे मुक़ाबला नहीं कर पा रहे थे, और इसीलिए सरकारों को क़ानून बनाकर उसे रोकना पड़ा।

★जो विद्यार्थी यह कहता है कि “प्रतिबंध लगाना ही इस बात का सबूत है कि भारतीय कपड़ा बेहतर था” — उसने सबसे अच्छा उत्तर दिया है। यह उलटी दिशा से निकाला गया निष्कर्ष है, और यही इस प्रश्न की योग्यता है।

4 (4) — इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।

अंककसौटी
4मुख्य सामग्री बताई और उसी से बनने वाले कम से कम तीन अलग व्यंजन, जिनमें कम से कम एक दूसरे राज्य का हो
2–3सामग्री और व्यंजन बताए, पर सब अपने ही क्षेत्र के
1केवल सामग्री बताई

5 (3) — यह भी स्थानीय है और हर कक्षा में अलग होगा।

अंककसौटी
3त्योहार और मनाने का ढंग और दूसरे भाग का नाम (यदि पता हो) — या यह कहना कि “मुझे नहीं पता, पर मैं पता करूँगा”, जो एक ईमानदार उत्तर है
2त्योहार और मनाने का ढंग
1केवल नाम

★जो विद्यार्थी लिखता है कि “मुझे दूसरे नाम का पता नहीं है” — उसे अंक काटिए मत। अध्याय की गतिविधि का उद्देश्य ही पता लगाना है, पहले से जानना नहीं।

योग्यता-वार आवरण

योग्यताकहाँ जाँची गईकुल अंक
यो-1 — साँचा लगानाप्रकरण 1, प्रकरण 4 (4.1, 4.2), खंड ग (1, 2)19
यो-2 — आँकड़ा पढ़नाप्रकरण 2, प्रकरण 4 (4.3), खंड ख (1, 5)12
यो-3 — भेद करनाखंड ग (3), खंड घ (1, 2), खंड ख (4, 6)13
यो-4 — कारण खोजनाप्रकरण 2 (2.2), प्रकरण 3, खंड घ (3), खंड ख (2, 3)14
यो-5 — अपने अनुभव से जोड़नाप्रकरण 1 (1.4), खंड घ (4, 5)8
कुल59

एक 40 अंक का पेपर बनाना हो तो: प्रकरण 1 (9) + प्रकरण 3 (8) + खंड ख के चार प्रश्न (4) + खंड ग का प्रश्न 1 और 3 (7) + खंड घ का प्रश्न 2 और 4 (8) + प्रकरण 2 का 2.2 (3) = 39 अंक, जिसे 40 पर समायोजित कर लीजिए।

शिक्षक हेतु दो चेतावनियाँ

1. ★★खंड ग का प्रश्न 3 इस पूरी फ़ाइल का हृदय है — उसे जल्दी में मत जाँचिए। कथन A — “भारत में सब एक जैसे हैं” — ठीक वह ग़लती है जो विद्यार्थी सबसे अधिक करते हैं। वे ‘विविधता में एकता’ को ‘एकरूपता’ समझ लेते हैं। पर अध्याय तो शुरू ही विविधता से होता है — अलग परिधान, अलग भोजन, 325 भाषाएँ, तेरह नाम। जो विद्यार्थी यह भेद पकड़ लेता है, उसने अध्याय का असली काम कर लिया — भले उसे तेरह नाम याद न हों।

2. खंड घ के प्रश्न 4 और 5 पर ‘सही उत्तर’ मत ढूँढ़िए, और सब उत्तरों को समान सम्मान दीजिए। इन प्रश्नों में बच्चे अपने घर का भोजन और अपने क्षेत्र के त्योहार लाएँगे — और वे सब अलग-अलग होंगे। यही अध्याय की बात है। यदि कक्षा के पैंतीस बच्चों के पैंतीस अलग उत्तर आएँ, तो वह अध्याय की असफलता नहीं — उसकी सबसे अच्छी सिद्धि है।

और याद रखिए: यह फ़ाइल 05-Question-Bank.md के अतिरिक्त है, उसके स्थान पर नहीं। परीक्षा अभी भी पाठ्यपुस्तक से बनती है।