Chapter 7भारत की सांस्कृतिक जड़ें

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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT, पृ. 105–124 बाईं ओर पाठ्यपुस्तक का शब्द है — परीक्षा में यही लिखा जाना चाहिए। दाईं ओर की सरल भाषा केवल समझने के लिए है।

! शब्दावली का एक नियम, जो पुस्तक ने स्वयं बनाया है: पुस्तक ‘धर्म’ शब्द का प्रयोग नहीं करती। वह ‘दर्शन’, ‘मत’ और ‘विश्वास’ कहती है, क्योंकि “अंग्रेजी का शब्द ‘रिलिजन’ भारतीय सभ्यता के संदर्भ में बहुत सीमित है” (पृ. 118)। उत्तर लिखते समय पुस्तक की यही शब्दावली प्रयोग कीजिए।


क. पुस्तक ने जिन शब्दों की परिभाषा स्वयं दी है

ये हाशिये के रंगीन बॉक्स में हैं। इनकी परिभाषा पुस्तक के शब्दों में ही याद कीजिए।

पदपुस्तक की परिभाषापृष्ठ
आध्यात्मिकआत्मा से संबंधित। आध्यात्मिकता हमारे वर्तमान व्यक्तित्व से परे एक गहरे या ऊँचे आयाम की खोज है106
साधकऐसा व्यक्ति जो इस दुनिया के सत्य को जानना चाहता है — यह एक ऋषि, संत, योगी, दार्शनिक आदि हो सकता है106
यूनेस्कोपूरा नाम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन; यह शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के माध्यम से लोगों और राष्ट्रों के बीच संवाद को बढ़ावा देता है107
ब्रह्मांडविश्व या ब्रह्मांड की सुव्यवस्थित और संतुलित संरचना107
वैश्विक दर्शनविश्व का एक निश्चित दर्शन या समझ, इसका उद्भव या इसकी कार्य प्रणाली107
आरोग्यकर्ताराहत देने या रोग ठीक करने के लिए पारंपरिक प्रथाओं का उपयोग करने वाला व्यक्ति109
चेतनाजागृत होने का गुण या अवस्था — उदाहरण के लिए, व्यक्ति को स्वयं की चेतना होना110
संन्यासीवह व्यक्ति जो चेतना का उच्चतर स्तर प्राप्त करने के लिए कठोर अनुशासन में रहता है110
मोहकिसी व्यक्ति या वस्तु के साथ संबंध की स्थिति, सामान्य रूप से भावना या आदत के माध्यम से113
भिक्षुवह व्यक्ति जो दुनिया के सामान्य जीवन को त्याग, स्वयं को किसी धार्मिक या आध्यात्मिक लक्ष्य के लिए समर्पित कर देता है; वह व्रत लेता है, अर्थात वचनबद्ध रहता है कि अनुशासित जीवन के लिए कठोर नियमों का पालन करेगा113
भिक्षुणीमहिला भिक्षु113

ख. वेद और वैदिक परंपरा

पदअर्थपृष्ठ
वेदविद् से — ‘ज्ञान’ (जैसे विद्या); चार वेद — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद106
ऋचावेदों की कविता या गीत के रूप में प्रार्थना106
ऋषिकवि — ऋचाओं का रचनाकार107
ऋषिकाकवियत्री — ऋचाओं की रचनाकार107
ऋतसत्य और क्रम, जिसे देवों ने दृष्टाओं के साथ मिलकर बनाए रखा107
जनलोगों का बड़ा समूह; ऋग्वेद में 30 से अधिक — भरत, पुरु, कुरु, यदु, तुर्वश108
सभावैदिक शब्द, जो सामूहिकता को इंगित करता है109
समितिवैदिक शब्द, जो सामूहिकता को इंगित करता है109
अनुष्ठानयज्ञ आदि, जो व्यक्तिगत या सामूहिक हितों तथा मंगल के लिए समर्पित थे109

ग. उपनिषद् और वेदांत

पदअर्थपृष्ठ
उपनिषद्वैदिक संकल्पनाओं के आधार पर रचित ग्रंथ, जिनमें कुछ नई संकल्पनाएँ मिलती हैं109
पुनर्जन्मबार-बार जन्म लेना109
कर्महमारे कर्म और कर्म-फल109
वेदांतवह दर्शन जिसके अनुसार सब कुछ — मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्मांड — एक दैवी तत्व है109
ब्रह्मवह एक दैवी तत्व; कभी-कभी केवल ‘तत्’ — ! यह ब्रह्मा देव से भिन्न है109
आत्मन्स्व, जो प्रत्येक जीव में निवास करता है, परंतु ब्रह्म का ही स्वरूप होता है110
योगवह दर्शन, जिसने चेतना में ब्रह्म का आत्म-बोध प्राप्त करने की अनेक विधियाँ विकसित कीं110
हिंदू दर्शनइन सभी दर्शनों से मिलकर बने आधारभूत विचार110

चार वाक्य जो याद रखने योग्य हैं★

वाक्यअर्थपृष्ठ
एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति“परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं।”107
अहम् ब्रह्मास्मि“मैं ब्रह्म हूँ” (अर्थात, मैं दिव्य हूँ)109
तत् त्वम् असि“वह ब्रह्म आप ही हैं”109
सर्वे भवन्तु सुखिन:“सभी जीव सुखी रहें” — और यह सबके लिए रोग तथा दुख से मुक्ति की कामना करती है110

घ. बौद्ध मत

पदअर्थपृष्ठ
बुद्ध‘ज्ञानी’ या ‘जागृत’ व्यक्ति113
अविद्याअज्ञान — मानवीय कष्ट का एक स्रोत113
अहिंसामूल अर्थ — चोट नहीं पहुँचाना या नुकसान नहीं पहुँचाना113
आंतरिक अनुशासनवह बात जिस पर बुद्ध ने निष्ठापूर्वक बल दिया113
संघभिक्षुओं (और आगे चलकर भिक्षुणियों) का समुदाय, जिन्होंने स्वयं को बुद्ध के उपदेशों के पालन और प्रसार के लिए समर्पित किया113
जातक कथाएँबुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियाँ, जो सरल तरीके से बौद्ध आदर्शों को व्यक्त करती हैं116
विहारभिक्षुओं के रहने का स्थान118

ङ. जैन मत

पदअर्थपृष्ठ
जिन‘विजेता’ — ‘जैन’ शब्द इसी से; पर विजय किसी क्षेत्र या शत्रु पर नहीं, अविद्या और मोह पर115
महावीर‘महानायक’115
अनंत ज्ञानसर्वोपरि विवेक, जो महावीर को 12 वर्ष बाद प्राप्त हुआ115
अनेकांतवाद‘केवल एक’ पक्ष या दृष्टिकोण नहीं — सत्य के अनेक पक्ष हैं और इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता115
अपरिग्रह‘असंग्रह’ — पार्थिव वस्तुओं से दूर और केवल अनिवार्य वस्तुओं तक सीमित रहना115

च. अन्य दर्शन और लोक-जनजातीय पद

पदअर्थपृष्ठ
चार्वाक / लोकायतवह दर्शन जिसके अनुसार यह भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है, और इसलिए मृत्यु के पश्चात जीवन का होना असंभव है118
मौखिक परंपराउन उपदेशों और प्रथाओं का ज्ञान, जो नित्य अभ्यास के द्वारा आगे संचारित हुआ, न कि लिखित शास्त्रों के द्वारा119
लोक प्रथाएँवे प्रथाएँ जो आम लोगों द्वारा प्रसारित होती हैं119
जनजातीय परंपराएँवे परंपराएँ जो जनजातियों द्वारा प्रसारित होती हैं119
जनजातिउन परिवारों या वंशों का समूह, जो एक सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा साझा करते हैं; समुदाय में रहते हैं, जिसके एक मुखिया होते हैं; और जिनके पास अपनी कोई निजी संपत्ति नहीं होती119
वटवृक्षभारतीय सभ्यता का उत्कृष्ट प्रतीक — यह अपनी शाखाओं को नई जड़ें बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है123

छ. मुख्य संख्याएँ

संख्याकिसकी
चारवेदों की संख्या — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद
पाँचवीं से दूसरी सहस्राब्दी सा.सं.पू.ऋग्वेद की रचना का प्रस्तावित काल
100 से 200 पीढ़ियाँवेदों का मौखिक संप्रेषण
2008यूनेस्को की मान्यता
30 से अधिकऋग्वेद में उल्लिखित जनों की संख्या
लगभग ढाई सहस्राब्दी पूर्वबुद्ध का जन्म
560 सा.सं.पू.बुद्ध का अनुमानित जन्म वर्ष (अध्याय 4 से)
29 वर्षबुद्ध की आयु — नगर-भ्रमण और चार दृश्य
छठी शताब्दी सा.सं.पू. का आरंभमहावीर का जन्म
30 वर्षमहावीर की आयु — गृह-त्याग
12 वर्षमहावीर को अनंत ज्ञान मिलने में लगा समय
12 वर्षश्वेतकेतु का गुरुकुल में बिताया समय
लगभग 1800 वर्षबुद्ध के उपदेश वाली पत्थर की कृति की आयु
छठवीं से दसवीं शताब्दी सा.सं.एलोरा की गुफाओं का काल
2011जनजातीय आँकड़ों का वर्ष
705भारत में जनजातियों की संख्या (2011)
लगभग 104 मिलियनजनजातीय जनसंख्या (2011)
30 से अधिकनीलगिरि के वे शिखर जिन्हें टोडा जनजाति देवी-देवताओं का निवास मानती है
19वीं शताब्दीजब मानव वैज्ञानिकों ने जनजातियों को ‘आदिम’ कहा — अब नकारा गया

ज. नाम और स्थान

व्यक्ति

नामपरिचय
उद्दालक आरुणिऋषि; श्वेतकेतु के पिता
श्वेतकेतुउद्दालक का पुत्र; 12 वर्ष गुरुकुल में रहा
नचिकेतावह बालक जो यम से प्रश्न पूछने यमलोक गया
यममृत्यु के देवता
गार्गीएक ऋषिका, जिसने याज्ञवल्क्य से प्रश्न पूछे
याज्ञवल्क्यसुप्रसिद्ध ऋषि, जो राजा जनक के शास्त्रार्थ में आए
राजा जनकविद्वान राजा, जिन्होंने शास्त्रार्थ की घोषणा की
सिद्धार्थ गौतम / बुद्धलुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में जन्म; ‘ज्ञानी’ या ‘जागृत’
वर्धमान / महावीरवैशाली (वर्तमान बिहार) के समीप जन्म; ‘महानायक’
रोहिनेयएक कुशल चोर, जो बाद में भिक्षु बन गया
आंद्रे बेतेभारतीय समाजशास्त्री, जिनका उद्धरण पृ. 121 पर है

स्थान

स्थानक्या
लुंबिनीबुद्ध का जन्मस्थान — वर्तमान नेपाल में
बोधगयाजहाँ बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान मिला — वर्तमान बिहार में
वैशालीजिसके समीप महावीर का जन्म हुआ — वर्तमान बिहार में
एलोरामहाराष्ट्र — छठवीं–दसवीं शताब्दी सा.सं. की गुफाएँ; तीनों परंपराओं की
सप्तसिंधुजहाँ वैदिक ऋचाएँ रची गईं (अध्याय 5)
नीलगिरितमिलनाडु — टोडा जनजाति का क्षेत्र
पुरीओडिशा — भगवान जगन्नाथ

जनजातीय देवता और समुदाय

नामविवरण
टोडातमिलनाडु के नीलगिरि पर्वत की जनजाति; 30 से अधिक शिखर देवी-देवताओं के निवास
डोनीपोलोअरुणाचल प्रदेश — सूर्य और चंद्रमा के मिले-जुले रूप, आगे चलकर परमात्मा माने गए
खंडोबामध्य भारत के क्षेत्र के भगवान
सिंगबोंगामुंडा और संथाल जनजातियों के परमेश्वर, “जिन्होंने यह संपूर्ण विश्व बनाया है”

झ. उपनिषद्-कथाएँ और उनके ग्रंथ

कथाउपनिषद्मुख्य बात
श्वेतकेतु और यथार्थबोध का बीजछांदोग्य उपनिषद्बरगद का बीज और एक ही मिट्टी से अलग बर्तन; समापन — “तुम वही हो, श्वेतकेतु।”
नचिकेता और उसकी ज्ञान पिपासाकठोपनिषद्यम ने पहले टाला, पर निरंतर आग्रह पर बताया — आत्मा का न जन्म होता है, न मृत्यु; यह अमर है
गार्गी और याज्ञवल्क्य का शास्त्रार्थबृहदारण्यक उपनिषद्मना किए जाने के बाद भी गार्गी ने पुन: प्रश्न पूछा — और तभी उत्तर मिला

★तीनों का साझा विषय: प्रश्न पूछने का महत्व — “फिर चाहे ये प्रश्न किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछे हों।” दो बच्चे और एक स्त्री।

ञ. वे शब्द और वाक्य जिन पर सबसे अधिक ग़लती होती हैध्यान

भ्रमसही बात
ब्रह्म और ब्रह्माब्रह्म = वह एक दैवी तत्व (वेदांत)। ब्रह्मा = एक देव। पुस्तक स्वयं कोष्ठक में यह भेद बताती है।
बुद्ध 29 / महावीर 30बुद्ध — 29 वर्ष (नगर-भ्रमण, चार दृश्य)। महावीर — 30 वर्ष (गृह-त्याग)।
12 वर्ष — दो जगहश्वेतकेतु गुरुकुल में 12 वर्ष; महावीर को 12 वर्ष बाद अनंत ज्ञान। दो अलग बातें।
लुंबिनी / वैशालीबुद्ध — लुंबिनी (नेपाल)। महावीर — वैशाली के समीप (बिहार)।
बोधगया / वैशालीबोधगया = बुद्ध को ज्ञान मिला। वैशाली = महावीर का जन्म। दोनों बिहार में — इसीलिए मिलते हैं।
पीपल / वटवृक्षपीपल = बुद्ध को ज्ञान मिला (पृ. 110)। वटवृक्ष = अध्याय का समापन-प्रतीक (पृ. 123)। अलग वृक्ष हैं।
जैन मत की उत्पत्तिजैन मत बौद्ध मत की शाखा नहीं है — वह स्वतंत्र है और उसे अधिक प्राचीन माना जाता है।
वेद लिखे गए?नहीं — मौखिक पाठ किया जाता था; 100–200 पीढ़ियों तक स्मृतिबद्ध।
! एकं सत् का अर्थ“परम सत्य एक ही है” — न कि “ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता”। (अभ्यास का प्रश्न 3 यहीं फँसाता है, और उसका उत्तर ग़लत है।)
वेदों की स्थिति“विश्व के प्राचीनतम ग्रंथों में से एक” — “सबसे प्राचीन ग्रंथ” नहीं।
अनेकांतवाद / अपरिग्रहअनेकांतवाद = सत्य के अनेक पक्ष। अपरिग्रह = असंग्रह।
‘धर्म’ शब्दपुस्तक जान-बूझकर ‘धर्म’ नहीं, ‘दर्शन’, ‘मत’, ‘विश्वास’ कहती है (पृ. 118)।
जनजातीय विश्वास‘छोटे देवों तक सीमित’ नहीं — अनेक जनजातियों में उच्चतर देवत्व/परमात्मा की संकल्पना है (डोनीपोलो, सिंगबोंगा)।
705 और 104 मिलियन705 = जनजातियों की संख्या। 104 मिलियन = जनसंख्या। दोनों 2011 के आँकड़े।
प्रभाव की दिशादोनों दिशाओं में। जगन्नाथ (जनजातीय → प्रमुख); रामायण-महाभारत के जनजातीय रूप (प्रमुख → जनजातीय)।