Chapter 10आधारभूत लोकतंत्र — भाग 1: शासन

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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 149–162

बाईं ओर का शब्द पुस्तक का है — परीक्षा में यही चाहिए। दाईं ओर की व्याख्या समझने के लिए है, लिखने के लिए नहीं।


पुस्तक ने जिन पदों की परिभाषा स्वयं दी है★★

ये पाँच सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके शब्द पुस्तक के अपने हैं।

पदपुस्तक की अपनी परिभाषापृष्ठ
शासन“निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना”150
सरकार“उन व्यक्तियों के समूह या तंत्र को कहते हैं जो नियम बनाते और इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं”150
कानून“कुछ अधिक महत्वपूर्ण नियमों को कानून कहा जाता है”150
सदन“ऐसी सभा जहाँ कानूनों पर चर्चा की जाती है अथवा उन्हें पारित किया जाता है”157
औपचारिक“हमारे यहाँ राष्ट्रपति और राज्यपाल वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख नहीं होते हैं। विशेष परिस्थितियों में उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, पर वे सामान्यत: केंद्र या राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं।”157

★पहली तीन का अंतर एक वाक्य में: शासन एक प्रक्रिया है। सरकार एक तंत्र है। कानून एक अधिक महत्वपूर्ण नियम है।

1. सरकार के तीन अंग★★

पदअर्थ (पुस्तक के शब्दों में)
विधायिकावह अंग जो नए कानून बनाती है, पुराने में संशोधन करती है और वर्तमान कानून को निरस्त भी करती है; यह कार्य जनता के प्रतिनिधियों की सभा द्वारा होता है
कार्यपालिकावह अंग जो कानूनों को लागू करती है; इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और अभिकरण (एजेंसियाँ) आते हैं
न्यायपालिकान्यायालयों की प्रणाली, जो तय करती है कि कानून टूटा या नहीं, क्या कार्रवाई हो और क्या दंड; और जो कार्यपालिका के निर्णय तथा विधायिका के कानून की भी जाँच करती है
शक्तियों का पृथक्करणतीनों अंगों को पृथक रखने की व्यवस्था, जिसका उद्देश्य है “पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना”
अभिकरण / एजेंसीवह संस्था जिसका दायित्व कानून को लागू करवाना होता है — जैसे साइबर पुलिस
सुशासनअच्छा शासन — जिसमें तीनों अंग पृथक रखे जाते हैं और एक-दूसरे की निगरानी करते हैं

! विधायिका में तीन क्रियाएँ हैं, एक नहीं — बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना।

2. सरकार के तीन स्तर★★

पदअर्थ
स्थानीय स्तरनगर अथवा ग्राम का स्तर — पिरामिड का आधार
राज्य या प्रादेशिक स्तरराज्य का स्तर
राष्ट्रीय स्तरपूरे देश का स्तर
केंद्र सरकार / संघ सरकारराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली सरकार
राज्य सरकारराज्य स्तर पर काम करने वाली सरकार
स्थानीय सरकारनगर या ग्राम स्तर पर काम करने वाली सरकार (अगले दो अध्यायों में)
स्थानीय प्राधिकारीस्थानीय स्तर पर काम सँभालने वाले अधिकारी और संस्थाएँ

!! इस अध्याय की सबसे बड़ी भूल — ‘अंग’ और ‘स्तर’ को एक समझ लेना

अंग = कौन क्या करता है (काम का बँटवारा — चित्र 10.3, एक पहिया) स्तर = कौन कहाँ तक (क्षेत्र का बँटवारा — चित्र 10.4, एक पिरामिड) और तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं।

3. संस्थाएँ और पद

पदअर्थ
सर्वोच्च न्यायालयअखिल भारत स्तर की न्यायपालिका
उच्च न्यायालयराज्य स्तर की न्यायपालिका
लोकसभाराष्ट्रीय स्तर के दो सदनों में से एक
राज्य सभाराष्ट्रीय स्तर का दूसरा सदन
विधान सभाराज्य की विधायिका
विधान परिषदकुछ राज्यों में विधान सभा के साथ-साथ होने वाला दूसरा सदन
विधानमंडलराज्य की विधायिका के लिए एक और नाम
राष्ट्रपतिसंघ सरकार के औपचारिक प्रमुख, और तीनों सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर
प्रधानमंत्रीसंघ सरकार में कार्यपालिका के प्रमुख
राज्यपालराज्य सरकार के औपचारिक प्रधान
मुख्यमंत्रीराज्य सरकार में कार्यपालिका के प्रमुख
मंत्रीगणकार्यपालिका के सदस्य

4. लोकतंत्र से जुड़े पद★

पदअर्थ
लोकतंत्र“इस प्रणाली की पूरी रूपरेखा” — जो चयनित प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य करती है
डेमोसग्रीक शब्द — ‘लोग’
क्रेटोसग्रीक शब्द — ‘शासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति’
लोक-शासन / गणतंत्र‘डेमोक्रेसी’ का शाब्दिक अर्थ — लोगों का शासन
प्रतिनिधिवह व्यक्ति जिसे लोग चुनकर अपनी ओर से बोलने और निर्णय लेने भेजते हैं
विधायकराज्य स्तर का चयनित प्रतिनिधि
सांसदराष्ट्र स्तर का चयनित प्रतिनिधि
मतदान (वोटिंग)वह प्रक्रिया जिससे बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है
मतदातावह व्यक्ति जिसे मतदान करने का अधिकार है
चुनाववह प्रक्रिया जिससे जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है
प्रत्यक्ष लोकतंत्रजहाँ हर व्यक्ति स्वयं निर्णय में भाग लेता है — जैसे पिकनिक का मतदान
‘जन प्रतिनिधि’ आधारित लोकतंत्रजहाँ चुने हुए प्रतिनिधि निर्णय लेते हैं
★आधारभूत / धरातलीय लोकतंत्रवह तंत्र जिसमें सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है — पिरामिड का आधार

5. अन्य शब्द

पदअर्थ
असहमतिमतभेद — जब लोग एक बात पर सहमत न हों
अव्यवस्थाव्यवस्था का न होना; गड़बड़ी
सद्भावआपसी अच्छा भाव और मेलजोल
नियोक्तावह जो किसी को नौकरी पर रखता है
संशोधनकिसी नियम या कानून में बदलाव करना
निरस्त करनाकिसी कानून को समाप्त कर देना
अनुपालननियम या आदेश का पालन
पारित करनाकिसी कानून या प्रस्ताव को सभा में स्वीकृत कराना
निगरानीकिसी के काम पर नज़र रखना
संतुलनदो या अधिक पक्षों का बराबरी में रहना
हस्तक्षेपकिसी और के काम में दख़ल देना
विशेषाधिकारकुछ विशेष परिस्थितियों में मिलने वाला विशेष अधिकार
सांकेतिकजो प्रतीक के रूप में हो — यहाँ राष्ट्रपति की स्थिति के लिए
लोक सेवावह सेवा जो सरकार जनता के लिए चलाती है — जैसे रेल, डाक, अस्पताल
अवसंरचनासड़क, पुल, रेल जैसी बुनियादी सुविधाएँ
साइबर क्राइमडिजिटल माध्यमों से किया जाने वाला अपराध
मनी ऑर्डरडाकघर के माध्यम से पैसे भेजने की पुरानी सेवा
डिमांड ड्राफ्टबैंक द्वारा जारी काग़ज़, जिससे पैसे भेजे जाते थे
अंतर्राज्यीय वाणिज्यराज्यों के बीच होने वाला व्यापार
राष्ट्रीय नीतियों का प्रतिपादनदेश के लिए नीतियाँ बनाना
नूडल्सनोट्स + डूडल्स — पुस्तक के अंतिम खाली पृष्ठ का नाम, टिप्पणी और चित्रांकन के लिए

पाँच जोड़ियाँ जो परीक्षा में उलटती हैं★

जोड़ीअंतर
★★अंग ↔ स्तरअंग = कौन क्या करता है · स्तर = कौन कहाँ तक
विधायिका ↔ कार्यपालिकाबनाती है ↔ लागू करती है
राष्ट्रपति ↔ प्रधानमंत्रीऔपचारिक प्रमुख ↔ कार्यपालिका के प्रमुख (राज्य में: राज्यपाल ↔ मुख्यमंत्री)
विधायक ↔ सांसदराज्य ↔ राष्ट्र
डेमोस ↔ क्रेटोसलोग ↔ शासन प्रणाली/तंत्र/शक्ति

छह वाक्य जो शब्दश: याद रहने चाहिए★★

  1. “निर्णयों को लेने की प्रक्रिया, नियमों के विभिन्न समूहों से सामाजिक जीवन को व्यवस्थित करना और उनका पालन सुनिश्चित करना ही शासन कहलाता है।” (पृ. 150)
  2. ”…जबकि नियोक्ता को भी उन सभी नियमों का पालन करना पड़ता है जो उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले लोगों के लिए बनाए हैं।” (पृ. 150)
  3. ”…कभी-कभी यह इस बात की भी जाँच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं; अथवा विधायिका द्वारा पारित किया गया कोई कानून… सभी के हित में है या नहीं।” (पृ. 154)
  4. “इसका उद्देश्य पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना है।” (पृ. 154)
  5. ”…मतभेद की स्थिति में एक-दूसरे से संवाद और तर्क-वितर्क द्वारा समस्या का हल करने का प्रयास करते हैं।” (पृ. 159)
  6. “लोकतंत्र इस प्रणाली की पूरी रूपरेखा है।” (पृ. 160)

और दो चित्र जो पूरे अध्याय को बाँधते हैं

चित्र 10.3 — एक पहियाचित्र 10.4 — एक पिरामिड
तीन अंगतीन स्तर
कौन क्या करता हैकौन कहाँ तक
कोई ऊपर नहीं (दोनों दिशाओं वाले तीर)एक ऊपर, एक नीचे

और दोनों के चारों ओर जो घेरा है, उसका नाम — लोकतंत्र।