अध्याय 1पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

परख प्रश्न20 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6), अध्याय 1

ये प्रश्न रटकर हल नहीं होते। इनमें आपको नक्शा पढ़ना है, दिशा और दूरी निकालनी है, समय का हिसाब लगाना है और यह चुनना है कि अक्षांश काम आएगा या देशांतर। पहले अपना उत्तर ख़ुद लिखिए, फिर नीचे दिया उत्तर खोलकर मिलाइए। उद्धरण-चिह्नों के भीतर किताब के अपने शब्द हैं; जहाँ हिसाब या निष्कर्ष हमारा है, वहाँ यह साफ़ लिखा है। अंक सिर्फ़ यह अंदाज़ा देते हैं कि उत्तर कितना लंबा हो।

तारों का मतलब: ★वाली पंक्ति उत्तर की मुख्य बात है; दोहराते समय पहले वही पढ़िए।


भाग क — केस-आधारित प्रश्न

केस 1 — स्टेशन से उद्यान तक

उत्तरदक्षिणपूर्वपश्चिमरेलवे स्टेशनझीलआवासीय भवनचिकित्सालयनगर पंचायतबैंकसार्वजनिकउद्यानविद्यालयबाजारसंग्रहालय
चित्र 1.1 — एक काल्पनिक लघु नगर का मानचित्रकिताब के पृष्ठ 8 के चित्र 1.1 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

यह नक्शा किताब के पृष्ठ 8 वाले नगर का है। मान लीजिए, एक यात्री रेलवे स्टेशन पर उतरा है और उसे सार्वजनिक उद्यान जाना है। दो बच्चे उसे रास्ता बताते हैं। रवि कहता है कि स्टेशन से निकलकर दाएँ हाथ चलते जाइए। सीमा कहती है कि स्टेशन से पूर्व की ओर चलिए।

1किसकी बात हर यात्री के काम आएगी, रवि की या सीमा की? क्यों? 2 अंक

उत्तर देखिए

★सीमा की। दायाँ हाथ किस ओर होगा, यह इस पर टिका है कि यात्री किस ओर मुँह करके खड़ा है। कोई उत्तर की ओर मुँह करके खड़ा हो, तो उसका दायाँ हाथ पूर्व में होगा; कोई दक्षिण की ओर मुँह करके खड़ा हो, तो उसका दायाँ हाथ पश्चिम में होगा। पूर्व दिशा सबके लिए एक ही रहती है।

यह तर्क हमारा है। उद्यान स्टेशन के लगभग पूर्व में है, और यह नक्शे के दिशा-तीरों से पढ़ा जाता है। नक्शा पढ़ने से पहले किताब भी यही कहती है: “मानचित्र के दाएँ कोने के शीर्ष पर स्थित चार तीरों पर ध्यान दीजिए।” (किताब, पृष्ठ 8)

2मान लीजिए, मोहन ने किताब उलटी पकड़ ली। अब रेलवे स्टेशन नक्शे में दाईं ओर दिखने लगा। मोहन कहता है कि अब स्टेशन पूर्व में है। क्या वह सही है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★नहीं। स्टेशन अब भी पश्चिम में है। नक्शा उलटने से ज़मीन पर कुछ नहीं बदला। नक्शे के साथ दिशा-तीर भी उलट गए; उत्तर वाला तीर अब नीचे की ओर है।

इसलिए दिशा उत्तर के तीर से पढ़िए, पन्ने के ऊपर-नीचे से नहीं; यह सलाह हमारी है। किताब के अनुसार अधिकतर नक्शों में ”…एक तीर होता है, जो उत्तर दिशा को इंगित करता है।” (किताब, पृष्ठ 10)

3क्या चित्र 1.1 से बताया जा सकता है कि स्टेशन से उद्यान असल में कितने मीटर दूर है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★अकेले इस नक्शे से नहीं। असली दूरी निकालने के लिए स्केल चाहिए, और चित्र 1.1 पर स्केल नहीं छपा है। किताब भी हिसाब समझाने के लिए स्केल मान लेती है: “माना कि यह 500 मीटर है, तो हम कहेंगे कि स्केल 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर है।”

नियम यह है: “मानचित्र पर चिह्नित किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी उस स्केल पर निर्भर है, जिसका मानचित्र उपयोग करता है।” यहाँ 500 मीटर किताब ने ख़ुद माना है, इसलिए इस स्केल से निकली दूरी भी मानी हुई होगी, असली नहीं। (किताब, पृष्ठ 10)


केस 2 — रुक्मणी का नक्शा

मान लीजिए, रुक्मणी (काल्पनिक नाम) ने अपने गाँव का नक्शा बनाया। नक्शे में उत्तर का तीर ऊपर की ओर है, और स्केल लिखा है: 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर। नक्शे में विद्यालय ऊपर है, तालाब विद्यालय के ठीक नीचे है और हैंडपंप विद्यालय के ठीक दाईं ओर। विद्यालय से तालाब तक नक्शे पर दूरी 6 सेंटीमीटर है। तालाब को रुक्मणी ने नीले रंग के एक छोटे धब्बे से दिखाया है।

1विद्यालय से तालाब असल में कितनी दूर है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★3 किलोमीटर। 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर, तो 6 सेंटीमीटर = 6 × 500 = 3000 मीटर = 3 किलोमीटर।

हिसाब का तरीका किताब का है: “मानचित्र का प्रत्येक सेंटीमीटर धरातल पर एक निश्चित दूरी का प्रतिनिधित्व करता है।” (किताब, पृष्ठ 9)

2विद्यालय से हैंडपंप किस दिशा में है, और तालाब किस दिशा में? 2 अंक

उत्तर देखिए

★हैंडपंप पूर्व में, तालाब दक्षिण में। उत्तर का तीर ऊपर है, तो नीचे दक्षिण, दाईं ओर पूर्व और बाईं ओर पश्चिम हुआ।

! अगर नक्शे में उत्तर का तीर किसी और ओर होता, तो दिशाएँ भी बदल जातीं। इसलिए पहले तीर देखिए, फिर दिशा बताइए। यह सलाह हमारी है। (किताब, पृष्ठ 10)

3रुक्मणी का भाई कहता है कि असली तालाब तो बहुत बड़ा और टेढ़ा-मेढ़ा है, इसलिए छोटा-सा नीला धब्बा बनाना ग़लत है। रुक्मणी उसे क्या समझाए? 2 अंक

उत्तर देखिए

★नक्शा तस्वीर नहीं होता; वह चिह्नों से बात कहता है। किताब के शब्दों में, “मानचित्र किसी भी क्षेत्र का एक प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है”।

हर चीज़ हूबहू बनाई जाए, तो नक्शे पर जगह कम पड़ जाएगी। इसलिए “विभिन्न उपयोगकर्ता मानचित्र को अधिक सरलता से समझें, इसके लिए मानचित्र निर्माता विशिष्ट प्रतीक चिह्नों का उपयोग करते हैं।” नीला धब्बा तालाब का चिह्न है। किताब के चित्र 1.2 में भी तालाब एक नीले धब्बे से दिखाया गया है; वहीं काला गोल बिंदु कुएँ का चिह्न है। (किताब, पृष्ठ 9, 11)


केस 3 — दिल्ली से टोक्यो तक फ़ोन

मान लीजिए, दिल्ली में रहने वाली अनु (काल्पनिक नाम) अपनी मौसी से फ़ोन पर बात करती है, जो टोक्यो में रहती हैं। किताब के पृष्ठ 15 पर इन दोनों शहरों के देशांतर दिए हैं: दिल्ली 77° पू. और टोक्यो 140° पू.।

1सुबह सूरज पहले किसके शहर में उगेगा, अनु के या मौसी के? क्यों? 2 अंक

उत्तर देखिए

★मौसी के, यानी टोक्यो में। टोक्यो का देशांतर (140° पू.) दिल्ली (77° पू.) से 63° ज़्यादा है, यानी टोक्यो दिल्ली से बहुत पूर्व में है।

पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाती है, इसलिए पूर्व वाली जगह सूरज के सामने पहले आती है। यह निष्कर्ष हमारा है; घूमने की दिशा किताब में दी है। (किताब, पृष्ठ 19)

2दोनों शहरों के स्थानीय समय में कितना अंतर होगा? हिसाब लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए
1

देशांतर का अंतर: 140° − 77° = 63°।

2

किताब के अनुसार पृथ्वी “प्रति घंटा 15°” घूमती है, यानी 15° = 60 मिनट। तो 1° = 60 ÷ 15 = 4 मिनट।

3

★63 × 4 = 252 मिनट = 4 घंटे 12 मिनट। टोक्यो का स्थानीय समय आगे रहेगा: जब दिल्ली में स्थानीय समय दोपहर के 12 बजे का हो, तब टोक्यो में स्थानीय समय लगभग 4 बजकर 12 मिनट (अपराह्न) होगा।

यह हिसाब हमारा है; 15° पर एक घंटे वाला नियम किताब का है। (किताब, पृष्ठ 19)

3अनु कहती है कि तब तो हमारी दोनों घड़ियों में भी ठीक 4 घंटे 12 मिनट का अंतर होगा। क्या यह पक्का है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★नहीं, पक्का नहीं। 4 घंटे 12 मिनट स्थानीय समय का अंतर है। घड़ियाँ स्थानीय समय नहीं, अपने देश का मानक समय दिखाती हैं, क्योंकि “अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।”

अनु की घड़ी भारतीय मानक समय (आई.एस.टी.) दिखाती है, जो ग्रिनिच के स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है; चित्र 1.8 में भारत के पास “+5½” छपा है। उसी चित्र में जापान के द्वीपों के पास “+9” छपा है (चित्र में जापान का नाम नहीं लिखा, एटलस से मिलाइए)। तब दोनों घड़ियों में 9 − 5½ = 3 घंटे 30 मिनट का अंतर होगा, 4 घंटे 12 मिनट का नहीं। (किताब, पृष्ठ 20–21)


केस 4 — रबर की गेंद

मान लीजिए, आयुष ने एक पुरानी रबर की गेंद पर पेन से दुनिया का नक्शा बनाया। अब वह गेंद को काटकर मेज़ पर सपाट बिछाना चाहता है, ताकि नक्शा कॉपी के पन्ने जैसा हो जाए और फिर भी पूरा सही दिखे। मीना कहती है कि ऐसा करने पर गेंद कहीं-न-कहीं फटेगी और नक्शा बिगड़ जाएगा।

1कौन सही है? पूरी पृथ्वी को उसके असली आकार में देखने के लिए दोनों को क्या इस्तेमाल करना चाहिए? 3 अंक

उत्तर देखिए

★मीना सही है। किताब कहती है: “कागज के एक समतल पृष्ठ पर एक गोलाकार वस्तु को यथावत चित्रित करना संभव नहीं है।” किताब का संतरे वाला प्रयोग भी यही दिखाता है: छिलके को मेज़ पर सपाट करना हो, तो उसके किनारे तोड़ने ही पड़ते हैं। हमारी समझ में गेंद के साथ भी यही होगा।

पूरी पृथ्वी का आकार देखने के लिए ग्लोब चाहिए, क्योंकि “ग्लोब और पृथ्वी का आकार एक समान (गोलाकार) होता है”। (किताब, पृष्ठ 12)


केस 5 — उज्जयिनी और ग्रिनिच

किताब के पृष्ठ 15 से 17 तक दो प्रमुख याम्योत्तरों की बात है। वर्ष 1884 में कुछ देशों ने तय किया कि इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरने वाली याम्योत्तर, प्रमुख याम्योत्तर का अंतर्राष्ट्रीय मानक मानी जाएगी; इसे 0° देशांतर कहते हैं। पर यूरोप से अनेक शताब्दियों पहले भारत की अपनी एक प्रमुख याम्योत्तर थी, जिसे मध्य रेखा कहा जाता था और जो उज्जयिनी (आज का उज्जैन) से गुजरती थी। किताब के चित्र 1.5 में यह रेखा 75.8° पू. पर दिखाई गई है, उसके आसपास के कुछ प्राचीन नगरों के साथ।

1किताब के अनुसार “परंपरागत रूप से” भूमध्य रेखा 0° अक्षांश है, पर 0° देशांतर के लिए देशों को 1884 में मिलकर फ़ैसला करना पड़ा। 0° अक्षांश के लिए भूमध्य रेखा ही क्यों ली जाती है, और 0° देशांतर के लिए चुनाव क्यों करना पड़ा? 3 अंक

उत्तर देखिए
1

भूमध्य रेखा दोनों ध्रुवों के ठीक बीच में है, और “सबसे बड़ा वृत्त, विषुवत वृत्त है”। ऐसी रेखा एक ही है, इसलिए 0° के लिए वही ली जाती है।

2

देशांतर की रेखाएँ सब एक जैसी हैं: “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।” इनमें से कोई रेखा अपने-आप ख़ास नहीं है।

3

★इसलिए 0° देशांतर के लिए एक रेखा चुननी पड़ी, और यह चुनाव देशों का आपसी फ़ैसला था। यह निष्कर्ष हमारा है। (किताब, पृष्ठ 13–15)

2एक विद्यार्थी कहता है कि 1884 में ग्रिनिच चुना गया, इसका मतलब उज्जयिनी की मध्य रेखा ग़लत थी। क्या आप सहमत हैं? 2 अंक

उत्तर देखिए

★नहीं। किताब कहती है: “वास्तव में ग्रिनिच याम्योत्तर, पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर रेखा नहीं है।” और यह भी: “उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं के लिए एक प्रमुख संदर्भ बन गया था।”

0° की रेखा चुनी जाती है (प्रश्न 1), इसलिए कोई चुनी हुई रेखा अपने-आप में सही या ग़लत नहीं होती। 1884 में कुछ देशों ने आपस में एक अंतर्राष्ट्रीय मानक तय किया, बस। यह आख़िरी बात हमारा निष्कर्ष है। (किताब, पृष्ठ 15–16)

3चित्र 1.5 में उज्जयिनी याम्योत्तर नक्शे में ऊपर से नीचे तक जाती है; उत्तर में कुरूक्षेत्र और दक्षिण में कुमारी (कन्या कुमारी) इसके पास हैं। मान लीजिए, दो गाँव ठीक इसी रेखा पर बसे हैं: एक उत्तर में, एक दक्षिण में। दोनों गाँवों में स्थानीय दोपहर एक साथ होगी या अलग-अलग समय पर? 2 अंक

उत्तर देखिए

★एक साथ। स्थानीय समय देशांतर से तय होता है: “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।” दोनों गाँव एक ही देशांतर पर हैं, इसलिए उनका स्थानीय समय भी एक ही है।

! उत्तर-दक्षिण जाने से अक्षांश बदलता है, स्थानीय समय नहीं। यह निष्कर्ष हमारा है। (किताब, पृष्ठ 15)

भाग ख — तर्क और मूल्यांकन

1एक विद्यार्थी कहता है कि भूमध्य रेखा पर बसे सभी शहरों का अक्षांश 0° है, इसलिए उन सबका स्थानीय समय भी एक ही होगा। उसके तर्क में क्या गड़बड़ है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★एक ही अक्षांश होने से समय एक नहीं हो जाता; स्थानीय समय देशांतर से तय होता है। किताब बताती है कि ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे हों, तो पूर्व की ओर हर 15° याम्योत्तर पर स्थानीय समय में एक घंटा जुड़ता जाता है।

भूमध्य रेखा पृथ्वी के चारों ओर एक पूरा घेरा है, इसलिए उस पर बसे शहर पूर्व-पश्चिम में बहुत दूर-दूर हो सकते हैं। उनके देशांतर अलग होंगे, तो स्थानीय समय भी अलग होगा। यह बात हमारी है; 15° वाला नियम किताब का है। (किताब, पृष्ठ 19)

2रूस में 11 समय क्षेत्र हैं। मान लीजिए, रिया कहती है कि रूस को पूर्व से पश्चिम तक पार करने में घड़ी 11 बार बदलनी पड़ेगी। क्या वह सही है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★नहीं, 10 बार। घड़ी तब बदलती है, जब आप एक समय क्षेत्र से अगले में जाते हैं, और 11 क्षेत्रों के बीच 10 सीमाएँ हैं। किताब भी यही कहती है: “आपको अपनी घड़ी को 10 बार पुनर्समायोजित करना पड़ेगा।”

समझने का हमारा तरीका: एक कतार में 11 कमरे हों, तो उनके बीच 10 दरवाज़े होते हैं। (किताब, पृष्ठ 21)

3चित्र 1.5 में कुछ प्राचीन नगर उज्जयिनी याम्योत्तर के बहुत पास हैं और कुछ उससे थोड़ा हटकर। एक बच्चा कहता है कि पुराने खगोलविद लापरवाह थे। क्या यह ठीक है? 2 अंक

उत्तर देखिए

★नहीं। किताब इसका कारण बताती है: “ऐसा इसलिए है कि देशांतर को मापने के लिए सही-सही समय रखना आवश्यक है और यह वर्तमान की तुलना में तब उतना सटीक नहीं था।”

हमारी समझ में कमी उस ज़माने में समय नापने की सटीकता में थी, खगोलविदों की मेहनत में नहीं। किताब बताती है कि उज्जैन अनेक शताब्दियों तक खगोल विद्या का एक प्रतिष्ठित केंद्र रहा। (किताब, पृष्ठ 16)

भाग ग — तुलना और वर्गीकरण

1हर स्थिति के लिए बताइए कि अक्षांश काम आएगा या देशांतर। 4 अंक

उत्तर देखिए
स्थितिकिससे पता चलेगाक्यों
किसी जगह की जलवायु गरम होगी या ठंडी, इसका मोटा अंदाज़ाअक्षांशकिताब कहती है: “अक्षांश और जलवायु के बीच एक संबंध है।” भूमध्य रेखा के पास गरम, ध्रुवों के पास ठंडी।
दो शहरों के स्थानीय समय का अंतरदेशांतरहर 15° देशांतर पर स्थानीय समय में एक घंटे का अंतर आता है।
कोई जगह भूमध्य रेखा से कितनी दूर हैअक्षांशअक्षांश भूमध्य रेखा से दूरी का माप है।
दो दोस्तों में से किसके यहाँ सूरज पहले डूबेगादेशांतरजो जगह काफ़ी पूर्व में है, वहाँ सूर्यास्त पहले होता है; किताब में असम वाला मित्र गुजरात वाले से पहले अँधेरा देखता है।

★पहचानने का हमारा तरीका: उत्तर-दक्षिण की दूरी या जलवायु की बात हो, तो अक्षांश; पूर्व-पश्चिम या समय की बात हो, तो देशांतर। (किताब, पृष्ठ 14, 19–20)

2नीचे लिखे निर्देशांक ठीक हैं या नहीं? जो ठीक नहीं, उसकी गड़बड़ बताइए। 5 अंक

उत्तर देखिए
लिखा गयाठीक है?कारण
अक्षांश 95° उ.नहींअक्षांश ध्रुव पर 90° पर पूरा हो जाता है।
अक्षांश 25° पू.नहींअक्षांश के साथ उ. या द. लगता है; पू. और प. देशांतर के साथ लगते हैं।
देशांतर 200° पू.नहींदेशांतर पूर्व हो या पश्चिम, 0° से 180° तक ही जाता है।
अक्षांश 90° द.हाँयह दक्षिणी ध्रुव का अक्षांश है; किताब इसे “90° द.” लिखती है।
देशांतर 120° प.हाँ180° से कम है और साथ में प. लगा है।

★याद रखिए: अक्षांश 0° से 90° तक (उ. या द.), देशांतर 0° से 180° तक (पू. या प.)। (किताब, पृष्ठ 14–15)

3किताब में चार जगहों के देशांतर दिए हैं: न्यूयॉर्क 74° प., ग्रिनिच 0°, दिल्ली 77° पू. और टोक्यो 140° पू.। (अ) इन्हें पश्चिम से पूर्व के क्रम में लिखिए। (ब) न्यूयॉर्क और दिल्ली के स्थानीय समय में कितना अंतर है? 4 अंक

उत्तर देखिए

(अ) न्यूयॉर्क (74° प.), फिर ग्रिनिच (0°), फिर दिल्ली (77° पू.), फिर टोक्यो (140° पू.)।

(ब) न्यूयॉर्क ग्रिनिच के पश्चिम में है और दिल्ली पूर्व में, इसलिए दोनों दूरियाँ जुड़ेंगी: 74° + 77° = 151°। 1° = 4 मिनट (केस 3 का हिसाब), तो 151 × 4 = 604 मिनट।

★अंतर 10 घंटे 4 मिनट है; दिल्ली का स्थानीय समय आगे रहेगा, क्योंकि दिल्ली पूर्व में है।

! ग्रिनिच के दोनों ओर की जगहों का अंतर निकालते समय देशांतर जोड़े जाते हैं, घटाए नहीं। यह हिसाब हमारा है। (किताब, पृष्ठ 15)

भाग घ — प्रोजेक्ट और गतिविधि

1. टेबल लैंप और ग्लोब (किताब के पृष्ठ 15 की गतिविधि पर आधारित)

एक टेबल लैंप को ग्लोब से थोड़ा दूर रखिए और मान लीजिए कि लैंप सूर्य है। ग्लोब न हो, तो एक गेंद पर भारत और इंग्लैंड की जगह के लिए दो निशान लगा लीजिए। ग्लोब को धीरे-धीरे पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाइए और देखिए कि कहाँ सुबह है, कहाँ दोपहर, कहाँ शाम और कहाँ रात। फिर लिखिए: जब भारत पर सुबह की पहली रोशनी पड़ती है, तब इंग्लैंड वाला निशान अँधेरे में है या उजाले में?

2. कक्षा का निर्देशांक-नक्शा (शतरंज वाले उदाहरण से, पृष्ठ 12–13)

शतरंज के पटल में हर खाने का नाम एक अक्षर और एक अंक से बनता है, जैसे घ4। अपनी कक्षा की बेंचों के साथ यही कीजिए: आगे से पीछे की कतारों को 1, 2, 3 और बाएँ से दाएँ की कतारों को क, ख, ग नाम दीजिए। कागज़ पर कक्षा का नक्शा बनाइए, उत्तर का तीर लगाइए और हर दोस्त की जगह ग3 जैसे निर्देशांक से लिखिए। फिर किसी दोस्त को केवल निर्देशांक बताइए और उससे वह बेंच ढूँढ़वाइए।

3. घर से विद्यालय तक, अपने स्केल से

घर से विद्यालय तक के रास्ते में अपने कदम गिनिए। मान लीजिए आपके 100 कदम नक्शे पर 1 सेंटीमीटर होंगे; यही आपका स्केल है। इसे नक्शे के कोने में लिखिए। रास्ते में पड़ने वाले मंदिर, कुआँ या तालाब किताब के चित्र 1.2 के चिह्नों से दिखाइए और उत्तर का तीर लगाइए। आख़िर में लिखिए कि विद्यालय से आपका घर लगभग किस दिशा में है।

4. गेंद पर अक्षांश

एक पुरानी गेंद लीजिए। ऊपर और नीचे के बिंदु को ध्रुव मानिए और ठीक बीच में चारों ओर एक रेखा खींचिए; यह आपकी भूमध्य रेखा है। फिर उत्तर और दक्षिण की ओर भूमध्य रेखा के समानांतर दो-दो रेखाएँ और खींचिए। धागे से हर वृत्त की लंबाई नापिए और लिखिए कि ध्रुव की ओर जाते हुए वृत्त छोटे होते जाते हैं या बड़े। अपना उत्तर किताब के चित्र 1.3 से मिलाइए।

5. एटलस में चार शहर (किताब के पृष्ठ 16 की गतिविधि पर आधारित)

ग्लोब या मानचित्रावली (एटलस) में मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर और पेरिस ढूँढ़िए और हर शहर के अक्षांश और देशांतर का लगभग मान लिखिए। फिर बताइए: इन चारों में से कौन-सा शहर भूमध्य रेखा के सबसे पास है, और कौन-सा ग्रिनिच याम्योत्तर के सबसे पास?

अपना उत्तर ख़ुद जाँचिए

आपके उत्तर मेंतो
दिशा उत्तर के तीर से पढ़ी, दूरी स्केल से गुणा करके इकाई के साथ लिखी, और किताब से एक बात जोड़ीउत्तर पूरा है।
हिसाब का जवाब सही है, पर बीच के कदम नहीं लिखेकेस 3 का प्रश्न 2 देखिए; वहाँ हर कदम अलग लिखा है। अपना हिसाब उसी तरह लिखिए।
समय के हिसाब में अक्षांश ले लिया, या स्थानीय समय और घड़ी का मानक समय एक मान लियाभाग ख का प्रश्न 1 और केस 3 का प्रश्न 3 फिर से देखिए।
! दाएँ-बाएँ से दिशा बताई, या ग्रिनिच के दोनों ओर के देशांतर घटा दिएकेस 1 के प्रश्न 1 और 2, और भाग ग का प्रश्न 3 फिर से पढ़िए।