इस अध्याय के सारे ज़रूरी शब्द यहाँ एक जगह हैं: हर शब्द का अर्थ और किताब का वह पृष्ठ, जहाँ वह आता है। उद्धरण-चिह्नों में लिखी पंक्तियाँ किताब की अपनी हैं, उसी वर्तनी में; बिना उद्धरण-चिह्न वाले अर्थ हमारे सरल शब्दों में हैं। जहाँ कोई निष्कर्ष हमारा है, वहाँ हमारा लिखा है। पृष्ठ संख्याएँ 2026-27 में छपी किताब की हैं। लिखते समय वही शब्द लिखिए जो किताब में छपा है, जैसे “याम्योत्तर”, “भूमध्य रेखा”, “प्रतीक चिह्न”।
1. मानचित्र के शब्द
| शब्द | अर्थ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| मानचित्र | “मानचित्र किसी भी क्षेत्र का एक प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है”। किताब यह भी कहती है: “मानचित्र में आप सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे आप उसे ऊपर से देखते हैं।” | 9 |
| एटलस (मानचित्रावली) | “एटलस (मानचित्रावली) मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।” | 9 |
| भौतिक मानचित्र | “भौतिक मानचित्र मुख्य रूप से प्राकृतिक आकृतियों, जैसे– पर्वतों, महासागरों और नदियों को दर्शाते हैं।” | 9 |
| राजनैतिक मानचित्र | “राजनैतिक मानचित्र देशों या राज्यों, सीमाओं, नगरों आदि को दर्शाते हैं।” | 9 |
| थिमैटिक मानचित्र | “थिमैटिक मानचित्र विशिष्ट प्रकार की सूचना प्रदान करते हैं।” | 9 |
| मानचित्र के घटक | “किसी भी मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं— दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।” | 9 |
| स्केल (पैमाना) | मानचित्र का हर सेंटीमीटर धरती पर कितनी दूरी के बराबर है, यह स्केल बताता है: “मानचित्र का प्रत्येक सेंटीमीटर धरातल पर एक निश्चित दूरी का प्रतिनिधित्व करता है।” किताब का उदाहरण: 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर। पृष्ठ 23 के प्रश्न 1 में किताब इसी को पैमाना कहती है। | 9–10, 23 |
| वास्तविक दूरी | धरती पर असली दूरी, जो मानचित्र की नाप और स्केल से निकलती है: “इसलिए मानचित्र पर चिह्नित किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी उस स्केल पर निर्भर है, जिसका मानचित्र उपयोग करता है।” | 10 |
| चतुर्दिश या प्रधान बिंदु | चार मुख्य दिशाएँ: “शीर्ष पर उत्तर और घड़ी के काँटे की दिशा में घूमते हुए पूर्व, दक्षिण तथा पश्चिम। इन्हें चतुर्दिश या प्रधान बिंदु भी कहा जाता है।” | 10 |
| मध्यवर्ती दिशाएँ | दो प्रधान दिशाओं के बीच की चार दिशाएँ: उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम। | 10 |
| ‘उ.’ वाला तीर | “अधिकतर मानचित्रों में ‘उ.’ अक्षर से अंकित एक तीर होता है, जो उत्तर दिशा को इंगित करता है।” | 10 |
| प्रतीक चिह्न | “प्रतीक चिह्न मानचित्रों का एक और महत्वपूर्ण घटक है।” ये छोटे-छोटे चित्र होते हैं; इनसे “मानचित्र पर उपलब्ध सीमित स्थान पर अनेक विवरण दर्शाए जा सकते हैं।” | 11 |
| भारतीय सर्वेक्षण विभाग | “सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने भारत (या भारत के भागों) के मानचित्रों के लिए प्रतीक चिह्नों का एक संकलन निर्धारित किया है।” | 11 |
2. पृथ्वी और ग्लोब के शब्द
| शब्द | अर्थ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| लगभग गोलाकार | पृथ्वी की आकृति। “लगभग” इसलिए कि पृथ्वी पूरी गोल नहीं है, वह “ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है”। | 12 |
| ग्लोब | “एक गोल आकृति जैसा है और उस पर एक मानचित्र बनाया गया है।” आम तौर पर धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड का बना होता है। ग्लोब पृथ्वी का ही नहीं, चंद्रमा, मंगल ग्रह, तारों और तारा-मंडल का भी हो सकता है। | 12 |
| ध्रुव | ग्लोब को घुमाइए, तो “ऊपरी और निचले स्तर पर स्थित बिंदु दो ध्रुव हैं”। किताब इन्हें उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव कहती है। | 13–14 |
| भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) | दोनों ध्रुवों के ठीक बीच की रेखा: “इनके मध्य में भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) होती है।” इसका अक्षांश 0° है। | 13–14 |
| गोलार्ध | पृथ्वी का आधा भाग। प्रमुख याम्योत्तर पृथ्वी को पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में बाँटती है, और भूमध्य रेखा उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में (चित्र 1.4)। | 16 |
| उष्ण, शीतोष्ण, शीत | जलवायु के तीन नाम। “भूमध्य रेखा के चारों ओर जलवायु सामान्यतः गरम (इसे उष्ण भी कहा जाता है) होती है।” ध्रुव की ओर बढ़ने पर जलवायु शीतोष्ण हो जाती है, और “उत्तर या दक्षिण ध्रुव के निकट जलवायु शीत (ठंडी) होती है।” | 14 |
3. निर्देशांक के शब्द
| शब्द | अर्थ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| निर्देशांक प्रणाली | किसी जगह को दो चीज़ों से ठीक-ठीक बताने का तरीका, जैसे बाज़ार में 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान, या शतरंज की बिसात पर ‘घ’ 4 वाला खाना। “मानचित्र पर किसी स्थान की स्थिति के निर्धारण के लिए निर्देशांकों की इसी प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।” | 12–13 |
| निर्देशांक | किसी जगह का पता बताने वाली दो संख्याएँ: “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।” | 15 |
| अक्षांश | भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण की दूरी: “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।” “अक्षांशों को अंशों (डिग्री) में व्यक्त किया जाता है।” | 13–14 |
| समानांतर (अक्षांश की रेखा) | भूमध्य रेखा के समानांतर पूर्व से पश्चिम जाने वाली काल्पनिक रेखा: “इस प्रकार की रेखा को अक्षांश (समानांतर) कहा जाता है और यह पृथ्वी के चारों ओर एक वृत्त बनाती है।” | 13 |
| देशांतर | “देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का एक माप है।” इसका मान 0° से 180° तक बढ़ता है; पश्चिम के लिए ‘प.’ और पूर्व के लिए ‘पू.’ जोड़ा जाता है। | 15 |
| याम्योत्तर (देशांतरीय याम्योत्तर) | देशांतर की रेखा। किताब इसका अंग्रेज़ी नाम भी देती है, मेरिडियन ऑफ लाँगिट्यूड: “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।” | 14 |
| प्रमुख याम्योत्तर (ग्रिनिच याम्योत्तर) | 0° देशांतर वाली याम्योत्तर, जो इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरती है। “वर्ष 1884 में कुछ देशों ने तय किया” कि यही प्रमुख याम्योत्तर का अंतर्राष्ट्रीय मानक होगी। आगे के पृष्ठों पर किताब इसे मुख्य याम्योत्तर भी कहती है। | 15, 19 |
| ग्रिड (ग्रिड रेखाएँ) | अक्षांश और देशांतर की रेखाओं का जाल: “यह सभी रेखाएँ मिलकर ग्लोब पर एक ग्रिड बनाती है जिन्हें ग्रिड रेखाएँ भी कहा जाता है।” | 15 |
| मध्य रेखा | भारत की अपनी पुरानी प्रमुख याम्योत्तर, “जिसे मध्य रेखा कहा जाता था और यह उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) के मध्य से गुजरती थी”। चित्र 1.5 में यह रेखा 75.8° पू. पर दिखाई गई है। | 16–17 |
| उज्जयिनी | आज का उज्जैन। “उज्जैन अनेक शताब्दियों तक खगोल विद्या का एक प्रतिष्ठित केंद्र रहा है।” | 16 |
| खगोलविद | आकाश के पिंडों, जैसे सूरज, चाँद और तारों, का अध्ययन करने वाले विद्वान। किताब में: “प्रसिद्ध खगोलविद वराहमिहिर”। | 16 |
मान याद रखिए
| क्या | मान | पृष्ठ |
|---|---|---|
| भूमध्य रेखा का अक्षांश | 0° | 14 |
| उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव का अक्षांश | 90° उ. और 90° द. | 14 |
| प्रमुख याम्योत्तर का देशांतर | 0° | 15 |
| देशांतर का मान | 0° से 180° तक, साथ में प. या पू. | 15 |
| 180° का देशांतर | केवल 180°, न प. न पू. | 15 |
| दिल्ली | 29° उ. अक्षांश, 77° पू. देशांतर | 15 |
| भारत का अक्षांश | लगभग 8° उ. से 37° उ. तक | 18 |
| भारत का देशांतर | लगभग 68° पू. से 97° पू. तक | 18 |
| मध्य रेखा (चित्र 1.5) | 75.8° पू. | 17 |
! 180° के साथ प. या पू. मत लिखिए। किताब कहती है: “180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर हैं। इसलिए इस देशांतर को प. या पू. न लिखकर 180° ही लिखा जाता है।” (पृष्ठ 15)
4. समय के शब्द
| शब्द | अर्थ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| स्थानीय समय | किसी जगह का अपना समय, जो उसके देशांतर से निकलता है: “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।” पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, इसलिए “प्रति घंटा 15°”। पूर्व की ओर हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा आगे, पश्चिम की ओर एक घंटा पीछे। | 15, 19 |
| मानक समय | पूरे देश के लिए एक समय: “अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।” | 20 |
| आई.एस.टी. (भारतीय मानक समय) | इंडियन स्टैंडर्ड टाइम, भारत का मानक समय। यह ग्रिनिच के स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। | 20 |
| जी.एम.टी. | ग्रिनिच मीन टाइम, यानी ग्रिनिच का स्थानीय समय। | 20 |
| समय क्षेत्र (टाइम जोन) | धरती का वह भाग जिसमें एक ही मानक समय चलता है। “यह सभी मानक समय, समय क्षेत्र में गठित किए गए हैं, जो ग्राफ में 15° के क्षेत्र (चित्र 1.7) का व्यापक रूप से पालन करते हैं।” इन्हें बाँटने वाली रेखाएँ “पूर्णतया सीधी नहीं होती हैं”, क्योंकि उन्हें देशों की सीमाओं का ध्यान रखना पड़ता है। | 19–20 |
| धनात्मक और ऋणात्मक चिह्न (+, −) | चित्र 1.8 में देशों के भीतर लिखी संख्याएँ। + हो तो वह संख्या जी.एम.टी. में जोड़िए, − हो तो घटाइए; तब उस देश का मानक समय मिलता है। भारत पर +5½ लिखा है। | 20–21 |
| पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न | चित्र 1.7 में समय के नाम: दोपहर 12 बजे से पहले पूर्वाह्न, ठीक 12 बजे मध्याह्न, 12 के बाद अपराह्न। | 19 |
| अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा | “ग्रिनिच पर स्थिर मुख्य याम्योत्तर, जिसके विपरीत की रेखा लगभग 180° देशांतर पर है, उसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।” इसे पार करने पर तिथि एक दिन बदल जाती है। यह सीधी नहीं चलती: “यह कुछ देशों में एक ही दिन का विभाजन होने से बचने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।” | 21–22 |
! पूर्व की ओर यात्रा करते हुए तिथि रेखा पार करने पर एक दिन घटता है (सोमवार से रविवार), जुड़ता नहीं। पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए पार करने पर एक दिन जुड़ता है (रविवार से सोमवार)। (पृष्ठ 21–22)
5. हाशिये और आख़िरी पन्नों के शब्द
| शब्द | अर्थ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| मुहाना | किताब के हाशिये में: “वह स्थान जहाँ नदी समुद्र में मिलती है।” | 23 |
| वर्ग पहेली | शब्दों की पहेली, जिसमें खानों में उत्तर भरने होते हैं। किताब की वर्ग पहेली का नाम है “पृथ्वी पर स्थानों का पता लगाना”। | 24–25 |
| शब्द-संक्षेप | दो शब्दों को जोड़कर या छोटा करके बना शब्द। किताब का उदाहरण: नूडल्स, “नोट्स (Notes) और डूडल्स (Doodles) को मिलाकर बना शब्द-संक्षेप”। | 25–26 |
6. मिलते-जुलते शब्द जो उलझाते हैं
| ये शब्द | फ़र्क | पृष्ठ |
|---|---|---|
| अक्षांश और देशांतर | अक्षांश भूमध्य रेखा से दूरी है; उसकी रेखा पूरा वृत्त है और पूर्व से पश्चिम जाती है। देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी है; उसकी रेखा अर्धवृत्त है और एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाती है। | 13–15 |
| समानांतर और याम्योत्तर | समानांतर अक्षांश की रेखा है, याम्योत्तर देशांतर की। | 13–14 |
| भूमध्य रेखा और प्रमुख याम्योत्तर | भूमध्य रेखा 0° अक्षांश है और पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में बाँटती है। प्रमुख याम्योत्तर 0° देशांतर है और पृथ्वी को पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में बाँटती है। | 14–16 |
| अक्षांश के वृत्त और याम्योत्तर की लंबाई | अक्षांश के वृत्त ध्रुवों की ओर “छोटे होते जाते हैं”; “सबसे बड़ा वृत्त, विषुवत वृत्त है”। हर याम्योत्तर ध्रुव से ध्रुव तक का अर्धवृत्त है, इसलिए सारे याम्योत्तर बराबर लंबे हैं (यह निष्कर्ष हमारा है)। | 13–14 |
| प्रमुख याम्योत्तर और मुख्य याम्योत्तर | एक ही रेखा के दो नाम; किताब दोनों लिखती है। | 15, 19 |
| ग्रिनिच याम्योत्तर और मध्य रेखा | ग्रिनिच याम्योत्तर आज की प्रमुख याम्योत्तर है; “वर्ष 1884 में कुछ देशों ने तय किया” कि यही अंतर्राष्ट्रीय मानक होगी। मध्य रेखा भारत की अपनी पुरानी प्रमुख याम्योत्तर थी, जो उज्जयिनी से गुजरती थी। | 15–16 |
| स्थानीय समय और मानक समय | स्थानीय समय हर जगह का अपना है, उसके देशांतर से। मानक समय पूरे देश का एक है, देश के बीच से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित। | 19–20 |
| जी.एम.टी. और आई.एस.टी. | जी.एम.टी. ग्रिनिच का समय है; आई.एस.टी. उससे 5 घंटे 30 मिनट आगे है। | 20 |
| प्रमुख याम्योत्तर और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा | प्रमुख याम्योत्तर 0° पर है; तिथि रेखा उसके विपरीत, लगभग 180° पर। | 15, 21 |
| भौतिक, राजनैतिक और थिमैटिक मानचित्र | भौतिक: मुख्य रूप से प्राकृतिक आकृतियाँ, जैसे पर्वत, महासागर, नदियाँ। राजनैतिक: देश या राज्य, सीमाएँ, नगर आदि। थिमैटिक: किसी ख़ास तरह की सूचना। | 9 |
| ग्लोब और मानचित्र | ग्लोब पृथ्वी की तरह गोल है, इसलिए पृथ्वी को बेहतर दिखाता है; समतल कागज़ पर गोल वस्तु को “यथावत” बनाना संभव नहीं। फिर भी मानचित्र किसी भी छोटे या बड़े क्षेत्र को दिखाने का “एक अत्यधिक उपयोगी साधन है”। | 12, 22 |