हर प्रश्न के साथ उसका उत्तर और पृष्ठ-संदर्भ दिया है — यह शिक्षक के लिए है, और कक्षा में मौखिक अभ्यास के लिए। जिस पत्र में विद्यार्थी अकेले काम करे, वह
15-Student-Worksheet.mdहै, जहाँ उत्तर अंतिम पृष्ठ पर हैं।
खंड क — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1स्थलरूप किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
पृथ्वी की सतह के एक भौतिक स्वरूप को। (पृ. 42)
2स्थलरूपों को आकार लेने में कितना समय लगता है?
उत्तर देखिए
लाखों वर्ष। (पृ. 42)
3स्थलरूपों की तीन प्रमुख श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
पर्वत, पठार और मैदान। (पृ. 42)
4‘तुंगता (एल्टीट्यूड)’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
समुद्र तल से किसी वस्तु/लक्ष्य की ऊँचाई। (पृ. 42)
5‘समुद्र तल’ का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर देखिए
माध्य समुद्र तल। (पृ. 53)
6पर्वत की तीन पहचान क्या हैं?
उत्तर देखिए
चौड़ा आधार, खड़ी ढलान (चढ़ाई) और सँकरे शिखर (चोटियाँ)। (पृ. 42)
7‘पहाड़ी’ का दूसरा नाम पुस्तक ने क्या दिया है?
उत्तर देखिए
छोटे पहाड़ या हिल। (पृ. 43)
8‘वर्षण’ के तीन सामान्य रूप कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
वर्षा, हिमपात और ओले गिरना। (पृ. 43)
9हिम और ओले का गिरना वास्तव में क्या है?
उत्तर देखिए
जल का ठोस रूप में गिरना। (पृ. 43)
10एवरेस्ट गिरिशृंग किनके बीच स्थित है?
उत्तर देखिए
नेपाल तथा तिब्बत के बीच। (पृ. 45)
11कंचनजुंगा किनके बीच स्थित है?
उत्तर देखिए
भारत के सिक्किम राज्य और नेपाल के बीच। (पृ. 45)
12एंडीज पर्वत शृंखला की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?
उत्तर देखिए
अकोंकागुआ गिरिशृंग। (पृ. 45)
13आल्प्स का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर कौन-सा है?
उत्तर देखिए
ब्लांक गिरिशृंग। (पृ. 45)
14दक्षिण भारत का सबसे ऊँचा गिरिशृंग कौन-सा है और उसका दूसरा नाम क्या है?
उत्तर देखिए
अनाईमुडी; केरल में इसे ‘अनाई शिखर’ भी कहते हैं। (पृ. 45)
15कौन-सा पर्वत किसी शृंखला से संबंधित नहीं है?
उत्तर देखिए
किलिमंजारो गिरिशृंग (पूर्वी अफ्रीका) — यह एक पृथक पर्वत है। (पृ. 45)
16एक प्राचीन पर्वत शृंखला का नाम बताइए, जो अपरदन से गोल हो गई है।
उत्तर देखिए
अरावली शृंखला। (पृ. 46)
17पर्वतीय वन में पाए जाने वाले चार शंकुधारी वृक्ष कौन-से हैं?
उत्तर देखिए
पाइन (चीड़), फर, स्प्रूस और देवदार। (पृ. 46)
18अधिक ऊँचाई पर पेड़ों की जगह क्या उग जाते हैं?
उत्तर देखिए
घास, मॉस (काई) और लाइकेन। (पृ. 46)
19कालिदास के किस काव्यग्रंथ का आरंभ हिमालय की स्तुति से होता है?
उत्तर देखिए
कुमारसंभव। (पृ. 46)
20हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में विशालतम कौन-सी है?
उत्तर देखिए
गंगा। (पृ. 48)
21गंगा की लंबाई कितनी है?
उत्तर देखिए
लगभग 2500 कि.मी.। (पृ. 48)
22‘सहायक नदी’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
मुख्य नदी में आकर मिलने वाली अन्य नदी को। (पृ. 48)
23सोन नदी कहाँ से निकलती है?
उत्तर देखिए
गंगा के मैदान के दक्षिण में पड़ने वाले विंध्यांचल की शृंखलाओं से। (पृ. 48)
24‘वेदिका कृषि’ क्या है?
उत्तर देखिए
ढलान की भूमि को काटकर सीढ़ीनुमा स्थान पर कृषि करना। (पृ. 49)
25पुस्तक ने पर्वतों के कौन-से चार साहसिक खेल गिनाए हैं?
उत्तर देखिए
स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण और पैरा ग्लाइडिंग। (पृ. 49)
26एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला कौन थीं और किस वर्ष?
उत्तर देखिए
बछेंद्री पाल, 1984 में। (पृ. 49)
27अरुणिमा सिन्हा को किस वर्ष पद्मश्री मिला?
उत्तर देखिए
2015 में। (पृ. 49)
28एवरेस्ट गिरिशृंग की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर देखिए
8848 मीटर। (पृ. 51)
29तिब्बती लोग एवरेस्ट को क्या कहते हैं?
उत्तर देखिए
‘चोमोलुंगमा’, जिसका अर्थ है ‘जगत जननी’। (पृ. 51)
30नेपाल निवासी एवरेस्ट को क्या कहते हैं?
उत्तर देखिए
‘सागरमाथा’, जिसका अर्थ है ‘आकाश की देवी’। (पृ. 51)
31तिब्बत के पठार की औसत ऊँचाई कितनी है?
उत्तर देखिए
4500 मीटर। (पृ. 51)
32तिब्बत के पठार को क्या नाम दिया गया है?
उत्तर देखिए
‘विश्व की छत’। (पृ. 51)
33पठारों को ‘खनिजों का भंडार-गृह’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखिए
क्योंकि उनमें खनिजों का प्रचुर मात्रा में जमाव देखने को मिलता है। (पृ. 51)
34छोटा नागपुर के पठार में कौन-से खनिज पाए जाते हैं?
उत्तर देखिए
लौह, कोयला और मैंगनीज। (पृ. 51)
35पूर्वी अफ्रीका का पठार किसके खनन के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर देखिए
सोने और हीरे के। (पृ. 51)
36नहकालीकाई जल प्रपात कितनी ऊँचाई से गिरता है और कहाँ है?
उत्तर देखिए
340 मीटर की ऊँचाई से; चेरापूंजी (मेघालय) के पठार में। (पृ. 52)
37जोग जल प्रपात किस नदी पर है?
उत्तर देखिए
शरावती नदी पर, पश्चिमी घाट में। (पृ. 52)
38हुंडरू जल प्रपात किस नदी पर है?
उत्तर देखिए
सुवर्ण रेखा नदी पर, छोटा नागपुर पठार में। (पृ. 52)
39सामान्यत: मैदान की ऊँचाई समुद्र तल से कितनी से अधिक नहीं होती?
उत्तर देखिए
300 मीटर से अधिक नहीं। (पृ. 53)
40‘तलछट’ में क्या-क्या आता है?
उत्तर देखिए
रेत, चट्टानों के कण और गाद। (पृ. 53)
41गंगा के मैदान में लगभग कितनी जनसंख्या रहती है?
उत्तर देखिए
लगभग 40 करोड़ — भारत की कुल जनसंख्या की एक-चौथाई से अधिक। (पृ. 55)
42‘मोटे अनाज’ में कौन-सी फसलें आती हैं?
उत्तर देखिए
ज्वार, बाजरा और रागी। (पृ. 55)
43पुस्तक में दी गई तीन रेशेदार फसलें कौन-सी हैं?
उत्तर देखिए
कपास, जूट और सन। (पृ. 55)
44‘संगम स्थल’ किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
दो या दो से अधिक नदियों के मिलने के स्थान को। (पृ. 55)
45एक ठंडे मरुस्थल का नाम बताइए।
उत्तर देखिए
गोबी मरुस्थल (एशिया)। (पृ. 56)
46थार मरुस्थल कहाँ स्थित है?
उत्तर देखिए
भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में। (पृ. 56)
47‘लचीलापन (रेजिलियंस)’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने अथवा उनके अनुसार ढलने की क्षमता। (पृ. 56)
48तमिल संगम की पाँच तिणै के नाम बताइए।
उत्तर देखिए
कुरिंजी, मुल्लाई, मरूदम, नेयदल और पालै। (पृ. 57)
खंड ख — लघु उत्तरीय (3 अंक)
1पर्वत और पहाड़ी में तीन अंतर लिखिए।
उत्तर देखिए
| पर्वत | पहाड़ी | |
|---|---|---|
| ऊँचाई | अधिक | कम |
| चढ़ाई | खड़ी | कम खड़ी |
| शीर्ष | सँकरे शिखर | गोल आकार |
(पृ. 42–43)
2नवीन और प्राचीन पर्वतों में क्या अंतर है? एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
नवीन (युवा) पर्वत पृथ्वी के इतिहास में हाल ही में निर्मित हैं, ऊँचे हैं और उनकी चोटियाँ
नुकीली होती हैं — जैसे हिमालय। प्राचीन पर्वत काफी पुराने हैं, छोटे हैं और
अपरदन के कारण गोल आकार के हो गए हैं — जैसे अरावली शृंखला। (पृ. 46)
3पर्वतों पर ऊँचाई बढ़ने के साथ वनस्पति किस प्रकार बदलती है?
उत्तर देखिए
पर्वतों की ढलानों पर पर्वतीय वन होते हैं, जिनमें शंकुधारी वृक्ष — पाइन (चीड़), फर,
स्प्रूस, देवदार — पाए जाते हैं। ये ऊँचे, शंकु के आकार के होते हैं और इनकी पत्तियाँ पतली,
नोंकदार होती हैं। अधिक ऊँचाई पर पेड़ों की जगह घास, मॉस (काई) और लाइकेन उग जाते हैं।
(पृ. 46)
4मॉस और लाइकेन में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
मॉस (काई) फूलों और वास्तविक जड़ों से रहित एक छोटा हरा पौधा या वनस्पति है, जो बहुधा
मखमली आवरण की तरह फैलता है। लाइकेन पौधे के समान जीव हैं, जो सामान्यत: चट्टानों,
दीवारों या पेड़ों से चिपके हुए होते हैं। (पृ. 46)
5पर्वतों पर कृषि कठिन क्यों है, और वहाँ के लोग क्या उपाय करते हैं?
उत्तर देखिए
पर्वतीय भूभाग खड़े ढलानों के साथ ऊबड़-खाबड़ या ऊँचे-नीचे होते हैं, इसलिए कुछ ही घाटियों में नियमित रूप से कृषि की जा सकती है। उपाय के रूप में ढलानों पर वेदिका कृषि
की जाती है — अर्थात ढलान की भूमि को काटकर सीढ़ीनुमा स्थान पर कृषि करना। इसके अतिरिक्त
विश्व-भर के अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि की जगह पशुपालन को अधिक महत्व दिया जाता है।
(पृ. 49)
6भूस्खलन और हिमस्खलन में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
भूस्खलन पर्वतीय भूखंड के एक बड़े भाग या एक चट्टान का अकस्मात टूटकर गिरना है।
हिमस्खलन (एवलांश) पर्वत से अकस्मात हिम का गिरना है — हिमपात अथवा चट्टानें टूटकर
गिरना — और ऐसा प्राय: तब होता है जब हिम का पिघलना आरंभ होता है। (पृ. 50)
7‘बादल फटना’ और ‘आकस्मिक बाढ़’ का आपस में क्या संबंध है?
उत्तर देखिए
बादल फटना अचानक प्रचंड तूफ़ान सहित वर्षा होना है। आकस्मिक बाढ़ स्थान विशेष में
अकस्मात बाढ़ आना है, और बहुधा ऐसा बादल फटने से ही होता है। अर्थात बादल फटना कारण
है और आकस्मिक बाढ़ परिणाम। (पृ. 50)
8एवरेस्ट के तीन नाम और उनके अर्थ लिखिए।
उत्तर देखिए
एवरेस्ट — विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर, ऊँचाई 8848 मीटर।
चोमोलुंगमा — तिब्बती लोगों का दिया नाम, अर्थ ‘जगत जननी’; वे पर्वत की उसी रूप में
पूजा करते हैं।
सागरमाथा — नेपाल निवासियों का दिया नाम, अर्थ ‘आकाश की देवी’। (पृ. 51)
9पठार की परिभाषा दीजिए और उसके दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर देखिए
पठार एक ऐसी स्थलाकृति है जो आस-पास की भूमि से उठी होती है और प्राय: इसकी सतह चपटी होती है। इसके कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं। ऊँचाई कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक
हो सकती है। दो उदाहरण — तिब्बत का पठार (विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा) और दक्षिणी पठार।
(पृ. 51)
10तिब्बत के पठार के बारे में तीन तथ्य लिखिए।
उत्तर देखिए
- यह विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार है।
- इसकी औसत ऊँचाई 4500 मीटर है, जिसके कारण इसे ‘विश्व की छत’ कहा जाता है।
- पूर्व से पश्चिम दिशा तक यह लगभग 2500 किलोमीटर लंबा है — अर्थात चंडीगढ़ से कन्याकुमारी तक की दूरी जितना। (पृ. 51)
11अधिकांश पठार कृषि के लिए कम अनुकूल क्यों होते हैं, और इसका अपवाद क्या है?
उत्तर देखिए
कई पठारों में चट्टानी मिट्टी पाई जाती है, जो उन्हें मैदानी मिट्टी की तुलना में कम उपजाऊ बनाती है — इसलिए पठार कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं। इसका अपवाद लावा पठार हैं,
जो ज्वालामुखी क्रियाओं से निर्मित होते हैं और उपजाऊ होते हैं, क्योंकि उनमें
समृद्ध काली मिट्टी पाई जाती है। (पृ. 52)
12पुस्तक में दिए गए चार जल प्रपातों के नाम उनकी नदियों और स्थानों सहित लिखिए।
उत्तर देखिए
| जल प्रपात | नदी | स्थान |
|---|---|---|
| विक्टोरिया | जम्बेजी | अफ्रीका |
| हुंडरू | सुवर्ण रेखा | छोटा नागपुर पठार |
| जोग | शरावती | पश्चिमी घाट |
| नहकालीकाई | — | चेरापूंजी (मेघालय), 340 मीटर |
(पृ. 52)
13मैदान की परिभाषा दीजिए।
उत्तर देखिए
मैदान ऐसी स्थलाकृति होती है जिसका विस्तृत सपाट अथवा हल्का तरंगित धरातल होता है। उसमें कोई ऊँची पहाड़ियाँ अथवा गहरी घाटियाँ नहीं पाई जातीं। सामान्यत: मैदान की ऊँचाई समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं होती। (पृ. 53)
14गंगा के मैदान में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती हैं?
उत्तर देखिए
खाद्य फसलें — चावल, गेहूँ, मक्का, जौ और मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी)।
रेशेदार फसलें — कपास, जूट और सन। (पृ. 55)
15मैदान में नदी में नौका-संचालन सुगम क्यों होता है?
उत्तर देखिए
क्योंकि मैदान में हल्की ढलान होती है। इससे बहुत-सी आर्थिक गतिविधियों को भी सहायता
मिलती है। पहले लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए नदी मार्ग का ही व्यापक रूप से प्रयोग करते थे, और आज भी गंगा के किनारे ऐसे स्थान हैं जहाँ लोग नौकाओं का ही प्रयोग करते हैं। (पृ. 55)
16मरुस्थल के प्रकार उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर देखिए
गर्म मरुस्थल — अफ्रीका का सहारा और भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में स्थित
थार। ठंडा मरुस्थल — एशिया का गोबी। इसके अतिरिक्त कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिक महाद्वीप को भी मरुस्थल मानते हैं। (पृ. 56)
17‘अनुकूलन’ और ‘लचीलापन’ में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
अनुकूलन का अर्थ है स्थिति के अनुसार स्वयं को ढाल लेना। लचीलापन (रेजिलियंस) का
अर्थ है चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने अथवा उनके अनुसार ढलने की क्षमता। पुस्तक
दोनों को एक ही वाक्य में जोड़ती है — मानव ने सभी स्थलाकृतियों में अपने घर बनाए हैं, और यही
हमारे अनुकूलन और लचीलेपन का साक्षी है। (पृ. 56)
18तमिल संगम की पाँच तिणै क्या दर्शाती हैं?
उत्तर देखिए
ये पाँच दृश्यभूमियाँ हैं, जो कुछ विशिष्ट देवताओं, जीवन-शैलियों, मनोदशाओं अथवा भावनाओं से
जुड़ी हैं। ये विविधता वाले प्रदेशों और उनकी विशेषताओं के प्रति गहन जागरूकता दिखाती हैं
और हमारे तथा पर्यावरण के बीच गहन संबंध को दर्शाती हैं। (पृ. 57)
(ध्यान रहे — पुस्तक स्वयं कहती है कि तिणै का विवरण याद रखने की आवश्यकता नहीं है।)
खंड ग — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)
1मैदान किस प्रकार निर्मित होते हैं? पूरी प्रक्रिया क्रम से लिखिए।
उत्तर देखिए
मैदान पर्वत शृंखलाओं से निकलने वाली नदियों की बाढ़ से निर्मित समतल भूमि हैं। इसकी
प्रक्रिया इस प्रकार है —
- पर्वत शृंखलाओं से नदियाँ निकलती हैं और उनकी बाढ़ से समतल भूमि बनती है।
- नदियाँ रेत, चट्टानों के कणों और गाद को एकत्र करती हैं, जिन्हें तलछट कहा जाता है।
- नदियाँ इन तलछटों को अपने साथ बहाकर समतल भूमि में लाकर जमा कर देती हैं।
- इससे मिट्टी उपजाऊ बन जाती है।
- फलस्वरूप ये मैदान सभी प्रकार की फसलों को उपजाने के लिए उपयुक्त हो जाते हैं, और इस प्रकार के भूभागों में लोगों का मुख्य आर्थिक व्यवसाय कृषि होता है।
इसके अतिरिक्त मैदान विविध प्रकार की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का भी भरण-पोषण करते हैं।
(पृ. 53)
2पर्वतीय जीवन की चुनौतियाँ और अवसर लिखिए।
उत्तर देखिए
अवसर
- पर्यटन पर्वतीय लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है; स्वच्छ हवा और मनोरम प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
- साहसिक खेल — स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण और पैरा ग्लाइडिंग।
- अनेक शताब्दियों से लोग पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा के लिए पर्वतों पर जाते रहे हैं।
- घाटियों में कृषि और ढलानों पर वेदिका कृषि; अनेक क्षेत्रों में पशुपालन।
चुनौतियाँ
- प्राकृतिक — आकस्मिक बाढ़, भूस्खलन, हिमस्खलन (एवलांश), भारी हिमपात, बादल फटना और ठंडा मौसम।
- मानव-निर्मित — पर्यटकों का अनियंत्रित रूप से आ जाना, जिससे पर्वतों के पर्यावरण पर दबाव पड़ता है और सही संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है।
- भूभाग ऊबड़-खाबड़ होने से कृषि केवल कुछ घाटियों तक सीमित रह जाती है।
(पृ. 49–50)
3पठार का महत्व समझाइए — खनिज, कृषि और जल प्रपात के संदर्भ में।
उत्तर देखिए
खनिज पर्वतों की तरह पठारों में खनिजों का प्रचुर मात्रा में जमाव देखने को मिलता
है, इसलिए इन्हें ‘खनिजों का भंडार-गृह’ भी कहा जाता है। परिणामस्वरूप खनन पठारों की मुख्य गतिविधि है और विश्व की सबसे बड़ी खानें पठारों में पाई जाती हैं। पूर्वी अफ्रीका का पठार सोने और हीरे के लिए तथा छोटा नागपुर का पठार लौह, कोयला और मैंगनीज के लिए
प्रसिद्ध है।
कृषि कई पठारों में चट्टानी मिट्टी पाई जाती है, जो उन्हें मैदानी मिट्टी की तुलना
में कम उपजाऊ बनाती है; इसलिए पठार कृषि के लिए कम अनुकूल होते हैं। किंतु ज्वालामुखी क्रियाओं से निर्मित लावा पठार उपजाऊ होते हैं, क्योंकि उनमें समृद्ध काली मिट्टी पाई
जाती है।
जल प्रपात पठारों में अनेक आकर्षक जल प्रपात होते हैं — जम्बेजी नदी पर विक्टोरिया,
सुवर्ण रेखा नदी पर हुंडरू, शरावती नदी पर जोग, और चेरापूंजी (मेघालय) के पठार में नहकालीकाई, जो 340 मीटर की ऊँचाई से गिरता है।
(पृ. 51–52)
4गंगा के मैदान में सिंचाई से क्या लाभ हुआ और क्या समस्याएँ उत्पन्न हुईं?
उत्तर देखिए
परंपरागत कृषि मुख्यत: वर्षा पर निर्भर होती थी, अर्थात वर्षा जल से ही फसलों को जल मिलता
था। हाल के दशकों में नहरों के जाल (नेटवर्क) द्वारा और भूमिगत जल को पंप से निकालकर खेतों की सिंचाई करने में वृद्धि हुई है।
लाभ सिंचाई से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है।
समस्याएँ
- भूमिगत जलस्तर में गिरावट आई है।
- इससे इस क्षेत्र में कृषि के भविष्य को लेकर चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है।
- गंगा के मैदानी भागों को प्रभावित करने वाली अन्य समस्याएँ हैं — बढ़ती हुई जनसंख्या और प्रदूषण।
यह इस बात का उदाहरण है कि हर अवसर अपने साथ एक चुनौती भी लाता है — जो अध्याय का
केंद्रीय विचार है। (पृ. 55)
5“प्रत्येक स्थलरूप, चुनौतियों के साथ-साथ अवसर भी प्रस्तुत करता है।” — इस कथन को दो
उदाहरणों से समझाइए।
उत्तर देखिए
यह पुस्तक के अपने सार का तीसरा बिंदु है (पृ. 57)। दो स्पष्ट उदाहरण —
1. पर्वतों पर पर्यटन पर्यटन पर्वतीय लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन है और
स्वच्छ हवा तथा मनोरम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। किंतु बहुत सारे पर्यटकों के
एक साथ आने से पर्वतों के पर्यावरण पर दबाव पड़ता है और सही संतुलन बनाए रखना कठिन हो
जाता है।
2. मैदानों में सिंचाई नहरों और पंपों से सिंचाई बढ़ने से कृषि उत्पादन में वृद्धि
हुई। किंतु इससे भूमिगत जलस्तर में गिरावट आई है, जिससे कृषि का भविष्य चुनौतीपूर्ण
हो गया है।
दोनों में ढाँचा एक ही है — वही चीज़ जो लाभ देती है, वही समस्या भी बनाती है। (पृ. 49, 55)
6अध्याय में भारतीय संस्कृति और स्थलरूपों के संबंध के कौन-से उदाहरण दिए गए हैं?
उत्तर देखिए
पुस्तक के सार का दूसरा बिंदु कहता है कि ये स्थलरूप विश्व की संस्कृति के अभिन्न भाग हैं; विशेष रूप से भारतीय संस्कृति विविध प्रकार से उन्हें मनाती रही है। अध्याय में इसके उदाहरण —
- अथर्ववेद का ‘भूमि सूक्त’ (पृ. 41), जो पृथ्वी को माता कहता है और उसकी ऊँचाइयों, ढलानों तथा समतल भूमि की स्तुति करता है।
- कालिदास का ‘कुमारसंभव’ (पृ. 46), जिसका आरंभ हिमालय की स्तुति से होता है और जो हिमालय को ‘पर्वतों का राजा’ तथा ‘पृथ्वी को नापने का मापदंड’ कहता है।
- पर्वतों की पवित्रता (पृ. 51) — एवरेस्ट को तिब्बती ‘चोमोलुंगमा’ (जगत जननी) कहकर पूजते हैं; कैलाश पर्वत को हिंदू दर्शन, बौद्ध मत, जैन मत और बॉन के अनुयायी पवित्र मानते हैं।
- नदियों का सांस्कृतिक महत्व (पृ. 55) — नदी के स्रोत और संगम स्थल को पवित्र माना जाता है और वहाँ त्योहार, समारोह और धार्मिक कृत्य किए जाते हैं।
- थार मरुस्थल की सांस्कृतिक धरोहर (पृ. 56) — लोक गीत और किंवदंतियाँ या दंत कथाएँ।
- तमिल संगम की पाँच तिणै (पृ. 57), जो दृश्यभूमि और मानव व्यवसाय के गहरे संबंध को दर्शाती हैं।
7छोटा नागपुर से प्रयागराज और अल्मोड़ा की यात्रा में आने वाले तीन स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
(यह अभ्यास-प्रश्न 2 है)
उत्तर देखिए
| पड़ाव | स्थलरूप | वर्णन |
|---|---|---|
| छोटा नागपुर (झारखंड) | पठार | आस-पास की भूमि से उठा हुआ, सतह प्राय: चपटी। यहाँ लौह, कोयला और मैंगनीज के प्रचुर भंडार हैं और खनन मुख्य गतिविधि है। यहीं सुवर्ण रेखा नदी पर हुंडरू जल प्रपात है। |
| प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) | मैदान | गंगा का मैदान — विस्तृत सपाट धरातल, समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं। नदियों के तलछट से मिट्टी उपजाऊ; मुख्य व्यवसाय कृषि। नदियों का संगम स्थल पवित्र माना जाता है। |
| अल्मोड़ा (उत्तराखंड) | पर्वत | हिमालय का भाग — चौड़ा आधार, खड़ी ढलान, सँकरे शिखर। ढलानों पर पर्वतीय वन और वेदिका कृषि; पर्यटन आय का साधन; साथ ही भूस्खलन और भारी हिमपात जैसी चुनौतियाँ। |
(पृ. 42, 51–53, 49)
खंड घ — मानचित्र एवं क्रियाकलाप
1भारत के रेखा-मानचित्र पर अंकित कीजिए
उत्तर देखिए
हिमालय, अरावली शृंखला, दक्कन का पठार, छोटा नागपुर का पठार, थार मरुस्थल, गंगा का मैदान।
2विश्व के रेखा-मानचित्र पर अंकित कीजिए
उत्तर देखिए
हिमालय, आल्प्स, एंडीज, तिब्बत का पठार, सहारा मरुस्थल, गोबी मरुस्थल।
3चित्र 3.8 (पृ. 53) में रंगों के कोड का प्रयोग कीजिए और तीन उदाहरण पहचानिए —
तिब्बत का पठार, रॉकी शृंखला, नील नदी का मैदान।
उत्तर देखिए
(पुस्तक स्वयं कहती है कि मानचित्र में दिए नाम स्मरण करने की आवश्यकता नहीं है — इसलिए इस क्रियाकलाप में केवल रंग-कोड पहचनवाइए, नाम मत रटवाइए।)
4तीन स्थलरूपों की तुलना-तालिका अपनी नोटबुक में बनाइए —
परिभाषा · उदाहरण · मुख्य व्यवसाय · एक चुनौती।
5अपने कस्बे/गाँव/नगर का स्थलरूप पहचानिए और अध्याय में बताई गई कौन-सी विशेषताएँ आप
अपने आस-पास देखते हैं, लिखिए। (अभ्यास-प्रश्न 1)
6भारत के कुछ प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों की सूची बनाइए और लिखिए कि वे किस स्थलरूप के अंतर्गत
आते हैं। (अभ्यास-प्रश्न 3)
उत्तर देखिए
(संकेत: अध्याय ने तीर्थयात्रा को पर्वतों से जोड़ा है — पृ. 49 — और नदी-संगम को मैदानों से — पृ. 55।)
पुस्तक के अपने अभ्यास-प्रश्न 4 और 5
! पाठ्यपुस्तक में इस अध्याय की कोई उत्तर-कुंजी नहीं छपी है। नीचे दिए उत्तर पुस्तक के पाठ से निकाले गए हैं, NCERT द्वारा छापे हुए नहीं। विद्यार्थी को इन्हें “पुस्तक की उत्तर-कुंजी” कहकर मत दीजिए।
प्रश्न 4 — सही या गलत बताइए
| # | कथन | उत्तर | आधार |
|---|---|---|---|
| 1 | हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत शृंखला है। | गलत | हिमालय नवीन तो है, पर उसकी चोटियाँ नुकीली हैं (पृ. 46) |
| 2 | पठार प्राय: एक ओर से उठे हुए होते हैं। | गलत | पठार आस-पास की भूमि से उठा होता है; कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं (पृ. 51) |
| 3 | पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं। | गलत | पहाड़ी कम ऊँची, कम खड़ी चढ़ाई और गोल शीर्ष वाली होती है (पृ. 43) |
| 4 | भारत में पर्वत, पठार और नदियों में एक ही प्रकार के वनस्पति और प्राणी जगत पाए जाते हैं। | गलत | प्रत्येक स्थलरूप में विभिन्न प्रकार की जलवायु और अलग-अलग पेड़-पौधे तथा जीव-जंतु होते हैं (पृ. 42) |
| 5 | गंगा, यमुना की सहायक नदी है। | गलत | उलटा है — यमुना गंगा की सहायक नदी है (पृ. 48) |
| 6 | मरुस्थल का वनस्पति जगत और प्राणी जगत विलक्षण होता है। | सही | पुस्तक का अपना वाक्य (पृ. 56) |
| 7 | हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है। | सही | ग्रीष्म में कम तुंगता पर हिम पिघलकर नदियों में पहुँचती है (पृ. 42–43) |
| 8 | मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र किए गए तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं। | सही | तलछट जमा होकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं (पृ. 53) |
| 9 | सभी मरुस्थल गर्म होते हैं। | गलत | गोबी मरुस्थल ठंडा है (पृ. 56) |
कथन 2 पर कक्षा में सबसे अधिक बहस होगी। परिभाषा बोर्ड पर लिखकर बच्चों से ही निर्णय करवाइए — अपने अधिकार से मत बताइए।
प्रश्न 5 — शब्दों के जोड़े बनाइए
| स्तंभ 1 | ⟶ | स्तंभ 2 | आधार |
|---|---|---|---|
| एवरेस्ट गिरिशृंग | ⟶ | पर्वतारोहण | बछेंद्री पाल व अरुणिमा सिन्हा का एवरेस्ट आरोहण (पृ. 49) |
| राफ्टिंग | ⟶ | नदी | राफ्टिंग नदी में होती है |
| ऊँट | ⟶ | मरुस्थल | थार मरुस्थल (पृ. 56) |
| पठार | ⟶ | विश्व की छत | तिब्बत का पठार = ‘विश्व की छत’ (पृ. 51) |
| गंगा का मैदान | ⟶ | धान के खेत | गंगा के मैदान में चावल उगाया जाता है (पृ. 55) |
| जलमार्ग | ⟶ | गंगा | गंगा में नौका-परिवहन (पृ. 55–56) |
| किलिमंजारो गिरिशृंग | ⟶ | अफ्रीका | पूर्वी अफ्रीका का पृथक पर्वत (पृ. 45) |
| यमुना | ⟶ | सहायक नदी | यमुना गंगा की सहायक नदी (पृ. 48) |
अंक-विभाजन का सुझाव (25 अंक की इकाई परीक्षा)
| खंड | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| क — अति लघु उत्तरीय | 5 प्रश्न × 1 अंक | 5 |
| ख — लघु उत्तरीय | 3 प्रश्न × 3 अंक | 9 |
| ग — दीर्घ उत्तरीय | 1 प्रश्न × 5 अंक | 5 |
| घ — सही/गलत | 3 कथन × 1 अंक | 3 |
| ङ — जोड़े बनाइए | 3 युग्म × 1 अंक | 3 |
| कुल | 25 |
दीर्घ उत्तरीय के लिए सुझाव: खंड ग का प्रश्न 1 (मैदान कैसे बनते हैं) या प्रश्न 5 (चुनौतियाँ और अवसर) लीजिए। पहला कारण-श्रृंखला की जाँच करता है, दूसरा अध्याय के केंद्रीय विचार की — और सामाजिक विज्ञान में अंक इन्हीं दो पर मिलते हैं।