कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · मध्य स्तर (कक्षा 6–8)
PARAKH — Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NCERT की एक स्वतंत्र संघटक इकाई है, जो 8 फरवरी 2023 की अधिसूचना से स्थापित हुई। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 4.4.1 के अंतर्गत विद्यार्थी-मूल्यांकन के मानक और दिशानिर्देश तय करती है।
इस प्रश्न बैंक की अलग बात क्या है
05-Question-Bank.md याद रखने की जाँच करता है — परिभाषाएँ, नाम, आँकड़े। वह बोर्ड-शैली का है
और आवश्यक है।
यह फ़ाइल वह नहीं करती। यहाँ हर प्रश्न विद्यार्थी को एक नई स्थिति देता है और पूछता है कि अध्याय का ढाँचा वहाँ लगाकर दिखाओ।
| यहाँ नहीं मिलेगा | यहाँ मिलेगा |
|---|---|
| “सरकार के तीन अंग लिखिए।” | एक घटना देकर — “इसमें कौन-सा काम किस अंग का है?” |
| “तीन स्तर कौन-से हैं?” | एक समस्या देकर — “यह किस स्तर पर हल होगी और क्यों?” |
| “‘शासन’ की परिभाषा दीजिए।” | एक स्थिति देकर — “यहाँ शासन कहाँ हो रहा है और सरकार कहाँ?” |
मूल्यांकन का नियम: जिस प्रश्न का उत्तर पुस्तक की किसी एक पंक्ति से सीधे उठाया जा सके, वह योग्यता-आधारित प्रश्न नहीं है।
जाँची जा रही योग्यताएँ
| कोड | योग्यता |
|---|---|
| यो-1 | अंग पहचानना — किसी घटना में यह देखना कि कौन-सा काम किस अंग का है |
| यो-2 | स्तर चुनना — समस्या के आकार के अनुसार सही स्तर तय करना |
| यो-3 | अंग ↔ स्तर अलग रखना — दोनों को गड्डमड्ड न करना, और दोनों को एक साथ लगाना |
| यो-4 | संतुलन का तर्क — यह समझना कि निगरानी और संतुलन क्यों आवश्यक हैं |
| यो-5 | लोकतंत्र को अपने अनुभव में देखना — कक्षा, विद्यालय और मोहल्ले में |
खंड क — प्रकरण-आधारित प्रश्न
प्रकरण 1 — एक नई घटना
यो-1 · कुल 10 अंक
एक शहर में सड़क दुर्घटनाएँ बहुत बढ़ गईं। तब यह हुआ —
- शहर के लोगों ने माँग की कि रात में तेज़ गति से चलने वाले वाहनों पर रोक लगे।
- राज्य की विधान सभा ने चर्चा के बाद एक नया नियम पारित किया — रात 10 बजे के बाद उस सड़क पर गति-सीमा आधी होगी।
- यातायात पुलिस ने उस सड़क पर कैमरे लगाए और नियम तोड़ने वालों के चालान काटे।
- एक व्यक्ति ने कहा कि उसका चालान ग़लत कटा है; मामला न्यायालय गया, और न्यायालय ने सुनकर निर्णय दिया।
1.1★ऊपर की चारों घटनाओं के सामने लिखिए कि वह किस अंग का काम है — विधायिका,
कार्यपालिका या न्यायपालिका। (पहली घटना के लिए भी सोचिए।) 4 अंक
उत्तर देखिए
प्रत्येक सही मिलान पर 1 अंक:
- लोगों की माँग → किसी अंग का काम नहीं — यह नागरिकों की भागीदारी है। (★जो विद्यार्थी यह पहचान ले, उसे पूरा अंक; जो इसे ‘विधायिका’ कहे, उसे आधा।)
- विधान सभा का नियम पारित करना → विधायिका
- यातायात पुलिस का चालान काटना → कार्यपालिका
- न्यायालय का निर्णय देना → न्यायपालिका
1.2पुस्तक ने ठीक इसी ढाँचे का एक और उदाहरण दिया है। वह कौन-सा है, और उसमें तीनों अंगों ने क्या-क्या किया? 3 अंक
उत्तर देखिए
साइबर अपराध का उदाहरण (पृ. 153):
- विधायिका — अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए;
- कार्यपालिका — साइबर पुलिस ने अपराधियों को गिरफ़्तार किया;
- न्यायपालिका — न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराया, आर्थिक दंड और जेल की सजा।
1.3★मान लीजिए कुछ समय बाद यह पाया गया कि यह नियम काम नहीं कर रहा और उसे बदलना है।
यह काम कौन कर सकता है, और पुस्तक ने विधायिका के लिए कौन-सी तीन क्रियाएँ गिनाई हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
- यह काम विधायिका कर सकती है। (1)
- तीन क्रियाएँ: कानून बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना। (2)
- ★अतिरिक्त मान्यता: जो जोड़े कि पुस्तक ने यह भी कहा है — “जो नियम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लिए बन गए — ऐसा तात्पर्य कदापि नहीं है।”
प्रकरण 2 — चार समस्याएँ
यो-2 · कुल 10 अंक
नीचे चार स्थितियाँ हैं —
(क) मोहल्ले की एक गली में स्ट्रीट लाइट कई दिनों से बंद है। (ख) पूरे राज्य के सरकारी विद्यालयों में एक नई पाठ्यपुस्तक लागू करनी है। (ग) एक पड़ोसी देश के साथ नया व्यापार समझौता करना है। (घ) एक ज़िले में तीन दिन से लगातार वर्षा हो रही है और कुछ मोहल्लों में पानी भर गया है।
2.1हर स्थिति के सामने सबसे उपयुक्त स्तर लिखिए — स्थानीय, राज्य या केंद्र। 4 अंक
उत्तर देखिए
प्रत्येक पर 1 अंक:
| स्थिति | स्तर |
|---|---|
| (क) स्ट्रीट लाइट | स्थानीय |
| (ख) राज्य के विद्यालयों की पाठ्यपुस्तक | राज्य |
| (ग) पड़ोसी देश से व्यापार समझौता | केंद्र (विदेशी मामले और अंतर्राष्ट्रीय संबंध) |
| (घ) एक ज़िले के कुछ मोहल्लों में जलभराव | स्थानीय (और आवश्यकता पड़ने पर राज्य) |
2.2★स्थिति (घ) में यदि वर्षा दो दिन और चलती रही और पूरा ज़िला तथा आस-पास के कई ज़िले डूब गए 3 अंक
उत्तर देखिए
तो क्या स्तर बदलेगा? कारण सहित लिखिए।
- हाँ, स्तर बदलेगा। (1)
- यदि अनेक नगर और गाँव प्रभावित हों तो राज्य सरकार बचाव दल भेजती है; और यदि विशाल क्षेत्र प्रभावित हो तो केंद्र सरकार राहत सामग्री और सेना भेजती है। (2)
2.3★पुस्तक की बाढ़ वाली और बल्ब वाली — दोनों उपमाओं में एक ही सिद्धांत है।
वह सिद्धांत अपने शब्दों में एक वाक्य में लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
अपेक्षित भाव:
“ऊपर का स्तर तभी आता है जब नीचे का स्तर समस्या को सँभाल न सके।”
★जो विद्यार्थी यह जोड़े कि पुस्तक कहती है “प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है” — उसे पूरे अंक।
प्रकरण 3 — विद्यालय की खेल-टीम
यो-3, यो-4 · कुल 10 अंक
एक विद्यालय की खेल-टीम में यह व्यवस्था है —
- खेल-समिति टीम के नियम बनाती है — अभ्यास का समय, अनुपस्थिति पर क्या होगा, आदि।
- कप्तान और खेल-शिक्षक उन नियमों को लागू करते हैं।
- यदि किसी खिलाड़ी को लगे कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह प्रधानाचार्य के पास जा सकता है, जो सुनकर निर्णय देते हैं।
3.1★ऊपर की तीनों भूमिकाओं को सरकार के तीन अंगों से मिलाइए। 3 अंक
उत्तर देखिए
- खेल-समिति (नियम बनाना) → विधायिका
- कप्तान और खेल-शिक्षक (नियम लागू करना) → कार्यपालिका
- प्रधानाचार्य (शिकायत सुनकर निर्णय) → न्यायपालिका
3.2★★अब मान लीजिए कि खेल-शिक्षक ही तीनों काम करते हैं — नियम भी वही बनाते हैं, लागू भी
वही करते हैं, और शिकायत भी वही सुनते हैं। इससे क्या समस्याएँ हो सकती हैं? दो लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
कोई भी दो तर्कसंगत समस्याएँ, जैसे:
- कोई निगरानी नहीं बचेगी — यदि उनका ही निर्णय ग़लत हो, तो उसे कौन जाँचेगा?
- वे अपने ही निर्णय के विरुद्ध निष्पक्ष नहीं हो सकते।
- खिलाड़ी शिकायत करने से डरेंगे, क्योंकि सुनने वाला और दंड देने वाला एक ही है।
- नियम मनमाने ढंग से बदले जा सकते हैं।
★पुस्तक का वाक्य उद्धृत करने वाले को अतिरिक्त मान्यता: ”…यदि कोई अंग अपनी अपेक्षित भूमिका से परे जाकर कार्य कर रहा है, तो उसे नियंत्रित कर पुन: संतुलन स्थापित कर सकता है।”
3.3पुस्तक इस व्यवस्था को क्या नाम देती है, और उसका उद्देश्य क्या बताती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
- नाम: ‘शक्तियों का पृथक्करण’। (1)
- उद्देश्य: “पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना।” (2)
प्रकरण 4 — दो शब्द, दो चित्र
यो-3 · कुल 10 अंक
पुस्तक में दो चित्र हैं जो अलग-अलग बातें कहते हैं — चित्र 10.3 एक पहिया है। चित्र 10.4 एक पिरामिड है।
4.1★बताइए कि कौन-सा चित्र क्या दिखाता है, और दोनों में मूल अंतर क्या है। 4 अंक
उत्तर देखिए
- चित्र 10.3 — पहिया — सरकार के तीन अंग (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका); बीच में ‘शासन’। (2)
- चित्र 10.4 — पिरामिड — सरकार के तीन स्तर (स्थानीय, राज्य, केंद्र)। (1)
- मूल अंतर: अंग = कौन क्या करता है · स्तर = कौन कहाँ तक। (1)
4.2★★“तीनों अंग तीनों स्तरों पर होते हैं” — इस वाक्य को एक उदाहरण देकर समझाइए। 3 अंक
उत्तर देखिए
(संकेत: सोचिए कि न्यायपालिका केंद्र में क्या है और राज्य में क्या।)
अपेक्षित उदाहरण (कोई एक पर्याप्त):
- न्यायपालिका: केंद्र स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय, राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय।
- विधायिका: केंद्र स्तर पर लोकसभा और राज्य सभा, राज्य स्तर पर विधान सभा।
- कार्यपालिका: केंद्र में प्रधानमंत्री, राज्य में मुख्यमंत्री।
★जो विद्यार्थी तीनों उदाहरण दे — पूरे अंक और अतिरिक्त मान्यता।
4.3चित्र 10.3 में तीनों अंगों के बीच तीर दोनों दिशाओं में हैं। वे एक तरफ़ क्यों नहीं हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
- क्योंकि प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है — कोई एक अंग दूसरों से ऊपर नहीं है। (2)
- ★और न्यायपालिका का उदाहरण देने वाले को अतिरिक्त मान्यता — वह कार्यपालिका के निर्णय और विधायिका के कानून, दोनों को परख सकती है। (1)
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। (ख) दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। (ग) A सही है, R ग़लत है। (घ) A ग़लत है, R सही है।
हर प्रश्न में विकल्प के साथ एक पंक्ति का कारण भी लिखना है। केवल अक्षर लिखने पर आधे अंक।
1A: सरकार के तीनों अंगों को पृथक रखा जाता है।
R: तीनों अंग एक-दूसरे से पूरी तरह कटे हुए होते हैं और कभी साथ काम नहीं करते। 2 अंक
उत्तर देखिए
(ग) — A सही है, पर R ग़लत है — पुस्तक स्वयं कहती है कि तीनों “एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं।”
2A: राष्ट्रपति को औपचारिक प्रमुख कहा जाता है।
R: प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं। 2 अंक
उत्तर देखिए
(ख) — दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है — वह एक अलग तथ्य है। (★जो विद्यार्थी (क) चुने और यह तर्क दे कि दोनों एक ही व्यवस्था के दो पक्ष हैं — उसे भी पूरे अंक; उसका तर्क सही है।)
3A: पुस्तक में डॉ. अब्दुल कलाम का बॉक्स ‘औपचारिक’ वाली परिभाषा के तुरंत बाद रखा गया है।
R: डॉ. कलाम ने दिखाया कि सांकेतिक स्थिति में रहते हुए भी असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित
किया जा सकता है। 2 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है — यही उस बॉक्स को वहाँ रखने का उद्देश्य है।
4A: भारत में एक ‘जन प्रतिनिधि’ आधारित लोकतंत्र है।
R: सभी लोग एक साथ शासन नहीं कर सकते। 2 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है — पुस्तक स्वयं यही तर्क देती है।
5A: चित्र 10.5 की तालिका में स्थानीय सरकार का उल्लेख नहीं है।
R: भारत में स्थानीय सरकार नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। 2 अंक
उत्तर देखिए
(ग) — A सही है, पर R ग़लत है — स्थानीय सरकार भारत में है ही; पुस्तक कहती है कि वह उसे आगे के दो अध्यायों में लेगी।
खंड ग — पाठ और चित्र व्याख्या
1पुस्तक कहती है कि सभी प्रकार की नौकरियों में लोगों को नियोक्ता द्वारा बनाए गए
नियमों का पालन करना पड़ता है, “जबकि नियोक्ता को भी उन सभी नियमों का पालन करना पड़ता है जो
उन्होंने अपने अधीन काम करने वाले लोगों के लिए बनाए हैं।”
★यह वाक्य अध्याय के आगे किस विचार से जुड़ता है? समझाइए। 4 अंक
उत्तर देखिए
- यह वाक्य दिखाता है कि नियम बनाने वाला भी नियम से बँधा होता है। (2)
- यही विचार आगे ‘शक्तियों का पृथक्करण’ में लौटता है — जहाँ कोई अंग दूसरों से ऊपर नहीं है, और न्यायपालिका विधायिका के बनाए कानून तक की जाँच कर सकती है। (2)
2नीचे तीन वाक्य हैं। बताइए कि हर वाक्य किस अंग की बात कर रहा है, और आपने कैसे पहचाना। 4 अंक
- ”…नए कानून बनाती है और कभी-कभी पुराने कानूनों में संशोधन तथा वर्तमान कानून को निरस्त भी करती है।”
- ”…वह अंग है जो कानूनों को लागू करती है।”
- ”…इस बात की भी जाँच करती है कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं।”
उत्तर देखिए
| वाक्य | अंग | पहचान का आधार |
|---|---|---|
| “नए कानून बनाती है… निरस्त भी करती है” | विधायिका | बनाने और बदलने की क्रिया |
| “कानूनों को लागू करती है” | कार्यपालिका | लागू करने की क्रिया |
| ”…जाँच करती है कि… निर्णय ठीक है या नहीं” | न्यायपालिका | परखने और निर्णय की क्रिया |
3चित्र 10.5 की तालिका में ‘शिक्षा’ शब्द दो जगह आता है — संघ सरकार के कार्यों
में भी और राज्य सरकार के कार्यों में भी।
★इससे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? और पुस्तक ने उसी तालिका के बारे में कोष्ठक में क्या लिखा
है? 4 अंक
उत्तर देखिए
- निष्कर्ष: कुछ विषयों पर केंद्र और राज्य, दोनों काम करते हैं। (2)
- पुस्तक ने कोष्ठक में लिखा है — “यह विस्तृत सूची नहीं है”। (2)
! ‘समवर्ती सूची’ शब्द की अपेक्षा मत कीजिए — वह पुस्तक में नहीं है।
4पुस्तक कहती है — “लोकतंत्र इस प्रणाली की पूरी रूपरेखा है।”
‘पूरी रूपरेखा’ का क्या अर्थ है? ‘तीन अंग’ और ‘तीन स्तर’ का इससे क्या संबंध है? 3 अंक
उत्तर देखिए
- ‘पूरी रूपरेखा’ का अर्थ है कि लोकतंत्र कोई एक अंग या एक स्तर नहीं, बल्कि वह ढाँचा है जिसके भीतर ये सब काम करते हैं। (2)
- तीन अंग काम बाँटते हैं, तीन स्तर क्षेत्र बाँटते हैं — और दोनों लोकतंत्र के भीतर हैं, जो चयनित प्रतिनिधियों के माध्यम से काम करता है। (1)
खंड घ — मुक्त-उत्तर एवं अनुप्रयोग
इन प्रश्नों का कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। अंक उत्तर के लिए नहीं, कारण के लिए हैं।
1★पुस्तक पूछती है — “यदि शासन के तीनों अंगों की शक्तियाँ किसी एक ही समूह के
नियंत्रण में आ जाएँ, तो किस प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न होगी?”
अपने विद्यालय, खेल-मैदान या मोहल्ले से एक काल्पनिक उदाहरण लेकर उत्तर दीजिए। 5 अंक
उत्तर देखिए
मान्य उदाहरण: खेल का कप्तान जो नियम भी बनाए, खेले भी और अंपायरी भी करे; कक्षा का मॉनीटर जो नियम बनाए, दंड दे और शिकायत भी सुने; मोहल्ला समिति का एक ही व्यक्ति सब कुछ तय करे। ★पुस्तक का उद्देश्य-वाक्य उद्धृत करने वाले को पूरे अंक।
2★आपकी कक्षा को कोई एक निर्णय लेना है — जैसे कक्षा की दीवार पर क्या लगाया जाए।
(क) इसे प्रत्यक्ष लोकतंत्र से कैसे तय करेंगे?
(ख) और प्रतिनिधि लोकतंत्र से कैसे?
(ग) आपके विचार से इस काम के लिए कौन-सा तरीक़ा बेहतर है, और क्यों? 5 अंक
उत्तर देखिए
अपेक्षित: (क) पूरी कक्षा हाथ उठाकर या पर्ची से मतदान करे — प्रत्यक्ष। (ख) कक्षा एक प्रतिनिधि चुने, जो सबकी राय लेकर तय करे — प्रतिनिधि। (ग) कोई भी उत्तर मान्य है, यदि कारण दिया गया हो। ★सबसे अच्छे उत्तर वे हैं जो समूह के आकार की बात करें — पुस्तक का अपना तर्क भी यही है।
3★★पुस्तक ने पृष्ठ 151 पर लिखा था — “कानूनों और नियमों में नागरिक भी अपनी बात
रख सकते हैं। हम जानेंगे कि ऐसा किस प्रकार होता है।”
अध्याय पढ़ने के बाद बताइए — एक साधारण नागरिक ‘अपनी बात’ किन-किन तरीक़ों से रख सकता है?
कम से कम तीन तरीक़े लिखिए। 5 अंक
उत्तर देखिए
मान्य तरीक़े (कोई तीन):
- मतदान करके प्रतिनिधि चुनना (विधायक, सांसद);
- अपने प्रतिनिधि तक अपनी बात पहुँचाना;
- आवासीय कल्याण समिति या ग्राम-स्तर की बैठकों में भाग लेना (अध्याय 9 से);
- न्यायालय जाना, यदि कोई निर्णय अन्यायपूर्ण लगे;
- ★और सबसे अच्छा उत्तर वह है जो ‘आधारभूत लोकतंत्र’ की परिभाषा उद्धृत करे — “नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”
4(परियोजना — पुस्तक के अभ्यास प्रश्न 4 पर आधारित) कोविड महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के समय उठाए गए कदमों की सूची बनाइए। फिर दो तालिकाएँ बनाइए — एक में बताइए कि कौन-सा कदम किस स्तर का था, और दूसरी में कि किस अंग की भूमिका क्या थी। 5 अंक
! इस प्रश्न में वर्ष पर अंक मत दीजिए।
(पुस्तक “2019 की कोविड महामारी” कहती है; भारत का देशव्यापी लॉकडाउन 2020 में लगा था —
विवरण 10-Verification-Log.md में।)
अपेक्षित ढाँचा:
| स्तर | उदाहरण |
|---|---|
| स्थानीय | मोहल्ले में सफ़ाई और छिड़काव; कंटेनमेंट क्षेत्र; राशन वितरण |
| राज्य | अस्पताल और जाँच केंद्र; राज्य के भीतर आवागमन के नियम; विद्यालय बंद करना |
| केंद्र | देशव्यापी घोषणा; अंतर्राज्यीय आवागमन; टीका कार्यक्रम; राहत पैकेज |
| अंग | भूमिका |
|---|---|
| विधायिका | बजट और राहत से जुड़े प्रावधान पारित करना |
| कार्यपालिका | आदेश जारी करना और लागू कराना — पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन |
| न्यायपालिका | याचिकाओं पर सुनवाई और निर्देश |
★मूल्यांकन इस बात पर कीजिए कि विद्यार्थी ‘स्तर’ और ‘अंग’ को अलग-अलग पहचान सका या नहीं।
उत्तर एवं अंकन योजना
खंड क
प्रकरण 1
1.1 (4) — प्रत्येक सही मिलान पर 1 अंक:
- लोगों की माँग → किसी अंग का काम नहीं — यह नागरिकों की भागीदारी है। (★जो विद्यार्थी यह पहचान ले, उसे पूरा अंक; जो इसे ‘विधायिका’ कहे, उसे आधा।)
- विधान सभा का नियम पारित करना → विधायिका
- यातायात पुलिस का चालान काटना → कार्यपालिका
- न्यायालय का निर्णय देना → न्यायपालिका
1.2 (3) — साइबर अपराध का उदाहरण (पृ. 153):
- विधायिका — अनेक सरकारों ने नए कानून बनाए;
- कार्यपालिका — साइबर पुलिस ने अपराधियों को गिरफ़्तार किया;
- न्यायपालिका — न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराया, आर्थिक दंड और जेल की सजा।
1.3 (3)
- यह काम विधायिका कर सकती है। (1)
- तीन क्रियाएँ: कानून बनाना · संशोधन करना · निरस्त करना। (2)
- ★अतिरिक्त मान्यता: जो जोड़े कि पुस्तक ने यह भी कहा है — “जो नियम और कानून एक बार बन गए, वे सदा के लिए बन गए — ऐसा तात्पर्य कदापि नहीं है।”
प्रकरण 2
2.1 (4) — प्रत्येक पर 1 अंक:
| स्थिति | स्तर |
|---|---|
| (क) स्ट्रीट लाइट | स्थानीय |
| (ख) राज्य के विद्यालयों की पाठ्यपुस्तक | राज्य |
| (ग) पड़ोसी देश से व्यापार समझौता | केंद्र (विदेशी मामले और अंतर्राष्ट्रीय संबंध) |
| (घ) एक ज़िले के कुछ मोहल्लों में जलभराव | स्थानीय (और आवश्यकता पड़ने पर राज्य) |
2.2 (3)
- हाँ, स्तर बदलेगा। (1)
- यदि अनेक नगर और गाँव प्रभावित हों तो राज्य सरकार बचाव दल भेजती है; और यदि विशाल क्षेत्र प्रभावित हो तो केंद्र सरकार राहत सामग्री और सेना भेजती है। (2)
2.3 (3) — अपेक्षित भाव:
“ऊपर का स्तर तभी आता है जब नीचे का स्तर समस्या को सँभाल न सके।” ★जो विद्यार्थी यह जोड़े कि पुस्तक कहती है “प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है” — उसे पूरे अंक।
प्रकरण 3
3.1 (3)
- खेल-समिति (नियम बनाना) → विधायिका
- कप्तान और खेल-शिक्षक (नियम लागू करना) → कार्यपालिका
- प्रधानाचार्य (शिकायत सुनकर निर्णय) → न्यायपालिका
3.2 (4) — कोई भी दो तर्कसंगत समस्याएँ, जैसे:
- कोई निगरानी नहीं बचेगी — यदि उनका ही निर्णय ग़लत हो, तो उसे कौन जाँचेगा?
- वे अपने ही निर्णय के विरुद्ध निष्पक्ष नहीं हो सकते।
- खिलाड़ी शिकायत करने से डरेंगे, क्योंकि सुनने वाला और दंड देने वाला एक ही है।
- नियम मनमाने ढंग से बदले जा सकते हैं।
★पुस्तक का वाक्य उद्धृत करने वाले को अतिरिक्त मान्यता: ”…यदि कोई अंग अपनी अपेक्षित भूमिका से परे जाकर कार्य कर रहा है, तो उसे नियंत्रित कर पुन: संतुलन स्थापित कर सकता है।”
3.3 (3)
- नाम: ‘शक्तियों का पृथक्करण’। (1)
- उद्देश्य: “पूरी प्रणाली को नियंत्रित करना एवं संतुलन बनाए रखना।” (2)
प्रकरण 4
4.1 (4)
- चित्र 10.3 — पहिया — सरकार के तीन अंग (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका); बीच में ‘शासन’। (2)
- चित्र 10.4 — पिरामिड — सरकार के तीन स्तर (स्थानीय, राज्य, केंद्र)। (1)
- मूल अंतर: अंग = कौन क्या करता है · स्तर = कौन कहाँ तक। (1)
4.2 (3) — अपेक्षित उदाहरण (कोई एक पर्याप्त):
- न्यायपालिका: केंद्र स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय, राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय।
- विधायिका: केंद्र स्तर पर लोकसभा और राज्य सभा, राज्य स्तर पर विधान सभा।
- कार्यपालिका: केंद्र में प्रधानमंत्री, राज्य में मुख्यमंत्री।
★जो विद्यार्थी तीनों उदाहरण दे — पूरे अंक और अतिरिक्त मान्यता।
4.3 (3)
- क्योंकि प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है — कोई एक अंग दूसरों से ऊपर नहीं है। (2)
- ★और न्यायपालिका का उदाहरण देने वाले को अतिरिक्त मान्यता — वह कार्यपालिका के निर्णय और विधायिका के कानून, दोनों को परख सकती है। (1)
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
| # | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 1 | (ग) | A सही है, पर R ग़लत है — पुस्तक स्वयं कहती है कि तीनों “एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और कार्य भी एक साथ करते हैं।” |
| 2 | (ख) | दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है — वह एक अलग तथ्य है। (★जो विद्यार्थी (क) चुने और यह तर्क दे कि दोनों एक ही व्यवस्था के दो पक्ष हैं — उसे भी पूरे अंक; उसका तर्क सही है।) |
| 3 | (क) | दोनों सही, और R ही A का कारण है — यही उस बॉक्स को वहाँ रखने का उद्देश्य है। |
| 4 | (क) | दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है — पुस्तक स्वयं यही तर्क देती है। |
| 5 | (ग) | A सही है, पर R ग़लत है — स्थानीय सरकार भारत में है ही; पुस्तक कहती है कि वह उसे आगे के दो अध्यायों में लेगी। |
खंड ग
1. (4)
- यह वाक्य दिखाता है कि नियम बनाने वाला भी नियम से बँधा होता है। (2)
- यही विचार आगे ‘शक्तियों का पृथक्करण’ में लौटता है — जहाँ कोई अंग दूसरों से ऊपर नहीं है, और न्यायपालिका विधायिका के बनाए कानून तक की जाँच कर सकती है। (2)
2. (4)
| वाक्य | अंग | पहचान का आधार |
|---|---|---|
| “नए कानून बनाती है… निरस्त भी करती है” | विधायिका | बनाने और बदलने की क्रिया |
| “कानूनों को लागू करती है” | कार्यपालिका | लागू करने की क्रिया |
| ”…जाँच करती है कि… निर्णय ठीक है या नहीं” | न्यायपालिका | परखने और निर्णय की क्रिया |
3. (4)
- निष्कर्ष: कुछ विषयों पर केंद्र और राज्य, दोनों काम करते हैं। (2)
- पुस्तक ने कोष्ठक में लिखा है — “यह विस्तृत सूची नहीं है”। (2)
! ‘समवर्ती सूची’ शब्द की अपेक्षा मत कीजिए — वह पुस्तक में नहीं है।
4. (3)
- ‘पूरी रूपरेखा’ का अर्थ है कि लोकतंत्र कोई एक अंग या एक स्तर नहीं, बल्कि वह ढाँचा है जिसके भीतर ये सब काम करते हैं। (2)
- तीन अंग काम बाँटते हैं, तीन स्तर क्षेत्र बाँटते हैं — और दोनों लोकतंत्र के भीतर हैं, जो चयनित प्रतिनिधियों के माध्यम से काम करता है। (1)
खंड घ — रूब्रिक
इन चारों प्रश्नों में उत्तर की ‘दिशा’ पर अंक नहीं हैं।
| स्तर | अंक | पहचान |
|---|---|---|
| उत्कृष्ट | 5 | स्पष्ट उत्तर · दो या अधिक कारण · अध्याय से कम से कम एक संदर्भ · अपना उदाहरण |
| अच्छा | 4 | स्पष्ट उत्तर · दो कारण · अध्याय से जुड़ाव |
| संतोषजनक | 3 | उत्तर और एक कारण |
| आंशिक | 2 | केवल उत्तर, कारण नहीं |
| अपर्याप्त | 1 | विषय से हटकर |
प्रश्न-वार संकेत —
घ.1 — मान्य उदाहरण: खेल का कप्तान जो नियम भी बनाए, खेले भी और अंपायरी भी करे; कक्षा का मॉनीटर जो नियम बनाए, दंड दे और शिकायत भी सुने; मोहल्ला समिति का एक ही व्यक्ति सब कुछ तय करे। ★पुस्तक का उद्देश्य-वाक्य उद्धृत करने वाले को पूरे अंक।
घ.2 — अपेक्षित: (क) पूरी कक्षा हाथ उठाकर या पर्ची से मतदान करे — प्रत्यक्ष। (ख) कक्षा एक प्रतिनिधि चुने, जो सबकी राय लेकर तय करे — प्रतिनिधि। (ग) कोई भी उत्तर मान्य है, यदि कारण दिया गया हो। ★सबसे अच्छे उत्तर वे हैं जो समूह के आकार की बात करें — पुस्तक का अपना तर्क भी यही है।
घ.3 — मान्य तरीक़े (कोई तीन):
- मतदान करके प्रतिनिधि चुनना (विधायक, सांसद);
- अपने प्रतिनिधि तक अपनी बात पहुँचाना;
- आवासीय कल्याण समिति या ग्राम-स्तर की बैठकों में भाग लेना (अध्याय 9 से);
- न्यायालय जाना, यदि कोई निर्णय अन्यायपूर्ण लगे;
- ★और सबसे अच्छा उत्तर वह है जो ‘आधारभूत लोकतंत्र’ की परिभाषा उद्धृत करे — “नागरिक स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं।”
घ.4 — ! इस प्रश्न में वर्ष पर अंक मत दीजिए।
(पुस्तक “2019 की कोविड महामारी” कहती है; भारत का देशव्यापी लॉकडाउन 2020 में लगा था —
विवरण 10-Verification-Log.md में।)
अपेक्षित ढाँचा:
| स्तर | उदाहरण |
|---|---|
| स्थानीय | मोहल्ले में सफ़ाई और छिड़काव; कंटेनमेंट क्षेत्र; राशन वितरण |
| राज्य | अस्पताल और जाँच केंद्र; राज्य के भीतर आवागमन के नियम; विद्यालय बंद करना |
| केंद्र | देशव्यापी घोषणा; अंतर्राज्यीय आवागमन; टीका कार्यक्रम; राहत पैकेज |
| अंग | भूमिका |
|---|---|
| विधायिका | बजट और राहत से जुड़े प्रावधान पारित करना |
| कार्यपालिका | आदेश जारी करना और लागू कराना — पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन |
| न्यायपालिका | याचिकाओं पर सुनवाई और निर्देश |
★मूल्यांकन इस बात पर कीजिए कि विद्यार्थी ‘स्तर’ और ‘अंग’ को अलग-अलग पहचान सका या नहीं।
योग्यता-वार आवरण
| योग्यता | कहाँ जाँची गई | कुल अंक |
|---|---|---|
| यो-1 — अंग पहचानना | प्रकरण 1, खंड ग.2 | 14 |
| यो-2 — स्तर चुनना | प्रकरण 2 | 10 |
| यो-3 — अंग ↔ स्तर अलग रखना | प्रकरण 3.1, प्रकरण 4, खंड ग.3–4 | 21 |
| यो-4 — संतुलन का तर्क | प्रकरण 3.2–3.3, खंड ख.1, खंड ग.1, खंड घ.1 | 20 |
| यो-5 — अपने अनुभव में देखना | खंड घ.2–4 | 15 |
| खंड ख — शेष | अभिकथन एवं कारण 2–5 | 8 |
कुल = 88 अंक। पूरा प्रश्न बैंक एक साथ देने के लिए नहीं है। एक बार में एक प्रकरण + खंड ख + खंड घ का एक प्रश्न — यह पर्याप्त है।
शिक्षक हेतु दो चेतावनियाँ
1. ★★इस अध्याय का पूरा मूल्यांकन एक ही चीज़ पर टिका है — क्या विद्यार्थी ‘अंग’ और ‘स्तर’ को अलग रख पाता है। यदि वह तीनों अंग सही गिना दे पर किसी घटना में उन्हें पहचान न सके, तो उसने अध्याय नहीं समझा। प्रकरण 1 और प्रकरण 4 इसी की जाँच करते हैं — उन्हें छोड़िए मत।
2. खंड घ में तथ्यों से अधिक तर्क देखिए। घ.1 और घ.2 में कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। कारण जाँचिए, निष्कर्ष नहीं।