अध्याय 6पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

पाठ्यपुस्तक से आगे52 मिनटस्रोत जाँचे गए

पाठ्यपुस्तक से आगे — संवर्धन सामग्री (T1 · T2 · T3)

यह दस्तावेज़ पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं, विस्तार है। T1 — बोर्ड परीक्षा के लिए भी उपयोगी; कक्षा में बताई जा सकती है T2 — प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC प्रारंभिक, राज्य PCS, CUET, SSC, NDA/CDS) के लिए T3 — उन्नत स्तर (UPSC मुख्य परीक्षा, वैकल्पिक विषय, शोध-रुचि)

★हर गैर-स्पष्ट तथ्य वेब-सत्यापित है — तिथियाँ और आँकड़े अगस्त 2026 तक अद्यतन। स्रोत-चिह्न: ◆ = प्राथमिक स्रोत (संधि-पाठ, UN/UNEP/MNRE आधिकारिक दस्तावेज़) ◇ = द्वितीयक स्रोत (शोध-संस्थान, प्रामाणिक समाचार) · 【पाठ】 = NCERT पाठ्यपुस्तक पूरी स्रोत-सूची अंत में।

विषय-सूची

#खंडस्तर
1पाठ्यपुस्तक के आँकड़े — 2026 में कहाँ खड़े हैंT1
2वैश्विक पर्यावरण-कूटनीति की पूरी वंशावली (1972–2026)T1–T2
3★मॉन्ट्रियल न्यायाचार — दुनिया की सबसे सफल पर्यावरण-संधिT1–T2
4क्योटो से पेरिस तक — और वह मूलभूत बदलाव जो अध्याय नहीं बताताT1–T2
5★★COP30, बेलेम (नवंबर 2025) — नवीनतम स्थितिT1
6रियो के तीन जुड़वाँ अभिसमय — UNFCCC, CBD, UNCCDT2
7‘वैश्विक संपदा’ का कानूनी ढाँचा — चारों के लिए अलग-अलगT2–T3
8★★BBNJ ‘हाई सीज़ संधि’ — 17 जनवरी 2026 से लागूT1–T2
9अंटार्कटिका — संधि-व्यवस्था और भारत की उपस्थितिT2
10‘साझी संपदा की त्रासदी’ और उसका खंडन — एलिनॉर ऑस्ट्रोमT3
11★भारत का जलवायु-रिकॉर्ड 2026 में — NDC, 500 GW, हरित हाइड्रोजनT1–T2
12भारत के पर्यावरण-आंदोलन — चिपको से आगेT1–T2
13भारत का पर्यावरण-कानून और संस्थागत ढाँचाT2
14मूलवासी अधिकार — UNDRIP 2007 और भारत का वन अधिकार अधिनियमT1–T2
15संसाधनों की भू-राजनीति — तेल के बाद: दुर्लभ मृदा और लीथियमT2–T3
16जल-विवाद — भारत के भीतर और बाहरT2
17तीन प्रकरण-अध्ययनT1–T2
18संक्षिप्ताक्षर-कोश (50+)T1–T2
19अभ्यास प्रश्न (25)सभी
20स्रोत-सूची—

1 · पाठ्यपुस्तक के आँकड़े — 2026 में कहाँ खड़े हैं 【T1】

! शिक्षक के लिए: पाठ्यपुस्तक अपने लेखन-काल का सही चित्र देती है। बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही आँकड़ा लिखिए। नीचे दिया गया अद्यतन कक्षा-चर्चा और प्रतियोगी परीक्षा के लिए है।

विषयपाठ्यपुस्तक कहती है 【पाठ】आज (अगस्त 2026)टिप्पणी
पृथ्वी सम्मेलन1992, रियो; 170 देश✓ सही और अपरिवर्तितइससे तीन अभिसमय निकले — UNFCCC, CBD और (1994 में) UNCCD
क्योटो प्रोटोकॉल1997; भारत ने 2002 में हस्ताक्षर और अनुमोदन✓ सही। पर ★क्योटो का दूसरा प्रतिबद्धता-काल 2020 में समाप्त हो गया; अब मुख्य ढाँचा पेरिस समझौता (2015) हैखंड 4 देखिए
पेरिस समझौता“भारत ने 2 अक्तूबर 2016 को अनुमोदित किया”✓ सही — और ★अब तक 5 वैश्विक COP हो चुके हैं; नवीनतम COP30, बेलेम (नवंबर 2025) ◇खंड 5 देखिए
मॉन्ट्रियल न्यायाचार1987★★इसने ओज़ोन-क्षयकारी रसायनों का 98% (क्षमता के हिसाब से) चरणबद्ध रूप से समाप्त कर दिया; ओज़ोन परत में सुधार के पहले संकेत दिख चुके हैं ◆★यह विश्व की सबसे सफल पर्यावरण-संधि मानी जाती है — खंड 3 देखिए
समुद्री सतह (वैश्विक संपदा)नाम-मात्र उल्लेख★★BBNJ (‘हाई सीज़’) संधि 17 जनवरी 2026 को लागू हुई — राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से परे समुद्री जैव-विविधता की पहली संधि ◇खंड 8 — यह अध्याय का सबसे बड़ा अद्यतन है
भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन0.9 टन (2000); 1.6 टन (2030 अनुमान); विश्व औसत 3.8 टन★भारत का प्रति व्यक्ति CO₂ उत्सर्जन आज भी विश्व औसत के लगभग आधे के आसपास है — पाठ्यपुस्तक का तर्क आज भी खड़ा हैपर कुल उत्सर्जन में भारत तीसरे स्थान पर है — ! यह भेद कक्षा में ज़रूर बताइए
नवीकरणीय ऊर्जा“सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक भारत में चल रहा है”★★जुलाई 2025 में भारत ने अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल किया — लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले; अक्तूबर 2025 तक कुल क्षमता 505 GW पार, जिसमें गैर-जीवाश्म ~259 GW ◇खंड 11 देखिए
मूलवासी अधिकारUN परिभाषा 1982; वर्ल्ड काउंसिल 1975★★UNDRIP — 13 सितंबर 2007 को महासभा ने अपनाया (144 पक्ष में, 4 विरुद्ध, 11 अनुपस्थित) ◆; भारत में ★वन अधिकार अधिनियम, 2006खंड 14 देखिए
UN मानव विकास रिपोर्ट2016 के आँकड़ेसंख्याएँ बदली हैं, पर असमानता का ढाँचा वही — प्रवृत्ति सही हैपाठ्यपुस्तक का आँकड़ा परीक्षा में लिखिए

2 · वैश्विक पर्यावरण-कूटनीति की पूरी वंशावली 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक 1972 (क्लब ऑव रोम) → 1987 (बर्टलैंड) → 1992 (रियो) → 1997 (क्योटो) की कड़ी देती है। पूरी शृंखला यह है — इसे एक बार पढ़ लेने से प्रतियोगी परीक्षा के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।

वर्षपड़ावक्या हुआभारत
1968‘क्लब ऑव रोम’ की स्थापनाविद्वानों का समूह—
★1972‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ 【पाठ】“बढ़ती जनसंख्या के आलोक में प्राकृतिक संसाधनों के विनाश का अंदेशा”—
★★1972स्टॉकहोम सम्मेलन (UN Conference on the Human Environment)★पर्यावरण पर पहला वैश्विक सम्मेलन; इसी से UNEP का जन्म हुआ★इंदिरा गांधी एकमात्र विदेशी शासनाध्यक्ष थीं जिन्होंने संबोधन किया — प्रसिद्ध पंक्ति: “गरीबी सबसे बड़ा प्रदूषक है”
1979CLRTAP — सीमापार वायु-प्रदूषण अभिसमयअम्ल-वर्षा पर पहली संधि—
★1985वियना अभिसमय (ओज़ोन)ढाँचा-संधि—
★★1987मॉन्ट्रियल न्यायाचार 【पाठ】ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों पर बाध्यकारी कटौतीभारत पक्षकार
★1987बर्टलैंड रिपोर्ट — ‘अवर कॉमन फ्यूचर’ 【पाठ】★‘टिकाऊ विकास’ की सर्वमान्य परिभाषा (नीचे देखिए)—
★★1992पृथ्वी सम्मेलन, रियो — 170 देश 【पाठ】रियो घोषणापत्र · अजेंडा-21 · UNFCCC · CBD · वन-सिद्धांतभागीदार
1994UNCCD — मरुस्थलीकरण-रोधी अभिसमयरियो का तीसरा ‘बच्चा’भारत पक्षकार
★1997क्योटो प्रोटोकॉल 【पाठ】औद्योगिक देशों के लिए बाध्यकारी लक्ष्य★भारत ने 2002 में अनुमोदित किया
2002जोहानसबर्ग शिखर सम्मेलन (रियो+10)क्रियान्वयन पर—
2012रियो+20 — ‘द फ्यूचर वी वॉन्ट’SDGs की नींव—
★2015पेरिस समझौता (COP21)★★सभी देशों पर लागू, पर लक्ष्य स्व-निर्धारित (NDCs)★2 अक्तूबर 2016 को अनुमोदित 【पाठ】
2015सतत विकास लक्ष्य (SDGs) — 17 लक्ष्य, 2030 तकलक्ष्य 13 = जलवायु कार्रवाईभारत प्रतिबद्ध
2016किगाली संशोधन (मॉन्ट्रियल में)HFC की चरणबद्ध कमी★भारत ने सितंबर 2021 में अनुमोदित किया
2022कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव-विविधता ढाँचा (CBD COP15)★‘30×30’ लक्ष्य — 2030 तक 30% भूमि और समुद्र का संरक्षणभारत पक्षकार
★★2023BBNJ / ‘हाई सीज़ संधि’ अपनाई गईराष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से परे समुद्री जैव-विविधताखंड 8 देखिए
★★नवंबर 2025COP30, बेलेम (ब्राज़ील)‘बेलेम पैकेज’ — 29 निर्णय; 195 पक्षकार ◇खंड 5 देखिए
★★17 जनवरी 2026BBNJ संधि लागू हुई ◇★वैश्विक संपदा के इतिहास में मील का पत्थर! भारत ने अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू की है

2.1 ‘टिकाऊ विकास’ की मानक परिभाषा★★

पाठ्यपुस्तक ‘टिकाऊ विकास’ को “आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा कि पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे” कहती है। बर्टलैंड रिपोर्ट की मूल परिभाषा इससे थोड़ी अलग और अधिक शक्तिशाली है —

★★“ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की ज़रूरतें पूरी करे, बिना भावी पीढ़ियों की अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकने की क्षमता से समझौता किए।” (Our Common Future, 1987)

इसमें दो धारणाएँ अंतर्निहित हैं — ‘ज़रूरतें’ (विशेषकर गरीबों की, जिन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए) और ‘सीमाएँ’ (प्रौद्योगिकी और सामाजिक संगठन द्वारा पर्यावरण की क्षमता पर लगाई गई)।

★परीक्षा में इसे उद्धृत करना उत्तर को तुरंत ऊपर उठा देता है — विशेषकर ‘अंतर-पीढ़ीगत न्याय’ (intergenerational equity) का पद प्रयोग कीजिए। पाठ्यपुस्तक भी यही कहती है जब वह बाहरी अंतरिक्ष के बारे में लिखती है — “फायदे न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं और न आगे की पीढ़ियों के लिए।”

3 · मॉन्ट्रियल न्यायाचार — दुनिया की सबसे सफल पर्यावरण-संधि 【T1–T2】★

पाठ्यपुस्तक इसे केवल नाम-मात्र उल्लेख करती है। इसकी कहानी इस पूरे अध्याय का सबसे उत्साहजनक हिस्सा है — और कक्षा में इसे ज़रूर बताइए।

पहलूविवरण
कब16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर; 1 जनवरी 1989 को लागू (इसी कारण 16 सितंबर = विश्व ओज़ोन दिवस)
क्या करती हैCFC, हैलॉन और अन्य ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों का चरणबद्ध उन्मूलन
★★सफलता“मॉन्ट्रियल न्यायाचार ने क्षति पहुँचाने वाले रसायनों का 98% (क्षमता के हिसाब से) चरणबद्ध रूप से समाप्त कर दिया है और ओज़ोन परत में सुधार के पहले संकेत दिख रहे हैं।” ◆
★सार्वभौमिकता★★यह इतिहास की पहली संधि है जिसे सार्वभौम अनुसमर्थन मिला — संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य राज्य इसके पक्षकार हैं
★किगाली संशोधन (2016)HFC — “जो ओज़ोन का क्षय नहीं करतीं पर शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं” — की 80% से अधिक कटौती अगले 30 वर्षों में; 2050 तक 80 अरब मीट्रिक टन CO₂-समतुल्य उत्सर्जन बचने का अनुमान ◆
किगाली की स्थिति★1 नवंबर 2024 तक 160 पक्षकारों ने अनुसमर्थन किया ◆; भारत ने सितंबर 2021 में

★★कक्षा और उत्तर-लेखन के लिए यह तुलना बहुत कारगर है: “मॉन्ट्रियल न्यायाचार सफल क्यों हुआ और जलवायु-वार्ताएँ क्यों अटकीं?” तीन कारण —

  1. समस्या सीमित थी — कुछ ही रसायन, कुछ ही उद्योग।
  2. विकल्प उपलब्ध थे — CFC के स्थानापन्न रसायन तकनीकी रूप से तैयार थे।
  3. ★★‘बहुपक्षीय कोष’ बना — विकसित देशों ने विकासशील देशों को संक्रमण की लागत दी। जलवायु-परिवर्तन में तीनों नदारद हैं — यही पूरे अध्याय की कठिनाई है।

★और यह भी जोड़िए — पाठ्यपुस्तक कहती है कि “1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन परत में छेद की खोज एक आँख खोल देने वाली घटना है।” वह खोज 1985 में हुई, और केवल दो वर्ष बाद संधि बन गई — यह विश्व-राजनीति की असाधारण गति थी।

4 · क्योटो से पेरिस तक — और वह मूलभूत बदलाव 【T1–T2】

4.1 दोनों में सबसे बड़ा अंतर★★

कसौटीक्योटो प्रोटोकॉल (1997)पेरिस समझौता (2015)
किन पर लागू★केवल परिशिष्ट-I (विकसित) देशों पर बाध्यकारी लक्ष्य★सभी देशों पर लागू
लक्ष्य कौन तय करता है★संधि ऊपर से लक्ष्य देती है (top-down)★★हर देश अपना लक्ष्य स्वयं तय करता है — NDC (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान) (bottom-up)
तापमान-लक्ष्यस्पष्ट नहीं★वृद्धि को 2°C से “काफी नीचे” रखना, और 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास
अनुपालनकानूनी बाध्यता★लक्ष्य स्वैच्छिक, पर रिपोर्टिंग और समीक्षा बाध्यकारी
समीक्षा-चक्र—★हर पाँच वर्ष ‘वैश्विक स्टॉकटेक’ (Global Stocktake) — पहला 2023 (COP28) में हुआ
CBDR★कठोर विभाजन — परिशिष्ट-I बनाम शेष★★“CBDR-RC, राष्ट्रीय परिस्थितियों के आलोक में” — यानी विभाजन लचीला हो गया
स्थिति! दूसरा प्रतिबद्धता-काल 2020 में समाप्त✓ आज का मुख्य ढाँचा

★★यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है — और भारत के लिए इसका क्या अर्थ है: पाठ्यपुस्तक लिखती है कि “चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को क्योटो-प्रोटोकॉल की बाध्यताओं से अलग रखा गया है।” 【पाठ】 पेरिस में यह छूट समाप्त हो गई — अब भारत का भी अपना NDC है। पर ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत समाप्त नहीं हुआ — वह “राष्ट्रीय परिस्थितियों के आलोक में” के रूप में बना रहा, और वित्त तथा प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण की माँग आज भी विकासशील देशों का मुख्य मुद्दा है। यही COP30 में भी सबसे बड़ा विषय रहा।

4.2 क्योटो की तीन कमज़ोरियाँ(परीक्षा में आलोचना के लिए)ध्यान

  1. अमरीका ने कभी अनुसमर्थन नहीं किया।
  2. कनाडा 2011 में बाहर निकल गया।
  3. ! जिन देशों पर लक्ष्य थे, उनका वैश्विक उत्सर्जन में हिस्सा लगातार घटता गया — यानी संधि जिस हिस्से को नियंत्रित करती थी वह छोटा होता चला गया।

5 · COP30, बेलेम (नवंबर 2025) — नवीनतम स्थिति 【T1】★★

यह पाठ्यपुस्तक के बाद की सबसे महत्वपूर्ण घटना है और 2026–27 की परीक्षाओं में प्रासंगिक है। ◇

पहलूविवरण
कब और कहाँ★10–21 नवंबर 2025, बेलेम (ब्राज़ील) — अमेज़न के द्वार पर हुआ पहला COP
कौन195 पक्षकारों ने ‘बेलेम पैकेज’ अपनाया
कितने निर्णय★सर्वसम्मति से 29 निर्णय — न्यायसंगत संक्रमण (just transition), अनुकूलन-वित्त, व्यापार, जेंडर और प्रौद्योगिकी पर
मुख्य दस्तावेज़‘मुतिराओ’ पाठ (Mutirão — पुर्तगाली/स्वदेशी शब्द जिसका अर्थ है ‘साझा सामूहिक श्रम’) — इसमें शमन, वित्त और व्यापार-बाधाएँ एक साथ बाँधी गईं
★★वित्त पर उपलब्धि2035 तक अनुकूलन-वित्त (adaptation finance) तीन गुना करने की प्रतिबद्धता; और ‘बाकू से बेलेम रोडमैप’ — विकासशील देशों के लिए 2035 तक कम-से-कम 1.3 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष जुटाने का मार्ग
!! सबसे बड़ी नाकामी★80 से अधिक देशों के समर्थन के बावजूद जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने (phase-out) का औपचारिक ‘रोडमैप’ अंतिम पाठ में शामिल नहीं हो सका। ब्राज़ीली अध्यक्षता ने कहा कि वह जीवाश्म ईंधन और वन-कटाई के रोडमैप औपचारिक COP-प्रक्रिया से बाहर आगे बढ़ाएगी
अन्य30 से अधिक देशों ने ‘बेलेम स्वास्थ्य कार्य-योजना’ का समर्थन किया; प्रगति की रिपोर्टिंग अगले वैश्विक स्टॉकटेक (COP33, 2028) में

★★पाठ्यपुस्तक से जोड़िए — यह लगभग शब्दश: वही कहानी है: पाठ्यपुस्तक 1992 के बारे में लिखती है — “सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी… लेकिन इसके बाद भी आपसी अंतर और कठिनाइयाँ बनी रहीं।” और “समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा।” COP30 का जीवाश्म-ईंधन रोडमैप ठीक इसी वाक्य का 2025 वाला संस्करण है — सिद्धांत पर सहमति, अमल पर नहीं। यह तुलना उत्तर में लिखने पर बहुत प्रभावी होती है।

6 · रियो के तीन जुड़वाँ अभिसमय 【T2】

पाठ्यपुस्तक कहती है कि रियो में “जलवायु-परिवर्तन, जैव-विविधता और वानिकी के संबंध में कुछ नियमाचार निर्धारित हुए।” 【पाठ】 वे नियमाचार कौन-से थे — यह प्रतियोगी परीक्षाओं का पसंदीदा प्रश्न है।

अभिसमयविषयवर्षप्रमुख अद्यतन
★UNFCCCजलवायु-परिवर्तन1992→ क्योटो 1997 → पेरिस 2015 → COP30 बेलेम 2025
★CBD — जैव-विविधता अभिसमयजैव-विविधता1992→ कार्टाजेना न्यायाचार 2000 (जैव-सुरक्षा) → नागोया न्यायाचार 2010 (लाभ-साझाकरण) → ★कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ढाँचा 2022 — ‘30×30’ लक्ष्य
★UNCCD — मरुस्थलीकरण-रोधी अभिसमयमरुस्थलीकरण और भूमि-क्षरण1994 (रियो का ‘तीसरा बच्चा’)★भारत ने 2019 में COP14 की मेज़बानी की (नई दिल्ली); लक्ष्य — 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षरित भूमि की बहाली
वन-सिद्धांतवानिकी1992! बाध्यकारी संधि नहीं बन सकी — केवल ‘सिद्धांतों का गैर-बाध्यकारी कथन’

★वन-सिद्धांतों का बाध्यकारी संधि न बन पाना अपने-आप में एक महत्वपूर्ण तथ्य है — यह पाठ्यपुस्तक के उस बिंदु को सिद्ध करता है कि वनों पर उत्तर-दक्षिण मतभेद सबसे तीखा है (खंड — ‘क्या वन निर्जन होते हैं?’)।

7 · ‘वैश्विक संपदा’ का कानूनी ढाँचा 【T2–T3】

पाठ्यपुस्तक चार वैश्विक संपदाएँ गिनाती है 【पाठ】। हर एक का अपना अलग कानूनी ढाँचा है —

वैश्विक संपदामुख्य कानूनी ढाँचाकानूनी सिद्धांत! कमज़ोरी
★पृथ्वी का वायुमंडलवियना अभिसमय 1985 · मॉन्ट्रियल न्यायाचार 1987 · UNFCCC 1992 · पेरिस 2015साझी चिंता (common concern of humankind)जलवायु-लक्ष्य स्वैच्छिक हैं
★अंटार्कटिकाअंटार्कटिका संधि 1959 · मैड्रिड न्यायाचार 1991★“शांति और विज्ञान को समर्पित प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्र”संप्रभुता-दावे ‘जमे हुए’ हैं, समाप्त नहीं
★समुद्री सतहUNCLOS 1982 (भाग XI) · ★★BBNJ संधि 2023 (लागू 17 जनवरी 2026)★★“मानवजाति की साझी विरासत” (common heritage of mankind) — गहरे समुद्री तल के लिएगहरे-समुद्री खनन पर विवाद जारी
★बाहरी अंतरिक्षबाह्य अंतरिक्ष संधि 1967 · चंद्रमा समझौता 19791967 — “सम्पूर्ण मानवजाति का क्षेत्र” (province of all mankind); 1979 — “साझी विरासत”! चंद्रमा समझौते के बहुत कम पक्षकार हैं; कोई बड़ी अंतरिक्ष-शक्ति उसमें नहीं

7.1 दो पदों का सूक्ष्म पर महत्वपूर्ण भेद(T3)★★

पदअर्थउदाहरण
“सम्पूर्ण मानवजाति का क्षेत्र” (province of all mankind)सबकी पहुँच है, कोई राष्ट्रीय संप्रभुता नहीं — पर लाभ के बँटवारे की बाध्यता नहींबाह्य अंतरिक्ष संधि 1967
★★“मानवजाति की साझी विरासत” (common heritage of mankind)+ लाभ का न्यायसंगत बँटवारा + भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षण + अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधनUNCLOS का गहरा समुद्री तल; चंद्रमा समझौता 1979

★★यहीं पाठ्यपुस्तक की वह पंक्ति फिट बैठती है 【पाठ】 — “बाहरी अंतरिक्ष में जो दोहन-कार्य हो रहे हैं उनके फायदे न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं और न आगे की पीढ़ियों के लिए।” — यह ठीक उस कानूनी अंतर की ओर इशारा है: 1967 की संधि में लाभ-बँटवारे का प्रावधान है ही नहीं।

8 · BBNJ ‘हाई सीज़ संधि’ — 17 जनवरी 2026 से लागू 【T1–T2】★★

यह इस अध्याय का सबसे बड़ा समकालीन अद्यतन है और सीधे ‘वैश्विक संपदा’ खंड से जुड़ता है। ◇

पहलूविवरण
पूरा नामराष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र से परे क्षेत्रों की समुद्री जैव-विविधता पर समझौता (Marine Biological Diversity of Areas Beyond National Jurisdiction)
कब अपनाई गई19 जून 2023; हस्ताक्षर के लिए सितंबर 2023 से खुली
★60वाँ अनुसमर्थन19 सितंबर 2025
★★कब लागू हुई17 जनवरी 2026
क्या शामिल है★तटीय देशों के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (200 समुद्री मील) से परे का समुद्र — यानी पृथ्वी की सतह का लगभग दो-तिहाई महासागर
मुख्य उद्देश्यखुले समुद्र में जैव-विविधता का संरक्षण और सतत उपयोग; समुद्री संरक्षित क्षेत्र बनाने की शक्ति; समुद्री आनुवंशिक संसाधनों के लाभ का बँटवारा; पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
! भारतभारत ने घरेलू ढाँचा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है; अनुमोदन अभी शेष है

★★यह क्यों महत्वपूर्ण है — कक्षा में यह वाक्य कहिए: “पाठ्यपुस्तक कहती है कि ‘वैश्विक संपदा की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।’ BBNJ संधि उस टेढ़ी खीर का ताज़ा और सफल उदाहरण है — 20 साल की वार्ता के बाद, चारों वैश्विक संपदाओं में से एक (समुद्री सतह) के लिए अब एक कानूनी ढाँचा बन गया है।”

9 · अंटार्कटिका — संधि-व्यवस्था और भारत की उपस्थिति 【T2】

9.1 अंटार्कटिका संधि (1959) — पाँच मुख्य प्रावधान★

#प्रावधान
1★अंटार्कटिका का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए — सैन्य ठिकाने, युद्धाभ्यास और हथियार-परीक्षण निषिद्ध
2★वैज्ञानिक अनुसंधान की स्वतंत्रता और वैज्ञानिक निष्कर्षों का आदान-प्रदान
3★★संप्रभुता-दावे ‘जमे’ (frozen) रहेंगे — संधि के रहते न कोई नया दावा किया जा सकता है, न पुराना बढ़ाया जा सकता है
4★परमाणु विस्फोट और रेडियोधर्मी कचरे का निपटान पूर्णत: निषिद्ध
5★निरीक्षण की व्यवस्था — कोई भी परामर्शदाता पक्ष किसी भी स्टेशन का निरीक्षण कर सकता है
  • हस्ताक्षर: 1 दिसंबर 1959; लागू 23 जून 1961; 12 मूल हस्ताक्षरकर्ता।
  • ★मैड्रिड न्यायाचार (1991) — जिसे पाठ्यपुस्तक ‘अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार’ कहती है 【पाठ】 — ने अंटार्कटिका को ★★“शांति और विज्ञान को समर्पित प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्र” घोषित किया और खनिज-संसाधन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया।

9.2 भारत और अंटार्कटिका — यह पाठ्यपुस्तक में नहीं है★

मील का पत्थरविवरण
1981भारत का पहला अंटार्कटिक अभियान
★1983भारत अंटार्कटिका संधि में शामिल और उसी वर्ष परामर्शदाता पक्ष (Consultative Party) का दर्ज़ा — यानी निर्णय-प्रक्रिया में मत का अधिकार
अनुसंधान केंद्र★‘दक्षिण गंगोत्री’ (1983, अब निष्क्रिय) · ‘मैत्री’ (1988) · ‘भारती’ (2012)
संस्थाराष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR), गोवा
★कानूनभारतीय अंटार्कटिक अधिनियम, 2022 — भारत का पहला घरेलू अंटार्कटिक कानून

★इसे कक्षा में ज़रूर बताइए — पाठ्यपुस्तक पूछती है “अंटार्कटिका पर किसका स्वामित्व है?” 【पाठ】 भारत ने उस बहस में स्पष्ट पक्ष लिया है — वह उन देशों में है जो इसे साझी संपदा मानते हैं, और उसने दावा नहीं, अनुसंधान-केंद्र स्थापित किए।

10 · ‘साझी संपदा की त्रासदी’ और उसका खंडन 【T3】

पाठ्यपुस्तक कहती है कि “पूरी दुनिया में साझी संपदा का आकार घट रहा है” 【पाठ】 — पर यह नहीं बताती कि इस पर एक प्रसिद्ध सैद्धांतिक बहस है, जो UPSC मुख्य परीक्षा में बहुत काम आती है।

10.1 हार्डिन का तर्क — ‘साझी संपदा की त्रासदी’ (1968)ध्यान

गैरेट हार्डिन ने तर्क दिया कि साझा चारागाह अनिवार्यत: नष्ट हो जाएगा, क्योंकि हर चरवाहे के लिए एक और पशु चराना व्यक्तिगत रूप से लाभदायक है, जबकि नुकसान सबमें बँट जाता है। उनका निष्कर्ष यह था कि साझी संपदा का समाधान या तो निजीकरण है या राज्य-नियंत्रण।

10.2 ऑस्ट्रोम का खंडन — और यही पाठ्यपुस्तक का पक्ष है★★

एलिनॉर ऑस्ट्रोम ने दुनिया भर के सैकड़ों वास्तविक उदाहरणों — सिंचाई-व्यवस्थाओं, मत्स्य-क्षेत्रों, वनों — का अध्ययन करके दिखाया कि समुदाय स्वयं टिकाऊ नियम बना और निभा सकते हैं, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों: स्पष्ट सीमाएँ · स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नियम · नियम बनाने में उपयोगकर्ताओं की भागीदारी · निगरानी · क्रमिक दंड · सस्ता विवाद-समाधान · संगठित होने के अधिकार की राज्य द्वारा मान्यता। ★इस काम के लिए उन्हें 2009 में अर्थशास्त्र का नोबेल स्मृति पुरस्कार मिला — यह पुरस्कार पाने वाली वे पहली महिला थीं।

★★यहीं पाठ्यपुस्तक का ‘देवस्थान’ वाला बॉक्स ठीक बैठता है 【पाठ】 — “सदियों के चलन और आपसी समझदारी से भारत के ग्रामीण समुदायों ने साझी संपदा के संदर्भ में अपने सदस्यों के अधिकार और दायित्व तय किए हैं।” और “संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी…”

यानी पाठ्यपुस्तक बिना नाम लिए ऑस्ट्रोम का पक्ष ले रही है — कि साझी संपदा का तीसरा रास्ता है: न निजीकरण, न राज्य-नियंत्रण, बल्कि सामुदायिक प्रबंधन।

! और वही अध्याय यह भी बताता है कि यह तीसरा रास्ता कहाँ टूटता है — “कानूनी स्वामित्व राज्य का हो और व्यावहारिक नियंत्रण समुदाय के हाथ में। इन दोनों के नीतिगत मानक अलग-अलग हैं।” यह ऑस्ट्रोम की अंतिम शर्त का ही उल्लंघन है — ‘संगठित होने के अधिकार की राज्य द्वारा मान्यता’।

11 · भारत का जलवायु-रिकॉर्ड 2026 में 【T1–T2】★

पाठ्यपुस्तक भारत के सात कदम गिनाती है 【पाठ】। उसके बाद क्या हुआ —

11.1 भारत का NDC (पेरिस समझौते के अंतर्गत)★★

प्रतिबद्धताविवरण
उत्सर्जन-तीव्रता2030 तक GDP की उत्सर्जन-तीव्रता 2005 के स्तर से लगभग 45% कम करना
★गैर-जीवाश्म क्षमता2030 तक स्थापित विद्युत-क्षमता का लगभग 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से
कार्बन सिंक2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण से 2.5–3 अरब टन CO₂-समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक
★★शुद्ध-शून्य2070 तक नेट ज़ीरो (COP26, ग्लासगो 2021 में घोषित)
‘पंचामृत’COP26 में घोषित पाँच-सूत्रीय संकल्प

11.2 उपलब्धि — जो लक्ष्य से पहले आ गई ◇★★

★★भारत ने जुलाई 2025 में अपनी स्थापित विद्युत-क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया — अपने 2030 के लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले।

मानआँकड़ा
कुल स्थापित विद्युत-क्षमता (अक्तूबर 2025)★505 GW पार
गैर-जीवाश्म स्रोतों सेलगभग 259 GW (जिसमें नवीकरणीय ~251 GW)
2025 में जोड़ी गई नवीकरणीय क्षमतालगभग 50 GW, निवेश लगभग 22 अरब डॉलर
2030 का लक्ष्य500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता
वैश्विक रैंक★नवीकरणीय स्थापित क्षमता में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर

11.3 अन्य प्रमुख भारतीय पहलें(पाठ्यपुस्तक के बाद की)★

पहलक्या
★★अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल, COP21 (2015) में शुरू; मुख्यालय गुरुग्राम — ★भारत में मुख्यालय वाला पहला बड़ा अंतर्राष्ट्रीय संगठन
★CDRI — आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधनभारत की पहल, 2019 में शुरू
★राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन2023 — हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का केंद्र बनने का लक्ष्य
★LiFE — ‘पर्यावरण के लिए जीवन-शैली’भारत द्वारा प्रस्तावित वैश्विक जन-आंदोलन — व्यक्तिगत उपभोग-व्यवहार पर केंद्रित
PM-KUSUM · PM सूर्य घरकृषि और घरेलू छत-सौर कार्यक्रम
राष्ट्रीय जलवायु-परिवर्तन कार्य-योजना (NAPCC), 2008आठ राष्ट्रीय मिशन — सौर, ऊर्जा-दक्षता, टिकाऊ आवास, जल, हिमालयी पारिस्थितिकी, हरित भारत, टिकाऊ कृषि, रणनीतिक ज्ञान

★★उत्तर-लेखन के लिए यह वाक्य बहुत उपयोगी है: “पाठ्यपुस्तक लिखती है कि ‘भारत पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से ठोस कदम उठा रहा है’ 【पाठ】। 2025 में 50% गैर-जीवाश्म क्षमता को लक्ष्य से पाँच साल पहले हासिल करना उस वाक्य का सबसे मज़बूत समकालीन प्रमाण है — और यह भारत के ‘ऐतिहासिक उत्तरदायित्व’ वाले तर्क को नैतिक बल भी देता है, क्योंकि भारत जो माँग रहा है वह स्वयं भी कर रहा है।”

12 · भारत के पर्यावरण-आंदोलन — चिपको से आगे 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक नर्मदा आंदोलन का नाम लेती है और साइड-टिप्पणी में चिपको का उल्लेख करती है 【पाठ】। पूरी सूची यह है —

आंदोलनकब और कहाँकिसके नेतृत्व मेंमुख्य बात
★★चिपको आंदोलन1973, चमोली (उत्तराखंड)सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवी★पेड़ों से चिपककर उन्हें कटने से बचाना; नारा — “क्या हैं जंगल के उपकार? मिट्टी, पानी और बयार”
★साइलेंट वैली आंदोलन1970 के दशक, केरलKSSP और अन्य★सफल — परियोजना रद्द; 1984 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित
★अप्पिको आंदोलन1983, कर्नाटकपांडुरंग हेगड़ेचिपको का दक्षिण भारतीय रूप (‘अप्पिको’ = कन्नड़ में ‘गले लगाना’)
★★नर्मदा बचाओ आंदोलन1985 से, गुजरात/म.प्र./महाराष्ट्रमेधा पाटकर, बाबा आम्टे★सरदार सरोवर बाँध के विरुद्ध; विस्थापन और पुनर्वास का प्रश्न
टिहरी बाँध विरोधी आंदोलन1980–90 का दशक, उत्तराखंडसुंदरलाल बहुगुणाबाँध बना, पर पुनर्वास-मानक बदले
★नियमगिरि आंदोलन2000 का दशक, ओडिशाडोंगरिया कोंध जनजाति★★2013 में ग्राम सभाओं ने बॉक्साइट खनन को अस्वीकार कर दिया — भारत में ‘पर्यावरणीय जनमत-संग्रह’ का पहला उदाहरण माना जाता है
जंगल बचाओ आंदोलन1980 का दशक, बिहार/झारखंडआदिवासी समुदायप्राकृतिक साल वनों के स्थान पर सागौन-रोपण का विरोध

★★पाठ्यपुस्तक की वह पंक्ति यहाँ सिद्ध होती है 【पाठ】 — “भारत में बाँध विरोधी तथा पर्यावरण-बचाव के अन्य आंदोलन एक अर्थ में समानधर्मी हैं क्योंकि ये अहिंसा पर आधारित हैं।” — चिपको, अप्पिको, साइलेंट वैली, नर्मदा और नियमगिरि — पाँचों अहिंसक थे। यह भारतीय पर्यावरण-आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता है और गांधीवादी परंपरा से इसका सीधा संबंध है।

★और नियमगिरि का उदाहरण मूलवासी-खंड से भी जुड़ता है — वहाँ ग्राम सभाओं की सहमति को वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत निर्णायक माना गया। (खंड 14 देखिए)

13 · भारत का पर्यावरण-कानून और संस्थागत ढाँचा 【T2】

उपकरणवर्षक्या
संविधान — अनुच्छेद 48-A42वाँ संशोधन, 1976★राज्य के नीति-निदेशक तत्व — पर्यावरण के संरक्षण और सुधार का दायित्व
संविधान — अनुच्छेद 51-A(g)42वाँ संशोधन, 1976★मौलिक कर्तव्य — “प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार”
★अनुच्छेद 21 की व्याख्यान्यायिक★★उच्चतम न्यायालय ने ‘जीवन के अधिकार’ में ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’ शामिल माना
जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम1974CPCB/SPCB की स्थापना
वन (संरक्षण) अधिनियम1980वन-भूमि के गैर-वानिकी उपयोग पर केंद्रीय अनुमति
वायु (प्रदूषण निवारण) अधिनियम1981—
★★पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम1986! भोपाल गैस त्रासदी (1984) के बाद बना ‘छत्र कानून’
जैव-विविधता अधिनियम2002CBD का घरेलू क्रियान्वयन; राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण
★ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम2001 【पाठ】BEE की स्थापना; बाद में कार्बन-बाज़ार के प्रावधान जोड़े गए
★वन अधिकार अधिनियम2006खंड 14 देखिए
★★राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)2010★पर्यावरणीय मामलों के लिए विशेष अधिकरण — ऐसा अधिकरण बनाने वाला भारत विश्व का तीसरा देश (ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बाद)

★★एक शक्तिशाली तथ्य जो उत्तर में लिखा जा सकता है: भारत के संविधान में पर्यावरण-संरक्षण को राज्य के कर्तव्य (48-A) और नागरिक के मौलिक कर्तव्य (51-A(g)) — दोनों रूपों में रखा गया है। यह 1976 के 42वें संशोधन से आया, यानी स्टॉकहोम सम्मेलन (1972) के केवल चार वर्ष बाद।

14 · मूलवासी अधिकार — UNDRIP 2007 और भारत का वन अधिकार अधिनियम 【T1–T2】

पाठ्यपुस्तक 1975 की वर्ल्ड काउंसिल और 1982 की UN परिभाषा पर रुक जाती है 【पाठ】। आगे की कहानी —

14.1 UNDRIP — मूलवासी अधिकारों की UN घोषणा ◆★★

पहलूविवरण
कब★13 सितंबर 2007, संयुक्त राष्ट्र महासभा
★मतदान144 पक्ष में · 4 विरुद्ध (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, अमरीका) · 11 अनुपस्थित
क्या करती है“मूलवासी लोगों के अस्तित्व, गरिमा और कल्याण के लिए न्यूनतम मानकों का सार्वभौम ढाँचा”
मुख्य अधिकारआत्म-निर्णय · अपनी संस्थाओं, संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने का अधिकार · भूमि, भूक्षेत्र और संसाधनों पर अधिकार · निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी
★★सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत‘स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति’ (FPIC) — उनकी भूमि पर कोई परियोजना उनकी सहमति के बिना नहीं
! कानूनी स्थितियह एक घोषणा है, संधि नहीं — इसलिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं
अन्य ढाँचाILO अभिसमय 169 (1989) — बाध्यकारी, पर भारत उसका पक्षकार नहीं

! भारत की स्थिति: भारत ने UNDRIP के पक्ष में मत दिया, पर उसकी आधिकारिक स्थिति यह रही है कि भारत में स्वतंत्रता के बाद सभी नागरिक ‘मूलवासी’ हैं और जनजातीय अधिकारों का संरक्षण संविधान तथा घरेलू कानूनों से होता है। यह बारीकी उत्तर में लिखने योग्य है।

14.2 भारत का संवैधानिक और कानूनी ढाँचा★★

उपकरणक्या
★अनुच्छेद 342अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना
★★पाँचवीं अनुसूचीअनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन (अधिकांश राज्य)
★★छठी अनुसूची★असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों के लिए स्वायत्त जिला परिषदें
★PESA अधिनियम, 1996पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम — ★★ग्राम सभा को भूमि, लघु वन-उपज और जल पर निर्णायक अधिकार
★★वन अधिकार अधिनियम, 2006पूरा नाम — अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम। ★इसकी प्रस्तावना में स्पष्ट लिखा है कि यह “ऐतिहासिक अन्याय” को सुधारने के लिए है। व्यक्तिगत वन-भूमि अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार — दोनों देता है
अनुच्छेद 244(1) और (2)पाँचवीं और छठी अनुसूची का संवैधानिक आधार

★★पाठ्यपुस्तक के सबसे तीखे वाक्य को यहीं जोड़िए 【पाठ】 — “राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से इनको संवैधानिक सुरक्षा हासिल है लेकिन देश के विकास का इन्हें ज्यादा लाभ नहीं मिल सका… इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।”

वन अधिकार अधिनियम, 2006 भारत की उस स्वीकृति का कानूनी रूप है — इसकी प्रस्तावना स्वयं ‘ऐतिहासिक अन्याय’ शब्द का प्रयोग करती है। ★और नियमगिरि (2013) का प्रकरण दिखाता है कि जब ग्राम सभाओं को सचमुच अधिकार मिलता है तो वे उसका प्रयोग करती हैं।

15 · संसाधनों की भू-राजनीति — तेल के बाद 【T2–T3】

पाठ्यपुस्तक कहती है “वैश्विक रणनीति में तेल लगातार सबसे महत्त्वपूर्ण संसाधन बना हुआ है।” 【पाठ】 — यह आज भी सच है, पर सूची लंबी हो गई है।

संसाधनक्यों रणनीतिकभू-राजनीतिक तथ्य
★तेल और गैसपरिवहन और उद्योग★OPEC (1960) और OPEC+; खाड़ी में विश्व के ज्ञात भंडार का बड़ा हिस्सा 【पाठ】
★★दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earths)★पवन-टरबाइन, इलेक्ट्रिक वाहन की मोटरें, रक्षा-इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन — इनके बिना हरित संक्रमण संभव नहीं! चीन का वैश्विक प्रसंस्करण पर भारी प्रभुत्व — यही आज की सबसे बड़ी ‘संसाधन-निर्भरता’ है
★★लीथियम, कोबाल्ट, निकलबैटरी — विद्युत गतिशीलता की रीढ़★‘लीथियम त्रिकोण’ — चिली, अर्जेंटीना, बोलीविया; कोबाल्ट का बड़ा हिस्सा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से
ताँबाविद्युतीकरणचिले और पेरू प्रमुख उत्पादक
★यूरेनियमपरमाणु ऊर्जाकज़ाख़स्तान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया
★★जलजीवन और कृषि★‘जलयुद्ध’ 【पाठ】 — खंड 16 देखिए

15.1 भारत की प्रतिक्रिया★

  • ★महत्वपूर्ण खनिज मिशन (Critical Minerals Mission) — भारत ने 30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची अधिसूचित की है।
  • ★KABIL (खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड) — विदेशों में खनिज-संपत्तियाँ हासिल करने के लिए तीन सार्वजनिक उपक्रमों की संयुक्त कंपनी।
  • ★खान और खनिज अधिनियम में संशोधन (2023) — निजी क्षेत्र को महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में प्रवेश।

★★कक्षा-चर्चा का एक शानदार सवाल: “पाठ्यपुस्तक 20वीं सदी को ‘तेल की सदी’ कहती है। क्या 21वीं सदी ‘दुर्लभ मृदा की सदी’ होगी? और तब ‘नव-उपनिवेशवाद’ का कार्टून (पृ. 93) किन देशों पर लागू होगा?” यह प्रश्न विद्यार्थियों को अध्याय के तर्क को वर्तमान पर लागू करना सिखाता है।

16 · जल-विवाद — भारत के भीतर और बाहर 【T2】

पाठ्यपुस्तक ‘जलयुद्ध’ की धारणा देती है और इज़रायल-सीरिया-जार्डन तथा तुर्की-सीरिया-इराक के उदाहरण देती है 【पाठ】। साइड-टिप्पणी पूछती है — “हमारे देश में भी पानी को लेकर बड़े झगड़े-टंटे चल रहे हैं। ये संघर्ष उनसे किस तरह अलग हैं?” — उसका उत्तर यह है:

16.1 भारत के भीतर — अंतर्राज्यीय जल-विवाद★

विवादराज्यढाँचा
कावेरीकर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पुदुच्चेरीअधिकरण और उच्चतम न्यायालय
कृष्णामहाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेशअधिकरण
रावी-ब्यासपंजाब, हरियाणा, राजस्थानअधिकरण
महानदीओडिशा, छत्तीसगढ़अधिकरण
  • ★संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 262 — संसद अंतर्राज्यीय नदी-जल विवादों के न्यायनिर्णयन का प्रावधान कर सकती है और न्यायालयों के अधिकार-क्षेत्र को वर्जित कर सकती है।
  • कानून: अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (2002 में संशोधित)
  • ★सूची-प्रविष्टियाँ: जल राज्य-सूची (प्रविष्टि 17) में है, पर अंतर्राज्यीय नदियाँ और नदी-घाटियाँ संघ-सूची (प्रविष्टि 56) में।

★★यही मूल अंतर है — और यही साइड-टिप्पणी का उत्तर: भारत के भीतर जल-विवाद एक ही संप्रभु व्यवस्था के भीतर हैं — इसलिए उनका समाधान अधिकरण, न्यायालय और संविधान से होता है, युद्ध से नहीं। अंतर्राष्ट्रीय जल-विवादों में ऐसी कोई ऊपरी सत्ता नहीं है — और वहीं ‘जलयुद्ध’ की आशंका पैदा होती है। ★यह ठीक वही तर्क है जो अध्याय 5 में ‘अराजकता’ के बारे में दिया गया था — “किसी देश के भीतर हिंसा के ख़तरों से निपटने के लिए एक जानी-पहचानी व्यवस्था होती है — इसे सरकार कहते हैं। लेकिन विश्व-राजनीति में ऐसी कोई केंद्रीय सत्ता नहीं।” दोनों अध्यायों को जोड़ने का यह सबसे अच्छा बिंदु है।

16.2 भारत के सीमापार जल-समझौते★

संधिकिसके साथवर्ष
★★सिंधु जल संधिपाकिस्तान (विश्व बैंक की मध्यस्थता से)1960
★गंगा जल बँटवारा संधिबांग्लादेश1996 (30 वर्ष के लिए)
महाकाली संधिनेपाल1996
कोसी और गंडक समझौतेनेपाल1954 / 1959

17 · तीन प्रकरण-अध्ययन 【T1–T2】

प्रकरण 1 — अराल सागर : पाठ्यपुस्तक का चित्र, पूरी कहानी★★

पहलूविवरण
क्या थाकभी विश्व की चौथी सबसे बड़ी झील — मध्य एशिया में, आज के कज़ाख़स्तान और उज़्बेकिस्तान के बीच
★क्या हुआ1960 के दशक से सोवियत सिंचाई-परियोजनाओं ने इसकी दो पोषक नदियों — आमू दरिया और सिर दरिया — का पानी कपास की खेती की ओर मोड़ दिया
परिणाम★झील अपने मूल आयतन का अधिकांश हिस्सा खो बैठी और कई हिस्सों में बँट गई; मत्स्य-उद्योग पूरी तरह नष्ट; सूखे तल से उठी नमक और कीटनाशक-युक्त धूल ने आसपास के लोगों में श्वास-रोग और कैंसर बढ़ाए
पाठ्यपुस्तक के शब्द 【पाठ】“अराल के आसपास बसे हज़ारों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा… पानी में नमक की सांद्रता के ज्यादा बढ़ जाने से पैदावार कम हो गई।”
★★सबकयह किसी युद्ध या आपदा का परिणाम नहीं था — यह एक सुनियोजित विकास-नीति का परिणाम था। इसीलिए पाठ्यपुस्तक इसे ‘पर्यावरण राजनीतिक क्यों है’ खंड में रखती है।
★आशा की किरणकज़ाख़स्तान ने कोक-अराल बाँध (2005) बनाकर उत्तरी अराल सागर को आंशिक रूप से पुनर्जीवित किया — मछलियाँ लौटीं। यह दिखाता है कि नीति ने बिगाड़ा था, नीति ही सुधार भी सकती है।

प्रकरण 2 — ओज़ोन छेद : सफलता की कहानी★

चरणक्या
1974वैज्ञानिकों ने चेताया कि CFC ओज़ोन का क्षय कर सकते हैं
★1985★★ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण ने अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन छेद की खोज की — 【पाठ】 “एक आँख खोल देने वाली घटना”
1985वियना अभिसमय — ढाँचा-संधि
★1987मॉन्ट्रियल न्यायाचार — केवल दो वर्ष में बाध्यकारी संधि
★आजक्षतिकारक रसायनों का 98% (क्षमता के हिसाब से) समाप्त; ओज़ोन परत में सुधार के पहले संकेत ◆
★★सबकजब विज्ञान स्पष्ट हो, विकल्प उपलब्ध हों और लागत बाँटी जाए — तब वैश्विक संपदा की रक्षा संभव है। यह ‘टेढ़ी खीर’ का सबसे मीठा उदाहरण है।

प्रकरण 3 — नियमगिरि : जब ग्राम सभा ने खनन को ‘नहीं’ कहा★★

पहलूविवरण
कहाँओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियाँ — डोंगरिया कोंध जनजाति का निवास, जो पहाड़ को अपना देवता (नियम राजा) मानते हैं
विवादबॉक्साइट खनन की प्रस्तावित परियोजना
★★निर्णयउच्चतम न्यायालय के आदेश पर 2013 में प्रभावित ग्राम सभाओं से पूछा गया — और सभी ने खनन को अस्वीकार कर दिया
कानूनी आधार★वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन अधिकार और धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकार
★★महत्त्वभारत में ‘पर्यावरणीय जनमत-संग्रह’ का पहला उदाहरण माना जाता है — यहाँ UNDRIP का FPIC सिद्धांत भारतीय कानून के माध्यम से व्यवहार में आया
पाठ्यपुस्तक से जोड़ 【पाठ】“संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी…” और “उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?” — नियमगिरि दोनों वाक्यों को एक साथ जीवंत करता है।

18 · संक्षिप्ताक्षर-कोश 【T1–T2】

जलवायु और पर्यावरण-संधियाँ

संक्षेपपूरा नामहिंदी / टिप्पणी
UNEPUN Environment Programmeसंयुक्त राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम, 1972
UNCHEUN Conference on the Human Environmentस्टॉकहोम सम्मेलन, 1972
UNCEDUN Conference on Environment and Development★पृथ्वी सम्मेलन, रियो, 1992
UNFCCCUN Framework Convention on Climate Change1992
CBDConvention on Biological Diversity1992
UNCCDUN Convention to Combat Desertification1994
COPConference of the Partiesपक्षकारों का सम्मेलन; ★COP30 = बेलेम, 2025
NDCNationally Determined Contribution★राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (पेरिस)
GSTGlobal Stocktake★वैश्विक स्टॉकटेक — हर 5 वर्ष
★CBDR / CBDR-RCCommon But Differentiated Responsibilities (and Respective Capabilities)★★साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ (और सापेक्ष क्षमताएँ)
IPCCIntergovernmental Panel on Climate Changeजलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल, 1988
GHGGreenhouse Gases★CO₂, मीथेन, हाइड्रो-फ्लोरो कार्बन 【पाठ】
ODS / CFC / HFCOzone Depleting Substances / Chlorofluorocarbons / Hydrofluorocarbons★HFC = किगाली संशोधन का विषय
SDGSustainable Development Goals17 लक्ष्य, 2015–2030; लक्ष्य 13 = जलवायु

वैश्विक संपदा

संक्षेपपूरा नाम
★UNCLOSUN Convention on the Law of the Sea, 1982
★★BBNJBiodiversity Beyond National Jurisdiction (‘हाई सीज़ संधि’) — लागू 17 जनवरी 2026
ISA (समुद्री)International Seabed Authority — अंतर्राष्ट्रीय समुद्री तल प्राधिकरण
ATSAntarctic Treaty System — अंटार्कटिका संधि व्यवस्था, 1959
NCPORNational Centre for Polar and Ocean Research, गोवा
OSTOuter Space Treaty, 1967
CHMCommon Heritage of Mankind — मानवजाति की साझी विरासत

भारत-विशिष्ट

संक्षेपपूरा नाम
★FRAForest Rights Act, 2006 — वन अधिकार अधिनियम
★PESAPanchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996
★NGTNational Green Tribunal, 2010 — राष्ट्रीय हरित अधिकरण
EPAEnvironment (Protection) Act, 1986
CPCB / SPCBकेंद्रीय / राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
MoEFCCपर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
MNREनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
BEEBureau of Energy Efficiency — ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम 2001 के तहत
NAPCCNational Action Plan on Climate Change, 2008 — आठ मिशन
★ISA (सौर)International Solar Alliance — ★अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, मुख्यालय गुरुग्राम
★CDRICoalition for Disaster Resilient Infrastructure, 2019
LiFELifestyle for Environment — भारत की वैश्विक पहल
KABILखनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड
STScheduled Tribes — भारत की जनसंख्या का 8% 【पाठ】

मूलवासी अधिकार

संक्षेपपूरा नाम
★UNDRIPUN Declaration on the Rights of Indigenous Peoples, 13 सितंबर 2007
★★FPICFree, Prior and Informed Consent — स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति
WCIPWorld Council of Indigenous Peoples, 1975 【पाठ】
ILO C169ILO Convention 169 (1989) — ! भारत पक्षकार नहीं
UNPFIIUN Permanent Forum on Indigenous Issues, 2000
WWFWorld Wildlife Fund 【पाठ】

19 · अभ्यास प्रश्न 【सभी स्तर】

1 अंक

  1. स्टॉकहोम सम्मेलन कब हुआ और उससे कौन-सा संगठन बना? — 1972; UNEP
  2. स्टॉकहोम में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया? — इंदिरा गांधी
  3. बर्टलैंड रिपोर्ट की ‘टिकाऊ विकास’ की परिभाषा? — “वर्तमान की ज़रूरतें पूरी करे, बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता से समझौता किए”
  4. मॉन्ट्रियल न्यायाचार कब हस्ताक्षरित हुआ और विश्व ओज़ोन दिवस कब है? — 16 सितंबर 1987; 16 सितंबर
  5. मॉन्ट्रियल न्यायाचार की उपलब्धि? — ★क्षतिकारक रसायनों का 98% समाप्त; सार्वभौम अनुसमर्थन पाने वाली पहली संधि
  6. किगाली संशोधन किस गैस के बारे में है और भारत ने कब अनुमोदित किया? — HFC; सितंबर 2021
  7. क्योटो और पेरिस में सबसे बड़ा अंतर? — क्योटो: ऊपर से लक्ष्य, केवल विकसित देशों पर; पेरिस: स्व-निर्धारित NDC, सभी देशों पर
  8. COP30 कब और कहाँ हुआ? — ★10–21 नवंबर 2025, बेलेम (ब्राज़ील)
  9. COP30 का मुख्य पैकेज और निर्णयों की संख्या? — ‘बेलेम पैकेज’; 29 निर्णय
  10. COP30 की सबसे बड़ी नाकामी? — ! जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने का औपचारिक रोडमैप शामिल न हो पाना
  11. रियो से निकले तीन अभिसमय? — UNFCCC (1992), CBD (1992), UNCCD (1994)
  12. CBD का नवीनतम वैश्विक ढाँचा और उसका मुख्य लक्ष्य? — कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ढाँचा (2022); ‘30×30’
  13. BBNJ संधि कब लागू हुई? — ★★17 जनवरी 2026
  14. UNCLOS किस वर्ष की है और गहरे समुद्री तल के लिए कौन-सा सिद्धांत देती है? — 1982; “मानवजाति की साझी विरासत”
  15. अंटार्कटिका संधि के तहत संप्रभुता-दावों का क्या हुआ? — ★वे ‘जमे’ (frozen) रहेंगे
  16. भारत अंटार्कटिका संधि में कब शामिल हुआ और उसके अनुसंधान केंद्र? — 1983; दक्षिण गंगोत्री, मैत्री, भारती
  17. ‘साझी संपदा की त्रासदी’ किसने कही और उसका खंडन किसने किया? — गैरेट हार्डिन (1968); एलिनॉर ऑस्ट्रोम
  18. ऑस्ट्रोम को नोबेल कब मिला? — 2009 (अर्थशास्त्र)
  19. भारत ने 50% गैर-जीवाश्म विद्युत-क्षमता कब हासिल की? — ★★जुलाई 2025 — लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले
  20. भारत का नेट-ज़ीरो लक्ष्य? — 2070
  21. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना और मुख्यालय? — COP21 (2015); गुरुग्राम
  22. चिपको आंदोलन कब, कहाँ और किसके नेतृत्व में? — 1973, चमोली (उत्तराखंड); सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवी
  23. साइलेंट वैली किस वर्ष राष्ट्रीय उद्यान बनी? — 1984
  24. राष्ट्रीय हरित अधिकरण कब बना? — 2010
  25. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम किस घटना के बाद बना? — भोपाल गैस त्रासदी (1984) के बाद, 1986 में
  26. संविधान के कौन-से दो अनुच्छेद पर्यावरण से जुड़े हैं? — 48-A (नीति-निदेशक तत्व) और 51-A(g) (मौलिक कर्तव्य)
  27. UNDRIP कब अपनाई गई और मतदान का परिणाम? — ★13 सितंबर 2007; 144 पक्ष में, 4 विरुद्ध, 11 अनुपस्थित
  28. FPIC का अर्थ? — स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति
  29. वन अधिकार अधिनियम कब बना और उसकी प्रस्तावना किस शब्द का प्रयोग करती है? — 2006; “ऐतिहासिक अन्याय”
  30. नियमगिरि में ग्राम सभाओं ने कब खनन अस्वीकार किया? — 2013

2–4 अंक

  1. मॉन्ट्रियल न्यायाचार क्यों सफल हुआ जबकि जलवायु-वार्ताएँ अटकीं? तीन कारण दीजिए।
  2. क्योटो और पेरिस समझौते की तुलना कीजिए। भारत के लिए इस बदलाव का क्या अर्थ है?
  3. COP30 (बेलेम) के मुख्य परिणाम और मुख्य नाकामी बताइए।
  4. ‘सम्पूर्ण मानवजाति का क्षेत्र’ और ‘मानवजाति की साझी विरासत’ में क्या अंतर है?
  5. BBNJ संधि क्या है और वह ‘वैश्विक संपदा’ की धारणा को कैसे मज़बूत करती है?
  6. ‘साझी संपदा की त्रासदी’ के तर्क का ऑस्ट्रोम ने क्या खंडन किया? ‘देवस्थान’ इसका उदाहरण कैसे है?
  7. अंटार्कटिका संधि (1959) के पाँच मुख्य प्रावधान बताइए। भारत की वहाँ क्या भूमिका है?
  8. भारत का NDC क्या है और 2025 तक उसने क्या हासिल किया?
  9. भारत के पाँच प्रमुख पर्यावरण-आंदोलनों का उल्लेख कीजिए और बताइए कि उनमें क्या समानता है।
  10. UNDRIP और भारत के वन अधिकार अधिनियम, 2006 का आपसी संबंध स्पष्ट कीजिए।
  11. भारत के भीतर के जल-विवाद अंतर्राष्ट्रीय जल-विवादों से किस तरह भिन्न हैं?
  12. ‘दुर्लभ मृदा तत्व’ 21वीं सदी का ‘तेल’ क्यों कहे जा रहे हैं?

6 अंक

  1. “वैश्विक संपदा की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।” — मॉन्ट्रियल न्यायाचार, अंटार्कटिका संधि और BBNJ संधि के आलोक में इस कथन का परीक्षण कीजिए।
  2. ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत क्योटो से पेरिस और फिर COP30 तक कैसे बदला है? भारत का पक्ष क्या रहा है?
  3. “इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।” — भारत के आदिवासी समुदायों के संदर्भ में इस कथन का विवेचन कीजिए और बताइए कि संवैधानिक तथा कानूनी ढाँचे ने इसका क्या उत्तर दिया है।

20 · स्रोत-सूची

प्राथमिक स्रोत ◆

  1. NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), अध्याय 6, पृ. 81–98 【पाठ】
  2. UNEP — About Montreal Protocol — unep.org
  3. Ozone Secretariat — Status of ratification of the Kigali Amendment (Decision XXXVI/21) — ozone.unep.org
  4. UN — United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples (UNDRIP) — social.desa.un.org
  5. OHCHR — UN Declaration on the Rights of Indigenous Peoples — ohchr.org
  6. UN — COP30 closes with agreement to step up support for developing countries — un.org
  7. COP30 Brazil — COP30 approves Belém Package — cop30.br
  8. IOC-UNESCO — BBNJ Agreement Successfully Ratified — ioc.unesco.org
  9. PIB (भारत सरकार) — India Ranks Third Globally in Renewable Energy Installed Capacity — pib.gov.in

द्वितीयक स्रोत ◇ 10. Carbon Brief — COP30: Key outcomes agreed at the UN climate talks in Belém — carbonbrief.org 11. World Resources Institute — COP30: Outcomes, Disappointments and What’s Next — wri.org 12. IISD — COP30 Outcome: What it means and what’s next — iisd.org 13. High Seas Alliance — Historic High Seas Treaty enters into force (16 जनवरी 2026) — highseasalliance.org 14. Down To Earth — BBNJ treaty receives 60 ratifications, will enter into force in January 2026 — downtoearth.org.in 15. SolarQuarter — India Crosses 505 GW Installed Power Capacity with Non-Fossil Fuels Exceeding 50% — solarquarter.com 16. Enerdata — India hits 500 GW in installed power, over 50% from non-fossil sources — enerdata.net 17. Bhatt & Joshi Associates — Tribal Rights in India: Article 244 and FRA 2006 Framework — bhattandjoshiassociates.com

! शिक्षक के लिए अंतिम नोट: बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का आँकड़ा और उसकी भाषा ही लिखवाइए। यह संवर्धन सामग्री कक्षा-चर्चा, परियोजना-कार्य और प्रतियोगी परीक्षा के लिए है। जहाँ पाठ्यपुस्तक और 2026 के आँकड़े भिन्न हैं, वहाँ खंड 1 की तालिका दोनों साथ-साथ दिखाती है — कक्षा में यही तालिका दिखाना सबसे उपयोगी रहता है।