पाठ्यपुस्तक से आगे — संवर्धन सामग्री (T1 · T2 · T3)
यह दस्तावेज़ पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं, विस्तार है। T1 — बोर्ड परीक्षा के लिए भी उपयोगी; कक्षा में बताई जा सकती है T2 — प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC प्रारंभिक, राज्य PCS, CUET, SSC, NDA/CDS) के लिए T3 — उन्नत स्तर (UPSC मुख्य परीक्षा, वैकल्पिक विषय, शोध-रुचि)
★हर गैर-स्पष्ट तथ्य वेब-सत्यापित है — तिथियाँ और आँकड़े अगस्त 2026 तक अद्यतन। स्रोत-चिह्न: ◆ = प्राथमिक स्रोत (सरकार/संयुक्त राष्ट्र/IMF/MEA) · ◇ = द्वितीयक स्रोत · 【पाठ】 = NCERT पाठ्यपुस्तक। पूरी स्रोत-सूची अंत में।
!! यह क्षेत्र पाठ्यपुस्तक के लेखन (2018 तक) के बाद इतना बदल चुका है कि यह दस्तावेज़ लगभग एक नया अध्याय जैसा हो गया है — फिर भी बोर्ड परीक्षा में केवल पाठ्यपुस्तक का उत्तर लिखिए।
विषय-सूची
| # | खंड | स्तर |
|---|---|---|
| 1 | ★★दक्षेस — 2016 से ठप, और उसके बाद क्या हुआ | T1–T2 |
| 2 | ★★भारत-पाकिस्तान — पहलगाम से ऑपरेशन सिंदूर तक (2025-26) | T1–T2 |
| 3 | ★पाकिस्तान — सेना और लोकतंत्र, 2018 से आगे | T1–T2 |
| 4 | ★★बांग्लादेश — अगस्त 2024 की क्रांति और उसके बाद | T1–T2 |
| 5 | ★★श्रीलंका — 2022 का पतन, IMF और दिसानायके-युग | T1–T2 |
| 6 | ★★नेपाल — 2025 का जेन-ज़ी आंदोलन और नया लोकतंत्र | T1–T2 |
| 7 | ★भूटान — शांत राजतंत्र से आगे | T2 |
| 8 | ★★मालदीव — ‘इंडिया आउट’ से ‘रीसेट’ तक | T1–T2 |
| 9 | ★★अफ़गानिस्तान — तालिबान शासन, 2021–2026 | T1–T2 |
| 10 | ★म्यांमार — तख्तापलट से ‘चुनाव’ तक | T2 |
| 11 | ★★बिम्सटेक — दक्षेस का सक्रिय विकल्प | T1–T2 |
| 12 | चार प्रकरण-अध्ययन | T1–T2 |
| 13 | संक्षिप्ताक्षर-कोश (50+) | T1–T2 |
| 14 | अभ्यास प्रश्न (28) | सभी |
| 15 | स्रोत-सूची | — |
1 · दक्षेस — 2016 से ठप, और उसके बाद क्या हुआ 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक कहती है 【पाठ】 — “दक्षेस (साउथ एशियन एसोशियन फॉर रिजनल कोऑपरेशन — SAARC) दक्षिण एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई।” और आगे — ! “दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।” पाठ्यपुस्तक का अंतिम उल्लेख नवंबर 2014 का 18वाँ शिखर सम्मेलन (काठमांडू) है। उसके बाद क्या हुआ, वह पाठ के इस निष्कर्ष का सबसे ठोस प्रमाण है।
1.1 19वाँ शिखर सम्मेलन — जो कभी हुआ ही नहीं★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| तय स्थान/समय | इस्लामाबाद, नवंबर 2016 |
| ★रद्द क्यों हुआ | उड़ी आतंकी हमले के बाद भारत ने बहिष्कार की घोषणा की; इसके बाद बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और भूटान भी हट गए ◇ |
| ★★तब से | कोई शिखर सम्मेलन नहीं हुआ — दस वर्ष से अधिक |
| विश्लेषकों का आकलन | संगठन “संस्थागत जीवन-रक्षक प्रणाली पर” (institutional life-support) है ◇ |
1.2 जो तथ्य पाठ नहीं देता★
| मद | तथ्य |
|---|---|
| स्थापना-दिवस | 8 दिसंबर 1985, ढाका — इसीलिए 8 दिसंबर ‘सार्क चार्टर दिवस’ है |
| संस्थापक सदस्य | सात — बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका |
| ★आठवाँ सदस्य | अफ़गानिस्तान — 2007 में शामिल (यह पाठ में है) |
| सचिवालय | ★काठमांडू (नेपाल) |
| पर्यवेक्षक | चीन, जापान, अमरीका, ईरान, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ |
1.3 2024–2026 में पुनरुद्धार की कोशिशें — पर कोई तारीख तय नहीं★
- ! बांग्लादेश के अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने दिसंबर 2024 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाकात की और दक्षेस-पुनरुद्धार की बात उठाई। ◇
- ! मालदीव की ओर से भी जुलाई 2026 में दक्षेस-पुनरुद्धार की माँग आई। ◇
- !! पर अगस्त 2026 तक कोई शिखर सम्मेलन तय नहीं हुआ है — यह अभी केवल एक राजनीतिक इच्छा है, संगठन की स्थिति का तथ्य नहीं।
★★यह पाठ्यपुस्तक के ‘विभेदों की मौजूदगी’ वाले वाक्य का सबसे मज़बूत प्रमाण है — और प्रश्न 9 (‘दक्षेस की सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन’) तथा प्रश्न 10 (‘अविश्वास के उदाहरण’) का सबसे सशक्त उदाहरण। ! परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही उत्तर लिखिए — “विभेदों की मौजूदगी के कारण ज्यादा सफलता नहीं मिली।” 19वें सम्मेलन के रद्द होने का उल्लेख अतिरिक्त बिंदु के रूप में किया जा सकता है।
2 · भारत-पाकिस्तान — पहलगाम से ऑपरेशन सिंदूर तक (2025–26) 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक 1998 के परमाणु-परीक्षण, करगिल-युद्ध (1999) और आगरा-बैठक (2001) पर रुक जाती है, और कहती है 【पाठ】 — “भारत और पाकिस्तान एक सैन्य-संबंध में बंध चुके हैं और इनके बीच सीधे और सर्वव्यापी युद्ध छिड़ने की आशंका कम हो गई है।” 2025 में यह धारणा सबसे कड़ी परीक्षा से गुज़री — भारत-पाक संबंधों की सबसे बड़ी सैन्य घटना 1971 के बाद यही रही।
2.1 पहलगाम आतंकी हमला — 22 अप्रैल 2025★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| कहाँ | बैसरन घाटी, पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) |
| ★★क्या हुआ | बंदूकधारियों ने 26 लोगों की हत्या की (25 भारतीय पर्यटक + 1 नेपाली नागरिक); 20 से अधिक घायल; पीड़ितों को धर्म पूछकर अलग किया गया और गोली मारी गई ◇ |
| महत्व | 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में सबसे घातक नागरिक-हमला ◇ |
| ★ज़िम्मेदारी | ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली — भारत इसे लश्कर-ए-तैयबा का ही एक रूप मानता है ◇ |
| हमलावरों का अंत | 28 जुलाई 2025 — 93 दिन के तलाशी-अभियान के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने तीनों हमलावरों को हरवन (श्रीनगर) में मुठभेड़ में मार गिराया; भारत ने उन्हें पाकिस्तानी नागरिक बताया, जिसे इस्लामाबाद नकारता है ◇ |
2.2 भारत की तात्कालिक कार्रवाई — 23 अप्रैल 2025★★
सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने निर्णय लिए ◇ —
- ★★सिंधु-जल संधि (1960) को ‘स्थगन में’ रखा गया (विस्तार से 2.4 में);
- अटारी-वाघा सीमा बंद;
- पाकिस्तानी नागरिकों के वीज़ा रद्द;
- पाकिस्तानी रक्षा-सलाहकारों को ‘अवांछित व्यक्ति’ घोषित किया गया;
- पाकिस्तानी विमानों के लिए भारतीय हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित।
2.3 ‘ऑपरेशन सिंदूर’ — 6–10 मई 2025★★
| दिन | घटना |
|---|---|
| ★★रात 6–7 मई 2025 (लगभग 1:05–1:30 बजे) | भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के 9 ठिकानों पर हमले किए (बहावलपुर, मुरीदके, स्यालकोट के निकट शकरगढ़ आदि); 1971 के बाद पहली बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार हमला किया; भारत ने कहा — निशाना “आतंकी अवसंरचना” था, पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने नहीं 【प्रा — विदेश सचिव का बयान】 |
| !! 7–10 मई | ड्रोन और मिसाइलों का आदान-प्रदान; बड़े हवाई मुक़ाबले (125 से अधिक लड़ाकू विमान शामिल); दोनों ओर हवाई-अड्डों पर हमले; पाकिस्तान ने जवाबी अभियान ‘बुनियान-उम-मरसूस’ चलाया (10 मई) ◇ |
| ! हताहत — विवादित आँकड़े | पाकिस्तान का दावा — 40 नागरिक + 11 सैनिक मृत; भारत का दावा — 15–16 नागरिक + 5 सैनिक मृत (भारत ने अपने सैनिकों के नाम जून 2026 में सार्वजनिक किए); कुल मृतकों का अनुमान 70 से अधिक ◇ |
| !! विमान-क्षति के परस्पर-विरोधी दावे | पाकिस्तान का दावा — 5 भारतीय विमान मार गिराए (3 राफेल सहित); भारत ने भी 5 पाकिस्तानी विमान गिराने का दावा किया, और अलग से (जून 2025) अपने कुछ विमानों की क्षति स्वीकार की — किसी दावे की तटस्थ पुष्टि नहीं हुई ◇ |
2.4 सिंधु-जल संधि — 65 वर्षों में पहली बार स्थगित★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★कब | 23 अप्रैल 2025 |
| आधार | भारत ने पाकिस्तान की “निरंतर सीमापार आतंकवाद को शह” को कारण बताया |
| क्या रुका | डेटा-साझाकरण और स्थायी सिंधु आयोग की बैठकें — पर भारत ने पश्चिमी नदियों का जल रोका या मोड़ा नहीं है ◇ |
| ! पाकिस्तान/मध्यस्थता न्यायालय की प्रतिक्रिया | जून 2025 — हेग के मध्यस्थता न्यायालय ने कहा कि संधि एकतरफा स्थगन की अनुमति नहीं देती; भारत ने इस न्यायालय को ही “अवैध” और स्वयं पर अबाध्यकारी बताकर खारिज़ किया ◇ |
| ★★मई 2026 तक की स्थिति | विदेश मंत्रालय ने दोहराया — संधि तब तक “स्थगन में” रहेगी जब तक पाकिस्तान “विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से” सीमापार आतंकवाद के समर्थन का त्याग न करे 【प्रा — MEA】 |
★★यह पाठ्यपुस्तक की उस पंक्ति को सीधे चुनौती देता है 【पाठ】 — “संयोग से, 1960 में विश्व बैंक की मदद से भारत और पाकिस्तान ने ‘सिंधु-जल संधि’ पर दस्तख़त किए और यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।” !! 65 वर्षों तक — 1965, 1971 और 1999 के युद्धों के बावजूद — यह संधि कायम रही थी। 2025 में यह पहली बार टूटी। यह क्षेत्र की सबसे भरोसेमंद संस्था के लिए भी सबसे बड़ी परीक्षा थी।
2.5 युद्धविराम और उसका विवाद★
- ★★10 मई 2025 — दोनों देशों के DGMO (महानिदेशक सैन्य अभियान) के बीच सीधे संपर्क से युद्धविराम हुआ।
- !! अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे स्वयं घोषित किया — “पूर्ण और तत्काल” अमरीकी-मध्यस्थता वाला युद्धविराम बताया। पाकिस्तान ने अमरीकी भूमिका का श्रेय दिया; भारत ने इसे नकारा — प्रधानमंत्री मोदी ने 18 जून 2025 को स्वयं ट्रम्प से कहा कि कोई अमरीकी मध्यस्थता नहीं थी, बातचीत द्विपक्षीय थी और पाकिस्तान के अनुरोध पर हुई। ◇
- संयुक्त राष्ट्र: सुरक्षा परिषद ने 5 मई 2025 को बंद-द्वार परामर्श किए (पाकिस्तान के अनुरोध पर); महासचिव गुटेरेस ने “अधिकतम संयम” की अपील की और बाद में युद्धविराम का स्वागत किया। 【प्रा — UN】
2.6 उसके बाद — ‘गहरी जमावट’ (Deep Freeze), अगस्त 2026 तक★
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| व्यापार | पूर्णतः निलंबित, तीसरे देश से होकर होने वाला व्यापार भी |
| राजनयिक | कोई उच्चायुक्त नियुक्त नहीं; दोनों राजधानियों में मिशन-स्टाफ लगभग आधा घटाया गया (भारत का इस्लामाबाद मिशन 55 से 30) |
| हवाई क्षेत्र | दोनों ओर से एक-दूसरे के विमानों के लिए बंद, बार-बार विस्तारित |
| LoC पर स्थिति | मई 2025 का युद्धविराम ज़मीन, हवा और समुद्र पर 2026 तक कायम, पर तनाव बना हुआ — मई 2026 में गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा के 15 किमी भीतर अवैध ढाँचों को गिराने का आदेश दिया ◇ |
| ! अनौपचारिक संपर्क | ट्रैक-1.5/ट्रैक-2 बैठकें (मस्कट, दोहा, लंदन में); 100 से अधिक पूर्व राजनयिकों और शिक्षाविदों ने दोनों प्रधानमंत्रियों से बातचीत बहाल करने की अपील की (2026) — पर कोई औपचारिक सफलता दर्ज नहीं ◇ |
★★कक्षा और उत्तर के लिए संतुलित निष्कर्ष: “पाठ्यपुस्तक ने कहा था कि परमाणु हथियारों के बाद ‘सर्वव्यापी युद्ध की आशंका कम हो गई है’ — 2025 का संघर्ष दिखाता है कि आशंका कम ज़रूर हुई है (युद्ध पूर्ण पैमाने पर नहीं बढ़ा और चार दिन में रुक गया), पर वह समाप्त नहीं हुई। और सिंधु-जल संधि जैसी सबसे टिकाऊ संस्था भी अब सुरक्षित नहीं रही।”
3 · पाकिस्तान — सेना और लोकतंत्र, 2018 से आगे 【T1–T2】★
पाठ्यपुस्तक कहती है 【पाठ】 — “2008 से पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं।” यह वाक्य आज भी तकनीकी रूप से सही है, पर सेना की भूमिका पर बहस लगातार जारी है।
| मद | विवरण |
|---|---|
| 2018 से | इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बने; अप्रैल 2022 में अविश्वास-प्रस्ताव से हटाए गए |
| ! मई 2023 | इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद व्यापक हिंसक विरोध; 9 मई दंगे, जिनमें सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए |
| फरवरी 2024 | आम चुनाव — इमरान ख़ान की पार्टी के निर्दलीय-समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे अधिक सीटें जीतीं, फिर भी शहबाज़ शरीफ़ (PML-N) गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री बने — विश्लेषक इसे सेना-समर्थित परिणाम मानते हैं ! |
| ! इमरान ख़ान | जेल में बंद, कई मुक़दमों में सज़ा; अगस्त 2026 तक भी रिहा नहीं हुए |
★यह पाठ के पाँच कारणों (सामाजिक दबदबा, भारत से तनातनी, सेना-समर्थक तर्क, अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का अभाव, पश्चिमी देशों की भूमिका) की निरंतरता को दिखाता है — 2008 के बाद भी ‘लोकतांत्रिक शासन’ के भीतर सेना का प्रभाव बना रहा है, यह पैटर्न 2024 के चुनाव में फिर दिखा।
4 · बांग्लादेश — अगस्त 2024 की क्रांति और उसके बाद 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक कहती है 【पाठ】 — “1991 में चुनाव हुए। इसके बाद से बांग्लादेश में बहुदलीय चुनावों पर आधारित प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र कायम है।” 2024–26 में इस वाक्य की सबसे बड़ी परीक्षा हुई — और पाठ की ही एक और पंक्ति चौंकाने वाली तरह से दोहराई गई: “बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई। आंदोलन में छात्र आगे-आगे चल रहे थे।” — यह वाक्य मूलतः 1990 के इरशाद-विरोधी आंदोलन के बारे में है।
4.1 जुलाई–अगस्त 2024 का जन-आंदोलन★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| तात्कालिक कारण | 5 जून 2024 — ढाका उच्च न्यायालय ने मुक्ति-योद्धाओं के वंशजों के लिए 30% सरकारी-नौकरी आरक्षण बहाल किया; 1 जुलाई से छात्र-विरोध शुरू ◇ |
| ! 15 जुलाई 2024 | सत्तारूढ़ छात्र लीग ने ढाका विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला किया — देशव्यापी हिंसा भड़की ◇ |
| !! हताहत | संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की रिपोर्ट (12 फरवरी 2025) — 1 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच लगभग 1,400 मृत (100 से अधिक बच्चे सहित), 11,700 से अधिक हिरासत में; राज्य सुरक्षा बलों और सत्तारूढ़ दल से जुड़े तत्वों को न्यायेतर हत्याओं और यातना का ज़िम्मेदार बताया गया 【प्रा — UN OHCHR】 |
| ★★5 अगस्त 2024 | प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और सैन्य हेलीकॉप्टर से भारत भाग गईं — 15 वर्षों के शासन का अंत; सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान ने अंतरिम सरकार की घोषणा की ◇ |
4.2 मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★8 अगस्त 2024 | नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस ने ‘मुख्य सलाहकार’ पद की शपथ ली — 16 से अधिक सदस्यों की सलाहकार परिषद, जिसमें दो छात्र-नेता भी शामिल ◇ |
| लक्ष्य | व्यवस्था बहाल करना, अर्थव्यवस्था स्थिर करना, संस्थागत सुधार, चुनाव कराना |
| ★राष्ट्रीय सहमति आयोग | 13 फरवरी 2025 गठित, यूनुस की अध्यक्षता में; ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025’ तैयार किया — 17 अक्टूबर 2025 को 26 दलों द्वारा हस्ताक्षरित, 84 सुधार-प्रस्ताव (48 संवैधानिक) ◇ |
4.3 अवामी लीग पर प्रतिबंध, और शेख हसीना को सज़ा★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★12 मई 2025 | अंतरिम सरकार ने आतंकवाद-निरोधक कानून के तहत अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया; चुनाव आयोग ने उसी दिन पार्टी का पंजीकरण निलंबित किया — 2026 के चुनाव से बाहर ◇ |
| ★★17 नवंबर 2025 | अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-1) ने शेख हसीना को (अनुपस्थिति में मुक़दमा) मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी ठहराया और मृत्युदंड सुनाया; पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान ख़ान कमाल को भी मृत्युदंड; सह-अभियुक्त चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून को (सरकारी गवाह बनने पर) 5 वर्ष की सज़ा ◇ |
4.4 फरवरी 2026 का चुनाव — और यूनुस का प्रस्थान★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| घोषणा | 5 अगस्त 2025 (क्रांति की पहली बरसी पर) — यूनुस ने 13वें संसदीय चुनाव 12 फरवरी 2026 को कराने और साथ ही ‘जुलाई चार्टर’ पर जनमत-संग्रह कराने की घोषणा की ◇ |
| ★★12 फरवरी 2026 — परिणाम | बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP), नेता तारिक़ रहमान, को 299 में से लगभग 210 सीटों की भारी जीत; जमात-ए-इस्लामी दूसरे स्थान पर, 68 सीटें ! (स्रोतों में सीट-संख्या 209–212 के बीच अलग-अलग बताई गई है) ◇ |
| ★★16–17 फरवरी 2026 | यूनुस ने पद छोड़ा; तारिक़ रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली — अगस्त 2024 के बाद पहली निर्वाचित सरकार ◇ |
★★इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी विडंबना: ★मुहम्मद यूनुस वही व्यक्ति हैं जिनके ‘ग्रामीण बैंक’ के बारे में पाठ्यपुस्तक पृ. 35 के साइड-बॉक्स में जानकारी जुटाने को कहती है 【पाठ】 — वे ग़रीबी घटाने के मॉडल से देश की अंतरिम सत्ता तक पहुँचे, और डेढ़ साल में सत्ता निर्वाचित सरकार को सौंपकर हट गए।
4.5 भारत-बांग्लादेश संबंध, 2024–2026★★
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| !! शेख हसीना का प्रत्यर्पण | बांग्लादेश ने औपचारिक माँग भेजी (दिसंबर 2024, फिर वर्डिक्ट के बाद 21 नवंबर 2025); भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है — “विधिक प्रक्रिया के अनुसार समीक्षाधीन” — अगस्त 2026 तक कोई प्रत्यर्पण नहीं हुआ ◇ |
| ! अल्पसंख्यक हिंसा | हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के अनुसार अगस्त 2024–जून 2025 में 2,442 से अधिक घटनाएँ, 66 मृत (दिसंबर 2025 तक); दिसंबर 2025–जनवरी 2026 में नए सिरे से हिंसा ! (ये आँकड़े वकालत-समूहों के हैं, सरकारी/UN-सत्यापित नहीं) ◇ |
| ★चुनाव के बाद सुधार | मोदी ने तारिक़ रहमान को बधाई दी; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 17 फरवरी 2026 के शपथ-समारोह में भाग लिया; भारत ने रहमान को सितंबर 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन में आमंत्रित किया ◇ |
| तीस्ता जल-बँटवारा | अब भी अनसुलझा; चीन ने भी तीस्ता-पुनरुद्धार के वित्तपोषण की पेशकश की है |
4.6 चीन और पाकिस्तान की ओर झुकावध्यान
- ★यूनुस की पहली आधिकारिक विदेश-यात्रा चीन थी (मार्च 2025, संबंधों की 50वीं वर्षगाँठ) — लगभग 2.1 अरब डॉलर के चीनी निवेश/अनुदान सुरक्षित किए। ◇
- पाकिस्तान से संबंध सामान्य हुए: यूनुस ने दिसंबर 2024 में शहबाज़ शरीफ़ से मुलाकात की; 13 वर्षों के अंतराल के बाद प्रत्यक्ष व्यापार बहाल (फरवरी 2025 — 50,000 टन पाकिस्तानी चावल का आयात); सीधी उड़ानें और सरल वीज़ा-व्यवस्था बहाल। ◇
- ! चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान त्रिपक्षीय बैठक (कुनमिंग) — विश्लेषक इसे दक्षिण एशिया में ‘भू-राजनीतिक बदलाव’ मानते हैं। ◇
5 · श्रीलंका — 2022 का पतन, IMF और दिसानायके-युग 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक श्रीलंका को क्षेत्र का सबसे सफल देश बताती है 【पाठ】 — सबसे ऊँचा HDI (76वाँ स्थान), सबसे ज़्यादा प्रति व्यक्ति GDP, जनसंख्या-नियंत्रण में प्रथम, सबसे पहले उदारीकरण, और लोकतांत्रिक व्यवस्था “अंदरूनी संघर्ष के झंझावातों को झेलकर भी” कायम। 2022 के पतन और उसके बाद के सुधार ने इस दावे को दो बार परखा — और अंततः इसकी पुष्टि ही की।
5.1 2022 का आर्थिक पतन★★
| कारण | विवरण |
|---|---|
| कोविड-19 | पर्यटन-आय ध्वस्त (2019 में विदेशी मुद्रा-आय का लगभग आधा हिस्सा) |
| भारी विदेशी ऋण | “श्वेत हाथी” अवसंरचना-परियोजनाओं से (महिंदा राजपक्षे के दौर में) |
| 2019 के कर-कटौती | लगभग 1.4 अरब डॉलर के राजस्व की हानि |
| !! अप्रैल 2021 का रासायनिक-उर्वरक प्रतिबंध | अचानक पूर्णतः जैविक खेती थोपी गई — चावल उत्पादन लगभग 20% गिरा, महँगे आयात की ज़रूरत पड़ी |
| परिणाम | मुद्रास्फीति 70% से अधिक (2022 के अंत तक); विदेशी मुद्रा भंडार लगभग शून्य; ईंधन-दवा-भोजन की भारी कमी |
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★अप्रैल 2022 | इतिहास की पहली संप्रभु ऋण-चूक — 6.9 अरब डॉलर का बकाया विदेशी भुगतान न कर सका ◇ |
| ★13 जुलाई 2022 | राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे प्रदर्शनकारियों द्वारा राष्ट्रपति-भवन पर धावा बोलने के बाद वायुसेना के विमान से मालदीव भागे, फिर सिंगापुर, फिर वहीं से ई-मेल द्वारा इस्तीफा; 52 दिन बाद, 2 सितंबर 2022 को वापस लौटे ◇ |
| ★20–21 जुलाई 2022 | रानिल विक्रमसिंघे संसद के गुप्त-मतदान (134/219 वोट) से राष्ट्रपति निर्वाचित ◇ |
5.2 IMF कार्यक्रम और ऋण-पुनर्रचना★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★20 मार्च 2023 | 48-माह का ‘विस्तारित निधि सुविधा’ (EFF) स्वीकृत — लगभग 3 अरब डॉलर 【प्रा — IMF】 |
| समीक्षाएँ | तीसरी समीक्षा — फरवरी 2025; ★पाँचवीं और छठी समीक्षा एक साथ — 27 मई 2026 — कुल संवितरण लगभग 2.4 अरब डॉलर तक पहुँचा 【प्रा — IMF】 |
| अतिरिक्त सहायता | दिसंबर 2025 — 20.6 करोड़ डॉलर की आपातकालीन ‘रैपिड फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट’ सहायता स्वीकृत 【प्रा — IMF】 |
| ! अगस्त 2026 तक | श्रीलंका अभी भी IMF कार्यक्रम के अंतर्गत है (कार्यक्रम लगभग मार्च 2027 तक चलेगा); 2026 की वृद्धि-दर का अनुमान घटाकर लगभग 3% (2025 के 5% से), आंशिक रूप से मध्य-पूर्व से जुड़े तेल-मूल्य आघात के कारण |
| ★★द्विपक्षीय ऋण-पुनर्रचना | 26 जून 2024 — पेरिस फ़ोरम में अंतिम रूप (जापान, फ्रांस, भारत के नेतृत्व वाली आधिकारिक ऋणदाता समिति); ऋण-विभाजन — चीन ~4.7 अरब डॉलर, भारत ~1.74 अरब डॉलर, जापान ~2.68 अरब डॉलर ◇ |
| ★अंतरराष्ट्रीय बॉन्डधारकों से समझौता | 19 सितंबर 2024 सहमति (98% भागीदारी); विनिमय-प्रस्ताव 16 दिसंबर 2024 पूर्ण — लगभग 9.5 अरब डॉलर की ऋण-सेवा बचत ◇ |
5.3 दिसानायके-युग — वामपंथ की ऐतिहासिक जीत★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★21 सितंबर 2024 — राष्ट्रपति चुनाव | अनुरा कुमारा दिसानायके (NPP/JVP-नीत गठबंधन) विजयी — पहले दौर में 42.31% (सजित प्रेमदासा 32.76%); श्रीलंका के इतिहास में पहली बार दूसरे वरीयता-दौर की गिनती हुई ◇ |
| ★★महत्व | पहली बार किसी वामपंथी/जेवीपी-संबद्ध नेता की राष्ट्रपति-जीत — राजपक्षे/UNP की परंपरागत राजनीति के विरुद्ध जनादेश |
| ★★14 नवंबर 2024 — संसदीय चुनाव | NPP को 225 में से 159 सीटें (दो-तिहाई बहुमत से अधिक) — 2020 में केवल 3 सीटों से यह अब तक की सबसे बड़ी संसदीय जीत; मुख्य विपक्षी SJB को 40 सीटें ◇ |
5.4 अर्थव्यवस्था, अगस्त 2026 तक★
| मान | आँकड़ा |
|---|---|
| वृद्धि-दर | 2024 में 4.5%, 2025 में ~5%; 2026 का अनुमान घटकर ~3–4% (तेल-शोधनशाला बंद होने और चक्रवात ‘दित्वाह’ के बाद-प्रभाव से) ! (चक्रवात का पूरा विवरण स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका) |
| मुद्रास्फीति | 2022 के 70%+ से घटकर 2026 में लगभग 5–6% अनुमानित |
| पर्यटन | समग्र रूप से बढ़ोतरी, पर अप्रैल–मई 2026 में मध्य-पूर्व उड़ान-व्यवधान से थोड़ी गिरावट |
5.5 भारत-श्रीलंका संबंध, 2023–2026★
- ★★3–5 अप्रैल 2025 — मोदी की यात्रा (दिसानायके के कार्यकाल में पहली विदेशी यात्रा उन्हें प्राप्त हुई) — 7 समझौतों पर हस्ताक्षर; पहला औपचारिक द्विपक्षीय रक्षा-सहयोग समझौता (5-वर्षीय, विस्तार योग्य); त्रिंकोमाली को ऊर्जा-केंद्र के रूप में विकसित करने की सहमति; लगभग 1.2 अरब डॉलर की पनडुब्बी विद्युत-ग्रिड जोड़ने की चर्चा ◇
- ! अदानी पवन-ऊर्जा परियोजना — दिसानायके ने चुनाव-प्रचार में इसकी समीक्षा/निरस्तीकरण का वादा किया था; पारदर्शिता और मछुआरों के विरोध के बीच परियोजना विवादास्पद बनी रही ! (अगस्त 2026 तक अंतिम स्थिति स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं हो सकी)
- मछुआरों का मुद्दा: श्रीलंकाई जल में पकड़े गए भारतीय मछुआरों की रिहाई पर लगातार दबाव जारी।
5.6 चीन-श्रीलंका संबंधध्यान
- 2022–23 में ‘यूआन वांग 5’ और ‘शी यान 6’ जासूसी-पोत विवाद के बाद जनवरी 2024 से एक वर्ष के लिए विदेशी शोध-पोतों पर रोक; 2025 से यह रोक हटाई गई — भारत-चीन तनाव में नया आयाम। ◇
- कोलंबो पोर्ट सिटी — चीनी-वित्तपोषित विशेष आर्थिक क्षेत्र में 250 से अधिक कंपनियाँ पंजीकृत (मई 2026 तक); चरण-II के लिए लगभग 30 करोड़ डॉलर का नया निवेश (जनवरी 2026)।
- चीन श्रीलंका का सबसे बड़ा एकल द्विपक्षीय ऋणदाता बना हुआ है (~4.7 अरब डॉलर)।
★★यह पाठ्यपुस्तक के दावे का सबसे मज़बूत आधुनिक प्रमाण है: “अंदरूनी संघर्ष के झंझावातों को झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी है।” 2022 का आर्थिक पतन इतिहास का सबसे बड़ा संकट था — पर सत्ता-परिवर्तन हर बार संविधान और चुनाव के रास्ते ही हुआ: विक्रमसिंघे संसद से, फिर दिसानायके सीधे चुनाव से। यही ‘मानव विकास और वित्तीय स्थिरता अलग-अलग चीज़ें हैं’ का सबसे अच्छा प्रमाण है।
6 · नेपाल — 2025 का जेन-ज़ी आंदोलन और नया लोकतंत्र 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक दो आंदोलनों पर रुकती है — 1990 और अप्रैल 2006 — और कहती है कि 2008 में गणराज्य बना, 2015 में नया संविधान अपनाया गया। 2025–26 में नेपाल ने तीसरा जन-आंदोलन और सबसे बड़ा चुनावी परिवर्तन देखा।
6.1 सितंबर 2025 का ‘जेन-ज़ी’ आंदोलन★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| तात्कालिक कारण | सरकार ने व्यापक सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाया, जो भ्रष्टाचार-विरोधी जन-आक्रोश से जुड़ गया |
| ★8 सितंबर 2025 | काठमांडू में जेन-ज़ी प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा; सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 19 मृत; प्रदर्शनकारियों ने संसद-भवन और नेताओं के घर जला दिए ◇ |
| ★★9 सितंबर 2025 | प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली का इस्तीफा ◇ |
| ★★12–13 सितंबर 2025 | राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग की और पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया — नेपाल की पहली महिला सरकार-प्रमुख; स्पष्ट जनादेश — छह महीने के भीतर चुनाव, यानी लगभग 4/5 मार्च 2026 तक ◇ |
6.2 मार्च 2026 का चुनाव — ‘बालेन’ की ऐतिहासिक जीत★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★5 मार्च 2026 | राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP), नेता बालेंद्र ‘बालेन’ शाह — रैपर से काठमांडू के मेयर बने, जेन-ज़ी आंदोलन का चेहरा — ने 165 में से 122 सीधे-निर्वाचित सीटें जीतीं — नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा बहुमत ◇ |
| ★★27 मार्च 2026 | बालेन शाह ने नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री (35 वर्ष) के रूप में शपथ ली — कार्की का अंतरिम कार्यकाल उसी दिन समाप्त ◇ |
6.3 2025 के राजतंत्र-समर्थक प्रदर्शन — पाठ्यपुस्तक से बिल्कुल उलट दिशाध्यान
| तिथि | घटना |
|---|---|
| ! 9 मार्च 2025 | लगभग 10,000 समर्थकों ने काठमांडू हवाई-अड्डे पर निर्वासित पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र का स्वागत किया — राजतंत्र और हिंदू-राष्ट्र का दर्जा बहाल करने की माँग |
| !! 28 मार्च 2025 | इससे बड़ा, हिंसक प्रदर्शन — 2 मृत (एक पत्रकार सहित), 100 से अधिक घायल; दंगे में बदला |
| संवैधानिक स्थिति | नेपाल का संविधान राजतंत्र की बहाली के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत माँगता है — राजतंत्र-समर्थकों के पास यह बहुमत नहीं |
★★यह पाठ्यपुस्तक के केंद्रीय दावे — “पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है” — की सबसे दिलचस्प जटिलता है। 2008 में राजतंत्र समाप्त हुआ; 2025 में उसी वर्ष लोकतंत्र-विरोधी और लोकतंत्र-समर्थक — दोनों तरह के जन-आंदोलन देखे गए। इसका अर्थ है कि ‘लोकतंत्र स्वीकृत मूल्य है’ यह उतना ही सच है जितना यह कि लोकतांत्रिक संस्थाओं से असंतोष भी गहरा है।
6.4 भारत और चीन के साथ संबंध — नई सरकार के अंतर्गत★
- भारत ने कार्की की अंतरिम सरकार का स्वागत किया (12–13 सितंबर 2025); मोदी ने कार्की और फिर बालेन शाह — दोनों को बधाई दी; शाह ने “संबंध मज़बूत करने का वादा” किया। ◇
- ! चीन के प्रति बालेन शाह का रुख ‘सतर्क संतुलन’ का बताया जाता है — विश्लेषकों के अनुसार (राय-आधारित विश्लेषण, प्राथमिक स्रोत नहीं) उन्होंने चीन-नेपाल औद्योगिक पार्क (दमक) को अपने प्रचार में शामिल नहीं किया और भारत-चीन दोनों दूतावासों से मुलाक़ात की। ◇
7 · भूटान — शांत राजतंत्र से आगे 【T2】★
पाठ्यपुस्तक कहती है 【पाठ】 — “भूटान 2008 में संवैधानिक राजतंत्र बन गया… राजा के नेतृत्व में, बहुदलीय लोकतंत्र के रूप में उभरा।” यह अकेला दक्षिण एशियाई देश है जहाँ 2018 के बाद भी बड़ी उथल-पुथल नहीं हुई — पर दो बड़े घटनाक्रम पाठ के दायरे से बाहर हैं।
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★9 जनवरी 2024 — चुनाव | पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), नेता शेरिंग तोबगे, ने 47 में से 30 सीटें जीतीं (नई पार्टी ‘भूटान तेंद्रेल पार्टी’ को 17); तोबगे ने 28 जनवरी 2024 को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली (पहले 2013–18 में भी रह चुके थे) ◇ |
| ★★गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) | 17 दिसंबर 2023 को राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक द्वारा घोषित; दिसंबर 2024 में राजकीय चार्टर से विशेष प्रशासनिक क्षेत्र स्थापित (~2,600 वर्ग किमी, भूटान का 5%); लक्ष्य — पहला चरण 2035 तक |
| भारत-भूटान जल-विद्युत | पुनातसांगछू-II परियोजना (1,020 मेगावाट, पूर्णतः भारत-वित्तपोषित) ने 19 सितंबर 2025 से भारत को बिजली निर्यात शुरू किया; मोदी ने 11 नवंबर 2025 को भूटान यात्रा पर राजा के साथ इसका उद्घाटन किया; शुल्क-निर्यात प्रोटोकॉल पर 9 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर |
★भूटान का पाठ में उल्लेख न होने वाला सबसे बड़ा योगदान 【पाठ】 — “भूटान से अपने काम का संचालन कर रहे पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों… को भूटान ने अपने क्षेत्र से खदेड़ भगाया” — यह नीति आज भी जारी है, और गेलेफू परियोजना भूटान-भारत सहयोग का नया, बड़ा रूप है।
8 · मालदीव — ‘इंडिया आउट’ से ‘रीसेट’ तक 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक मालदीव पर रुकती है 【पाठ】 — “2018 में हुए चुनावों में मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) की जीत हुई।” 2023 के बाद पूरी दिशा उलट गई, और फिर 2025 में आंशिक रूप से वापस मुड़ी।
8.1 मुइज़्ज़ू और ‘इंडिया आउट’★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★2023 चुनाव | मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने ‘इंडिया आउट’ के स्पष्ट भारत-विरोधी प्रचार पर जीत हासिल की; 17 नवंबर 2023 को शपथ ◇ |
| ★★10 मई 2024 — सैनिकों की वापसी की समय-सीमा | मुइज़्ज़ू ने लगभग 89 भारतीय सैन्य-कर्मियों (हेलीकॉप्टर/विमान चलाने वाले, चिकित्सा-निकासी हेतु) की पूर्ण वापसी की समय-सीमा तय की; भारत ने उन्हें असैनिक तकनीकी विशेषज्ञों से बदला — समय-सीमा से पहले ही अंतिम सैन्य-कर्मी वापस भेजे गए ◇ |
| चीन से निकटता | जनवरी 2024 — मुइज़्ज़ू की पहली राजकीय यात्रा चीन; 20 समझौतों पर हस्ताक्षर (सैन्य सहायता सहित); संबंध “व्यापक सामरिक सहकारी साझेदारी” तक उन्नत; चीन-मालदीव मुक्त व्यापार समझौता (2014 में हस्ताक्षरित, 2018 से निष्क्रिय) 1 जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ ◇ |
8.2 2025–26 का ‘रीसेट’★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★25–26 जुलाई 2025 — मोदी की राजकीय यात्रा | मालदीव के 60वें स्वतंत्रता-दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में; भारत ने मुद्रा-विनिमय समझौतों के ज़रिये लगभग 76 करोड़ डॉलर की सहायता दी; संबंध “व्यापक आर्थिक और समुद्री-सुरक्षा साझेदारी” तक उन्नत ◇ |
| ★पहलगाम पर रुख | मुइज़्ज़ू ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की — आतंकवाद-विरोधी साझेदारी का संकेत |
| आगे के समझौते | मत्स्य-पालन, मौसम-विज्ञान और डिजिटल अवसंरचना में नए समझौते |
| ★★अगस्त 2026 की स्थिति | मुइज़्ज़ू राष्ट्रपति बने हुए हैं (अगला चुनाव 2028); भारत से संबंध व्यापक रूप से सुधरे हैं, जबकि चीन से संबंध भी समानांतर रूप से जारी — मालदीव अधिक ‘संतुलनकारी’ विदेश-नीति अपना रहा है |
★★यह इस पूरे अध्याय की सबसे स्पष्ट मिसाल है कि छोटे पड़ोसी देश भारत के साथ अपनी दूरी और नज़दीकी को कैसे ‘संतुलित’ करते हैं — ठीक वैसे ही जैसे पाठ्यपुस्तक कहती है 【पाठ】 — “छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है” — पर आर्थिक ज़रूरत जब बढ़ती है, तो वही देश व्यावहारिक साझेदारी की ओर लौट आते हैं।
9 · अफ़गानिस्तान — तालिबान शासन, 2021–2026 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक अफ़गानिस्तान का ज़िक्र केवल दक्षेस-सदस्यता (2007) के संदर्भ में करती है 【पाठ】। 2021 के बाद जो हुआ, वह क्षेत्र की सबसे बड़ी और सबसे कम-चर्चित घटना है।
9.1 तालिबान की सत्ता-वापसी★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★15 अगस्त 2021 | काबुल तालिबान के हाथों गिरा; राष्ट्रपति अशरफ़ गनी देश छोड़कर भाग गए (संयुक्त अरब अमीरात); लगभग बिना किसी प्रतिरोध के सरकार का पतन ◇ |
| ★30 अगस्त 2021 | अमरीकी/नाटो सेनाओं की पूर्ण वापसी पूरी हुई — 20 वर्ष के युद्ध का अंत ◇ |
9.2 शासन की प्रकृति — महिलाओं और लड़कियों पर प्रतिबंधध्यान
- ★★अफ़गानिस्तान विश्व का इकलौता देश है जहाँ लड़कियों पर माध्यमिक व उच्च शिक्षा पूर्णतः प्रतिबंधित है
— लगभग 15–22 लाख लड़कियाँ प्रभावित। 【द्वि — HRW】
- दिसंबर 2024 — महिलाओं को चिकित्सा/नर्सिंग संस्थानों से भी रोका गया;
- सितंबर 2025 — महिला लेखकों की पुस्तकें विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम से हटाई गईं।
- कार्य-प्रतिबंध: अधिकांश सरकारी नौकरियों, गैर-सरकारी संगठनों (दिसंबर 2022) और संयुक्त राष्ट्र-कर्मी पद (अप्रैल 2023) से महिलाएँ प्रतिबंधित; 4 जुलाई 2023 के फ़रमान से देशभर के सौंदर्य-सैलून बंद।
9.3 अंतरराष्ट्रीय मान्यता — रूस पहला देश★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★★3 जुलाई 2025 | रूस तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने वाला विश्व का पहला देश बना — तालिबान राजदूत के परिचय-पत्र स्वीकार किए, मॉस्को दूतावास पर तालिबान ध्वज फहराया; इससे पहले अप्रैल 2025 में रूस ने तालिबान को ‘आतंकवादी संगठन’ सूची से हटाया था ◇ |
| ! अगस्त 2026 तक | रूस के अलावा किसी अन्य देश ने औपचारिक मान्यता नहीं दी है |
| संयुक्त राष्ट्र सीट | तालिबान को लगातार चौथे वर्ष अफ़गानिस्तान की UN सीट नहीं दी गई — सीट अब भी पूर्व (गनी-युगीन) सरकार के दूत के पास |
| मानवीय संकट | 2026 की सहायता-योजना — 2.19 करोड़ लोगों को सहायता की ज़रूरत, 1.71 अरब डॉलर की अपील; मई 2026 तक केवल ~16% राशि जुटी 【प्रा — UN OCHA】 |
9.4 भारत-अफ़गानिस्तान संबंध★★
| मद | विवरण |
|---|---|
| तकनीकी मिशन | जून 2022 से काबुल में (पूर्ण मान्यता के बिना) |
| ★★10 अक्टूबर 2025 | तालिबान विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्तकी की पहली भारत-यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मिशन को “तत्काल प्रभाव से” पूर्ण दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की — यह औपचारिक मान्यता से कम, पर बड़ा क़दम है 【प्रा — MEA】 |
| संदर्भ | पाकिस्तान की दिसंबर 2024 की सीमापार हवाई कार्रवाई (46 मृत) के बाद भारत ने जुड़ाव गहरा किया; भारत ने अब भी तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है |
9.5 पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान संघर्ष, 2025–26ध्यान
| मद | विवरण |
|---|---|
| अक्टूबर 2025 | पाकिस्तान ने काबुल में TTP-नेतृत्व को निशाना बनाकर हमले किए — 2021 के बाद की सबसे घातक झड़पें; क़तर-मध्यस्थता से युद्धविराम, पर अस्थिर |
| !! फरवरी–मार्च 2026 — बड़ा संघर्ष | 26 फरवरी 2026 — अफ़ग़ान सेना का सीमापार आक्रमण; 27 फरवरी — पाकिस्तान की जवाबी हवाई/ज़मीनी कार्रवाई (काबुल, कंधार और सीमावर्ती क्षेत्रों पर); तालिबान का दावा — काबुल के एक नशा-मुक्ति अस्पताल पर हमले में 400+ मृत (पाकिस्तान इससे इनकार करता है, आतंकी-शिविर बताता है) !! (यह विवरण मुख्यतः Wikipedia/द्वितीयक संकलन से है — प्रकाशन से पहले Reuters/AP या UN स्रोत से पुनःपुष्टि आवश्यक) |
| शरणार्थी-निर्वासन | 2025 में लगभग 28 लाख अफ़ग़ान ईरान (~18 लाख) और पाकिस्तान (~9.3 लाख) से निर्वासित/वापस भेजे गए; लगभग 67% बलपूर्वक, 60% महिलाएँ और बच्चे 【द्वि — Amnesty International】 |
10 · म्यांमार — तख्तापलट से ‘चुनाव’ तक 【T2】★
पाठ्यपुस्तक म्यांमार का ज़िक्र केवल “इस क्षेत्र की चर्चा में जब-तब… शामिल किया जाता है” के रूप में करती है 【पाठ】, और बिम्सटेक में इसकी सदस्यता का कोई उल्लेख नहीं। म्यांमार 2021 से भारत के पूर्वी पड़ोस का सबसे अस्थिर देश रहा है।
| मद | विवरण |
|---|---|
| ★1 फरवरी 2021 — सैन्य तख्तापलट | सेना ने सत्ता हथियाई; राष्ट्रपति विन मिंट और स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची को हिरासत में लिया; सेनाध्यक्ष मिन आंग हलाइंग सत्ता-प्रमुख बने ◇ |
| ! आंग सान सू ची की स्थिति | 2022 में 33 वर्ष की सज़ा (राजनीतिक रूप से प्रेरित मानी जाती है), माफ़ी से घटकर ~18 वर्ष 9 माह; 30 अप्रैल 2026 को जेल से नज़रबंदी में स्थानांतरित (बौद्ध पर्व-क्षमादान के तहत) — वर्षों में पहली सार्वजनिक छवि; अभी भी 13+ वर्ष शेष ◇ |
| गृहयुद्ध | राष्ट्रीय एकता सरकार (NUG) और जन रक्षा बल (PDF), जातीय सशस्त्र संगठनों के साथ मिलकर लगभग 60% क्षेत्र पर नियंत्रण का अनुमान, पर जुंटा अधिकांश जनसंख्या-केंद्रों पर काबिज़; दिसंबर 2025 में 19 सशस्त्र गुटों का नया ‘स्प्रिंग रिवोल्यूशन अलायंस’ |
| !! दिसंबर 2025–जनवरी 2026 का ‘चुनाव’ | जुंटा ने बहु-चरणीय चुनाव कराया (केवल संघर्ष-मुक्त, जुंटा-नियंत्रित लगभग एक-तिहाई निर्वाचन-क्षेत्रों में); प्रॉक्सी ‘यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP)’ ने ~80% सीटों का दावा किया; NLD (2023 में भंग) ने बहिष्कार किया; UN, HRW और पश्चिमी देशों ने इसे “दिखावटी” चुनाव बताया |
| ★3–10 अप्रैल 2026 | मिन आंग हलाइंग नई संसद द्वारा राष्ट्रपति निर्वाचित और शपथ-ग्रहण — 5-वर्षीय कार्यकाल के लिए ‘असैनिक चेहरे’ के साथ सैन्य-शासन औपचारिक |
| भारत-म्यांमार | मोदी की मिन आंग हलाइंग से कम-से-कम दो मुलाक़ातें (2025, बिम्सटेक/SCO सम्मेलनों के इतर); जून 2026 में मिन आंग हलाइंग की पहली भारत-राजकीय यात्रा — व्यापार, संपर्क और सुरक्षा पर चर्चा |
! यह पाठ्यपुस्तक की उस पंक्ति को नए संदर्भ में जोड़ता है 【पाठ】 — “कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता।” म्यांमार दक्षिण एशिया का सदस्य नहीं, पर बिम्सटेक के ज़रिये इस क्षेत्र से गहरा जुड़ा है — और उसका संकट भारत के पूर्वोत्तर की सीमा-सुरक्षा और शरणार्थी-नीति दोनों को प्रभावित करता है।
11 · बिम्सटेक — दक्षेस का सक्रिय विकल्प 【T1–T2】★★
पाठ्यपुस्तक बिम्सटेक का नाम तक नहीं लेती — पर आज यह दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग का सबसे सक्रिय मंच है, ठीक उसी समय जब दक्षेस निष्क्रिय पड़ा है।
| मद | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) |
| स्थापना | 1997, बैंकॉक घोषणा |
| ★सदस्य — सात | बांग्लादेश · भूटान · भारत · म्यांमार · नेपाल · श्रीलंका · थाईलैंड — ! पाकिस्तान इसमें नहीं है |
| सचिवालय | ढाका |
| ★★चार्टर लागू | 20 मई 2024 — सभी सदस्यों के अनुसमर्थन के बाद, संगठन को वैधानिक व्यक्तित्व मिला, नए पर्यवेक्षक/सदस्य जोड़ने की राह खुली 【प्रा — BIMSTEC सचिवालय】 |
| ★★छठा शिखर सम्मेलन | 2–4 अप्रैल 2025, बैंकॉक (थाईलैंड) — 7 वर्षों में पहला प्रत्यक्ष शिखर सम्मेलन; थाई प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा की अध्यक्षता में; “बैंकॉक विज़न 2030” अपनाया गया, विषय — “PRO BIMSTEC”; प्रधानमंत्री मोदी ने भाग लिया 【प्रा — BIMSTEC सचिवालय】 |
★★यह भारत की रणनीति का सार है — जहाँ दक्षेस भारत-पाक विवाद में जकड़ा है, वहाँ बिम्सटेक दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है — और यह पाठ्यपुस्तक की ‘बांग्लादेश की एक्ट ईस्ट नीति में भागीदारी’ वाली पंक्ति से सीधे जुड़ता है 【पाठ】। यदि परीक्षा में ‘भारत की क्षेत्रीय रणनीति’ पर प्रश्न आए, तो दक्षेस के ठहराव और बिम्सटेक की सक्रियता की यह तुलना उत्तर को सबसे मज़बूत बनाती है।
12 · चार प्रकरण-अध्ययन 【T1–T2】
प्रकरण 1 — सिंधु-जल संधि : जब सबसे टिकाऊ संस्था भी टूटी★★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| पाठ का दावा 【पाठ】 | “यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।” |
| 65 वर्षों का इतिहास | 1965, 1971, 1999 के युद्धों के बावजूद कायम रही |
| ★★2025 का मोड़ | पहलगाम हमले के बाद 23 अप्रैल 2025 को पहली बार ‘स्थगन में’ |
| ! विवाद | हेग का मध्यस्थता-न्यायालय इसे अवैध मानता है; भारत उस न्यायालय को ही अस्वीकार करता है |
| ★सबक | तकनीकी और तीसरे-पक्ष-सत्यापित संस्थाएँ भी राजनीतिक संकट में असुरक्षित हो सकती हैं — यह इस क्षेत्र के हर ‘शांति के उपाय’ के लिए चेतावनी है। |
प्रकरण 2 — बांग्लादेश : ‘सड़क से लोकतंत्र’ का पैटर्न फिर दोहराया गया★★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| पाठ का वाक्य 【पाठ】 | “बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई। आंदोलन में छात्र आगे-आगे चल रहे थे।” (मूलतः 1990 के बारे में) |
| ★★2024 में दोहराव | छात्र-नेतृत्व वाला आंदोलन → प्रधानमंत्री का पतन (5 अगस्त 2024) |
| अंतर | 1990 में सैनिक शासक इरशाद गए थे; 2024 में निर्वाचित प्रधानमंत्री हसीना गईं — यानी चुनाव जीतना भी वैधता की गारंटी नहीं देता, यदि संस्थाएँ कमज़ोर हों |
| ★समापन | डेढ़ साल की अंतरिम सरकार के बाद फरवरी 2026 का चुनाव — सत्ता निर्वाचित सरकार को वापस सौंपी गई |
| सबक | लोकतांत्रिक आकांक्षा और लोकतांत्रिक स्थिरता — दोनों अलग चीज़ें हैं, पर दक्षिण एशिया बार-बार पहले से दूसरे तक पहुँचता है। |
प्रकरण 3 — श्रीलंका : संकट से सुधार तक की सबसे स्पष्ट रेखा★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| 2022 | इतिहास की पहली संप्रभु ऋण-चूक; राष्ट्रपति देश छोड़कर भागे |
| 2023–24 | IMF कार्यक्रम; ऋण-पुनर्रचना पूर्ण |
| सितंबर–नवंबर 2024 | वामपंथी NPP गठबंधन की ऐतिहासिक चुनावी जीत — राष्ट्रपति और संसद दोनों में |
| ★★सबक | यह क्षेत्र का इकलौता उदाहरण है जहाँ आर्थिक पतन के बाद सत्ता पूरी तरह चुनावी और संवैधानिक रास्ते से बदली — कोई सैन्य हस्तक्षेप, कोई असंवैधानिक अंतरिम सत्ता नहीं। |
प्रकरण 4 — अफ़गानिस्तान : जब पड़ोसी देश की सरकार को कोई मान्यता ही न दे★★
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| स्थिति | तालिबान 2021 से सत्ता में, पर 2026 तक विश्व का लगभग कोई भी देश उसे मान्यता नहीं देता — रूस अकेला अपवाद (जुलाई 2025) |
| भारत की नीति | मान्यता नहीं, पर व्यावहारिक जुड़ाव — तकनीकी मिशन को दूतावास का दर्जा (अक्टूबर 2025) |
| सबक | कूटनीति में ‘मान्यता’ और ‘जुड़ाव’ दो अलग सीढ़ियाँ हैं — भारत दूसरी सीढ़ी पर है, पहली पर नहीं। |
13 · संक्षिप्ताक्षर-कोश 【T1–T2】
क्षेत्रीय संगठन
| संक्षेप | पूरा नाम | हिंदी / टिप्पणी |
|---|---|---|
| ★★दक्षेस / SAARC | South Asian Association for Regional Cooperation | 1985; सचिवालय काठमांडू; 2016 से कोई शिखर सम्मेलन नहीं |
| ★★बिम्सटेक / BIMSTEC | Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation | 1997; सचिवालय ढाका; चार्टर मई 2024 से लागू; पाकिस्तान सदस्य नहीं |
| साफ्टा / SAFTA | South Asian Free Trade Area | 2004 हस्ताक्षर, 2006 प्रभावी |
| सापटा / SAPTA | South Asian Preferential Trade Arrangement | 1993 |
| NUG | National Unity Government (म्यांमार) | राष्ट्रीय एकता सरकार |
| People’s Defence Forces (म्यांमार) | जन रक्षा बल |
घटनाएँ और संधियाँ
| संक्षेप | पूरा नाम | विवरण |
|---|---|---|
| ★★IWT | Indus Waters Treaty | 1960; 23 अप्रैल 2025 से स्थगन में |
| ★★TRF | The Resistance Front | पहलगाम हमले की ज़िम्मेदारी लेने वाला संगठन |
| ★★ICT | International Crimes Tribunal (बांग्लादेश) | शेख हसीना को मृत्युदंड, 17 नवंबर 2025 |
| BNP | Bangladesh Nationalist Party | तारिक़ रहमान; फरवरी 2026 चुनाव-विजेता |
| RSP | Rastriya Swatantra Party (नेपाल) | बालेन शाह; मार्च 2026 चुनाव-विजेता |
| NPP/JVP | National People’s Power / Janatha Vimukthi Peramuna (श्रीलंका) | अनुरा कुमारा दिसानायके |
| PDP | People’s Democratic Party (भूटान) | शेरिंग तोबगे |
| GMC | Gelephu Mindfulness City | भूटान की नई विशेष प्रशासनिक परियोजना |
| USDP | Union Solidarity and Development Party (म्यांमार) | सेना-समर्थित प्रॉक्सी दल |
पद और अवधारणाएँ
| पद | अर्थ |
|---|---|
| DGMO | Director General of Military Operations — महानिदेशक सैन्य अभियान |
| ऑपरेशन सिंदूर | मई 2025 का भारतीय हवाई अभियान |
| बुनियान-उम-मरसूस | पाकिस्तान का जवाबी अभियान, 10 मई 2025 |
| मुख्य सलाहकार | Chief Adviser — बांग्लादेश की अंतरिम सरकार-प्रमुख का पद |
| इंडिया आउट | मुइज़्ज़ू का 2023 का भारत-विरोधी प्रचार-अभियान |
| ट्रैक-1.5 / ट्रैक-2 | अर्ध-सरकारी / गैर-सरकारी बैक-चैनल कूटनीतिक वार्ता |
14 · अभ्यास प्रश्न 【सभी स्तर】
1 अंक
- दक्षेस का अंतिम शिखर सम्मेलन कब और कहाँ हुआ? — 18वाँ, नवंबर 2014, काठमांडू
- 19वाँ शिखर सम्मेलन क्यों रद्द हुआ? — उड़ी हमले के बाद भारत के बहिष्कार से; फिर बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान, भूटान भी हटे
- दक्षेस का सचिवालय कहाँ है? — काठमांडू
- ★पहलगाम आतंकी हमला कब हुआ और कितने मृत? — 22 अप्रैल 2025; 26 मृत
- ★★‘ऑपरेशन सिंदूर’ क्या था? — मई 2025 में भारत का पाकिस्तान/PoK के 9 आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला
- ★★सिंधु-जल संधि कब और क्यों स्थगित की गई? — 23 अप्रैल 2025; पाकिस्तान के सीमापार आतंकवाद-समर्थन के आरोप में
- भारत-पाकिस्तान युद्धविराम कब हुआ? — 10 मई 2025
- ★बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कब इस्तीफा दिया? — 5 अगस्त 2024
- अंतरिम सरकार का नेतृत्व किसने किया? — मुहम्मद यूनुस (मुख्य सलाहकार)
- ★★शेख हसीना को कब और क्या सज़ा मिली? — 17 नवंबर 2025; ICT ने मृत्युदंड सुनाया
- फरवरी 2026 का बांग्लादेश चुनाव किसने जीता? — बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP), तारिक़ रहमान
- ★श्रीलंका ने संप्रभु ऋण-चूक कब की? — अप्रैल 2022; 6.9 अरब डॉलर
- सितंबर 2024 में श्रीलंका का राष्ट्रपति कौन बना? — अनुरा कुमारा दिसानायके (NPP/JVP)
- ★★नेपाल में सितंबर 2025 में क्या हुआ? — जेन-ज़ी आंदोलन से PM ओली का इस्तीफा; सुशीला कार्की अंतरिम PM बनीं
- मार्च 2026 का नेपाल चुनाव किसने जीता? — राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP), बालेन शाह
- भूटान में जनवरी 2024 का चुनाव किसने जीता? — पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, शेरिंग तोबगे
- ★मालदीव में सैनिकों की वापसी कब पूरी हुई? — 10 मई 2024 की समय-सीमा से पहले
- ★★तालिबान को औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश कौन है? — रूस, 3 जुलाई 2025
- काबुल कब गिरा और अमरीकी सेनाएँ कब निकलीं? — 15 अगस्त 2021; 30 अगस्त 2021
- म्यांमार में तख्तापलट कब हुआ? — 1 फरवरी 2021
- बिम्सटेक चार्टर कब लागू हुआ? — 20 मई 2024
- छठा बिम्सटेक शिखर सम्मेलन कब-कहाँ हुआ? — अप्रैल 2025, बैंकॉक
- बिम्सटेक के सदस्य कौन हैं, पाकिस्तान है या नहीं? — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड; पाकिस्तान नहीं
2–4 अंक
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पूरी घटनाक्रम बताइए — पहलगाम हमले से युद्धविराम तक।
- सिंधु-जल संधि 65 वर्षों तक कैसे टिकी और 2025 में क्या बदला?
- बांग्लादेश में अगस्त 2024 और फरवरी 2026 की घटनाओं को जोड़कर बताइए — ‘सड़क से लोकतंत्र’ पैटर्न क्या दिखाता है?
- श्रीलंका के 2022 के संकट और उसके बाद के सुधार का क्रम समझाइए।
- नेपाल में 2025 में एक साथ राजतंत्र-समर्थक और लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन क्यों हुए?
- दक्षेस और बिम्सटेक की तुलना कीजिए — कौन ज़्यादा सक्रिय है और क्यों?
- अफ़गानिस्तान में तालिबान शासन को मान्यता का सवाल क्यों जटिल है?
6 अंक
- “दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चुका है” — इस दावे की 2024-26 की घटनाओं के आलोक में परीक्षा कीजिए।
- भारत-पाकिस्तान संबंधों में 2025 का संकट पाठ्यपुस्तक के ‘परमाणु हथियारों से युद्ध की आशंका कम हुई है’ वाले दावे को किस तरह जटिल बनाता है?
- दक्षिण एशिया के छोटे देशों (नेपाल, मालदीव, बांग्लादेश) में 2024-26 में हुए सत्ता-परिवर्तनों में क्या समानता है?
15 · स्रोत-सूची
प्राथमिक स्रोत ◆
- NCERT — समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1), अध्याय 5/3, पृ. 29–44 【पाठ】
- भारत विदेश मंत्रालय — विदेश सचिव का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बयान — mea.gov.in
- भारत विदेश मंत्रालय — Operation Sindoor पेज — mea.gov.in
- भारत विदेश मंत्रालय — काबुल तकनीकी मिशन का दूतावास में उन्नयन — mea.gov.in
- Tribune India — “Indus Water Treaty remains suspended” — MEA (7 मई 2026) — tribuneindia.com
- UN News — सुरक्षा परिषद परामर्श, भारत-पाकिस्तान — news.un.org
- UN OHCHR — Bangladesh Fact-Finding Report (12 फरवरी 2025) — ohchr.org
- IMF — Sri Lanka: Combined 5th and 6th Reviews under EFF (27 मई 2026) — imf.org
- UN OCHA — Afghanistan Humanitarian Needs and Response Plan 2026 — unocha.org
- BIMSTEC सचिवालय — Charter Enters Into Force — bimstec.org
- BIMSTEC सचिवालय — 6th BIMSTEC Summit, Bangkok — bimstec.org
द्वितीयक स्रोत ◇ 12. Al Jazeera — “Act of war: What happened in Kashmir attack” — aljazeera.com 13. Al Jazeera — “Operation Sindoor: What’s the significance” — aljazeera.com 14. Stimson Center — “Four Days in May: The India-Pakistan Crisis of 2025” — stimson.org 15. TIME — India-Pakistan ceasefire, Trump mediation claims — time.com 16. Al Jazeera — Modi denies US mediation (18 जून 2025) — aljazeera.com 17. Al Jazeera — “Are India and Pakistan quietly preparing to restart dialogue” (23 मई 2026) — aljazeera.com 18. HRW — Bangladesh: Hasina Resigns amid Mass Protests — hrw.org 19. HRW — Bangladesh: Hasina Found Guilty of Crimes Against Humanity (17 नवंबर 2025) — hrw.org 20. Al Jazeera — Bangladesh 2026 elections explained — aljazeera.com 21. France24 — Yunus resigns, hands power to elected government (16 फरवरी 2026) — france24.com 22. The Diplomat — “Is the ice finally breaking in Bangladesh-India relations” — thediplomat.com 23. Washington Post — Sri Lanka defaults on external debt — washingtonpost.com 24. Al Jazeera/BBC — Dissanayake wins Sri Lanka presidency — feeds.bbci.co.uk 25. ISAS/NUS — Sri Lanka’s Parliamentary Election: NPP Wins Historic Super-Majority — isas.nus.edu.sg 26. DD News — India-Sri Lanka Defence Cooperation Agreement, Modi visit — ddnews.gov.in 27. Bloomberg — Nepal PM resigns after violent protests (9 सितंबर 2025) — bloomberg.com 28. NPR — Nepali party led by ex-rapper set for landslide win (मार्च 2026) — npr.org 29. Wikipedia — 2025 Nepalese pro-monarchy protests — en.wikipedia.org 30. Election Commission of Bhutan — Declaration of Results, 2024 — ecb.bt 31. Al Jazeera — India troops begin Maldives pullout — aljazeera.com 32. Lowy Institute — “Maldives ditches India Out for economic lifeline” — lowyinstitute.org 33. Al Jazeera — Russia becomes first country to recognise Taliban government (3 जुलाई 2025) — aljazeera.com 34. HRW World Report 2025 — Afghanistan chapter — hrw.org 35. Amnesty International — Afghanistan: Forced Returns (दिसंबर 2025) — amnesty.org 36. Britannica — 2021 Myanmar coup d’état — britannica.com 37. CNN — Suu Kyi moved from prison to house arrest (30 अप्रैल 2026) — cnn.com 38. Al Jazeera — Min Aung Hlaing sworn in as president (10 अप्रैल 2026) — aljazeera.com
! शिक्षक के लिए अंतिम नोट: बोर्ड परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का आँकड़ा और उसकी भाषा ही लिखवाइए। यह संवर्धन सामग्री कक्षा-चर्चा, परियोजना-कार्य और प्रतियोगी परीक्षा के लिए है। ★★पर खंड 1 (दक्षेस), खंड 2 (भारत-पाकिस्तान 2025) और खंड 4 (बांग्लादेश 2024-26) अवश्य पढ़ाइए — ये पाठ्यपुस्तक के दावों की सबसे बड़ी और सबसे हालिया परीक्षाएँ हैं, और परीक्षा में ‘अतिरिक्त बिंदु’ के रूप में सबसे अधिक अंक दिलाते हैं। !! ध्यान रहे — इस अध्याय के कई तथ्य (विशेषकर बांग्लादेश की सीट-संख्या, अफ़गान-पाक संघर्ष के हताहत-आँकड़े, श्रीलंका का ‘चक्रवात दित्वाह’) स्रोतों में भिन्न या अपुष्ट हैं — इन्हें कक्षा में ‘लगभग’ और ‘रिपोर्ट किया गया’ कहकर ही प्रस्तुत करें, निश्चित तथ्य के रूप में नहीं।