कक्षा: 12 · विषय: राजनीति विज्ञान · पुस्तक: समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1) पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 81–98 · कुल कालांश: 6 (+1 वैकल्पिक गतिविधि)
अध्याय-स्तरीय अधिगम-प्रतिफल
पाठ पूरा होने पर विद्यार्थी —
- समझा सकेंगे कि पर्यावरण एक ‘राजनीतिक’ विषय क्यों है — दोनों अर्थों में: सरकारें कदम उठाती हैं, और “जवाब इस बात से तय होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है।”
- 1992 के पृथ्वी सम्मेलन के परिणाम और उत्तर-दक्षिण विभाजन का विश्लेषण कर सकेंगे।
- ‘साझी संपदा’ और ‘वैश्विक संपदा / मानवता की साझी विरासत’ में भेद कर सकेंगे और चारों वैश्विक संपदाएँ गिना सकेंगे।
- ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ के सिद्धांत की व्याख्या कर सकेंगे और उसे UNFCCC तथा क्योटो प्रोटोकॉल से जोड़ सकेंगे।
- पर्यावरण के मसले पर भारत का पक्ष — ऐतिहासिक उत्तरदायित्व का तर्क, आँकड़े, और भारत के ठोस कदम — विस्तार से बता सकेंगे।
- पर्यावरण आंदोलनों की विविधता — वन, खनिज-उद्योग, बाँध — का तुलनात्मक विवेचन कर सकेंगे।
- संसाधनों की भू-राजनीति — तेल और पानी — को उदाहरणों सहित समझा सकेंगे।
- मूलवासियों की परिभाषा, माँग और भारत में उनकी स्थिति बता सकेंगे।
कालांश 1 — पर्यावरण ‘राजनीति’ कैसे बना?
पाठ्यपुस्तक: पृ. 81–83
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 मिनट | हुक — साइड-टिप्पणी से शुरू कीजिए (पृ. 82): “जंगल के सवाल पर राजनीति, पानी के सवाल पर राजनीति और वायुमंडल के मसले पर राजनीति! फिर, किस बात में राजनीति नहीं है!” — पूछिए: “क्या पर्यावरण राजनीति विज्ञान का विषय है या भूगोल का?” |
| 5–8 मिनट | ! दो अनाथ-संदर्भ तुरंत ठीक कीजिए। (1) “अध्याय सात में हमने…” → वह अब अध्याय 5 है। (2) “पृष्ठ 24 पर दिए मानचित्र” → पृष्ठ 24 पर अब चीन के कार्टून हैं; अराल सागर वाला मानचित्र अध्याय 1 में है। |
| 8–20 मिनट | ★पर्यावरण-क्षति की सूची — बोर्ड पर पाँच बिंदु। कृषि-भूमि · जल-स्वच्छता · वन-जैवविविधता · ओज़ोन · समुद्रतट। UN मानव विकास रिपोर्ट (2016) के तीन आँकड़े ज़ोर देकर लिखवाइए — 66.3 करोड़, 2.40 अरब, 30 लाख+ बच्चे प्रतिवर्ष। |
| 20–30 मिनट | ★★“ये मसले राजनीतिक क्यों हैं” — दो स्तर। पहला — सरकारें कदम उठाती हैं और कोई देश अकेले हल नहीं कर सकता। दूसरा और गहरा — “इन सवालों के जवाब बहुधा इस बात से निर्धारित होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है।” यह वाक्य बोर्ड पर लिखवाइए और पूरे अध्याय तक मत मिटाइए। |
| 30–36 मिनट | ★अराल सागर का चित्र-शीर्षक पढ़िए — और वह व्यंग्य ज़रूर पढ़िए: “जितने लोग सागर के अध्ययन के लिए आये वे अगर एक-एक बाल्टी पानी भी लाते तो यह सागर भर गया होता।” |
| 36–40 मिनट | समापन: 1960 का दशक — यहीं से चिंता राजनीतिक बनी। ‘क्लब ऑव रोम’ (1972) — ‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ का नाम बोर्ड पर छोड़कर कक्षा समाप्त कीजिए। |
गृहकार्य: पृ. 83–84 पढ़कर आइए। पृथ्वी सम्मेलन के बारे में पाँच तथ्य नोट कीजिए।
कालांश 2 — पृथ्वी सम्मेलन और उत्तर-दक्षिण की खाई
पाठ्यपुस्तक: पृ. 83–86
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–4 मिनट | पुनरावृत्ति — “पर्यावरण राजनीतिक क्यों है?” — दो कारण मौखिक। |
| 4–14 मिनट | ★★पृथ्वी सम्मेलन 1992 — बोर्ड पर एक सारणी। कहाँ (रियो, ब्राज़ील) · किसका (UN) · कौन (170 देश + हजारों स्वयंसेवी संगठन + बहुराष्ट्रीय निगम) · पृष्ठभूमि (बर्टलैंड रिपोर्ट 1987 — ‘अवर कॉमन फ्यूचर’)। |
| 14–24 मिनट | ★★उत्तर बनाम दक्षिण — दो स्तंभ बनवाइए। उत्तर की चिंता — ओज़ोन छेद और वैश्विक तापवृद्धि। दक्षिण की चिंता — आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन का रिश्ता। फिर कार्टून (पृ. 84) दिखाइए — “अगर आप इस ग्रह को बचाना चाहते हैं तो अपने हाथ उठाएँ…” — और उंगलियाँ क्रॉस पर ध्यान दिलाइए। |
| 24–32 मिनट | ★रियो के परिणाम — प्रश्न 4 का सीधा उत्तर। नियमाचार · अजेंडा-21 · ‘टिकाऊ विकास’ पर सहमति। और दोनों आलोचनाएँ भी लिखवाइए — अमल कैसे हो, और “अजेंडा-21 का झुकाव… आर्थिक वृद्धि की ओर है।” |
| 32–40 मिनट | ★★‘वैश्विक संपदा’ की चार इकाइयाँ — बोर्ड पर। वायुमंडल · अंटार्कटिका · समुद्री सतह · बाहरी अंतरिक्ष। परिभाषा: “किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर।” और तीन समझौते — 1959 · 1987 · 1991। |
गृहकार्य: प्रश्न 3 और 4 के उत्तर लिखिए। अंटार्कटिका वाला बॉक्स (पृ. 85) पढ़कर आइए।
कालांश 3 — अंटार्कटिका, और ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’
पाठ्यपुस्तक: पृ. 85–88
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–10 मिनट | ★अंटार्कटिका बॉक्स। चार आँकड़े बोर्ड पर — 1.4 करोड़ वर्ग किमी · निर्जन क्षेत्र का 26% · स्थलीय हिम का 90% · स्वच्छ जल का 70%। फिर ★क्रिल मछली (आहार शृंखला की धुरी) और हिमानी परत = ग्रीन हाऊस गैस का सूचना-स्रोत। |
| 10–16 मिनट | ★★दो दावे। सात देशों के नाम बोर्ड पर — ब्रिटेन, अर्जेन्टीना, चिले, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड। बनाम “बाकी अधिकांश — यह साझी संपदा है।” पूछिए: “आप किस पक्ष में हैं और क्यों?” |
| 16–28 मिनट | ★★‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ — यह कालांश का केंद्र है। दोनों पक्ष बोर्ड पर लिखवाइए, फिर रियो-घोषणापत्र का उद्धरण धीरे-धीरे पढ़िए। तीन कुंजी-वाक्य रेखांकित करवाइए — “योगदान अलग-अलग है”, “विकसित देशों का दबाव ज्यादा है”, “विकसित देश अपनी ख़ास जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।” |
| 28–34 मिनट | ★UNFCCC (1992) → क्योटो प्रोटोकॉल (1997) की कड़ी। समझाइए: 1992 में सिद्धांत तय हुए, 1997 में उन्हीं के आलोक में समझौता बना। तीन गैसें — CO₂, मीथेन, हाइड्रो-फ्लोरो कार्बन। और “चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को बाध्यताओं से अलग रखा गया।” |
| 34–40 मिनट | ★साइड-टिप्पणी (पृ. 87) पर 5 मिनट की चर्चा: “यह जायज सिद्धांत है! हमारे देश में जारी आरक्षण की नीति की तरह! है न?” — समानता का अर्थ हमेशा ‘एक-सा व्यवहार’ नहीं होता। यह तुलना कक्षा को तुरंत समझ में आती है। |
गृहकार्य: प्रश्न 6 का उत्तर लिखिए। पावन वन-प्रांत वाला बॉक्स (पृ. 88) पढ़कर आइए।
कालांश 4 — साझी संपदा, देवस्थान, और भारत का पक्ष
पाठ्यपुस्तक: पृ. 87–90
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–8 मिनट | ★‘साझी संपदा’ की परिभाषा — “जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो”; समान अधिकार + समान उत्तरदायित्व। और ! चार कारण जिनसे यह सिमट रही है — निजीकरण, गहनतर खेती, आबादी की वृद्धि, पारिस्थितिकी तंत्र की गिरावट। |
| 8–18 मिनट | ★★देवस्थान — यह खंड कक्षा को सबसे ज्यादा पसंद आता है। छह राज्यों के नाम बोर्ड पर लिखवाइए — राजस्थान (वानी/केंकड़ी/ओरान), झारखंड (जहेरा थान/सरना), मेघालय (लिंगदोह), केरल (काव), उत्तराखंड (थान/देवभूमि), महाराष्ट्र (देव रहतिस)। ★फिर वह वाक्य पढ़िए: “संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी जिसने इतने युगों से वनों को बचाए रखने की प्रतिबद्धता कायम रखी।” |
| 18–22 मिनट | ! देवस्थान की कठिन समस्या — कानूनी स्वामित्व राज्य का, व्यावहारिक नियंत्रण समुदाय का। “इन दोनों के नीतिगत मानक अलग-अलग हैं।” |
| 22–34 मिनट | ★★भारत का पक्ष। 2002 में क्योटो पर हस्ताक्षर और अनुमोदन। फिर ‘ऐतिहासिक उत्तरदायित्व’ का तर्क। और वह आँकड़ा जो सारा तर्क सिद्ध करता है — विश्व औसत 3.8 टन (2000) · भारत 0.9 टन (2000) · भारत 1.6 टन (2030 अनुमान)। इन तीन संख्याओं को बोर्ड पर एक पंक्ति में लिखिए। |
| 34–40 मिनट | ★भारत के सात कदम — सूची बनवाइए। ऑटो-फ्यूल पॉलिसी · ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम 2001 · बिजली अधिनियम 2003 · स्वच्छ कोयला/प्राकृतिक गैस · बायोडीजल मिशन · पेरिस समझौते का अनुमोदन 2 अक्तूबर 2016 · नवीकरणीय ऊर्जा का बड़ा कार्यक्रम। ! और साइड-टिप्पणी (पृ. 89) ज़रूर उठाइए: “पहले उन लोगों ने धरती को बर्बाद किया और अब धरती को चौपट करने की हमारी बारी है। क्या यही है हमारा पक्ष?” |
गृहकार्य: प्रश्न 8 और 9 के उत्तर लिखिए।
कालांश 5 — पर्यावरण आंदोलन : एक या अनेक
पाठ्यपुस्तक: पृ. 90–92
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–6 मिनट | ★खंड का मूल तर्क: “कुछ महत्त्वपूर्ण पेशकदमियाँ सरकारों की तरफ से नहीं बल्कि… कार्यकर्ताओं ने की हैं।” और “मौजूदा पर्यावरण आंदोलनों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है।” |
| 6–14 मिनट | ★(क) वन-आंदोलन। सात नाम — मैक्सिको, चिले, ब्राज़ील, मलेशिया, इंडोनेशिया, महादेशीय अफ्रीका, भारत। ! और वह कड़वी बात: “तीन दशकों से सक्रियता के बावजूद वनों की कटाई खतरनाक गति से जारी है।” |
| 14–24 मिनट | ★★बॉक्स — ‘क्या वन निर्जन होते हैं?’ यह इस अध्याय का सबसे गहरा विचार है। दो स्तंभ बोर्ड पर — उत्तर: वन = निर्जन प्रांत; मनुष्य प्रकृति का हिस्सा नहीं बनाम दक्षिण: “लोग वनों में भी रहते हैं।” फिर उदाहरण — फिलीपीन्स (गरुड़), भारत (बंगाल-टाइगर), अफ्रीका (हाथीदाँत); WWF की भूमिका। |
| 24–32 मिनट | ★(ख) खनिज-उद्योग। पाँच नुकसान सूचीबद्ध करवाइए। फिर फिलीपीन्स + ‘वेस्टर्न माइनिंग कारपोरेशन’ का उदाहरण — और वह विडंबना कि “इस कंपनी का विरोध खुद इसके स्वदेश यानी ऑस्ट्रेलिया में हुआ।” |
| 32–40 मिनट | ★★(ग) बाँध-विरोधी आंदोलन। विश्व का पहला — 1980 का दशक, ऑस्ट्रेलिया, फ्रैंकलिन नदी। आज की होड़ — तुर्की से थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका तक; इंडोनेशिया से चीन तक। ★भारत — नर्मदा आंदोलन, और वह पंक्ति: “भारत में बाँध विरोधी तथा पर्यावरण-बचाव के अन्य आंदोलन एक अर्थ में समानधर्मी हैं क्योंकि ये अहिंसा पर आधारित हैं।” |
गृहकार्य: पृ. 92–97 पढ़कर आइए। तेल के चार आँकड़े नोट कीजिए।
कालांश 6 — संसाधनों की भू-राजनीति और मूलवासी
पाठ्यपुस्तक: पृ. 92–97
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–6 मिनट | ★★परिभाषा बोर्ड पर: *“‘किसे, क्या, कब, कहाँ और कैसे हासिल होता है’* — ‘संसाधनों की भू-राजनीति’ इन्हीं सवालों से जूझती है।” फिर ऐतिहासिक क्रम — 17वीं सदी: इमारती लकड़ी → विश्वयुद्ध: तेल → शीतयुद्ध: चार कदम। |
| 6–16 मिनट | ★★तेल — चार आँकड़े बोर्ड पर। खाड़ी का उत्पादन 30% · ज्ञात भंडार 64% · सऊदी अरब एक चौथाई और सबसे बड़ा उत्पादक · इराक दूसरा, 112 अरब बैरल से ज्यादा का अनुमान। ! और वह विरोधाभास: “खपत अमरीका, यूरोप, जापान, चीन और भारत में — लेकिन ये देश इस इलाके से बहुत दूरी पर हैं।” |
| 16–22 मिनट | ★बॉक्स — ‘तेल देखो, तेल की धार देखो’ — चार पात्र पढ़कर सुनाइए। (शेख पैट्रो डॉलर-उल्ला, जनाब बिग ऑयल, श्री-श्रीमती बड़बोले, जनाब ग़लत-निशानची) यह पाँच मिनट में पूरा खंड समझा देता है। फिर कार्टून (पृ. 93) — ‘इसे कहते हैं नव-उपनिवेशवाद’। |
| 22–28 मिनट | ★★पानी और ‘जलयुद्ध’। उद्गम के पास बनाम उद्गम से दूर — यह ढाँचा बोर्ड पर बनाइए। दो उदाहरण — इज़रायल-सीरिया-जार्डन (1950-60 का दशक, जॉर्डन और यारमुक नदी) और तुर्की-सीरिया-इराक (फरात नदी)। |
| 28–38 मिनट | ★★मूलवासी। UN की 1982 की परिभाषा शब्दश: लिखवाइए। आँकड़े — विश्व में 30 करोड़; भारत में 8 प्रतिशत। ★वह जुमला: “हम यहाँ ‘अनंत काल से रहते चले आ रहे हैं’।” और ★★वह सवाल: “उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?” |
| 38–40 मिनट | ★★समापन-वाक्य बोर्ड पर: “ऐसी परियोजनाओं से विस्थापित होने वालों में यह समुदाय सबसे बड़ा है। दरअसल इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।” और 1975 — वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इंडिजिनस पीपल। |
गृहकार्य: प्रश्न 1, 2, 5, 7 के उत्तर लिखिए।
वैकल्पिक कालांश 7 — ‘आओ मिलजुल कर करें’ (पृ. 97)
| चरण | विवरण |
|---|---|
| 1 | हर विद्यार्थी रोज़मर्रा की दस वस्तुओं की सूची बनाए (कलम, कागज, इरेजर, कंप्यूटर, पानी…) |
| 2 | हर वस्तु के निर्माण में लगे प्राकृतिक संसाधनों की मात्रा का अनुमान लगाए। पानी के लिए — प्रति गैलन पंपिंग और परिशोधन में लगी बिजली। |
| 3 | पूरी कक्षा का जोड़ निकालिए → फिर पूरे विद्यालय का → फिर देश के सभी विद्यालयों का अनुमान। |
| 4 | ★तुलना कीजिए — विकसित / विकासशील / अविकसित देशों के विद्यार्थियों की खपत से। |
| समापन | ★★यहीं ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का पूरा तर्क अपने-आप सिद्ध हो जाता है — प्रति व्यक्ति खपत का अंतर विद्यार्थी स्वयं देख लेते हैं। यह गतिविधि इसी उद्देश्य से बनी है। |
शिक्षक के लिए त्वरित संकेत
- इस अध्याय की रीढ़ एक ही वाक्य है — “इन सवालों के जवाब बहुधा इस बात से निर्धारित होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है।” पहले दिन बोर्ड के कोने में लिखिए और अध्याय भर मत मिटाइए।
- ! दो अनाथ-संदर्भ पहले ही कालांश में ठीक कीजिए — ‘अध्याय सात’ और ‘पृष्ठ 24’। यदि न बताएँ तो विद्यार्थी पूरी कक्षा गलत जगह खोजते रह जाते हैं।
- तीन तिथियाँ जो बार-बार गड़बड़ाती हैं — 1992 (पृथ्वी सम्मेलन + UNFCCC), 1997 (क्योटो), 2002 (भारत का अनुमोदन)। इन्हें कालांश 3 और 4 में दो बार दोहराइए।
- यह अध्याय बहुत सारे नाम देता है। सब याद कराने की कोशिश मत कीजिए — देवस्थान के छह नाम, वन-आंदोलन के सात देश और अंटार्कटिका के सात दावेदार — बस इन तीन सूचियों पर ध्यान दीजिए।
- ! भारत के पक्ष पर संतुलन रखिए। पाठ्यपुस्तक भारत का तर्क और उसकी आलोचना (साइड-टिप्पणी, पृ. 89) दोनों देती है। कक्षा में भी दोनों रखिए।
- मूलवासी वाला खंड जल्दबाज़ी में मत निपटाइए। यह अध्याय का नैतिक निष्कर्ष है — और यही अगले अध्याय (वैश्वीकरण) से जुड़ता है।