यह पूरी सामग्री पाठ्यपुस्तक से बाहर की है। हर तथ्य प्राथमिक या प्रतिष्ठित द्वितीयक स्रोत से सत्यापित है। सत्यापन की तिथि: 7 अगस्त 2026. ! बोर्ड परीक्षा में केवल पाठ्यपुस्तक का उत्तर लिखिए।
इस दस्तावेज़ को कैसे पढ़ें
| स्तर | किसके लिए | इसमें क्या है |
|---|---|---|
| T1 | बोर्ड + हर प्रतियोगी परीक्षा | पाठ की त्रुटि का सुधार; वे तथ्य जो पाठ में होने चाहिए थे; और वह सब जो 2019 के बाद बदल गया |
| T2 | UPSC प्रारंभिक, राज्य PCS, SSC, बैंकिंग, CUET | संस्थागत विवरण, संख्याएँ, नाम, संक्षिप्तियाँ — जो सीधे प्रश्नपत्रों में आते हैं |
| T3 | UPSC मुख्य परीक्षा, वैकल्पिक विषय, साक्षात्कार | विश्लेषण, विवाद, दोनों पक्ष, और निबंध-योग्य तर्क |
विषय-सूची T1: पाठ की त्रुटि · सुधार-बहस का आज का ढाँचा · ‘वीटो इनिशिएटिव’ · UN80 और वित्तीय संकट · अमरीका का 66 संगठनों से हटना · भारत का रिकॉर्ड T2: संस्थागत तथ्य · शांति सेना · मानवाधिकार तंत्र · ब्रेटन वुड्स · SDGs · संक्षिप्तियों का शब्दकोश T3: वीटो पर तीन पद · ‘विफलता’ की बहस · वित्तीय निर्भरता · ‘दादागिरी’ वाला प्रश्न · केस-स्टडी
T1 — जो पाठ में होना चाहिए था, या जो बदल गया
T1.1 पाठ की त्रुटि का सही रूप — और उसका पूरा संदर्भ★★
पृ. 57 पर लिखा है: “संयुक्त राष्ट्रसंघ की सदस्य संख्या सन् 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई थी।”
| मद | सही तथ्य |
|---|---|
| किसकी संख्या बदली | ★सुरक्षा परिषद् की — संयुक्त राष्ट्रसंघ की नहीं |
| कब | चार्टर संशोधन 1963 में महासभा ने स्वीकृत किया; 1965 में प्रभावी हुआ |
| क्या बदला | अस्थायी सदस्य 6 → 10; कुल 11 → 15; ★स्थायी सदस्य 5 ही रहे |
| 1965 में UN के सदस्य | लगभग 117 (1945 में 51 से बढ़कर) |
| कारण | विऔपनिवेशीकरण — एशिया-अफ्रीका के दर्जनों नए देश UN में आ चुके थे और परिषद् में उनका प्रतिनिधित्व नहीं था |
★★इस एक तथ्य का महत्व बहुत बड़ा है: यह एकमात्र बार है जब सुरक्षा परिषद् का आकार बदला — और वह भी 60 साल पहले। तब से सदस्य 51 से बढ़कर 193 हुए, पर परिषद् 15 की 15 रही। प्रश्न 10 और 12 में यही सबसे मजबूत आँकड़ा है।
आकार बदलना इतना कठिन क्यों है — चार्टर संशोधन का नियम★
चार्टर के अनुच्छेद 108 के अनुसार किसी भी संशोधन के लिए चाहिए —
- महासभा के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन; और
- ★★सभी पाँच स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई सदस्यों का अनुसमर्थन (ratification)।
★★यानी वीटो, वीटो हटाने के रास्ते में भी खड़ा है। यह पाठ्यपुस्तक के उस वाक्य का संस्थागत कारण है कि “स्थायी सदस्य ऐसे सुधार के लिए शायद ही राजी होंगे।”
T1.2 सुधार-बहस का आज का ढाँचा★★
पाठ्यपुस्तक 1992 के प्रस्ताव और 1997 की कोफी अन्नान की जाँच पर रुक जाती है। उसके बाद बहस का पूरा ढाँचा बदल चुका है।
(क) IGN — औपचारिक मंच, 2009 से
- ‘अंतर-सरकारी वार्ता’ (Intergovernmental Negotiations — IGN) ही आज सुरक्षा परिषद् सुधार का औपचारिक मंच है। ◆
- यह महासभा की अनौपचारिक पूर्ण बैठक (informal plenary) के रूप में चलती है।
- ! पंद्रह वर्षों में भी ‘पाठ-आधारित वार्ता’ (text-based negotiations) तक नहीं पहुँचा जा सका — यानी बातचीत का कोई एक मसौदा तक नहीं बना जिस पर संशोधन प्रस्तावित किए जा सकें।
(ख) पाँच प्रतिद्वंद्वी पद — यही आज की असली तस्वीर है★★
| गुट | कौन | प्रस्ताव |
|---|---|---|
| ★G-4 | भारत · जर्मनी · जापान · ब्राज़ील | परिषद् 15 → 25–26 सदस्य = 11 स्थायी + 14–15 अस्थायी; छह नई स्थायी सीटें — दो अफ्रीका, दो एशिया-प्रशांत, एक लातिन अमरीका-कैरेबियाई, एक पश्चिमी यूरोप और अन्य; ★नए स्थायी सदस्यों को वीटो केवल 10–15 वर्ष की समीक्षा-अवधि के बाद ◆ |
| ! ‘यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेंसस’ (UfC) | इटली के नेतृत्व में 12–14 देश; स्पेन, मैक्सिको, कोलंबिया, अर्जेंटीना, ★पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, तुर्की, इंडोनेशिया; 20–30 और देश इनके विचार साझा करते हैं | ! कोई नई स्थायी सीट नहीं — “विशेषकर यदि उसमें वीटो शामिल हो”; केवल अस्थायी सीटें बढ़ें ◆ |
| अफ्रीकी संघ — ‘इज़ुलविनी सर्वसम्मति’ | 54 अफ्रीकी देश | अफ्रीका के लिए दो स्थायी सीटें — पूर्ण वीटो सहित — और पाँच अस्थायी |
| L.69 समूह | विकासशील देशों का बड़ा समूह (भारत भी शामिल) | विस्तार दोनों श्रेणियों में |
| ACT समूह | ‘Accountability, Coherence, Transparency’ — छोटे और मध्यम देश | वीटो का प्रयोग सीमित करने की स्वैच्छिक आचार-संहिता — विशेषकर जनसंहार, युद्ध-अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध के मामलों में |
★★पाठ्यपुस्तक का वाक्य आज इसी तस्वीर में फिट बैठता है — “कुछ अन्य देशों का मानना है कि उभरती हुई ताकत के रूप में अन्य देशों मसलन ब्राजील, जर्मनी, जापान और शायद दक्षिण अफ्रीका को भी शामिल करना पड़ेगा जिसका ये देश विरोध करते हैं।” वे ‘ये देश’ ही UfC हैं — और उसमें पाकिस्तान भी है।
(ग) आज की स्थिति — 2024–25ध्यान
- महासभा के 79वें सत्र में G-4 मंत्रियों ने “IGN प्रारूप में ठोस प्रगति के लगातार अभाव पर गहरी चिंता” जतायी। ◆
- उन्होंने एक “समेकित मॉडल” (consolidated model) विकसित करके पाठ-आधारित वार्ता तक पहुँचने की मंशा जतायी।
- ★G-4 का तर्क: 2025 में संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगाँठ सुधार के लिए “एक निर्णायक क्षण” है।
- भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने 15 अप्रैल 2025 को IGN में G-4 मॉडल की पुनः पुष्टि की।
! निष्कर्ष: पाठ्यपुस्तक का वाक्य — “भारत या किसी और देश के लिए निकट भविष्य में… स्थायी सदस्य बन पाना मुश्किल लगता है” — आज भी अक्षरशः सही है।
T1.3 ‘वीटो इनिशिएटिव’, 2022 — सुधार की एकमात्र वास्तविक सफलता★★
पाठ्यपुस्तक कहती है कि वीटो हटाना असंभव-सा है। पर 2022 में एक ऐसा रास्ता निकाला गया जिसने वीटो हटाए बिना उसकी कीमत बढ़ा दी।
| मद | तथ्य |
|---|---|
| प्रस्ताव | ★महासभा का प्रस्ताव A/RES/76/262 |
| कब | ★26 अप्रैल 2022 — सर्वसम्मति से (by consensus) अपनाया गया ◆ |
| नाम | “Standing mandate for a General Assembly debate when a veto is cast in the Security Council” |
| ★★व्यवस्था | जब भी सुरक्षा परिषद् में वीटो लगे, महासभा को 10 कार्य-दिवसों के भीतर बैठक बुलानी होगी |
| ★उद्देश्य | वीटो को रद्द करना नहीं — बल्कि “वीटो लगाने वाले स्थायी सदस्य से पूरी UN सदस्यता के सामने सफाई माँगना।” |
| पहली बार प्रयोग | ★8 जून 2022 — चीन और रूस के वीटो पर महासभा की पहली ऐसी बहस |
★★यह सुधार का एक अलग ही मॉडल है: चार्टर बदले बिना, वीटो हटाए बिना — केवल जवाबदेही जोड़कर। यही आज सुधार-बहस की सबसे व्यावहारिक दिशा मानी जाती है, और प्रश्न 10 तथा 12 में इसका उल्लेख उत्तर को कहीं मजबूत बनाता है।
T1.4 UN80 पहल और वित्तीय संकट — 2025–26 की सबसे बड़ी ख़बर★★
पाठ्यपुस्तक कहती है कि अमरीका “बजट में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला देश है” और यही उसके प्रभाव का एक कारण है। 2025 में यह निर्भरता संकट में बदल गई।
(क) UN80 पहल
| मद | तथ्य |
|---|---|
| कब शुरू | ★मार्च 2025 — महासचिव गुटेरेस द्वारा |
| उद्देश्य | संगठन को “अधिक फुर्तीला, एकीकृत और सुसज्जित” (agile, integrated, equipped) बनाना |
| ★तीन कार्य-धाराएँ | (1) दक्षता और सुधार; (2) अधिदेश-क्रियान्वयन की समीक्षा; (3) संरचनात्मक बदलाव और कार्यक्रम-पुनर्संरेखण |
| महासचिव का घोषित लक्ष्य | “अधिक कुशल बनना, प्रक्रियाओं को सरल करना, दोहराव समाप्त करना, और पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना” ◇ |
(ख) वित्तीय संकट के आँकड़ेध्यान
| मद | तथ्य |
|---|---|
| ★कुल बकाया (दिसंबर 2025) | लगभग 1.586 अरब डॉलर — 2024 का 76 करोड़ डॉलर + 2025 का 87.7 करोड़ डॉलर ◆ |
| ★2026 का प्रस्तावित बजट | 3.7 अरब डॉलर से घटाकर लगभग 3.2 अरब डॉलर — यानी लगभग 15% कटौती |
| ! चेतावनी | आंतरिक अनुमान के अनुसार कटौती के बिना सचिवालय के पास सितंबर तक वेतन और आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान का पैसा नहीं बचता |
| ! व्यापक असर | 2025 में पूरे UN तंत्र के संसाधन 2023 की तुलना में 30% तक घट सकते हैं — अनुमानित 3 से 6 करोड़ लोगों पर सीधा असर |
| ! मानवाधिकार पर असर | तरलता-संकट के कारण मानवाधिकार उच्चायुक्त को रिपोर्ट, कार्यशालाएँ और अन्य गतिविधियाँ स्थगित करनी पड़ीं |
★★इसका पाठ्यपुस्तक के तर्क से सीधा संबंध है। पाठ कहता है कि अमरीका का प्रभाव इसलिए भी है कि “वह संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला देश है।” 2025 ने दिखा दिया कि यह प्रभाव नहीं, निर्भरता है — और उसकी कीमत पूरी संस्था चुकाती है।
T1.5 अमरीका का 66 संगठनों से हटना — 2025–26ध्यान★
यह इस अध्याय के अंतिम खंड (‘एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ’) की सबसे नाटकीय परीक्षा है।
| कब | क्या हुआ |
|---|---|
| जनवरी–फरवरी 2025 | अमरीका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हटने की प्रक्रिया शुरू की |
| ★फरवरी 2025 | राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् (UNHRC) में भागीदारी समाप्त ◆ |
| 2025 | पेरिस समझौते और यूनेस्को (UNESCO) से वापसी — दोनों में अमरीका पहले लौटा था |
| ! जनवरी 2026 | ★कुल 66 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और आयोगों से समर्थन वापस ◇ |
| ! | जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) से हटने पर अमरीका वैश्विक जलवायु ढाँचे से बाहर अकेला देश |
| UN का उत्तर | महासचिव ने कहा कि अमरीका की एजेंसियों के प्रति “विधिक बाध्यता” (legal obligation) है |
| अमरीका का तर्क | UNHRC ने “मानवाधिकार-उल्लंघनकर्ताओं को संरक्षण दिया”; UNESCO “स्वयं में सुधार करने में विफल” रहा |
★★यह पाठ्यपुस्तक के इस वाक्य की सबसे सीधी पुष्टि है — “अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के बूते वह संयुक्त राष्ट्रसंघ या किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन की अनदेखी कर सकता है।” पर यह उस वाक्य की सीमा भी दिखाता है — क्योंकि अनदेखी करने की कीमत केवल संगठन नहीं, अमरीका का अपना प्रभाव भी चुकाता है।
T1.6 भारत का रिकॉर्ड — पूरा हिसाब★
(क) सुरक्षा परिषद् में
| मद | तथ्य |
|---|---|
| सदस्यता | 30 अक्टूबर 1945 से (आज़ादी से पहले ही, ब्रिटिश भारत के रूप में संस्थापक-हस्ताक्षरकर्ता) |
| ★अस्थायी सदस्य | आठ बार |
| ★अंतिम कार्यकाल | 2021–22 |
| चुनाव | जून 2020 — 193 में से 184 मत ◇ |
| साथ चुने गए | आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको, नॉर्वे |
(ख) शांति सेना — पाठ के ‘ठोस भूमिका’ वाले वाक्य का प्रमाण★★
| मद | तथ्य |
|---|---|
| कुल अभियान | ★49 से अधिक शांति-अभियानों में भागीदारी ◇ |
| कुल सैनिक | ★2,00,000 से अधिक — और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी |
| वर्तमान तैनाती | 6,000 से अधिक कर्मी; 2024 में 12 अभियानों में |
| ★स्थान | 2024 में सर्वाधिक योगदान करने वाला देश; 2025 की स्थिति में नेपाल और बांग्लादेश के साथ शीर्ष तीन में |
| !★बलिदान | 179 भारतीय शांति-सैनिक शहीद — किसी भी UN सदस्य-देश से अधिक ◇ |
| ★ऐतिहासिक पहल | 2007 — लाइबेरिया में पहली संपूर्ण महिला पुलिस टुकड़ी (Female Formed Police Unit); UN के इतिहास में पहली बार |
★★‘किसी भी सदस्य-देश से अधिक बलिदान’ — यह प्रश्न 9 का सबसे भावनात्मक और सबसे ठोस तर्क है।
(ग) बजट — पाठ 2019 पर, आज की स्थिति
| वर्ष | भारत का योगदान | स्थिति |
|---|---|---|
| 2019 (पाठ्यपुस्तक) | 0.8% — 21वाँ स्थान | — |
| ★2025 | 3 करोड़ 76 लाख 40 हज़ार डॉलर | ★‘ऑनर रोल’ के 35 देशों में — पूरा और समय पर भुगतान ◆ |
| ★2026 | 3 करोड़ 51 लाख 80 हज़ार डॉलर | ★फिर ‘ऑनर रोल’ में ◆ |
★पाठ्यपुस्तक का वाक्य — “यह कभी भी अपने भुगतान से चुका नहीं है” — आज भी सत्यापित रूप से सही है। और 2025 के वित्तीय संकट के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
T2 — प्रतियोगी परीक्षाओं के तथ्य
T2.1 संयुक्त राष्ट्रसंघ — संस्थागत तथ्य जो पाठ नहीं देता
| मद | तथ्य |
|---|---|
| ★मुख्यालय | न्यूयॉर्क (पाठ केवल कहता है “अमरीकी भू-क्षेत्र में स्थित है”) |
| अन्य बड़े कार्यालय | जिनेवा · वियना · नैरोबी |
| ★छह आधिकारिक भाषाएँ | अंग्रेज़ी · फ़्रांसीसी · रूसी · चीनी (मंदारिन) · स्पेनी · अरबी |
| चार्टर | 19 अध्याय, 111 अनुच्छेद |
| प्रसिद्ध शुरुआत | “We the peoples of the United Nations…” |
| अनुच्छेद 108 | ★चार्टर संशोधन का नियम — पाँचों स्थायी सदस्यों का अनुसमर्थन अनिवार्य |
| अध्याय VI बनाम VII | ★अध्याय VI — विवादों का शांतिपूर्ण समाधान (संस्तुति); अध्याय VII — शांति के लिए खतरे पर कार्रवाई (बाध्यकारी, बल-प्रयोग सहित) |
| सुरक्षा परिषद् में मतदान | ★15 में से 9 मत चाहिए, और किसी स्थायी सदस्य का ‘नहीं’ न हो |
| ‘अनुपस्थिति वीटो नहीं’ | ★स्थायी सदस्य मतदान में भाग न ले तो प्रस्ताव पारित हो सकता है — यह अनेक बार हुआ है |
| अध्यक्षता | सुरक्षा परिषद् की अध्यक्षता हर महीने बदलती है — सदस्य-देशों के अंग्रेज़ी नाम के वर्णक्रम में |
| ! ICJ बनाम ICC | ICJ — UN का अंग; हेग; केवल राज्य पक्षकार; ICC (2002) — UN का अंग नहीं, रोम संविधि से बना; हेग; व्यक्तियों पर मुकदमा |
| ★चीन की सीट | 1971 तक ताइवान (गणराज्य चीन); 1971 में जनवादी गणराज्य चीन को मिली |
| ★रूस की सीट | 1991 में सोवियत संघ के विघटन पर ‘उत्तराधिकारी राज्य’ के रूप में रूस को |
T2.2 नौ महासचिव — पाठ से आगे के तथ्य★
| महासचिव | पाठ जो नहीं बताता |
|---|---|
| ट्राइग्व ली | ★1946 में पद संभालने वाले पहले व्यक्ति |
| डेग हैमरशोल्ड | ★1961 में विमान-दुर्घटना में मृत्यु — कांगो जाते समय; पद पर रहते हुए मरने वाले एकमात्र महासचिव; नोबेल मरणोपरांत |
| यू थांट | पहले गैर-यूरोपीय महासचिव |
| बुतरस घाली | ! एकमात्र महासचिव जिन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिला — अमरीकी वीटो के कारण |
| कोफी अन्नान | ★संगठन के भीतर से पदोन्नत होकर महासचिव बनने वाले पहले व्यक्ति; नोबेल संगठन और उन्हें संयुक्त रूप से (2001) |
| बान की मून | 2011 में निर्विरोध दूसरा कार्यकाल |
| गुटेरेस | 2021 में दूसरा कार्यकाल; UN80 पहल (2025) उन्हीं की |
★नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले UN से जुड़े नाम: हैमरशोल्ड (1961, मरणोपरांत) · UNHCR (1954 और 1981) · UNICEF (1965) · ILO (1969) · शांति सेना (1988) · संयुक्त राष्ट्र और कोफी अन्नान (2001) · IAEA और अलबरादेई (2005) · WFP (2020)।
T2.3 मानवाधिकार तंत्र
| पड़ाव | तथ्य |
|---|---|
| ★1948 | मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) — 10 दिसंबर, इसीलिए ‘मानवाधिकार दिवस’ |
| 1966 | दो प्रसंविदाएँ (Covenants) — नागरिक-राजनीतिक, और आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकार |
| ★2006 | मानवाधिकार परिषद् — 19 जून से सक्रिय; 47 सदस्य; जिनेवा में |
| ★UPR | ‘सार्वभौम आवधिक समीक्षा’ — हर सदस्य-देश के मानवाधिकार रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा |
| OHCHR | मानवाधिकार उच्चायुक्त का कार्यालय — जिनेवा |
| ★R2P (2005) | ‘रक्षा का उत्तरदायित्व’ — (पाठ्यपुस्तक इसे नाम दिए बिना बताती है) |
दो गैर-सरकारी संगठन:
- ★एमनेस्टी इंटरनेशनल — 1961 में स्थापित; लंदन; ★1977 का नोबेल शांति पुरस्कार।
- ★ह्यूमन राइट्स वॉच — 1978 में ‘हेलसिंकी वॉच’ के रूप में; न्यूयॉर्क; बारूदी सुरंगों पर रोक, बाल सैनिकों और ICC के अभियानों में भूमिका।
T2.4 ब्रेटन वुड्स संस्थाएँ — पाठ केवल छूकर निकलता है
| मद | IMF | विश्व बैंक |
|---|---|---|
| जन्म | ★जुलाई 1944, ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (अमरीका) | वही सम्मेलन |
| मूल नाम | — | IBRD — पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक |
| मुख्यालय | वाशिंगटन डी.सी. | वाशिंगटन डी.सी. |
| सदस्य | ★190 (2024) | लगभग उतने ही |
| मुख्य काम | वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख; भुगतान-संतुलन संकट में ऋण | विकास-परियोजनाओं के लिए ऋण और अनुदान |
| ★मताधिकार | कोटा के अनुपात में — अमरीका 16.52%; समूह-7 का 41.29%; चीन 6.09%; भारत 2.64% | इसी तरह भारित |
| ! अलिखित परंपरा | प्रबंध निदेशक हमेशा यूरोपीय | अध्यक्ष हमेशा अमरीकी |
★★यहाँ एक बुनियादी भेद रेखांकित कीजिए: महासभा में ‘एक देश, एक वोट’ है; IMF और विश्व बैंक में ‘एक डॉलर, एक वोट’ जैसा। अमरीका के 16.52% का व्यावहारिक अर्थ यह है कि 85% बहुमत वाले बड़े फ़ैसलों पर उसके पास वस्तुतः वीटो है। यही विकासशील देशों की सबसे पुरानी शिकायत है।
T2.5 WTO — पाठ केवल एक बॉक्स देता है
| मद | तथ्य |
|---|---|
| स्थापना | 1 जनवरी 1995 — उरुग्वे दौर की वार्ता के बाद |
| पूर्ववर्ती | ★GATT (1948) |
| मुख्यालय | जिनेवा |
| सदस्य | 164 (29 जुलाई 2016 की स्थिति — पाठ्यपुस्तक का आँकड़ा) |
| ★निर्णय-पद्धति | सर्वसम्मति (consensus) — इसीलिए एक देश भी पूरी वार्ता रोक सकता है |
| दोहा दौर | 2001 में शुरू — ‘विकास एजेंडा’; आज तक अधूरा |
| ! विवाद-निपटान | अपीलीय निकाय (Appellate Body) 2019 से लगभग निष्क्रिय — क्योंकि नए न्यायाधीशों की नियुक्ति रुकी हुई है |
T2.6 सतत विकास लक्ष्य — पाठ का साइड-बॉक्स इन्हें खोजने को कहता है
| मद | तथ्य |
|---|---|
| कब | ★सितंबर 2015, महासभा में |
| कितने | ★17 लक्ष्य, 169 उप-लक्ष्य |
| समय-सीमा | 2030 — इसीलिए ‘एजेंडा 2030’ |
| पूर्ववर्ती | ★सहस्राब्दि विकास लक्ष्य (MDGs), 2000–2015 — 8 लक्ष्य (पाठ इनका उल्लेख करता है) |
| ★मुख्य भेद | MDGs केवल विकासशील देशों के लिए थे; SDGs सभी देशों पर लागू हैं |
| कुछ लक्ष्य | SDG 1 — ग़रीबी की समाप्ति · SDG 3 — स्वास्थ्य · SDG 4 — शिक्षा · SDG 5 — लिंग समानता · SDG 13 — जलवायु कार्रवाई · SDG 16 — शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएँ |
★SDG 16 इस अध्याय से सीधे जुड़ता है — और SDG 3, 4 तथा 5 अध्याय 3 की HDI तालिका के स्तंभों में ही छपे हैं।
T2.7 संक्षिप्तियों का शब्दकोश — जो चार्ट में हैं पर समझाए नहीं गए★
| संक्षिप्ति | पूरा नाम | काम |
|---|---|---|
| UNCTAD | व्यापार एवं विकास सम्मेलन | विकासशील देशों के व्यापार-हित |
| UNEP | पर्यावरण कार्यक्रम | नैरोबी — UN का एकमात्र बड़ा कार्यक्रम जिसका मुख्यालय अफ्रीका में |
| UNDP | विकास कार्यक्रम | ★मानव विकास रिपोर्ट और HDI |
| UNICEF | बाल कोष | ★1965 का नोबेल |
| UNFPA | जनसंख्या-कोष | प्रजनन स्वास्थ्य |
| UNHCR | शरणार्थी उच्चायोग | ★दो बार नोबेल — 1954 और 1981 |
| WFP | विश्व खाद्य कार्यक्रम | ★2020 का नोबेल |
| ILO | अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन | ★1919 से — लीग के दौर की एकमात्र जीवित संस्था; 1969 का नोबेल |
| FAO | खाद्य एवं कृषि संगठन | रोम |
| UNESCO | शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन | पेरिस; विश्व धरोहर सूची |
| WHO | विश्व स्वास्थ्य संगठन | ★चेचक का उन्मूलन |
| IAEA | अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी | वियना; 2005 का नोबेल |
| OPCW | रासायनिक हथियारों पर निषेध का संगठन | हेग; 2013 का नोबेल |
| OHCHR | मानवाधिकार उच्चायुक्त का कार्यालय | जिनेवा |
| UNAIDS | एड्स कार्यक्रम | जिनेवा |
| UNRISD | सामाजिक विकास शोध संस्थान | जिनेवा |
| ! IMO | समुद्री संगठन (चार्ट में ‘मौसम-विज्ञान’ लिखा है — वह WMO है) | लंदन |
| ITU | अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ | ★1865 से — विश्व की सबसे पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संस्था |
T2.8 शांति-अभियान — मानचित्र के नामों का अर्थ
पाठ्यपुस्तक पृ. 56 पर पंद्रह अभियानों का मानचित्र देती है, पर उनका विवरण नहीं। कुछ महत्वपूर्ण —
| संक्षिप्ति | कहाँ | विशेषता |
|---|---|---|
| ★UNTSO | पश्चिम एशिया | ★1948 से — UN का सबसे पुराना शांति-अभियान |
| ★UNMOGIP | भारत और पाकिस्तान | ★1949 से — दूसरा सबसे पुराना; भारत इसकी प्रासंगिकता नहीं मानता, क्योंकि शिमला समझौते (1972) के बाद मामला द्विपक्षीय है |
| UNFICYP | साइप्रस | 1964 से |
| UNIFIL | लेबनान | 1978 से; भारतीय टुकड़ी लंबे समय से तैनात |
| MONUSCO | डी.आर. कांगो | UN के सबसे बड़े अभियानों में |
| UNMISS | दक्षिण सूडान | 2011 से |
| UNAMID | दारफुर | ★UN और अफ्रीकी संघ का संयुक्त अभियान — पाठ का दारफुर कार्टून इसी से जुड़ा है |
★UNMOGIP का ज़िक्र प्रश्न 8 में करना उत्तर को विशिष्ट बना देता है — क्योंकि वह मानचित्र में भारत के नाम के साथ छपा है।
T3 — विश्लेषण, विवाद और निबंध-योग्य तर्क
T3.1 वीटो पर तीन पद — और भारत का विरोधाभास★★
पाठ्यपुस्तक इसे एक ही बहस की तरह दिखाती है। वास्तव में तीन अलग पद हैं, और वे एक-दूसरे को काटते हैं।
| पद | कौन | तर्क | कमज़ोरी |
|---|---|---|---|
| 1. वीटो समाप्त हो | अधिकांश छोटे देश; ACT समूह आंशिक रूप से | ★“निषेधाधिकार लोकतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के बीच बराबरी की धारणा से मेल नहीं खाता” | ! चार्टर संशोधन के लिए स्वयं पाँचों का अनुसमर्थन चाहिए — यानी असंभव |
| 2. वीटो नए स्थायी सदस्यों को भी मिले | ★G-4 (10–15 वर्ष की समीक्षा-अवधि के बाद); अफ्रीकी संघ (तुरंत) | समानता — या तो सबको मिले या किसी को नहीं | ! यह वीटो की आलोचना करते हुए उसी में हिस्सा माँगना है |
| 3. कोई नया वीटो न मिले | ! UfC | वीटो पहले से समस्या है; उसे बढ़ाना समस्या बढ़ाना है | ! यह मौजूदा पाँच की विशेष स्थिति को स्थायी बना देता है |
★★और यहीं पाठ्यपुस्तक का साइड-कथन सबसे तीखा हो जाता है — “असल में वीटो की ज़रूरत तो कमजोर देशों को है, उनको नहीं जिनके पास पहले से बहुत ताकत है।” यदि यह सच है, तो पद 2 सही है और पद 3 ग़लत। पर यदि वीटो अपने-आप में लोकतंत्र-विरोधी है, तो पद 2 स्वयं विरोधाभासी है।
★★यही पृ. 57 के साइड-बॉक्स का प्रश्न है — “क्या हम पाँच बड़े दादाओं की दादागिरी खत्म करना चाहते हैं या उनमें शामिल होकर एक और दादा बनना चाहते हैं?” और भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट रूप से दूसरी वाली है।
★2022 का ‘वीटो इनिशिएटिव’ इन तीनों से अलग एक चौथा रास्ता है — वीटो को छुए बिना उसकी जवाबदेही बढ़ाना। यही आज सबसे व्यावहारिक दिशा मानी जाती है।
T3.2 ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ विफल है’ — पूरी बहस, दोनों पक्ष★★
यह प्रश्न 11 का दिल है। दोनों स्तंभ पूरे भरिए।
| ! विफलता के प्रमाण | ★सफलता के प्रमाण |
|---|---|
| लेबनान, 2006 — हमला जून में, प्रस्ताव अगस्त में, वापसी अक्टूबर में (पाठ्यपुस्तक का अपना उदाहरण) | ★तीसरा विश्वयुद्ध नहीं हुआ — जबकि दो महाशक्तियाँ परमाणु-सज्जित थीं और शीतयुद्ध 45 वर्ष चला |
| रवांडा (1994), स्रेब्रेनित्सा (1995), सोमालिया — (पाठ्यपुस्तक बुतरस घाली के बॉक्स में स्वीकार करती है) | ★चेचक (smallpox) का उन्मूलन — WHO के नेतृत्व में; मानव इतिहास में पहली बार कोई रोग पूरी तरह मिटा |
| ! वीटो के कारण सीरिया, यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे संकटों पर परिषद् बार-बार मूक | ★विऔपनिवेशीकरण — UN की सदस्य-संख्या 51 से 193 होना ही इसका प्रमाण है |
| सुधार 1992 से अटका; परिषद् का आकार 1965 से नहीं बदला | ★मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (1948) — आज के लगभग हर संविधान की जड़ |
| ! 2025 का वित्तीय संकट — 1.586 अरब डॉलर बकाया; 15% बजट-कटौती | ★UNHCR, UNICEF, WFP — करोड़ों लोगों तक रोज़ पहुँचने वाली मशीनरी; तीनों को नोबेल |
| ! एक ही देश पर 22% बजट-निर्भरता | ★शांति सेना — 1988 का नोबेल; आज भी दर्जनों संघर्षों में तैनात |
★★सबसे संतुलित निष्कर्ष वही है जो पाठ्यपुस्तक देती है: कसौटी ‘पूर्ण शांति’ नहीं, हैमरसोल्ड की दी हुई कसौटी है — “नरक से बचाना।” और एक तर्क जो निबंध में सबसे अच्छा चलता है: ★“जो युद्ध नहीं हुआ, वह ख़बर नहीं बनता। इसीलिए इस संस्था की विफलताएँ दिखती हैं और सफलताएँ नहीं।”
T3.3 वित्तीय निर्भरता — पाठ का अधूरा तर्कध्यान★
पाठ्यपुस्तक कहती है कि अमरीका “बजट में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला देश है” और यह उसके प्रभाव का कारण है। यह आधा सच है। पूरा सच दो-तरफ़ा है —
| प्रभाव का पक्ष | निर्भरता का पक्ष |
|---|---|
| बड़े दाता की बात में वज़न होता है | ! जब वह भुगतान रोक देता है, संस्था ठप हो जाती है |
| महासचिव के चयन तक में असर | ! 2025 में तरलता-संकट के कारण मानवाधिकार उच्चायुक्त को गतिविधियाँ स्थगित करनी पड़ीं |
| एजेंडा तय करने में भूमिका | ! 2026 का बजट 15% घटाना पड़ा; तंत्र के संसाधन 30% तक घट सकते हैं |
★★इसीलिए ‘ऑनर रोल’ — समय पर पूरा भुगतान करने वाले देशों की सूची — केवल औपचारिकता नहीं है। और भारत का उसमें 2025 तथा 2026, दोनों वर्षों में शामिल होना, प्रश्न 9 में सबसे ठोस और सत्यापन-योग्य तर्क है।
★निबंध-योग्य वाक्य: “जो संस्था अपने बजट के लिए मुट्ठी भर देशों पर निर्भर हो, वह उन देशों पर अंकुश कैसे लगाएगी? यही संयुक्त राष्ट्रसंघ का मूल संरचनात्मक विरोधाभास है।”
T3.4 केस-स्टडी: वीटो ने कब क्या रोका★
पाठ्यपुस्तक केवल संख्याएँ देती है (रूस 135, अमरीका 84…)। संख्याओं के पीछे का पैटर्न ज्यादा सिखाता है —
| दौर | पैटर्न |
|---|---|
| 1946–1970 | ★सोवियत संघ का वीटो सबसे ज्यादा — क्योंकि परिषद् में वह अल्पमत में था और पश्चिमी प्रस्तावों की बाढ़ थी |
| 1970 के बाद | ★अमरीका का वीटो बढ़ा — विशेषकर पश्चिम एशिया से जुड़े प्रस्तावों पर, जब महासभा और परिषद् का बहुमत उसके विरुद्ध जाने लगा |
| 1990 का दशक | वीटो का प्रयोग सबसे कम — शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद का सहयोग-काल |
| 2011 के बाद | ! फिर तेज़ी से बढ़ा — सीरिया और अन्य संकटों पर |
| कश्मीर | 1950–60 के दशक में सोवियत संघ ने भारत के पक्ष में कई बार वीटो का प्रयोग किया |
★★सबक: वीटो का प्रयोग शक्ति का नहीं, अल्पमत का संकेत है। जो देश परिषद् में अलग-थलग पड़ता है, वही वीटो पर सबसे ज्यादा निर्भर होता है। — यह प्रश्न 12 में एक बहुत परिपक्व तर्क है।
T3.5 पाठ की एक बारीकी — ‘अनुपस्थिति वीटो नहीं है’ध्यान
पाठ्यपुस्तक कहती है कि “पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सहमत होना… ज़रूरी है” (प्रश्न 2-ग)। तकनीकी रूप से यह पूरी तरह सटीक नहीं है — व्यवहार में स्थायी सदस्य मतदान से अनुपस्थित रहकर प्रस्ताव को पारित होने दे सकता है, और यह कई निर्णायक अवसरों पर हुआ है।
! परीक्षा में पाठ्यपुस्तक का ही उत्तर लिखिए — ‘सही’। पर UPSC मुख्य परीक्षा में यह बारीकी जानना उपयोगी है, क्योंकि यह दिखाता है कि वीटो एक ‘सक्रिय इनकार’ है, ‘निष्क्रिय असहमति’ नहीं — और इसीलिए ‘रचनात्मक अनुपस्थिति’ (constructive abstention) कूटनीति का एक औज़ार है।
संभावित प्रतियोगी-परीक्षा प्रश्न
1. 1965 में किसकी सदस्य संख्या 11 से 15 हुई, और अस्थायी सदस्य कितने से कितने हुए?
सुरक्षा परिषद् की — अस्थायी 6 से 10; स्थायी 5 ही रहे। यह एकमात्र बार है जब परिषद् का आकार बदला।
2. चार्टर संशोधन के लिए क्या चाहिए?
महासभा के दो-तिहाई का समर्थन, और सभी पाँच स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई का अनुसमर्थन (अनुच्छेद 108)।
3. G-4 और UfC — कौन क्या चाहता है?
G-4 (भारत, जर्मनी, जापान, ब्राज़ील) — 25–26 सदस्य, छह नई स्थायी सीटें, वीटो 10–15 वर्ष बाद। UfC (इटली के नेतृत्व में; पाकिस्तान भी) — कोई नई स्थायी सीट नहीं।
4. ‘वीटो इनिशिएटिव’ क्या है?
★महासभा का प्रस्ताव A/RES/76/262, 26 अप्रैल 2022, सर्वसम्मति से — वीटो लगने पर महासभा को 10 कार्य-दिवसों के भीतर बहस बुलानी होगी। पहली बार प्रयोग 8 जून 2022 को।
5. UN80 पहल क्या है और कब शुरू हुई?
मार्च 2025, महासचिव गुटेरेस द्वारा — तीन कार्य-धाराएँ: दक्षता, अधिदेश-समीक्षा, और संरचनात्मक बदलाव।
6. 2025 में UN का कुल बकाया कितना था?
लगभग 1.586 अरब डॉलर; 2026 का बजट 3.7 से घटाकर लगभग 3.2 अरब डॉलर।
7. अमरीका 2025–26 में किन-किन संगठनों से हटा?
WHO, UNESCO, UNHRC, पेरिस समझौता, UNFCCC — और कुल 66 संगठनों से समर्थन वापस।
8. भारत के कितने शांति-सैनिक शहीद हुए हैं?
★179 — किसी भी UN सदस्य-देश से अधिक। भारत 49 से अधिक अभियानों में 2,00,000 से अधिक सैनिक भेज चुका है।
9. UN का सबसे पुराना शांति-अभियान कौन-सा है? और भारत से जुड़ा कौन-सा?
UNTSO (1948, पश्चिम एशिया) — सबसे पुराना। UNMOGIP (1949) — भारत और पाकिस्तान के लिए।
10. ITU की विशेषता क्या है?
★1865 से — विश्व की सबसे पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संस्था, जो आज UN की विशेष एजेंसी है।
11. IMF में अमरीका के 16.52% मताधिकार का व्यावहारिक अर्थ क्या है?
बड़े फ़ैसलों के लिए 85% बहुमत चाहिए — इसलिए अमरीका के पास वस्तुतः वीटो है।
12. ICJ और ICC में तीन अंतर बताइए।
(1) ICJ UN का अंग है, ICC नहीं (रोम संविधि से बना, 2002); (2) ICJ में केवल राज्य पक्षकार, ICC व्यक्तियों पर मुकदमा चलाता है; (3) दोनों हेग में हैं।
13. किस महासचिव को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला और क्यों?
बुतरस बुतरस घाली — अमरीकी वीटो के कारण।
14. SDGs और MDGs में मुख्य अंतर?
MDGs (2000–2015, 8 लक्ष्य) केवल विकासशील देशों के लिए थे; SDGs (2015, 17 लक्ष्य, 169 उप-लक्ष्य, 2030 तक) सभी देशों पर लागू हैं।
15. 2025 और 2026 में भारत ने UN नियमित बजट में कितना दिया?
2025 में 3 करोड़ 76 लाख 40 हज़ार डॉलर; 2026 में 3 करोड़ 51 लाख 80 हज़ार डॉलर — दोनों बार ‘ऑनर रोल’ में शामिल।
स्रोत
T1.1 / T3.1 — सुधार, चार्टर संशोधन, G-4 और UfC
- Security Council Reform — UN General Assembly (आधिकारिक)
- G4 Ministerial Joint Statement, 25 September 2025 — German Federal Foreign Office
- G4 Ministerial Joint Press Statement on the reform of the UN Security Council — German Federal Foreign Office
- Meeting of the Foreign Ministers of the G4 Countries on UN Security Council Reform — Ministry of Foreign Affairs of Japan
- Uniting for Consensus Joint Statement — Permanent Mission of Italy to the UN
- UN Security Council Reform — ISS African Futures
T1.3 — वीटो इनिशिएटिव (A/RES/76/262)
- UN General Assembly Adopts Resolution on Vetoes — American Society of International Law
- G.A. Res. 76/262 on a Standing Mandate for a General Assembly debate when a veto is cast — International Legal Materials, Cambridge University Press
- Security Council’s veto power is ‘poster child’ of global gridlock — UN News
T1.4 — UN80 पहल और वित्तीय संकट
- The UN80 Initiative: What to Know About the United Nations’ Reform Plan — Council on Foreign Relations
- UN chief warns unpaid dues near $1.6 billion, as budget cuts deepen — UN News
- UN at 80: Funding challenges at the United Nations — UK House of Commons Library
- In Hindsight: The Security Council and the UN80 Initiative — Security Council Report
- UN80 Initiative: proposed budget cuts disproportionately hit the human rights pillar — International Service for Human Rights
T1.5 — अमरीका की वापसी
- Withdrawing the United States from and Ending Funding to Certain United Nations Organizations — The White House (आधिकारिक)
- President Trump signs executive order withdrawing US from UNHRC — News On AIR (Prasar Bharati)
- U.S. to exit 66 international organizations in further retreat from global cooperation — NPR
- UN chief says the U.S. has ‘legal obligation’ to fund agencies after Trump’s withdrawal order — PBS News
T1.6 — भारत: सुरक्षा परिषद्, शांति सेना और बजट
- India — UN Peacekeeping (आधिकारिक)
- Security Council — Permanent Mission of India to the UN, New York
- Annexure — United Nations — Ministry of External Affairs, Government of India
- Indian Army United Nations peacekeeping missions — Wikipedia
- Committee on Contributions — Honour Roll — United Nations (आधिकारिक)
- India contributes $37.64 million to UN regular budget for 2025 — News On AIR (Prasar Bharati)
- India joins UN honour roll after promptly paying 2026 dues — News On AIR (Prasar Bharati)
- Chart of the week: UN budget contributions 2025 — ICAEW
अंतिम अनुस्मारक: ! बोर्ड परीक्षा में केवल पाठ्यपुस्तक का उत्तर लिखिए। पाठ्यपुस्तक के आँकड़े 2016 से 2024 तक के मिले-जुले हैं। IGN, G-4, UfC, वीटो इनिशिएटिव, UN80, 2025 का वित्तीय संकट, अमरीका की वापसी, भारत की आठ अस्थायी सदस्यताएँ और 179 शहीद शांति-सैनिक — ये सब पाठ्यपुस्तक से बाहर हैं और अतिरिक्त बिंदु के रूप में ही प्रयोग कीजिए। ★एकमात्र अपवाद: पृ. 57 की ‘11 से 15’ वाली त्रुटि — वहाँ ‘सुरक्षा परिषद्’ ही लिखवाइए।