अध्याय 6पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

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यह क्या है: नीचे दिया गया हर वाक्य वैसा ही है जैसा शिक्षक कक्षा में बोलेंगे और विद्यार्थी अपनी कॉपी में लिखेंगे। यह सारांश नहीं, बोलने की स्क्रिप्ट है।

कैसे इस्तेमाल करें:

  • बोल्ड शब्दों पर आवाज़ ठहराइए — विद्यार्थी इन्हें रेखांकित करेंगे।
  • [रुकिए] का अर्थ है — लिखने का समय दीजिए।
  • 〔शिक्षक के लिए〕 — यह बोलना नहीं है, केवल आपके लिए निर्देश है।
  • कुल 13 श्रुतलेख-खंड, 6 कालांशों में बँटे हुए।

कालांश 1

खंड 0 — दो ज़रूरी सुधार(पहले ही मिनट में)

〔शिक्षक के लिए: यह लिखवाना नहीं है, केवल बोलकर बता दीजिए। पर बोर्ड पर लिख दीजिए ताकि दिखता रहे।〕

“किताब खोलने से पहले दो बातें सुन लीजिए। पृष्ठ 82 पर लिखा है — ‘अध्याय सात में हमने…’ — वह अब अध्याय पाँच है, समकालीन विश्व में सुरक्षा। और उसी पृष्ठ पर लिखा है — ‘पृष्ठ 24 पर दिए मानचित्र को देखें’ — पृष्ठ 24 पर अब चीन के कार्टून हैं। वह मानचित्र अब अध्याय एक में है। ये दोनों पुरानी किताब के संदर्भ रह गए हैं। अब पाठ शुरू करते हैं।”

खंड 1 — पर्यावरण राजनीति कैसे बना

〔शिक्षक के लिए: बोर्ड पर शीर्षक लिखकर शुरू कीजिए।〕

लिखिए — शीर्षक: वैश्विक राजनीति में पर्यावरण की चिंता क्यों? [रुकिए]

एक। पर्यावरण के मसले ने 1960 के दशक से जोर पकड़ा। [रुकिए]

दो। पहले देखिए कि नुकसान क्या हुआ है। [रुकिए]

तीन। “दुनिया भर में कृषि-योग्य भूमि में अब कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो रही” — और मौजूद उपजाऊ जमीन के बड़े हिस्से की उर्वरता कम हो रही है। चारागाहों के चारे खत्म होने को हैं और मत्स्य-भंडार घट रहा है। [रुकिए]

चार। इसका परिणाम — “इससे खाद्य-उत्पादन में कमी आ रही है।” [रुकिए]

पाँच। अब तीन आँकड़े लिखिए, और इन्हें रेखांकित कीजिए। संयुक्त राष्ट्रसंघ की मानव विकास रिपोर्ट, सन् दो हज़ार सोलह, के अनुसार — [रुकिए]

विकासशील देशों की छियासठ दशमलव तीन करोड़ जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होता। [रुकिए]

दो अरब चालीस करोड़ आबादी साफ-सफाई की सुविधा से वंचित है। [रुकिए]

और इस वजह से तीस लाख से ज्यादा बच्चे हर साल मौत के शिकार होते हैं। [रुकिए]

छह। इसके अलावा — वनों की कटाई से जैव-विविधता की हानि; धरती के ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन गैस की मात्रा में लगातार कमी, जिसे ओज़ोन परत में छेद होना कहते हैं; और समुद्रतटीय क्षेत्रों का बढ़ता प्रदूषण। [रुकिए]

खंड 2 — ये मसले राजनीतिक क्यों हैं

〔शिक्षक के लिए: यह खंड पूरे अध्याय की धुरी है। धीमे बोलिए।〕

लिखिए — उपशीर्षक: ये मसले राजनीतिक क्यों हैं? [रुकिए]

एक। पहला कारण — इन पर अंकुश रखने के लिए सरकारों को कदम उठाने पड़ते हैं, इसलिए इनकी परिणति राजनीतिक होती है। [रुकिए]

दो। और — “इन मसलों में अधिकांश ऐसे हैं कि किसी एक देश की सरकार इनका पूरा समाधान अकेले दम पर नहीं कर सकती। इस वजह से ये मसले विश्व-राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं।” [रुकिए]

तीन। लेकिन एक दूसरा, और गहरा कारण भी है। [रुकिए]

चार। ध्यान से लिखिए — “कौन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है? इस पर रोक लगाने के उपाय करने की जिम्मेदारी किसकी है? धरती के प्राकृतिक संसाधनों पर किसको कितने इस्तेमाल का हक है?” [रुकिए]

पाँच। और अब उत्तर — इसे रेखांकित कीजिए — “इन सवालों के जवाब बहुधा इस बात से निर्धारित होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है। इस तरह ये मसले गहरे अर्थों में राजनीतिक हैं।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यह वाक्य बोर्ड के कोने में लिख दीजिए और पूरे अध्याय तक मत मिटाइए। हर खंड में इसे दोहराइए।〕

छह। इस चिंता को आवाज़ किसने दी? सन् 1972 में एक विद्वत् समूह ‘क्लब ऑव रोम’ ने ‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ शीर्षक से एक पुस्तक प्रकाशित की। यह पुस्तक “दुनिया की बढ़ती जनसंख्या के आलोक में प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के अंदेशे” को बताती है। [रुकिए]

सात। और संयुक्त राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम, यानी यू-एन-ई-पी, सहित अनेक संगठनों ने सम्मेलन कराये। “तभी से पर्यावरण वैश्विक राजनीति का एक महत्त्वपूर्ण मसला बन गया।” [रुकिए]

कालांश 2

खंड 3 — पृथ्वी सम्मेलन, 1992

लिखिए — शीर्षक: पृथ्वी सम्मेलन — 1992। [रुकिए]

एक। सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्रसंघ का पर्यावरण और विकास के मुद्दे पर केंद्रित एक सम्मेलन ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में हुआ। इसे पृथ्वी सम्मेलन कहा जाता है। [रुकिए]

दो। “इस सम्मेलन में 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय निगमों ने भाग लिया।” [रुकिए]

तीन। इसकी पृष्ठभूमि यह थी — “इस सम्मेलन से पाँच साल पहले, सन् 1987 में, ‘अवर कॉमन फ्यूचर’ शीर्षक बर्टलैंड रिपोर्ट छपी थी।” [रुकिए]

चार। उस रिपोर्ट में चेताया गया था कि “आर्थिक विकास के चालू तौर-तरीके आगे चलकर टिकाऊ साबित नहीं होंगे।” [रुकिए]

पाँच। अब एक बहुत ज़रूरी बात। रियो-सम्मेलन में यह बात खुलकर सामने आयी कि विश्व के धनी और विकसित देश, यानी उत्तरी गोलार्द्ध, तथा गरीब और विकासशील देश, यानी दक्षिणी गोलार्द्ध, पर्यावरण के अलग-अलग अजेंडे के पैरोकार हैं। [रुकिए]

छह। उत्तरी देशों की मुख्य चिंता ओज़ोन परत की छेद और वैश्विक तापवृद्धि को लेकर थी। [रुकिए]

सात। दक्षिणी देश आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन के आपसी रिश्ते को सुलझाने के लिए ज्यादा चिंतित थे। [रुकिए]

आठ। अब सम्मेलन के परिणाम लिखिए। [रुकिए]

पहला — “जलवायु-परिवर्तन, जैव-विविधता और वानिकी के संबंध में कुछ नियमाचार निर्धारित हुए।” [रुकिए]

दूसरा — “इसमें ‘अजेंडा-21’ के रूप में विकास के कुछ तौर-तरीके भी सुझाए गए।” [रुकिए]

तीसरा — “सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। इसे ‘टिकाऊ विकास’ का तरीका कहा गया।” [रुकिए]

नौ। लेकिन दो कठिनाइयाँ भी लिखिए। [रुकिए] — “समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा।” [रुकिए]

दस। और — “कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘अजेंडा-21’ का झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है।” [रुकिए]

खंड 4 — विश्व की साझी संपदा

〔शिक्षक के लिए: यहाँ बोर्ड पर दो खाने बनाइए — ‘साझी संपदा’ और ‘वैश्विक संपदा’। यह भेद सबसे ज़्यादा गड़बड़ाता है।〕

लिखिए — शीर्षक: विश्व की साझी संपदा की सुरक्षा। [रुकिए]

एक। पहले परिभाषा — “साझी संपदा उन संसाधनों को कहते हैं जिन पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का अधिकार होता है।” [रुकिए]

दो। उदाहरण — “संयुक्त परिवार का चूल्हा, चारागाह, मैदान, कुआँ या नदी।” [रुकिए]

तीन। अब दूसरी धारणा — “इसी तरह विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन साझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है।” [रुकिए]

चार। “इन्हें ‘वैश्विक संपदा’ या ‘मानवता की साझी विरासत’ कहा जाता है।” [रुकिए]

पाँच। और अब वह सूची जो परीक्षा में लगभग निश्चित है — “इसमें पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: ये चारों बोर्ड पर बड़े अक्षरों में लिखकर घेर दीजिए।〕

छह। इनकी सुरक्षा आसान नहीं है — “‘वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।” [रुकिए]

सात। फिर भी कुछ महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं — अंटार्कटिका संधि, सन् 1959; मॉन्ट्रियल न्यायाचार, सन् 1987; और अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार, सन् 1991। [रुकिए]

आठ। मूल कठिनाई यह है — “पारिस्थितिकी से जुड़े हर मसले के साथ एक बड़ी समस्या यह जुड़ी है कि अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय-सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते हैं।” [रुकिए]

नौ। इसी संदर्भ में — “1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छेद की खोज एक आँख खोल देने वाली घटना है।” [रुकिए]

दस। और बाहरी अंतरिक्ष के बारे में यह वाक्य लिखिए — “बाहरी अंतरिक्ष में जो दोहन-कार्य हो रहे हैं उनके फायदे न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं और न आगे की पीढ़ियों के लिए।” [रुकिए]

कालांश 3

खंड 5 — अंटार्कटिका

लिखिए — उपशीर्षक: अंटार्कटिका पर किसका स्वामित्व है? [रुकिए]

एक। “अंटार्कटिक महादेशीय इलाका एक करोड़ चालीस लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।” [रुकिए]

दो। “विश्व के निर्जन क्षेत्र का 26 प्रतिशत हिस्सा इसी महादेश के अंतर्गत आता है।” [रुकिए]

तीन। “स्थलीय हिम का 90 प्रतिशत हिस्सा और धरती पर मौजूद स्वच्छ जल का 70 प्रतिशत हिस्सा इस महादेश में मौजूद है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: तीनों प्रतिशत बोर्ड पर एक पंक्ति में लिखिए — छब्बीस, नब्बे, सत्तर। और कहिए — “निर्जन कम, बर्फ सबसे ज्यादा, पानी बीच में।”〕

चार। इसकी पारिस्थितिकी में एक ख़ास जीव है — “इसमें क्रिल मछली भी शामिल है जो समुद्री आहार शृंखला की धुरी है और जिस पर दूसरे जानवरों का आहार निर्भर है।” [रुकिए]

पाँच। और यह वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है — “इस महादेश की अंदरूनी हिमानी परत ग्रीन हाऊस गैस के जमाव का महत्त्वपूर्ण सूचना-स्रोत है। साथ ही, इससे लाखों बरस पहले के वायुमंडलीय तापमान का पता किया जा सकता है।” [रुकिए]

छह। अब स्वामित्व का सवाल। इस पर दो दावे हैं। [रुकिए]

सात। पहला — “कुछ देश जैसे ब्रिटेन, अर्जेन्टीना, चिले, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने अंटार्कटिक क्षेत्र पर अपने संप्रभु अधिकार का वैधानिक दावा किया।” [रुकिए]

आठ। दूसरा — “अन्य अधिकांश देशों ने इससे उलटा रुख अपनाया कि अंटार्कटिक प्रदेश विश्व की साझी संपदा है और यह किसी भी देश के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं है।” [रुकिए]

नौ। और एक चेतावनी — “1959 के बाद इस इलाके में गतिविधियाँ वैज्ञानिक अनुसंधान, मत्स्य आखेट और पर्यटन तक सीमित रही हैं। लेकिन इतनी कम गतिविधियों के बावजूद इस क्षेत्र के कुछ हिस्से अवशिष्ट पदार्थ जैसे तेल के रिसाव के दबाव में अपनी गुणवत्ता खो रहे हैं।” [रुकिए]

खंड 6 — साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ

〔शिक्षक के लिए: यह पूरे अध्याय का समाधान-सिद्धांत है। दोनों पक्ष बोर्ड पर लिखवाइए।〕

लिखिए — शीर्षक: साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ। [रुकिए]

एक। “उत्तर के विकसित देश पर्यावरण के मसले पर उसी रूप में चर्चा करना चाहते हैं जिस दशा में पर्यावरण आज मौजूद है। ये देश चाहते हैं कि पर्यावरण के संरक्षण में हर देश की जिम्मेदारी बराबर हो।” [रुकिए]

दो। “दक्षिण के विकासशील देशों का तर्क है कि विश्व में पारिस्थितिकी को नुकसान अधिकांशतया विकसित देशों के औद्योगिक विकास से पहुँचा है।” [रुकिए]

तीन। “यदि विकसित देशों ने पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुँचाया है तो उन्हें इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी ज्यादा उठानी चाहिए।” [रुकिए]

चार। “इसके अलावा, विकासशील देश अभी औद्योगीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और ज़रूरी है कि उन पर वे प्रतिबंध न लगें जो विकसित देशों पर लगाये जाते हैं।” [रुकिए]

पाँच। और अब निर्णय — “सन् 1992 में हुए पृथ्वी सम्मेलन में इस तर्क को मान लिया गया और इसे ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत कहा गया।” [रुकिए]

छह। रियो-घोषणापत्र के शब्द लिखिए। [रुकिए] — “पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राज्यों की ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ होंगी।” [रुकिए]

सात। और आगे — “विकसित देशों के समाजों का वैश्विक पर्यावरण पर दबाव ज्यादा है और इन देशों के पास विपुल प्रौद्योगिक एवं वित्तीय संसाधन हैं। इसे देखते हुए टिकाऊ विकास के अंतर्राष्ट्रीय प्रयास में विकसित देश अपनी ख़ास जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।” [रुकिए]

आठ। यही बात यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कंवेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज, यानी यू-एन-एफ-सी-सी-सी, सन् 1992 में भी कही गई। [रुकिए]

नौ। इसमें दो बातें मानी गईं। पहली — “ऐतिहासिक रूप से भी और मौजूदा समय में भी ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन में सबसे ज्यादा हिस्सा विकसित देशों का है।” [रुकिए]

दस। दूसरी — “विकासशील देशों का प्रतिव्यक्ति उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम है।” [रुकिए]

ग्यारह। और इसका परिणाम — “इस कारण चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को क्योटो-प्रोटोकॉल की बाध्यताओं से अलग रखा गया है।” [रुकिए]

बारह। अब क्योटो प्रोटोकॉल के बारे में — “क्योटो प्रोटोकॉल एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। इसके अंतर्गत औद्योगिक देशों के लिए ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।” [रुकिए]

तेरह। कौन-सी गैसें — “कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रो-फ्लोरो कार्बन।” [रुकिए]

चौदह। और यह वाक्य लिखिए — “जापान के क्योटो में 1997 में इस प्रोटोकॉल पर सहमति बनी।” [रुकिए]

कालांश 4

खंड 7 — साझी संपदा और देवस्थान

लिखिए — शीर्षक: साझी संपदा। [रुकिए]

एक। “साझी संपदा का अर्थ होता है ऐसी संपदा जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो।” [रुकिए]

दो। “ऐसे संसाधन की प्रकृति, उपयोग के स्तर और रख-रखाव के संदर्भ में समूह के हर सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होंगे और समान उत्तरदायित्व निभाने होंगे।” [रुकिए]

तीन। “उदाहरण के लिए, सदियों के चलन और आपसी समझदारी से भारत के ग्रामीण समुदायों ने साझी संपदा के संदर्भ में अपने सदस्यों के अधिकार और दायित्व तय किए हैं।” [रुकिए]

चार। लेकिन अब यह घट रही है। चार कारण लिखिए — “निजीकरण, गहनतर खेती, आबादी की वृद्धि और पारिस्थितिकी तंत्र की गिरावट समेत कई कारणों से पूरी दुनिया में साझी संपदा का आकार घट रहा है, उसकी गुणवत्ता और गरीबों को उसकी उपलब्धता कम हो रही है।” [रुकिए]

पाँच। अब भारत का एक सुंदर उदाहरण। लिखिए — उपशीर्षक: भारत के पावन वन-प्रांत। [रुकिए]

छह। “भारत में विद्यमान ‘पावन वन-प्रांत’ इस चलन के सुंदर उदाहरण हैं। इस प्रथा में वनों के कुछ हिस्सों को काटा नहीं जाता। इन स्थानों पर देवता अथवा किसी पुण्यात्मा का वास माना जाता है। इन्हें ही ‘पावन वन-प्रांत’ या ‘देवस्थान’ कहा जाता है।” [रुकिए]

सात। अब इनके नाम लिखिए — राजस्थान में वानी, केंकड़ी और ओरान; झारखंड में जहेरा थान और सरना; मेघालय में लिंगदोह; केरल में काव; उत्तराखंड में थान या देवभूमि; और महाराष्ट्र में देव रहतिस। [रुकिए]

आठ। इनका महत्त्व — “‘देवस्थान’ को हम ऐसी व्यवस्था के रूप में देख सकते हैं जिसके अंतर्गत पुराने समाज प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह करते हैं कि पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहे।” [रुकिए]

नौ। और अब वह वाक्य जो सबसे महत्वपूर्ण है — इसे रेखांकित कीजिए — “संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी जिसने इतने युगों से वनों को बचाए रखने की प्रतिबद्धता कायम रखी।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ दस सेकंड रुकिए। यह अध्याय का सबसे सुंदर वाक्य है।〕

दस। पर आज एक कठिन समस्या है — “‘देवस्थान’ के प्रबंधन में एक कठिन समस्या तब आती है जब ऐसे स्थान का कानूनी स्वामित्व एक के पास हो और व्यावहारिक नियंत्रण किसी दूसरे के हाथ में हो — यानी कानूनी स्वामित्व राज्य का हो और व्यावहारिक नियंत्रण समुदाय के हाथ में। इन दोनों के नीतिगत मानक अलग-अलग हैं।” [रुकिए]

खंड 8 — भारत का पक्ष

लिखिए — शीर्षक: पर्यावरण के मसले पर भारत का पक्ष। [रुकिए]

एक। “भारत ने 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल, जो 1997 का है, उस पर हस्ताक्षर किए और इसका अनुमोदन किया।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ ज़ोर देकर कहिए — “संधि 1997 की, भारत के हस्ताक्षर 2002 में। हर साल यहीं गलती होती है।”〕

दो। “भारत, चीन और अन्य विकासशील देशों को क्योटो प्रोटोकॉल की बाध्यताओं से छूट दी गई है क्योंकि औद्योगीकरण के दौर में ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन के मामले में इनका कुछ ख़ास योगदान नहीं था।” [रुकिए]

तीन। लेकिन आलोचक कहते हैं कि “भारत और चीन भी जल्दी ही ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन के मामले में विकसित देशों की भाँति अगली कतार में नज़र आयेंगे।” [रुकिए]

चार। भारत का मुख्य तर्क क्या है? “भारत पर्यावरण से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय मसलों में ज्यादातर ऐतिहासिक उत्तरदायित्व का तर्क रखता है।” [रुकिए]

पाँच। “इस तर्क के अनुसार ग्रीनहाऊस गैसों के रिसाव की ऐतिहासिक और मौजूदा जवाबदेही ज्यादातर विकसित देशों की है।” [रुकिए]

छह। और — “‘विकासशील देशों की पहली और अपरिहार्य प्राथमिकता आर्थिक तथा सामाजिक विकास की है।’” [रुकिए]

सात। अब तीन आँकड़े लिखिए, एक ही पंक्ति में। [रुकिए]

सन् दो हज़ार में विश्व का औसत — तीन दशमलव आठ टन प्रति व्यक्ति। [रुकिए]

दो हज़ार तक भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन — शून्य दशमलव नौ टन। [रुकिए]

और दो हज़ार तीस तक अनुमान — एक दशमलव छह टन प्रति व्यक्ति। [रुकिए]

आठ। निष्कर्ष — “भारत में 2030 तक कार्बन का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन बढ़ने के बावजूद विश्व के सन् 2000 के औसत के आधे से भी कम होगा।” [रुकिए]

नौ। अब भारत के ठोस कदम लिखिए। [रुकिए]

पहला — नेशनल ऑटो-फ्यूल पॉलिसी के अंतर्गत वाहनों के लिए स्वच्छतर ईंधन अनिवार्य कर दिया गया है। [रुकिए]

दूसरा — सन् 2001 में ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम पारित हुआ। [रुकिए]

तीसरा — सन् 2003 के बिजली अधिनियम में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। [रुकिए]

चौथा — प्राकृतिक गैस के आयात और स्वच्छ कोयले के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी अपनाने की तरफ रुझान बढ़ा है। [रुकिए]

पाँचवाँ — भारत बायोडीजल से संबंधित एक राष्ट्रीय मिशन चला रहा है, जिसमें एक करोड़ दस लाख हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल होगा। [रुकिए]

छठा — और यह तारीख याद रखिए — “भारत ने 2 अक्तूबर 2016 को पेरिस जलवायु समझौते को अनुमोदित किया।” [रुकिए]

सातवाँ — “पुनर्नवीकृत होने वाली ऊर्जा के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक भारत में चल रहा है।” [रुकिए]

दस। और भारत का एक और विचार — “भारत का यह भी मानना है कि ‘दक्षेस’ यानी सार्क में शामिल देश पर्यावरण के प्रमुख वैश्विक मसलों पर एक समान राय बनायें ताकि इस क्षेत्र की आवाज़ वज़नी हो सके।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ पृष्ठ 89 की साइड-टिप्पणी पढ़कर सुनाइए और कक्षा से पूछिए — “पहले उन लोगों ने धरती को बर्बाद किया और अब धरती को चौपट करने की हमारी बारी है। क्या यही है हमारा पक्ष?” — दो-तीन उत्तर लेकर आगे बढ़िए।〕

कालांश 5

खंड 9 — पर्यावरण आंदोलन

लिखिए — शीर्षक: पर्यावरण आंदोलन — एक या अनेक। [रुकिए]

एक। “कुछ महत्त्वपूर्ण पेशकदमियाँ सरकारों की तरफ से नहीं बल्कि विश्व के विभिन्न भागों में सक्रिय पर्यावरण के प्रति सचेत कार्यकर्ताओं ने की हैं।” [रुकिए]

दो। “आज पूरे विश्व में पर्यावरण आंदोलन सबसे ज्यादा जीवंत, विविधतापूर्ण तथा ताकतवर सामाजिक आंदोलनों में शुमार किए जाते हैं।” [रुकिए]

तीन। और यह वाक्य ज़रूरी है — “सामाजिक चेतना के दायरे में ही राजनीतिक कार्रवाई के नये रूप जन्म लेते हैं या उन्हें खोजा जाता है।” [रुकिए]

चार। “मौजूदा पर्यावरण आंदोलनों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है।” [रुकिए]

पाँच। पहला प्रकार — वन-आंदोलन। ये “मैक्सिको, चिले, ब्राज़ील, मलेशिया, इंडोनेशिया, महादेशीय अफ्रीका और भारत” में सक्रिय हैं। [रुकिए]

छह। पर एक कड़वी सच्चाई — “तीन दशकों से पर्यावरण को लेकर सक्रियता का दौर जारी है। इसके बावजूद तीसरी दुनिया के विभिन्न देशों में वनों की कटाई खतरनाक गति से जारी है।” [रुकिए]

सात। दूसरा प्रकार — खनिज-उद्योग के विरुद्ध आंदोलन। “खनिज-उद्योग पृथ्वी पर मौजूद सबसे ताकतवर उद्योगों में एक है।” [रुकिए]

आठ। इसके नुकसान — “यह धरती के भीतर मौजूद संसाधनों को बाहर निकालता है, रसायनों का भरपूर उपयोग करता है, भूमि और जलमार्गों को प्रदूषित करता है और स्थानीय वनस्पतियों का विनाश करता है। इसके कारण जन-समुदायों को विस्थापित होना पड़ता है।” [रुकिए]

नौ। इसका एक उदाहरण फिलीपीन्स है, जहाँ कई समूहों ने ऑस्ट्रेलियाई बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘वेस्टर्न माइनिंग कारपोरेशन’ के खिलाफ अभियान चलाया। [रुकिए]

दस। और एक विडंबना — “इस कंपनी का विरोध खुद इसके स्वदेश यानी ऑस्ट्रेलिया में हुआ।” [रुकिए]

ग्यारह। तीसरा प्रकार — बाँध-विरोधी आंदोलन। “1980 के दशक के शुरुआती और मध्यवर्ती वर्षों में विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन दक्षिणी गोलार्द्ध में चला। आस्ट्रेलिया में चला यह आंदोलन फ्रैंकलिन नदी तथा इसके परिवर्ती वन को बचाने का आंदोलन था।” [रुकिए]

बारह। “भारत में बाँध-विरोधी और नदी हितैषी कुछ अग्रणी आंदोलन चल रहे हैं। इन आंदोलनों में नर्मदा आंदोलन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।” [रुकिए]

तेरह। और यह वाक्य रेखांकित कीजिए — “भारत में बाँध विरोधी तथा पर्यावरण-बचाव के अन्य आंदोलन एक अर्थ में समानधर्मी हैं क्योंकि ये अहिंसा पर आधारित हैं।” [रुकिए]

खंड 10 — क्या वन निर्जन होते हैं?

〔शिक्षक के लिए: यह अध्याय का सबसे गहरा विचार है। बोर्ड पर दो स्तंभ बनाइए।〕

लिखिए — उपशीर्षक: क्या वन निर्जन होते हैं? [रुकिए]

एक। “दक्षिणी देशों के वन-आंदोलन उत्तरी देशों के वन-आंदोलनों से एक खास अर्थ में भिन्न हैं।” [रुकिए]

दो। “दक्षिणी देशों के वन निर्जन नहीं हैं, जबकि उत्तरी गोलार्द्ध के देशों के वन जनविहीन हैं — या कहें कि इन देशों में वन को निर्जन प्रांत के रूप में देखा जाता है।” [रुकिए]

तीन। “इसी वजह से उत्तरी देशों में वनभूमि को निर्जन भूमि का दर्जा दिया गया है, यानी ऐसी जगह जहाँ लोग नहीं रहते-बसते।” [रुकिए]

चार। और अब इसकी सबसे बड़ी कमी — “यह दृष्टिकोण मनुष्य को प्रकृति का हिस्सा नहीं मानता।” [रुकिए]

पाँच। “दूसरे शब्दों में कहें तो यह दृष्टिकोण पर्यावरण को मनुष्य से दूर की चीज मानता है — यानी एक ऐसी चीज जिसे बाग-बगीचे या अभयारण्य में तब्दील कर मनुष्यों से बचाया जाना चाहिए।” [रुकिए]

छह। और दक्षिण का नज़रिया — “दूसरी तरफ, दक्षिणी देशों में पर्यावरण के अधिकांश मसले इस मान्यता पर आधारित हैं कि लोग वनों में भी रहते हैं।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ कहिए — “यही एक अंतर दोनों की पूरी पर्यावरण-नीति को अलग कर देता है।”〕

कालांश 6

खंड 11 — संसाधनों की भू-राजनीति

लिखिए — शीर्षक: संसाधनों की भू-राजनीति। [रुकिए]

एक। परिभाषा — “‘किसे, क्या, कब, कहाँ और कैसे हासिल होता है’ — ‘संसाधनों की भू-राजनीति’ इन्हीं सवालों से जूझती है।” [रुकिए]

दो। “यूरोपीय ताकतों के विश्वव्यापी प्रसार का एक मुख्य साधन और मकसद संसाधन रहे हैं।” [रुकिए]

तीन। “संसाधनों से जुड़ी भू-राजनीति को पश्चिमी दुनिया ने ज्यादातर व्यापारिक संबंध, युद्ध तथा ताकत के संदर्भ में सोचा।” [रुकिए]

चार। ऐतिहासिक क्रम — सत्रहवीं सदी से इमारती लकड़ी की आपूर्ति यूरोपीय शक्तियों की प्राथमिकता रही, क्योंकि समुद्री नौवहन स्वयं इमारती लकड़ियों पर आधारित था। [रुकिए]

पाँच। “पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सामरिक संसाधनों, खासकर तेल की निर्बाध आपूर्ति का महत्त्व बहुत अच्छी तरह उजागर हो गया।” [रुकिए]

छह। शीतयुद्ध के दौरान विकसित देशों ने चार कदम उठाए — संसाधन-दोहन के इलाकों तथा समुद्री परिवहन-मार्गों के इर्द-गिर्द सेना की तैनाती; महत्त्वपूर्ण संसाधनों का भंडारण; संसाधनों के उत्पादक देशों में मनपसंद सरकारों की बहाली; तथा बहुराष्ट्रीय निगमों और अपने हितसाधक अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को समर्थन देना। [रुकिए]

सात। “बहरहाल, वैश्विक रणनीति में तेल लगातार सबसे महत्त्वपूर्ण संसाधन बना हुआ है।” [रुकिए]

आठ। अब तेल के आँकड़े। [रुकिए]

“पश्चिम एशिया, ख़ासकर खाड़ी-क्षेत्र विश्व के कुल तेल-उत्पादन का 30 प्रतिशत मुहैया कराता है।” [रुकिए]

“इस क्षेत्र में विश्व के ज्ञात तेल-भंडार का 64 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है, और इस कारण यही एकलौता क्षेत्र है जो तेल की माँग में ख़ास बढ़ोत्तरी होने पर उसकी पूर्ति कर सकता है।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ रुककर कहिए — “तीस प्रतिशत उत्पादन का, चौंसठ प्रतिशत भंडार का। इन्हें मिलाइए मत।”〕

“सऊदी अरब के पास विश्व के कुल तेल-भंडार का एक चौथाई हिस्सा मौजूद है। सऊदी अरब विश्व में सबसे बड़ा तेल-उत्पादक देश है।” [रुकिए]

“इराक का ज्ञात तेल-भंडार सऊदी अरब के बाद दूसरे नंबर पर है। संभावना है कि इराक का तेल-भंडार एक सौ बारह अरब बैरल से कहीं ज्यादा हो।” [रुकिए]

नौ। और अब एक विरोधाभास — “संयुक्त राज्य अमरीका, यूरोप, जापान तथा चीन और भारत में इस तेल की खपत होती है, लेकिन ये देश इस इलाके से बहुत दूरी पर हैं।” [रुकिए]

दस। और यह वाक्य भी लिखिए — “पेट्रोलियम का इतिहास युद्ध और संघर्षों का भी इतिहास है।” [रुकिए]

ग्यारह। अब पानी। “विश्व-राजनीति के लिए पानी एक और महत्त्वपूर्ण संसाधन है। विश्व के हर हिस्से में स्वच्छ जल समान मात्रा में मौजूद नहीं है।” [रुकिए]

बारह। “इस कारण, संभावना है कि साझे जल-संसाधन को लेकर पैदा मतभेद 21वीं सदी में फसाद की जड़ साबित हों।” [रुकिए]

तेरह। “इसी को इंगित करने के लिए विश्व-राजनीति के कुछ विद्वानों ने ‘जलयुद्ध’ शब्द गढ़ा है।” [रुकिए]

चौदह। मतभेद का ढाँचा यह है — “जलधारा के उद्गम से दूर बसा हुआ देश उद्गम के नजदीक बसे हुए देश द्वारा इस पर बाँध बनाने, इसके माध्यम से अत्यधिक सिंचाई करने या इसे प्रदूषित करने पर आपत्ति जताता है।” [रुकिए]

पंद्रह। दो उदाहरण — “1950 और 1960 के दशक में इज़रायल, सीरिया तथा जार्डन के बीच हुआ संघर्ष। इनमें से प्रत्येक देश ने जॉर्डन और यारमुक नदी से पानी का बहाव मोड़ने की कोशिश की थी।” [रुकिए]

सोलह। “फिलहाल तुर्की, सीरिया और इराक के बीच फरात नदी पर बाँध के निर्माण को लेकर एक-दूसरे से ठनी हुई है।” [रुकिए]

खंड 12 — मूलवासी और उनके अधिकार

लिखिए — शीर्षक: मूलवासी और उनके अधिकार। [रुकिए]

एक। “मूलवासियों का सवाल पर्यावरण, संसाधन और राजनीति को एक साथ जोड़ देता है।” [रुकिए]

दो। अब संयुक्त राष्ट्रसंघ की परिभाषा, ध्यान से — “संयुक्त राष्ट्रसंघ ने 1982 में इनकी एक शुरुआती परिभाषा दी। इन्हें ऐसे लोगों का वंशज बताया गया जो किसी मौजूदा देश में बहुत दिनों से रहते चले आ रहे थे। फिर किसी दूसरी संस्कृति या जातीय मूल के लोग विश्व के दूसरे हिस्से से उस देश में आये और इन लोगों को अधीन बना लिया।” [रुकिए]

तीन। “किसी देश के ‘मूलवासी’ आज भी उस देश की संस्थाओं के अनुरूप आचरण करने से ज्यादा अपनी परंपरा, सांस्कृतिक रिवाज तथा अपने ख़ास सामाजिक, आर्थिक ढर्रे पर जीवन-यापन करना पसंद करते हैं।” [रुकिए]

चार। संख्या — “भारत सहित विश्व के विभिन्न हिस्सों में लगभग तीस करोड़ मूलवासी हैं।” [रुकिए]

पाँच। इनकी माँग — “सरकारों से इनकी माँग है कि इन्हें मूलवासी कौम के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान रखने वाला समुदाय माना जाए।” [रुकिए]

छह। और उनका प्रसिद्ध जुमला — “अपने मूल वासस्थान पर हक की दावेदारी में विश्वभर के मूलनिवासी यह जुमला इस्तेमाल करते हैं कि हम यहाँ ‘अनंत काल से रहते चले आ रहे हैं’।” [रुकिए]

सात। अब एक बहुत महत्वपूर्ण तर्क — “भूमि की हानि का अर्थ है, आर्थिक-संसाधनों के एक आधार की हानि, और यह मूलवासियों के जीवन के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है।” [रुकिए]

आठ। और उससे निकलने वाला सवाल — इसे रेखांकित कीजिए — “उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: यहाँ दस सेकंड रुकिए।〕

नौ। भारत में — “भारत में ‘मूलवासी’ के लिए अनुसूचित जनजाति या आदिवासी शब्द प्रयोग किया जाता है। ये कुल जनसंख्या का आठ प्रतिशत हैं।” [रुकिए]

दस। “अपवादस्वरूप कुछेक घुमन्तू जनजातियों को छोड़ दें तो भारत की अधिकांश आदिवासी जनता अपने जीवन-यापन के लिए खेती पर निर्भर है।” [रुकिए]

ग्यारह। “लेकिन, ब्रितानी औपनिवेशिक शासन कायम होने के बाद से जनजातीय समुदायों का सामना बाहरी लोगों से हुआ।” [रुकिए]

बारह। और अब अध्याय का सबसे तीखा निष्कर्ष। इसे दो लाइन छोड़कर लिखिए। [रुकिए]

“हालाँकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से इनको संवैधानिक सुरक्षा हासिल है, लेकिन देश के विकास का इन्हें ज्यादा लाभ नहीं मिल सका है।” [रुकिए]

“आजादी के बाद से विकास की बहुत सी परियोजनाएँ चलीं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। ऐसी परियोजनाओं से विस्थापित होने वालों में यह समुदाय सबसे बड़ा है।” [रुकिए]

“दरअसल इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।” [रुकिए]

तेरह। और अंत में — “1970 के दशक में विश्व के विभिन्न भागों के मूलवासियों के नेताओं के बीच संपर्क बढ़ा। 1975 में ‘वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इंडिजिनस पीपल’ का गठन हुआ। संयुक्त राष्ट्रसंघ में सबसे पहले इस परिषद् को परामर्शदायी परिषद् का दर्ज़ा दिया गया।” [रुकिए]

〔शिक्षक के लिए: अध्याय यहीं समाप्त कीजिए। फिर कक्षा से पूछिए — “पूरे अध्याय में हमने देखा कि जवाब ताकत से तय होते हैं। तो सबसे कम ताकत किसके पास थी, और सबसे बड़ी कीमत किसने चुकायी?” — यह सवाल कक्षा को चुप कर देता है, और यही इस अध्याय का असली पाठ है।〕

शिक्षक के लिए अंतिम जाँच-सूची

श्रुतलेख-खंडकालांशअनुमानित समय
0, 1, 2 — सुधार, नुकसान की सूची, ‘राजनीति क्यों’132 मिनट
3, 4 — पृथ्वी सम्मेलन और वैश्विक संपदा234 मिनट
5, 6 — अंटार्कटिका और ‘साझी परंतु अलग-अलग’334 मिनट
7, 8 — साझी संपदा, देवस्थान और भारत का पक्ष436 मिनट
9, 10 — पर्यावरण आंदोलन और ‘क्या वन निर्जन होते हैं’532 मिनट
11, 12 — भू-राजनीति और मूलवासी636 मिनट

★जिन वाक्यों को अवश्य रेखांकित करवाइए:

  1. “इन सवालों के जवाब बहुधा इस बात से निर्धारित होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है।”
  2. “आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे।” (टिकाऊ विकास)
  3. “पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष।” (चार वैश्विक संपदाएँ)
  4. “‘वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।”
  5. “पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है।”
  6. “संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी…”
  7. “संधि 1997 की, भारत के हस्ताक्षर 2002 में; और पेरिस का अनुमोदन 2 अक्तूबर 2016।”
  8. “तीन दशमलव आठ · शून्य दशमलव नौ · एक दशमलव छह।” (उत्सर्जन के तीन आँकड़े)
  9. “लोग वनों में भी रहते हैं।”
  10. “‘किसे, क्या, कब, कहाँ और कैसे हासिल होता है।’”
  11. “तीस प्रतिशत उत्पादन, चौंसठ प्रतिशत भंडार।”
  12. “उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?”
  13. “इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।”