खंड क — NCERT प्रश्नावली (पृ. 98) के पूर्ण उत्तर, प्रश्न 1 से 9 खंड ख — 1 अंक · खंड ग — 2 अंक · खंड घ — 4 अंक · खंड ङ — 6 अंक खंड च — दावा-कारण (CBSE प्रारूप) · खंड छ — स्रोत-आधारित
प्रश्न 1. पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकारों का क्या कारण है?
✓ सही विकल्प: (ग) — “मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को व्यापक नुकसान हुआ है और यह नुकसान ख़तरे की हद तक पहुँच गया है।”
क्यों: पाठ्यपुस्तक स्वयं पूरे खंड में मानवीय गतिविधियों से हुए नुकसान की सूची देती है — कृषि-भूमि की उर्वरता में कमी, मत्स्य-भंडार का घटना, 66.3 करोड़ लोगों को स्वच्छ जल न मिलना, वनों की कटाई, ओज़ोन परत में छेद और समुद्रतटीय प्रदूषण।
बाकी विकल्प क्यों नहीं:
- (क) गलत — पाठ बताता है कि विकसित देशों की चिंता चुनिंदा है (ओज़ोन और तापवृद्धि), और कार्टून (पृ. 84) उनकी प्रतिबद्धता पर ही सवाल उठाता है।
- (ख) अधूरा — मूलवासी और पर्यावास इस अध्याय का एक हिस्सा हैं, पूरा कारण नहीं।
- (घ) गलत — विकल्प (ग) स्पष्टत: सही है।
प्रश्न 2. पृथ्वी-सम्मेलन के बारे में सही/ग़लत
| उपभाग | कथन | उत्तर | कारण |
|---|---|---|---|
| (क) | इसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया | ✓ सही | पाठ में शब्दश: यही आँकड़ा है (पृ. 83) |
| (ख) | यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्रसंघ के तत्त्वावधान में हुआ | ✓ सही | “1992 में संयुक्त राष्ट्रसंघ का पर्यावरण और विकास के मुद्दे पर केंद्रित एक सम्मेलन…” |
| (ग) | वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों ने पहली बार राजनीतिक धरातल पर ठोस आकार ग्रहण किया | ✓ सही | “वैश्विक राजनीति के दायरे में पर्यावरण को लेकर बढ़ते सरोकारों को इस सम्मेलन में एक ठोस रूप मिला।” |
| (घ) | यह महासम्मेलनी बैठक थी | ✓ सही | 170 देशों, हजारों संगठनों और अनेक निगमों की भागीदारी — यह उस पैमाने की बैठक थी |
★ध्यान दीजिए — इस प्रश्न में चारों कथन सही हैं। यह विद्यार्थियों को चौंकाता है, क्योंकि वे मानकर चलते हैं कि कोई एक गलत होगा। पाठ में चारों की पुष्टि मौजूद है।
प्रश्न 3. ‘विश्व की साझी विरासत’ के बारे में कौन-से कथन सही हैं?
| उपभाग | कथन | उत्तर |
|---|---|---|
| (क) | धरती का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष को ‘विश्व की साझी विरासत’ माना जाता है | ✓ सही — पाठ में यही चार गिनाए गए हैं |
| (ख) | ‘विश्व की साझी विरासत’ किसी राज्य के संप्रभु क्षेत्राधिकार में नहीं आते | ✓ सही — यही उसकी परिभाषा है |
| (ग) | इसके प्रबंधन के सवाल पर उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच मतभेद है | ✓ सही — “बाहरी अंतरिक्ष के इतिहास से भी पता चलता है कि इस क्षेत्र के प्रबंधन पर उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के बीच मौजूद असमानता का असर पड़ा है” |
| (घ) | उत्तरी गोलार्द्ध के देश ‘विश्व की साझी विरासत’ को बचाने के लिए दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों से कहीं ज्यादा चिंतित हैं | ! ग़लत |
! (घ) क्यों ग़लत है — यह इस प्रश्न का असली बिंदु है: पाठ यह नहीं कहता कि उत्तरी देश ‘ज्यादा चिंतित’ हैं — वह कहता है कि दोनों की चिंताएँ अलग-अलग हैं। उत्तर की चिंता ओज़ोन और तापवृद्धि, दक्षिण की चिंता आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन का रिश्ता। इसके अलावा — बाहरी अंतरिक्ष के दोहन के फायदे भी “न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं” — यानी उत्तरी देशों का रुख संरक्षण से अधिक अपने हित से तय होता है। कार्टून (पृ. 84) ठीक यही व्यंग्य करता है।
✓ उत्तर: (क), (ख) और (ग) सही हैं; (घ) ग़लत है।
प्रश्न 4. रियो सम्मेलन के क्या परिणाम हुए?
(क) प्रत्यक्ष परिणाम — चार
1★“जलवायु-परिवर्तन, जैव-विविधता और वानिकी के संबंध में कुछ नियमाचार निर्धारित हुए।”
2★‘अजेंडा-21’ — “विकास के कुछ तौर-तरीके भी सुझाए गए।”
3★★‘टिकाऊ विकास’ पर सहमति — “सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। इसे ‘टिकाऊ विकास’ का तरीका कहा गया।”
4★★‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत स्वीकृत — “सन् 1992 में हुए पृथ्वी सम्मेलन में इस तर्क को मान लिया गया।” और रियो-घोषणापत्र में इसे औपचारिक रूप मिला।
(ख) व्यापक महत्त्व
- ★“वैश्विक राजनीति के दायरे में पर्यावरण को लेकर बढ़ते सरोकारों को इस सम्मेलन में एक ठोस रूप मिला।”
- इसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय निगमों ने भाग लिया — यानी यह पहली बार था जब राज्य, नागरिक समाज और निगम एक ही मंच पर आए।
- ★उत्तर-दक्षिण का विभाजन खुलकर सामने आया — यह भी एक परिणाम ही है, क्योंकि इसके बाद हर वार्ता इसी ढाँचे में हुई।
(ग) ! सीमाएँ — यह हिस्सा उत्तर में ज़रूर लिखिए
- “लेकिन इसके बाद भी आपसी अंतर और कठिनाइयाँ बनी रहीं।”
- “समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा।”
- ★“कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘अजेंडा-21’ का झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है।”
- और भारत के 1997 के पुनरावलोकन का निष्कर्ष: “विकासशील देशों को रियायती शर्तों पर नये और अतिरिक्त वित्तीय संसाधन तथा बेहतर प्रौद्योगिकी मुहैया कराने की दिशा में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है।”
प्रश्न 5. ‘विश्व की साझी विरासत’ का क्या अर्थ है? इसका दोहन और प्रदूषण कैसे होता है?
(क) अर्थ ★★“विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन साझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है। इन्हें ‘वैश्विक संपदा’ या ‘मानवता की साझी विरासत’ कहा जाता है।”
★★इसमें चार शामिल हैं — पृथ्वी का वायुमंडल · अंटार्कटिका · समुद्री सतह · बाहरी अंतरिक्ष।
(ख) दोहन और प्रदूषण कैसे होता है — चारों के लिए अलग-अलग
| वैश्विक संपदा | दोहन/प्रदूषण कैसे |
|---|---|
| ★वायुमंडल | ग्रीन हाऊस गैसों का उत्सर्जन → वैश्विक तापवृद्धि; और ओज़ोन परत में छेद — “धरती के ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन गैस की मात्रा में लगातार कमी हो रही है… इससे पारिस्थितिकी तंत्र और मनुष्य के स्वास्थ्य पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है।” 1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिका के ऊपर इसकी खोज हुई। |
| ★अंटार्कटिका | “1959 के बाद गतिविधियाँ वैज्ञानिक अनुसंधान, मत्स्य आखेट और पर्यटन तक सीमित रहीं। लेकिन इतनी कम गतिविधियों के बावजूद इस क्षेत्र के कुछ हिस्से अवशिष्ट पदार्थ जैसे तेल के रिसाव के दबाव में अपनी गुणवत्ता खो रहे हैं।” |
| ★समुद्री सतह | “समुद्र का मध्यवर्ती भाग अब भी अपेक्षाकृत स्वच्छ है लेकिन इसका तटवर्ती जल जमीनी क्रियाकलापों से प्रदूषित हो रहा है।” साथ ही समुद्रतटीय इलाकों में सघन बसाहट, मत्स्य-भंडार का घटना और अतिशय दोहन। |
| ★बाहरी अंतरिक्ष | “इस क्षेत्र के प्रबंधन पर उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के बीच मौजूद असमानता का असर पड़ा है… मसला प्रौद्योगिकी और औद्योगिक विकास का है।” और ★“बाहरी अंतरिक्ष में जो दोहन-कार्य हो रहे हैं उनके फायदे न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं और न आगे की पीढ़ियों के लिए।” |
(ग) ★मूल समस्या क्यों बनी रहती है
- “‘वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।”
- ★“पारिस्थितिकी से जुड़े हर मसले के साथ एक बड़ी समस्या यह जुड़ी है कि अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय-सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते हैं। ऐसे में एक सर्व-सामान्य पर्यावरणीय अजेंडा पर सहमति कायम करना मुश्किल होता है।”
- कुछ प्रयास हुए हैं — अंटार्कटिका संधि (1959), मॉन्ट्रियल न्यायाचार (1987) और अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार (1991)।
प्रश्न 6. ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ से क्या अभिप्राय है? हम इस विचार को कैसे लागू कर सकते हैं?
(क) अभिप्राय ★★यह वह सिद्धांत है जिसके अनुसार पर्यावरण की रक्षा सबकी साझी जिम्मेदारी है, लेकिन सबकी जिम्मेदारी एक जैसी नहीं है — क्योंकि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने में सबका योगदान एक जैसा नहीं रहा।
यह सिद्धांत 1992 के पृथ्वी सम्मेलन में स्वीकार किया गया।
(ख) ★★रियो-घोषणापत्र के शब्दों में
“धरती के पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता और गुणवत्ता की बहाली, सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए विभिन्न देश विश्व-बंधुत्व की भावना से आपस में सहयोग करेंगे। पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राज्यों की ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ होंगी। विकसित देशों के समाजों का वैश्विक पर्यावरण पर दबाव ज्यादा है और इन देशों के पास विपुल प्रौद्योगिक एवं वित्तीय संसाधन हैं। इसे देखते हुए टिकाऊ विकास के अंतर्राष्ट्रीय प्रयास में विकसित देश अपनी ख़ास जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।”
(ग) इसके पीछे का तर्क
1“विश्व में पारिस्थितिकी को नुकसान अधिकांशतया विकसित देशों के औद्योगिक विकास से पहुँचा है।”
2“यदि विकसित देशों ने पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुँचाया है तो उन्हें इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी ज्यादा उठानी चाहिए।”
3“विकासशील देश अभी औद्योगीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और ज़रूरी है कि उन पर वे प्रतिबंध न लगें जो विकसित देशों पर लगाये जाते हैं।”
4★“अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के निर्माण, प्रयोग और व्याख्या में विकासशील देशों की विशिष्ट ज़रूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए।”
(घ) ★★इसे कैसे लागू किया जाए — यह प्रश्न का दूसरा हिस्सा है
| तरीका | कैसे |
|---|---|
| 1. संधियों में विभेदित लक्ष्य | ★क्योटो प्रोटोकॉल (1997) — “औद्योगिक देशों के लिए ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य निर्धारित”; और ★★“चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को क्योटो-प्रोटोकॉल की बाध्यताओं से अलग रखा गया है।” |
| 2. प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को मानक बनाना | कुल उत्सर्जन के बजाय प्रति व्यक्ति उत्सर्जन देखा जाए। भारत का 0.9 टन (2000) बनाम विश्व औसत 3.8 टन — यह अंतर स्वयं तर्क सिद्ध करता है |
| 3. वित्तीय संसाधनों का हस्तांतरण | विकसित देश विकासशील देशों को “रियायती शर्तों पर नये और अतिरिक्त वित्तीय संसाधन” दें |
| 4. स्वच्छ प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण | “पर्यावरण के संदर्भ में बेहतर साबित होने वाली प्रौद्योगिकी मुहैया कराने” के लिए तुरंत उपाय |
| 5. क्षमता के अनुरूप योगदान | UNFCCC के शब्दों में — देश “अपनी क्षमता के अनुरूप, पर्यावरण के अपक्षय में अपनी हिस्सेदारी के आधार पर” प्रयास करेंगे |
(ङ) ! और आलोचना भी दीजिए
- आलोचकों का कहना है कि भारत और चीन जल्दी ही “विकसित देशों की भाँति अगली कतार में नज़र आयेंगे” — तब यह छूट कब तक जायज़ रहेगी?
- साइड-टिप्पणी (पृ. 89) यही सवाल तीखे शब्दों में पूछती है: “पहले उन लोगों ने धरती को बर्बाद किया और अब धरती को चौपट करने की हमारी बारी है। क्या यही है हमारा पक्ष?”
- ! 1997 के पुनरावलोकन का निष्कर्ष यह भी बताता है कि यह सिद्धांत काग़ज़ पर तो है, पर वित्त और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में “कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है।”
प्रश्न 7. वैश्विक पर्यावरण के मुद्दे 1990 के दशक से विभिन्न देशों के प्राथमिक सरोकार क्यों बन गए?
छह कारण —
1★★नुकसान ख़तरे की हद तक पहुँच गया।
कृषि-योग्य भूमि में कोई बढ़ोत्तरी नहीं; उर्वरता घट रही; चारागाह और मत्स्य-भंडार घट रहे; जलाशयों की
जलराशि कम और प्रदूषण बढ़ा
उत्तर देखिए
“इससे खाद्य-उत्पादन में कमी आ रही है।”
2★मानवीय जीवन पर सीधा असर सामने आ गया।
UN मानव विकास रिपोर्ट (2016): 66.3 करोड़ को स्वच्छ जल नहीं; 2 अरब 40 करोड़ साफ-सफाई से वंचित;
और इस वजह से 30 लाख से ज्यादा बच्चे हर साल मौत के शिकार।
3★★वैज्ञानिक ‘झटके’ मिले।
“1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छेद की खोज एक आँख खोल देने वाली घटना है।”
4★★स्पष्ट हो गया कि कोई देश अकेले हल नहीं कर सकता।
“इन मसलों में अधिकांश ऐसे हैं कि किसी एक देश की सरकार इनका पूरा समाधान अकेले दम पर नहीं कर सकती। इस
वजह से ये मसले विश्व-राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं।”
5★संस्थागत मंच बन गए।
बर्टलैंड रिपोर्ट (1987) ने चेताया; UNEP ने सम्मेलन कराए; और ★★1992 के पृथ्वी सम्मेलन ने —
जिसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन और अनेक बहुराष्ट्रीय निगम शामिल हुए — पर्यावरण को विश्व-राजनीति
के केंद्र में ला दिया। इसी दशक में UNFCCC (1992) और फिर क्योटो प्रोटोकॉल (1997) आए।
6★★यह सत्ता और न्याय का प्रश्न बन गया।
“कौन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है? रोक की जिम्मेदारी किसकी है? संसाधनों पर किसका कितना हक है?
इन सवालों के जवाब बहुधा इस बात से निर्धारित होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है।” — जैसे ही यह
उत्तर देखिए
उत्तर-दक्षिण के न्याय का प्रश्न बना, हर देश के लिए यह प्राथमिक सरोकार बन गया।
7★नागरिक समाज ने दबाव बनाया।
“आज पूरे विश्व में पर्यावरण आंदोलन सबसे ज्यादा जीवंत, विविधतापूर्ण तथा ताकतवर सामाजिक आंदोलनों में
शुमार किए जाते हैं।” — सरकारें इस दबाव की उपेक्षा नहीं कर सकीं।
प्रश्न 8. “पृथ्वी को बचाने के लिए ज़रूरी है कि विभिन्न देश सुलह और सहकार की नीति अपनाएँ।” — उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच जारी वार्ताओं की रोशनी में इस कथन की पुष्टि करें।
★★कथन सही है — और उत्तर-दक्षिण वार्ताओं का पूरा इतिहास इसकी पुष्टि करता है।
(क) पहले दिखाइए कि मतभेद सचमुच गहरा है
| पक्ष | रुख |
|---|---|
| उत्तरी (धनी, विकसित) देश | चिंता — “ओज़ोन परत की छेद और वैश्विक तापवृद्धि”; माँग — “पर्यावरण के संरक्षण में हर देश की जिम्मेदारी बराबर हो” |
| दक्षिणी (गरीब, विकासशील) देश | चिंता — “आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन के आपसी रिश्ते को सुलझाने”; तर्क — “नुकसान अधिकांशतया विकसित देशों के औद्योगिक विकास से पहुँचा है” |
(ख) ★बिना सहयोग के समाधान असंभव क्यों है — तीन कारण
1वैश्विक संपदा किसी की नहीं है। “विश्व के कुछ हिस्से… किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से
बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन साझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है।” —
वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष पर कोई अकेले नियम नहीं बना सकता।
2समस्याएँ सीमा नहीं मानतीं। ओज़ोन का छेद, तापवृद्धि और समुद्री प्रदूषण
उत्तर देखिए
किसी एक देश की सीमा में नहीं रुकते।
3“किसी एक देश की सरकार इनका पूरा समाधान अकेले दम पर नहीं कर सकती।”
(ग) ★★सहयोग के ठोस प्रमाण — जहाँ सुलह हुई, वहाँ नतीजा निकला
| उदाहरण | क्या हुआ |
|---|---|
| ★पृथ्वी सम्मेलन, 1992 | 170 देश एक मंच पर; जलवायु-परिवर्तन, जैव-विविधता और वानिकी पर नियमाचार; ‘अजेंडा-21’; और ‘टिकाऊ विकास’ पर सहमति |
| ★★‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ | यही सुलह का सबसे अच्छा उदाहरण है — उत्तर ने “अपनी ख़ास जिम्मेदारी स्वीकार” की, दक्षिण को छूट मिली |
| UNFCCC (1992) → क्योटो (1997) | सिद्धांतों की रूपरेखा पर सहमति, फिर उसी आधार पर बाध्यकारी लक्ष्य |
| अंटार्कटिका | मतभेद के बावजूद — “इस मतभेद के रहते अंटार्कटिका के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के नियम बने और अपनाये गए। ये नियम कल्पनाशील और दूरगामी प्रभाव वाले हैं।” यह सबसे मज़बूत उदाहरण है — स्वामित्व पर सहमति न होते हुए भी संरक्षण पर सहमति बनी। |
| तीन संधियाँ | अंटार्कटिका संधि (1959) · मॉन्ट्रियल न्यायाचार (1987) · अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार (1991) |
(घ) ! और वहाँ क्या हुआ जहाँ सहयोग नहीं हुआ
- “लेकिन इसके बाद भी आपसी अंतर और कठिनाइयाँ बनी रहीं।”
- “समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा।”
- ! 1997 का पुनरावलोकन: “विकासशील देशों को रियायती शर्तों पर वित्तीय संसाधन तथा बेहतर प्रौद्योगिकी मुहैया कराने की दिशा में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है।” — यानी जहाँ सहयोग की सबसे ज्यादा ज़रूरत थी, वहीं वह सबसे कम हुआ।
(ङ) निष्कर्ष
★★मतभेद वास्तविक हैं और बने रहेंगे — लेकिन इतिहास बताता है कि जब भी उत्तर और दक्षिण सुलह के मंच पर आए, कुछ ठोस निकला (रियो, UNFCCC, क्योटो, अंटार्कटिका)। और जब भी सहयोग रुका (वित्त और प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण), वहाँ प्रगति भी रुक गई। इसलिए कथन पूर्णत: सही है — पृथ्वी को बचाने का कोई एकतरफा रास्ता नहीं है।
प्रश्न 9. पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बगैर आर्थिक विकास कैसे हो सकता है? उदाहरणों सहित समझाएँ।
★★यही ‘टिकाऊ विकास’ (Sustainable Development) की अवधारणा है — “आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे।” (1992 के रियो सम्मेलन में स्वीकृत)
(क) यह चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी
- ‘क्लब ऑव रोम’ की ‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ (1972) — “बढ़ती जनसंख्या के आलोक में प्राकृतिक संसाधनों के विनाश का अंदेशा।”
- बर्टलैंड रिपोर्ट ‘अवर कॉमन फ्यूचर’ (1987) — “आर्थिक विकास के चालू तौर-तरीके आगे चलकर टिकाऊ साबित नहीं होंगे।”
(ख) ★★भारत के ठोस उदाहरण — यही उत्तर का मुख्य हिस्सा है
| कदम | क्या करता है |
|---|---|
| ★नेशनल ऑटो-फ्यूल पॉलिसी | “वाहनों के लिए स्वच्छतर ईंधन अनिवार्य कर दिया है” — विकास रुका नहीं, प्रदूषण घटा |
| ★ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम, 2001 | “ऊर्जा के ज्यादा कारगर इस्तेमाल की पहलकदमी” — उतने ही उत्पादन के लिए कम ऊर्जा |
| ★बिजली अधिनियम, 2003 | “नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा” |
| स्वच्छ ईंधन | “प्राकृतिक गैस के आयात और स्वच्छ कोयले के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी” |
| ★बायोडीजल राष्ट्रीय मिशन | “2011-12 तक बायोडीजल तैयार; 1 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल” |
| ★★पेरिस जलवायु समझौता | “भारत ने 2 अक्तूबर 2016 को अनुमोदित किया।” |
| ★नवीकरणीय ऊर्जा | “पुनर्नवीकृत होने वाली ऊर्जा के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक भारत में चल रहा है।” |
★“इससे पता चलता है कि भारत पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से ठोस कदम उठा रहा है।”
(ग) ★परंपरागत उदाहरण — ‘देवस्थान’ “‘देवस्थान’ को हम ऐसी व्यवस्था के रूप में देख सकते हैं जिसके अंतर्गत पुराने समाज प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह करते हैं कि पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहे।” — राजस्थान (वानी, केंकड़ी, ओरान), झारखंड (जहेरा थान, सरना), मेघालय (लिंगदोह), केरल (काव), उत्तराखंड (थान, देवभूमि), महाराष्ट्र (देव रहतिस)। यह दिखाता है कि समुदाय-आधारित प्रबंधन भी एक कारगर मॉडल है।
(घ) ★अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्या चाहिए
1‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का पालन — ताकि विकासशील देशों का विकास न रुके।
2वित्तीय संसाधनों और स्वच्छ प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण — ! “इस दिशा में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है”, इसलिए यही सबसे ज़रूरी कदम है।
3क्षेत्रीय सहयोग — “‘दक्षेस’ (SAARC) में शामिल देश पर्यावरण के प्रमुख वैश्विक मसलों पर एक समान राय बनायें ताकि इस क्षेत्र की आवाज़ वज़नी हो सके।”
4वैश्विक संपदा की साझी सुरक्षा — अंटार्कटिका संधि (1959), मॉन्ट्रियल न्यायाचार (1987) की तर्ज़ पर।
(ङ) ! कठिनाई भी स्वीकार कीजिए
- “समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा।”
- “कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘अजेंडा-21’ का झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है।”
निष्कर्ष: टिकाऊ विकास कोई नारा नहीं, एक कठिन संतुलन है — पर भारत के कानून, नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम और परंपरागत देवस्थान — तीनों मिलकर दिखाते हैं कि यह संभव है, बशर्ते तकनीक और वित्त उपलब्ध हों।
खंड ख — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1पर्यावरण की चिंता ने राजनीतिक चरित्र कब ग्रहण किया?
उत्तर देखिए
1960 के दशक के बाद से
2‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ किसने और कब प्रकाशित की?
उत्तर देखिए
‘क्लब ऑव रोम’ ने, 1972 में
3बर्टलैंड रिपोर्ट का शीर्षक और वर्ष?
उत्तर देखिए
‘अवर कॉमन फ्यूचर’, 1987
4पृथ्वी सम्मेलन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर देखिए
1992, रियो डी जनेरियो (ब्राज़ील)
5इसमें कितने देशों ने भाग लिया?
उत्तर देखिए
170 देश
6UNEP का पूरा नाम?
उत्तर देखिए
संयुक्त राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम
7★‘विश्व की साझी विरासत’ में कौन-से चार शामिल हैं?
उत्तर देखिए
पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष
8अंटार्कटिका संधि किस वर्ष हुई?
उत्तर देखिए
1959
9मॉन्ट्रियल न्यायाचार का वर्ष?
उत्तर देखिए
1987
10अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार का वर्ष?
उत्तर देखिए
1991
11अंटार्कटिका का क्षेत्रफल?
उत्तर देखिए
1 करोड़ 40 लाख वर्ग किलोमीटर
12★धरती के स्वच्छ जल का कितना हिस्सा अंटार्कटिका में है? — 70 प्रतिशत (और स्थलीय हिम का 90%)
13‘समुद्री आहार शृंखला की धुरी’ किसे कहा गया है?
उत्तर देखिए
क्रिल मछली
14अंटार्कटिका पर संप्रभु दावा करने वाले सात देश?
उत्तर देखिए
ब्रिटेन, अर्जेन्टीना, चिले, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड
15★‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत कब स्वीकार हुआ?
उत्तर देखिए
1992 के पृथ्वी सम्मेलन में
16UNFCCC का वर्ष?
उत्तर देखिए
1992
17★क्योटो प्रोटोकॉल कब और कहाँ?
उत्तर देखिए
1997, जापान के क्योटो में
18क्योटो में कौन-सी तीन गैसें गिनाई गईं?
उत्तर देखिए
कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रो-फ्लोरो कार्बन
19★★भारत ने क्योटो प्रोटोकॉल पर कब हस्ताक्षर किए?
उत्तर देखिए
2002
20★★भारत ने पेरिस जलवायु समझौते को कब अनुमोदित किया?
उत्तर देखिए
2 अक्तूबर 2016
21भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन (2000 तक)?
उत्तर देखिए
0.9 टन
22विश्व का औसत (सन् 2000)?
उत्तर देखिए
3.8 टन प्रति व्यक्ति
232030 तक भारत का अनुमानित उत्सर्जन?
उत्तर देखिए
1.6 टन प्रति व्यक्ति
24ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम और बिजली अधिनियम के वर्ष?
उत्तर देखिए
2001 और 2003
25बायोडीजल मिशन के लिए कितनी भूमि प्रस्तावित थी?
उत्तर देखिए
1 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर
26UN मानव विकास रिपोर्ट (2016) के अनुसार कितने लोगों को स्वच्छ जल नहीं मिलता?
उत्तर देखिए
66.3 करोड़
27साफ-सफाई से कितने वंचित हैं?
उत्तर देखिए
2 अरब 40 करोड़
28इस वजह से हर साल कितने बच्चे मरते हैं?
उत्तर देखिए
30 लाख से ज्यादा
29साझी संपदा किसे कहते हैं?
उत्तर देखिए
“ऐसी संपदा जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो”
30★साझी संपदा घटने के चार कारण?
उत्तर देखिए
निजीकरण, गहनतर खेती, आबादी की वृद्धि और पारिस्थितिकी तंत्र की गिरावट
31‘देवस्थान’ को राजस्थान में क्या कहते हैं?
उत्तर देखिए
वानी, केंकड़ी और ओरान
32मेघालय और केरल में? — लिंगदोह और काव
33★विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन कहाँ और कब?
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ऑस्ट्रेलिया, 1980 के दशक — फ्रैंकलिन नदी
34भारत का सबसे प्रसिद्ध बाँध-विरोधी आंदोलन?
उत्तर देखिए
नर्मदा आंदोलन
35फिलीपीन्स में किस कंपनी के विरुद्ध अभियान चला?
उत्तर देखिए
‘वेस्टर्न माइनिंग कारपोरेशन’ (ऑस्ट्रेलियाई)
36★खाड़ी-क्षेत्र विश्व के कुल तेल-उत्पादन का कितना हिस्सा देता है?
उत्तर देखिए
30 प्रतिशत
37★इस क्षेत्र में विश्व के ज्ञात तेल-भंडार का कितना हिस्सा है?
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64 प्रतिशत
38विश्व का सबसे बड़ा तेल-उत्पादक देश? — सऊदी अरब (कुल भंडार का एक चौथाई)
39इराक के तेल-भंडार का अनुमान?
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112 अरब बैरल से कहीं ज्यादा
40परिवहन की ऊर्जा-ज़रूरत का कितना हिस्सा पेट्रोलियम से पूरा होता है?
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95 फीसदी
41★‘जलयुद्ध’ शब्द किसने गढ़ा?
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विश्व-राजनीति के कुछ विद्वानों ने
42जल-संघर्ष के दो उदाहरण? — इज़रायल-सीरिया-जार्डन (1950-60 का दशक, जॉर्डन और यारमुक नदी) और
तुर्की-सीरिया-इराक (फरात नदी)
43★संयुक्त राष्ट्रसंघ ने मूलवासियों की परिभाषा कब दी?
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1982 में
44विश्व में मूलवासियों की कुल संख्या?
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लगभग 30 करोड़
45★भारत में अनुसूचित जनजाति कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत हैं?
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आठ प्रतिशत
46‘वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इंडिजिनस पीपल’ का गठन कब हुआ?
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1975 में
47UN में इसे कौन-सा दर्ज़ा मिला? — परामर्शदायी परिषद् का दर्ज़ा (और 10 अन्य स्वयंसेवी संगठनों को भी)
48मूलवासियों का प्रसिद्ध जुमला?
उत्तर देखिए
“हम यहाँ अनंत काल से रहते चले आ रहे हैं”
49यह अध्याय पहले कौन-सा था? — अध्याय 8 (QR कोड 12108CH08)
50WWF का पूरा नाम?
उत्तर देखिए
वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड
खंड ग — लघु उत्तरीय (2 अंक)
1पर्यावरण के मसले ‘गहरे अर्थों में राजनीतिक’ क्यों हैं?
2‘क्लब ऑव रोम’ की पुस्तक ने क्या चेतावनी दी?
3बर्टलैंड रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या था?
4पृथ्वी सम्मेलन में उत्तरी और दक्षिणी देशों के अजेंडे में क्या अंतर था?
5‘अजेंडा-21’ क्या है और उस पर क्या आलोचना हुई?
6‘टिकाऊ विकास’ से क्या अभिप्राय है?
7साझी संपदा और वैश्विक संपदा में अंतर बताइए।
8वैश्विक संपदा की सुरक्षा ‘टेढ़ी खीर’ क्यों है?
9अंटार्कटिका पर स्वामित्व को लेकर कौन-से दो दावे हैं?
10अंटार्कटिका की हिमानी परत वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
11‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत क्या कहता है?
12UNFCCC और क्योटो प्रोटोकॉल का आपसी संबंध बताइए।
13चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को क्योटो की बाध्यताओं से क्यों अलग रखा गया?
14साझी संपदा का आकार क्यों घट रहा है?
15‘देवस्थान’ की व्यवस्था क्या सिखाती है?
16देवस्थान के प्रबंधन में कौन-सी कठिन समस्या आती है?
17भारत का ‘ऐतिहासिक उत्तरदायित्व’ का तर्क क्या है?
18प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के आँकड़े भारत के तर्क को कैसे मजबूत करते हैं?
19पर्यावरण आंदोलनों की मुख्य विशेषता क्या है?
20खनिज-उद्योग से पर्यावरण को कौन-से नुकसान होते हैं?
21‘क्या वन निर्जन होते हैं?’ — उत्तरी और दक्षिणी दृष्टिकोण में अंतर बताइए।
22बाँध-विरोधी आंदोलनों को अब नदियों को बचाने के आंदोलन क्यों कहा जाता है?
23‘संसाधनों की भू-राजनीति’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
24शीतयुद्ध के दौरान विकसित देशों ने संसाधनों को लेकर कौन-से कदम उठाए?
25‘जलयुद्ध’ की संभावना क्यों जताई जाती है?
26मूलवासी कौन हैं? UN की परिभाषा दीजिए।
27मूलवासियों की मुख्य माँग क्या है?
28“उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?” — समझाइए।
खंड घ — दीर्घ उत्तरीय (4 अंक)
1पर्यावरण-क्षति की उन पाँच कोटियों का वर्णन कीजिए जो पाठ्यपुस्तक गिनाती है।
2“ये मसले गहरे अर्थों में राजनीतिक हैं” — इस कथन को दो स्तरों पर समझाइए।
31992 के पृथ्वी सम्मेलन की पृष्ठभूमि, भागीदारी और परिणामों का विवेचन कीजिए।
4‘विश्व की साझी विरासत’ क्या है? चारों का उल्लेख करते हुए बताइए कि उनका दोहन कैसे होता है।
5अंटार्कटिका पर ‘किसका स्वामित्व’ के प्रश्न का विवेचन कीजिए।
6‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ के सिद्धांत को रियो-घोषणापत्र के आधार पर समझाइए।
7साझी संपदा क्या है? ‘देवस्थान’ की व्यवस्था उसका उदाहरण कैसे है?
8पर्यावरण के मसले पर भारत के पक्ष का विस्तार से वर्णन कीजिए।
9भारत ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए हैं?
10पर्यावरण आंदोलनों की विविधता को तीन उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
11उत्तरी और दक्षिणी देशों के वन-आंदोलनों में क्या मूलभूत अंतर है?
12तेल की भू-राजनीति का विवेचन कीजिए।
13पानी को लेकर होने वाले संघर्षों का उदाहरणों सहित वर्णन कीजिए।
14मूलवासियों की स्थिति और उनके अधिकारों की माँग पर एक निबंध लिखिए।
15भारत में आदिवासी समुदाय ने ‘विकास की बड़ी कीमत’ कैसे चुकायी है?
खंड ङ — निबंधात्मक (6 अंक)
1“पर्यावरण अब भूगोल का नहीं, विश्व-राजनीति का विषय है।” — इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
2पर्यावरण के प्रश्न पर उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के बीच मतभेदों का विवेचन कीजिए और बताइए कि ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत इसका समाधान कैसे प्रस्तुत करता है।
3‘विश्व की साझी विरासत’ की सुरक्षा में आने वाली कठिनाइयों और अब तक हुए प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए।
4पर्यावरण के मसले पर भारत का पक्ष क्या है? उसके तर्कों, आँकड़ों, कदमों और उन पर होने वाली आलोचनाओं का संतुलित मूल्यांकन कीजिए।
5“मौजूदा पर्यावरण आंदोलनों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है।” — वन, खनिज-उद्योग और बाँध-विरोधी आंदोलनों के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए।
6‘संसाधनों की भू-राजनीति’ का विस्तृत विवेचन कीजिए — ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, तेल और पानी के संदर्भ में।
7मूलवासियों के प्रश्न को पाठ्यपुस्तक ‘पर्यावरण, संसाधन और राजनीति को एक साथ जोड़ देने वाला’ क्यों कहती है? भारत के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
खंड च — दावा-कारण (CBSE प्रारूप)
निर्देश: (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं (ग) A सही, R गलत (घ) A गलत, R सही
1A: पर्यावरण के मसले विश्व-राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं।
R: इनमें अधिकांश ऐसे हैं कि किसी एक देश की सरकार इनका पूरा समाधान अकेले दम पर नहीं कर सकती।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
2A: अंटार्कटिका को ‘विश्व की साझी विरासत’ माना जाता है।
R: ब्रिटेन, अर्जेन्टीना, चिले, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने वहाँ संप्रभु अधिकार का
वैधानिक दावा किया है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (ख) — दोनों कथन सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं; बल्कि यह उसके विरुद्ध दावा है। पाठ के अनुसार अन्य अधिकांश देश इसे साझी संपदा मानते हैं।
3A: क्योटो प्रोटोकॉल में चीन और भारत को बाध्यताओं से अलग रखा गया।
R: ऐतिहासिक रूप से भी और मौजूदा समय में भी ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन में सबसे ज्यादा हिस्सा विकसित
देशों का है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
4A: भारत ने 1997 में क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए।
R: क्योटो प्रोटोकॉल पर 1997 में जापान के क्योटो में सहमति बनी।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — ! A गलत है; भारत ने 2002 में हस्ताक्षर किए और अनुमोदन किया।
5A: कश्मीरी पंडितों की तरह मूलवासी भी शरणार्थी कहलाते हैं।
R: मूलवासी वे हैं जो किसी मौजूदा देश में बहुत दिनों से रहते चले आ रहे थे और जिन्हें बाहर से आए लोगों ने
अधीन बना लिया।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — ! A गलत है; मूलवासी अपनी ही भूमि पर हैं, वे विस्थापित या शरणार्थी की श्रेणी नहीं हैं।
6A: ‘देवस्थान’ की व्यवस्था साझी संपदा के रख-रखाव का उदाहरण है।
R: इस प्रथा में वनों के कुछ हिस्सों को धार्मिक कारणों से काटा नहीं जाता और उनका प्रबंधन ग्रामीण समुदाय
करता है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
7A: विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन भारत में नर्मदा घाटी में चला।
R: 1980 के दशक में ऑस्ट्रेलिया में फ्रैंकलिन नदी को बचाने का आंदोलन चला।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — ! A गलत है; विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन ऑस्ट्रेलिया में चला। नर्मदा आंदोलन भारत का सबसे प्रसिद्ध है।
8A: खाड़ी-क्षेत्र तेल की माँग बढ़ने पर उसकी पूर्ति कर सकने वाला एकलौता क्षेत्र है।
R: इस क्षेत्र में विश्व के ज्ञात तेल-भंडार का 64 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
9A: ‘अजेंडा-21’ पूरी तरह पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है।
R: 1992 के पृथ्वी सम्मेलन में ‘अजेंडा-21’ के रूप में विकास के कुछ तौर-तरीके सुझाए गए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — ! A गलत है; आलोचकों का कहना है कि इसका झुकाव “पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है।”
10A: भारत में आदिवासी समुदाय ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।
R: आजादी के बाद विकास परियोजनाओं से विस्थापित होने वालों में यह समुदाय सबसे बड़ा है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
खंड छ — स्रोत-आधारित प्रश्न
स्रोत 1
“कौन पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है? इस पर रोक लगाने के उपाय करने की जिम्मेदारी किसकी है? धरती के प्राकृतिक संसाधनों पर किसको कितने इस्तेमाल का हक है? इन सवालों के जवाब बहुधा इस बात से निर्धारित होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है। इस तरह ये मसले गहरे अर्थों में राजनीतिक हैं।”
(क) लेखक के अनुसार इन सवालों के जवाब किससे तय होते हैं? (1) (ख) पर्यावरण के मसले ‘राजनीतिक’ किन दो अर्थों में हैं? (2) (ग) इस तर्क का संबंध ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ के सिद्धांत से कैसे है? (3)
स्रोत 2
“पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राज्यों की ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ होंगी। विकसित देशों के समाजों का वैश्विक पर्यावरण पर दबाव ज्यादा है और इन देशों के पास विपुल प्रौद्योगिक एवं वित्तीय संसाधन हैं।”
(क) यह उद्धरण किस दस्तावेज़ का है और वह किस सम्मेलन से जुड़ा है? (1) (ख) ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (2) (ग) इस सिद्धांत को व्यवहार में कैसे लागू किया गया है? दो उदाहरण दीजिए। (3)
स्रोत 3
“संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी जिसने इतने युगों से वनों को बचाए रखने की प्रतिबद्धता कायम रखी।”
(क) यह किस व्यवस्था के बारे में कहा गया है? (1) (ख) इसे भारत के किन्हीं तीन राज्यों में किन नामों से जाना जाता है? (2) (ग) इस व्यवस्था के प्रबंधन में आज कौन-सी कठिन समस्या आती है? (3)
स्रोत 4
“भूमि की हानि का अर्थ है, आर्थिक-संसाधनों के एक आधार की हानि और यह मूलवासियों के जीवन के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है। उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?”
(क) संयुक्त राष्ट्रसंघ ने मूलवासियों की परिभाषा किस वर्ष दी? (1) (ख) भारत में मूलवासियों के लिए कौन-से शब्द प्रयुक्त होते हैं और वे जनसंख्या का कितना हिस्सा हैं? (2) (ग) भारत में इस समुदाय ने ‘विकास की बड़ी कीमत’ कैसे चुकायी है? (3)