खंड A — पाठ्यपुस्तक की प्रश्नावली, पूर्ण उत्तर सहित (पृ. 60–62) खंड B — अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
ध्यान दें: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्रित नहीं है।
खंड A — पाठ्यपुस्तक प्रश्नावली
प्रश्न 1. निषेधाधिकार (वीटो) — सही या ग़लत
कथन उत्तर कारण (क) सुरक्षा-परिषद् के सिर्फ स्थायी सदस्यों को ‘वीटो’ का अधिकार है। ✓ सही “अस्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार नहीं है।” (ख) यह एक तरह की नकारात्मक शक्ति है। ✓ सही यह किसी फ़ैसले को रोकने की शक्ति है, कराने की नहीं (ग) सुरक्षा परिषद् के फ़ैसलों से असंतुष्ट होने पर महासचिव ‘वीटो’ का प्रयोग करता है। ❌ ग़लत ★वीटो केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास है; महासचिव के पास नहीं। महासचिव सचिवालय का प्रधान है (घ) एक ‘वीटो’ से भी सुरक्षा-परिषद् का प्रस्ताव नामंजूर हो सकता है। ✓ सही ★“स्थायी सदस्यों में से कोई एक अपने निषेधाधिकार का प्रयोग कर सकता है और… किसी फैसले को रोक सकता है, भले ही अन्य स्थायी सदस्यों और सभी अस्थायी सदस्यों ने उस फ़ैसले के पक्ष में मतदान किया हो।”
प्रश्न 2. संयुक्त राष्ट्रसंघ का कामकाज — सही या ग़लत
कथन उत्तर कारण (क) सुरक्षा और शांति से जुड़े सभी मसलों का निपटारा सुरक्षा-परिषद् में होता है। ❌ ग़लत ★“सदस्य देशों के बीच युद्ध और शांति तथा वैर-विरोध पर आम सभा में भी चर्चा होती है और सुरक्षा परिषद् में भी।” (ख) मानवतावादी नीतियों का क्रियान्वयन विश्वभर में फैली मुख्य शाखाओं तथा एजेंसियों के मार्फत होता है। ✓ सही WHO, UNDP, UNHCR, UNICEF, UNESCO आदि इसी काम के लिए हैं (ग) सुरक्षा के किसी मसले पर पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सहमत होना उसके बारे में लिए गए फैसले के क्रियान्वयन के लिए ज़रूरी है। ✓ सही क्योंकि एक भी वीटो पूरे प्रस्ताव को रोक देता है — इसलिए किसी भी स्थायी सदस्य का विरोध न होना अनिवार्य है (घ) संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा के सभी सदस्य संयुक्त राष्ट्रसंघ के बाकी प्रमुख अंगों और विशेष एजेंसियों के स्वत: सदस्य हो जाते हैं। ❌ ग़लत सुरक्षा-परिषद् में 15, आर्थिक-सामाजिक परिषद् में 54 सदस्य ही होते हैं; विशेष एजेंसियों की अपनी अलग सदस्यता है (जैसे WTO के 164, IMF के 190)
प्रश्न 3. कौन-सा तथ्य भारत की स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव को ज्यादा वज़नदार बनाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर — (घ) भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था।
कारण: पाठ्यपुस्तक भारत की दावेदारी के आधारों में “वह तेजी से अंतर्राष्ट्रीय फलक पर आर्थिक-शक्ति बनकर उभर रहा है” और “भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है” — दोनों गिनाती है। शेष विकल्प क्यों कमज़ोर हैं: (क) परमाणु क्षमता उल्टे विरोध का कारण है — “कुछ देश भारत के परमाणु हथियारों को लेकर चिंतित हैं।” (ख) भारत 30 अक्टूबर 1945 को शामिल हुआ, जन्म से नहीं (स्थापना 24 अक्टूबर) — और यह अपने-आप में कोई विशेष दावा नहीं। (ग) एशिया में होना पर्याप्त तर्क नहीं, क्योंकि चीन पहले से स्थायी सदस्य है।
प्रश्न 4. परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग और उसकी सुरक्षा से संबद्ध एजेंसी
उत्तर देखिए
उत्तर — (ख) अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी (IAEA)।
कारण: “इस संगठन की स्थापना 1957 में हुई। यह संगठन परमाणविक ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और सैन्य उद्देश्यों में इसके इस्तेमाल को रोकने की कोशिश करता है।” ★यह आम सभा और सुरक्षा-परिषद् दोनों के प्रति उत्तरदायी है।
प्रश्न 5. विश्व व्यापार संगठन किसका उत्तराधिकारी है?
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ (GATT)।
कारण: “यह संगठन ‘जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ’ के उत्तराधिकारी के रूप में काम करता है जो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अस्तित्व में आया था।” WTO की स्थापना 1995 में हुई। ! विकल्प (ख) में ‘एरेंजमेंट’ लिखा है — यह जाल है। सही शब्द ‘एग्रीमेंट’ है।
प्रश्न 6. रिक्त स्थानों की पूर्ति
वाक्य उत्तर (क) संयुक्त राष्ट्रसंघ का मुख्य उद्देश्य ____ है। ★अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना (ख) संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे जाना-पहचाना पद ____ का है। ★महासचिव (“सबसे अधिक दिखने वाला सार्वजनिक चेहरा और उसका प्रधान प्रतिनिधि”) (ग) सुरक्षा-परिषद् में ____ स्थायी और ____ अस्थायी सदस्य हैं। ★पाँच / दस (घ) ____ संयुक्त राष्ट्रसंघ के वर्तमान महासचिव हैं। ★एंटोनियो गुटेरेस (नौवें; 1 जनवरी 2017 से) (च) मानवाधिकारों की रक्षा में सक्रिय दो स्वयंसेवी संगठन ____ और ____ हैं। ★एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच
प्रश्न 7. शाखाओं और एजेंसियों का सुमेल
उत्तर देखिए
उत्तर —
# संस्था मेल काम 1 आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् (ग) सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की चिंता 2 अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ड) सदस्य देशों के बीच मौजूद विवादों का निपटारा 3 अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी (घ) परमाणु प्रौद्योगिकी का शांतिपूर्ण उपयोग और सुरक्षा 4 सुरक्षा-परिषद् (ख) अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संरक्षण 5 संयुक्त राष्ट्रसंघ शरणार्थी उच्चायोग (च) आपातकाल में आश्रय तथा चिकित्सीय सहायता मुहैया करना 6 विश्व व्यापार संगठन (ञ) सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार की राह आसान बनाना 7 अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (क) वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख 8 आम सभा (छ) वैश्विक मामलों पर बहस-मुबाहिसा 9 विश्व स्वास्थ्य संगठन (झ) सबके लिए स्वास्थ्य 10 सचिवालय (ज) संयुक्त राष्ट्रसंघ के मामलों का समायोजन और प्रशासन संक्षेप में — 1-ग, 2-ड, 3-घ, 4-ख, 5-च, 6-ञ, 7-क, 8-छ, 9-झ, 10-ज।
प्रश्न 8. सुरक्षा-परिषद् के कार्य क्या हैं?(4 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
(1) अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संरक्षण। यह सुरक्षा-परिषद् का प्राथमिक कार्य है (प्रश्न 7 का मेल भी यही है)।
(2) बाध्यकारी निर्णय लेना। ★“निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी।” — यही इसे आम सभा से अलग करता है, जिसके “निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं” होते।
(3) झगड़ों को युद्ध बनने से रोकना और युद्ध छिड़ने पर उसका दायरा सीमित करना। संयुक्त राष्ट्रसंघ की मूल मंशा ही यह है कि वह “विभिन्न देशों के बीच जारी ऐसे झगड़ों को रोकने का काम करेगा जो आगे चलकर युद्ध का रूप ले सकते हैं और अगर युद्ध छिड़ ही जाए तो शत्रुता के दायरे को सीमित करने का काम करेगा।”
(4) शांति स्थापना अभियान चलाना। पाठ्यपुस्तक का मानचित्र (पृ. 56) इसके उदाहरण देता है — UNMOGIP (भारत और पाकिस्तान), UNIFIL (लेबनान), UNFICYP (साइप्रस), UNAMID (दारफुर), MONUSCO (डी.आर. कांगो), UNMISS (दक्षिण सूडान) आदि।
(5) महासचिव की नियुक्ति में भूमिका। ★“महासचिव… की नियुक्ति सुरक्षा-परिषद् की सलाह पर आम सभा पाँच सालों के लिए करती है।”
(6) अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों का चुनाव। 15 न्यायधीशों का चुनाव 9 वर्षों के लिए “आम सभा और सुरक्षा परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत द्वारा” होता है।
संरचना (संदर्भ के लिए): 15 सदस्य — 5 स्थायी (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमरीका) जिन्हें वीटो प्राप्त है, और 10 अस्थायी जिन्हें आम सभा दो वर्षों के लिए चुनती है।
प्रश्न 9. भारत के नागरिक के रूप में सुरक्षा-परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष का समर्थन आप कैसे करेंगे?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर — पाठ्यपुस्तक छह आधार देती है।
(1) जनसंख्या। ★“भारत विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। भारत में विश्व की कुल-जनसंख्या का 1/5वाँ हिस्सा निवास करता है।” — और आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र होना स्वयं सुझाए गए छह मानदंडों में से एक है।
(2) लोकतंत्र। ★“भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।” — और “लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान” भी उन्हीं मानदंडों में है।
(3) संयुक्त राष्ट्रसंघ में सक्रिय भागीदारी। ★“भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की लगभग सभी पहलकदमियों में भाग लिया है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के शांति बहाल करने के प्रयासों में भारत लंबे समय से ठोस भूमिका निभाता आ रहा है।”
(4) बढ़ती आर्थिक ताकत। ★“वह तेजी से अंतर्राष्ट्रीय फलक पर आर्थिक-शक्ति बनकर उभर रहा है।” — “बड़ी आर्थिक ताकत” भी मानदंडों में है।
(5) वित्तीय अनुशासन। ★“भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में नियमित रूप से अपना योगदान दिया है और यह कभी भी अपने भुगतान से चुका नहीं है।”
(6) प्रतीकात्मक महत्व। ★“सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता का एक प्रतीकात्मक महत्त्व भी है। इससे पता चलता है कि किसी देश का अंतर्राष्ट्रीय मामलों में महत्त्व बढ़ रहा है… अगर आपकी साख एक ताकतवर देश के रूप में है तो आपका प्रभाव ज्यादा होगा।”
(7) संरचनात्मक तर्क (अतिरिक्त)। ★“सुरक्षा-परिषद् की सदस्य संख्या स्थिर रही है जबकि आम सभा में सदस्यों की संख्या खूब बढ़ी है” — इससे “सुरक्षा परिषद् के प्रतिनिधित्वमूलक चरित्र की हानि हुई है।” आम सभा में ज्यादातर विकासशील देश हैं, इसलिए उनकी भी सुनी जानी चाहिए।
! संतुलन के लिए — विरोध भी जानिए (इससे अंक बढ़ते हैं)
“सिर्फ पड़ोसी पाकिस्तान ही नहीं… बल्कि कुछ और देश भी चाहते हैं कि भारत को… शामिल न किया जाए” — (क) परमाणु हथियारों को लेकर चिंता; (ख) पाकिस्तान से संबंधों की कठिनाई; (ग) ब्राजील, जर्मनी, जापान और शायद दक्षिण अफ्रीका को भी शामिल करना पड़ेगा; (घ) अफ्रीका और दक्षिण अमरीका को प्रतिनिधित्व पहले मिलना चाहिए। पाठ का निष्कर्ष: “भारत या किसी और देश के लिए निकट भविष्य में… स्थायी सदस्य बन पाना मुश्किल लगता है।”
प्रश्न 10. संयुक्त राष्ट्रसंघ के ढाँचे को बदलने के लिए सुझाए गए उपायों के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भूमिका: ★“लगभग सभी देश सहमत हैं कि दोनों ही तरह के ये सुधार जरुरी हैं। देशों के बीच में सहमति इस बात पर नहीं है कि इसके लिए दरअसल ठीक करना क्या है, कैसे करना है और कब करना है?” — यही पूरी कठिनाई का सार है।
कठिनाई 1 — ★मानदंडों पर सहमति नहीं
छह मानदंड सुझाए गए — बड़ी आर्थिक ताकत, बड़ी सैन्य ताकत, बजट में ज्यादा योगदान, बड़ी आबादी, लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान, तथा विश्व की विविधता की नुमाइंदगी। पर ★“सरकारें अपने-अपने हित और महत्त्वाकांक्षाओं के लिहाज से कुछ कसौटियों को फायदेमंद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं। भले ही कोई देश सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए इच्छुक न हो, वह फिर भी बता सकता है कि इन कसौटियों में दिक्कत है।”
कठिनाई 2 — ★हर मानदंड का पैमाना अस्पष्ट है
“अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी होनी चाहिए? सैन्य-ताकत कितनी? बजट में कितना योगदान? बड़ी जनसंख्या बाधक है या सहायक?” — और सबसे तीखा: ★“अगर लोकतंत्र और मानवाधिकार के प्रति सम्मान ही कसौटी हो तो… बेहतरीन रिकार्ड वाले देशों की कतार लग जाएगी। सवाल यह है कि क्या ये देश ‘परिषद्’ के सदस्य के रूप में प्रभावकारी होंगे?”
कठिनाई 3 — ★प्रतिनिधित्व का आधार तय नहीं हो पाता
भौगोलिक बराबरी? (एशिया, अफ्रीका, लातिनी अमरीका और कैरेबियाई क्षेत्र की एक-एक सीट?) · महादेश बनाम क्षेत्र-उपक्षेत्र? · आर्थिक विकास? (“विकासशील देश विकास की अलग-अलग सीढ़ियों पर खड़े हैं”) · और ★संस्कृति? — “कोई विश्व को सभ्यता या संस्कृति के आधार पर बाँटकर कैसे देख सकता है जब कि किसी एक ही राष्ट्र के भीतर विभिन्न संस्कृति-धाराएँ उपस्थित होती हैं?”
कठिनाई 4 — ★★वीटो, और स्थायी सदस्यों की अनिच्छा (सबसे बड़ी कठिनाई)
वीटो हटाने की माँग का तर्क: “निषेधाधिकार लोकतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के बीच बराबरी की धारणा से मेल नहीं खाता।” पर व्यावहारिक सच्चाई: ★★“स्थायी सदस्य ऐसे सुधार के लिए शायद ही राजी होंगे… इस बात का खतरा है कि ‘वीटो’ न हो तो सन् 1945 के समान इन ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे; इससे बाहर रहकर वे अपनी रुचि के अनुसार काम करें और उनके जुड़ाव अथवा समर्थन के अभाव में यह संगठन प्रभावकारी न रह जाए।” प्रमाण: 1 जून 2018 तक वीटो का प्रयोग — सोवियत संघ/रूस 135, अमरीका 84, यूके 32, फ्रांस 18, चीन 11। — यानी स्थायी सदस्य इस शक्ति का भरपूर उपयोग करते रहे हैं।
कठिनाई 5 — ! नए दावेदारों के बीच आपसी विरोध
ब्राजील, जर्मनी, जापान, भारत और शायद दक्षिण अफ्रीका — सब दावेदार हैं, “जिसका ये देश विरोध करते हैं।” और कुछ चाहते हैं कि अफ्रीका और दक्षिण अमरीका को पहले प्रतिनिधित्व मिले।
कठिनाई 6 — न्यायाधिकार पर भी दो विरोधी इच्छाएँ
कुछ चाहते हैं कि संगठन “शांति और सुरक्षा से जुड़े मिशनों में ज्यादा प्रभावकारी अथवा बड़ी भूमिका निभाए”, जबकि औरों की इच्छा है कि यह “विकास तथा मानवीय भलाई के कामों तक सीमित रहे।”
निष्कर्ष: ★कठिनाई तकनीकी नहीं, राजनीतिक है — हर देश उसी सुधार का समर्थन करता है जो उसके अपने हित में हो, और जिनके पास वीटो है उन्हें बदलाव की कोई मजबूरी नहीं। इसीलिए 1992 का प्रस्ताव और 1997 की कोफी अन्नान की जाँच — दोनों के बावजूद सुरक्षा परिषद् का आकार 1965 के बाद से “जस का तस बना हुआ है।”
प्रश्न 11. हालाँकि संयुक्त राष्ट्रसंघ युद्ध और इससे उत्पन्न विपदा को रोकने में नाकामयाब रहा है लेकिन विभिन्न देश अभी भी इसे बनाए रखना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्रसंघ को एक अपरिहार्य संगठन मानने के क्या कारण हैं?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भूमिका — विफलता स्वीकार कीजिए, फिर तर्क दीजिए। पाठ्यपुस्तक स्वयं जून 2006 का लेबनान संकट देती है — इजराइल ने हमला किया, भारी संख्या में आम नागरिक मारे गए, पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने प्रस्ताव अगस्त में पास किया और इजराइली सेना अक्टूबर में वापस हुई। और बोस्निया, सोमालिया तथा रवांडा में संयुक्त राष्ट्रसंघ की असफलताओं का उल्लेख भी है।
फिर भी अपरिहार्य क्यों — छह कारण
(1) ★“नरक से बचाने” की भूमिका। डेग हैमरसोल्ड के शब्दों में — “संयुक्त राष्ट्रसंघ का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुआ है।” यानी कसौटी ‘पूर्ण शांति’ नहीं, ‘महाविनाश से बचाव’ है।
(2) ★बातचीत का मंच — युद्ध का विकल्प। शशि थरूर के शब्दों में — “हथियार लड़ाने से बढ़िया है कि ज़बान लड़ाई जाए।” और पाठ का तथ्य: ★“अधिकांश झगड़ों और विभेदों का समाधान बिना युद्ध के ही किया जाता है, लेकिन यह एक ऐसा तथ्य है जिस पर कम ध्यान जाता है।”
(3) ★साझी समस्याओं का एकमात्र रास्ता। बीमारी (“कुछ रोगों को तब ही खत्म किया जा सकता है जब विश्व का हर देश अपनी आबादी को टीके लगाने में सहयोग करे”) और ★‘ग्लोबल वार्मिंग’ (“सबसे प्रभावकारी समाधान तो यही है कि वैश्विक तापवृद्धि को रोका जाए। इसके लिए विश्व के बड़े औद्योगिक देशों का सहयोग करना जरुरी है”) — ये अकेले किसी देश के बस की बात नहीं।
(4) ★★सहयोग को व्यवस्थित करने वाला ढाँचा। “सहयोग की ज़रूरत को पहचानना और सचमुच में सहयोग करना दो अलग-अलग बातें हैं।” संगठन ही “नियमों और नौकरशाही की एक रूपरेखा दे सकता है ताकि सदस्यों को यह विश्वास हो कि आने वाली लागत में सबकी समुचित साझेदारी होगी, लाभ का बँटवारा न्यायोचित होगा और कोई सदस्य एक बार समझौते में शामिल हो जाता है तो वह… नियम और शर्तों का पालन करेगा।”
(5) ★★महाशक्ति पर एकमात्र अंकुश। “संयुक्त राष्ट्रसंघ ही वह जगह है जहाँ अमरीका के किसी खास रवैये और नीति की आलोचना की सुनवाई हो और कोई बीच का रास्ता निकालने तथा रियायत देने की बात कही-सोची जा सके।” — और अमरीकी नेता भी समझते हैं कि “संयुक्त राष्ट्रसंघ के जरिए 190 राष्ट्रों को एक साथ किया जा सकता है।” (उदाहरण: कोफी अन्नान ने इराक पर अमरीकी हमले को अवैध करार दिया।)
(6) ★★पारस्परिक निर्भरता। “संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी। आज विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जा रहे हैं। इसे ‘पारस्परिक निर्भरता’ का नाम दिया जाता है। इसे देखते हुए यह कल्पना करना कठिन है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसे संगठन के बिना विश्व के सात अरब से भी ज्यादा लोग कैसे रहेंगे।”
निष्कर्ष: ★“प्रौद्योगिकी यह सिद्ध कर रही है कि आने वाले दिनों में विश्व में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जाएगी। इसलिए, संयुक्त राष्ट्रसंघ का महत्त्व भी निरंतर बढ़ेगा।”
प्रश्न 12. “संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार का अर्थ है सुरक्षा परिषद् के ढाँचे में बदलाव।” इस कथन का सत्यापन करें(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर — यह कथन आंशिक रूप से सही है। दोनों पक्ष लिखिए।
पक्ष में — कथन क्यों सही है
(1) ★“बनावट और प्रक्रियाओं में सुधार के अंतर्गत सबसे बड़ी बहस सुरक्षा परिषद् के कामकाज को लेकर है।” — पाठ्यपुस्तक स्वयं यह कहती है। (2) 1992 का प्रस्ताव — तीनों शिकायतें सुरक्षा परिषद् के बारे में थीं: “सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती”; “इसके फ़ैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है”; “सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।” (3) 1997 में कोफी अन्नान की जाँच का पहला सवाल भी यही था — “क्या सुरक्षा परिषद् के नए सदस्य चुने जाने चाहिए?” (4) ★शक्ति वहीं है: सुरक्षा-परिषद् के “निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी” हैं, जबकि आम सभा के नहीं। इसलिए असली सुधार वहीं मायने रखता है। (5) भारत की पूरी चिंता भी सुरक्षा परिषद् की संरचना को लेकर ही है।
! विपक्ष में — कथन क्यों अधूरा है
(1) ★★पाठ्यपुस्तक स्पष्ट कहती है कि सुधार दो तरह के हैं — “एक तो यह कि इस संगठन की बनावट और इसकी प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए। दूसरे, इस संगठन के न्यायाधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा की जाए।” — यानी सुरक्षा परिषद् केवल आधा मसला है। (2) बजट और प्रशासन: “अमरीका और पश्चिमी देश संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट से जुड़ी प्रक्रियाओं और इसके प्रशासन में सुधार चाहते हैं।” (3) ★2005 के शिखर सम्मेलन के छह निर्णयों में से केवल एक भी सुरक्षा परिषद् के बारे में नहीं था — शांति संस्थापक आयोग, नागरिकों की रक्षा का विश्व-उत्तरदायित्व, मानवाधिकार परिषद् (19 जून 2006), सहस्राब्दि विकास लक्ष्य, आतंकवाद की निंदा, लोकतंत्र-कोष और न्यासिता परिषद् की समाप्ति। (4) न्यायाधिकार की बहस अपने-आप में बड़ी है — कुछ चाहते हैं संगठन शांति-सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाए, कुछ चाहते हैं वह विकास और मानवीय भलाई (स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, जनसंख्या नियंत्रण, मानवाधिकार, लिंगगत न्याय, सामाजिक न्याय) तक सीमित रहे। (5) ★भारत का अपना रुख़ भी यही है — “संयुक्त राष्ट्रसंघ के अजेंडे में विकास का मामला प्रमुख होना चाहिए।”
★निष्कर्ष
सुरक्षा परिषद् का सुधार सबसे दृश्यमान, सबसे विवादित और सबसे कठिन हिस्सा है — पर वह पूरा सुधार नहीं है। संयुक्त राष्ट्रसंघ का सुधार दो पहियों पर चलता है: ढाँचा और न्यायाधिकार। कथन पहले पहिये को पूरी गाड़ी मान लेता है — और यही उसकी सीमा है।
खंड B — अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
B.1 बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
13संयुक्त राष्ट्रसंघ चार्टर पर कितने देशों ने 26 जून 1945 को हस्ताक्षर किए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 50 (पोलैंड के 15 अक्टूबर को हस्ताक्षर करने से कुल 51 मूल संस्थापक सदस्य)
14भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में कब शामिल हुआ?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) 30 अक्टूबर 1945
15‘संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस’ कब मनाया जाता है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 24 अक्टूबर (1945 में इसी दिन स्थापना हुई)
16अटलांटिक चार्टर पर किन दो नेताओं ने हस्ताक्षर किए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) रूजवेल्ट और चर्चिल — अगस्त 1941 (याल्टा में तीनों थे — फरवरी 1945)
17अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) हेग
18न्यासिता परिषद् कब से स्थगित है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) 1 नवम्बर 1994 — अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आज़ाद होने पर
19मानवाधिकार परिषद् कब से सक्रिय है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 19 जून 2006 (निर्णय सितम्बर 2005 के शिखर सम्मेलन में हुआ था)
20एंटोनियो गुटेरेस कौन-से महासचिव हैं और कब से?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) नौवें, 1 जनवरी 2017 से
21किस महासचिव को मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार मिला?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) डेग हैमरशोल्ड — कांगो-संकट के प्रयासों के लिए (अन्नान को 2001 में, जीवित रहते)
221 जून 2018 तक सबसे अधिक बार वीटो का प्रयोग किसने किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) सोवियत संघ/रूस — 135 बार (अमरीका 84, यूके 32, फ्रांस 18, चीन 11)
232019 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में भारत का योगदान और स्थान?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 0.8%, इक्कीसवाँ
24IMF में अकेले अमरीका के पास कितना मताधिकार है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) 16.52% (समूह-7 का कुल 41.29%; चीन 6.09%; भारत 2.64%)
25विश्व बैंक की औपचारिक स्थापना कब हुई?
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उत्तर — (क) 1944 — दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान
B.2 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (1–2 अंक)
26‘लीग ऑव नेशंस’ क्यों विफल रही?
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उत्तर: वह पहले विश्वयुद्ध के बाद बनी थी, पर “शुरुआती सफलताओं के बावजूद यह संगठन दूसरा विश्वयुद्ध (1939–45) न रोक सका। पहले की तुलना में इस महायुद्ध में कहीं ज्यादा लोग मारे गये और घायल हुए।” संयुक्त राष्ट्रसंघ उसी का उत्तराधिकारी है।
27डेग हैमरसोल्ड का प्रसिद्ध कथन क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: “संयुक्त राष्ट्रसंघ का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुआ है।”
28‘अंतर्राष्ट्रीय संगठन क्या नहीं है’ — पाठ्यपुस्तक के शब्दों में बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ★“अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो। अंतर्राष्ट्रीय संगठन का निर्माण विभिन्न राज्य ही करते हैं और यह उनके मामलों के लिए जवाबदेह होता है।”
29सहयोग में आने वाली चार अड़चनें बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) लागत का भार कौन कितना उठाए; (2) लाभ का बँटवारा न्यायोचित ढंग से कैसे हो; (3) मोल-तोल के बाद जो तय हो जाए उससे कोई मुकरे नहीं; (4) समझौते के बाद जो बातें तय हुई हैं उनसे कोई दग़ा न करे।
30आम सभा और सुरक्षा-परिषद् के निर्णयों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
उत्तर देखिए
उत्तर: ★सुरक्षा-परिषद् के “निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी” हैं; आम सभा के “निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं।”
31वीटो को ‘नकारात्मक शक्ति’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यह किसी फ़ैसले को कराने की नहीं, रोकने की शक्ति है — “स्थायी सदस्यों में से कोई एक अपने निषेधाधिकार का प्रयोग कर सकता है और इस तरह वह किसी फैसले को रोक सकता है, भले ही अन्य स्थायी सदस्यों और सभी अस्थायी सदस्यों ने उस फ़ैसले के पक्ष में मतदान किया हो।”
32अस्थायी सदस्यों के बारे में तीन नियम बताइए।
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उत्तर: (1) दस अस्थायी सदस्य होते हैं और उनका चुनाव आम सभा दो वर्षों के लिए करती है;
“दो साल की अवधि तक अस्थायी सदस्य रहने के तत्काल बाद किसी देश को फिर से इस पद के लिए नहीं चुना जा सकता”;
(3) “अस्थायी सदस्यों का निर्वाचन इस तरह से होता है कि विश्व के सभी महादेशों का प्रतिनिधित्व हो सके” — और उन्हें वीटो का अधिकार नहीं है।
33न्यासिता परिषद् क्यों स्थगित हुई?
उत्तर देखिए
उत्तर: “संयुक्त राष्ट्रसंघ की न्यासिता प्रणाली के अंतर्गत आने वाली अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आजाद होने के साथ 1 नवम्बर 1994 से यह परिषद् स्थगित।”
341992 के प्रस्ताव की तीन शिकायतें क्या थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) “सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।” (2) “इसके फ़ैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है और इन फ़ैसलों पर चंद देशों का दबदबा होता है।” (3) “सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।”
352005 के शिखर सम्मेलन के कोई चार निर्णय बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) शांति संस्थापक आयोग का गठन; (2) “यदि कोई राष्ट्र अपने नागरिकों को अत्याचारों से बचाने में असफल हो जाए तो विश्व-बिरादरी इसका उत्तरदायित्व ले”; (3) मानवाधिकार परिषद् की स्थापना (19 जून 2006 से सक्रिय); (4) सहस्राब्दि विकास लक्ष्य पर सहमति; (5) हर रूप-रीति के आतंकवाद की निंदा; (6) लोकतंत्र-कोष का गठन और न्यासिता परिषद् को समाप्त करने पर सहमति। (कोई चार)
36WTO के बारे में तीन तथ्य लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) स्थापना 1995 में; (2) ‘जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ’ (GATT) का उत्तराधिकारी; (3) सदस्य 164 (29 जुलाई 2016 की स्थिति)। ! “विकासशील देशों की बहुधा शिकायत रहती है कि इस संगठन की कार्यविधि पारदर्शी नहीं है और बड़ी आर्थिक ताकतें उन्हें धकियाती हैं।”
37एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच में क्या अंतर है?
उत्तर देखिए
उत्तर: दोनों मानवाधिकारों की रक्षा में सक्रिय स्वयंसेवी संगठन हैं। एमनेस्टी “पूरे विश्व में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलाता है” और रिपोर्ट प्रकाशित करता है, जो “सरकारों को अक्सर नागवार लगती हैं।” ★ह्यूमन राइट्स वॉच “अमरीका का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है” और उसने बारूदी सुरंगों पर रोक, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने तथा अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय की स्थापना के अभियानों में मदद की है।
B.3 लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
38हमें अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की क्यों ज़रूरत है?
उत्तर देखिए
उत्तर: (प्रश्न 11 के कारण 1–4 यहाँ लागू हैं।) संक्षेप में — (1) युद्ध टालने का मंच; (2) साझी समस्याओं (बीमारी, ग्लोबल वार्मिंग) का एकमात्र रास्ता; (3) सहयोग को नियम और भरोसे का ढाँचा देना; (4) महाशक्ति पर अंकुश का मंच। मूल वाक्य — ★“अंतर्राष्ट्रीय संगठन हर मर्ज़ की दवा नहीं लेकिन वे महत्त्वपूर्ण ज़रूर हैं।”
39संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना का घटना-क्रम लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: अगस्त 1941 — अटलांटिक चार्टर (रूजवेल्ट और चर्चिल) → जनवरी 1942 — 26 मित्र-राष्ट्र वाशिंगटन में; दिसंबर 1943 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर → फरवरी 1945 — याल्टा सम्मेलन (रूजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन) → अप्रैल–मई 1945 — सेन फ्रांसिस्को में दो महीने लंबा सम्मेलन → 26 जून 1945 — 50 देशों के हस्ताक्षर → 15 अक्टूबर 1945 — पोलैंड के हस्ताक्षर, कुल 51 मूल संस्थापक → 24 अक्टूबर 1945 — स्थापना और ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस’ → 30 अक्टूबर 1945 — भारत शामिल।
401991 के बाद विश्व राजनीति में आए किन्हीं पाँच बदलावों को लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) सोवियत संघ बिखर गया; (2) अमरीका सबसे ज्यादा ताकतवर है; (3) रूस और अमरीका के संबंध कहीं ज्यादा सहयोगात्मक हैं; (4) चीन तेजी से महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और भारत भी इस दिशा में अग्रसर है; (5) एशिया की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित दर से तरक्की कर रही है; (6) अनेक नए देश संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल हुए; (7) चुनौतियों की एक पूरी नयी कड़ी — जनसंहार, गृहयुद्ध, जातीय संघर्ष, आतंकवाद, परमाण्विक प्रसार, जलवायु में बदलाव, पर्यावरण की हानि, महामारी। (कोई पाँच)
41सुरक्षा परिषद् के नए स्थायी सदस्य के लिए सुझाए गए मानदंड लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (1) बड़ी आर्थिक ताकत; (2) बड़ी सैन्य ताकत; (3) संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में ज्यादा योगदान; (4) आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र; (5) लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाला देश; (6) भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से विश्व की विविधता की नुमाइंदगी करने वाला देश।
! पर पाठ स्वयं कहता है — “सरकारें अपने-अपने हित और महत्त्वाकांक्षाओं के लिहाज से कुछ कसौटियों को फायदेमंद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं।”
42वीटो हटाने की माँग और उसके विरुद्ध तर्क बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: माँग का तर्क: ★“निषेधाधिकार लोकतंत्र और संप्रभु राष्ट्रों के बीच बराबरी की धारणा से मेल नहीं खाता, अत: यह संयुक्त राष्ट्रसंघ के लिए उचित या प्रासंगिक नहीं है।”
विरुद्ध तर्क★★“स्थायी सदस्य ऐसे सुधार के लिए शायद ही राजी होंगे… इस बात का खतरा है कि ‘वीटो’ न हो तो सन् 1945 के समान इन ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे; इससे बाहर रहकर वे अपनी रुचि के अनुसार काम करें और उनके जुड़ाव अथवा समर्थन के अभाव में यह संगठन प्रभावकारी न रह जाए।”
और पाठ का साइड-कथन ★“असल में वीटो की ज़रूरत तो कमजोर देशों को है, उनको नहीं जिनके पास पहले से बहुत ताकत है।”
43IMF में मताधिकार की व्यवस्था पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ★“190 (19 फरवरी 2024 की स्थिति) देश अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सदस्य हैं लेकिन हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं है।” समूह-7 के सदस्यों (अमरीका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और कनाडा) के पास 41.29 प्रतिशत मत हैं। अन्य अग्रणी सदस्यों में चीन (6.09%), भारत (2.64%), रूस (2.59%), ब्राजील (2.22%) और सऊदी अरब (2.02%) हैं। अकेले अमरीका के पास 16.52 प्रतिशत मताधिकार है।
टिप्पणी ★यह ‘एक देश, एक वोट’ के सिद्धांत के विपरीत है — और यही संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा
से इसका मूल भेद है, जहाँ “हरेक सदस्य को एक वोट हासिल है।”
44एक-ध्रुवीय विश्व में अमरीका की ताकत पर अंकुश क्यों कठिन है?
उत्तर देखिए
उत्तर: (प्रश्न 11 का कारण 5 और मास्टर नोट्स §8.2 देखिए।) तीन कारण —
“सोवियत संघ की गैर मौजूदगी में अब अमरीका एकमात्र महाशक्ति है। अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत के बूते वह संयुक्त राष्ट्रसंघ या किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन की अनदेखी कर सकता है।”
“संयुक्त राष्ट्रसंघ के भीतर अमरीका का खास प्रभाव है”
— बजट में सबसे ज्यादा योगदान (22.0%), बेजोड़ वित्तीय ताकत, ★“संयुक्त राष्ट्रसंघ अमरीकी भू-क्षेत्र में स्थित है”, और “कई नौकरशाह इसके नागरिक हैं।”
वीटो
— जिससे वह कोई भी प्रतिकूल प्रस्ताव रोक सकता है, और “महासचिव के चयन में भी अमरीका की बात बहुत वज़न रखती है।”
B.4 अभिकथन–कारण प्रश्न (1 अंक)
निर्देश: (क) दोनों सही, कारण सही व्याख्या करता है। (ख) दोनों सही, पर कारण व्याख्या नहीं करता। (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत। (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।
45अभिकथन (A): आम सभा के निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं होते।
कारण (R): आम सभा में 193 सदस्य हैं और सभी को एकसमान मत प्राप्त है।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ख) दोनों सही, पर कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता — बाध्यकारी न होना चार्टर की व्यवस्था है, सदस्य-संख्या का परिणाम नहीं।
46अभिकथन (A): वीटो को समाप्त करना कठिन है।
कारण (R): ‘वीटो’ न हो तो ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे और संगठन प्रभावकारी न रह जाए।
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दोनों सही और कारण सही व्याख्या करता है — यह पाठ्यपुस्तक का अपना तर्क है।
47अभिकथन (A): भारत सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता चाहता है।
कारण (R): भारत के परमाणु हथियार उसकी दावेदारी को मजबूत बनाते हैं।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत — ! उल्टे, “कुछ देश भारत के परमाणु हथियारों को लेकर चिंतित हैं” और यह विरोध का कारण है।
48अभिकथन (A): संयुक्त राष्ट्रसंघ का महत्त्व निरंतर बढ़ेगा।
कारण (R): प्रौद्योगिकी सिद्ध कर रही है कि विश्व में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जाएगी।
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दोनों सही और कारण सही व्याख्या करता है।
B.5 स्रोत-आधारित प्रश्न (4 अंक)
49अवतरण पढ़कर उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
“संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी। आज विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जा रहे हैं। इसे ‘पारस्परिक निर्भरता’ का नाम दिया जाता है।”
(क) ‘पारस्परिक निर्भरता’ से क्या आशय है?
उत्तर: “विभिन्न समाजों और मसलों के बीच आपसी तार जुड़ते जाना।”
(ख) लेखक संयुक्त राष्ट्रसंघ के बिना दुनिया की कल्पना क्यों नहीं कर पाता?
उत्तर: “यह कल्पना करना कठिन है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसे संगठन के बिना विश्व के सात अरब से भी ज्यादा लोग कैसे रहेंगे।”
(ग) भविष्य में संगठन का महत्त्व क्यों बढ़ेगा?
उत्तर: “प्रौद्योगिकी यह सिद्ध कर रही है कि आने वाले दिनों में विश्व में पारस्परिक निर्भरता बढ़ती जाएगी। इसलिए, संयुक्त राष्ट्रसंघ का महत्त्व भी निरंतर बढ़ेगा।”
(घ) लोगों और सरकारों को क्या करना होगा?
उत्तर: “संयुक्त राष्ट्रसंघ तथा दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के समर्थन और उपयोग के तरीके तलाशने होंगे — ऐसे तरीके जो उनके हितों और विश्व बिरादरी के हितों से व्यापक धरातल पर मेल खाते हों।”
50अवतरण पढ़कर उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
“अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो। अंतर्राष्ट्रीय संगठन का निर्माण विभिन्न राज्य ही करते हैं और यह उनके मामलों के लिए जवाबदेह होता है।”
(क) अंतर्राष्ट्रीय संगठन कब कायम होते हैं?
उत्तर: “जब राज्यों में इस बात पर सहमति होती है कि कोई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनना चाहिए, तभी ऐसे संगठन कायम होते हैं।”
(ख) एक बार बन जाने पर वे क्या करते हैं?
उत्तर: “ये समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान में सदस्य देशों की मदद करते हैं।”
(ग) ऐसे दो मसले बताइए जिन्हें कोई एक देश अकेले नहीं सुलझा सकता।
उत्तर: बीमारी (“कुछ रोगों को तब ही खत्म किया जा सकता है जब विश्व का हर देश अपनी आबादी को टीके लगाने में सहयोग करे”) और ★‘ग्लोबल वार्मिंग’ (“सबसे प्रभावकारी समाधान तो यही है कि वैश्विक तापवृद्धि को रोका जाए”)।
(घ) संगठन सहयोग को कैसे संभव बनाता है?
उत्तर: “नियमों और नौकरशाही की एक रूपरेखा दे सकता है ताकि सदस्यों को यह विश्वास हो कि आने वाली लागत में सबकी समुचित साझेदारी होगी, लाभ का बँटवारा न्यायोचित होगा और कोई सदस्य एक बार समझौते में शामिल हो जाता है तो वह इस समझौते के नियम और शर्तों का पालन करेगा।”
B.6 उच्च-क्रम चिंतन (HOTS)
51पाठ्यपुस्तक कहती है कि ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ की जड़ें युद्ध में थीं।’ क्या यह उसकी ताकत है या कमज़ोरी?
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न।)
ताकत क्योंकि वह वास्तविक शक्ति-संतुलन पर बना — विजेता राष्ट्रों को स्थायी सदस्यता और वीटो देकर उन्हें भीतर रखा गया। पाठ का तर्क: “‘वीटो’ न हो तो… इन ताकतवर देशों की दिलचस्पी संयुक्त राष्ट्रसंघ में न रहे।” लीग ऑव नेशंस इसी में असफल रही थी।
कमज़ोरी क्योंकि 1945 का शक्ति-संतुलन आज मौजूद नहीं — “सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।” सोवियत संघ बिखर चुका है, चीन और भारत उभर रहे हैं, और अफ्रीका तथा दक्षिण अमरीका का कोई स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं।
संतुलित उत्तर ★यही उसकी ताकत भी है और कमज़ोरी भी — और इसीलिए सुधार ज़रूरी है, पर लगभग असंभव।
52“असल में वीटो की ज़रूरत तो कमजोर देशों को है।” इस टिप्पणी का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (यह पाठ्यपुस्तक की साइड-टिप्पणी है, पृ. 55।)
पक्ष मेंवीटो एक रक्षात्मक शक्ति है — जिसके पास पहले से सैन्य और आर्थिक ताकत है, वह
वैसे भी अपनी बात मनवा सकता है; कमज़ोर देश के पास अपने हित बचाने का कोई और साधन नहीं।
विपक्ष मेंवीटो सामूहिक निर्णय को रोकता है — यदि सब के पास हो तो संगठन पंगु हो जाएगा।
और पाठ का यथार्थवादी तर्क यह है कि ताकतवर देशों को भीतर रखने के लिए ही यह रियायत दी गई थी।
निष्कर्ष ★टिप्पणी नैतिक रूप से सही है, पर व्यावहारिक रूप से अव्यावहारिक — और यही
संयुक्त राष्ट्रसंघ का मूल तनाव है।
53जून 2006 के लेबनान संकट से संयुक्त राष्ट्रसंघ के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इजराइल ने जून 2006 में लेबनान पर हमला किया, “भारी संख्या में आम नागरिक मारे गए”, पर “संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस मामले पर एक प्रस्ताव बहुत बाद यानी अगस्त में पास किया और इजराइली सेना इस इलाके से अक्टूबर में ही वापस हो सकी।”
सीख ★संगठन की सबसे बड़ी कमज़ोरी गति है, इरादा नहीं। प्रस्ताव आया, सेना हटी — पर चार महीने बाद। और इसका कारण संरचनात्मक है — जहाँ एक भी वीटो प्रस्ताव रोक सकता है, वहाँ सहमति बनने में समय लगता है। यही प्रश्न 10 और 12 को जोड़ता है: ढाँचे का सुधार ही गति का सुधार है।
54क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार से पहले उसका न्यायाधिकार तय होना चाहिए, या ढाँचा?
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न — प्रश्न 12 का विस्तार।)
ढाँचा पहले क्योंकि निर्णय-शक्ति वहीं है — सुरक्षा-परिषद् के निर्णय बाध्यकारी हैं।
जब तक बनावट प्रतिनिधिमूलक नहीं होगी, न्यायाधिकार बढ़ाने का अर्थ है चंद देशों की शक्ति बढ़ाना।
न्यायाधिकार पहले क्योंकि यह तय हुए बिना पता ही नहीं चलेगा कि किस तरह के सदस्य चाहिए।
यदि संगठन को विकास और मानवीय भलाई तक सीमित रखना है तो सैन्य ताकत का मानदंड अप्रासंगिक हो जाता
है।
निष्कर्ष ★दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं — और यही कारण है कि 1992 से आज तक कोई भी सुधार पूरा नहीं हो सका।
उत्तर लिखने की रणनीति★
| अंक | क्या करें |
|---|---|
| 1 | केवल तथ्य — तिथि, संख्या, नाम। |
| 2 | दो बिंदु, दोनों में एक-एक प्रमाण। |
| 4 | चार बिंदु, हर बिंदु में कीवर्ड मोटा और एक तथ्य। |
| 6 | भूमिका → 5–6 बिंदु → निष्कर्ष। कम से कम तीन तिथियाँ या आँकड़े। |
| सत्यापन-प्रश्न (12) | ★पक्ष + विपक्ष + निष्कर्ष — तीनों अनिवार्य। |
| सूची-प्रश्न (8, 9, 41) | क्रमांक देकर लिखिए — बिना क्रमांक के परीक्षक बिंदु गिन नहीं पाता। |
| सभी में | उद्धरण अंक बढ़ाते हैं — “मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं… नरक से बचाने के लिए”, “इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी”। |