अध्याय 3नियोजित विकास की राजनीति

प्रश्न बैंक29 मिनटस्रोत जाँचे गए

खंड क — NCERT प्रश्नावली (पृ. 53) के पूर्ण उत्तर, प्रश्न 1 से 7 खंड ख — 1 अंक · खंड ग — 2 अंक · खंड घ — 4 अंक · खंड ङ — 6 अंक खंड च — दावा-कारण (CBSE प्रारूप) · खंड छ — स्रोत-आधारित


प्रश्न 1. ‘बॉम्बे प्लान’ के बारे में कौन-सा बयान सहीनहीं है?

✓ सही उत्तर: (ख) — “इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।”

! यह क्यों गलत है: पाठ्यपुस्तक कहती है कि ‘बॉम्बे प्लान’ की मंशा यह थी कि “सरकार औद्योगिक तथा अन्य आर्थिक निवेश के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए।” — यानी उसने सरकारी निवेश और नियोजन का समर्थन किया, न कि उद्योगों पर राज्य के स्वामित्व (nationalisation) का। ये दो अलग बातें हैं। ★और यह स्वाभाविक भी है — योजना बनाने वाले स्वयं उद्योगपति थे; वे अपने ही उद्योगों का राष्ट्रीयकरण क्यों माँगते?

बाकी तीन कथन सही हैं:

विकल्प✓ आधार
(क) यह भारत के आर्थिक भविष्य का एक ब्लू-प्रिंट था“इस समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया”
(ग) इसकी रचना कुछ अग्रणी उद्योगपतियों ने की थी★“1944 में उद्योगपतियों का एक तबका एकजुट हुआ।”
(घ) इसमें नियोजन के विचार का पुरज़ोर समर्थन किया गया था★“चाहे दक्षिणपंथी हों अथवा वामपंथी, उस वक्त सभी चाहते थे कि देश नियोजित अर्थव्यवस्था की राह पर चले।”

प्रश्न 2. भारत ने शुरुआती दौर में विकास की जो नीति अपनाई उसमें कौन-सा विचार शामिलनहीं था?

✓ सही उत्तर: (ख) — उदारीकरण

! क्यों: उदारीकरण (liberalisation) का अर्थ है सरकारी नियंत्रण घटाना और बाज़ार को खुला छोड़ना। यह 1991 के बाद की नीति है, शुरुआती दौर की नहीं। शुरुआती दौर में तो ठीक उल्टा हुआ — सरकार ने “आयात पर भारी शुल्क” लगाया और “बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार” को सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित किया।

बाकी तीन शामिल थे:

विकल्प✓ आधार
(क) नियोजन★पूरे अध्याय का केंद्र — योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाएँ
(ग) सहकारी खेतीकृषि-विकास और भूमि-सुधार की रणनीति का हिस्सा
(घ) आत्मनिर्भरता“दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद सामान बनाया जाए” वाली सोच; आयात-शुल्क से देसी उद्योगों का संरक्षण

प्रश्न 3. भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का विचार कहाँ से ग्रहण किया गया था?

✓ सही उत्तर: (ख) — सिर्फ़ क और ख (यानी बॉम्बे प्लान और सोवियत खेमे के देशों के अनुभव)

आधार:

स्रोतपाठ्यपुस्तक का प्रमाण
★(क) बॉम्बे प्लान“1944 में उद्योगपतियों का एक तबका एकजुट हुआ। इस समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया।”
★(ख) सोवियत खेमे के अनुभव“सोवियत संघ ने 1930 तथा 1940 के दशक में भारी कठिनाइयों के बीच शानदार आर्थिक प्रगति की थी।”; और “सोवियत संघ की तरह भारत के योजना आयोग ने भी पंचवर्षीय योजनाओं का विकल्प चुना।”

! बाकी दो क्यों नहीं:

  • (ग) गाँधीवादी विचार — गाँधीवादी दृष्टि विकेंद्रित, ग्राम-आधारित थी; केंद्रीकृत नियोजित अर्थव्यवस्था का स्रोत वह नहीं थी। (हालाँकि जे.सी. कुमारप्पा के रूप में गाँधीवादी आवाज़ योजना आयोग में मौजूद थी — पर वह विचार का स्रोत नहीं, एक धारा थी।)
  • (घ) किसान संगठनों की माँगें — अध्याय में नियोजन के स्रोत के रूप में इनका कोई उल्लेख नहीं है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित का मेल करें

!! पहले एक ज़रूरी सूचना: इस प्रश्न के चार पदों में से केवल ‘पी.सी. महालनोबिस’ का उल्लेख अध्याय (पृ. 44–53) में है। चरण सिंह, बिहार का अकाल, वर्गीज़ कूरियन और ‘जोनिंग’ — इनमें से कोई भी इस अध्याय के पाठ में नहीं आता। ये विषय हरित क्रांति और श्वेत क्रांति वाले हटाए गए खंड से हैं। ✓ इसलिए इन उत्तरों को याद कीजिए — पाठ में ढूँढ़िए मत।

✓ सही मेल:

पदमेलसंबंध का आधार
(क) चरण सिंह(iii) किसानकिसान-हितों के प्रबल पैरोकार — कृषि और ग्रामीण भारत को प्राथमिकता देने की माँग करते रहे; बाद में प्रधानमंत्री बने
★(ख) पी.सी. महालनोबिस(i) औद्योगीकरण★दूसरी पंचवर्षीय योजना के योजनाकार, जिसमें “भारी उद्योगों के विकास पर ज़ोर दिया गया” (यही एकमात्र मेल है जो अध्याय से सिद्ध होता है — पृ. 51)
(ग) बिहार का अकाल(ii) जोनिंग1966-67 का भीषण अकाल — उस दौर में ‘जोनिंग’ की व्यवस्था लागू थी, यानी अनाज की अंतर-राज्यीय आवाजाही पर रोक, ताकि प्रत्येक क्षेत्र अपने ही अनाज पर निर्भर रहे
(घ) वर्गीज़ कूरियन(iv) सहकारी डेयरी‘श्वेत क्रांति’ के जनक — सहकारी डेयरी आंदोलन (अमूल) के संस्थापक-शिल्पी

क्रम में उत्तर: (क)–(iii), (ख)–(i), (ग)–(ii), (घ)–(iv)

प्रश्न 5. आज़ादी के समय विकास के सवाल पर प्रमुख मतभेद क्या थे? क्या इन मतभेदों को सुलझा लिया गया?

भाग 1 — पहले वह बताइए जिस पर सहमति थी(इससे उत्तर संतुलित बनता है)★

1“भारत के विकास का अर्थ आर्थिक संवृद्धि और आर्थिक-सामाजिक न्याय — दोनों ही हैं।”

2“इस मामले को व्यवसायी, उद्योगपति और किसानों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता; सरकार को प्रमुख भूमिका निभानी थी।”

★और नियोजन पर तो सहमति इतनी व्यापक थी कि 1944 में उद्योगपतियों ने स्वयं ‘बॉम्बे प्लान’ बनाया — “चाहे दक्षिणपंथी हों अथवा वामपंथी, उस वक्त सभी चाहते थे कि देश नियोजित अर्थव्यवस्था की राह पर चले।”

भाग 2 — अब तीन मुख्य मतभेद★★

पाठ्यपुस्तक इन्हें तीन प्रश्नों के रूप में रखती है:

#मतभेद का प्रश्नदोनों पक्ष
1“क्या कोई ऐसा केंद्रीय संगठन ज़रूरी है जो पूरे देश के लिए योजना बनाए?”पक्ष में — पूरे देश की एक “बड़ी तसवीर” और लंबी अवधि के हस्तक्षेप ज़रूरी हैं। विपक्ष में — केंद्रीकृत नियोजन ज़मीनी हक़ीक़त से कट जाता है (कार्टून, पृ. 48 और 50); ‘केरल मॉडल’ विकेंद्रित विकल्प दिखाता है
2“क्या सरकार को कुछ महत्त्वपूर्ण उद्योग और व्यवसाय खुद चलाने चाहिए?”पक्ष में — बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित हुए। विपक्ष में — निजी क्षेत्र की भूमिका सीमित होती है
3★“अगर सामाजिक न्याय आर्थिक संवृद्धि के आड़े आता हो तो सामाजिक-न्याय पर कितना ज़ोर देना उचित होगा?”यही सबसे कठिन मतभेद है — संवृद्धि बनाम पुनर्वितरण

भाग 3 — और एक चौथा मतभेद भी था — कृषि बनाम उद्योग★

“कुछ औद्योगीकरण को उचित रास्ता मानते थे तो कुछ की नज़र में कृषि का विकास करना और ग्रामीण क्षेत्र की गरीबी को दूर करना सर्वाधिक ज़रूरी था।”

★यह मतभेद पहली और दूसरी योजना के आँकड़ों में साफ़ दिखता है — कृषि 15.1 → 11.8 जबकि उद्योग और खनन 7.6 → 18.5।

भाग 4 — क्या ये मतभेद सुलझ गए?(यह प्रश्न का दूसरा हिस्सा है — इसे मत छोड़िए)★★

★★नहीं। पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है: “इनमें से प्रत्येक सवाल पर टकराव हुए जो आज तक जारी हैं।”

प्रमाण:

  • ★उड़ीसा/पोस्को का विवाद (2006) — राज्य सरकार बनाम आदिवासी बनाम पर्यावरणविद बनाम केंद्र — यह ठीक वही बहस है, बस चार दशक बाद।
  • दूसरी योजना की आलोचनाएँ आज तक दोहराई जाती हैं — “शहरों की तरफ़दारी”, “कृषि की जगह उद्योग को प्राथमिकता देकर गलती की गई”, “भारी उद्योगों की जगह कृषि-आधारित उद्योग”।
  • ★केंद्रीकृत बनाम विकेंद्रित नियोजन की बहस ‘केरल मॉडल’ के रूप में आज भी जीवित है।
  • 🔄 और 2015 में योजना आयोग की जगह नीति आयोग का आना ही दिखाता है कि नियोजन की संस्था और तरीके पर बहस कभी बंद नहीं हुई।

निष्कर्ष: मतभेद सुलझे नहीं — वे स्थगित हुए और नये रूपों में लौटते रहे। और यही इस अध्याय का मुख्य तर्क भी है कि विकास एक राजनीतिक सवाल है, और राजनीतिक सवाल कभी ‘अंतिम रूप से’ हल नहीं होते।

प्रश्न 6. पहली पंचवर्षीय योजना का किस चीज़ पर सबसे ज्यादा ज़ोर था? दूसरी पंचवर्षीय योजना पहली से किन अर्थों में अलग थी?

भाग 1 — पहली पंचवर्षीय योजना (1951–1956)★★

पहलूविवरण
मूल लक्ष्य“देश को गरीबी के मकड़जाल से निकालने की कोशिश”
★★सबसे ज्यादा ज़ोरकृषि-क्षेत्र पर
किन कामों परबाँध और सिंचाई में निवेश — क्योंकि “विभाजन के कारण कृषि-क्षेत्र को गहरी मार लगी थी और इस क्षेत्र पर तुरंत ध्यान देना ज़रूरी था”
बड़ी परियोजनाभाखड़ा-नांगल जैसी विशाल परियोजनाओं के लिए बड़ी धनराशि आबंटित
★भूमि-सुधार“देश में भूमि के वितरण का जो ढर्रा मौजूद है उससे कृषि के विकास को सबसे बड़ी बाधा पहुँचती है” → इसलिए भूमि-सुधार को “देश के विकास की बुनियादी चीज़” माना गया
★दृष्टिकोणके.एन. राज की दलील — “अगले दो दशक तक भारत को अपनी चाल ‘धीमी’ रखनी चाहिए, क्योंकि तेज़ रफ़्तार विकास से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचेगा”
आँकड़ों मेंकृषि और सामुदायिक विकास 15.1% · सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण 17% · उद्योग और खनन केवल 7.6%

भाग 2 — दूसरी योजना (1956) किन अर्थों में अलग थी — पाँच अंतर★★

#कसौटीपहली योजनादूसरी योजना
1★★मुख्य ज़ोरकृषि, सिंचाई और बाँधभारी उद्योगों का विकास
2★मूलमंत्र“धीरज”“तेज़ गति से संरचनात्मक बदलाव”
3★मुख्य शिल्पीके.एन. राज (और अन्य)पी.सी. महालनोबिस
4नीतिगत औज़ारभूमि-सुधार, सिंचाई-निवेशआयात पर भारी शुल्क (देसी उद्योगों का संरक्षण); सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार
5★★आबंटन मेंकृषि 15.1% · सिंचाई 17% · उद्योग 7.6%कृषि 11.8% · सिंचाई 10.1% · उद्योग 18.5%

★★इस अंतर का सबसे अच्छा प्रमाण आँकड़े हैं: कृषि 15.1 → 11.8, सिंचाई 17 → 10.1, जबकि उद्योग और खनन 7.6 → 18.5 — लगभग ढाई गुना। (पृ. 52 का स्तंभ-चित्र)

भाग 3 — दूसरी योजना का परिणाम और उसकी कीमत★

✓ उपलब्धि: “औद्योगीकरण पर दिए गए इस ज़ोर ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को एक नया आयाम दिया।”

! समस्याएँ:

1“भारत प्रौद्योगिकी के लिहाज से पिछड़ा हुआ था” — प्रौद्योगिकी खरीदने में बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी।

2“उद्योगों ने कृषि की अपेक्षा निवेश को ज्यादा आकर्षित किया”

उत्तर देखिए

खाद्यान्न-संकट की आशंका।

3★“भारत के योजनाकारों को उद्योग और कृषि के बीच संतुलन साधने में भारी कठिनाई आई।”

! आलोचनाएँ: “योजना की रणनीतियों में सीधे-सीधे ‘शहरों’ की तरफ़दारी होती नज़र आती है”; “कृषि की जगह उद्योग को प्राथमिकता देकर गलती की गई”; और “भारी उद्योगों की जगह कृषि-आधारित उद्योगों पर ज़ोर दिया जाए।”

प्रश्न 7. फ्रैंकिन फ्रैंकल के अवतरण पर आधारित प्रश्न

अवतरण का सार: कांग्रेस के भीतर दो परस्पर विरोधी प्रवृत्तियाँ — पार्टी कार्यकारिणी ने राज्य के स्वामित्व का समाजवादी सिद्धांत अपनाया, जबकि राष्ट्रीय सरकार ने निजी निवेश के लिए उदार आर्थिक नीतियाँ अपनाईं, जिसे “उत्पादन में अधिकतम वृद्धि की अकेली कसौटी पर जायज़ ठहराया गया।”

(क) यहाँ लेखक किस अंतर्विरोध की चर्चा कर रहा है? ऐसे अंतर्विरोध के राजनीतिक परिणाम क्या होंगे?

अंतर्विरोध: ★★कांग्रेस की घोषित विचारधारा और उसकी वास्तविक सरकारी नीति के बीच का अंतर।

  • एक तरफ़ — पार्टी कार्यकारिणी: राज्य का स्वामित्व, समाजवादी सिद्धांत, आर्थिक संसाधनों के संकेंद्रण को रोकना, महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों का नियंत्रण और नियमन।
  • दूसरी तरफ़ — राष्ट्रीय सरकार: निजी निवेश के लिए उदार नीतियाँ, और उसका औचित्य केवल “उत्पादन में अधिकतम वृद्धि” से।

★यह अध्याय के तीसरे मतभेद का ही रूप है — “अगर सामाजिक न्याय आर्थिक संवृद्धि के आड़े आता हो तो सामाजिक-न्याय पर कितना ज़ोर देना उचित होगा?”

★★चार संभावित राजनीतिक परिणाम:

1विश्वसनीयता का संकट — जनता के सामने पार्टी जो कहती है और सरकार जो करती है, उनमें अंतर दिखने पर
समाजवादी नारे खोखले लगने लगते हैं।

2पार्टी के भीतर गुटबंदी — समाजवादी धड़ा और व्यावहारिक/उदार धड़ा आमने-सामने आते हैं।

3★दोनों तरफ़ से आलोचना — वामपंथी कहेंगे कि सुधार पर्याप्त नहीं; दक्षिणपंथी (जैसे स्वतंत्र पार्टी) कहेंगे कि नियंत्रण बहुत ज्यादा है।

4नीतियों में अनिश्चितता — घोषणा और अमल के बीच का फ़ासला नीति को अस्थिर बनाता है।

(ख) अगर लेखक की बात सही है तो कांग्रेस इस नीति पर क्यों चल रही थी? क्या इसका संबंध विपक्षी दलों की प्रकृति से था?

★कारण — तीन:

1★★कांग्रेस एक ‘सर्व-समावेशी’ दल थी। उसमें वामपंथी, मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी — तीनों धाराएँ
मौजूद थीं। किसी एक धारा की नीति पूरी तरह अपनाने का अर्थ होता दूसरी धाराओं को खो देना। इसलिए
विचारधारा में समाजवाद और व्यवहार में लचीलापन — यही उसका संतुलन था।

2व्यापक सहमति की मजबूरी और सुविधा। अध्याय बताता है कि विकास = संवृद्धि + न्याय पर सहमति थी, पर
न्याय की सीमा पर नहीं। कांग्रेस ने उस अनसुलझी बहस को नीति में दोनों तत्व रखकर सँभाला।

3★‘बॉम्बे प्लान’ का प्रमाण — जब उद्योगपति स्वयं नियोजन चाहते थे, तो कांग्रेस के लिए नियोजन और निजी निवेश — दोनों को साथ रखना राजनीतिक रूप से संभव था।

★★हाँ, इसका संबंध विपक्षी दलों की प्रकृति से भी था:

  • वामपंथी विपक्ष (CPI, सोशलिस्ट पार्टी) को साधने के लिए कांग्रेस को समाजवादी भाषा चाहिए थी — वरना वे उसका वाम-आधार खींच लेते।
  • दक्षिणपंथी विपक्ष (स्वतंत्र पार्टी) को साधने के लिए निजी निवेश के लिए जगह ज़रूरी थी।
  • ★यही ‘कांग्रेस प्रणाली’ का तर्क है (अध्याय 2) — कांग्रेस विपक्ष के मुद्दों को अपने भीतर समाहित कर लेती थी, इसलिए विपक्ष कमज़ोर बना रहा। यह अंतर्विरोध कमज़ोरी नहीं, एक राजनीतिक रणनीति भी था।

(ग) क्या कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और उसके प्रांतीय नेताओं के बीच भी कोई अंतर्विरोध था?

★★हाँ — और यह अंतर्विरोध बहुत महत्वपूर्ण था।

स्तरझुकाव
केंद्रीय नेतृत्वसमाजवादी शब्दावली; नियोजन; भारी उद्योग; भूमि-सुधार की घोषणा
! प्रांतीय नेतृत्वप्रांतों में कांग्रेस का आधार बड़े पैमाने पर भूस्वामी और प्रभावशाली कृषक जातियों पर टिका था — जिनके हित भूमि-सुधार से सीधे टकराते थे

★परिणाम:

  • ★★भूमि-सुधार को “देश के विकास की बुनियादी चीज़” माना गया, पर उसका क्रियान्वयन राज्यों को करना था — और वहीं वह कमज़ोर पड़ा। (भूमि राज्य-सूची का विषय है।)
  • ★केंद्र योजना बनाता था, राज्य उसे लागू करते थे — यही केंद्रीकृत नियोजन की सबसे बड़ी व्यावहारिक कमज़ोरी थी, और कार्टून (पृ. 50) ठीक इसी पर व्यंग्य करता है: ‘CENTRALISED PLANNING’ का बाँस लेकर ‘VILLAGE REALITY’ का बार पार करने की कोशिश।
  • उड़ीसा का उदाहरण भी यही दिखाता है — राज्य सरकार का हित (निवेश और रोज़गार) और केंद्र सरकार का हित (राष्ट्रीय स्तर पर बुरी मिसाल न बने) — दोनों अलग हैं।

निष्कर्ष: कांग्रेस के भीतर तीन स्तरों पर अंतर्विरोध थे — विचारधारा बनाम नीति, पार्टी बनाम सरकार, और केंद्र बनाम प्रांत। यही कारण है कि ‘नियोजित विकास’ काग़ज़ पर जितना सुसंगत दिखता है, ज़मीन पर उतना नहीं था।

खंड ख — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)

1अध्याय 3 किस चुनौती पर है?

उत्तर देखिए

आर्थिक विकास की चुनौती (अध्याय 1 = एकता, अध्याय 2 = लोकतंत्र)

2उड़ीसा में किस खनिज का विशाल भंडार है?

उत्तर देखिए

लौह-अयस्क

3★उड़ीसा के लौह-अयस्क भंडार किन इलाकों में हैं?

उत्तर देखिए

सर्वाधिक अविकसित इलाकों में, खासकर आदिवासी-बहुल जिलों में

4★★उड़ीसा के मामले में चार टकराते पक्ष कौन हैं?

उत्तर देखिए

राज्य सरकार · आदिवासी · पर्यावरणविद · केंद्र सरकार

5★अध्याय का शीर्षक-वाक्य क्या है?

उत्तर देखिए

“अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए।”

6पोस्को समाचार किस अख़बार और किस तिथि का है?

उत्तर देखिए

‘द हिंदू’, 23 जून 2006

7पोस्को संयंत्र किस जिले में प्रस्तावित था?

उत्तर देखिए

जगतसिंह जिला

8विरोध किन तीन ग्राम पंचायतों के लोगों ने किया?

उत्तर देखिए

धिंकिया, नुआगाँव और गढ़कुजंगा

9विरोध का आयोजन किन दो संगठनों ने किया?

उत्तर देखिए

राष्ट्रीय युवा संगठन और नवनिर्माण समिति

10★‘वामपंथ’ का अर्थ?

उत्तर देखिए

अर्थव्यवस्था के राज्य नियंत्रण के पक्ष में; मुक्त प्रतिस्पर्धा पर राज्य विनियमन को प्राथमिकता

11★‘दक्षिणपंथ’ का अर्थ?

उत्तर देखिए

खुली प्रतिस्पर्धा और बाज़ारमूलक अर्थव्यवस्था; सरकार का गैरज़रूरी हस्तक्षेप नहीं

12आज़ादी के समय विकास पर दो सहमतियाँ?

उत्तर देखिए

(1) विकास = संवृद्धि + आर्थिक-सामाजिक न्याय (2) सरकार की प्रमुख भूमिका

13★विकास के दो मॉडल कौन-से थे और कहाँ अपनाए गए? — उदारवादी-पूंजीवादी (यूरोप और अमरीका) और
समाजवादी (सोवियत संघ)

14भारत किस मॉडल से प्रभावित था? — सोवियत मॉडल से — “अमरीकी तर्ज़ के पूँजीवादी विकास के पैरोकार बहुत कम थे”

15★★योजना आयोग की स्थापना कब और कैसे हुई?

उत्तर देखिए

मार्च 1950 में, भारत सरकार के एक सीधे-सादे प्रस्ताव के जरिए

16!★क्या योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय है? — नहीं — “संविधान द्वारा स्थापित बाकी आयोगों की तरह नहीं है”; यह सलाहकार है

17योजना आयोग का अध्यक्ष कौन बना?

उत्तर देखिए

प्रधानमंत्री

18योजना आयोग की सिफ़ारिशें कब प्रभावकारी होती हैं?

उत्तर देखिए

जब मंत्रिमंडल उन्हें मंज़ूर करे

19★नीति आयोग कब अस्तित्व में आया और उसका पूरा नाम?

उत्तर देखिए

1 जनवरी 2015; राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था

20★★‘बॉम्बे प्लान’ कब और किसने बनाया?

उत्तर देखिए

1944 में, उद्योगपतियों के एक तबके ने

21‘बॉम्बे प्लान’ की मंशा क्या थी?

उत्तर देखिए

सरकार औद्योगिक तथा अन्य आर्थिक निवेश के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए

22नियोजन के पक्ष में वैश्विक हवा के तीन कारण?

उत्तर देखिए

यूरोप की ‘महामंदी’ का सबक · जापान और जर्मनी का पुनर्निर्माण · सोवियत संघ की 1930-40 के दशक की प्रगति

23★बजट के दो हिस्से कौन-से हैं? — गैरयोजना-व्यय (सालाना, दैनंदिन) और योजना-व्यय (पाँच साल, प्राथमिकताओं के अनुसार)

24प्रथम योजना का प्रारूप कब जारी हुआ?

उत्तर देखिए

1951 में (वास्तविक दस्तावेज़ नवंबर 1951 में)

25प्रथम योजना का परिव्यय कितना था?

उत्तर देखिए

Rs 2,069 करोड़ (समाचारपत्र-शीर्षक के अनुसार)

26प्रथम पंचवर्षीय योजना की अवधि?

उत्तर देखिए

1951–1956

27★प्रथम योजना का मुख्य ज़ोर किस पर था?

उत्तर देखिए

कृषि-क्षेत्र पर (बाँध और सिंचाई)

28★के.एन. राज की दलील क्या थी?

उत्तर देखिए

“अगले दो दशक तक भारत को अपनी चाल ‘धीमी’ रखनी चाहिए”

29प्रथम योजना की विशाल परियोजना का नाम?

उत्तर देखिए

भाखड़ा-नांगल

30★प्रथम योजना में किसे “देश के विकास की बुनियादी चीज़” माना गया?

उत्तर देखिए

भूमि-सुधार

31बचत कब तक बढ़ी और फिर क्या हुआ? — तीसरी योजना तक बढ़ी; 1960 के दशक से 1970 के दशक के शुरुआती सालों तक लगातार कमी

32★★दूसरी योजना का मुख्य ज़ोर?

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भारी उद्योगों का विकास

33★दूसरी योजना किसके नेतृत्व में बनी?

उत्तर देखिए

पी.सी. महालनोबिस

34★पहली और दूसरी योजना के मूलमंत्र?

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पहली — “धीरज”; दूसरी — “तेज़ गति से संरचनात्मक बदलाव”

35दूसरी योजना में देसी उद्योगों को कैसे संरक्षण मिला?

उत्तर देखिए

आयात पर भारी शुल्क लगाकर

36कौन-से उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित हुए?

उत्तर देखिए

बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी और संचार

37★★कृषि का आबंटन पहली से दूसरी योजना में कैसे बदला?

उत्तर देखिए

15.1% से घटकर 11.8%

38★★उद्योग और खनन का आबंटन कैसे बदला?

उत्तर देखिए

7.6% से बढ़कर 18.5%

39सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण का आबंटन?

उत्तर देखिए

17% से घटकर 10.1%

40परिवहन और संचार का आबंटन?

उत्तर देखिए

23.6% से बढ़कर 28.9%

41चौथी योजना का क्या हुआ?

उत्तर देखिए

1966 में चालू होनी थी, पर आर्थिक संकट के कारण स्थगित

42महालनोबिस ने कौन-सी संस्था और कब स्थापित की?

उत्तर देखिए

भारतीय सांख्यिकी संस्थान, 1931

43★‘केरल मॉडल’ किस पर ज़ोर देता है?

उत्तर देखिए

शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि-सुधार, कारगर खाद्य-वितरण और गरीबी-उन्मूलन

44★★केरल मॉडल का विरोधाभास क्या है?

उत्तर देखिए

प्रति व्यक्ति आय कम और औद्योगिक आधार कमज़ोर, फिर भी शत-प्रतिशत साक्षरता और बेहतर स्वास्थ्य-सूचकांक

45केरल का अभियान कब चला और उसका नाम?

उत्तर देखिए

1987–1991; ‘नव लोकतांत्रिक पहल’

46★जे.सी. कुमारप्पा का असली नाम?

उत्तर देखिए

जे.सी. कॉर्नेलियस

47कुमारप्पा की प्रसिद्ध पुस्तक?

उत्तर देखिए

‘इकॉनोमी ऑफ़ परमानेंस’

48कुमारप्पा किसके अनुयायी थे?

उत्तर देखिए

महात्मा गाँधी के

खंड ग — लघु उत्तरीय (2 अंक)

1“विकास एक राजनीतिक सवाल है” — उड़ीसा के उदाहरण से समझाइए।

2उड़ीसा के मामले में चार टकराते हित कौन-से थे?

3“इन सवालों के जवाब कोई विशेषज्ञ नहीं दे सकता” — क्यों?

4पोस्को विवाद का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

5वामपंथ और दक्षिणपंथ में अंतर स्पष्ट कीजिए।

6आज़ादी के समय विकास पर किन दो बातों पर सहमति थी?

7“‘विकास’ से जुड़ी कोई भी ‘चर्चा’ विवादों से परे नहीं होती” — क्यों?

8आज़ादी के बाद के पहले दशक में ‘विकास’ का क्या अर्थ लगाया जाता था?

9विकास के दो मॉडल कौन-से थे? भारत किससे प्रभावित था?

10आज़ादी के आंदोलन के दौरान अर्थव्यवस्था को लेकर कौन-सी तीन बातें तय हो गई थीं?

11! क्या योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय है? स्पष्ट कीजिए।

12योजना आयोग के प्रस्ताव में उद्धृत तीन नीति-निर्देशक तत्व बताइए।

13पृ. 48 का कार्टून किस पर व्यंग्य करता है?

14★‘बॉम्बे प्लान’ क्या था और वह क्यों चौंकाने वाला है?

151940–50 के दशक में नियोजन के पक्ष में हवा क्यों बह रही थी?

16गैरयोजना-व्यय और योजना-व्यय में अंतर बताइए।

17पंचवर्षीय योजना का क्या फ़ायदा बताया गया है?

18चौथी पंचवर्षीय योजना का क्या हुआ और क्यों?

19के.एन. राज की दलील क्या थी?

20प्रथम योजना में भूमि-सुधार पर ज़ोर क्यों दिया गया?

21नियोजन में ‘बचत’ की समस्या क्या थी?

22दूसरी योजना में देसी उद्योगों को कैसे संरक्षण दिया गया?

23दूसरी योजना की तीन समस्याएँ बताइए।

24दूसरी योजना की तीन आलोचनाएँ बताइए।

25★‘केरल मॉडल’ क्या है और उसका विरोधाभास क्या है?

26‘नव लोकतांत्रिक पहल’ के बारे में लिखिए।

27जे.सी. कुमारप्पा पर एक टिप्पणी लिखिए।

28नीति आयोग के बारे में क्या जानते हैं?

खंड घ — दीर्घ उत्तरीय (4 अंक)

1“विकास कोई तकनीकी सवाल नहीं, राजनीतिक सवाल है।” — उड़ीसा के उदाहरण से इस कथन को सिद्ध कीजिए।

2आज़ादी के समय विकास को लेकर सहमतियाँ और मतभेद क्या थे?

3विकास के दो मॉडलों की तुलना कीजिए और बताइए कि भारत ने कौन-सा रास्ता चुना।

4योजना आयोग की प्रकृति, स्थापना और भूमिका का वर्णन कीजिए।

5★‘बॉम्बे प्लान’ क्या था? यह नियोजन पर बनी व्यापक सहमति का प्रमाण कैसे है?

6पंचवर्षीय योजना की अवधारणा और बजट के दो हिस्सों को समझाइए।

7प्रथम पंचवर्षीय योजना की प्राथमिकताओं का वर्णन कीजिए।

8दूसरी पंचवर्षीय योजना पहली से किन अर्थों में भिन्न थी? आँकड़ों सहित उत्तर दीजिए।

9दूसरी योजना की उपलब्धियाँ और सीमाएँ बताइए।

10★‘केरल मॉडल’ विकेंद्रित नियोजन का उदाहरण कैसे है?

11नियोजन की प्रक्रिया में ‘बचत’ की समस्या का विवेचन कीजिए।

12पृ. 48 और पृ. 50 के दो कार्टून केंद्रीकृत नियोजन की क्या आलोचना करते हैं?

खंड ङ — निबंधात्मक (6 अंक)

1“अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए।” — इस कथन का उड़ीसा और पोस्को के उदाहरण से विस्तृत विवेचन कीजिए।

2आज़ादी के बाद भारत ने विकास का जो रास्ता चुना, उसका विवेचन कीजिए। उस चुनाव पर बनी सहमति और उसके मतभेदों का मूल्यांकन कीजिए।

3पहली और दूसरी पंचवर्षीय योजना का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए और बताइए कि दूसरी योजना पर क्या आलोचनाएँ हुईं।

4“चाहे दक्षिणपंथी हों अथवा वामपंथी, उस वक्त सभी चाहते थे कि देश नियोजित अर्थव्यवस्था की राह पर चले।” — इस कथन का परीक्षण कीजिए।

5केंद्रीकृत और विकेंद्रित नियोजन की तुलना कीजिए। ‘केरल मॉडल’ से क्या सीखा जा सकता है?

खंड च — दावा-कारण (CBSE प्रारूप)

निर्देश: (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं (ग) A सही, R गलत (घ) A गलत, R सही

1A: उड़ीसा में विकास के सवाल पर टकराव हुआ।
R: लौह-अयस्क के ज्यादातर भंडार उड़ीसा के सर्वाधिक अविकसित और आदिवासी-बहुल जिलों में हैं।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क)

2A: योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
R: योजना आयोग की स्थापना मार्च 1950 में भारत सरकार के एक प्रस्ताव के जरिए हुई।

उत्तर देखिए

उत्तर: (घ) — ! A गलत है; पाठ स्पष्ट कहता है कि यह “संविधान द्वारा स्थापित बाकी आयोगों अथवा दूसरे निकायों की तरह नहीं है” और यह सलाहकार भूमिका निभाता है।

3A: ‘बॉम्बे प्लान’ नियोजन पर बनी व्यापक सहमति का प्रमाण है।
R: 1944 में उद्योगपतियों के एक तबके ने नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क)

4A: पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य ज़ोर भारी उद्योगों पर था।
R: पहली योजना में बाँध और सिंचाई के क्षेत्र में निवेश किया गया।

उत्तर देखिए

उत्तर: (घ) — ! A गलत है; पहली योजना का ज़ोर कृषि पर था; भारी उद्योग दूसरी योजना का विषय है।

5A: दूसरी योजना में उद्योग और खनन का आबंटन लगभग ढाई गुना बढ़ा।
R: आबंटन 7.6 प्रतिशत से बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो गया।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क)

6A: के.एन. राज तेज़ रफ़्तार विकास के समर्थक थे।
R: के.एन. राज पहली पंचवर्षीय योजना तैयार करने में जुटे विशेषज्ञों में एक थे।

उत्तर देखिए

उत्तर: (घ) — ! A गलत है; उनकी दलील थी कि “अगले दो दशक तक भारत को अपनी चाल ‘धीमी’ रखनी चाहिए।”

7A: केरल में प्रति व्यक्ति आय अधिक होने के कारण साक्षरता शत-प्रतिशत है।
R: केरल मॉडल में शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि-सुधार और गरीबी-उन्मूलन पर ज़ोर दिया गया।

उत्तर देखिए

उत्तर: (घ) — ! A गलत है; ★केरल में प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम है और औद्योगिक आधार भी कमज़ोर — यही उस मॉडल का विरोधाभास है।

8A: चौथी पंचवर्षीय योजना 1966 में सफलतापूर्वक शुरू हुई।
R: 1966 तक नियोजन का नयापन मंद पड़ गया था और भारत गहन आर्थिक संकट की चपेट में आ चुका था।

उत्तर देखिए

उत्तर: (घ) — ! A गलत है; योजना को थोड़ी देर का विराम दे दिया गया।

9A: आज़ादी के समय विकास पर सभी मतभेद सुलझा लिए गए।
R: विकास का अर्थ आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक न्याय — दोनों माना गया।

उत्तर देखिए

उत्तर: (घ) — ! A गलत है; पाठ कहता है — “इनमें से प्रत्येक सवाल पर टकराव हुए जो आज तक जारी हैं।”

10A: भारत में अमरीकी तर्ज़ के पूँजीवादी विकास के पैरोकार बहुत कम थे।
R: उस वक्त हिंदुस्तान में बहुत-से लोग विकास के सोवियत मॉडल से गहरे तौर पर प्रभावित थे।

उत्तर देखिए

उत्तर: (क)

खंड छ — स्रोत-आधारित प्रश्न

स्रोत 1

“खनन, पर्यावरण और अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों की राय जानना महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम निर्णय निश्चित तौर पर राजनीतिक निर्णय होना चाहिए। जन-प्रतिनिधि जनता की भावनाओं को समझते हैं और जन-प्रतिनिधियों को ही ऐसे फ़ैसले लेने चाहिए।”

(क) लेखक के अनुसार अंतिम निर्णय किसका होना चाहिए? (1) (ख) ऐसे फ़ैसलों में किन-किन हितों को तौलना पड़ता है? (2) (ग) उड़ीसा के मामले में चार टकराते हित कौन-से थे? (3)

स्रोत 2

“लेकिन, भारत में ऐसा नहीं हुआ। 1944 में उद्योगपतियों का एक तबका एकजुट हुआ। इस समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया। इसे ‘बॉम्बे प्लान’ कहा जाता है।”

(क) ‘बॉम्बे प्लान’ किस वर्ष और किसने तैयार किया? (1) (ख) “भारत में ऐसा नहीं हुआ” — यहाँ किस सामान्य धारणा का खंडन किया जा रहा है? (2) (ग) इस घटना से नियोजन के बारे में क्या निष्कर्ष निकलता है? (3)

स्रोत 3

“पहली योजना का मूलमंत्र था धीरज, लेकिन दूसरी योजना की कोशिश तेज़ गति से संरचनात्मक बदलाव करने की थी।”

(क) दूसरी पंचवर्षीय योजना किसके नेतृत्व में तैयार हुई? (1) (ख) पहली योजना का मुख्य ज़ोर किस पर था और क्यों? (2) (ग) आबंटन के आँकड़ों से इस बदलाव को सिद्ध कीजिए। (3)

स्रोत 4

“ज़रूरी नहीं कि हर नियोजन केंद्रीकृत ही हो। ऐसा भी नहीं है कि नियोजन का मतलब हमेशा उद्योगों और बड़ी-बड़ी परियोजनाओं से ही लगाया जाए।”

(क) यह अनुच्छेद किस मॉडल की भूमिका है? (1) (ख) इस मॉडल में किन-किन बातों पर ज़ोर दिया गया? (2) (ग) इस मॉडल का विरोधाभास क्या है? उदाहरण सहित समझाइए। (3)