खंड क — NCERT प्रश्नावली (पृ. 79–80) के पूर्ण उत्तर, प्रश्न 1 से 12 खंड ख — 1 अंक (अति लघु) · खंड ग — 2 अंक · खंड घ — 4 अंक · खंड ङ — 6 अंक खंड च — कथन-कारण एवं दावा-कारण (CBSE प्रारूप) · खंड छ — स्रोत-आधारित
प्रश्न 1. निम्नलिखित पदों को उनके अर्थ से मिलाएँ
| पद | सही मिलान | कारण |
|---|---|---|
| (1) विश्वास बहाली के उपाय (CBMs) | (ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा-मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया | पाठ: “सूचनाओं तथा विचारों के नियमित आदान-प्रदान का फैसला” |
| (2) अस्त्र-नियंत्रण | (घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश | पाठ: “हथियारों को विकसित करने अथवा उनको हासिल करने के संबंध में कायदे-कानूनों का पालन” |
| (3) गठबंधन | (ग) सैन्य हमले से निबटने अथवा उसके अपरोध के लिए कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना | पाठ: “सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम” |
| (4) निरस्त्रीकरण | (क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज | पाठ: “कुछ खास किस्म के हथियारों से बाज आयें” |
✓ सही क्रम: 1–ख, 2–घ, 3–ग, 4–क
प्रश्न 2. किसे परंपरागत सरोकार / अपारंपरिक सरोकार / ‘खतरे की स्थिति नहीं’ कहेंगे?
| उपभाग | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| (क) चिकेनगुनिया/डेंगू बुखार का प्रसार | अपारंपरिक सुरक्षा का सरोकार | पाठ महामारी को स्पष्टत: ‘खतरे के नये स्रोतों’ में गिनता है; यह सीमा नहीं मानती और सेना से हल नहीं होती। |
| (ख) पड़ोसी देश से कामगारों की आमद | अपारंपरिक सुरक्षा का सरोकार | यह अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन है — जिससे पाठ के अनुसार “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मतभेद उठ खड़ा हुआ है।” |
| (ग) पड़ोसी राज्य से कामगारों की आमद | ! ‘खतरे की स्थिति नहीं’ | यह एक ही देश के भीतर आवाजाही है — संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार। (ध्यान दें: ‘देश’ और ‘राज्य’ का अंतर ही यहाँ पूरा प्रश्न है।) |
| (घ) अपने इलाके को राष्ट्र बनाने की माँग करने वाले समूह का उदय | परंपरागत सुरक्षा का सरोकार (आंतरिक) | यह अलगाववाद है और सीधे क्षेत्रीय अखंडता को छूता है — पाठ इसे ‘आंतरिक सुरक्षा’ के अंतर्गत रखता है। |
| (ङ) अधिक स्वायत्तता की माँग करने वाले समूह का उदय | ! ‘खतरे की स्थिति नहीं’ | स्वायत्तता की माँग अलगाव नहीं है — यह संघीय लोकतंत्र की सामान्य राजनीति है, और पाठ के अनुसार लोकतंत्र ऐसी शिकायतों को खुलकर रखने का मौका देता है। |
| (च) सशस्त्र सेना को आलोचनात्मक नज़र से देखने वाला अखबार | ! ‘खतरे की स्थिति नहीं’ | यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है — पाठ के पहले ही पैराग्राफ के अनुसार “लोकतंत्र में कोई भी बात इतनी ढँकी-छुपी नहीं रखी जा सकती।” |
★चेतावनी: (ख) और (ग) का भेद ही इस प्रश्न का असली बिंदु है — ‘देश’ बनाम ‘राज्य’। इसी तरह (घ) और (ङ) का भेद — अलगाव बनाम स्वायत्तता। दोनों जोड़े जान-बूझकर रखे गए हैं।
प्रश्न 3. परंपरागत और अपारंपरिक सुरक्षा में क्या अंतर है? गठबंधनों का निर्माण किस कोटि में आता है?
भाग 1 — अंतर
| कसौटी | परंपरागत सुरक्षा | अपारंपरिक सुरक्षा |
|---|---|---|
| संदर्भी (किसकी सुरक्षा) | राज्य — “भूक्षेत्र और संस्थाओं सहित” | व्यक्ति, समुदाय और समूची मानवता |
| खतरे की प्रकृति | सैन्य खतरा — “सबसे ज्यादा ख़तरनाक” | व्यापक खतरे — आतंकवाद, मानवाधिकार-हनन, वैश्विक निर्धनता, प्रवासन, महामारी, तापवृद्धि |
| खतरे का स्रोत | कोई दूसरा मुल्क | सीमा नहीं मानता — भीतर, बाहर, और वैश्विक |
| खतरे में पड़ने वाले मूल्य | संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता | जीवन, आजीविका, गरिमा — ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ |
| उपाय | अपरोध, रक्षा, शक्ति-संतुलन, गठबंधन; निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण, CBMs | सहयोग — द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, महादेशीय, वैश्विक; बल केवल अंतिम उपाय, सामूहिक स्वीकृति से |
| मूल मान्यता | “सैन्य बल से सुरक्षा को खतरा पहुँचता है और सैन्य बल से ही सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है।” | “सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।” |
भाग 2 — गठबंधन किस कोटि में?
★गठबंधन-निर्माण स्पष्ट रूप से परंपरागत सुरक्षा की कोटि में आता है। कारण —
- इसका उद्देश्य पाठ के शब्दों में “सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम” उठाना है;
- इसमें खतरे का स्रोत एक दूसरा राज्य माना जाता है और “यह बात बिलकुल स्पष्ट रहती है कि खतरा किससे है”;
- इसका संदर्भी राज्य है, व्यक्ति नहीं; और यह शक्ति-संतुलन की तर्क-पद्धति पर चलता है।
प्रश्न 4. तीसरी दुनिया के देशों और विकसित देशों की जनता के सामने मौजूद खतरों में क्या अंतर है?
(क) विकसित देशों के सामने
- 1945 के बाद ये देश अपनी अंदरूनी सुरक्षा के प्रति कमोबेश आश्वस्त थे — अमरीका और सोवियत संघ “अपनी सीमा के अंदर एकीकृत और शांति संपन्न” थे; पश्चिमी यूरोप को “अपनी सीमा के भीतर बसे समुदायों अथवा वर्गों से कोई गंभीर खतरा नहीं” था।
- इसलिए इनका पूरा ध्यान सीमापार के खतरों पर रहा — मुख्यत: शीतयुद्ध के दूसरे गुट से सैन्य हमले का भय।
- कुछ यूरोपीय देशों को अपने उपनिवेशों में खून-खराबे की चिंता थी — फ्रांस को वियतनाम में (1950 का दशक) और ब्रिटेन को केन्या में (1950 तथा 1960 के दशक)।
(ख) तीसरी दुनिया के नव-स्वतंत्र देशों के सामने — दो मायनों में विशिष्ट
1★पड़ोसी देश से सैन्य हमले की आशंका — सीमा रेखा, भूक्षेत्र अथवा आबादी पर नियंत्रण को लेकर।
पाठ के अनुसार ये देश “अमरीका या सोवियत संघ अथवा औपनिवेशिक ताकतों से कहीं ज्यादा अपने पड़ोसी देशों
से आशंकित” थे।
2★अंदरूनी सैन्य-संघर्ष
उत्तर देखिए
अलग राष्ट्र बनाने पर तुले अलगाववादी आंदोलन।
- ★★और तीसरी परत — जब कोई पड़ोसी मुल्क ऐसे आंदोलन को हवा दे, तो दोनों खतरे आपस में जुड़ जाते हैं और दो देशों के बीच तनाव बन जाता है।
(ग) आँकड़े जो यह अंतर सिद्ध करते हैं
- ★“विश्व के सशस्त्र संघर्षों में 95 प्रतिशत अब आंतरिक युद्ध के अंतर्गत हैं।”
- ★“सन् 1946 से 1991 के बीच गृह युद्धों की संख्या में बारहगुनी वृद्धि हुई है — पिछले 200 वर्षों में सबसे लंबी छलांग।”
- “दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जितने युद्ध हुए उसमें एक तिहाई के लिए शीतयुद्ध जिम्मेदार रहा और इनमें से अधिकांश तीसरी दुनिया में हुए।”
(घ) आज के अपारंपरिक खतरों में भी असमानता
- वैश्विक निर्धनता — “सबसे ज्यादा सशस्त्र संघर्ष सहारा मरुस्थल के दक्षिणवर्ती अफ्रीकी देशों में होते हैं; यह इलाका दुनिया का सबसे गरीब इलाका है।”
- महामारी — HIV-एड्स के दो-तिहाई संक्रमित अफ्रीका में; और उपचार वहाँ “कीमत को देखते हुए आकाश-कुसुम”।
- तापवृद्धि — बांग्लादेश का 20%, कमोबेश पूरा मालदीव, थाईलैंड की 50% आबादी — यानी खतरा वैश्विक है, पर चोट असमान।
निष्कर्ष: विकसित देशों के सामने खतरा मुख्यत: बाहरी और सैन्य रहा; तीसरी दुनिया के सामने बाहरी + आंतरिक, और आज सैन्य + अपारंपरिक — दोनों एक साथ।
प्रश्न 5. आतंकवाद परंपरागत खतरे की श्रेणी में आता है या अपरंपरागत?
★★उत्तर: आतंकवाद अपारंपरिक सुरक्षा-खतरे की श्रेणी में आता है। कारण —
1निशाना नागरिक हैं, सेना नहीं। पाठ की परिभाषा — “आतंकवाद का आशय राजनीतिक खून-खराबे से है जो जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है।”
2कर्ता राज्य नहीं है। परंपरागत खतरे में “इस ख़तरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क होता है”; आतंकवाद में
कर्ता गैर-राज्य समूह होते हैं (जैसे अल-कायदा)।
3यह सीमा नहीं मानता। “अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद एक से ज्यादा देशों में व्याप्त है और उसके निशाने पर कई देशों के नागरिक हैं।”
4अकेले सैन्य-बल से हल नहीं होता। पाठ स्वीकार करता है कि “आतंकवाद से लड़ने में भले ही सैन्य-बल की
कोई भूमिका हो”, पर “यहाँ भी सैन्य-बल एक सीमा तक ही कारगर हो सकता है” — इसलिए सहयोगमूलक सुरक्षा
की ज़रूरत पड़ती है।
5पाठ ने इसे स्वयं ‘खतरे के नये स्रोत’ खंड में रखा है — जो पूरी तरह अपारंपरिक धारणा का खंड है।
! संतुलित टिप्पणी (उच्च अंक के लिए): पाठ यह भी दर्ज़ करता है कि “आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है” — पहले भी मध्यपूर्व, यूरोप, लातिनी अमरीका और दक्षिण एशिया में होता रहा है। 11 सितंबर 2001 ने इसे नया नहीं बनाया, बल्कि इसे विश्व-राजनीति के केंद्र में ला दिया।
प्रश्न 6. परंपरागत दृष्टिकोण के हिसाब से खतरा मंडराने पर राष्ट्र के सामने क्या विकल्प होते हैं?
★★पाठ के अनुसार किसी सरकार के पास युद्ध की स्थिति में तीन विकल्प होते हैं —
1आत्मसमर्पण — “दूसरे पक्ष की बात को बिना युद्ध किए मान लेना।”
2अपरोध (Deterrence) — “युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहमकर हमला करने से बाज आये।” — यानी युद्ध शुरू ही न होने देना।
3रक्षा (Defence) — “युद्ध ठन जाय तो अपनी रक्षा करना ताकि हमलावर देश अपने मकसद में कामयाब न हो सके और पीछे हट जाए, अथवा हमलावर को पराजित कर देना।”
उत्तर देखिए
और सबसे महत्वपूर्ण बात, जो अक्सर छूट जाती है ★★
“युद्ध में कोई सरकार भले ही आत्मसमर्पण कर दे लेकिन वह इसे अपने देश की नीति के रूप में कभी नहीं प्रचारित करना चाहेगी।”
इसलिए व्यवहार में सुरक्षा-नीति केवल दो पर बनती है — अपरोध और रक्षा।
इनके अतिरिक्त परंपरागत सुरक्षा-नीति के दो और तत्व हैं —
- शक्ति-संतुलन — पड़ोस की सापेक्ष ताकत को अपने पक्ष में करना;
- गठबंधन — कई देशों का मिलकर समवेत कदम उठाना।
प्रश्न 7. ‘शक्ति-संतुलन’ क्या है? कोई देश इसे कैसे कायम करता है?
(क) अर्थ ★शक्ति-संतुलन परंपरागत सुरक्षा-नीति का वह तत्व है जिसमें कोई देश अपने पड़ोस के देशों की सापेक्ष ताकत को तौलता है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि कोई भी देश इतना ताकतवर न हो जाए कि उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए।
(ख) यह ज़रूरी क्यों है — पाठ का तर्क
- “कोई देश अपने अड़ोस-पड़ोस में देखने पर पाता है कि कुछ मुल्क छोटे हैं तो कुछ बड़े। इससे इशारा मिल जाता है कि भविष्य में किस देश से उसे खतरा हो सकता है।”
- ★★यहाँ इरादा नहीं, क्षमता देखी जाती है — “संभव है कोई पड़ोसी देश यह न कहे कि वह हमले की तैयारी में जुटा है। हमले का कोई प्रकट कारण भी नहीं जान पड़ता। फिर भी यह देखकर कि कोई देश बहुत ताकतवर है यह भांपा जा सकता है कि भविष्य में वह हमलावर हो सकता है।”
(ग) किन देशों के साथ विशेष ज़ोर ★“जो देश नजदीक हों, जिनके साथ अनबन हो या जिन देशों के साथ अतीत में लड़ाई हो चुकी हो।”
(घ) कायम कैसे किया जाता है
1★सैन्य-शक्ति बढ़ाकर — “शक्ति-संतुलन बनाये रखने की यह कवायद ज्यादातर अपनी सैन्य-शक्ति बढ़ाने की होती है।”
2★आर्थिक ताकत बढ़ाकर — क्योंकि “सैन्य-शक्ति का यही आधार है।”
3★प्रौद्योगिकीय क्षमता बढ़ाकर — उसी कारण से।
4गठबंधन बनाकर — कई देश मिलकर किसी एक ताकतवर देश के सामने संतुलन खड़ा करते हैं।
एक पंक्ति में: शक्ति-संतुलन का मतलब है — पड़ोस की ताकत का हिसाब रखना और अपनी सैन्य, आर्थिक तथा प्रौद्योगिकीय क्षमता को उसके अनुपात में बनाए रखना।
प्रश्न 8. सैन्य गठबंधन के क्या उद्देश्य होते हैं? किसी मौजूद गठबंधन का नाम और उसके उद्देश्य बताएँ।
(क) उद्देश्य
1★सैन्य हमले को रोकना (अपरोध) — “सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम।”
2★हमला हो जाने पर सामूहिक रक्षा — सदस्य देश एक-दूसरे की मदद करते हैं।
3★शक्ति-संतुलन अपने पक्ष में करना — कई देश मिलकर किसी ताकतवर प्रतिद्वन्द्वी के सामने संतुलन खड़ा
करते हैं।
4स्पष्टता पैदा करना — “ऐसे गठबंधनों में यह बात बिलकुल स्पष्ट रहती है कि खतरा किससे है।”
5औपचारिक प्रतिबद्धता — “अधिकांश गठबंधनों को लिखित संधि से एक औपचारिक रूप मिलता है।”
(ख) मौजूद गठबंधन का उदाहरण — नाटो (NATO)
- पूरा नाम: उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization)
- उद्देश्य: सामूहिक रक्षा — किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है; तथा यूरो-अटलांटिक क्षेत्र में अपरोध और स्थिरता बनाए रखना।
- यह गठबंधन के सारे लक्षण पूरे करता है — लिखित संधि, सामूहिक कार्रवाई, और स्पष्ट खतरा (शीतयुद्ध के समय सोवियत गुट)।
(ग) ★★और वह चेतावनी जो उत्तर में ज़रूर लिखिए
“गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं और राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।” उदाहरण: अमरीका ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया, लेकिन 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद उन्हीं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
प्रश्न 9. “पर्यावरण के तेजी से हो रहे नुकसान से देशों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।” क्या आप सहमत हैं?
★हाँ — मैं इस कथन से सहमत हूँ। पाठ के आधार पर पाँच तर्क —
1यह ‘न्यूनतम मानक’ की कसौटी पर खरा उतरता है।
पाठ की शर्त — “अगर किसी मसले से संदर्भी (राज्य अथवा जनसमूह) के अस्तित्व को खतरा हो रहा हो तो उसे
सुरक्षा का मसला कहा जा सकता है — चाहे इस खतरे की प्रकृति कुछ भी हो।” पर्यावरणीय क्षति ठीक यही करती है।
2कुछ देशों के भौतिक अस्तित्व पर सीधा खतरा।
★“अगर समुद्रतल दो मीटर ऊँचा उठता है तो बांग्लादेश का 20 प्रतिशत हिस्सा डूब जाएगा; कमोबेश पूरा
मालदीव सागर में समा जाएगा और थाईलैंड की 50 फीसदी आबादी को खतरा पहुँचेगा।” — पाठ स्वयं मालदीव को
इसका उदाहरण बनाता है।
3यह विस्थापन और शरणार्थी-संकट पैदा करता है।
पाठ शरणार्थी की परिभाषा में “प्राकृतिक आपदा” को स्पष्टत: शामिल करता है। पर्यावरणीय आपदा सीधे
अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी-प्रवाह बनाती है, जिससे “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक मतभेद उठ खड़ा” होते
हैं।
4संसाधनों पर संघर्ष का कारण बनता है।
घटते प्राकृतिक संसाधन देशों और समुदायों के बीच टकराव बढ़ाते हैं — पाठ्यपुस्तक की ‘आओ मिलजुल कर करें’
गतिविधि (चार गाँव — कोटाबाग, गेवली, कंडली, गोप्पा) ठीक इसी तर्क पर बनी है।
5कोई देश इसे अकेले हल नहीं कर सकता।
★“चूँकि इन समस्याओं की प्रकृति वैश्विक है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो
जाता है।” इसी कारण क्योटो प्रोटोकॉल (1997) बना, जिस पर भारत सहित 160 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं।
उत्तर देखिए
! संतुलित निष्कर्ष पर्यावरणीय क्षति पारंपरिक अर्थ में ‘सैन्य खतरा’ नहीं है — कोई सेना सीमा पार नहीं करती। लेकिन उसका परिणाम वही है — जन-हानि, विस्थापन, और कुछ देशों के लिए अस्तित्व का प्रश्न। इसीलिए यह अपारंपरिक सुरक्षा का एक प्रमुख सरोकार है।
प्रश्न 10. “देशों के सामने मौजूद खतरों में परमाण्विक हथियार का सुरक्षा अथवा अपरोध के लिए बड़ा सीमित उपयोग रह गया है।” विस्तार करें।
★★यह कथन काफी हद तक सही है। कारण —
1आज के अधिकांश खतरे अपारंपरिक हैं, और परमाणु हथियार उन पर लागू ही नहीं होते।
पाठ के ‘खतरे के नये स्रोत’ गिनाइए — आतंकवाद, मानवाधिकार-हनन, वैश्विक निर्धनता, प्रवासन और शरणार्थी,
महामारी, वैश्विक तापवृद्धि। इनमें से किसी के विरुद्ध परमाणु हथियार का कोई अर्थ नहीं।
2अपरोध के लिए एक राज्य-शत्रु चाहिए — जो अक्सर होता ही नहीं।
अपरोध का पूरा तर्क यह है कि दूसरा पक्ष ‘सहमकर हमला करने से बाज आये।’ पर आतंकवादी समूह का कोई
भूक्षेत्र नहीं होता जिस पर जवाबी हमले का डर दिखाया जा सके, और महामारी या तापवृद्धि ‘सहमती’ नहीं।
3पाठ स्वयं कहता है कि सैन्य-बल यहाँ उलटा असर करता है।
★★“ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।” — “गरीबी मिटाने, तेल तथा
बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने, शरणार्थियों की आवाजाही के प्रबंधन तथा महामारी के नियंत्रण में सैन्य-बल
से क्या मदद मिलेगी यह कहना मुश्किल है।”
4आंतरिक संघर्षों में परमाणु हथियार पूरी तरह अप्रासंगिक हैं।
★“विश्व के सशस्त्र संघर्षों में 95 प्रतिशत अब आंतरिक युद्ध के अंतर्गत हैं।” — कोई देश अपने ही
भूक्षेत्र पर परमाणु हथियार का प्रयोग नहीं कर सकता।
5संधि-व्यवस्था ने भी उनका दायरा सीमित किया है।
NPT (1968) ने “इन्हें हासिल कर सकने वाले देशों की संख्या ज़रूर कम की”; ABM (1972) ने
मिसाइल-रक्षा प्रणालियों के व्यापक उत्पादन पर रोक लगाई; SALT II और START ने संख्या घटाई।
उत्तर देखिए
! दूसरा पक्ष — जो उत्तर को पूरा बनाता है परमाणु हथियार पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुए हैं। पाठ स्वयं बताता है कि “दक्षिण एशियाई इलाके में भारत के चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देश हैं” और भारत ने 1998 के फ़ैसलों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के तर्क से उचित ठहराया। यानी राज्य-बनाम-राज्य अपरोध में उनकी भूमिका बनी हुई है — सीमित उनका दायरा हुआ है, समाप्त नहीं।
साइड-टिप्पणी (पृ. 77) भी उद्धृत कीजिए“मुझे यह सुनकर अच्छा लगता है कि मेरे देश के पास परमाण्विक हथियार हैं लेकिन कोई मुझे यह समझाए कि क्या इससे मैं ज्यादा सुरक्षित हो गया हूँ — क्या मेरा परिवार ज्यादा सुरक्षित हो गया है?”
प्रश्न 11. भारतीय परिदृश्य में किस सुरक्षा को वरीयता दी जानी चाहिए — पारंपरिक या अपारंपरिक?
★★संतुलित उत्तर: भारत को दोनों की आवश्यकता है, क्योंकि पाठ स्वयं कहता है — “भारत को पारंपरिक (सैन्य) और अपारंपरिक खतरों का सामना करना पड़ा है। ये खतरे सीमा के अंदर से भी उभरे और बाहर से भी।” भारत की सुरक्षा-नीति के चार घटक ही इसका प्रमाण हैं।
(क) पारंपरिक सुरक्षा को क्यों नहीं छोड़ा जा सकता
- बार-बार हुए हमले — पाकिस्तान: 1947-48, 1965, 1971, 1999; चीन: 1962।
- ★“दक्षिण एशियाई इलाके में भारत के चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देश हैं।”
- इसी तर्क पर भारत ने 1974 में पहला परमाणु परीक्षण और 1998 में परीक्षण के फ़ैसले लिए — सरकार ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का तर्क दिया।
- आंतरिक अलगाववाद — नगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में “इन प्रांतों को भारत से अलगाने की कोशिश।”
(ख) अपारंपरिक सुरक्षा को क्यों वरीयता चाहिए
- वैश्विक निर्धनता — भारत उन छह देशों में है जिनमें विश्व की 50% जनसंख्या-वृद्धि होगी।
- महामारी — HIV-एड्स के संक्रमितों का बड़ा हिस्सा दक्षिण एशिया में।
- तापवृद्धि — भारत क्योटो प्रोटोकॉल (1997) का हस्ताक्षरकर्ता है; और पड़ोसी बांग्लादेश तथा मालदीव पर सीधा अस्तित्व-संकट है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा।
- प्रवासन — कश्मीरी पंडित पाठ में ही ‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ का उदाहरण हैं।
- आतंकवाद — कार्टून में मुंबई 7.11 पाठ्यपुस्तक में ही दर्ज़ है।
(ग) ★★और वह तर्क जो सबसे ऊँचे अंक दिलाता है भारत की सुरक्षा-नीति के तीसरे और चौथे घटक दिखाते हैं कि दोनों धारणाएँ भारत में जुड़ जाती हैं —
- तीसरा घटक: अलगाववाद का उत्तर भारत ने सेना से नहीं, लोकतंत्र से दिया — “यह व्यवस्था विभिन्न समुदाय और जन-समूहों को अपनी शिकायतों को खुलकर रखने और सत्ता में भागीदारी करने का मौका देती है।”
- चौथा घटक: “अर्थव्यवस्था को इस तरह विकसित करने के प्रयास कि बहुसंख्यक नागरिकों को गरीबी और अभाव से निज़ात मिले।”
★★और इसी से अध्याय का अंतिम वाक्य निकलता है — “लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।”
निष्कर्ष: सीमा पर पारंपरिक सुरक्षा अनिवार्य है; पर देश के भीतर स्थायी सुरक्षा अपारंपरिक उपायों — लोकतंत्र, आर्थिक विकास और सहयोग — से ही आती है। भारत की नीति दोनों को साथ रखती है, और यही सही रास्ता है।
प्रश्न 12. कार्टून की व्याख्या — युद्ध और आतंकवाद का संबंध
कार्टून में क्या है: एक विशाल जानवर जिस पर ‘WAR’ लिखा है, और उसके पीछे लगे छोटे-छोटे पिल्ले जिन पर ‘TERRORISM’ लिखा है — यानी आतंकवाद युद्ध की संतान है और उसी से पोषित होता है।
(क) पक्ष में टिप्पणी (यह कार्टून सही कहता है)
- ★पाठ का अपना उदाहरण इसे सिद्ध करता है — “अमरीका ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया”, और वही समूह बाद में 11 सितंबर 2001 के हमले तक पहुँचे। यानी एक युद्ध ने ही उस आतंकवाद को जन्म और प्रशिक्षण दिया जो बाद में उसी पर लौटा।
- युद्ध राज्य-व्यवस्था तोड़ता है, हथियार फैलाता है और आबादी को विस्थापित करता है — पाठ के अनुसार 1990 के दशक की 60 में से 57 शरणार्थी-स्थितियों के मूल में सशस्त्र संघर्ष था। ऐसी टूटी हुई जगहें ही आतंकवादी समूहों की भर्ती-भूमि बनती हैं।
- आँकड़ा भी यही कहता है — 95% सशस्त्र संघर्ष आज आंतरिक हैं, और गृहयुद्ध 1946–91 में बारहगुने हुए। हिंसा हिंसा को बढ़ाती है।
(ख) विपक्ष में टिप्पणी (यह कार्टून अधूरा है)
- यह आतंकवाद की जिम्मेदारी हटा देता है। पाठ की परिभाषा के अनुसार आतंकवाद “जान-बूझकर और बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है” — यह एक स्वतंत्र चुनाव है, किसी युद्ध का स्वत: परिणाम नहीं।
- ! पाठ स्पष्ट कहता है — “आतंकवाद कोई नयी परिघटना नहीं है।” अनेक आतंकवादी आंदोलन बिना किसी युद्ध के भी उभरे हैं।
- कारण-संबंध उलटा भी हो सकता है — कई बार आतंकवादी हमला ही युद्ध का कारण बनता है, जैसा 11 सितंबर के बाद हुआ। कार्टून केवल एक ही दिशा दिखाता है।
(ग) संतुलित निष्कर्ष
कार्टून एक आंशिक सत्य को बहुत प्रभावी ढंग से कहता है — युद्ध आतंकवाद के लिए उपजाऊ ज़मीन बनाता है। पर यह पूरा सत्य नहीं है, क्योंकि यह आतंकवादी समूहों की अपनी नैतिक जिम्मेदारी को छिपा देता है। सही निष्कर्ष यह है कि दोनों एक-दूसरे को खिलाते हैं — और इसीलिए पाठ कहता है कि इनका उत्तर अकेले सैन्य-बल में नहीं, सहयोगमूलक सुरक्षा में है।
खंड ख — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1सुरक्षा का बुनियादी अर्थ क्या है?
उत्तर देखिए
खतरे से आजादी।
2किस कसौटी से तय होता है कि कोई चीज सुरक्षा का विषय है? — जब उससे जीवन के ‘केंद्रीय मूल्यों’ को
खतरा हो और वह खतरा इतना गंभीर हो कि क्षति अपूरणीय हो।
3पारंपरिक सुरक्षा में कौन-से तीन केंद्रीय मूल्य खतरे में होते हैं?
उत्तर देखिए
संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता।
4‘अपरोध’ का अर्थ? — नाश इतना बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहमकर हमला करने से बाज आये।
5‘रक्षा’ का अर्थ? — युद्ध ठन जाने पर उसे सीमित रखना या समाप्त करना, हमलावर को पीछे हटाना या
पराजित करना।
6BWC किस वर्ष हुई और कितने देशों ने हस्ताक्षर किए?
उत्तर देखिए
1972; 155 से ज्यादा।
7CWC किस वर्ष हुई और कितने देशों ने हस्ताक्षर किए?
उत्तर देखिए
1997; 193।
8ABM संधि किस वर्ष हुई?
उत्तर देखिए
1972।
9NPT किस वर्ष हुई?
उत्तर देखिए
1968।
10★NPT में कौन-सा वर्ष विभाजन-रेखा है?
उत्तर देखिए
1967।
11SALT II और START का पूरा अर्थ? — सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि-2 और सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि।
12आज विश्व के कितने प्रतिशत सशस्त्र संघर्ष आंतरिक हैं?
उत्तर देखिए
95 प्रतिशत।
131946 से 1991 के बीच गृहयुद्धों में कितनी वृद्धि हुई? — बारहगुनी — 200 वर्षों की सबसे लंबी छलांग।
14दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कितने युद्धों के लिए शीतयुद्ध जिम्मेदार रहा?
उत्तर देखिए
एक तिहाई।
15अपारंपरिक सुरक्षा के दो नाम?
उत्तर देखिए
‘मानवता की सुरक्षा’ और ‘विश्व-रक्षा’ (विश्व सुरक्षा)।
16‘मानवता की सुरक्षा’ के व्यापकतम अर्थ के दो सूत्र?
उत्तर देखिए
‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’।
17मानवता की सुरक्षा के संकीर्ण अर्थ का समर्थन किसने किया?
उत्तर देखिए
कोफ़ी अन्नान।
18विश्व सुरक्षा की धारणा कब उभरी?
उत्तर देखिए
1990 के दशक में।
19समुद्रतल 2 मीटर उठने पर बांग्लादेश का कितना हिस्सा डूबेगा?
उत्तर देखिए
20 प्रतिशत।
20थाईलैंड की कितनी आबादी को खतरा होगा?
उत्तर देखिए
50 फीसदी।
21आतंकवाद की परिभाषा एक पंक्ति में।
उत्तर देखिए
राजनीतिक खून-खराबा जो जान-बूझकर नागरिकों को निशाना बनाता है।
22मानवाधिकारों की तीन कोटियाँ?
उत्तर देखिए
राजनीतिक अधिकार; आर्थिक-सामाजिक अधिकार; उपनिवेशीकृत जनता तथा जातीय व मूलवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार।
23किन तीन घटनाओं से हस्तक्षेप की बहस चली?
उत्तर देखिए
रवांडा में जनसंहार, कुवैत पर इराक का हमला, पूर्वी तिमूर में इंडोनेशियाई सेना का रक्तपात।
24विश्व की जनसंख्या अभी और 21वीं सदी के मध्य तक?
उत्तर देखिए
760 करोड़ → 1000 करोड़।
25★किन छह देशों में विश्व की 50% जनसंख्या-वृद्धि होगी?
उत्तर देखिए
भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया।
26आप्रवासी और शरणार्थी में मूल अंतर?
उत्तर देखिए
आप्रवासी अपनी मर्जी से; शरणार्थी मज़बूरी से।
27‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ कौन हैं? — जो घर छोड़ चुके हैं पर राष्ट्रीय सीमा के भीतर ही हैं।
28इसका भारतीय उदाहरण?
उत्तर देखिए
1990 के दशक में कश्मीर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित।
291990–95 में कितने युद्ध और कितनी मौतें?
उत्तर देखिए
70 देशों के बीच 93 युद्ध; लगभग साढ़े 55 लाख मौतें।
302017 में सबसे ज्यादा शरणार्थियों को किसने शरण दी?
उत्तर देखिए
अफ्रीका — 30%।
312003 तक कितने लोग HIV-एड्स से संक्रमित थे? — 4 करोड़ — दो-तिहाई अफ्रीका में।
32बोस्तवाना में कितने लोग HIV-एड्स पीड़ित हैं?
उत्तर देखिए
हर 3 में से 1।
331994 में रवांडा में कितने तुत्सी मारे गए? — लगभग 5 लाख, कुछ ही हफ्तों में।
34सहयोगमूलक सुरक्षा में बल-प्रयोग की शर्त?
उत्तर देखिए
अंतिम उपाय के रूप में, और सामूहिक स्वीकृति से।
35भारत ने पहला परमाणु परीक्षण कब किया?
उत्तर देखिए
1974।
36भारत की सुरक्षा-नीति के चार घटक?
उत्तर देखिए
सैन्य-क्षमता; अंतर्राष्ट्रीय कायदे-संस्थाएँ; आंतरिक सुरक्षा; आर्थिक विकास।
37क्योटो प्रोटोकॉल किस वर्ष और भारत सहित कितने देश?
उत्तर देखिए
1997; 160 देश।
38किन चार क्षेत्रों में अलगाववादी कोशिशें हुईं?
उत्तर देखिए
नगालैंड, मिजोरम, पंजाब और कश्मीर।
39इस अध्याय का अंतिम निष्कर्ष एक वाक्य में?
उत्तर देखिए
“लोकतंत्र सिर्फ राजनीतिक आदर्श नहीं है; लोकतांत्रिक शासन जनता को ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने का साधन भी है।”
40यह अध्याय पहले कौन-सा था? — अध्याय 7 (QR कोड 12108CH07)।
खंड ग — लघु उत्तरीय (2 अंक)
1सुरक्षा को ‘विवादग्रस्त धारणा’ क्यों कहा गया है?
2‘केंद्रीय मूल्य’ की कसौटी पर पाठ स्वयं क्या सवाल उठाता है?
3पारंपरिक सुरक्षा में खतरे का स्रोत बाहर क्यों माना जाता है?
4अपरोध और रक्षा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
5‘शक्ति-संतुलन’ में इरादे की जगह क्षमता क्यों देखी जाती है?
6“राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं” — उदाहरण सहित समझाइए।
7‘न्याय-युद्ध’ की परंपरा युद्ध के साधनों पर क्या सीमाएँ लगाती है?
8निरस्त्रीकरण और अस्त्र-नियंत्रण में अंतर बताइए।
9महाशक्तियों ने निरस्त्रीकरण के बजाय अस्त्र-नियंत्रण क्यों चुना?
10NPT में 1967 का क्या महत्व है?
11विश्वास बहाली के उपायों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
12“सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता” — व्याख्या कीजिए।
13‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ में अंतर बताइए।
14विश्व सुरक्षा की धारणा क्यों उभरी?
15आतंकवाद की परिभाषा दीजिए और बताइए कि यह अपारंपरिक खतरा क्यों है।
16मानवाधिकारों की तीन कोटियाँ कौन-सी हैं?
17वैश्विक निर्धनता का चक्र कैसे चलता है?
18आप्रवासी, शरणार्थी और आंतरिक विस्थापित में भेद कीजिए।
19“शरणार्थी-मानचित्र संघर्ष-मानचित्र से मेल खाता है” — समझाइए।
20महामारियाँ राष्ट्रीय सीमाओं के बारे में क्या बताती हैं?
21कोई मसला ‘सुरक्षा का मसला’ कब कहलाता है — ‘न्यूनतम मानक’ क्या है?
22सहयोगमूलक सुरक्षा में बल-प्रयोग की क्या शर्तें हैं?
23भारत की सुरक्षा-नीति के पहले घटक को उदाहरण सहित बताइए।
24भारत ने अप्रसार के संबंध में कैसी नीति की माँग की?
25भारत का चौथा सुरक्षा-घटक लोकतंत्र से कैसे जुड़ता है?
खंड घ — दीर्घ उत्तरीय (4 अंक)
1“सुरक्षा का बुनियादी अर्थ खतरे से आजादी है” — इस परिभाषा की सीमाएँ और उसमें जोड़ी गई दो शर्तें समझाइए।
2पारंपरिक सुरक्षा के चार तत्वों — तीन विकल्प, शक्ति-संतुलन और गठबंधन — का विवेचन कीजिए।
3“विश्व-राजनीति में हर देश को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है” — इस कथन का आधार समझाइए।
4नव-स्वतंत्र देशों की सुरक्षा-चुनौतियाँ यूरोपीय देशों से किन दो मायनों में विशिष्ट थीं?
5सुरक्षा के तीन पारंपरिक तरीकों की तुलना कीजिए और चारों संधियों को उनके सही खाने में रखिए।
6NPT का मूल्यांकन कीजिए — इसने क्या किया और क्या नहीं?
7मानवता की सुरक्षा के तीन अर्थों (संकीर्ण, व्यापक, व्यापकतम) का विवेचन कीजिए।
8‘खतरे के नये स्रोतों’ में से किन्हीं तीन का विस्तार से वर्णन कीजिए।
9वैश्विक निर्धनता किस प्रकार सुरक्षा का मसला बन जाती है?
10आप्रवासी, शरणार्थी और आंतरिक विस्थापित जन में भेद कीजिए और प्रत्येक का उदाहरण दीजिए।
11“सुरक्षा की धारणा में विस्तार की भी एक सीमा है” — ‘न्यूनतम मानक’ की कसौटी को उदाहरणों सहित समझाइए।
12सहयोगमूलक सुरक्षा क्यों आवश्यक है? इसमें कौन-कौन शामिल होते हैं?
13भारत की सुरक्षा-नीति के चार घटकों का वर्णन कीजिए।
14“लोकतंत्र स्वयं एक सुरक्षा-साधन है” — भारत के संदर्भ में इस कथन को सिद्ध कीजिए।
खंड ङ — निबंधात्मक (6 अंक)
1पारंपरिक और अपारंपरिक सुरक्षा की तुलना कीजिए — संदर्भी, खतरे और तरीकों के आधार पर। दोनों में से किसकी प्रासंगिकता आज अधिक है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
2“सैन्य बल से सुरक्षा को खतरा पहुँचता है और सैन्य बल से ही सुरक्षा को कायम रखा जा सकता है” — इस पारंपरिक मान्यता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
3‘खतरे के नये स्रोत’ — आतंकवाद, मानवाधिकार, वैश्विक निर्धनता, प्रवासन और महामारी — का विस्तृत विवेचन कीजिए और बताइए कि ये पारंपरिक धारणा को क्यों अपर्याप्त बना देते हैं।
4“मानवता की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए और अक्सर होते भी हैं। लेकिन सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता।” — इस कथन की व्याख्या कीजिए।
5भारत ने पारंपरिक और अपारंपरिक — दोनों प्रकार के खतरों का सामना कैसे किया है? उसकी सुरक्षा-रणनीति के चारों घटकों का मूल्यांकन कीजिए।
6निरस्त्रीकरण, अस्त्र-नियंत्रण और विश्वास बहाली — तीनों तरीकों का विवेचन कीजिए तथा BWC, CWC, ABM और NPT के माध्यम से उनकी उपलब्धियों और सीमाओं का आकलन कीजिए।
खंड च — कथन एवं दावा-कारण (CBSE प्रारूप)
निर्देश: नीचे दावा (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है (ख) A और R दोनों सही हैं परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है (ग) A सही है परंतु R गलत है (घ) A गलत है परंतु R सही है
1A: पारंपरिक सुरक्षा में खतरे का स्रोत सामान्यत: कोई दूसरा देश माना जाता है।
R: विश्व-राजनीति में कोई ऐसी केंद्रीय सत्ता नहीं जो सब देशों के ऊपर हो।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
2A: सुरक्षा-नीति व्यवहार में केवल अपरोध और रक्षा पर बनती है।
R: कोई सरकार आत्मसमर्पण को अपने देश की नीति के रूप में प्रचारित नहीं करना चाहेगी।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
3A: महाशक्तियों ने परमाणु हथियारों के मामले में निरस्त्रीकरण के बजाय अस्त्र-नियंत्रण चुना।
R: वे सामूहिक संहार के अस्त्रों का विकल्प नहीं छोड़ना चाहती थीं।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
4A: NPT ने परमाणु हथियारों को समाप्त कर दिया।
R: NPT ने 1967 से पहले परीक्षण कर चुके देशों को हथियार रखने की अनुमति दी।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — A गलत है; NPT ने “समाप्त तो नहीं किया लेकिन हासिल कर सकने वाले देशों की संख्या ज़रूर कम की।”
5A: कश्मीरी पंडित शरणार्थी कहलाते हैं।
R: शरणार्थी वे हैं जो युद्ध, आपदा या राजनीतिक उत्पीड़न के कारण स्वदेश छोड़ने पर मज़बूर होते हैं।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — A गलत है; वे ‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ हैं क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय सीमा पार नहीं की।
6A: अपारंपरिक सुरक्षा में हर कष्ट और बीमारी को शामिल किया जा सकता है।
R: सुरक्षा की धारणा का दायरा 1990 के दशक में बढ़ा।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — A गलत है; ऐसा करने पर “सुरक्षा की धारणा में संगति नहीं रह जाती”; इसीलिए ‘न्यूनतम मानक’ की कसौटी है।
7A: आतंकवाद अपारंपरिक सुरक्षा-खतरा है।
R: आतंकवाद जान-बूझकर नागरिकों को निशाना बनाता है और एक से ज्यादा देशों में व्याप्त होता है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
8A: भारत की सुरक्षा-नीति का एक घटक लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाए रखना है।
R: लोकतंत्र विभिन्न समुदायों को शिकायतें रखने और सत्ता में भागीदारी का मौका देता है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
9A: गठबंधन स्थायी होते हैं।
R: गठबंधनों को लिखित संधि से औपचारिक रूप मिलता है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — A गलत है; “राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।”
10A: वैश्विक तापवृद्धि का असर सब देशों पर एक-सा नहीं पड़ता।
R: समुद्रतल 2 मीटर उठने पर बांग्लादेश का 20% डूबेगा और कमोबेश पूरा मालदीव सागर में समा जाएगा।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
खंड छ — स्रोत-आधारित प्रश्न
स्रोत 1
“मानवता की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए और अक्सर होते भी हैं। लेकिन सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता। सच्चाई यह है कि पिछले 100 वर्षों में जितने लोग विदेशी सेना के हाथों मारे गए उससे कहीं ज्यादा लोग खुद अपनी ही सरकारों के हाथों खेत रहे।”
(क) यह अनुच्छेद सुरक्षा की किस धारणा से संबंधित है? (1) (ख) “सुरक्षित राज्य का मतलब हमेशा सुरक्षित जनता नहीं होता” — इसका क्या आशय है? (2) (ग) इस धारणा में ‘संदर्भी’ कौन होता है और यह पारंपरिक धारणा से कैसे भिन्न है? (3)
स्रोत 2
“आतंकवाद से लड़ने अथवा मानवाधिकारों को बहाल करने में भले ही सैन्य-बल की कोई भूमिका हो लेकिन गरीबी मिटाने, तेल तथा बहुमूल्य धातुओं की आपूर्ति बढ़ाने, आप्रवासियों और शरणार्थियों की आवाजाही के प्रबंधन तथा महामारी के नियंत्रण में सैन्य-बल से क्या मदद मिलेगी यह कहना मुश्किल है। वस्तुत: ऐसे अधिकांश मसलों में सैन्य-बल के प्रयोग से मामला और बिगड़ेगा।”
(क) यह अनुच्छेद किस प्रकार की सुरक्षा की वकालत करता है? (1) (ख) इसमें गिनाए गए किन्हीं दो ऐसे मसलों के नाम लिखिए जिन पर सैन्य-बल कारगर नहीं। (2) (ग) इस प्रकार की सुरक्षा में कौन-कौन-सी संस्थाएँ और व्यक्ति शामिल हो सकते हैं? (3)
स्रोत 3
“विश्व के सशस्त्र संघर्षों में 95 प्रतिशत अब आंतरिक युद्ध के अंतर्गत हैं। सन् 1946 से 1991 के बीच गृह युद्धों की संख्या में बारहगुनी वृद्धि हुई है जो पिछले 200 वर्षों में सबसे लंबी छलांग है।”
(क) आज विश्व के कितने प्रतिशत सशस्त्र संघर्ष आंतरिक हैं? (1) (ख) यह आँकड़ा पारंपरिक सुरक्षा-धारणा की किस सीमा को उजागर करता है? (2) (ग) नव-स्वतंत्र देशों के सामने कौन-सी दो विशिष्ट सुरक्षा-चुनौतियाँ थीं? (3)
स्रोत 4
“अगर किसी मसले से संदर्भी (राज्य अथवा जनसमूह) के अस्तित्व को खतरा हो रहा हो तो उसे सुरक्षा का मसला कहा जा सकता है चाहे इस खतरे की प्रकृति कुछ भी हो।”
(क) इस कसौटी को क्या कहा गया है? (1) (ख) ऐसी कसौटी की आवश्यकता क्यों पड़ी? (2) (ग) पाठ में दिए गए इस कसौटी के कोई तीन उदाहरण लिखिए। (3)