खंड A — पाठ्यपुस्तक की प्रश्नावली, पूर्ण उत्तर सहित (पृ. 13–14) खंड B — अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न, परीक्षा-प्रारूप के अनुसार
ध्यान दें: पाठ्यपुस्तक में कोई उत्तर-कुंजी मुद्रित नहीं है। नीचे के सभी उत्तर पाठ्यपुस्तक के पाठ से शिक्षक द्वारा तैयार किए गए हैं और पृष्ठ-संदर्भ सहित दिए गए हैं।
खंड A — पाठ्यपुस्तक प्रश्नावली (पृ. 13–14)
प्रश्न 1. सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ग़लत है?
(क) सोवियत अर्थव्यवस्था में समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी। (ख) उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व/नियंत्रण होना। (ग) जनता को आर्थिक आज़ादी थी। (घ) अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियंत्रण राज्य करता था।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ग) जनता को आर्थिक आज़ादी थी।
कारण: सोवियत अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियंत्रण में थी (पृ. 2)। मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व था और ज़मीन तथा उत्पादक संपदा पर राज्य का स्वामित्व और नियंत्रण था। इसलिए आर्थिक आज़ादी का कथन ग़लत है। शेष तीनों कथन सही हैं।
प्रश्न 2. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएँ?
(क) अफ़ग़ान-संकट (ख) बर्लिन-दीवार का गिरना (ग) सोवियत संघ का विघटन (घ) रूसी क्रांति
उत्तर देखिए
उत्तर —
क्रम घटना वर्ष 1 (घ) रूसी क्रांति 1917 2 (क) अफ़ग़ान-संकट 1979 3 (ख) बर्लिन-दीवार का गिरना 9 नवंबर 1989 4 (ग) सोवियत संघ का विघटन 25 दिसंबर 1991 अतः सही क्रम — (घ), (क), (ख), (ग)।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में कौन-सा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है?
(क) संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संघ के बीच विचारधारात्मक लड़ाई का अंत (ख) स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) का जन्म (ग) विश्व-व्यवस्था के शक्ति-संतुलन में बदलाव (घ) मध्यपूर्व में संकट
उत्तर देखिए
उत्तर — (घ) मध्यपूर्व में संकट।
कारण: (क), (ख) और (ग) — तीनों को पाठ्यपुस्तक ने विघटन की सीधी परिणतियों के रूप में गिनाया है (पृ. 7–8): विचारधारात्मक विवाद का अंत, राष्ट्रकुल का गठन (दिसंबर 1991) और शक्ति-संबंधों में बदलाव जिससे अमरीका अकेली महाशक्ति बना। मध्यपूर्व का संकट सोवियत विघटन का परिणाम नहीं है — उसके अपने अलग कारण हैं।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में मेल बैठाएँ
उत्तर देखिए
उत्तर —
मेल (1) मिख़ाइल गोर्बाचेव (ग) सुधारों की शुरुआत (2) शॉक थेरेपी (घ) आर्थिक मॉडल (3) रूस (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी (4) बोरिस येल्तसिन (ङ) रूस के राष्ट्रपति (5) वारसॉ (ख) सैन्य समझौता संक्षेप में — 1-ग, 2-घ, 3-क, 4-ङ, 5-ख।
प्रश्न 5. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
उत्तर देखिए
उत्तर —
वाक्य उत्तर (क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली ______ की विचारधारा पर आधारित थी। समाजवाद / साम्यवाद (ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंधन ______ था। वारसा समझौता (ग) ______ पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था। कम्युनिस्ट (घ) ______ ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की। मिख़ाइल गोर्बाचेव (ङ) ______ का गिरना शीतयुद्ध के अंत का प्रतीक था। बर्लिन की दीवार ! शिक्षक के लिए नोट (ख): यह अध्याय ‘वारसा समझौता’ शब्द को परिभाषित नहीं करता — वह केवल घटना-चक्र (पृ. 6) में “अक्तूबर 1989 — ‘वारसा समझौते’ के सदस्य अपना भविष्य तय करने को स्वतंत्र” के रूप में आता है। इसकी परिभाषा उस अध्याय में थी जो पाठ्यक्रम युक्तिकरण में हटा दिया गया। विद्यार्थियों को यह अलग से बताना अनिवार्य है — देखिए
10-Verification-Log.md।वारसा समझौता क्या था — 1955 में सोवियत संघ के नेतृत्व में बना सैन्य गठबंधन, जो नाटो के जवाब में खड़ा किया गया था और जिसमें पूर्वी यूरोप के समाजवादी देश शामिल थे। 1991 में भंग हुआ।
प्रश्न 6. सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमरीका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र करें।(4 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
(1) स्वामित्व — राज्य बनाम निजी। सोवियत संघ में मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व था; ज़मीन और उत्पादक संपदा पर राज्य का स्वामित्व और नियंत्रण था। पूँजीवादी अमरीका में मिल्कियत का प्रभावी रूप निजी स्वामित्व है। (पृ. 2, 9)
(2) नियोजन बनाम बाज़ार। सोवियत अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध थी और उस पर राज्य का नियंत्रण था — अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियंत्रण राज्य करता था। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन, मूल्य और वितरण मुख्यतः बाज़ार और मुक्त व्यापार से तय होते हैं। (पृ. 2)
(3) राज्य द्वारा सुनिश्चित न्यूनतम जीवन स्तर। सोवियत सरकार ने सभी नागरिकों के लिए एक न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित कर दिया था और स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखभाल तथा अन्य लोक-कल्याणकारी सुविधाएँ रियायती दर पर उपलब्ध थीं। बेरोज़गारी नहीं थी। पूँजीवादी व्यवस्था में ये सेवाएँ मुख्यतः बाज़ार से खरीदनी पड़ती हैं। (पृ. 2)
अतिरिक्त बिंदु (यदि और चाहिए): सोवियत संघ में कोई निजी उद्यमी वर्ग या प्रतिस्पर्धा नहीं थी और विदेशी व्यापार सीमित था — सोवियत खेमे के देश आपस में व्यापार करते थे; शॉक थेरेपी में इन्हीं गठबंधनों को तोड़कर उन्हें पश्चिमी मुल्कों से जोड़ा गया। (पृ. 9)
प्रश्न 7. किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भूमिका: मार्च 1985 में मिख़ाइल गोर्बाचेव सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने और सुधारों की शृंखला शुरू की — पेरेस्त्रोइका (पुनर्रचना) और ग्लासनोस्त (खुलापन)। इसके पीछे निम्नलिखित कारण थे —
(1) पश्चिम के साथ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना। “सोवियत संघ को पश्चिमी देशों के मुकाबले खड़ा करने के लिए सुधार जरूरी थे।” सूचना और तकनीक के मामले में सोवियत संघ पश्चिम से पिछड़ चुका था।
(2) अर्थव्यवस्था का ठहराव। सोवियत अर्थव्यवस्था गतिरुद्ध हो गई थी, उपभोक्ता-वस्तुओं की बड़ी कमी थी, खाद्यान्न का आयात साल-दर-साल बढ़ रहा था, और 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में व्यवस्था लड़खड़ा रही थी और अंततः ठहर सी गयी थी।
(3) सैन्य-खर्च का असहनीय बोझ। सोवियत संघ ने अपने संसाधन परमाणु हथियारों और सैन्य साजो-सामान के विकास में झोंक दिए, और साथ ही पूर्वी यूरोप के अपने पिछलग्गू देशों को नियंत्रण में रखने पर भी भारी खर्च किया।
(4) अफ़ग़ानिस्तान का हस्तक्षेप (1979)। “सोवियत संघ ने 1979 में अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप किया और इससे यह व्यवस्था और कमज़ोर हुई।”
(5) प्रशासनिक जड़ता, भ्रष्टाचार और जवाबदेही का अभाव। कम्युनिस्ट पार्टी 70 सालों तक शासन में रही और जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थी; भारी भ्रष्टाचार, सुधार के प्रति अनिच्छा, सत्ता का केंद्रीकरण और ‘पार्टी’ अधिकारियों को आम नागरिकों से ज्यादा विशेषाधिकार — व्यवस्था को खोलना आवश्यक हो गया था।
(6) लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की माँग। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं होने के कारण असहमति दबी हुई थी; लोग अपनी असहमति चुटकुलों और कार्टूनों में व्यक्त करते थे। गोर्बाचेव इसे बदलना चाहते थे।
निष्कर्ष: गोर्बाचेव व्यवस्था को सुधारना चाहते थे, तोड़ना नहीं — पर सुधारों से “लोगों की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं का ऐसा ज्वार उमड़ा जिसका अनुमान शायद ही कोई लगा सकता था”, और वही विघटन का रास्ता बना। (पृ. 3–5)
प्रश्न 8. भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
(1) एकध्रुवीय विश्व और अमरीका का दबदबा। “हुआ यह कि अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा।” भारत जैसे देशों के लिए इसका अर्थ था कि अब उन्हें एक ऐसे विश्व में काम करना है जिसमें संतुलन बनाने वाली दूसरी महाशक्ति नहीं रही। (पृ. 7)
(2) पुराने सामरिक साथी का जाना। सोवियत संघ ने कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख का समर्थन किया था और 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मदद की थी; उसने उस वक्त सैनिक साजो-सामान दिया जब शायद ही कोई अन्य देश देने को तैयार था। विघटन के बाद भारत को यह सुरक्षा-कवच पहले जैसा नहीं मिल सका। (पृ. 12)
(3) आर्थिक सहायता और रुपया-व्यापार की समाप्ति। सोवियत संघ ने भिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखानों तथा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स जैसे मशीनरी संयंत्रों को आर्थिक और तकनीकी सहायता दी थी, और विदेशी मुद्रा की कमी के समय रुपये को माध्यम बनाकर व्यापार करने दिया था — यह व्यवस्था समाप्त हुई। (पृ. 12)
(4) पूँजीवादी अर्थतंत्र और उदारवादी लोकतंत्र का प्रभुत्व। “पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की प्रभुत्वशाली आर्थिक प्रणाली बन गई”, और विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ताकतवर सलाहकार बन गईं। उदारवादी लोकतंत्र राजनीतिक जीवन को संगठित करने की सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा। भारत को अपनी आर्थिक नीति इसी माहौल में तय करनी पड़ी। (पृ. 7–8)
(5) नए देशों के साथ नए अवसर। मध्य एशियाई गणराज्य — जो हाइड्रोकार्बनिक संसाधनों से भरपूर हैं — स्वतंत्र हुए। भारत ने वहाँ से ऊर्जा-आयात बढ़ाने की कोशिश की और कज़ाकिस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाए। (पृ. 11, 13)
(6) रूस के साथ रिश्तों का नया आधार। भारत और रूस बहुध्रुवीय विश्व के साझा सपने पर सहमत हैं; 2001 के भारत-रूस सामरिक समझौते के अंग के रूप में 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर हुए। भारत को कश्मीर, ऊर्जा-आपूर्ति, आतंकवाद की सूचनाएँ, पश्चिम एशिया तक पहुँच और चीन से संबंधों में संतुलन — इन सबमें रूस से लाभ मिलता है। (पृ. 13)
निष्कर्ष: विघटन भारत के लिए एक साथ एक भरोसेमंद साथी का कमज़ोर पड़ना और एक बदली हुई विश्व-व्यवस्था में नए रास्ते खुलना — दोनों था।
प्रश्न 9. शॉक थेरेपी क्या थी? क्या साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका था?(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर —
भाग 1 — शॉक थेरेपी क्या थी
साम्यवादी शासन के पतन के बाद रूस, मध्य एशिया के गणराज्यों और पूर्वी यूरोप के देशों में पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का एक खास मॉडल अपनाया गया, जिसे ‘शॉक थेरेपी’ यानी ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’ कहा गया। इसे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने निर्देशित किया था। (पृ. 9)
इसके प्रमुख तत्व —
- पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर पूरी तरह मुड़ना और सोवियत दौर की हर संरचना से निजात पाना।
- मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा — इसमें राज्य की संपदा का निजीकरण और व्यावसायिक स्वामित्व के ढाँचे को अपनाना शामिल था।
- सामूहिक ‘फार्म’ को निजी ‘फार्म’ में बदलना और खेती में पूँजीवादी पद्धति अपनाना।
- कोई ‘तीसरा रुख़’ मंज़ूर नहीं — राज्य-नियंत्रित समाजवाद और पूँजीवाद के बीच कोई विकल्प नहीं।
- ‘मुक्त व्यापार’ को पूर्ण रूप से अपनाना, तथा वित्तीय खुलापन और मुद्राओं की परिवर्तनीयता।
- सोवियत खेमे के आपसी व्यापारिक गठबंधन समाप्त करके हर देश को सीधे पश्चिमी मुल्कों से जोड़ना, ताकि वे पश्चिमी अर्थतंत्र में समाहित हो जाएँ।
भाग 2 — क्या यह सबसे बेहतर तरीका था? — नहीं
पाठ्यपुस्तक का निष्कर्ष स्पष्ट है: “1990 में अपनायी गई ‘शॉक थेरेपी’ जनता को उपभोग के उस ‘आनंदलोक’ तक नहीं ले गई जिसका उसने वादा किया था… पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई।” (पृ. 9)
विफलता का प्रमाण तथ्य उद्योगों की बर्बादी राज्य-नियंत्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा; लगभग 90 प्रतिशत उद्योग निजी हाथों में बेचे गए औने-पौने दाम उद्योगों की कीमत जान-बूझकर कम आँकी गई — इसे “इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल” कहा गया अधिकार-पत्र का दुरुपयोग नागरिकों को दिए गए अधिकार-पत्र अधिकांश ने कालाबाजारियों को बेच दिए मुद्रा का पतन रूबल के मूल्य में नाटकीय गिरावट; मुद्रास्फीति से जमापूँजी जाती रही खाद्य असुरक्षा सामूहिक खेती समाप्त होने से खाद्यान्न की सुरक्षा नहीं रही; रूस को खाद्यान्न आयात करना पड़ा आर्थिक संकुचन 1999 का वास्तविक GDP 1989 की तुलना में कहीं नीचे बैंकिंग संकट डेढ़ हज़ार बैंकों-संस्थानों में लगभग आधे दिवालिया; इंकॉम बैंक के डूबने से दस हज़ार कंपनियाँ और शेयरधारक भी डूबे सामाजिक विनाश समाज कल्याण की व्यवस्था नष्ट; ज्यादातर लोग ग़रीबी में; मध्य वर्ग हाशिए पर; अकादमिक-बौद्धिक लोग बिखर गए या बाहर चले गए अपराध का उभार ‘माफिया वर्ग’ उभरा और उसने अधिकतर आर्थिक गतिविधियों पर नियंत्रण कर लिया विषमता निजीकरण ने नई विषमताओं को जन्म दिया; अमीर-गरीब के बीच तीखा विभाजन लोकतंत्र की उपेक्षा “आर्थिक बदलाव को बड़ी प्राथमिकता दी गई… लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका।” संविधान हड़बड़ी में बने; संसद कमजोर; न्यायपालिका की स्वतंत्रता अभी भी बाकी बेहतर विकल्प क्या हो सकता था —
- क्रमिक (चरणबद्ध) संक्रमण, ताकि उद्योग और नागरिक समायोजन का समय पाते;
- निजीकरण से पहले सामाजिक सुरक्षा-जाल बनाए रखना;
- आर्थिक सुधार के साथ-साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण, न कि उसके बाद;
- बाहर से थोपे गए एक ही मॉडल के बजाय हर देश की परिस्थिति के अनुरूप रास्ता — यानी वह ‘तीसरा रुख़’ जिसे शॉक थेरेपी ने मंज़ूर ही नहीं किया।
निष्कर्ष: शॉक थेरेपी ने पूँजीवाद तो ला दिया, पर समृद्धि, लोकतंत्र और सामाजिक सुरक्षा नहीं — अर्थव्यवस्थाओं ने सन् 2000 में यानी आज़ादी के 10 साल बाद ही खड़ा होना शुरू किया, और वह भी खनिज, तेल, प्राकृतिक गैस और धातु के निर्यात के कारण, शॉक थेरेपी के कारण नहीं। अतः यह संक्रमण का सबसे बेहतर तरीका नहीं था।
प्रश्न 10. निम्नलिखित कथन के पक्ष या विपक्ष में एक लेख लिखें —“दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश-नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे परंपरागत मित्र की जगह संयुक्त राज्य अमरीका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।”(6 अंक)
उत्तर देखिए
उत्तर — (यह मत-आधारित प्रश्न है; दोनों पक्ष मान्य हैं, बशर्ते तर्क पाठ से लिए गए हों। नीचे एक संतुलित आदर्श उत्तर दिया गया है, जिसमें दोनों पक्ष और एक निष्कर्ष है।)
पक्ष में तर्क (अमरीका की ओर झुकाव)
- “हुआ यह कि अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा” — जिस विश्व में शक्ति का एक ही केंद्र है, वहाँ उससे दूरी रखना व्यावहारिक नहीं।
- पूँजीवादी अर्थव्यवस्था प्रभुत्वशाली प्रणाली बन गई और विश्व बैंक तथा IMF ताकतवर सलाहकार बन गईं — पूँजी, तकनीक और बाज़ार पश्चिम के पास हैं।
- उदारवादी लोकतंत्र सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा — भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, अतः मूल्यों का साझा आधार मौजूद है।
- रूस स्वयं 1990 के दशक में आर्थिक रूप से टूटा हुआ था — 1999 का GDP 1989 से नीचे, आधे बैंक दिवालिया — ऐसे साथी से वह मदद नहीं मिल सकती थी जो पहले मिलती थी।
विपक्ष में तर्क (परंपरागत मित्रता बनाए रखना)
- कसौटी पर खरा उतरा साथी: सोवियत संघ ने कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख का समर्थन किया और 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मदद की — अमरीका ने नहीं।
- सैन्य निर्भरता वास्तविक है: भारतीय सेना को अधिकांश साजो-सामान रूस से मिलता है और भारत रूस के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार है। यह रिश्ता रातों-रात नहीं बदला जा सकता।
- वह तकनीक जो कोई और नहीं देता: रूस ने परमाण्विक योजना और अंतरिक्ष उद्योग में क्रायोजेनिक रॉकेट में सहयोग किया — ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पश्चिम ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे।
- ऊर्जा सुरक्षा: तेल संकट के समय रूस ने हमेशा भारत की मदद की; भारत तेल के बड़े आयातकों में है और रूस तथा मध्य एशियाई गणराज्यों से ऊर्जा-आयात बढ़ाना चाहता है।
- बहुध्रुवीय विश्व का साझा सपना: भारत और रूस दोनों ऐसा विश्व चाहते हैं जिसमें कई शक्तियाँ हों, सामूहिक सुरक्षा हो, हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो और संयुक्त राष्ट्र मजबूत हो। एकध्रुवीयता के सामने झुकना इस सपने को छोड़ना है।
- चीन का संतुलन: रूस से रिश्ता भारत को चीन के साथ संबंधों में संतुलन देता है।
- 2001 के सामरिक समझौते के अंग के रूप में 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ — यह रिश्ता विघटन के बाद कमज़ोर नहीं, बल्कि औपचारिक रूप से और गहरा हुआ है।
निष्कर्ष (सुझाया गया)
यह प्रश्न ‘या तो — या’ का नहीं है। भारत की परंपरा गुटनिरपेक्षता और स्वतंत्र विदेश नीति की रही है, और अध्याय स्वयं बताता है कि भारत बहुध्रुवीय विश्व चाहता है। अतः सही रास्ता रूस को छोड़कर अमरीका को अपनाना नहीं, बल्कि दोनों के साथ राष्ट्रहित के आधार पर संबंध गहरे करना है — रूस से रक्षा, ऊर्जा और परमाणु-अंतरिक्ष सहयोग; अमरीका से तकनीक, निवेश और बाज़ार। किसी एक खेमे में जाना ही वह दो-ध्रुवीयता होगी जिसका अंत इस अध्याय का विषय है।
(शिक्षक हेतु: विद्यार्थी केवल पक्ष या केवल विपक्ष भी लिख सकता है — अंक तर्कों की संख्या, पाठ से लिए गए प्रमाण और स्पष्ट निष्कर्ष पर दिए जाएँ।)
खंड B — अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
B.1 बहुविकल्पीय प्रश्न (1 अंक)
11बर्लिन की दीवार कब गिरी?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (क) 9 नवंबर 1989
12स्वतंत्रता की घोषणा करने वाला पहला सोवियत गणराज्य कौन-सा था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) लिथुआनिया (मार्च 1990)
13‘पेरेस्त्रोइका’ का अर्थ है
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) पुनर्रचना
14शॉक थेरेपी को किसने निर्देशित किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
15सोवियत संघ में कितने गणराज्य थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 15
16‘स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल’ किन तीन देशों ने बनाया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) रूस, बेलारूस, उक्रेन (दिसंबर 1991)
17सोवियत संघ का ‘उत्तराधिकारी राज्य’ कौन बना?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) रूस — उसे सुरक्षा परिषद् की सीट मिली और वह एकमात्र परमाणु शक्ति बना।
18रूस में लगभग कितने प्रतिशत उद्योग निजी हाथों में बेचे गए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) लगभग 90 प्रतिशत
19‘शांतिपूर्ण सहअस्तित्व’ का सुझाव किसने रखा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) निकिता ख़्रुश्चेव
20सोवियत संघ ने अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप कब किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 1979
21कौन-सा देश शांतिपूर्वक दो हिस्सों में बँटा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) चेकोस्लोवाकिया — चेक और स्लोवाकिया।
22ताज़िकिस्तान में गृहयुद्ध कितने वर्ष चला?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) दस वर्ष (2001 तक)
23भारत-रूस सामरिक समझौते के अंग के रूप में कितने द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर हुए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ग) 80 (2001)
24सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार कितने वर्ष रहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (ख) 72 वर्ष — फरवरी 1990 में बहुदलीय राजनीति के साथ समाप्त।
! ध्यान दें: ‘कम्युनिस्ट पार्टी ने 70 सालों तक शासन किया’ अलग वाक्य है — दोनों अंक अलग-अलग संदर्भ में हैं।
25बाल्टिक गणराज्य नाटो में कब शामिल हुए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर — (घ) मार्च 2004
B.2 अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (1–2 अंक)
26‘दूसरी दुनिया’ से क्या आशय है?
उत्तर देखिए
उत्तर: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के वे देश जिनकी राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था सोवियत तर्ज़ पर ढाली गई — इन्हें ‘दूसरी दुनिया’ या समाजवादी खेमा कहा गया, और इसका नेता समाजवादी सोवियत गणराज्य था।
27बर्लिन की दीवार के बारे में तीन तथ्य लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: 1961 में बनी; 150 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी; 28 वर्ष खड़ी रही और 9 नवंबर 1989 को पूर्वी जर्मनी की जनता ने इसे गिरा दिया। यह पूँजीवादी और साम्यवादी दुनिया के विभाजन का प्रतीक थी।
28‘ग्लासनोस्त’ और ‘पेरेस्त्रोइका’ में अंतर बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ग्लासनोस्त = खुलापन (राजनीतिक पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की छूट); पेरेस्त्रोइका = पुनर्रचना (आर्थिक और संस्थागत ढाँचे का पुनर्गठन)। दोनों गोर्बाचेव के 1985 से शुरू हुए सुधार हैं।
29‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ किसे कहा गया और क्यों?
उत्तर देखिए
उत्तर: रूस में राज्य के उद्योगों की महा-बिक्री को। कारण — लगभग 90 प्रतिशत उद्योग निजी हाथों में बेचे गए, और उनकी कीमत जान-बूझकर कम आँककर उन्हें औने-पौने दामों में बेच दिया गया।
30‘माफिया वर्ग’ के उदय का क्या कारण था?
उत्तर देखिए
उत्तर: शॉक थेरेपी के दौरान आर्थिक ढाँचे के चरमराने, समाज कल्याण की व्यवस्था नष्ट होने और नियमन के अभाव में जरायमपेशा लोगों का एक ‘माफिया वर्ग’ उभरा, जिसने अधिकतर आर्थिक गतिविधियों पर नियंत्रण
कर लिया।
31‘निकटवर्ती विदेश’ पद का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: रूस मध्य एशियाई गणराज्यों को अपना ‘निकटवर्ती विदेश’ मानता है और चाहता है कि ये देश उसके प्रभाव-क्षेत्र में रहें।
32सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य कौन बना और उसे क्या-क्या मिला?
उत्तर देखिए
उत्तर: रूस। उसे संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ की सीट मिली, वह
एकमात्र परमाणु शक्ति बना, और उसने सोवियत संघ द्वारा की गई संधियों को निभाने का जिम्मा लिया।
33मध्य एशिया बड़ी ताकतों का अखाड़ा क्यों बना?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि वहाँ हाइड्रोकार्बनिक (पेट्रोलियम) संसाधनों का विशाल भंडार है और वह क्षेत्र
रूस, चीन तथा अफ़ग़ानिस्तान से सटा और पश्चिम एशिया से नज़दीक है। 11 सितंबर 2001 के बाद अमरीका ने वहाँ किराए पर सैनिक ठिकाने लिए; रूस इसे अपना निकटवर्ती विदेश मानता है; चीन के भी व्यापारिक हित
हैं।
34भारत को रूस से मिलने वाले किन्हीं चार लाभ लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: कश्मीर मुद्दे पर समर्थन; ऊर्जा-आपूर्ति; अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़ी सूचनाएँ; पश्चिम एशिया तक पहुँच; चीन के साथ संबंधों में संतुलन; परमाण्विक योजना और क्रायोजेनिक रॉकेट में सहयोग।
(कोई चार)
35युगोस्लाविया और चेकोस्लोवाकिया के विभाजन में क्या अंतर था?
उत्तर देखिए
उत्तर: चेकोस्लोवाकिया शांतिपूर्वक दो देशों — चेक और स्लोवाकिया — में बँटा। इसके विपरीत
युगोस्लाविया 1991 के बाद कई प्रांतों में टूटा; बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया और क्रोएशिया ने स्वतंत्रता घोषित की; जातीय संघर्ष ने गृहयुद्ध का रूप ले लिया और नाटो को हस्तक्षेप तथा बमबारी करनी पड़ी।
B.3 लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
36सोवियत प्रणाली की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- कम्युनिस्ट पार्टी इस प्रणाली की धुरी थी और किसी अन्य राजनीतिक दल या विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं थी।
- अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध थी और उस पर राज्य का नियंत्रण था; मिल्कियत का प्रमुख रूप राज्य का स्वामित्व था।
- यह 1917 की समाजवादी क्रांति से जन्मी और समाजवाद के आदर्शों तथा समतामूलक समाज की ज़रूरत से प्रेरित थी; निजी संपत्ति की संस्था को समाप्त करने की सबसे बड़ी कोशिश थी।
- सरकार ने सभी नागरिकों के लिए न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित किया और स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखभाल तथा लोक-कल्याण की सुविधाएँ रियायती दर पर दीं; बेरोज़गारी नहीं थी।
37सोवियत प्रणाली की कमज़ोरियाँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- नौकरशाही का शिकंजा — प्रणाली सत्तावादी होती गई और नागरिकों का जीवन कठिन हो गया।
- लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं थी — लोग असहमति चुटकुलों और कार्टूनों में व्यक्त करते थे।
- कम्युनिस्ट पार्टी का सभी संस्थाओं पर गहरा अंकुश था और वह जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थी।
- पंद्रह गणराज्यों में रूस का हर मामले में प्रभुत्व था और अन्य क्षेत्रों की जनता स्वयं को उपेक्षित तथा दमित महसूस करती थी।
- तकनीक और सूचना में पश्चिम से पिछड़ना, उपभोक्ता-वस्तुओं की कमी, भारी सैन्य-खर्च और व्यापक भ्रष्टाचार।
38सोवियत संघ के विघटन के कारणों में राष्ट्रवाद की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: पाठ्यपुस्तक इसे “विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण” बताती है — विभिन्न गणराज्यों में राष्ट्रवाद और संप्रभुता की भावना का उभार। इसकी विडंबना यह है कि यह उभार वहाँ नहीं हुआ जहाँ अपेक्षा थी। माना जाता था कि मध्य-एशियाई गणराज्यों में — जो धार्मिक और नस्ली रूप से रूस से अलग तथा आर्थिक रूप से पिछड़े थे — यह सबसे प्रबल होगा। पर वास्तव में असंतोष यूरोपीय और अपेक्षतया समृद्ध गणराज्यों — रूस, उक्रेन, जार्जिया और बाल्टिक क्षेत्र — में सबसे प्रबल था। इन्हें लगता था कि ज्यादा पिछड़े इलाकों को सोवियत संघ में बनाए रखने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। इसके उलट,
मध्य-एशियाई गणराज्यों ने स्वतंत्रता की माँग की ही नहीं और सोवियत संघ के साथ ही रहना चाहते थे —
उन्हें बाद में राष्ट्रकुल का संस्थापक सदस्य बनाया गया।
39सोवियत संघ के विघटन की तीन परिणतियाँ लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
शीतयुद्ध के दौर के संघर्ष की समाप्ति
— “समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को पछाड़ पाएगी या नहीं” वाला विचारधारात्मक विवाद खत्म हुआ; हथियारों की होड़ समाप्त हुई और एक नई शांति की संभावना का जन्म हुआ।
विश्व राजनीति में शक्ति-संबंधों का बदलना
— एकध्रुवीय या बहुध्रुवीय, दो संभावनाएँ थीं; हुआ यह कि अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था प्रभुत्वशाली बनी, विश्व बैंक और IMF ताकतवर सलाहकार बनीं और उदारवादी लोकतंत्र सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा।
नए देशों का उदय
— बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देशों ने यूरोपीय संघ तथा नाटो का हिस्सा बनना चाहा, जबकि मध्य एशियाई देशों ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर रूस से मजबूत रिश्ते बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों, अमरीका और चीन से भी संबंध बनाए।
40भारत और सोवियत संघ के संबंधों के चार आयाम बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- आर्थिक: भिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखानों तथा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स को आर्थिक और तकनीकी मदद; विदेशी मुद्रा की कमी के समय रुपये को माध्यम बनाकर व्यापार।
- राजनीतिक: कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख का समर्थन; 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मदद; भारत ने भी सोवियत विदेश नीति का अप्रत्यक्ष समर्थन किया।
- सैन्य: ऐसे समय सैनिक साजो-सामान दिया जब शायद ही कोई और देश तैयार था; संयुक्त रूप से सैन्य उपकरण बनाने के समझौते।
- सांस्कृतिक: हिंदी फिल्में और भारतीय संस्कृति सोवियत संघ में लोकप्रिय; भारतीय लेखकों-कलाकारों की यात्राएँ।
41पूर्व सोवियत क्षेत्र में उभरे संघर्षों और तनावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: रूस में चेचन्या और दाग़िस्तान — हिंसक अलगाववादी आंदोलन, जिनके विरुद्ध मास्को की ग़ैर-जिम्मेदार सैन्य बमबारी में मानवाधिकारों का व्यापक उल्लंघन हुआ। ताज़िकिस्तान में दस वर्षों यानी 2001 तक गृहयुद्ध। अज़रबैजान के नगरनो-कराबाख प्रांत में स्थानीय अर्मेनियाई अलग होकर अर्मेनिया से मिलना चाहते हैं। जार्जिया के दो प्रांत स्वतंत्रता चाहते हैं और वहाँ गृहयुद्ध हुआ। यूक्रेन, किरगिज़स्तान और जार्जिया में मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन चले। पूर्वी यूरोप में
चेकोस्लोवाकिया शांतिपूर्वक बँटा, जबकि युगोस्लाविया में जातीय संघर्ष गृहयुद्ध बना और नाटो को हस्तक्षेप तथा बमबारी करनी पड़ी।
42शॉक थेरेपी के किन्हीं चार तत्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
- पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर पूरी तरह मुड़ना और सोवियत दौर की हर संरचना से निजात पाना।
- निजी स्वामित्व को मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप मानना — राज्य की संपदा का निजीकरण और सामूहिक ‘फार्म’ का निजी ‘फार्म’ में रूपांतरण।
- कोई ‘तीसरा रुख़’ मंज़ूर न करना और ‘मुक्त व्यापार’ को पूर्ण रूप से अपनाना, साथ ही वित्तीय खुलापन तथा मुद्राओं की परिवर्तनीयता।
- सोवियत खेमे के आपसी व्यापारिक गठबंधन समाप्त करके हर देश को सीधे पश्चिमी मुल्कों से जोड़ना, ताकि वे पश्चिमी अर्थतंत्र में समाहित हो जाएँ।
43शॉक थेरेपी के बाद इन देशों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण की क्या स्थिति रही?
उत्तर देखिए
उत्तर: “आर्थिक बदलाव को बड़ी प्राथमिकता दी गई और उसे जनता की इच्छा मान लिया गया, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका।” अधिकतर देशों के
संविधान हड़बड़ी में तैयार किए गए, जिनमें राष्ट्रपति को कार्यपालिका का प्रमुख और लगभग हरसंभव शक्ति
दी गई तथा संसद अपेक्षाकृत कमजोर रही। तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पहले 10 वर्ष और फिर अगले 10 साल के लिए अपने को बहाल किया और असहमति की अनुमति नहीं दी। न्यायपालिका की स्वतंत्रता स्थापित करने का काम अभी भी बाकी है।
44भारत और रूस के बहुध्रुवीय विश्व संबंधी साझा दृष्टिकोण के तत्व बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: दोनों ऐसा विश्व चाहते हैं जिसमें —
अंतर्राष्ट्रीय फलक पर कई शक्तियाँ मौजूद हों; (2) सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी हो — किसी भी देश पर हमला हो तो सभी उसे अपने लिए खतरा मानें और साथ मिलकर कार्रवाई करें; (3) क्षेत्रीयताओं को ज्यादा जगह मिले; (4) अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत से हो; (5) हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो; और (6) संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं द्वारा फैसले हों तथा वे मजबूत, लोकतांत्रिक एवं शक्तिसंपन्न बनें।
B.4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (6 अंक)
45सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (संकेत-बिंदु — विस्तार 04-Revision-Notes.md, खंड 3 में)
संस्थाओं की अंदरूनी कमज़ोरी
— राजनीतिक-आर्थिक संस्थाएँ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकीं; अर्थव्यवस्था गतिरुद्ध; उपभोक्ता-वस्तुओं की बड़ी कमी; खाद्यान्न का बढ़ता आयात।
संसाधनों का सैन्य-व्यय में झोंका जाना
— परमाणु हथियार, सैन्य साजो-सामान और पूर्वी यूरोप के पिछलग्गू देशों को नियंत्रण में रखने का खर्च; 1979 का अफ़ग़ान हस्तक्षेप और कमज़ोर करने वाला रहा।
पश्चिम से तुलना का मनोवैज्ञानिक धक्का
— “अपने पिछड़ेपन की पहचान से लोगों को राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक रूप से धक्का लगा।”
प्रशासनिक-राजनीतिक जड़ता
— 70 सालों का जवाबदेही-रहित शासन, भारी भ्रष्टाचार, खुलेपन के प्रति अनिच्छा, सत्ता का केंद्रीकरण, ‘पार्टी’ अधिकारियों के विशेषाधिकार।
गोर्बाचेव के सुधारों की अनपेक्षित परिणति
— सुधारों से “लोगों की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं का ऐसा ज्वार उमड़ा जिसका अनुमान शायद ही कोई लगा सकता था।” एक तबका सुधारों की गति से नाराज़ था तो दूसरा
उन्हें बहुत तेज़ मानता था — गोर्बाचेव दोनों का समर्थन खो बैठे।
राष्ट्रवाद और संप्रभुता की इच्छा
— “विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण”; विवरण
प्रश्न 38 में।
निष्कर्षअगस्त 1991 के असफल तख़्तापलट ने जनता का रुख़ स्पष्ट कर दिया और येल्तसिन जनविरोध के
नायक बने; दिसंबर 1991 में रूस, बेलारूस और उक्रेन ने 1922 की संधि समाप्त कर दी और 25 दिसंबर 1991 को गोर्बाचेव के इस्तीफे के साथ सोवियत संघ का अंत हो गया।
46“शॉक थेरेपी ने संक्रमण तो कराया, पर समृद्धि नहीं दी।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (प्रश्न 9 का पूरा उत्तर यहाँ लागू है — ‘क्या थी’ का संक्षिप्त परिचय दें, फिर परिणामों की तालिका के प्रमाण दें, और अंत में लिखें कि अर्थव्यवस्थाओं ने सन् 2000 में, आज़ादी के 10 साल बाद खनिज, तेल, प्राकृतिक गैस और धातु के निर्यात के कारण खड़ा होना शुरू किया — शॉक थेरेपी के कारण नहीं।)
47सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व-व्यवस्था में क्या परिवर्तन आए? विस्तार से लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (प्रश्न 39 की तीनों परिणतियाँ विस्तार से; साथ में — हथियारों की होड़ का अंत, सैन्य गुटों का बिखराव, विश्व बैंक और IMF का बढ़ा प्रभाव, उदारवादी लोकतंत्र का वैचारिक वर्चस्व, मध्य एशिया का बड़ी ताकतों का अखाड़ा बनना, और नए संघर्षों — चेचन्या, ताज़िकिस्तान, नगरनो-कराबाख, जार्जिया, युगोस्लाविया — का उभार।)
48भारत-रूस संबंध दोनों देशों के लिए किस प्रकार परस्पर लाभकारी हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर:
भारत के लिएकश्मीर मुद्दे पर समर्थन; ऊर्जा-आपूर्ति और तेल संकट में सहायता; अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़ी सूचनाएँ; पश्चिम एशिया तक पहुँच; चीन के साथ संबंधों में संतुलन; भारतीय सेना के लिए अधिकांश साजो-सामान; परमाण्विक योजना में सहयोग; अंतरिक्ष उद्योग में क्रायोजेनिक रॉकेट; वैज्ञानिक परियोजनाओं में साझेदारी।
रूस के लिएभारत उसके हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है; भारत तेल के बड़े आयातकों में है, इसलिए तेल वाले इलाकों में साझेदारी और निवेश के लिए महत्त्वपूर्ण; और बहुध्रुवीय विश्व के साझा सपने में एक बड़ा लोकतांत्रिक साथी।
आधार2001 का भारत-रूस सामरिक समझौता, जिसके अंग के रूप में 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर हुए।
B.5 अभिकथन–कारण प्रश्न (1 अंक)
निर्देश: (क) दोनों सही, कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है। (ख) दोनों सही, पर कारण व्याख्या नहीं करता। (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत। (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।
49अभिकथन (A): सोवियत संघ के विघटन में राष्ट्रवाद सबसे तात्कालिक कारण था।
कारण (R): मध्य-एशियाई गणराज्यों ने सबसे पहले स्वतंत्रता की माँग उठाई।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ग) अभिकथन सही है, पर कारण ग़लत है: मध्य-एशियाई गणराज्यों ने स्वतंत्रता की माँग की ही नहीं; असंतोष रूस, उक्रेन, जार्जिया और बाल्टिक में सबसे प्रबल था।
50अभिकथन (A): शॉक थेरेपी पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर गई।
कारण (R): लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों को कीमत कम आँककर औने-पौने दामों में बेच दिया गया।
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है — इसी को “इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल” कहा गया।
51अभिकथन (A): रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य बना।
कारण (R): रूस ने सोवियत संघ द्वारा की गई संधियों को निभाने का जिम्मा लिया और उसे सुरक्षा परिषद् में सीट मिली।
उत्तर देखिए
उत्तर — (क) दोनों सही और कारण सही व्याख्या करता है।
52अभिकथन (A): सोवियत संघ के विघटन से हथियारों की होड़ समाप्त हुई।
कारण (R): मध्य एशिया में हाइड्रोकार्बनिक संसाधनों का विशाल भंडार है।
उत्तर देखिए
उत्तर — (ख) दोनों कथन अपने-आप में सही हैं, पर कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता — दोनों का
आपस में कोई संबंध नहीं।
B.6 स्रोत-आधारित प्रश्न (4 अंक)
53निम्नलिखित अवतरण पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
“रूस, मध्य एशिया के गणराज्यों और पूर्वी यूरोप के देशों में साम्यवादी शासन के पतन के बाद पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का एक खास मॉडल अपनाया गया, जिसे ‘शॉक थेरेपी’ यानी ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’ कहा गया। शॉक थेरेपी की गति और गहनता अलग-अलग गणराज्यों में अलग-अलग रही, लेकिन इसकी दिशा और चरित्र बड़ी सीमा तक एक जैसे थे।”
(क) शॉक थेरेपी को किन संस्थाओं ने निर्देशित किया?
उत्तर: विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष।
(ख) ‘शॉक थेरेपी’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’।
(ग) अवतरण के अनुसार अलग-अलग देशों में क्या समान रहा और क्या भिन्न?
उत्तर: गति और गहनता अलग-अलग रही, जबकि दिशा और चरित्र बड़ी सीमा तक एक जैसे थे।
(घ) इस मॉडल में ‘तीसरे रुख़’ के बारे में क्या रुख़ था?
उत्तर: कोई ‘तीसरा रुख़’ मंज़ूर नहीं किया गया — राज्य-नियंत्रित समाजवाद और पूँजीवाद के बीच किसी विकल्प की गुंजाइश नहीं रखी गई।
54निम्नलिखित अवतरण पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
“1989 में बर्लिन की दीवार को जनता ने गिरा दिया। यह दीवार शीतयुद्ध का प्रतीक थी। इसने पूँजीवादी दुनिया को साम्यवादी दुनिया से अलग कर रखा था। बर्लिन की यह दीवार 1961 में बनी थी और अगले 28 सालों तक खड़ी रही। इसे 9 नवंबर 1989 को गिराया गया।”
(क) दीवार किसे किससे अलग करती थी?
उत्तर: पश्चिमी बर्लिन को पूर्वी बर्लिन से — प्रतीकात्मक रूप से पूँजीवादी दुनिया को साम्यवादी दुनिया से।
(ख) दीवार कब बनी और कितने वर्ष खड़ी रही?
उत्तर: 1961 में बनी और 28 वर्ष खड़ी रही।
(ग) इसे किसने गिराया?
उत्तर: पूर्वी जर्मनी की आम जनता ने — यह किसी सैन्य कार्रवाई का नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक कार्रवाई का परिणाम था।
(घ) इस घटना का ऐतिहासिक महत्व क्या था?
उत्तर: यह दोनों जर्मनी के एकीकरण और साम्यवादी खेमे की समाप्ति की शुरुआत थी; पूर्वी यूरोप के आठ देशों ने एक-एक करके अपने साम्यवादी शासन बदल डाले और सोवियत संघ को चुपचाप देखते रहना पड़ा।
B.7 उच्च-क्रम चिंतन (HOTS)
55कार्टून में एक पात्र कहता है — “जो हमारे साथ है वह राष्ट्रवाद है, जो हमारे खिलाफ है वह अलगाववाद है।” इस टिप्पणी का क्या अर्थ है?
उत्तर देखिए
उत्तर: यह टिप्पणी ‘राष्ट्रवाद’ और ‘अलगाववाद’ के बीच की रेखा के राजनीतिक होने की ओर इशारा करती
है। जब कोई समूह मौजूदा सत्ता के पक्ष में अपनी पहचान का दावा करता है तो उसे राष्ट्रवाद कहा जाता
है; वही दावा जब सत्ता के विरुद्ध हो तो उसे अलगाववाद कहकर खारिज कर दिया जाता है। सोवियत संदर्भ
में यही दिखा — बाल्टिक गणराज्यों की स्वतंत्रता की माँग को मास्को अलगाववाद मानता था, जबकि उनके
लिए वह राष्ट्रवाद था; और चेचन्या के आंदोलन को आज भी रूस अलगाववाद कहता है।
56यदि गोर्बाचेव सुधार न करते, तो क्या सोवियत संघ बच जाता? अपने विचार दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न — दोनों पक्ष मान्य।)
बचने के पक्ष में सुधारों ने ही अपेक्षाओं का वह ज्वार पैदा किया जिसे व्यवस्था संभाल नहीं सकी;
ग्लासनोस्त ने असहमति को खुलकर सामने आने दिया और बहुदलीय राजनीति ने पार्टी का 72 वर्ष पुराना एकाधिकार समाप्त कर दिया।
न बचने के पक्ष में (अधिक ठोस) अध्याय स्पष्ट कहता है कि व्यवस्था 1970 के दशक के अंत में ही लड़खड़ाकर ठहर सी गई थी — उपभोक्ता-वस्तुओं की कमी, बढ़ता खाद्यान्न आयात, असहनीय सैन्य-खर्च,
1979 का अफ़ग़ान हस्तक्षेप, 70 सालों की जड़ता और भ्रष्टाचार तथा गणराज्यों की उपेक्षा — ये सब
सुधारों से पहले के हैं। सुधार रोग नहीं, रोग की पहचान थे; वे पतन का कारण नहीं, उसका उजागर होना थे।
57“एकध्रुवीय विश्व बहुध्रुवीय विश्व से अधिक स्थिर होता है।” क्या आप सहमत हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: (खुला प्रश्न।) असहमति के तर्क — अध्याय बताता है कि अमरीका के अकेली महाशक्ति बनने
के बाद भी चेचन्या, ताज़िकिस्तान, नगरनो-कराबाख, जार्जिया और युगोस्लाविया में संघर्ष हुए, और नाटो को बमबारी तक करनी पड़ी — यानी एकध्रुवीयता ने शांति की गारंटी नहीं दी। भारत और रूस, दोनों बहुध्रुवीय विश्व चाहते हैं जिसमें सामूहिक सुरक्षा, बातचीत से समाधान और मजबूत संयुक्त राष्ट्र हो —
उनका तर्क है कि कई शक्तियों का संतुलन किसी एक की मनमानी रोकता है। सहमति के तर्क — दो खेमों की
हथियारों की होड़ और सैन्य गुटबंदी समाप्त हुई और “एक नई शांति की संभावना का जन्म हुआ”।
58मध्य-एशियाई गणराज्यों ने स्वतंत्रता की माँग क्यों नहीं की, जबकि समृद्ध यूरोपीय गणराज्यों ने की?
उत्तर देखिए
उत्तर: क्योंकि यूरोपीय और अपेक्षतया समृद्ध गणराज्यों को लगता था कि ज्यादा पिछड़े इलाकों को सोवियत संघ में शामिल रखने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है — उनके लिए संघ बोझ था। इसके उलट,
मध्य-एशियाई गणराज्य आर्थिक रूप से पिछड़े थे और संघ उनके लिए सहारा था; इसीलिए वे ‘सोवियत संघ’ के साथ ही रहना चाहते थे। यही कारण है कि विघटन के बाद उन्हें राष्ट्रकुल का संस्थापक सदस्य बनाया गया
और आज भी वे रूस से मजबूत रिश्ते बनाए हुए हैं।
59अध्याय के शीर्षक ‘दो ध्रुवीयता का अंत’ को उचित ठहराइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद विश्व दो महाशक्तियों के खेमों में बँटा था — एक ओर पूँजीवादी अमरीका, दूसरी ओर समाजवादी सोवियत संघ और ‘दूसरी दुनिया’। बर्लिन की दीवार (1961–1989) इसी विभाजन का प्रतीक थी। 9 नवंबर 1989 को दीवार गिरी, पूर्वी यूरोप के आठ देशों ने साम्यवादी शासन बदले, और 25 दिसंबर 1991 को सोवियत संघ समाप्त हो गया। इसके साथ ही एक ध्रुव मिट गया —
“समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को पछाड़ पाएगी या नहीं” वाला विवाद खत्म हुआ, हथियारों की होड़ रुकी, और अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा। अतः शीर्षक पूर्णतः उचित है।
उत्तर लिखने की रणनीति★
| अंक | क्या करें |
|---|---|
| 1 | केवल तथ्य — तिथि, नाम, संख्या। कोई भूमिका नहीं। |
| 2 | दो अलग बिंदु, दोनों में एक-एक ठोस प्रमाण (तिथि/आँकड़ा)। |
| 4 | चार बिंदु, हर बिंदु में कीवर्ड मोटा और एक तथ्य। |
| 6 | भूमिका (1 पंक्ति) → 5–6 बिंदु → निष्कर्ष (1 पंक्ति)। कम से कम तीन आँकड़े या तिथियाँ अवश्य। |
| मत-आधारित | दोनों पक्ष दें, फिर अपना निष्कर्ष — यही पूरे अंक दिलाता है। |
| सभी में | पाठ्यपुस्तक के उद्धरण (जैसे “इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल”) का प्रयोग अंक बढ़ाता है। |