अध्याय 6पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

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व्यवस्था: पहले मूल धारणाएँ, फिर सम्मेलन और संधियाँ, फिर वैश्विक संपदा, फिर आंदोलन, फिर भू-राजनीति, फिर मूलवासी, और अंत में भ्रम-युग्मों की सूची। ★= अवश्य याद रखने योग्य · ! = यहीं भूल होती है पाठ्यपुस्तक के शब्द उद्धरण-चिह्नों में दिए गए हैं।


भाग 1 — मूल धारणाएँ

पदEnglishअर्थ
★★साझी संपदाCommon property resourcesदो अर्थों में प्रयुक्त — (1) “जिन पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का अधिकार होता है” (पृ. 84); (2) “ऐसी संपदा जिस पर किसी समूह के प्रत्येक सदस्य का स्वामित्व हो” (पृ. 87)। उदाहरण — संयुक्त परिवार का चूल्हा, चारागाह, मैदान, कुआँ, नदी
★★वैश्विक संपदा / मानवता की साझी विरासतGlobal commons / Common heritage of mankind“विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन साझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है।” ★चार — पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष
★★साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँCommon but differentiated responsibilities (CBDR)“पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राज्यों की ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ होंगी।” 1992 के पृथ्वी सम्मेलन में स्वीकृत
★टिकाऊ विकासSustainable development“आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे।” ! समस्या — “‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा”
★ऐतिहासिक उत्तरदायित्वHistorical responsibilityभारत का मुख्य तर्क — “ग्रीनहाऊस गैसों के रिसाव की ऐतिहासिक और मौजूदा जवाबदेही ज्यादातर विकसित देशों की है।”
★ग्रीन हाऊस गैसेंGreenhouse gasesकार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रो-फ्लोरो कार्बन — “इनकी वैश्विक तापवृद्धि में कोई-न-कोई भूमिका ज़रूर है”
★वैश्विक तापवृद्धिGlobal warming“विश्व का तापमान बढ़ता है और धरती के जीवन के लिए यह बात बड़ी प्रलयंकारी साबित होगी”
★ओज़ोन परत में छेदOzone hole“धरती के ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन गैस की मात्रा में लगातार कमी” → पारिस्थितिकी तंत्र और मनुष्य के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा; 1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिका के ऊपर खोज
★जैव-विविधताBiodiversity“धरती की जैव-विविधता का भंडार” वनों में; हानि का कारण — “उन पर्यावासों का विध्वंस जो जैव-प्रजातियों के मामले में समृद्ध हैं”

भाग 2 — सम्मेलन, रिपोर्टें और संधियाँ

पदवर्षअर्थ
★क्लब ऑव रोम1972“वैश्विक मामलों से सरोकार रखने वाला एक विद्वत् समूह” — जिसने ‘लिमिट्स टू ग्रोथ’ प्रकाशित की
★लिमिट्स टू ग्रोथ1972“दुनिया की बढ़ती जनसंख्या के आलोक में प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के अंदेशे को बड़ी खूबी से बताती है”
UNEP—संयुक्त राष्ट्रसंघ पर्यावरण कार्यक्रम — “पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर सम्मेलन कराये और अध्ययन को बढ़ावा दिया”
★बर्टलैंड रिपोर्ट — ‘अवर कॉमन फ्यूचर’1987“आर्थिक विकास के चालू तौर-तरीके आगे चलकर टिकाऊ साबित नहीं होंगे।” पृथ्वी सम्मेलन से पाँच साल पहले
★★पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit)1992रियो डी जनेरियो, ब्राज़ील; संयुक्त राष्ट्रसंघ का; 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय निगम
★अजेंडा-211992“विकास के कुछ तौर-तरीके”; ! आलोचना — “झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है”
★रियो-घोषणापत्र1992जिसमें ‘साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ’ का सिद्धांत औपचारिक रूप से दर्ज़ है
★UNFCCC1992यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कंवेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज — “जलवायु के परिवर्तन से संबंधित संयुक्त राष्ट्रसंघ का नियमाचार”; देश “अपनी क्षमता के अनुरूप, पर्यावरण के अपक्षय में अपनी हिस्सेदारी के आधार पर” प्रयास करेंगे
★★क्योटो प्रोटोकॉल1997“जापान के क्योटो में 1997 में इस प्रोटोकॉल पर सहमति बनी”; “औद्योगिक देशों के लिए ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य निर्धारित”; ★चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को बाध्यताओं से अलग रखा गया
★★भारत और क्योटो2002“भारत ने 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल (1997) पर हस्ताक्षर किए और इसका अनुमोदन किया।”
★★पेरिस जलवायु समझौता2016 (भारत का अनुमोदन)“भारत ने 2 अक्तूबर 2016 को पेरिस जलवायु समझौते को अनुमोदित किया।”
★अंटार्कटिका संधि1959वैश्विक संपदा की सुरक्षा का पहला बड़ा समझौता
★मॉन्ट्रियल न्यायाचार1987ओज़ोन-संबंधी न्यायाचार (प्रोटोकॉल)
★अंटार्कटिका पर्यावरणीय न्यायाचार1991अंटार्कटिका के पर्यावरण-संरक्षण के लिए
★ग्रुप-8 की बैठकजून 2005जहाँ भारत ने ध्यान दिलाया कि “विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन दर विकसित देशों की तुलना में नाममात्र है”
★1997 का पुनरावलोकन1997भारत द्वारा रियो-समझौतों के क्रियान्वयन की समीक्षा — निष्कर्ष: “कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है”

भाग 3 — वैश्विक संपदा और अंटार्कटिका

पदअर्थ
★★चार वैश्विक संपदाएँपृथ्वी का वायुमंडल · अंटार्कटिका · समुद्री सतह · बाहरी अंतरिक्ष
! ‘टेढ़ी खीर’“‘वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है।”
! अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्य“पारिस्थितिकी से जुड़े हर मसले के साथ एक बड़ी समस्या यह जुड़ी है कि अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय-सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते हैं।”
★क्रिल मछली“समुद्री आहार शृंखला की धुरी है और जिस पर दूसरे जानवरों का आहार निर्भर है”
★हिमानी परत“ग्रीन हाऊस गैस के जमाव का महत्त्वपूर्ण सूचना-स्रोत… लाखों बरस पहले के वायुमंडलीय तापमान का पता किया जा सकता है”
★अंटार्कटिका के सात दावेदारब्रिटेन, अर्जेन्टीना, चिले, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड — “संप्रभु अधिकार का वैधानिक दावा”
★अंटार्कटिका के आँकड़े1 करोड़ 40 लाख वर्ग किमी · निर्जन क्षेत्र का 26% · स्थलीय हिम का 90% · धरती के स्वच्छ जल का 70% · समुद्र में 3 करोड़ 60 लाख वर्ग किमी अतिरिक्त विस्तार
★★अंतर-पीढ़ीगत असमानता“बाहरी अंतरिक्ष में जो दोहन-कार्य हो रहे हैं उनके फायदे न तो मौजूदा पीढ़ी में सबके लिए बराबर हैं और न आगे की पीढ़ियों के लिए।”

भाग 4 — साझी संपदा और देवस्थान

पदअर्थ
★समान अधिकार, समान उत्तरदायित्व“ऐसे संसाधन की प्रकृति, उपयोग के स्तर और रख-रखाव के संदर्भ में समूह के हर सदस्य को समान अधिकार प्राप्त होंगे और समान उत्तरदायित्व निभाने होंगे।”
!★साझी संपदा के सिकुड़ने के चार कारणनिजीकरण · गहनतर खेती · आबादी की वृद्धि · पारिस्थितिकी तंत्र की गिरावट
★पावन वन-प्रांत / देवस्थानSacred groves — “इस प्रथा में वनों के कुछ हिस्सों को काटा नहीं जाता। इन स्थानों पर देवता अथवा किसी पुण्यात्मा का वास माना जाता है।”
★देवस्थान के क्षेत्रीय नामराजस्थान — वानी, केंकड़ी, ओरान · झारखंड — जहेरा थान, सरना · मेघालय — लिंगदोह · केरल — काव · उत्तराखंड — थान, देवभूमि · महाराष्ट्र — देव रहतिस
★★देवस्थान का मूल सिद्धांत“संसाधनों की विरलता नहीं, प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा ही वह आधार थी जिसने इतने युगों से वनों को बचाए रखने की प्रतिबद्धता कायम रखी।”
! कानूनी बनाम व्यावहारिक नियंत्रण“कानूनी स्वामित्व राज्य का हो और व्यावहारिक नियंत्रण समुदाय के हाथ में। इन दोनों के नीतिगत मानक अलग-अलग हैं।”

भाग 5 — भारत का पक्ष

पदअर्थ
★प्रति व्यक्ति उत्सर्जनविश्व औसत (2000) — 3.8 टन · भारत (2000) — 0.9 टन · भारत (2030 अनुमान) — 1.6 टन
★नेशनल ऑटो-फ्यूल पॉलिसी“वाहनों के लिए स्वच्छतर ईंधन अनिवार्य कर दिया है”
★ऊर्जा-संरक्षण अधिनियम, 2001“ऊर्जा के ज्यादा कारगर इस्तेमाल की पहलकदमी”
★बिजली अधिनियम, 2003“नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा”
★बायोडीजल राष्ट्रीय मिशन“2011-12 तक बायोडीजल तैयार होने लगेगा और इसमें 1 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल होगा”
★दक्षेस (SAARC) पर भारत का विचार“दक्षेस में शामिल देश पर्यावरण के प्रमुख वैश्विक मसलों पर एक समान राय बनायें ताकि इस क्षेत्र की आवाज़ वज़नी हो सके”

भाग 6 — पर्यावरण आंदोलन

पदअर्थ
★आंदोलनों की विविधता“मौजूदा पर्यावरण आंदोलनों की एक मुख्य विशेषता उनकी विविधता है।”
★★सामाजिक चेतना और नयी राजनीति“सामाजिक चेतना के दायरे में ही राजनीतिक कार्रवाई के नये रूप जन्म लेते हैं या उन्हें खोजा जाता है।”
★वन-आंदोलन के देशमैक्सिको, चिले, ब्राज़ील, मलेशिया, इंडोनेशिया, महादेशीय अफ्रीका और भारत
★खनिज-उद्योग के पाँच नुकसानसंसाधनों का दोहन · रसायनों का भरपूर उपयोग · भूमि और जलमार्गों का प्रदूषण · स्थानीय वनस्पतियों का विनाश · जन-समुदायों का विस्थापन
★वेस्टर्न माइनिंग कारपोरेशनऑस्ट्रेलियाई बहुराष्ट्रीय कंपनी, जिसके विरुद्ध फिलीपीन्स में अभियान चला — ★“इस कंपनी का विरोध खुद इसके स्वदेश यानी ऑस्ट्रेलिया में हुआ”
★★फ्रैंकलिन नदी आंदोलन“1980 के दशक के शुरुआती और मध्यवर्ती वर्षों में विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन दक्षिणी गोलार्द्ध में चला। आस्ट्रेलिया में चला यह आंदोलन फ्रैंकलिन नदी तथा इसके परिवर्ती वन को बचाने का आंदोलन था।”
★★नर्मदा आंदोलन“भारत में बाँध-विरोधी और नदी हितैषी कुछ अग्रणी आंदोलन चल रहे हैं। इन आंदोलनों में नर्मदा आंदोलन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।”
★★अहिंसा की साझी विशेषता“भारत में बाँध विरोधी तथा पर्यावरण-बचाव के अन्य आंदोलन एक अर्थ में समानधर्मी हैं क्योंकि ये अहिंसा पर आधारित हैं।”
★विजनपनWilderness — निर्जन, अछूता प्रकृति-क्षेत्र; यह दृष्टिकोण ऑस्ट्रेलिया, स्कैंडिनेविया, उत्तरी अमरीका और न्यूजीलैंड में हावी है
★★उत्तरी वन-दृष्टि“वन जनविहीन हैं… वनभूमि को निर्जन भूमि का दर्जा दिया गया है”; ! “यह दृष्टिकोण मनुष्य को प्रकृति का हिस्सा नहीं मानता”
★★दक्षिणी वन-दृष्टि“दक्षिणी देशों में पर्यावरण के अधिकांश मसले इस मान्यता पर आधारित हैं कि लोग वनों में भी रहते हैं।”
WWFवर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड — “इनमें से अनेक अभियानों की शुरुआत और वित्तीय मदद… ने की”

भाग 7 — संसाधनों की भू-राजनीति

पदअर्थ
★★संसाधनों की भू-राजनीति“‘किसे, क्या, कब, कहाँ और कैसे हासिल होता है’ — ‘संसाधनों की भू-राजनीति’ इन्हीं सवालों से जूझती है।”
★इमारती लकड़ी“समुद्री नौवहन स्वयं इमारती लकड़ियों पर आधारित था इसलिए… 17वीं सदी से बाद के समय में प्रमुख यूरोपीय शक्तियों की प्राथमिकताओं में रही”
★शीतयुद्ध के चार कदमसेना की तैनाती · संसाधनों का भंडारण · मनपसंद सरकारों की बहाली · बहुराष्ट्रीय निगमों और हितसाधक समझौतों को समर्थन
★★तेल के चार आँकड़ेखाड़ी का उत्पादन में हिस्सा 30% · ज्ञात भंडार में हिस्सा 64% · सऊदी अरब कुल भंडार का एक चौथाई और सबसे बड़ा उत्पादक · इराक का भंडार 112 अरब बैरल से ज्यादा का अनुमान
★95 फीसदी“दुनिया को परिवहन के लिए जितनी ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है उसका 95 फीसदी पेट्रोलियम से ही पूरा होता है”
★पेट्रोलियम का इतिहास“पेट्रोलियम का इतिहास युद्ध और संघर्षों का भी इतिहास है।”
★★जलयुद्धWater wars — “साझे जल-संसाधन को लेकर पैदा मतभेद 21वीं सदी में फसाद की जड़ साबित हों… इसी को इंगित करने के लिए विश्व-राजनीति के कुछ विद्वानों ने ‘जलयुद्ध’ शब्द गढ़ा है”
★जल-विवाद का ढाँचा“जलधारा के उद्गम से दूर बसा हुआ देश उद्गम के नजदीक बसे हुए देश द्वारा इस पर बाँध बनाने, अत्यधिक सिंचाई करने या इसे प्रदूषित करने पर आपत्ति जताता है”
★दो जल-संघर्षइज़रायल, सीरिया और जार्डन (1950-60 का दशक; जॉर्डन और यारमुक नदी) · तुर्की, सीरिया और इराक (फरात नदी)
नव-उपनिवेशवादकार्टून का शीर्षक (पृ. 93) — “हमने तुम्हारे देश को मटियामेट कर दिया है। अब उसके पुनर्निर्माण का खर्चा दो।” / “हम भुगतान के रूप में पेट्रोलियम जैसे प्राकृतिक संसाधन स्वीकार करते हैं।”

भाग 8 — मूलवासी

पदअर्थ
★★मूलवासीIndigenous people — UN की 1982 की परिभाषा: “ऐसे लोगों का वंशज जो किसी मौजूदा देश में बहुत दिनों से रहते चले आ रहे थे। फिर किसी दूसरी संस्कृति या जातीय मूल के लोग विश्व के दूसरे हिस्से से उस देश में आये और इन लोगों को अधीन बना लिया।”
★मूलवासियों की पसंद“आज भी उस देश की संस्थाओं के अनुरूप आचरण करने से ज्यादा अपनी परंपरा, सांस्कृतिक रिवाज तथा अपने ख़ास सामाजिक, आर्थिक ढर्रे पर जीवन-यापन करना पसंद करते हैं”
★★मूलवासियों का जुमला“अपने मूल वासस्थान पर हक की दावेदारी में विश्वभर के मूलनिवासी यह जुमला इस्तेमाल करते हैं कि हम यहाँ ‘अनंत काल से रहते चले आ रहे हैं’।”
★साझी विश्वदृष्टि“भौगोलिक रूप से चाहे मूलवासी अलग-अलग जगहों पर कायम हैं लेकिन जमीन और उस पर आधारित विभिन्न जीवन-प्रणालियों के बारे में इनकी विश्वदृष्टि आश्चर्यजनक रूप से एक जैसी है।”
★★भूमि की हानि“भूमि की हानि का अर्थ है, आर्थिक-संसाधनों के एक आधार की हानि… उस राजनीतिक आज़ादी का क्या मतलब जो जीने के लिए साधन ही न मुहैया कराये?”
★अनुसूचित जनजाति / आदिवासीभारत में मूलवासियों के लिए प्रयुक्त शब्द — कुल जनसंख्या का आठ प्रतिशत
★★विकास की कीमत“ऐसी परियोजनाओं से विस्थापित होने वालों में यह समुदाय सबसे बड़ा है। दरअसल इन लोगों ने विकास की बहुत बड़ी कीमत चुकायी है।”
★वर्ल्ड काउंसिल ऑफ इंडिजिनस पीपल1975 में गठन; UN में परामर्शदायी परिषद् का दर्ज़ा — और 10 अन्य स्वयंसेवी संगठनों को भी

भाग 9 — भ्रम-युग्म : यहीं गलती होती हैध्यान

युग्मकैसे अलग पहचानें
★★साझी संपदा बनाम वैश्विक संपदा“चारागाह किसका है?” → गाँव का = साझी संपदा। “अंटार्कटिका किसका है?” → किसी का नहीं = वैश्विक संपदा।
★★1992 बनाम 1997 बनाम 2002पृथ्वी सम्मेलन + UNFCCC बनाम क्योटो प्रोटोकॉल बनाम भारत का हस्ताक्षर और अनुमोदन
★UNFCCC बनाम क्योटो प्रोटोकॉलUNFCCC = सिद्धांतों की रूपरेखा (1992); क्योटो = उन्हीं सिद्धांतों के आलोक में बना समझौता (1997)
★बर्टलैंड रिपोर्ट बनाम लिमिट्स टू ग्रोथ‘अवर कॉमन फ्यूचर’, 1987 — टिकाऊ विकास की चेतावनी बनाम ‘क्लब ऑव रोम’, 1972 — संसाधनों के विनाश का अंदेशा
★अंटार्कटिका संधि बनाम पर्यावरणीय न्यायाचार1959 बनाम 1991
★1987 के दो पड़ावमॉन्ट्रियल न्यायाचार (ओज़ोन) और बर्टलैंड रिपोर्ट (टिकाऊ विकास) — दोनों 1987 के हैं
★★26% बनाम 90% बनाम 70%26% = विश्व का निर्जन क्षेत्र · 90% = स्थलीय हिम · 70% = धरती का स्वच्छ जल
★★30% बनाम 64%30% = खाड़ी का तेल-उत्पादन में हिस्सा · 64% = ज्ञात तेल-भंडार में हिस्सा
★सऊदी अरब बनाम इराकसऊदी — कुल भंडार का एक चौथाई और सबसे बड़ा उत्पादक · इराक — ज्ञात भंडार में दूसरा; 112 अरब बैरल से ज्यादा का अनुमान
★★3.8 बनाम 0.9 बनाम 1.6 टनविश्व औसत (2000) बनाम भारत (2000) बनाम भारत (2030 अनुमान)
★★उत्तरी बनाम दक्षिणी अजेंडाउत्तर — ओज़ोन छेद और तापवृद्धि बनाम दक्षिण — आर्थिक विकास और पर्यावरण प्रबंधन का रिश्ता
★★उत्तरी बनाम दक्षिणी वन-दृष्टिउत्तर — वन ‘निर्जन प्रांत’; “मनुष्य प्रकृति का हिस्सा नहीं” बनाम दक्षिण — “लोग वनों में भी रहते हैं”
★फ्रैंकलिन बनाम नर्मदाफ्रैंकलिन (ऑस्ट्रेलिया) = विश्व का पहला बाँध-विरोधी आंदोलन · नर्मदा = भारत का सबसे प्रसिद्ध
! 30 करोड़ बनाम 8 प्रतिशतविश्व भर में मूलवासियों की कुल संख्या बनाम भारत की जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों का हिस्सा
! मूलवासी बनाम शरणार्थी/विस्थापितमूलवासी अपनी ही भूमि पर हैं — वे न शरणार्थी हैं, न स्वेच्छा से आए आप्रवासी। (अध्याय 5 के पदों से मिलाइए मत।)
! ‘अध्याय सात’ का संदर्भ! पृ. 82 का यह संदर्भ अब अध्याय 5 की ओर इशारा करता है, अध्याय 7 की ओर नहीं

भाग 10 — याद रखने के सूत्र

सूत्रक्या याद रहेगा
“जवाब ताकत से तय होते हैं”पूरे अध्याय की धुरी
“निर्जन कम, बर्फ सबसे ज्यादा, पानी बीच में”26% · 90% · 70% (अंटार्कटिका)
“आज कम निकालते हैं, कल सबसे ज्यादा उन्हीं के पास”30% उत्पादन बनाम 64% भंडार
“सिद्धांत 92, समझौता 97, भारत 2002”UNFCCC · क्योटो · भारत का अनुमोदन
“गाँव का चारागाह बनाम किसी का नहीं अंटार्कटिका”साझी संपदा बनाम वैश्विक संपदा
“वायु–बर्फ–समुद्र–अंतरिक्ष”चार वैश्विक संपदाएँ
“उत्तर कहता है वन खाली हैं, दक्षिण कहता है वहाँ लोग हैं”दोनों वन-दृष्टियाँ
“श्रद्धा ने बचाया, कमी ने नहीं”देवस्थान का कुंजी-वाक्य
“0.9 बनाम 3.8”भारत का पूरा जलवायु-तर्क
“सबसे बड़ी कीमत उन्होंने चुकायी जिनकी आवाज़ सबसे कम है”मूलवासी-खंड का निष्कर्ष