खंड क — NCERT प्रश्नावली (पृ. 112) के पूर्ण उत्तर, प्रश्न 1 से 11 खंड ख — 1 अंक · खंड ग — 2 अंक · खंड घ — 4 अंक · खंड ङ — 6 अंक खंड च — दावा-कारण (CBSE प्रारूप) · खंड छ — स्रोत-आधारित
प्रश्न 1. वैश्वीकरण के बारे में कौन-सा कथन सही है?
✓ सही विकल्प: (घ) — “वैश्वीकरण एक बहुआयामी परिघटना है।”
आधार: पाठ्यपुस्तक शब्दश: कहती है — “वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है। इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अवतार हैं और इनके बीच ठीक-ठीक भेद किया जाना चाहिए।”
बाकी विकल्प क्यों गलत हैं:
| विकल्प | ! क्यों गलत |
|---|---|
| (क) वैश्वीकरण सिर्फ आर्थिक परिघटना है | “यह मान लेना ग़लत है कि वैश्वीकरण केवल आर्थिक परिघटना है।” (शब्दश: खंडन) |
| (ख) वैश्वीकरण की शुरुआत 1991 में हुई | ! 1991 भारत के आर्थिक सुधारों का वर्ष है। वैश्वीकरण के बारे में पाठ कहता है — “वैश्वीकरण मानव-इतिहास के अधिकांश समय जारी रहा है” और उसका “मजबूत ऐतिहासिक आधार” है |
| (ग) वैश्वीकरण और पश्चिमीकरण समान हैं | ! ये समान नहीं। पश्चिमी प्रभाव वैश्वीकरण का एक पहलू है, पूरी परिघटना नहीं — और पाठ सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण का भी उल्लेख करता है |
प्रश्न 2. वैश्वीकरण के प्रभाव के बारे में कौन-सा कथन सही है?
✓ सही विकल्प: (क) — “विभिन्न देशों और समाजों पर वैश्वीकरण का प्रभाव विषम रहा है।”
आधार: “वैश्वीकरण का प्रभाव बड़ा विषम रहा है — यह कुछ समाजों को बाकियों की अपेक्षा और समाज के एक हिस्से को बाकी हिस्सों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित कर रहा है।”
बाकी विकल्प क्यों गलत हैं:
- (ख) “प्रभाव समान रहा है” — ! ठीक उलटा; और पाठ यह भी कहता है कि “हर जगह एक समान नीति अपना लेने का मतलब यह नहीं होता कि हर जगह परिणाम भी समान होंगे।”
- (ग) “असर सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित है” — ! गलत; प्रभाव राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक — तीनों।
- (घ) “अनिवार्यतया सांस्कृतिक समरूपता आती है” — ! ‘अनिवार्यतया’ ही इसे गलत बनाता है। पाठ बताता है कि उलटा प्रभाव भी होता है — सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण।
प्रश्न 3. वैश्वीकरण के कारणों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
✓ सही विकल्प: (क) — “वैश्वीकरण का एक महत्त्वपूर्ण कारण प्रौद्योगिकी है।”
आधार: “हालाँकि वैश्वीकरण के लिए कोई एक कारक जिम्मेवार नहीं, फिर भी प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारण साबित हुई है।” — ध्यान दीजिए: विकल्प में ‘एक महत्त्वपूर्ण कारण’ लिखा है, ‘एकमात्र’ नहीं। यही इसे सही बनाता है।
बाकी विकल्प क्यों गलत हैं:
- (ख) “जनता का एक खास समुदाय वैश्वीकरण का कारण है” — ! पाठ में ऐसा कोई दावा नहीं।
- (ग) “वैश्वीकरण का जन्म संयुक्त राज्य अमरीका में हुआ” — ! गलत; वैश्वीकरण “मानव-इतिहास के अधिकांश समय जारी रहा है” और भारत का अपना वैश्वीकरण-इतिहास “कई सदियों का है।”
- (घ) “एकमात्र कारण आर्थिक धरातल पर पारस्परिक निर्भरता है” — ! ‘एकमात्र’ शब्द इसे गलत बनाता है — “कोई एक कारक जिम्मेवार नहीं।”
प्रश्न 4. वैश्वीकरण के बारे कौन-सा कथन सही है?
✓ सही विकल्प: (घ) — “वैश्वीकरण का संबंध विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव से है।”
आधार: “यहाँ सबसे ज़रूरी बात है ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है।”
बाकी विकल्प क्यों गलत हैं:
- (क) “सिर्फ वस्तुओं की आवाजाही से है” — ! चार प्रवाह हैं — विचार, पूँजी, वस्तु और लोग।
- (ख) “वैश्वीकरण में मूल्यों का संघर्ष नहीं होता” — ! गलत; सारिका की कहानी ही ‘जीवन-मूल्यों के बीच दुविधा’ का उदाहरण है; और वैलेन्टाईन-डे तथा पश्चिमी पोशाकों का विरोध भी यही दिखाता है।
- (ग) “सेवाओं का महत्त्व गौण है” — ! गलत; जनार्दन की कॉल-सेंटर वाली कहानी से ही अध्याय शुरू होता है, और वह सेवाओं के वैश्वीकरण का उदाहरण है।
प्रश्न 5. वैश्वीकरण के बारे में कौन-सा कथन ग़लत है?
✓ ग़लत कथन: (ग) — “वैश्वीकरण के पैरोकारों का तर्क है कि इससे सांस्कृतिक समरूपता आएगी।”
★★यह इस पूरी प्रश्नावली का सबसे बड़ा जाल है — इसे ध्यान से समझिए: ‘सांस्कृतिक समरूपता’ का तर्क आलोचकों का है, पैरोकारों का नहीं। पाठ के अनुसार यह भय है — “इस भय को बल मिला है कि यह प्रक्रिया विश्व की संस्कृतियों को खतरा पहुँचाएगी।” और “विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।” — कोई पैरोकार इसे उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
बाकी तीन कथन सही हैं:
| विकल्प | ✓ आधार |
|---|---|
| (क) समर्थकों का तर्क — आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी | “इससे समृद्धि बढ़ती है और ‘खुलेपन’ के कारण ज्यादा से ज्यादा आबादी की खुशहाली बढ़ती है।” |
| (ख) आलोचकों का तर्क — आर्थिक असमानता बढ़ेगी | “धनिकों को और ज्यादा धनी… और गरीब को और ज्यादा ग़रीब बनाती है।” |
| (घ) आलोचकों का तर्क — सांस्कृतिक समरूपता आएगी | ✓ यही सही है — समरूपता आलोचकों का तर्क है |
! याद रखने का सूत्र: “समरूपता का डर आलोचक दिखाते हैं, पैरोकार नहीं।”
प्रश्न 6. विश्वव्यापी ‘पारस्परिक जुड़ाव’ क्या है? इसके कौन-कौन से घटक हैं?
(क) अर्थ ★★‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ वैश्वीकरण की केंद्रीय बात है। पाठ्यपुस्तक के शब्दों में —
“यहाँ सबसे ज़रूरी बात है ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है।”
यानी यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि वह स्थिति है जिसमें विश्व के विभिन्न भाग एक-दूसरे से इस तरह जुड़ जाते हैं कि एक जगह की घटना दूसरी जगह महसूस होती है।
(ख) ★★चार घटक — यही ‘प्रवाह’ हैं
| # | घटक | पाठ्यपुस्तक के शब्दों में |
|---|---|---|
| 1 | विचारों का प्रवाह | “विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्सों में पहुँचना” |
| 2 | पूँजी का प्रवाह | “पूँजी का एक से ज्यादा जगहों पर जाना” |
| 3 | वस्तुओं का प्रवाह | “वस्तुओं का कई-कई देशों में पहुँचना और उनका व्यापार” |
| 4 | लोगों का प्रवाह | “बेहतर आजीविका की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों की आवाजाही” |
(ग) ★इसकी दो विशेषताएँ
1निरंतरता — यह जुड़ाव प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है, किसी एक घटना से नहीं।
2★★चेतना — “यहाँ ज़रूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे हैं कि वे आपस में जुड़े हुए हैं। आज हम इस बात को लेकर सजग हैं कि विश्व के एक हिस्से में घटने वाली घटना का प्रभाव विश्व के दूसरे हिस्से में भी पड़ेगा।”
(घ) ★दो उदाहरण जो पाठ स्वयं देता है
- “बर्ड फ्लू अथवा ‘सुनामी’ किसी एक राष्ट्र की हदों में सिमटे नहीं रहते। ये घटनाएँ राष्ट्रीय-सीमाओं का जोर नहीं मानतीं।”
- “जब बड़ी आर्थिक घटनाएँ होती हैं तो उनका प्रभाव… विश्व भर में महसूस किया जाता है।”
(ङ) ! पर एक ज़रूरी असमानता
“इन प्रवाहों की गति में अंतर हो सकता है। …विश्व के विभिन्न भागों के बीच पूँजी और वस्तु की गतिशीलता लोगों की आवाजाही की तुलना में ज्यादा तेज और व्यापक होगी।” — यानी जुड़ाव सब क्षेत्रों में बराबर नहीं है।
प्रश्न 7. वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी का क्या योगदान है?
(क) ★★बुनियादी कथन
“हालाँकि वैश्वीकरण के लिए कोई एक कारक जिम्मेवार नहीं, फिर भी प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारण साबित हुई है।”
(ख) संचार की क्रांति ★“इसमें कोई शक नहीं कि टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप के नवीनतम आविष्कारों ने विश्व के विभिन्न भागों के बीच संचार की क्रांति कर दिखायी है।”
(ग) ★प्रवाहों को संभव बनाना “विचार, पूँजी, वस्तु और लोगों की विश्व के विभिन्न भागों में आवाजाही की आसानी प्रौद्योगिकी में हुई तरक्की के कारण संभव हुई है।”
(घ) ★★सोचने के तरीके पर असर — यह सबसे गहरा योगदान है
“शुरू-शुरू में जब छपाई (मुद्रण) की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी। इसी तरह आज हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव हमारे सोचने के तरीके पर पड़ेगा। हम अपने बारे में जिस ढंग से सोचते हैं और हम सामूहिक जीवन के बारे में जिस तर्ज़ पर सोचते हैं — प्रौद्योगिकी का उस पर असर पड़ेगा।”
(ङ) ★राज्य की ताकत बढ़ाने में भी “अब राज्यों के हाथ में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी मौजूद है जिसके बूते राज्य अपने नागरिकों के बारे में सूचनाएँ जुटा सकते हैं। …नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।”
(च) ! पर यह सीमा भी लिखिए — यही उत्तर को पूरा बनाती है
“बहरहाल, संचार-साधनों की तरक्की और उनकी उपलब्धता मात्र से वैश्वीकरण अस्तित्व में आया हो — ऐसी बात नहीं। यहाँ ज़रूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे हैं कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।”
निष्कर्ष: प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण की ‘अपरिहार्य’ शर्त है, पर ‘पर्याप्त’ शर्त नहीं। तकनीक ने रास्ता बनाया; पर उस रास्ते पर चलने का फ़ैसला ‘जुड़ाव की चेतना’ से आया।
प्रश्न 8. वैश्वीकरण के संदर्भ में विकासशील देशों में राज्य की बदलती भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें
★★पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है कि इसका उत्तर देते समय “कम से कम तीन पहलुओं का ध्यान रखना होगा।” तीनों लिखिए — यही पूरा उत्तर है।
पहला पहलू — राज्य की क्षमता में कमीध्यान
1“वैश्वीकरण के कारण राज्य की क्षमता यानी सरकारों को जो करना है उसे करने की ताकत में कमी आती है।”
2★★“पूरी दुनिया में कल्याणकारी राज्य की धारणा अब पुरानी पड़ गई है और इसकी जगह न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य ने ले ली है।”
3“राज्य अब कुछेक मुख्य कामों तक ही अपने को सीमित रखता है, जैसे कानून और व्यवस्था को बनाये रखना तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा करना।”
4! “इस तरह के राज्य ने अपने को पहले के कई ऐसे लोक-कल्याणकारी कामों से खींच लिया है जिनका लक्ष्य
आर्थिक और सामाजिक-कल्याण होता था।”
5★★“लोक कल्याणकारी राज्य की जगह अब बाज़ार आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का प्रमुख निर्धारक है।”
6★“पूरे विश्व में बहुराष्ट्रीय निगम अपने पैर पसार चुके हैं और उनकी भूमिका बढ़ी है। इससे सरकारों के
अपने दम पर फ़ैसला करने की क्षमता में कमी आती है।”
! विकासशील देशों के लिए इसका विशेष अर्थ: “आर्थिक वैश्वीकरण से आबादी के एक बड़े छोटे तबके को फायदा होगा जबकि नौकरी और जन-कल्याण (शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई की सुविधा आदि) के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोग बदहाल हो जाएँगे।” — इसी कारण ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ की माँग उठती है।
✓ दूसरा पहलू — पर राज्य की प्रधानता को चुनौती नहीं मिली
1“वैश्वीकरण से हमेशा राज्य की ताकत में कमी आती हो — ऐसी बात नहीं।”
2★★“राजनीतिक समुदाय के आधार के रूप में राज्य की प्रधानता को कोई चुनौती नहीं मिली है और राज्य इस अर्थ
में आज भी प्रमुख है।”
3“विश्व की राजनीति में अब भी विभिन्न देशों के बीच मौजूद पुरानी ईर्ष्या और प्रतिद्वंद्विता की दखल है।”
4★“राज्य कानून और व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अपने अनिवार्य कार्यों को पूरा कर रहे हैं और बहुत सोच-समझकर अपने कदम उन्हीं दायरों से खींच रहे हैं जहाँ उनकी मर्जी हो।”
उत्तर देखिए
यानी पीछे हटना मजबूरी नहीं, चुनाव भी है।
5★★“राज्य अभी भी महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं।”
तीसरा पहलू — बल्कि ताकत बढ़ी भी है(यह सबसे ज्यादा छूटता है)★★
1“वस्तुत: कुछ मायनों में वैश्वीकरण के फलस्वरूप राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है।”
2“अब राज्यों के हाथ में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी मौजूद है जिसके बूते राज्य अपने नागरिकों के बारे में सूचनाएँ जुटा सकते हैं।”
3“इस सूचना के दम पर राज्य ज्यादा कारगर ढंग से काम कर सकते हैं। उनकी क्षमता बढ़ी है; कम नहीं हुई।”
4★★“इस प्रकार नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।”
आलोचनात्मक निष्कर्ष★★
राज्य की भूमिका ‘कम’ या ‘ज्यादा’ नहीं हुई — वह बदल गई है। वह लोक-कल्याण से हटा (क्षमता में कमी), पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा में बना रहा (प्रधानता बरकरार), और निगरानी तथा सूचना के क्षेत्र में और मज़बूत हुआ (ताकत में इजाफा)। ! विकासशील देशों के लिए चिंता यह है कि जिस क्षेत्र से राज्य हटा — जन-कल्याण — वही वह क्षेत्र है जिस पर उनकी अधिकांश आबादी सबसे ज्यादा निर्भर है। यही ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ की बहस का मूल है।
प्रश्न 9. वैश्वीकरण की आर्थिक परिणतियाँ क्या हुई हैं? इस संदर्भ में वैश्वीकरण ने भारत पर कैसे प्रभाव डाला है?
भाग 1 — आर्थिक परिणतियाँ
(क) ★पहले सही कसौटी तय कीजिए “आर्थिक वैश्वीकरण को अधिक व्यापक नजर से समझने के लिए हमें इससे होने वाले आर्थिक फायदों के बँटवारे के अर्थ में सोचना चाहिए — यानी किसे वैश्वीकरण से सबसे ज्यादा फायदा हुआ और किसे सबसे कम। यह भी देखने की ज़रूरत है कि वैश्वीकरण के कारण किसने नुकसान उठाया।” ! और यह भी: “कुछ आर्थिक प्रवाह स्वेच्छा से होते हैं जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और ताकतवर देशों द्वारा जबरन लादे जाते हैं।”
(ख) ★★चार प्रवाहों की स्थिति
| प्रवाह | परिणति |
|---|---|
| वस्तु | “वस्तुओं के व्यापार में इजाफा हुआ है”; आयात पर प्रतिबंध कम हो गए |
| पूँजी | “पूँजी की आवाजाही पर अब कहीं कम प्रतिबंध हैं” — “धनी देश के निवेशकर्ता… विकासशील देशों में निवेश कर सकते हैं जहाँ उन्हें ज्यादा मुनाफा होगा” |
| विचार | “विचारों के सामने राष्ट्र की सीमाओं की बाधा नहीं रही” — इंटरनेट और कंप्यूटर से जुड़ी सेवाएँ |
| !★★लोग | “जिस सीमा तक वस्तुओं और पूंजी का प्रवाह बढ़ा है उस सीमा तक लोगों की आवाजाही नहीं बढ़ सकी है।” — कारण: “विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को बड़ी सतर्कता से अभेद्य बनाए रखते हैं।” |
(ग) ! एक ही नीति, अलग-अलग परिणाम “हर जगह एक समान नीति अपना लेने का मतलब यह नहीं होता कि हर जगह परिणाम भी समान होंगे।”
(घ) ★★जनमत का बँटवारा
| पक्ष | तर्क |
|---|---|
| आलोचक | “आबादी के एक बड़े छोटे तबके को फायदा होगा जबकि नौकरी और जन-कल्याण के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोग बदहाल हो जाएँगे।” → माँग: ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ |
| तीखे आलोचक | “‘सामाजिक सुरक्षा-कवच’ की बात अव्यावहारिक है”; ★“कुछ अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक वैश्वीकरण को विश्व का ‘पुन:उपनिवेशीकरण’ कहा है।” |
| समर्थक | “समृद्धि बढ़ती है”; “‘खुलेपन’ के कारण ज्यादा से ज्यादा आबादी की खुशहाली बढ़ती है”; “अपरिहार्य है और इतिहास की धारा को अवरुद्ध करना कोई बुद्धिमानी नहीं।” |
| मध्यमार्गी | “चुनौतियाँ पेश की हैं और सजग-सचेत होकर पूरी बुद्धिमत्ता से इसका सामना किया जाना चाहिए।” |
(ङ) ★और इस पर सब सहमत हैं *“‘पारस्परिक निर्भरता’ की रफ्तार अब तेज हो चली है।* वैश्वीकरण के फलस्वरूप विश्व के विभिन्न भागों में सरकार, व्यवसाय तथा लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ रहा है।”
भाग 2 — भारत पर प्रभाव
(क) ! औपनिवेशिक दौर “ब्रिटेन के साम्राज्यवादी मंसूबों के परिणामस्वरूप भारत आधारभूत वस्तुओं और कच्चे माल का निर्यातक तथा बने-बनाये सामानों का आयातक देश था।”
(ख) ★आज़ादी के बाद — ‘संरक्षणवाद’
- “हमने फ़ैसला किया कि दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद सामान बनाया जाए।”
- “हमने यह भी फ़ैसला किया कि दूसरों देशों को निर्यात की अनुमति नहीं होगी ताकि हमारे अपने उत्पादक चीजों को बनाना सीख सकें।”
- ! कीमत: “कुछ क्षेत्रों में तरक्की हुई तो कुछ ज़रूरी क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितने के वे हकदार थे। भारत में आर्थिक-वृद्धि की दर धीमी रही।”
(ग) ★★1991 — मोड़ “1991 में, वित्तीय संकट से उबरने और आर्थिक वृद्धि की ऊँची दर हासिल करने की इच्छा से भारत में आर्थिक-सुधारों की योजना शुरू हुई। इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों पर आयद बाधाएँ हटायी गईं। इन क्षेत्रों में व्यापार और विदेशी निवेश भी शामिल थे।”
(घ) ★★और वह कसौटी जो उत्तर का अंत होनी चाहिए
“यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत के लिए यह सब कितना अच्छा साबित हुआ है, क्योंकि अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।”
(ङ) ★ठोस उदाहरण जो पाठ में बिखरे हैं
- ✓ लाभ: जनार्दन (कॉल-सेंटर की नौकरी), रामधारी (सस्ती और अच्छी क्वालिटी की साइकिल), सारिका (नये अवसर, स्वतंत्र कॅरिअर)
- ! हानि: किसानों की आत्महत्या (महंगे बीज), खुदरा दुकानदारों का भय, और “विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ा है वैसे-वैसे हमारे छोटे स्वदेशी उद्योगों के ग्राहक कम हुए हैं और ये उद्योग बंद हो रहे हैं।” (पृ. 110)
प्रश्न 10. क्या आप इस तर्क से सहमत हैं कि वैश्वीकरण से सांस्कृतिक विभिन्नता बढ़ रही है?
★★संतुलित उत्तर: हाँ, आंशिक रूप से सहमत — क्योंकि पाठ्यपुस्तक स्वयं दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ चलती बताती है।
भाग 1 — ✓ हाँ, विभिन्नता बढ़ रही है(सहमति के तर्क)
(क) पाठ्यपुस्तक का स्पष्ट कथन
★★“सांस्कृतिक समरुपता वैश्वीकरण का एक पहलू है तो वैश्वीकरण से इसका उलटा प्रभाव भी पैदा हुआ है। वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है। इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण कहते हैं।”
(ख) ★क्योंकि संस्कृति जड़ नहीं होती “संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती। हर संस्कृति हर समय बाहरी प्रभावों को स्वीकार करते रहती है। …कभी-कभी बाहरी प्रभावों से हमारी पसंद-नापसंद का दायरा बढ़ता है तो कभी इनसे परंपरागत सांस्कृतिक मूल्यों को छोड़े बिना संस्कृति का परिष्कार होता है।”
(ग) ★★दो ठोस उदाहरण
1“बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है इसलिए बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है। इससे हुआ मात्र इतना है कि हमारे भोजन की पसंद में एक चीज़ और शामिल हो गई है।”
उत्तर देखिए
विकल्प घटे नहीं, बढ़े।
2★★“नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है… मज़ेदार बात तो यह है कि इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है। जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है।”
उत्तर देखिए
★यह सबसे मज़बूत उदाहरण है — प्रभाव एकतरफा नहीं, दोनों दिशाओं में जाता है।
(घ) पाठ का अपना निष्कर्ष “इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि सांस्कृतिक प्रभाव एकतरफा नहीं होता।”
भाग 2 — पर दूसरा पक्ष भी सच है(असहमति के तर्क)ध्यान
(क) समरूपता का दबाव वास्तविक है “वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभावों को देखते हुए इस भय को बल मिला है कि यह प्रक्रिया विश्व की संस्कृतियों को खतरा पहुँचाएगी। …वैश्वीकरण सांस्कृतिक समरूपता ले आता है।”
(ख) ★और यह ‘विश्व-संस्कृति’ नहीं है ! “सांस्कृतिक समरूपता का यह अर्थ नहीं कि किसी विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है। विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।”
(ग) ‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ का तर्क “राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभुत्वशाली संस्कृति कम ताकतवर समाजों पर अपनी छाप छोड़ती है और संसार वैसा ही दीखता है जैसा ताकतवर संस्कृति इसे बनाना चाहती है।” → “विभिन्न संस्कृतियाँ अब अपने को प्रभुत्वशाली अमरीकी ढर्रे पर ढालने लगी हैं।”
(घ) ! और खतरा सबके लिए है “चूँकि इससे पूरे विश्व की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धीरे-धीरे खत्म होती है इसलिए यह केवल गरीब देशों के लिए ही नहीं बल्कि समूची मानवता के लिए खतरनाक है।”
(ङ) और ताकत का सवाल गौण नहीं है “इसका मतलब यह नहीं कि संस्कृतियों के मेलजोल में उनकी ताकत का सवाल गौण है।”
निष्कर्ष★★
मैं इस तर्क से सहमत हूँ कि वैश्वीकरण से सांस्कृतिक विभिन्नता बढ़ रही है — पर केवल इस शर्त के साथ कि यह पूरी तस्वीर नहीं है। पाठ्यपुस्तक दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ चलती दिखाती है — समरूपता और वैभिन्नीकरण। इसलिए सही उत्तर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ नहीं, बल्कि ‘दोनों’ है — और जो प्रबल होगी वह इस बात पर निर्भर करेगा कि किसी समाज के पास अपनी संस्कृति को नया रूप देने की कितनी क्षमता और आत्मविश्वास है। ★‘जीन्स पर खादी का कुर्ता’ इसी आत्मविश्वास का प्रतीक है।
प्रश्न 11. वैश्वीकरण ने भारत को कैसे प्रभावित किया है और भारत कैसे वैश्वीकरण को प्रभावित कर रहा है?
भाग 1 — वैश्वीकरण ने भारत को कैसे प्रभावित किया★
(क) आर्थिक रूप से
- ऐतिहासिक: औपनिवेशिक दौर में कच्चे माल का निर्यातक, बने-बनाये सामानों का आयातक।
- आज़ादी के बाद: ‘संरक्षणवाद’ — और उसकी कीमत (स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा की उपेक्षा; धीमी वृद्धि-दर)।
- ★1991: आर्थिक सुधार; व्यापार और विदेशी निवेश पर बाधाएँ हटीं।
- वस्तुएँ: रामधारी की चीन में बनी साइकिल और अमरीका में बनी बार्बी डॉल — दोनों भारत में बिक रही हैं।
- ! और उलटा असर भी: किसानों की आत्महत्या (बहुराष्ट्रीय कंपनी के महंगे बीज), खुदरा दुकानदारों का भय, और “हमारे छोटे स्वदेशी उद्योगों के ग्राहक कम हुए हैं और ये उद्योग बंद हो रहे हैं।”
(ख) सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से
- ★जनार्दन — कॉल-सेंटर; “दफ्तर में घुसने के साथ ही वह जॉन बन जाता है”; छुट्टियाँ अमरीकी कैलेंडर से।
- ★★सारिका — परिवार में पहली पीढ़ी की शिक्षित; नये अवसर जो “परिवार की महिलाएँ सोच भी नहीं सकती थीं” — पर साथ में जीवन-मूल्यों के बीच दुविधा।
- पसंदों में बदलाव — “हम जो कुछ खाते-पीते-पहनते हैं अथवा सोचते हैं — सब पर इसका असर नज़र आता है।”
- ! और तनाव भी — पश्चिमी परिधान पहनने वाली छात्राओं को धमकी; वैलेन्टाईन-डे का विरोध।
(ग) राजनीतिक रूप से
- कल्याणकारी राज्य → न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य की ओर बदलाव।
- ! पर राज्य की प्रधानता बरकरार, और नई प्रौद्योगिकी से उसकी ताकत बढ़ी भी।
भाग 2 — भारत कैसे वैश्वीकरण को प्रभावित कर रहा है(यह हिस्सा अक्सर छूट जाता है)★★
(क) सेवाओं के निर्यातक के रूप में ★जनार्दन का कॉल-सेंटर भारत की सबसे बड़ी वैश्विक भूमिका का प्रतीक है — भारत सेवाओं के वैश्वीकरण में आपूर्तिकर्ता है, केवल उपभोक्ता नहीं। “जनार्दन सेवाओं के वैश्वीकरण में हिस्सेदारी कर रहा है।”
(ख) पूँजी और अधिग्रहण के रूप में ★“यूरोप स्थित एक बड़ी और अपनी प्रतियोगी कंपनी को एक भारतीय कंपनी ने खरीद लिया जबकि खरीदी गई कंपनी के मालिक इस खरीददारी का विरोध कर रहे थे।” → ★★यह पाठ्यपुस्तक का सबसे मज़बूत प्रमाण है कि — “ज़रूरी नहीं कि प्रभाव की दिशा हमेशा धनी मुल्कों से ग़रीब मुल्कों की ओर गतिशील हो।”
(ग) ★★सांस्कृतिक रूप से — ‘जीन्स पर कुर्ता’ “नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है… इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है। जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है।” — यह सांस्कृतिक प्रवाह की उल्टी दिशा है।
(घ) ★प्रतिरोध के मंच के रूप में
- वर्ल्ड सोशल फोरम की चौथी बैठक 2004 में मुंबई में हुई — यानी भारत वैश्वीकरण-विरोध के वैश्विक मंच का मेज़बान बना।
- ★★‘नीम’ के पेटेंट का विरोध — “कुछ वनस्पतियाँ मसलन ‘नीम’ को अमरीकी और यूरोपीय फर्मों ने पेटेन्ट कराने के प्रयास किए। इसका भी कड़ा विरोध हुआ।” → यह भारत द्वारा वैश्विक बौद्धिक-संपदा व्यवस्था को प्रभावित करने का उदाहरण है।
- इंडियन सोशल फोरम; औद्योगिक श्रमिक और किसानों के संगठनों द्वारा बहुराष्ट्रीय निगमों के प्रवेश का विरोध।
(ङ) ★फिल्म और लोकप्रिय संस्कृति पाठ मुंबई के फिल्म-निर्माता पर हॉलीवुड से कहानी उठाने के आरोप का उल्लेख करता है — यह दिखाता है कि भारतीय फिल्म-उद्योग वैश्विक सांस्कृतिक प्रवाह में सक्रिय भागीदार है।
निष्कर्ष★★
भारत वैश्वीकरण का केवल ‘प्राप्तकर्ता’ नहीं, ‘भागीदार’ भी है। वस्तुओं में वह ज़्यादा आयातक है, पर सेवाओं में निर्यातक; पूँजी में उसने विदेशी कंपनियाँ खरीदी हैं; संस्कृति में उसने ‘जीन्स पर कुर्ता’ वापस भेजा है; और नीतियों में उसने ‘नीम’ के पेटेंट का विरोध करके वैश्विक नियमों को चुनौती दी है। ★और अंतिम कसौटी वही है जो पाठ्यपुस्तक देती है — “आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।”
खंड ख — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)
1वैश्वीकरण की बुनियादी बात क्या है?
उत्तर देखिए
प्रवाह
2★चार प्रवाह कौन-से हैं?
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विचार, पूँजी, वस्तु और लोग
3★★वैश्वीकरण में ‘सबसे ज़रूरी बात’ क्या है?
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‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’
4वैश्वीकरण किस प्रकार की परिघटना है? — बहुआयामी — राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक
5वैश्वीकरण का प्रभाव कैसा रहा है?
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विषम
6समकालीन वैश्वीकरण में ‘नयी बात’ क्या है?
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प्रवाहों की गति और उनके प्रसार का धरातल
7★वैश्वीकरण का ‘अपरिहार्य कारण’ क्या है?
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प्रौद्योगिकी
8कौन-से तीन आविष्कार गिनाए गए हैं?
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टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप
9★छपाई की तकनीक ने किसकी आधारशिला रखी?
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राष्ट्रवाद की
10कौन-सी दो घटनाएँ ‘राष्ट्रीय-सीमाओं का जोर नहीं मानतीं’?
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बर्ड फ्लू और सुनामी
11कल्याणकारी राज्य की जगह किसने ली?
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न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य
12★आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का प्रमुख निर्धारक अब कौन है?
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बाज़ार
13★★वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव के तीन पहलू?
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क्षमता में कमी · प्रधानता को चुनौती नहीं · ताकत में इजाफा
14किन दो संस्थाओं का नाम आर्थिक वैश्वीकरण के साथ सबसे पहले आता है?
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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO)
15! कौन-सा प्रवाह उतना नहीं बढ़ा जितने बाकी? — लोगों का — कारण वीजा-नीति
16★‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ की माँग क्यों उठती है? — ताकि “जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं उन पर वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके”
17★★कुछ अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक वैश्वीकरण को क्या कहा है?
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विश्व का ‘पुन:उपनिवेशीकरण’
18मध्यमार्गी समर्थकों का तर्क?
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“चुनौतियाँ पेश की हैं और सजग-सचेत होकर पूरी बुद्धिमत्ता से इसका सामना किया जाना चाहिए”
19★‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ का क्या अर्थ है?
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“विभिन्न संस्कृतियाँ अब अपने को प्रभुत्वशाली अमरीकी ढर्रे पर ढालने लगी हैं”
20★★‘सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण’ किसे कहते हैं?
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“वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है”
21‘बर्गर’ के बारे में पाठ क्या कहता है?
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“बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है इसलिए बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है”
22★‘जीन्स के ऊपर कुर्ता’ किस बात का उदाहरण है?
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सांस्कृतिक प्रभाव एकतरफा नहीं होता
23औपनिवेशिक दौर में भारत क्या था?
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आधारभूत वस्तुओं और कच्चे माल का निर्यातक; बने-बनाये सामानों का आयातक
24★भारत में आर्थिक सुधार कब शुरू हुए?
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1991 में
25संरक्षणवाद के दौर में किन तीन क्षेत्रों की उपेक्षा हुई?
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स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा
26★★भारत के लिए ‘अंतिम कसौटी’ क्या है?
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“आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने” (ऊँची वृद्धि-दर नहीं)
271999 में कहाँ WTO की मंत्री-स्तरीय बैठक और विरोध हुआ?
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सिएट्ल में
28★★वर्ल्ड सोशल फोरम की पहली बैठक कब और कहाँ?
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2001, ब्राजील के पोर्तो अलेग्रे में
29WSF की चौथी बैठक कहाँ हुई?
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2004 में मुंबई में
30WSF की हाल की बैठक कब और कहाँ?
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फरवरी 2024 में नेपाल में
31★भारत में वैश्वीकरण-विरोध का एक मंच?
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इंडियन सोशल फोरम
32★★किस वनस्पति के पेटेंट का भारत में कड़ा विरोध हुआ?
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‘नीम’
33दक्षिणपंथी खेमा किन तीन चीजों का विरोध करता है?
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विदेशी टी.वी. चैनल, वैलेन्टाईन-डे और पश्चिमी पोशाकें
34★WSF का नारा क्या है?
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“एक और दुनिया मुमकिन है”
35किस समूह ने 2004 में WSF का ही विरोध किया?
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मुंबई प्रतिरोध 2004
36यह अध्याय पहले कौन-सा था? — अध्याय 9 (QR कोड 12108CH09)
37कॉल-सेन्टर वाले बॉक्स का स्रोत?
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10 जनवरी 2005 का ‘द हिंदू’, रंजीता उर्स की रिपोर्ट
खंड ग — लघु उत्तरीय (2 अंक)
1वैश्वीकरण को ‘प्रवाह’ के रूप में समझाइए।
2‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ से क्या अभिप्राय है?
3वैश्वीकरण को ‘बहुआयामी’ क्यों कहा गया है?
4“वैश्वीकरण का प्रभाव विषम रहा है” — समझाइए।
5समकालीन वैश्वीकरण में ‘नयी बात’ क्या है?
6छपाई की तकनीक और आज की प्रौद्योगिकी में क्या समानता बताई गई है?
7“संचार-साधनों की तरक्की मात्र से वैश्वीकरण अस्तित्व में आया हो — ऐसी बात नहीं।” — व्याख्या कीजिए।
8कल्याणकारी राज्य और न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य में अंतर बताइए।
9वैश्वीकरण से राज्य की ताकत कैसे बढ़ी है?
10आर्थिक वैश्वीकरण को समझने की ‘सही कसौटी’ क्या है?
11लोगों का प्रवाह वस्तुओं और पूँजी जितना क्यों नहीं बढ़ा?
12‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ क्या है और उस पर क्या आलोचना है?
13“आर्थिक वैश्वीकरण विश्व का पुन:उपनिवेशीकरण है” — इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
14वैश्वीकरण के मध्यमार्गी समर्थकों का तर्क क्या है?
15सांस्कृतिक समरूपता का असली अर्थ क्या है?
16‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ क्या है?
17सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण से क्या अभिप्राय है?
18“बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है” — क्यों?
19‘जीन्स के ऊपर खादी का कुर्ता’ किस बात को सिद्ध करता है?
20भारत ने आज़ादी के बाद ‘संरक्षणवाद’ क्यों अपनाया और उसकी क्या कीमत चुकानी पड़ी?
211991 में भारत ने आर्थिक सुधार क्यों शुरू किए?
22वैश्वीकरण के वामपंथी और दक्षिणपंथी आलोचकों में क्या अंतर है?
23“वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं” — समझाइए।
24वर्ल्ड सोशल फोरम क्या है? इसमें कौन शामिल होते हैं?
25भारत में वैश्वीकरण का विरोध किन-किन हलकों से हुआ है?
खंड घ — दीर्घ उत्तरीय (4 अंक)
1वैश्वीकरण की अवधारणा को ‘प्रवाह’ और ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
2पाठ्यपुस्तक की तीन कहानियों (जनार्दन, रामधारी, सारिका) से वैश्वीकरण के तीन अलग-अलग पहलू समझाइए।
3“वैश्वीकरण हर अर्थ में सकारात्मक ही नहीं होता” — पाठ्यपुस्तक के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
4वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी की भूमिका और उसकी सीमा — दोनों पर चर्चा कीजिए।
5वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव के तीनों पहलुओं का वर्णन कीजिए।
6आर्थिक वैश्वीकरण में चार प्रवाहों की स्थिति का तुलनात्मक विवेचन कीजिए।
7आर्थिक वैश्वीकरण पर समर्थकों और आलोचकों के तर्कों का मूल्यांकन कीजिए।
8सांस्कृतिक समरूपता और सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
9भारत के वैश्वीकरण-अनुभव के तीन चरणों का वर्णन कीजिए।
10वैश्वीकरण के वामपंथी और दक्षिणपंथी विरोध की तुलना कीजिए।
11वर्ल्ड सोशल फोरम पर एक टिप्पणी लिखिए।
12भारत में वैश्वीकरण के प्रतिरोध का वर्णन कीजिए।
खंड ङ — निबंधात्मक (6 अंक)
1“वैश्वीकरण एक बहुआयामी परिघटना है और इसका प्रभाव विषम रहा है।” — इस कथन का विस्तृत विवेचन कीजिए।
2वैश्वीकरण के संदर्भ में राज्य की बदलती भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
3आर्थिक वैश्वीकरण की परिणतियों का विवेचन कीजिए और भारत पर उसके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
4“वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक नहीं हैं।” — इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
5वैश्वीकरण ने भारत को कैसे प्रभावित किया है और भारत कैसे वैश्वीकरण को प्रभावित कर रहा है?
6वैश्वीकरण के प्रतिरोध का विवेचन कीजिए। क्या यह प्रतिरोध स्वयं एकजुट है?
खंड च — दावा-कारण (CBSE प्रारूप)
निर्देश: (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं (ग) A सही, R गलत (घ) A गलत, R सही
1A: वैश्वीकरण एक बहुआयामी परिघटना है।
R: इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अवतार हैं।
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उत्तर: (क)
2A: वैश्वीकरण की शुरुआत 1991 में हुई।
R: 1991 में भारत में आर्थिक-सुधारों की योजना शुरू हुई।
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उत्तर: (घ) — ! A गलत है; 1991 भारत के सुधारों का वर्ष है। पाठ के अनुसार वैश्वीकरण “मानव-इतिहास के अधिकांश समय जारी रहा है।”
3A: प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण का अपरिहार्य कारण है।
R: टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप ने संचार की क्रांति कर दिखायी है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (क)
4A: वैश्वीकरण से राज्य केवल कमज़ोर हुआ है।
R: कल्याणकारी राज्य की जगह न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य ने ले ली है।
उत्तर देखिए
उत्तर: (घ) — ! A गलत है; पाठ के अनुसार “नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं” और “राज्य की प्रधानता को कोई चुनौती नहीं मिली है।”
5A: लोगों की आवाजाही वस्तुओं और पूँजी जितनी नहीं बढ़ी।
R: विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को सतर्कता से अभेद्य बनाए रखते हैं।
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उत्तर: (क)
6A: सांस्कृतिक समरूपता का अर्थ है कि एक विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है।
R: विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।
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उत्तर: (घ) — ! A गलत है; पाठ स्पष्ट कहता है “सांस्कृतिक समरूपता का यह अर्थ नहीं कि किसी विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है।”
7A: वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं।
R: संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती; हर संस्कृति हर समय बाहरी प्रभावों को स्वीकार करते रहती है।
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उत्तर: (घ) — ! A गलत है; “यह मान लेना एक भूल है कि वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं।”
8A: सभी वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के ही विरोधी हैं।
R: वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलन भी विश्वव्यापी नेटवर्क में भागीदारी करते हैं।
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उत्तर: (घ) — ! A गलत है; “बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं बल्कि वैश्वीकरण के किसी खास कार्यक्रम के विरोधी हैं।”
9A: भारत के लिए अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं है।
R: अंतिम कसौटी यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो।
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उत्तर: (क)
10A: वर्ल्ड सोशल फोरम की पहली बैठक मुंबई में हुई।
R: 2004 में WSF की चौथी बैठक मुंबई में हुई थी।
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उत्तर: (घ) — ! A गलत है; पहली बैठक 2001 में ब्राजील के पोर्तो अलेग्रे में हुई थी।
खंड छ — स्रोत-आधारित प्रश्न
स्रोत 1
“एक अवधारणा के रूप में वैश्वीकरण की बुनियादी बात है — प्रवाह। प्रवाह कई तरह के हो सकते हैं — विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्सों में पहुँचना; पूँजी का एक से ज्यादा जगहों पर जाना; वस्तुओं का कई-कई देशों में पहुँचना और उनका व्यापार तथा बेहतर आजीविका की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों की आवाजाही। यहाँ सबसे ज़रूरी बात है ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है।”
(क) वैश्वीकरण की ‘बुनियादी बात’ क्या है? (1) (ख) चारों प्रवाहों के नाम लिखिए। (2) (ग) ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ क्यों सबसे ज़रूरी है? क्या सभी प्रवाहों की गति समान है? (3)
स्रोत 2
“वस्तुत: कुछ मायनों में वैश्वीकरण के फलस्वरूप राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है। अब राज्यों के हाथ में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी मौजूद है जिसके बूते राज्य अपने नागरिकों के बारे में सूचनाएँ जुटा सकते हैं। इस सूचना के दम पर राज्य ज्यादा कारगर ढंग से काम कर सकते हैं। उनकी क्षमता बढ़ी है; कम नहीं हुई।”
(क) यह अनुच्छेद राज्य के बारे में किस पहलू की बात कर रहा है? (1) (ख) राज्य की ताकत बढ़ने का क्या कारण बताया गया है? (2) (ग) वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव के अन्य दो पहलू कौन-से हैं? (3)
स्रोत 3
“बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है इसलिए बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है। इससे हुआ मात्र इतना है कि हमारे भोजन की पसंद में एक चीज़ और शामिल हो गई है। दूसरी तरफ, नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है। …मज़ेदार बात तो यह है कि इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है।”
(क) यह अनुच्छेद वैश्वीकरण के किस प्रभाव से संबंधित है? (1) (ख) ‘सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण’ से क्या अभिप्राय है? (2) (ग) क्या वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव केवल नकारात्मक हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए। (3)
स्रोत 4
“यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत के लिए यह सब कितना अच्छा साबित हुआ है क्योंकि अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।”
(क) भारत में आर्थिक सुधार किस वर्ष शुरू हुए? (1) (ख) लेखक के अनुसार ‘अंतिम कसौटी’ क्या है? (2) (ग) आज़ादी के बाद अपनाए गए ‘संरक्षणवाद’ से क्या दिक्कतें पैदा हुईं? (3)