PARAKH प्रश्न बैंक — योग्यता-आधारित मूल्यांकन
कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · मध्य स्तर (कक्षा 6–8)
PARAKH — Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NCERT की एक स्वतंत्र संघटक इकाई है, जो 8 फरवरी 2023 की अधिसूचना से स्थापित हुई। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 4.4.1 के अंतर्गत विद्यार्थी-मूल्यांकन के मानक और दिशानिर्देश तय करती है। इसके फोकस क्षेत्रों में योग्यता-आधारित मूल्यांकन और समग्र प्रगति पत्र शामिल हैं — बुनियादी, प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक, चारों स्तरों के लिए।
इस प्रश्न बैंक की अलग बात क्या है
05-Question-Bank.md याद रखने की जाँच करता है — परिभाषा, सीमाएँ, सूत्र। वह बोर्ड-शैली का
है और आवश्यक है।
यह फ़ाइल वह नहीं करती। यहाँ हर प्रश्न विद्यार्थी को एक नई स्थिति देता है और पूछता है कि अध्याय की समझ को वहाँ लगाकर दिखाओ। इसीलिए —
| यहाँ नहीं मिलेगा | यहाँ मिलेगा |
|---|---|
| “सूत्र लिखिए।” | तीन गणनाएँ देकर — “इनमें से किसमें सूत्र लगेगा और किसमें नहीं? क्यों?” |
| “स्रोतों की चार श्रेणियाँ लिखिए।” | एक खुदाई का विवरण देकर — “इनमें से कौन-सी चीज़ किस श्रेणी की है?” |
| “इतिहासकार क्या करता है?” | दो विरोधी विवरण देकर — “अब आप क्या तय करेंगे और किस आधार पर?” |
मूल्यांकन का नियम: जिस प्रश्न का उत्तर पुस्तक की किसी एक पंक्ति से सीधे उठाया जा सके, वह योग्यता-आधारित प्रश्न नहीं है।
जाँची जा रही योग्यताएँ
| कोड | योग्यता |
|---|---|
| यो-1 | तिथि-गणना नई स्थिति में करना — और यह पहचानना कि सूत्र कब नहीं लगता |
| यो-2 | शताब्दी/सहस्राब्दी की गिनती और कालक्रम लगाना |
| यो-3 | दी गई वस्तु/सूचना को सही स्रोत-श्रेणी में रखना और कारण बताना |
| यो-4 | परस्पर विरोधी साक्ष्यों के बीच निर्णय लेना और उसे उचित ठहराना |
| यो-5 | यह समझना कि इतिहास अधूरे साक्ष्यों से किया गया पुनर्निर्माण है |
खंड क — प्रकरण-आधारित प्रश्न
प्रकरण 1 — रवि की तीन गणनाएँ
यो-1 · कुल 8 अंक
रवि ने गृह-कार्य में तीन प्रश्न हल किए। उसने तीनों में वही सूत्र लगाया जो कक्षा में सीखा था —
# प्रश्न रवि का उत्तर 1 560 सा.सं.पू. से 2024 सा.सं. तक कितने वर्ष? 560 + 2024 − 1 = 2583 2 560 सा.सं.पू. से 320 सा.सं.पू. तक कितने वर्ष? 560 + 320 − 1 = 879 3 1828 सा.सं. से 1947 सा.सं. तक कितने वर्ष? 1828 + 1947 − 1 = 3774 शिक्षक ने पहला सही और बाक़ी दो गलत ठहराए। रवि उलझन में है — “मैंने तो तीनों में एक ही तरीक़ा लगाया!”
1.1प्रश्न 2 और 3 के सही उत्तर निकालिए और गणना दिखाइए। 3 अंक
उत्तर देखिए
प्रश्न 2 दोनों तिथियाँ सा.सं.पू. की हैं → 560 − 320 = 240 वर्ष। प्रश्न 3: दोनों सा.सं. की हैं → 1947 − 1828 = 119 वर्ष। (प्रत्येक सही गणना पर 1.5 अंक; केवल उत्तर लिखने पर आधे अंक।)
1.2रवि से क्या गलती हुई? एक-दो वाक्य में लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
रवि ने सूत्र वहाँ भी लगा दिया जहाँ वह लगता ही नहीं। सूत्र केवल तब लगता है जब एक तिथि सा.सं.पू. की हो और दूसरी सा.सं. की।
1.3रवि को एक ऐसा नियम बताइए जिससे वह आगे यह गलती न करे। 2 अंक
उत्तर देखिए
कोई भी स्पष्ट नियम, जैसे — “पहले देखो कि दोनों तिथियाँ एक ही ओर की हैं या आर-पार। एक ही ओर हों तो सीधा घटाओ; आर-पार हों तो जोड़कर 1 घटाओ।”
1.4‘−1’ घटाने का मूल कारण क्या है? 1 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि ग्रेगोरियन तिथिपत्र में कोई शून्य वर्ष नहीं है।
प्रकरण 2 — खुदाई में क्या-क्या मिला
यो-3 · कुल 8 अंक
एक गाँव के पास खुदाई हुई। मिली चीज़ों की सूची यह है —
- मिट्टी के टूटे हुए बर्तन
- एक ताँबे की पट्टी, जिस पर कुछ लिखा है
- एक पत्थर की छोटी मूर्ति
- कुछ हड्डियाँ और जले हुए अनाज के दाने
- एक टीला, जिसके नीचे पुरानी दीवारें दिख रही हैं
इसी बीच गाँव की एक बुज़ुर्ग महिला बताती हैं कि उनकी दादी उन्हें इस जगह के बारे में एक पुराना गीत सुनाया करती थीं।
2.1खुदाई में मिली पाँचों चीज़ें किस मुख्य श्रेणी के स्रोत हैं? 1 अंक
उत्तर देखिए
पुरातात्विक स्रोत।
2.2उस श्रेणी की तीन शाखाओं में इन चीज़ों को बाँटिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
शिलालेख ताँबे की पट्टी (ताम्रपत्र)। संरचना: टीला (और उसके नीचे की दीवारें)। उत्खनन: मिट्टी के बर्तन (मृदभांड), पत्थर की मूर्ति, हड्डियाँ और जले हुए अनाज। (प्रत्येक सही शाखा पर 1 अंक।)
2.3बुज़ुर्ग महिला का गीत किस श्रेणी का स्रोत है? 1 अंक
उत्तर देखिए
मौखिक स्रोत (लोक साहित्य)।
2.4पुरातत्व विज्ञानी को इस स्थान पर किस विशेषज्ञ की सहायता चाहिए होगी, यदि ताँबे की
पट्टी पर लिखी बात पढ़नी हो? 1 अंक
उत्तर देखिए
पुरालेखशास्त्री, क्योंकि वे प्राचीन अभिलेख पढ़ते हैं।
2.5मिट्टी के बर्तन और ताँबे की पट्टी में से कौन अधिक बातें बता सकता है, और कौन अधिक भरोसेमंद है? कारण सहित लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
ताँबे की पट्टी अधिक बातें बता सकती है, क्योंकि उस पर लिखा है — नाम, तिथियाँ, घटनाएँ। बर्तन अधिक भरोसेमंद हो सकता है, क्योंकि वह किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं बनाया गया था, जबकि लिखी हुई बात में पक्षपात हो सकता है। (पूरे अंक तब जब दोनों पक्ष कहे जाएँ। कोई भी तर्कसंगत उत्तर स्वीकार्य है।)
प्रकरण 3 — दो विवरण, एक घटना
यो-4 · कुल 8 अंक
इतिहासकारों को एक पुराने नगर के बारे में दो स्रोत मिले —
स्रोत A — उसी नगर के राजा के दरबारी कवि की लिखी प्रशस्ति। उसमें लिखा है कि “राजा के शासन में नगर धन-धान्य से भरा था और प्रजा अत्यंत सुखी थी।”
स्रोत B — उसी काल की खुदाई से मिले अवशेष। बहुत से घर बहुत छोटे और कच्चे हैं, और कई कंकालों में भोजन की कमी के चिह्न मिले हैं।
3.1दोनों स्रोत किस-किस श्रेणी के हैं? 2 अंक
उत्तर देखिए
स्रोत A — साहित्यिक स्रोत (भारतीय साहित्य / ऐतिहासिक लेख)। स्रोत B — पुरातात्विक स्रोत (उत्खनन)।
3.2दोनों एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे। अध्याय के अनुसार अब इतिहासकार को क्या करना
पड़ेगा? 2 अंक
उत्तर देखिए
अध्याय के अनुसार, जब स्रोत एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएँ प्रदान करते हैं, तब यह निर्णय लेना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए — और इसी तरह इतिहासकार उस कालखंड का पुनर्निर्माण करते हैं।
3.3आपके अनुसार किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए और क्यों? 3 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि दरबारी कवि राजा के वेतन पर था, इसलिए उसकी प्रशस्ति में पक्षपात हो सकता है; जबकि खुदाई के अवशेष किसी को ख़ुश करने के लिए नहीं बने थे। (यदि विद्यार्थी कहे कि “दोनों को साथ देखना चाहिए” और कारण दे, तो भी पूरे अंक।)
3.4क्या इसका अर्थ यह है कि स्रोत A बेकार है? एक वाक्य में उत्तर दीजिए। 1 अंक
उत्तर देखिए
नहीं। वह भी एक स्रोत है और अपने ढंग की बातें बताता है — जैसे उस समय की भाषा, राजा की छवि, या दरबार की परंपराएँ।
प्रकरण 4 — जो टुकड़ा कभी नहीं मिलेगा
यो-5 · कुल 6 अंक
कक्षा में मीना पूछती है — “मैडम, आदिमानव आपस में क्या बोलते थे? उनकी भाषा क्या थी?”
शिक्षिका कहती हैं — “हमें नहीं पता, और शायद कभी नहीं पता चलेगा।”
मीना निराश हो जाती है — “तो फिर इतिहास पढ़ने का क्या फ़ायदा, अगर पता ही नहीं चलेगा?”
4.1शिक्षिका का उत्तर पुस्तक के अनुसार सही है या नहीं? पुस्तक का संबंधित वाक्य
लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
हाँ, सही है। पुस्तक का वाक्य — “वे जिन भाषाओं में संवाद करते थे, वे अब लुप्त हो चुकी हैं” (पृ. 71)।
4.2मीना को समझाइए कि “नहीं पता” कहना कमज़ोरी नहीं है। पुस्तक के जिग्सॉ वाले रूपक
का प्रयोग कीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर जिग्सॉ रूपक का प्रयोग करता है: इतिहास एक चित्र-खंड पहेली है और उसके कुछ हिस्से गायब रह सकते हैं — पर बाक़ी हिस्सों से भी बहुत कुछ बन जाता है। यह कि एक टुकड़ा नहीं मिला, इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी तस्वीर बेकार है।
4.3आदिमानव के बारे में एक ऐसी बात लिखिए जो हमें पता है — और बताइए कि वह किस स्रोत से पता चली। 1 अंक
उत्तर देखिए
कोई एक बात + स्रोत, जैसे — “वे अग्नि का उपयोग करते थे” (उत्खनन/पुरातात्विक स्रोत), “वे चित्र बनाते थे” (शैल-चित्र / कलात्मक-पुरातात्विक स्रोत), “वे पत्थर के उपकरण बनाते थे” (उत्खनन)।
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) A और R दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। (ग) A सही है, R गलत है। (घ) A गलत है, R सही है।
1A: सा.सं.पू. और सा.सं. की तिथियों के बीच के वर्ष निकालते समय 1 घटाया जाता है।
R: ग्रेगोरियन तिथिपत्र में कोई वर्ष शून्य के रूप में चिह्नित नहीं है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और शून्य वर्ष का न होना ही 1 घटाने का कारण है
2A: 2000 एक लीप वर्ष है।
R: प्रत्येक शताब्दी वर्ष लीप वर्ष होता है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(ग) — A सही; R गलत — शताब्दी वर्ष तभी लीप वर्ष होते हैं जब वे 400 से विभाजित हों; 1800 और 1900 नहीं थे
3A: इतिहासकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
R: स्रोत कभी-कभी एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएँ प्रदान करते हैं और सभी टुकड़े उपलब्ध नहीं
होते। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और यही पुनर्निर्माण की आवश्यकता का कारण है
4A: 1900 सा.सं.पू., 323 सा.सं.पू. से अधिक प्राचीन है।
R: सा.सं.पू. की गणना उल्टे (अवरोही) क्रम में की जाती है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और अवरोही क्रम ही इसका कारण है
5A: सिक्के पुरातात्विक स्रोत हैं।
R: सिक्कों पर लेख अंकित होता है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(ख) — दोनों कथन सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है — सिक्का पुरातात्विक इसलिए है कि वह खुदाई से मिली वस्तु है, इसलिए नहीं कि उस पर लेख है
6A: हम 21वीं शताब्दी में हैं परंतु तीसरी सहस्राब्दी में।
R: शताब्दी 100 वर्षों की और सहस्राब्दी 1000 वर्षों की होती है, और दोनों की गणना
1 सा.सं. से होती है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और यही दोनों संख्याओं के अलग होने का कारण है
खंड ग — आँकड़ा एवं समय-रेखा व्याख्या
1नीचे एक समय-रेखा के चार बिंदु दिए हैं। 4 अंक
| बिंदु | तिथि |
|---|---|
| क | 3,00,000 वर्ष पूर्व |
| ख | 12,000 वर्ष पूर्व |
| ग | 8000 सा.सं.पू. |
| घ | 2024 सा.सं. |
1.1 बिंदु क पर कौन-सी घटना अंकित है? (1) 1.2 बिंदु ख क्या दर्शाता है? (1) 1.3 बिंदु ग किस सहस्राब्दी में आता है, और वहाँ क्या हुआ? (2)
उत्तर देखिए
- 1.1 (1) — होमो सेपियंस (मानव) का पृथ्वी पर आना।
- 1.2 (1) — हिम युग का अंत (हिम युग लगभग 1,00,000 से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा)।
- 1.3 (2) — आठवीं सहस्राब्दी सा.सं.पू. (8000 से 7001 सा.सं.पू.); वहाँ प्रथम स्थायी निवास व कृषि का आरंभ अंकित है।
2एक विद्यार्थी ने पुस्तक का चित्र 4.3 देखकर कहा — “इस समय-रेखा में बीच-बीच में बिंदु (डॉट) क्यों बने हैं? क्या वहाँ कुछ हुआ ही नहीं?” 3 अंक
2.1 बिंदुकृत हिस्सा वास्तव में क्या दर्शाता है? (1) 2.2 यदि वे हिस्से न छोड़े जाते तो समय-रेखा कितनी लंबी हो जाती? (1) 2.3 इससे समय-रेखा बनाने के बारे में क्या बात पता चलती है? (1)
उत्तर देखिए
- 2.1 (1) — छोड़े गए कालखंड को — न कि यह कि वहाँ कुछ हुआ ही नहीं।
- 2.2 (1) — लगभग 3 मीटर।
- 2.3 (1) — कोई तर्कसंगत उत्तर, जैसे — समय-रेखा में सब कुछ पैमाने पर नहीं दिखाया जा सकता; इसलिए कुछ हिस्से छोड़ने पड़ते हैं, वरना वह कागज़ पर आ ही नहीं पाएगी।
3नीचे चार तिथियाँ दी हैं 3 अंक
3.1 इन्हें कालक्रमानुसार लगाइए। (1) 3.2 इनमें से सबसे प्राचीन और सबसे नई तिथि के बीच कितने वर्ष हैं? गणना दिखाइए। (2)
उत्तर देखिए
1090 सा.सं., 100 सा.सं.पू., 2024 सा.सं., 1900 सा.सं.पू.
- 3.1 (1) — 1900 सा.सं.पू. → 100 सा.सं.पू. → 1090 सा.सं. → 2024 सा.सं.
- 3.2 (2) — सबसे प्राचीन 1900 सा.सं.पू., सबसे नई 2024 सा.सं. — ये आर-पार हैं, इसलिए सूत्र लगेगा: 1900 + 2024 − 1 = 3923 वर्ष।
खंड घ — मुक्त-उत्तर एवं अनुप्रयोग
1आपके घर में एक पुराना बर्तन है, जिस पर कुछ लिखा नहीं है। आपकी दादी बताती हैं कि यह उनकी
दादी का था।
(क) बर्तन किस श्रेणी का स्रोत है और दादी की बात किस श्रेणी की? (2)
(ख) इन दोनों में से किससे अधिक निश्चित जानकारी मिलती है और किससे अधिक जानकारी?
कारण सहित लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
- (क) (2) — बर्तन = पुरातात्विक स्रोत (वस्तु); दादी की बात = मौखिक स्रोत।
- (ख) (3) — दादी की बात से अधिक जानकारी मिलती है (किसका था, कब का है, कैसे इस्तेमाल होता था), पर उसमें याद की गलती या बदलाव हो सकता है। बर्तन अधिक निश्चित है — वह सचमुच मौजूद है — पर वह अपने आप बहुत कम बताता है। (पूरे अंक तब जब दोनों की ख़ूबी और कमज़ोरी दोनों कही जाएँ।)
2“अगर इतिहास बदलता रहता है, तो वह भरोसे के लायक कैसे हुआ?” — किसी ने यह कहा।
अपने शब्दों में उत्तर दीजिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि इतिहास का बदलना उसकी कमज़ोरी नहीं, उसकी ताक़त है — क्योंकि वह नए साक्ष्यों के आधार पर बदलता है, मनमर्ज़ी से नहीं।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | “नए स्रोत मिलने पर तस्वीर बदलती है” और “यह ईमानदारी है, कमज़ोरी नहीं” — दोनों |
| 2–3 | विचार पकड़ में है पर अधूरा कहा गया |
| 1 | उत्तर विषय से जुड़ा है पर कोई कारण नहीं |
3मान लीजिए आपको अपने गाँव या मोहल्ले का इतिहास लिखना है।
(क) आप कौन-कौन से चार अलग-अलग तरह के स्रोत इस्तेमाल करेंगे? (2)
(ख) यदि दो लोग एक ही घटना के बारे में अलग-अलग बात बताएँ, तो आप क्या करेंगे? 2 अंक
उत्तर देखिए
- (क) (2) — चार अलग-अलग श्रेणियों से उदाहरण, जैसे — पुरातात्विक (पुराना मंदिर, कुआँ, खंडहर), साहित्यिक (पुराने काग़ज़, रजिस्टर, अख़बार), मौखिक (बुज़ुर्गों की बातें, लोक गीत), कलात्मक (दीवार-चित्र, मूर्तियाँ)।
- (ख) (2) — कोई तर्कसंगत उत्तर, जैसे — और स्रोत खोजूँगा; देखूँगा कि कौन घटना के समय वहाँ मौजूद था; या दोनों बातें लिख दूँगा और बता दूँगा कि इन पर मतभेद है। (अंतिम उत्तर सबसे अच्छा है — वही इतिहासकार भी करते हैं।)
4पुस्तक अपने ही चित्रों के बारे में लिखती है कि “आवश्यक नहीं कि ये सही ही हों।”
पाठ्यपुस्तक अपने ही चित्र पर सवाल क्यों उठा रही है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह कहता है कि चित्र एक अनुमान है, प्रमाण नहीं — उसे किसी कलाकार ने सीमित सूचनाओं के आधार पर बनाया है। इसलिए उसमें दिखाई गई भूमिकाएँ भी अनुमान हैं, और वे उलटी भी हो सकती थीं।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 3 | “चित्र अनुमान है” + “हमारे पास सीमित सूचनाएँ हैं” + कोई उदाहरण |
| 2 | विचार सही, उदाहरण नहीं |
| 1 | केवल “पता नहीं था” जैसा उत्तर |
यह प्रश्न इस पूरे प्रश्न-बैंक का सबसे कठिन और सबसे मूल्यवान है। जो बच्चा इसे कर लेता है,
उसने इतिहास की प्रकृति समझ ली है।
5आपका मित्र कहता है — “मुझे सा.सं.पू. समझ नहीं आता। बड़ी संख्या का मतलब बाद में होना चाहिए न?” उसे समझाइए, और एक उदाहरण दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर बताता है कि सा.सं.पू. की गिनती उल्टे (अवरोही) क्रम में चलती है — वह 1 सा.सं.पू. से पीछे की ओर जाती है। इसलिए बड़ी संख्या का अर्थ अधिक पुराना है। उदाहरण: 1900 सा.सं.पू., 323 सा.सं.पू. से पहले का है। (यदि विद्यार्थी कोई अपना उपमान दे — जैसे “उल्टी गिनती” या “पीछे चलना” — तो पूरे अंक।)
उत्तर एवं अंकन योजना
सामान्य नियम: इन प्रश्नों में कारण पर अंक हैं। जहाँ विद्यार्थी का उत्तर पुस्तक से भिन्न शब्दों में हो पर तर्क सही हो, पूरे अंक दीजिए।
खंड क
प्रकरण 1 (8)
- 1.1 (3) — प्रश्न 2: दोनों तिथियाँ सा.सं.पू. की हैं → 560 − 320 = 240 वर्ष। प्रश्न 3: दोनों सा.सं. की हैं → 1947 − 1828 = 119 वर्ष। (प्रत्येक सही गणना पर 1.5 अंक; केवल उत्तर लिखने पर आधे अंक।)
- 1.2 (2) — रवि ने सूत्र वहाँ भी लगा दिया जहाँ वह लगता ही नहीं। सूत्र केवल तब लगता है जब एक तिथि सा.सं.पू. की हो और दूसरी सा.सं. की।
- 1.3 (2) — कोई भी स्पष्ट नियम, जैसे — “पहले देखो कि दोनों तिथियाँ एक ही ओर की हैं या आर-पार। एक ही ओर हों तो सीधा घटाओ; आर-पार हों तो जोड़कर 1 घटाओ।”
- 1.4 (1) — क्योंकि ग्रेगोरियन तिथिपत्र में कोई शून्य वर्ष नहीं है।
प्रकरण 2 (8)
- 2.1 (1) — पुरातात्विक स्रोत।
- 2.2 (3) — शिलालेख: ताँबे की पट्टी (ताम्रपत्र)। संरचना: टीला (और उसके नीचे की दीवारें)। उत्खनन: मिट्टी के बर्तन (मृदभांड), पत्थर की मूर्ति, हड्डियाँ और जले हुए अनाज। (प्रत्येक सही शाखा पर 1 अंक।)
- 2.3 (1) — मौखिक स्रोत (लोक साहित्य)।
- 2.4 (1) — पुरालेखशास्त्री, क्योंकि वे प्राचीन अभिलेख पढ़ते हैं।
- 2.5 (2) — ताँबे की पट्टी अधिक बातें बता सकती है, क्योंकि उस पर लिखा है — नाम, तिथियाँ, घटनाएँ। बर्तन अधिक भरोसेमंद हो सकता है, क्योंकि वह किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं बनाया गया था, जबकि लिखी हुई बात में पक्षपात हो सकता है। (पूरे अंक तब जब दोनों पक्ष कहे जाएँ। कोई भी तर्कसंगत उत्तर स्वीकार्य है।)
प्रकरण 3 (8)
- 3.1 (2) — स्रोत A — साहित्यिक स्रोत (भारतीय साहित्य / ऐतिहासिक लेख)। स्रोत B — पुरातात्विक स्रोत (उत्खनन)।
- 3.2 (2) — अध्याय के अनुसार, जब स्रोत एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएँ प्रदान करते हैं, तब यह निर्णय लेना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए — और इसी तरह इतिहासकार उस कालखंड का पुनर्निर्माण करते हैं।
- 3.3 (3) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि दरबारी कवि राजा के वेतन पर था, इसलिए उसकी प्रशस्ति में पक्षपात हो सकता है; जबकि खुदाई के अवशेष किसी को ख़ुश करने के लिए नहीं बने थे। (यदि विद्यार्थी कहे कि “दोनों को साथ देखना चाहिए” और कारण दे, तो भी पूरे अंक।)
- 3.4 (1) — नहीं। वह भी एक स्रोत है और अपने ढंग की बातें बताता है — जैसे उस समय की भाषा, राजा की छवि, या दरबार की परंपराएँ।
प्रकरण 4 (6)
- 4.1 (2) — हाँ, सही है। पुस्तक का वाक्य — “वे जिन भाषाओं में संवाद करते थे, वे अब लुप्त हो चुकी हैं” (पृ. 71)।
- 4.2 (3) — पूरे अंक का उत्तर जिग्सॉ रूपक का प्रयोग करता है: इतिहास एक चित्र-खंड पहेली है और उसके कुछ हिस्से गायब रह सकते हैं — पर बाक़ी हिस्सों से भी बहुत कुछ बन जाता है। यह कि एक टुकड़ा नहीं मिला, इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी तस्वीर बेकार है।
- 4.3 (1) — कोई एक बात + स्रोत, जैसे — “वे अग्नि का उपयोग करते थे” (उत्खनन/पुरातात्विक स्रोत), “वे चित्र बनाते थे” (शैल-चित्र / कलात्मक-पुरातात्विक स्रोत), “वे पत्थर के उपकरण बनाते थे” (उत्खनन)।
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
| # | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 1 | (क) | दोनों सही, और शून्य वर्ष का न होना ही 1 घटाने का कारण है |
| 2 | (ग) | A सही; R गलत — शताब्दी वर्ष तभी लीप वर्ष होते हैं जब वे 400 से विभाजित हों; 1800 और 1900 नहीं थे |
| 3 | (क) | दोनों सही, और यही पुनर्निर्माण की आवश्यकता का कारण है |
| 4 | (क) | दोनों सही, और अवरोही क्रम ही इसका कारण है |
| 5 | (ख) | दोनों कथन सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं है — सिक्का पुरातात्विक इसलिए है कि वह खुदाई से मिली वस्तु है, इसलिए नहीं कि उस पर लेख है |
| 6 | (क) | दोनों सही, और यही दोनों संख्याओं के अलग होने का कारण है |
खंड ग
1 (4)
- 1.1 (1) — होमो सेपियंस (मानव) का पृथ्वी पर आना।
- 1.2 (1) — हिम युग का अंत (हिम युग लगभग 1,00,000 से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा)।
- 1.3 (2) — आठवीं सहस्राब्दी सा.सं.पू. (8000 से 7001 सा.सं.पू.); वहाँ प्रथम स्थायी निवास व कृषि का आरंभ अंकित है।
2 (3)
- 2.1 (1) — छोड़े गए कालखंड को — न कि यह कि वहाँ कुछ हुआ ही नहीं।
- 2.2 (1) — लगभग 3 मीटर।
- 2.3 (1) — कोई तर्कसंगत उत्तर, जैसे — समय-रेखा में सब कुछ पैमाने पर नहीं दिखाया जा सकता; इसलिए कुछ हिस्से छोड़ने पड़ते हैं, वरना वह कागज़ पर आ ही नहीं पाएगी।
3 (3)
- 3.1 (1) — 1900 सा.सं.पू. → 100 सा.सं.पू. → 1090 सा.सं. → 2024 सा.सं.
- 3.2 (2) — सबसे प्राचीन 1900 सा.सं.पू., सबसे नई 2024 सा.सं. — ये आर-पार हैं, इसलिए सूत्र लगेगा: 1900 + 2024 − 1 = 3923 वर्ष।
खंड घ — रूब्रिक
1 (5)
- (क) (2) — बर्तन = पुरातात्विक स्रोत (वस्तु); दादी की बात = मौखिक स्रोत।
- (ख) (3) — दादी की बात से अधिक जानकारी मिलती है (किसका था, कब का है, कैसे इस्तेमाल होता था), पर उसमें याद की गलती या बदलाव हो सकता है। बर्तन अधिक निश्चित है — वह सचमुच मौजूद है — पर वह अपने आप बहुत कम बताता है। (पूरे अंक तब जब दोनों की ख़ूबी और कमज़ोरी दोनों कही जाएँ।)
2 (4) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि इतिहास का बदलना उसकी कमज़ोरी नहीं, उसकी ताक़त है — क्योंकि वह नए साक्ष्यों के आधार पर बदलता है, मनमर्ज़ी से नहीं।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | “नए स्रोत मिलने पर तस्वीर बदलती है” और “यह ईमानदारी है, कमज़ोरी नहीं” — दोनों |
| 2–3 | विचार पकड़ में है पर अधूरा कहा गया |
| 1 | उत्तर विषय से जुड़ा है पर कोई कारण नहीं |
3 (4)
- (क) (2) — चार अलग-अलग श्रेणियों से उदाहरण, जैसे — पुरातात्विक (पुराना मंदिर, कुआँ, खंडहर), साहित्यिक (पुराने काग़ज़, रजिस्टर, अख़बार), मौखिक (बुज़ुर्गों की बातें, लोक गीत), कलात्मक (दीवार-चित्र, मूर्तियाँ)।
- (ख) (2) — कोई तर्कसंगत उत्तर, जैसे — और स्रोत खोजूँगा; देखूँगा कि कौन घटना के समय वहाँ मौजूद था; या दोनों बातें लिख दूँगा और बता दूँगा कि इन पर मतभेद है। (अंतिम उत्तर सबसे अच्छा है — वही इतिहासकार भी करते हैं।)
4 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह कहता है कि चित्र एक अनुमान है, प्रमाण नहीं — उसे किसी कलाकार ने सीमित सूचनाओं के आधार पर बनाया है। इसलिए उसमें दिखाई गई भूमिकाएँ भी अनुमान हैं, और वे उलटी भी हो सकती थीं।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 3 | “चित्र अनुमान है” + “हमारे पास सीमित सूचनाएँ हैं” + कोई उदाहरण |
| 2 | विचार सही, उदाहरण नहीं |
| 1 | केवल “पता नहीं था” जैसा उत्तर |
यह प्रश्न इस पूरे प्रश्न-बैंक का सबसे कठिन और सबसे मूल्यवान है। जो बच्चा इसे कर लेता है, उसने इतिहास की प्रकृति समझ ली है।
5 (3) — पूरे अंक का उत्तर बताता है कि सा.सं.पू. की गिनती उल्टे (अवरोही) क्रम में चलती है — वह 1 सा.सं.पू. से पीछे की ओर जाती है। इसलिए बड़ी संख्या का अर्थ अधिक पुराना है। उदाहरण: 1900 सा.सं.पू., 323 सा.सं.पू. से पहले का है। (यदि विद्यार्थी कोई अपना उपमान दे — जैसे “उल्टी गिनती” या “पीछे चलना” — तो पूरे अंक।)
योग्यता-वार आवरण
| योग्यता | कहाँ जाँची गई | कुल अंक |
|---|---|---|
| यो-1 — तिथि-गणना और सूत्र की शर्त | प्रकरण 1, खंड ख (1, 2), खंड ग (3.2) | 12 |
| यो-2 — शताब्दी/सहस्राब्दी और कालक्रम | खंड ख (4, 6), खंड ग (1.3, 3.1), खंड घ (5) | 8 |
| यो-3 — स्रोत-वर्गीकरण | प्रकरण 2, खंड ख (5), खंड घ (1क, 3क) | 13 |
| यो-4 — विरोधी साक्ष्यों में निर्णय | प्रकरण 3, खंड घ (1ख, 3ख) | 13 |
| यो-5 — इतिहास = पुनर्निर्माण | प्रकरण 4, खंड ख (3), खंड ग (2), खंड घ (2, 4) | 17 |
| कुल | 63 |
एक 40 अंक का पेपर बनाना हो तो: प्रकरण 1 और 3 (16) + खंड ख के चार प्रश्न (4) + खंड ग का प्रश्न 1 और 3 (7) + खंड घ का प्रश्न 2 और 4 (7) + खंड घ का प्रश्न 5 (3) + प्रकरण 4 में से 4.2 (3) = 40 अंक।
शिक्षक हेतु दो चेतावनियाँ
1. प्रकरण 1 को पहला प्रश्न ही रखिए। यह इस अध्याय की सबसे आम गलती को सीधे पकड़ता है — सूत्र का अंधाधुंध प्रयोग। और यह गलती इसलिए होती है कि बच्चे ने नियम याद किया है, कारण नहीं। जो बच्चा 1.4 में “क्योंकि शून्य वर्ष नहीं है” लिख देता है, वह 1.1 भी सही करता है — यह जोड़ी देखिए, यही असली निदान है।
2. खंड घ के प्रश्न 2 और 4 पर ‘सही उत्तर’ मत ढूँढ़िए। इन दोनों प्रश्नों में कोई एक सही उत्तर नहीं है — और यही उनका उद्देश्य है। ये जाँचते हैं कि बच्चा यह स्वीकार कर पाता है या नहीं कि इतिहास में अनिश्चितता सामान्य बात है। जो बच्चा लिखता है “पता नहीं तो इतिहास बेकार है”, उसने अध्याय का केंद्रीय विचार नहीं पकड़ा — चाहे उसे सारी तिथियाँ याद हों।
और यह भी याद रखिए: यह फ़ाइल
05-Question-Bank.mdके अतिरिक्त है, उसके स्थान पर नहीं। परीक्षा अभी भी पाठ्यपुस्तक से बनती है।