कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · मध्य स्तर (कक्षा 6–8)
PARAKH — Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NCERT की एक स्वतंत्र संघटक इकाई है, जो 8 फरवरी 2023 की अधिसूचना से स्थापित हुई। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 4.4.1 के अंतर्गत विद्यार्थी-मूल्यांकन के मानक और दिशानिर्देश तय करती है।
इस प्रश्न बैंक की अलग बात क्या है
05-Question-Bank.md याद रखने की जाँच करता है — नाम, माप, तिथियाँ। वह बोर्ड-शैली का है
और आवश्यक है।
यह फ़ाइल वह नहीं करती। यहाँ हर प्रश्न विद्यार्थी को एक नई स्थिति देता है और पूछता है कि अध्याय की समझ को वहाँ लगाकर दिखाओ।
| यहाँ नहीं मिलेगा | यहाँ मिलेगा |
|---|---|
| “महास्नानागार का आकार लिखिए।” | एक नया प्रमाण देकर — “इससे कौन-सी व्याख्या कमज़ोर पड़ती है?” |
| “सात विशेषताएँ लिखिए।” | एक काल्पनिक बस्ती देकर — “क्या यह सभ्यता कहलाएगी? क्यों?” |
| “पतन के दो कारण लिखिए।” | दो प्रमाण देकर — “इनमें से कौन-सा किस कारण का समर्थन करता है?” |
मूल्यांकन का नियम: जिस प्रश्न का उत्तर पुस्तक की किसी एक पंक्ति से सीधे उठाया जा सके, वह योग्यता-आधारित प्रश्न नहीं है।
जाँची जा रही योग्यताएँ
| कोड | योग्यता |
|---|---|
| यो-1 | कसौटी लगाना — सभ्यता की सात विशेषताओं को किसी नई स्थिति पर लगाना |
| यो-2 | प्रमाण से निष्कर्ष — किसी वस्तु या अवशेष से जीवन के बारे में अनुमान लगाना |
| यो-3 | व्याख्या की जाँच — यह पहचानना कि कौन-सा प्रमाण किस व्याख्या को कमज़ोर या मज़बूत करता है |
| यो-4 | अनिश्चितता के साथ काम करना — यह जानना कि कहाँ ‘नहीं पता’ ही सही उत्तर है |
| यो-5 | अतीत और वर्तमान को जोड़ना — निरंतरता और परिवर्तन पहचानना |
खंड क — प्रकरण-आधारित प्रश्न
प्रकरण 1 — एक नई खुदाई
यो-1 · यो-2 · कुल 9 अंक
मान लीजिए पुरातत्वविदों को एक नई प्राचीन बस्ती मिलती है। खुदाई में यह मिलता है —
- सीधी, चौड़ी सड़कें और उनके नीचे बनी नालियाँ
- मिट्टी के बर्तन और धातु के औज़ार
- भार तौलने के पत्थर, सब एक ही नाप के
- गेहूँ और जौ के जले हुए दाने एक बड़े कमरे में
- कोई लिखा हुआ चिह्न नहीं — कहीं भी नहीं
1.1सभ्यता की सात विशेषताओं में से कौन-कौन सी इस बस्ती में दिखती हैं? हर एक के
सामने उसका प्रमाण भी लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
चार सही जोड़ियाँ, प्रत्येक 1 अंकनगरीकरण — सीधी चौड़ी सड़कें और उनके नीचे नालियाँ (जल निकास)। शिल्प — मिट्टी के बर्तन और धातु के औज़ार। व्यापार — एक ही नाप के भार तौलने के पत्थर। कृषि उत्पादकता — एक बड़े कमरे में रखे गेहूँ-जौ के दाने (अर्थात अतिरिक्त अन्न का भंडारण)। (शासन को भी स्वीकार कीजिए यदि विद्यार्थी सुनियोजित सड़कों या साझा नालियों को प्रमाण बनाए — तब किसी एक अन्य के स्थान पर।)
1.2कौन-सी विशेषता नहीं दिखती? 1 अंक
उत्तर देखिए
लेखन का कोई रूप — कहीं कोई लिखा हुआ चिह्न नहीं मिला।
1.3★‘भार तौलने के पत्थर, सब एक ही नाप के’ — यह एक छोटी-सी बात है, पर इससे दो
विशेषताओं का पता चलता है। कौन-सी दो, और कैसे? 2 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर दोनों पकड़ता है: व्यापार, क्योंकि तौलने का अर्थ है लेन-देन; और शासन/प्रशासन, क्योंकि सब पत्थर एक ही नाप के होने का अर्थ है कि किसी ने माप का एक मानक तय किया और सबसे मनवाया। (1 अंक: केवल व्यापार बताने पर।)
★यही इस प्रकरण का सबसे अच्छा प्रश्न है — ‘एक ही नाप के’ शब्द ही असली सुराग़ हैं।
1.4★क्या आप इस बस्ती को ‘सभ्यता’ कहेंगे? कारण सहित उत्तर दीजिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। सबसे अच्छा उत्तर पुस्तक के शब्द “कम से कम” पर टिकता है — पुस्तक कहती है कि सभ्यता में कम से कम ये विशेषताएँ होनी चाहिए, इसलिए लेखन के बिना यह कसौटी पूरी नहीं होती। (पर जो विद्यार्थी कहे कि छह विशेषताएँ मौजूद हैं इसलिए इसे सभ्यता माना जा सकता है, और यह जोड़े कि हो सकता है लेखन अभी मिला न हो — उसे भी पूरे अंक; यह भी उतना ही अच्छा तर्क है।)
प्रकरण 2 — महास्नानागार पर बहस
यो-3 · कुल 8 अंक
कक्षा में तीन विद्यार्थी महास्नानागार पर बहस कर रहे हैं —
नेहा: “यह सबके नहाने के लिए बना एक सार्वजनिक कुंड था।”
आदित्य: “नहीं, यह सिर्फ़ राजा के परिवार के लिए था।”
सना: “मुझे लगता है यह किसी धार्मिक काम के लिए था। पर मैं सिद्ध नहीं कर सकती।”
2.1पुस्तक के अनुसार नेहा की बात अब क्यों स्वीकार्य नहीं है? प्रमाण सहित लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि यह पाया गया है कि इस नगर के अधिकांश घरों में स्नानागार बने हुए थे — इसलिए सार्वजनिक स्नान के लिए इतने बड़े कुंड की आवश्यकता नहीं रही होगी।
2.2★मान लीजिए खुदाई में यह नई बात पता चलती है — “नगर के केवल दो-तीन घरों में स्नानागार थे, बाक़ी सब में नहीं।” तो किसकी बात मज़बूत हो जाती? कारण दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
नेहा की। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि जिस प्रमाण के कारण उसकी बात छोड़ी गई थी, वही प्रमाण अब उलट गया — यदि अधिकांश घरों में स्नानागार नहीं थे, तो सार्वजनिक कुंड की आवश्यकता समझ में आती है। (2 अंक: सही नाम पर, पर कारण अधूरा।)
★यह पूरे प्रश्न बैंक का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है — यह जाँचता है कि विद्यार्थी ने
प्रमाण और निष्कर्ष का रिश्ता समझा या केवल यह रटा कि “पहली व्याख्या ग़लत है।”
2.3★सना कहती है कि वह सिद्ध नहीं कर सकती। पुस्तक के अनुसार वह ऐसा क्यों नहीं कर सकती? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि इस विषय में हमारे पास इतिहास के अन्य स्रोत नहीं हैं — न कोई शिलालेख, न कोई ग्रंथ, न किसी यात्री का विवरण। इसलिए किसी भी व्याख्या को सिद्ध नहीं किया जा सकता।
2.4पुस्तक स्वयं पुरातत्ववेत्ताओं के बारे में क्या कहती है? 1 अंक
उत्तर देखिए
“पुरातत्ववेत्ता भी इन प्रश्नों के बारे में चर्चा करते हैं और उनके उत्तर सदैव निर्णायक नहीं होते!”
प्रकरण 3 — दो मुट्ठी मिट्टी
यो-2 · यो-5 · कुल 8 अंक
दो अलग-अलग जगहों से दो वस्तुएँ मिलती हैं —
वस्तु A: गुजरात के पत्थर से बने लाल मनके — पर वे मिले हैं सूसा में, जो आज ईरान में है।
वस्तु B: हड़प्पा का हाथी दाँत का कंघा, लगभग 7 सेमी. लंबा — पर वह मिला है ओमान के तट पर।
3.1ये दोनों वस्तुएँ मिलकर कौन-सी एक बात सिद्ध करती हैं? 2 अंक
उत्तर देखिए
कि हड़प्पावासी भारत के बाहर की सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी सक्रिय रूप से व्यापार करते थे — उनकी बनाई वस्तुएँ ईरान और ओमान तक पहुँचती थीं।
3.2★इनसे पता चलता है कि सामान बाहर गया। पर पुस्तक कहती है कि बदले में क्या आया, यह “स्पष्ट नहीं है”। आपके अनुसार यह पता लगाना कठिन क्यों है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि निर्यात का प्रमाण बाहर मिलता है — हड़प्पाई वस्तु किसी और देश में — पर आयात का प्रमाण मिलना कठिन है, क्योंकि बाहर से आई वस्तु हड़प्पाई स्थलों में मिलनी चाहिए और उसे पहचानना कठिन है; और तांबे जैसी धातु तो पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल कर ली जाती है, इसलिए उसका निशान नहीं बचता। (2 अंक: यदि केवल “बाहर से आई चीज़ पहचानना मुश्किल है” कहा जाए।)
3.3पुस्तक का अनुमान क्या है कि वे क्या आयात करते होंगे, और वह ऐसा क्यों सोचती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
संभवत: तांबा — क्योंकि यह धातु सामान्यत: उनके पास बहुतायत में उपलब्ध नहीं थी।
3.4ये वस्तुएँ किन-किन मार्गों से इतनी दूर पहुँची होंगी? 1 अंक
उत्तर देखिए
स्थल मार्ग एवं नदियाँ, और दूरवर्ती गंतव्यों के लिए समुद्री रास्ते।
प्रकरण 4 — जो नाम टिक नहीं पाए
यो-3 · यो-4 · कुल 7 अंक
पुस्तक में तीन बार ऐसा होता है कि एक प्रचलित नाम या व्याख्या को छोड़ दिया जाता है या उस पर संदेह जताया जाता है —
(क) ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ — पुस्तक ‘घाटी’ शब्द का प्रयोग नहीं करती। (ख) महास्नानागार की ‘सार्वजनिक स्नान’ वाली व्याख्या — अब स्वीकार्य नहीं। (ग) ‘पुरोहित राजा’ — नाम चलता है, पर पुस्तक जोड़ती है कि यह मालूम नहीं कि प्रतिमा किसकी है।
4.1(क) और (ख) में कारण क्या था? दोनों के लिए अलग-अलग लिखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
(क) क्योंकि सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी, इसलिए ‘घाटी’ कहना ग़लत होगा। (ख) क्योंकि अधिकांश घरों में स्नानागार थे।
4.2★(ग) में कोई प्रमाण नहीं दिया गया — फिर भी पुस्तक संदेह क्यों जताती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि नाम किसी ने बाद में दिया है, प्रमाण से नहीं निकला। मूर्ति पर ऐसा कुछ नहीं है जो बताए कि वह पुरोहित थी या राजा — इसलिए पुस्तक नाम बताती तो है, पर उसे सच नहीं मान लेती।
4.3★★तीनों में एक ही सोच काम कर रही है। उस सोच को अपने शब्दों में एक वाक्य में लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी ऐसे वाक्य पर पूरे अंक जो यह कहे कि “प्रमाण नाम से बड़ा होता है” — अर्थात कोई बात केवल इसलिए सही नहीं हो जाती कि वह बहुत समय से कही जा रही है; जब नया प्रमाण मिले, तो पुराना नाम या पुरानी व्याख्या छोड़ देनी चाहिए। (2 अंक: यदि विचार सही हो पर तीनों को जोड़ न पाए।)
★★यह इस पूरे अध्याय की सबसे गहरी सीख है, और यह प्रश्न सीधे उसी पर है।
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए हैं। सही विकल्प चुनिए — (क) दोनों सही, और R, A की सही व्याख्या है। · (ख) दोनों सही, पर R व्याख्या नहीं है। (ग) A सही, R गलत। · (घ) A गलत, R सही।
1A: पुस्तक ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ शब्द का प्रयोग नहीं करती।
R: यह सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है
2A: महास्नानागार की सार्वजनिक स्नान वाली व्याख्या अब स्वीकार्य नहीं है।
R: उस नगर के अधिकांश घरों में स्नानागार बने हुए थे। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है
3A: हड़प्पावासियों ने बस्तियाँ नदियों के किनारे बसाईं।
R: नदियाँ अपने आस-पास की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही; पुस्तक यही कारण देती है
4A: लोथल एक बड़ा महानगर था।
R: वहाँ 217 × 36 मीटर का एक विशाल बेसिन मिला है। 1 अंक
उत्तर देखिए
(घ) — A ग़लत — पुस्तक लोथल को ‘एक लघु बस्ती’ कहती है; R सही है
5A: हड़प्पाई लिपि के चिह्नों का अर्थ अभी समझा जाना बाकी है।
R: उन मुहरों का व्यापार से कोई संबंध नहीं था। 1 अंक
उत्तर देखिए
(ग) — A सही; R ग़लत — पुस्तक कहती है कि ये निश्चित रूप से व्यापार से संबंधित हैं
6A: नगर तभी जीवित रह सकते थे जब गाँवों से प्रतिदिन पर्याप्त उपज मिलती रहे।
R: नगरों में स्वयं खेती नहीं होती थी और वहाँ शिल्पी व व्यापारी रहते थे। 1 अंक
उत्तर देखिए
(क) — दोनों सही, और R ही A का कारण है
खंड ग — आँकड़ा एवं मानचित्र व्याख्या
1★नीचे चार माप दिए हैं, सब इसी अध्याय से। हर माप के सामने बताइए कि वह किसका है, और उससे उस समय के लोगों के बारे में क्या पता चलता है। 4 अंक
| माप | किसका है | इससे क्या पता चलता है |
|---|---|---|
| 12 × 7 मीटर | ||
| 73 मीटर | ||
| 217 × 36 मीटर | ||
| 10.8 सेंटीमीटर |
उत्तर देखिए
प्रत्येक पंक्ति 1 अंक; पूरा अंक तभी जब दोनों स्तंभ भरे जाएँ।
| माप | किसका | क्या पता चलता है |
|---|---|---|
| 12 × 7 मी. | महास्नानागार, मोहनजो-दड़ो | जल और स्वच्छता का सार्वजनिक महत्व; उन्नत निर्माण-तकनीक (बिटुमेन की जल रोधक परत) |
| 73 मी. | धौलावीरा का सबसे बड़ा जलाशय | शुष्क क्षेत्र में जल संचयन की योजना; बड़े पैमाने का सामूहिक श्रम |
| 217 × 36 मी. | लोथल का बेसिन | समुद्री व्यापार — नावों से आयात-निर्यात; भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि |
| 10.8 सेमी. | ‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा | कला और धातु-ढलाई का कौशल; सांस्कृतिक अभिव्यक्ति |
2★★धौलावीरा गुजरात के कच्छ के रन में है — एक बहुत शुष्क क्षेत्र। फिर भी वहाँ
कम से कम छह विशाल जलाशय बने, कुछ चट्टान काटकर, और अधिकांश भूमिगत नालियों से जुड़े
हुए। 4 अंक
2.1 इससे उन लोगों की सोच के बारे में क्या पता चलता है? (2) 2.2 ★ऐसा निर्माण करने के लिए उन्हें किन-किन चीज़ों की व्यवस्था करनी पड़ी होगी? कम से कम तीन बताइए। (2)
उत्तर देखिए
- 2.1 (2) — दूरदर्शी और सामूहिक सोच। उन्होंने एक ऐसी जगह बसने का निर्णय लिया जहाँ पानी कम था, और पहले से जल संचयन तथा वितरण की पूरी योजना बनाई — जलाशय भी, और उन्हें जोड़ने वाली भूमिगत नालियाँ भी। यह एक दिन की नहीं, कई पीढ़ियों की सोच है।
- 2.2 (2) — कोई भी तीन: बड़ी संख्या में श्रमिक; उन्हें निर्देश देने और काम सुनियोजित करने वाला कोई प्राधिकरण; मजदूरी के भुगतान की व्यवस्था (मुद्रा नहीं थी, अत: अन्न या वस्तुओं में); चट्टान काटने के औज़ार और तकनीक; समय-समय पर सफ़ाई और रख-रखाव के लिए कोई स्थानीय व्यवस्था।
3पृष्ठ 90 पर छपी नगर-राज्य तालिका को देखकर एक विद्यार्थी ने अपनी कॉपी में लिख लिया —
“धौलावीरा — पंजाब, हड़प्पा — गुजरात।” 3 अंक
3.1 उसने क्या ग़लती की? (1) 3.2 सही जोड़ियाँ लिखिए। (2)
उत्तर देखिए
- 3.1 (1) — उसने पृष्ठ 90 की तालिका को तथ्य मान लिया, जबकि वह मिलान का अभ्यास है और उसकी जोड़ियाँ जान-बूझकर बदली हुई हैं।
- 3.2 (2) — धौलावीरा — गुजरात · हड़प्पा — पंजाब · कालीबंगा — राजस्थान · मोहनजो-दड़ो — सिंध · राखीगढ़ी — हरियाणा।
खंड घ — मुक्त-उत्तर एवं अनुप्रयोग
1★★पुस्तक पाँच अलग-अलग जगहों पर स्वीकार करती है कि उत्तर मालूम नहीं —
महास्नानागार का उद्देश्य, जलाशयों के मज़दूरों को भुगतान, आयात की वस्तु, लिपि का अर्थ, और
‘पुरोहित राजा’ की पहचान।
आपके अनुसार एक पाठ्यपुस्तक का यह कहना कि “हमें नहीं पता” — अच्छी बात है या कमज़ोरी?
कारण सहित अपना पक्ष लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि यह ईमानदारी है, कमज़ोरी नहीं — क्योंकि इस सभ्यता के बारे में कोई शिलालेख, ग्रंथ या यात्री का विवरण नहीं है, इसलिए निश्चितता से कुछ कह देना ग़लत होता। (अध्याय 4 से जोड़ने पर अतिरिक्त मान्यता।)
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | पक्ष और कारण और कम से कम एक उदाहरण अध्याय से |
| 2–3 | पक्ष और कारण, पर उदाहरण नहीं |
| 1 | केवल पक्ष, कोई कारण नहीं |
2★पुस्तक कहती है कि पतन के दो कारणों पर सहमति है, पर यह भी जोड़ती है कि “इसमें
अन्य कारण भी रहे होंगे।”
पुस्तक ने यह अंतिम वाक्य क्यों जोड़ा होगा? इसे हटा देने से क्या फ़र्क़ पड़ता? 3 अंक
उत्तर देखिए
पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि वह वाक्य पाठक को यह बताने के लिए है कि कहानी अभी बंद नहीं हुई — शोध जारी है और आगे और कारण मिल सकते हैं। उसे हटा देने से ऐसा लगता कि यह प्रश्न पूरी तरह हल हो चुका है, जो सच नहीं है।
3★“नगर लुप्त हो गए, लेकिन हड़प्पा की संस्कृति एवं प्रौद्योगिकी अधिकांशत: बची रही।”
इस अध्याय से तीन ऐसी चीज़ें बताइए जो आज भी हमारे आस-पास दिखती हैं, और हर एक के लिए पृष्ठ या
चित्र का संकेत दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कोई भी तीन, संकेत सहित; प्रत्येक 1 अंक: पूरी बाँह ढँकने वाली चूड़ियाँ (चित्र 6.15.4; और शंख की चूड़ियाँ, पृ. 97) · नमस्ते की मुद्रा (चित्र 6.15.5) · स्वास्तिक (चित्र 6.15.2) · कंघा (चित्र 6.11) · दर्पण (चित्र 6.14.1) · हल (चित्र 6.9, पृ. 96) · हल्दी और अदरक (पृ. 97) · प्यासे कौए की कहानी (चित्र 6.15.6) · खेल-बोर्ड और सीटी (चित्र 6.14.5, 6.14.6)।
4आपके घर या मोहल्ले में पानी कहाँ से आता है, और इस्तेमाल हुआ पानी कहाँ जाता है?
इसकी तुलना एक हड़प्पाई नगर की व्यवस्था से कीजिए — क्या समान है, क्या अलग? 4 अंक
उत्तर देखिए
इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | अपनी व्यवस्था का सही वर्णन और कम से कम एक समानता (जैसे — हमारे यहाँ भी नालियाँ सड़क के नीचे हैं; हमारे घर में भी अलग स्नानघर है) और कम से कम एक अंतर (जैसे — हमारे यहाँ नल से पानी आता है, वे कुएँ से निकालते थे) |
| 2–3 | वर्णन सही, पर तुलना एकतरफ़ा |
| 1 | केवल अपनी व्यवस्था बताई, तुलना नहीं |
5★“हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था।” (अभ्यास प्रश्न 8)
क्या आप सहमत हैं? अध्याय से दोनों पक्षों के प्रमाण देते हुए उत्तर लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि दोनों ओर के प्रमाण दिए गए हों।
सहमति के प्रमाण सड़कों के नीचे साझा जल-निकास प्रणाली; बड़े और छोटे घरों की एक समान निर्माण गुणवत्ता; सामूहिक गोदाम; सार्वजनिक जलाशय; युद्ध के हथियारों और सेना का अभाव; बी.बी. लाल का “शोषण नहीं, आपसी सामंजस्य”।
असहमति के प्रमाण नगर के दो भाग — ‘ऊपरी नगर’ और ‘निचला नगर’; और ‘अभिजात वर्ग’ का स्पष्ट उल्लेख — अर्थात समाज पूरी तरह समान नहीं था।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | दोनों पक्षों के प्रमाण और एक स्पष्ट निष्कर्ष |
| 2–3 | केवल एक पक्ष के प्रमाण, पर अच्छे |
| 1 | पक्ष है पर प्रमाण नहीं |
उत्तर एवं अंकन योजना
सामान्य नियम: इन प्रश्नों में कारण पर अंक हैं। जहाँ विद्यार्थी का उत्तर पुस्तक से भिन्न शब्दों में हो पर तर्क सही हो, पूरे अंक दीजिए।
खंड क
प्रकरण 1 (9)
- 1.1 (4) — चार सही जोड़ियाँ, प्रत्येक 1 अंक: नगरीकरण — सीधी चौड़ी सड़कें और उनके नीचे नालियाँ (जल निकास)। शिल्प — मिट्टी के बर्तन और धातु के औज़ार। व्यापार — एक ही नाप के भार तौलने के पत्थर। कृषि उत्पादकता — एक बड़े कमरे में रखे गेहूँ-जौ के दाने (अर्थात अतिरिक्त अन्न का भंडारण)। (शासन को भी स्वीकार कीजिए यदि विद्यार्थी सुनियोजित सड़कों या साझा नालियों को प्रमाण बनाए — तब किसी एक अन्य के स्थान पर।)
- 1.2 (1) — लेखन का कोई रूप — कहीं कोई लिखा हुआ चिह्न नहीं मिला।
- 1.3 (2) — पूरे अंक का उत्तर दोनों पकड़ता है: व्यापार, क्योंकि तौलने का अर्थ है
लेन-देन; और शासन/प्रशासन, क्योंकि सब पत्थर एक ही नाप के होने का अर्थ है कि किसी ने
माप का एक मानक तय किया और सबसे मनवाया।
(1 अंक: केवल व्यापार बताने पर।)
★यही इस प्रकरण का सबसे अच्छा प्रश्न है — ‘एक ही नाप के’ शब्द ही असली सुराग़ हैं।
- 1.4 (2) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। सबसे अच्छा उत्तर पुस्तक के शब्द “कम से कम” पर टिकता है — पुस्तक कहती है कि सभ्यता में कम से कम ये विशेषताएँ होनी चाहिए, इसलिए लेखन के बिना यह कसौटी पूरी नहीं होती। (पर जो विद्यार्थी कहे कि छह विशेषताएँ मौजूद हैं इसलिए इसे सभ्यता माना जा सकता है, और यह जोड़े कि हो सकता है लेखन अभी मिला न हो — उसे भी पूरे अंक; यह भी उतना ही अच्छा तर्क है।)
प्रकरण 2 (8)
- 2.1 (2) — क्योंकि यह पाया गया है कि इस नगर के अधिकांश घरों में स्नानागार बने हुए थे — इसलिए सार्वजनिक स्नान के लिए इतने बड़े कुंड की आवश्यकता नहीं रही होगी।
- 2.2 (3) — नेहा की। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि जिस प्रमाण के कारण उसकी बात
छोड़ी गई थी, वही प्रमाण अब उलट गया — यदि अधिकांश घरों में स्नानागार नहीं थे, तो
सार्वजनिक कुंड की आवश्यकता समझ में आती है।
(2 अंक: सही नाम पर, पर कारण अधूरा।)
★यह पूरे प्रश्न बैंक का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है — यह जाँचता है कि विद्यार्थी ने प्रमाण और निष्कर्ष का रिश्ता समझा या केवल यह रटा कि “पहली व्याख्या ग़लत है।”
- 2.3 (2) — क्योंकि इस विषय में हमारे पास इतिहास के अन्य स्रोत नहीं हैं — न कोई शिलालेख, न कोई ग्रंथ, न किसी यात्री का विवरण। इसलिए किसी भी व्याख्या को सिद्ध नहीं किया जा सकता।
- 2.4 (1) — “पुरातत्ववेत्ता भी इन प्रश्नों के बारे में चर्चा करते हैं और उनके उत्तर सदैव निर्णायक नहीं होते!”
प्रकरण 3 (8)
- 3.1 (2) — कि हड़प्पावासी भारत के बाहर की सभ्यताओं और संस्कृतियों के साथ भी सक्रिय रूप से व्यापार करते थे — उनकी बनाई वस्तुएँ ईरान और ओमान तक पहुँचती थीं।
- 3.2 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि निर्यात का प्रमाण बाहर मिलता है — हड़प्पाई वस्तु किसी और देश में — पर आयात का प्रमाण मिलना कठिन है, क्योंकि बाहर से आई वस्तु हड़प्पाई स्थलों में मिलनी चाहिए और उसे पहचानना कठिन है; और तांबे जैसी धातु तो पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल कर ली जाती है, इसलिए उसका निशान नहीं बचता। (2 अंक: यदि केवल “बाहर से आई चीज़ पहचानना मुश्किल है” कहा जाए।)
- 3.3 (2) — संभवत: तांबा — क्योंकि यह धातु सामान्यत: उनके पास बहुतायत में उपलब्ध नहीं थी।
- 3.4 (1) — स्थल मार्ग एवं नदियाँ, और दूरवर्ती गंतव्यों के लिए समुद्री रास्ते।
प्रकरण 4 (7)
- 4.1 (2) — (क) क्योंकि सभ्यता सिंधु क्षेत्र से बहुत आगे तक फैली हुई थी, इसलिए ‘घाटी’ कहना ग़लत होगा। (ख) क्योंकि अधिकांश घरों में स्नानागार थे।
- 4.2 (2) — क्योंकि नाम किसी ने बाद में दिया है, प्रमाण से नहीं निकला। मूर्ति पर ऐसा कुछ नहीं है जो बताए कि वह पुरोहित थी या राजा — इसलिए पुस्तक नाम बताती तो है, पर उसे सच नहीं मान लेती।
- 4.3 (3) — किसी भी ऐसे वाक्य पर पूरे अंक जो यह कहे कि “प्रमाण नाम से बड़ा होता है” —
अर्थात कोई बात केवल इसलिए सही नहीं हो जाती कि वह बहुत समय से कही जा रही है; जब नया प्रमाण
मिले, तो पुराना नाम या पुरानी व्याख्या छोड़ देनी चाहिए।
(2 अंक: यदि विचार सही हो पर तीनों को जोड़ न पाए।)
★★यह इस पूरे अध्याय की सबसे गहरी सीख है, और यह प्रश्न सीधे उसी पर है।
खंड ख — अभिकथन एवं कारण
| # | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 1 | (क) | दोनों सही, और R ही A का कारण है |
| 2 | (क) | दोनों सही, और R ही A की व्याख्या है |
| 3 | (क) | दोनों सही; पुस्तक यही कारण देती है |
| 4 | (घ) | A ग़लत — पुस्तक लोथल को ‘एक लघु बस्ती’ कहती है; R सही है |
| 5 | (ग) | A सही; R ग़लत — पुस्तक कहती है कि ये निश्चित रूप से व्यापार से संबंधित हैं |
| 6 | (क) | दोनों सही, और R ही A का कारण है |
खंड ग
1 (4) — प्रत्येक पंक्ति 1 अंक; पूरा अंक तभी जब दोनों स्तंभ भरे जाएँ।
| माप | किसका | क्या पता चलता है |
|---|---|---|
| 12 × 7 मी. | महास्नानागार, मोहनजो-दड़ो | जल और स्वच्छता का सार्वजनिक महत्व; उन्नत निर्माण-तकनीक (बिटुमेन की जल रोधक परत) |
| 73 मी. | धौलावीरा का सबसे बड़ा जलाशय | शुष्क क्षेत्र में जल संचयन की योजना; बड़े पैमाने का सामूहिक श्रम |
| 217 × 36 मी. | लोथल का बेसिन | समुद्री व्यापार — नावों से आयात-निर्यात; भारत की प्रथम गहन समुद्री गतिविधि |
| 10.8 सेमी. | ‘नर्तकी’ की कांस्य प्रतिमा | कला और धातु-ढलाई का कौशल; सांस्कृतिक अभिव्यक्ति |
2 (4)
- 2.1 (2) — दूरदर्शी और सामूहिक सोच। उन्होंने एक ऐसी जगह बसने का निर्णय लिया जहाँ पानी कम था, और पहले से जल संचयन तथा वितरण की पूरी योजना बनाई — जलाशय भी, और उन्हें जोड़ने वाली भूमिगत नालियाँ भी। यह एक दिन की नहीं, कई पीढ़ियों की सोच है।
- 2.2 (2) — कोई भी तीन: बड़ी संख्या में श्रमिक; उन्हें निर्देश देने और काम सुनियोजित करने वाला कोई प्राधिकरण; मजदूरी के भुगतान की व्यवस्था (मुद्रा नहीं थी, अत: अन्न या वस्तुओं में); चट्टान काटने के औज़ार और तकनीक; समय-समय पर सफ़ाई और रख-रखाव के लिए कोई स्थानीय व्यवस्था।
3 (3)
- 3.1 (1) — उसने पृष्ठ 90 की तालिका को तथ्य मान लिया, जबकि वह मिलान का अभ्यास है और उसकी जोड़ियाँ जान-बूझकर बदली हुई हैं।
- 3.2 (2) — धौलावीरा — गुजरात · हड़प्पा — पंजाब · कालीबंगा — राजस्थान · मोहनजो-दड़ो — सिंध · राखीगढ़ी — हरियाणा।
खंड घ — रूब्रिक
1 (4) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि कारण दिया गया हो। पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि यह ईमानदारी है, कमज़ोरी नहीं — क्योंकि इस सभ्यता के बारे में कोई शिलालेख, ग्रंथ या यात्री का विवरण नहीं है, इसलिए निश्चितता से कुछ कह देना ग़लत होता। (अध्याय 4 से जोड़ने पर अतिरिक्त मान्यता।)
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | पक्ष और कारण और कम से कम एक उदाहरण अध्याय से |
| 2–3 | पक्ष और कारण, पर उदाहरण नहीं |
| 1 | केवल पक्ष, कोई कारण नहीं |
2 (3) — पूरे अंक का उत्तर यह पहचानता है कि वह वाक्य पाठक को यह बताने के लिए है कि कहानी अभी बंद नहीं हुई — शोध जारी है और आगे और कारण मिल सकते हैं। उसे हटा देने से ऐसा लगता कि यह प्रश्न पूरी तरह हल हो चुका है, जो सच नहीं है।
3 (3) — कोई भी तीन, संकेत सहित; प्रत्येक 1 अंक: पूरी बाँह ढँकने वाली चूड़ियाँ (चित्र 6.15.4; और शंख की चूड़ियाँ, पृ. 97) · नमस्ते की मुद्रा (चित्र 6.15.5) · स्वास्तिक (चित्र 6.15.2) · कंघा (चित्र 6.11) · दर्पण (चित्र 6.14.1) · हल (चित्र 6.9, पृ. 96) · हल्दी और अदरक (पृ. 97) · प्यासे कौए की कहानी (चित्र 6.15.6) · खेल-बोर्ड और सीटी (चित्र 6.14.5, 6.14.6)।
4 (4) — इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है, और यही उद्देश्य है।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | अपनी व्यवस्था का सही वर्णन और कम से कम एक समानता (जैसे — हमारे यहाँ भी नालियाँ सड़क के नीचे हैं; हमारे घर में भी अलग स्नानघर है) और कम से कम एक अंतर (जैसे — हमारे यहाँ नल से पानी आता है, वे कुएँ से निकालते थे) |
| 2–3 | वर्णन सही, पर तुलना एकतरफ़ा |
| 1 | केवल अपनी व्यवस्था बताई, तुलना नहीं |
5 (4) — किसी भी पक्ष पर पूरे अंक, यदि दोनों ओर के प्रमाण दिए गए हों।
सहमति के प्रमाण: सड़कों के नीचे साझा जल-निकास प्रणाली; बड़े और छोटे घरों की एक समान निर्माण गुणवत्ता; सामूहिक गोदाम; सार्वजनिक जलाशय; युद्ध के हथियारों और सेना का अभाव; बी.बी. लाल का “शोषण नहीं, आपसी सामंजस्य”।
असहमति के प्रमाण: नगर के दो भाग — ‘ऊपरी नगर’ और ‘निचला नगर’; और ‘अभिजात वर्ग’ का स्पष्ट उल्लेख — अर्थात समाज पूरी तरह समान नहीं था।
| अंक | कसौटी |
|---|---|
| 4 | दोनों पक्षों के प्रमाण और एक स्पष्ट निष्कर्ष |
| 2–3 | केवल एक पक्ष के प्रमाण, पर अच्छे |
| 1 | पक्ष है पर प्रमाण नहीं |
योग्यता-वार आवरण
| योग्यता | कहाँ जाँची गई | कुल अंक |
|---|---|---|
| यो-1 — कसौटी लगाना | प्रकरण 1 (पूरा) | 9 |
| यो-2 — प्रमाण से निष्कर्ष | प्रकरण 1 (1.3), प्रकरण 3, खंड ग (1, 2) | 16 |
| यो-3 — व्याख्या की जाँच | प्रकरण 2, प्रकरण 4 (4.1), खंड ख (2, 4, 5), खंड ग (3) | 17 |
| यो-4 — अनिश्चितता के साथ काम | प्रकरण 2 (2.3, 2.4), प्रकरण 4 (4.2, 4.3), खंड घ (1, 2) | 15 |
| यो-5 — अतीत और वर्तमान | प्रकरण 3, खंड घ (3, 4, 5), खंड ख (6) | 15 |
| कुल | 62 |
एक 40 अंक का पेपर बनाना हो तो: प्रकरण 1 (9) + प्रकरण 2 (8) + खंड ख के चार प्रश्न (4) + खंड ग का प्रश्न 1 और 3 (7) + खंड घ का प्रश्न 1 और 3 (7) + प्रकरण 4 का 4.3 (3) = 38 अंक, जिसे 40 पर समायोजित कर लीजिए।
शिक्षक हेतु दो चेतावनियाँ
1. प्रकरण 2 का प्रश्न 2.2 इस पूरी फ़ाइल का हृदय है — उसे जल्दी में मत जाँचिए। वह प्रश्न प्रमाण को उलट देता है और पूछता है कि निष्कर्ष का क्या हुआ। जो विद्यार्थी कहता है “अब नेहा सही हो जाएगी, क्योंकि जिस वजह से उसकी बात छोड़ी गई थी वह वजह ही ख़त्म हो गई” — उसने इस अध्याय का असली काम कर लिया है, भले उसे महास्नानागार का नाप याद न हो। रटने वाला विद्यार्थी यहाँ अटकता है; समझने वाला नहीं।
2. खंड घ के प्रश्न 1, 4 और 5 पर ‘सही उत्तर’ मत ढूँढ़िए। इनमें कोई एक सही उत्तर नहीं है। प्रश्न 1 जाँचता है कि बच्चा अनिश्चितता को स्वीकार कर पाता है या नहीं; प्रश्न 4 उसे अपने घर से जोड़ता है; प्रश्न 5 उससे दोनों पक्ष रखवाता है। जो बच्चा प्रश्न 1 में लिखता है “नहीं पता कहना अच्छा है, क्योंकि झूठ लिखने से तो बेहतर है” — उसने ठीक सोचा है, भले शब्द सरल हों।
और याद रखिए: यह फ़ाइल
05-Question-Bank.mdके अतिरिक्त है, उसके स्थान पर नहीं। परीक्षा अभी भी पाठ्यपुस्तक से बनती है।