Chapter 7भारत की सांस्कृतिक जड़ें

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NCERT — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, अध्याय 7 (पृ. 105–123)।

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जड़ें छुइए, कथाएँ सुनिए, पेड़ बढ़ता देखिए

शुरुआत

भारतीय संस्कृति अनेक सहस्राब्दियों पुरानी है। पुस्तक इसे एक प्राचीन वृक्ष से समझाती है: अनेक जड़ें एक सामान्य तने को पोषण देती हैं, और तने से अनेक शाखाएँ निकलती हैं — अलग-अलग, पर एक ही तने से जुड़ी (पृ. 106)।

“वह जिसे चुराया नहीं जा सकता; जिसे कोई शासक छीन नहीं सकता; …जो बोझ नहीं है क्योंकि इसका अपना कोई भार नहीं है; जिसका उपयोग करने से हर दिन इसमें वृद्धि ही होती है — यह सबसे बड़ी संपत्ति है, सच्चे ज्ञान की संपत्ति।”

— सुभाषित (नीतिशतक) — अध्याय का आरंभ, पृ. 105

अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 105)

  1. वेद क्या हैं? इनका संदेश क्या है?
  2. प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में भारत में कौन-कौन से नए दर्शन/मत उभरे? इनके मूल सिद्धांत क्या हैं?
  3. लोक और जनजातीय परंपराओं का भारतीय संस्कृति में क्या योगदान रहा है?

संस्कृति का वृक्ष

जड़, तने और शाखाओं पर टैप कीजिए। हर पड़ाव पूरा होने पर पेड़ पर पत्ते बढ़ेंगे।

जड़, तने और शाखाओं पर टैप कीजिए। हर पड़ाव पूरा होने पर पेड़ पर पत्ते बढ़ेंगे।

पुस्तक कहती है कि वटवृक्ष (बरगद) भारतीय सभ्यता का उत्कृष्ट प्रतीक है; हिंदू दर्शन, बौद्ध और जैन मत इसे पवित्र मानते हैं (पृ. 123)। चित्र हमारा बनाया है।

इस अध्याय के रिवीजन नोट्स अभी तैयार हो रहे हैं; तब तक यह पन्ना सीधे पाठ्यपुस्तक से बना है। Progress is kept only in this browser. Nothing is sent anywhere.

1वेद क्या हैं?

"वेद" शब्द "विद्" से आया है, जिसका अर्थ है "ज्ञान" (जैसे — विद्या)। चार वेद हैं। ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं, और विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से हैं (पृ. 106)।

  1. 1ऋग्वेद
  2. 2यजुर्वेद
  3. 3सामवेद
  4. 4अथर्ववेद

लिखे नहीं, याद रखे गए

वेदों में हज़ारों ऋचाएँ (कविता और गीतों के रूप में प्रार्थनाएँ) हैं, जो लिखी नहीं गईं — उनका मौखिक पाठ होता था। ये सप्तसिंधु क्षेत्र में रची गईं। ऋग्वेद की रचना के लिए विशेषज्ञ पाँचवीं से दूसरी सहस्राब्दी सा.सं.पू. तक के समय सुझाते हैं; यानी 100 से 200 पीढ़ियों तक, गहन प्रशिक्षण से याद करके, बिना किसी विशेष परिवर्तन के आगे पहुँचाई गईं (पृ. 106)। स्लाइडर से पीढ़ियाँ बढ़ाइए।

एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति

इसीलिए 2008 में यूनेस्को ने वैदिक पाठ को "मानवता की मौखिक और अमूर्त विरासत की अनुपम कृति" के रूप में मान्यता दी (पृ. 107)।

एक सत्य, अनेक नाम

ऋचाएँ ऋषियों और ऋषिकाओं ने संस्कृत के एक प्रारंभिक रूप में रचीं, और वे अनेक देवों को संबोधित थीं। आरंभिक ऋषि-ऋषिकाएँ देवताओं और देवियों को अलग नहीं, एक ही मानते थे (पृ. 107)। हर नाम पर टैप कीजिए।

ऋत (पृ. 107)

ऋषियों के साथ मिलकर देवों ने मानव जीवन और ब्रह्मांड में "ऋत" — सत्य और क्रम — को बनाए रखा। इस वैश्विक दर्शन में कुछ मान्यताएँ ख़ास तौर पर अहम थीं, और उनमें पहली थी "सत्य", जो ईश्वर का दूसरा नाम था।

ऋग्वेद के अंतिम मंत्र (पृ. 108)

साथ मिलकर चलें, साथ मिलकर बोलें,

एक हो हमारा मन, हमारे विचार मिलें…

एक हो हमारा उद्देश्य, एक हो हमारा हृदय…

हमारे विचार एक हों, अतः सभी सहमत हों।

Checkpoint

  1. 1"वेद" शब्द किससे आया है, और अर्थ क्या है?

  2. 2यूनेस्को ने वैदिक पाठ को कब मान्यता दी?

2वैदिक समाज और दर्शन

प्रारंभिक वैदिक समाज "जनों" (लोगों के बड़े समूहों) में संगठित था। ऋग्वेद में ही 30 से अधिक जनों की सूची है — जैसे भरत, पुरु, कुरु, यदु, तुर्वश। हर जन उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग के एक क्षेत्र से जुड़ा था (पृ. 108)।

वेदों में क्या-क्या मिलता है?

शासन के बारे में वेद सिर्फ़ कुछ संकेत देते हैं; व्यवसायों का उल्लेख बहुत है। हर शब्द को सही डिब्बे में डालिए।

उपनिषदों के विचार (पृ. 109–110)

उपनिषद वैदिक संकल्पनाओं पर बने और कुछ नई संकल्पनाएँ लाए। हर शब्द को उसके अर्थ से जोड़िए।

दो प्रसिद्ध मंत्र (पृ. 109)

अहम् ब्रह्मास्मि"मैं ब्रह्म हूँ" (अर्थात, मैं दिव्य हूँ)

तत् त्वम् असि"वह ब्रह्म आप ही हैं"

सब आपस में जुड़े हैं (पृ. 110)

इसीलिए एक प्रार्थना "सर्वे भवन्तु सुखिनः" — "सभी जीव सुखी रहें" — से शुरू होती है और सबके लिए रोग तथा दुख से मुक्ति की कामना करती है।

योग (पृ. 110)

प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वेदों से कुछ और दर्शन विकसित हुए। उनमें से एक योग था, जिसने व्यक्ति की चेतना में ब्रह्म का आत्म-बोध पाने की विधियाँ विकसित कीं। इन दर्शनों से मिलकर वे आधारभूत विचार बने जिन्हें आज "हिंदू दर्शन" कहते हैं।

Checkpoint

  1. 1वेदों में "सभा" और "समिति" किस बात का संकेत हैं?

  2. 2उपनिषदों ने कौन-सी नई संकल्पनाएँ दीं?

3प्रश्न पूछने वाली कथाएँ

उपनिषदों की कई कथाएँ बताती हैं कि प्रश्न पूछना कितना महत्वपूर्ण है — प्रश्न चाहे किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछा हो (पृ. 111)।

उद्दालक की सीख: बरगद का बीज

श्वेतकेतु 12 वर्ष गुरुकुल में पढ़कर लौटा तो पिता ऋषि उद्दालक आरुणि ने देखा कि वह अपने ज्ञान पर बहुत अहंकारी हो गया है। उन्होंने उसे दो उदाहरणों से समझाया (पृ. 111)। दोनों आज़माइए।

एक मिट्टी, अनेक बर्तन

एक ही मिट्टी से बर्तन गढ़िए।

कौन, किस उपनिषद में?

हर कथा के पात्र को उसके उपनिषद से जोड़िए।

किसने क्या पूछा?

कार्ड पलटिए।

अभ्यास प्र. 1 (पृ. 122)

आप नचिकेता होते तो यम से कौन-से प्रश्न पूछते? 100–150 शब्दों में लिखिए। कक्षा में एक नाटक भी कीजिए, जिसमें कई नचिकेता यम से जीवन के बारे में प्रश्न पूछें।

Checkpoint

  1. 1श्वेतकेतु कितने वर्ष गुरुकुल में रहा?

  2. 2नचिकेता के प्रश्न पर यम ने आत्मा के बारे में क्या बताया?

4बौद्ध मत

कुछ अन्य दर्शनों ने वेदों की प्रभुता स्वीकार नहीं की और अपनी पद्धति विकसित की। उनमें से एक बौद्ध मत है (पृ. 110)। लगभग ढाई सहस्राब्दी पहले राजकुमार सिद्धार्थ गौतम का जन्म लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में हुआ। जन्म-वर्ष पर विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं; अध्याय 4 में हमने लगभग 560 सा.सं.पू. माना था।

सिद्धार्थ से बुद्ध

पुस्तक की कथा के क्रम में लगाइए।

▲ पहले

  1. 1बोधगया (वर्तमान बिहार) में पीपल के नीचे कई दिन ध्यान के बाद ज्ञान प्राप्त हुआ
  2. 2राजमहल में सुरक्षित वातावरण में बड़े हुए
  3. 3उपदेश दिया, और संघ की स्थापना की
  4. 429 वर्ष की आयु में नगर में पहली बार एक वृद्ध, एक रोगी और एक शव देखा; एक प्रसन्न, शांत संन्यासी भी
  5. 5राजसी जीवन छोड़ा; संन्यासी की तरह पैदल चलते हुए दुखों के मूल कारण की खोज की

▼ बाद में

अहिंसा (पृ. 113)

बुद्ध के उपदेशों में अहिंसा का विचार है, जिसका मूल अर्थ है — चोट न पहुँचाना या नुकसान न पहुँचाना। उन्होंने निष्ठापूर्वक आंतरिक अनुशासन पर भी बल दिया।

बुद्ध के दो कथन (पृ. 113)

"जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता, जबकि कई लोग यहाँ (पवित्र नदी में) स्नान करते हैं। परंतु वह व्यक्ति शुद्ध है जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं।"

"युद्ध के मैदान में हज़ारों व्यक्तियों पर हज़ारों बार विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।"

संघ (पृ. 113)

भिक्षुओं (और आगे चलकर भिक्षुणियों) का समुदाय, जो बुद्ध के उपदेशों के पालन और प्रसार के लिए समर्पित था। भारत और पूरे एशिया पर बुद्ध का गहरा प्रभाव आज भी अनुभव किया जा सकता है।

जातक कथा: वानर-राज

जातक कथाएँ बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियाँ हैं (पृ. 116)। वानर-राज ने नदी के पार एक पेड़ पकड़कर अपने शरीर को पुल बना दिया। बटन दबाकर वानरों को पार कराइए।

चित्र हमारा बनाया है।

Checkpoint

  1. 1बुद्ध के अनुसार मानवीय कष्ट के स्रोत क्या हैं?

  2. 2"बुद्ध" का अर्थ क्या है?

5जैन मत

जैन मत भी उसी समय लोकप्रिय हुआ, यद्यपि इसे अधिक प्राचीन माना जाता है। राजकुमार वर्धमान का जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली (वर्तमान बिहार) के समीप हुआ। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ा, संन्यासी जीवन के अनुशासन का पालन किया, और 12 वर्ष बाद उन्हें "अनंत" ज्ञान प्राप्त हुआ। वे "महावीर" कहलाए (पृ. 114–115)।

"जैन" शब्द (पृ. 115)

"जैन" शब्द "जिन" से आया है, अर्थात "विजेता" — क्षेत्र या शत्रुओं पर नहीं, अविद्या और मोह पर विजय।

तीन विचार (पृ. 115)

हर विचार को उसके अर्थ से जोड़िए।

अनेकांतवाद: एक वस्तु, कई दृष्टि

नीचे एक ही वस्तु है। अलग-अलग ओर से देखिए — हर दृष्टि सच्ची है, पर कोई एक पूरी नहीं।

ऊपर से देखें तो यह एक गोला (वृत्त) है।

यह उदाहरण हमारा है, पुस्तक का नहीं; विचार पुस्तक का है।

बुद्ध या महावीर — या दोनों?

हर बात को सही डिब्बे में डालिए।

एक जैन कथा: रोहिणेय (पृ. 116–117)

कुशल चोर रोहिणेय ने अनजाने में महावीर के उपदेश के कुछ वाक्य सुने, और उन्हीं को याद रखकर मंत्री की चाल पहचान ली। बाद में उसे पछतावा हुआ: उसने अपराध स्वीकार किए, चुराया धन लौटाया, क्षमा माँगी और भिक्षु बन गया। पुस्तक कहती है: कथा सम्यक कर्म और सम्यक विचार का महत्व बताती है, और यह भी कि हर व्यक्ति को दूसरा अवसर मिलना चाहिए।

Checkpoint

  1. 1"जिन" का अर्थ क्या है?

  2. 2"अपरिग्रह" किसकी सलाह देता है?

6एक तना, अनेक मत

बौद्ध और जैन, दोनों मतों के भिक्षु और कभी-कभी भिक्षुणियाँ दूर-दूर तक यात्रा करके उपदेश फैलाते थे। कुछ ने नए विहार बनाए, कुछ ने पत्थर काटकर बनी गुफाओं में संन्यासी जीवन बिताया — कई जगह गुफाओं में उन भिक्षुओं के नाम तक मिले हैं जो पत्थर के बिस्तरों पर सोते थे (पृ. 118)।

एलोरा (महाराष्ट्र) (पृ. 118)

यहाँ छठी और दसवीं शताब्दी सा.सं. के बीच पहाड़ काटकर गुफाएँ बनाई गईं। कुछ हिंदू दर्शन की हैं, कुछ बौद्ध और जैन मतों की।

जड़ें अलग, तना एक

पुस्तक की बातों को जाँचिए: कौन-सी बात इन मतों में समान थी? समान संकल्पनाओं पर टैप कीजिए — वे तने में जुड़ जाएँगी।

आइए विचार करें: "धर्म" या "मत"? (पृ. 118)

अंग्रेज़ी में इन्हें "रिलिजन" कहा जाता है, पर पुस्तक "दर्शन", "मत" और "विश्वास" शब्द चुनती है — क्योंकि इनके दार्शनिक, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक, धार्मिक जैसे अनेक पक्ष हैं। अनेक विद्वान मानते हैं कि भारतीय सभ्यता के संदर्भ में "रिलिजन" शब्द बहुत सीमित है।

चार्वाक (लोकायत) (पृ. 118–119)

उस समय और भी मत थे। चार्वाक दर्शन के अनुसार यह भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है, इसलिए मृत्यु के बाद जीवन असंभव है। लगता है, इस दर्शन को ज़्यादा लोकप्रियता नहीं मिली और समय के साथ यह लुप्त हो गया। पुस्तक इसका उल्लेख यह दिखाने के लिए करती है कि विश्वासों में व्यापक विविधता थी, और लोग अपने अनुसार चुनने के लिए स्वतंत्र थे।

Checkpoint

  1. 1एलोरा की गुफाएँ कब बनीं?

  2. 2चार्वाक दर्शन के अनुसार एकमात्र सत्य क्या है?

7लोक और जनजातीय जड़ें

अब तक की जड़ें शास्त्रों में वर्णित हैं। भारत में समृद्ध मौखिक परंपराएँ भी रहीं — लोक परंपराएँ, जो आम लोग आगे बढ़ाते हैं, और जनजातीय परंपराएँ, जो जनजातियाँ (पृ. 119)।

जनजाति क्या है? (पृ. 119)

आज मानव विज्ञानी जनजाति को ऐसे परिवारों या वंशों का समूह मानते हैं जो एक सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा साझा करते हैं, आपस में निकट संबंध रखते हुए समुदाय में रहते हैं, जिनका एक मुखिया होता है और जिनके पास कोई निजी संपत्ति नहीं होती। प्राचीन भारत में "जनजाति" के लिए कोई शब्द नहीं था — वे बस वन या पहाड़ जैसे परिवेश में रहने वाले अलग-अलग जन थे। संविधान हिंदी में "जनजाति" शब्द का उपयोग करता है।

आधिकारिक आँकड़े, 2011 (पृ. 119)

705जनजातियाँ, अधिकांश राज्यों में

104 मिलियनलगभग जनसंख्या (= 10.4 करोड़) — ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या से अधिक

पुरानी सोच, जो बदली (पृ. 119)

19वीं शताब्दी में कई मानव विज्ञानियों ने जनजातियों को "आदिम" या "हीन" बताया। उनकी समृद्ध और जटिल संस्कृतियों के गहन अध्ययन के बाद ऐसे पक्षपातपूर्ण विचार अधिकांशतः नकार दिए गए।

दोनों दिशाओं में आदान-प्रदान (पृ. 120)

देवता, संकल्पनाएँ, दंतकथाएँ और रीतियाँ दोनों ओर से आईं-गईं। हर तीर पर टैप कीजिए।

जनजातीय और लोक परंपराएँ
व्यापक परंपराएँ

प्रकृति के देव और परम सत्ता (पृ. 120–121)

हर समुदाय को पुस्तक में बताए विश्वास से जोड़िए।

Checkpoint

  1. 12011 के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार भारत में कितनी जनजातियाँ थीं?

  2. 2परंपरा के अनुसार पुरी के कौन-से देवता मूल रूप से जनजातीय देवता थे?

8सार और अभ्यास

पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 121)

पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।

सही या गलत? (पृ. 122)

  1. वैदिक ऋचाओं को ताड़-पत्र की पांडुलिपियों पर लिखा गया।

  2. वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं।

  3. "एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति" में ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता की मान्यता है।

  4. बौद्ध मत वेदों से अधिक पुराना है।

  5. जैन मत बौद्ध मत की एक शाखा के रूप में उभरा।

  6. बौद्ध और जैन मत, दोनों सभी जीवों को नुकसान न पहुँचाने का समर्थन करते हैं।

  7. जनजातीय विश्वास परंपराएँ आत्मा और छोटे देवों तक सीमित हैं।

चर्चा और गतिविधि (पृ. 122)

  1. बुद्ध का कथन "जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता…" — कक्षा में इसका अर्थ समझिए।
  2. आंद्रे बेते के कथन पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए।
  3. अपने क्षेत्र के लोकप्रिय देवी-देवताओं और उनसे जुड़े त्योहारों की सूची बनाइए।
  4. अपने क्षेत्र या राज्य के दो-तीन जनजातीय समूहों की परंपराओं और विश्वासों के बारे में लिखिए।

आख़िरी जाँच

  1. 1वेदों से उभरे दर्शनों में कौन-से दो प्रमुख हैं?

  2. 2पुस्तक के अनुसार भारतीय सभ्यता का उत्कृष्ट प्रतीक कौन-सा वृक्ष है?

  3. 3जनजातीय विश्वास प्रायः किसे पवित्र मानते हैं?