जड़ें छुइए, कथाएँ सुनिए, पेड़ बढ़ता देखिए
शुरुआत
भारतीय संस्कृति अनेक सहस्राब्दियों पुरानी है। पुस्तक इसे एक प्राचीन वृक्ष से समझाती है: अनेक जड़ें एक सामान्य तने को पोषण देती हैं, और तने से अनेक शाखाएँ निकलती हैं — अलग-अलग, पर एक ही तने से जुड़ी (पृ. 106)।

“वह जिसे चुराया नहीं जा सकता; जिसे कोई शासक छीन नहीं सकता; …जो बोझ नहीं है क्योंकि इसका अपना कोई भार नहीं है; जिसका उपयोग करने से हर दिन इसमें वृद्धि ही होती है — यह सबसे बड़ी संपत्ति है, सच्चे ज्ञान की संपत्ति।”
अध्याय इन तीन प्रश्नों का उत्तर देता है (पृ. 105)
- वेद क्या हैं? इनका संदेश क्या है?
- प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. में भारत में कौन-कौन से नए दर्शन/मत उभरे? इनके मूल सिद्धांत क्या हैं?
- लोक और जनजातीय परंपराओं का भारतीय संस्कृति में क्या योगदान रहा है?
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1वेद क्या हैं?
"वेद" शब्द "विद्" से आया है, जिसका अर्थ है "ज्ञान" (जैसे — विद्या)। चार वेद हैं। ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं, और विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से हैं (पृ. 106)।
- 1ऋग्वेद
- 2यजुर्वेद
- 3सामवेद
- 4अथर्ववेद
ऋत (पृ. 107)
ऋषियों के साथ मिलकर देवों ने मानव जीवन और ब्रह्मांड में "ऋत" — सत्य और क्रम — को बनाए रखा। इस वैश्विक दर्शन में कुछ मान्यताएँ ख़ास तौर पर अहम थीं, और उनमें पहली थी "सत्य", जो ईश्वर का दूसरा नाम था।
ऋग्वेद के अंतिम मंत्र (पृ. 108)
साथ मिलकर चलें, साथ मिलकर बोलें,
एक हो हमारा मन, हमारे विचार मिलें…
एक हो हमारा उद्देश्य, एक हो हमारा हृदय…
हमारे विचार एक हों, अतः सभी सहमत हों।
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1"वेद" शब्द किससे आया है, और अर्थ क्या है?
पृ. 106: विद् = ज्ञान।
2यूनेस्को ने वैदिक पाठ को कब मान्यता दी?
पृ. 107: 2008।
2वैदिक समाज और दर्शन
प्रारंभिक वैदिक समाज "जनों" (लोगों के बड़े समूहों) में संगठित था। ऋग्वेद में ही 30 से अधिक जनों की सूची है — जैसे भरत, पुरु, कुरु, यदु, तुर्वश। हर जन उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग के एक क्षेत्र से जुड़ा था (पृ. 108)।
दो प्रसिद्ध मंत्र (पृ. 109)
अहम् ब्रह्मास्मि"मैं ब्रह्म हूँ" (अर्थात, मैं दिव्य हूँ)
तत् त्वम् असि"वह ब्रह्म आप ही हैं"
सब आपस में जुड़े हैं (पृ. 110)
इसीलिए एक प्रार्थना "सर्वे भवन्तु सुखिनः" — "सभी जीव सुखी रहें" — से शुरू होती है और सबके लिए रोग तथा दुख से मुक्ति की कामना करती है।
योग (पृ. 110)
प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वेदों से कुछ और दर्शन विकसित हुए। उनमें से एक योग था, जिसने व्यक्ति की चेतना में ब्रह्म का आत्म-बोध पाने की विधियाँ विकसित कीं। इन दर्शनों से मिलकर वे आधारभूत विचार बने जिन्हें आज "हिंदू दर्शन" कहते हैं।
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1वेदों में "सभा" और "समिति" किस बात का संकेत हैं?
पृ. 109: दोनों सामूहिकता को इंगित करते हैं।
2उपनिषदों ने कौन-सी नई संकल्पनाएँ दीं?
पृ. 109।
3प्रश्न पूछने वाली कथाएँ
उपनिषदों की कई कथाएँ बताती हैं कि प्रश्न पूछना कितना महत्वपूर्ण है — प्रश्न चाहे किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछा हो (पृ. 111)।
अभ्यास प्र. 1 (पृ. 122)
आप नचिकेता होते तो यम से कौन-से प्रश्न पूछते? 100–150 शब्दों में लिखिए। कक्षा में एक नाटक भी कीजिए, जिसमें कई नचिकेता यम से जीवन के बारे में प्रश्न पूछें।
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1श्वेतकेतु कितने वर्ष गुरुकुल में रहा?
पृ. 111: 12 वर्ष।
2नचिकेता के प्रश्न पर यम ने आत्मा के बारे में क्या बताया?
पृ. 112।
4बौद्ध मत
कुछ अन्य दर्शनों ने वेदों की प्रभुता स्वीकार नहीं की और अपनी पद्धति विकसित की। उनमें से एक बौद्ध मत है (पृ. 110)। लगभग ढाई सहस्राब्दी पहले राजकुमार सिद्धार्थ गौतम का जन्म लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में हुआ। जन्म-वर्ष पर विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं; अध्याय 4 में हमने लगभग 560 सा.सं.पू. माना था।
अहिंसा (पृ. 113)
बुद्ध के उपदेशों में अहिंसा का विचार है, जिसका मूल अर्थ है — चोट न पहुँचाना या नुकसान न पहुँचाना। उन्होंने निष्ठापूर्वक आंतरिक अनुशासन पर भी बल दिया।
बुद्ध के दो कथन (पृ. 113)
"जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता, जबकि कई लोग यहाँ (पवित्र नदी में) स्नान करते हैं। परंतु वह व्यक्ति शुद्ध है जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं।"
"युद्ध के मैदान में हज़ारों व्यक्तियों पर हज़ारों बार विजय पाने की तुलना में स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।"
संघ (पृ. 113)
भिक्षुओं (और आगे चलकर भिक्षुणियों) का समुदाय, जो बुद्ध के उपदेशों के पालन और प्रसार के लिए समर्पित था। भारत और पूरे एशिया पर बुद्ध का गहरा प्रभाव आज भी अनुभव किया जा सकता है।
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1बुद्ध के अनुसार मानवीय कष्ट के स्रोत क्या हैं?
पृ. 113।
2"बुद्ध" का अर्थ क्या है?
पृ. 113।
5जैन मत
जैन मत भी उसी समय लोकप्रिय हुआ, यद्यपि इसे अधिक प्राचीन माना जाता है। राजकुमार वर्धमान का जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली (वर्तमान बिहार) के समीप हुआ। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ा, संन्यासी जीवन के अनुशासन का पालन किया, और 12 वर्ष बाद उन्हें "अनंत" ज्ञान प्राप्त हुआ। वे "महावीर" कहलाए (पृ. 114–115)।
"जैन" शब्द (पृ. 115)
"जैन" शब्द "जिन" से आया है, अर्थात "विजेता" — क्षेत्र या शत्रुओं पर नहीं, अविद्या और मोह पर विजय।
एक जैन कथा: रोहिणेय (पृ. 116–117)
कुशल चोर रोहिणेय ने अनजाने में महावीर के उपदेश के कुछ वाक्य सुने, और उन्हीं को याद रखकर मंत्री की चाल पहचान ली। बाद में उसे पछतावा हुआ: उसने अपराध स्वीकार किए, चुराया धन लौटाया, क्षमा माँगी और भिक्षु बन गया। पुस्तक कहती है: कथा सम्यक कर्म और सम्यक विचार का महत्व बताती है, और यह भी कि हर व्यक्ति को दूसरा अवसर मिलना चाहिए।
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1"जिन" का अर्थ क्या है?
पृ. 115: विजेता — अविद्या और मोह पर।
2"अपरिग्रह" किसकी सलाह देता है?
पृ. 115।
6एक तना, अनेक मत
बौद्ध और जैन, दोनों मतों के भिक्षु और कभी-कभी भिक्षुणियाँ दूर-दूर तक यात्रा करके उपदेश फैलाते थे। कुछ ने नए विहार बनाए, कुछ ने पत्थर काटकर बनी गुफाओं में संन्यासी जीवन बिताया — कई जगह गुफाओं में उन भिक्षुओं के नाम तक मिले हैं जो पत्थर के बिस्तरों पर सोते थे (पृ. 118)।
एलोरा (महाराष्ट्र) (पृ. 118)
यहाँ छठी और दसवीं शताब्दी सा.सं. के बीच पहाड़ काटकर गुफाएँ बनाई गईं। कुछ हिंदू दर्शन की हैं, कुछ बौद्ध और जैन मतों की।
आइए विचार करें: "धर्म" या "मत"? (पृ. 118)
अंग्रेज़ी में इन्हें "रिलिजन" कहा जाता है, पर पुस्तक "दर्शन", "मत" और "विश्वास" शब्द चुनती है — क्योंकि इनके दार्शनिक, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक, धार्मिक जैसे अनेक पक्ष हैं। अनेक विद्वान मानते हैं कि भारतीय सभ्यता के संदर्भ में "रिलिजन" शब्द बहुत सीमित है।
चार्वाक (लोकायत) (पृ. 118–119)
उस समय और भी मत थे। चार्वाक दर्शन के अनुसार यह भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है, इसलिए मृत्यु के बाद जीवन असंभव है। लगता है, इस दर्शन को ज़्यादा लोकप्रियता नहीं मिली और समय के साथ यह लुप्त हो गया। पुस्तक इसका उल्लेख यह दिखाने के लिए करती है कि विश्वासों में व्यापक विविधता थी, और लोग अपने अनुसार चुनने के लिए स्वतंत्र थे।
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1एलोरा की गुफाएँ कब बनीं?
पृ. 118।
2चार्वाक दर्शन के अनुसार एकमात्र सत्य क्या है?
पृ. 118।
7लोक और जनजातीय जड़ें
अब तक की जड़ें शास्त्रों में वर्णित हैं। भारत में समृद्ध मौखिक परंपराएँ भी रहीं — लोक परंपराएँ, जो आम लोग आगे बढ़ाते हैं, और जनजातीय परंपराएँ, जो जनजातियाँ (पृ. 119)।
जनजाति क्या है? (पृ. 119)
आज मानव विज्ञानी जनजाति को ऐसे परिवारों या वंशों का समूह मानते हैं जो एक सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा साझा करते हैं, आपस में निकट संबंध रखते हुए समुदाय में रहते हैं, जिनका एक मुखिया होता है और जिनके पास कोई निजी संपत्ति नहीं होती। प्राचीन भारत में "जनजाति" के लिए कोई शब्द नहीं था — वे बस वन या पहाड़ जैसे परिवेश में रहने वाले अलग-अलग जन थे। संविधान हिंदी में "जनजाति" शब्द का उपयोग करता है।
आधिकारिक आँकड़े, 2011 (पृ. 119)
705जनजातियाँ, अधिकांश राज्यों में
104 मिलियनलगभग जनसंख्या (= 10.4 करोड़) — ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या से अधिक
पुरानी सोच, जो बदली (पृ. 119)
19वीं शताब्दी में कई मानव विज्ञानियों ने जनजातियों को "आदिम" या "हीन" बताया। उनकी समृद्ध और जटिल संस्कृतियों के गहन अध्ययन के बाद ऐसे पक्षपातपूर्ण विचार अधिकांशतः नकार दिए गए।
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12011 के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार भारत में कितनी जनजातियाँ थीं?
पृ. 119: 705।
2परंपरा के अनुसार पुरी के कौन-से देवता मूल रूप से जनजातीय देवता थे?
पृ. 120।
8सार और अभ्यास
पुस्तक का अपना सार — "आगे बढ़ने से पहले…" (पृ. 121)
पहले खुद याद कीजिए, फिर कार्ड पलटिए।
चर्चा और गतिविधि (पृ. 122)
- बुद्ध का कथन "जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता…" — कक्षा में इसका अर्थ समझिए।
- आंद्रे बेते के कथन पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए।
- अपने क्षेत्र के लोकप्रिय देवी-देवताओं और उनसे जुड़े त्योहारों की सूची बनाइए।
- अपने क्षेत्र या राज्य के दो-तीन जनजातीय समूहों की परंपराओं और विश्वासों के बारे में लिखिए।
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1वेदों से उभरे दर्शनों में कौन-से दो प्रमुख हैं?
पृ. 121।
2पुस्तक के अनुसार भारतीय सभ्यता का उत्कृष्ट प्रतीक कौन-सा वृक्ष है?
पृ. 123।
3जनजातीय विश्वास प्रायः किसे पवित्र मानते हैं?
पृ. 121।
आठों पड़ाव पूरे — पेड़ पूरा हरा है! अगला अध्याय इसी वृक्ष की बात आगे बढ़ाता है।