कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान · NCERT समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, पृ. 105–124 प्रत्येक कालांश 40 मिनट का माना गया है। श्रुतलेख के खंड-क्रमांक
13-Dictation-Notes.mdसे मेल खाते हैं — दोनों साथ ले जाइए।
पढ़ाने से पहले — दो मिनट में यह पढ़ लीजिएध्यान
1. पृष्ठ 118 का बॉक्स कक्षा से पहले पढ़िए। पुस्तक ‘धर्म’ शब्द का प्रयोग जान-बूझकर नहीं करती — वह ‘दर्शन’, ‘मत’ और ‘विश्वास’ कहती है, और इसका कारण भी लिख देती है: “अनेक विद्वान मानते हैं कि अंग्रेजी का शब्द ‘रिलिजन’ भारतीय सभ्यता के संदर्भ में बहुत सीमित है।” कक्षा में इसी शब्दावली का पालन कीजिए। यह शैली की बात नहीं — यह पुस्तक का सोचा-समझा निर्णय है, और इससे चर्चा अपने-आप संतुलित रहती है।
2. यह विचारों का इतिहास है, आस्था की कक्षा नहीं। अध्याय पूछता है — ये विचार कब आए, किसने रखे, और वे आपस में कैसे जुड़े। यह नहीं पूछता कि कौन सही है। वही रेखा कक्षा में रखिए।
पूरे अध्याय की एक ही रीढ़ — वृक्ष★
पुस्तक पहले पैराग्राफ़ में रूपक देती है और अंतिम पृष्ठ तक उसे निभाती है: भारतीय संस्कृति एक प्राचीन वृक्ष की तरह है — अनेक जड़ें, एक सामान्य तना, अनेक शाखाएँ।
बोर्ड पर एक वृक्ष बनाइए — कालांश 1 में, और अध्याय के अंत तक मत मिटाइए
| कालांश | वृक्ष में क्या जुड़ेगा |
|---|---|
| 1 | जड़ें — सिंधु-सरस्वती सभ्यता (अध्याय 6); और वेद |
| 2 | तना बनना शुरू — उपनिषद्, वेदांत, योग |
| 3–4 | दो बड़ी शाखाएँ — बौद्ध मत, जैन मत |
| 5 | तना पूरा — साझी संकल्पनाएँ (पृ. 119) |
| 6 | नई जड़ें — लोक और जनजातीय परंपराएँ; और वटवृक्ष (पृ. 123) |
★★और कालांश 6 में वह चीज़ बताइए जो इस रूपक को सटीक बनाती है — वटवृक्ष की शाखाएँ नीचे आकर स्वयं जड़ें बन जाती हैं। शाखा और जड़ का भेद मिट जाता है। यही पूरे अध्याय का तर्क है: दर्शन एक-दूसरे से निकले भी, और एक-दूसरे को पोसते भी रहे।
कालांश 1 — वृक्ष, और वेद क्या हैं (पृ. 105–107)
लक्ष्य: विद्यार्थी चार वेदों के नाम, ‘वेद’ शब्द का अर्थ, और मौखिक परंपरा की बात बता सके।
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–5 मि. | पृ. 105 के तीन चित्र दिखाइए, नाम बताए बिना — एक ऋषि, बुद्ध, महावीर। पूछिए: “ये तीन कौन हैं? कहाँ के हैं?” फिर कैप्शन पढ़िए — हम्पी (कर्नाटक), भूटान, बिहार। पूछिए: “बुद्ध की मूर्ति भूटान की क्यों है?” (उत्तर कालांश 4 में मिलेगा।) |
| 5–10 मि. | सुभाषित का उद्धरण पढ़कर सुनाइए (पृ. 105)। पूछिए: “ऐसी कौन-सी संपत्ति है जो चोरी नहीं हो सकती और बाँटने से बढ़ती है?” उत्तर कक्षा से निकलवाइए — ज्ञान। |
| 10–15 मि. | तीन महत्वपूर्ण प्रश्न बोर्ड पर लिखवाइए। ये अध्याय का ढाँचा हैं। |
| 15–22 मि. | ★वृक्ष का रूपक (पृ. 106) — बोर्ड पर वृक्ष बनाइए। जड़ें, तना, शाखाएँ। शाखाओं के नाम लिखवाइए: कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, धर्म, शासन पद्धति, मार्शल आर्ट्स। घोषणा कीजिए कि यह वृक्ष अध्याय के अंत तक बोर्ड पर रहेगा। |
| 22–26 मि. | अध्याय 6 से कड़ी: “कुछ जड़ें सिंधु या हड़प्पा सभ्यता की ओर जाती हैं (अध्याय 6)।” और अध्याय 5 से: “इन्हें समझकर ही हम ‘इंडिया अर्थात भारत’ को भलीभाँति समझ सकेंगे।” यह वाक्य अध्याय 5 के शीर्षक की प्रतिध्वनि है — यह जोड़ दिखाइए। |
| 26–34 मि. | ★वेद क्या हैं — ‘वेद’ विद् से, अर्थ ‘ज्ञान’ (जैसे विद्या)। चार वेद: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। हजारों ऋचाएँ। ! “विश्व के प्राचीनतम ग्रंथों में से एक” — यह ‘में से एक’ मत गिराइए। |
| 34–40 मि. | ★★यहाँ ठहरिए — कक्षा का सबसे चौंकाने वाला क्षण। “ये लिखित रूप में नहीं थीं। इनका मौखिक पाठ किया जाता था।” फिर धीरे से: “100 से 200 पीढ़ियों तक — बिना लिखे, बिना विशेष परिवर्तन के।” पूछिए: “आपको अपने परदादा का नाम याद है? और उनके परदादा का?” फिर 2008 की यूनेस्को मान्यता बताइए। |
गृहकार्य: चार वेदों के नाम याद कीजिए। ‘वेद’ शब्द कहाँ से आया, और उसका अर्थ क्या है — लिखिए।
कालांश 2 — वैदिक समाज और वैदिक दर्शन (पृ. 107–110)
लक्ष्य: विद्यार्थी एकं सत् का अर्थ, ‘जन’ की परिभाषा, और उपनिषद् की दो नई संकल्पनाएँ बता सके।
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–4 मि. | पिछला दोहराव — चार वेद; मौखिक परंपरा; 100–200 पीढ़ियाँ। |
| 4–10 मि. | ऋचाओं की रचना — ऋषियों और ऋषिकाओं द्वारा। ★‘ऋषिका’ शब्द पर रुकिए — रचनाकारों में स्त्रियाँ भी थीं। (गार्गी कालांश 3 में आएँगी।) देवों के नाम: इंद्र, अग्नि, वरुण, मित्र, सरस्वती, उषा। सरस्वती पर रुकिए — अध्याय 6 की नदी। |
| 10–18 मि. | ★★एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति — बोर्ड पर लिखवाइए, अर्थ सहित: “परम सत्य एक ही है, किंतु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं।” फिर एकता का मंत्र पढ़िए (पृ. 108) — “साथ मिलकर चलें, साथ मिलकर बोलें…” |
| 18–24 मि. | ★वैदिक समाज — ‘जन’। ऋग्वेद में 30 से अधिक जनों की सूची — भरत, पुरु, कुरु, यदु, तुर्वश। ‘भरत’ पर रुकिए और अध्याय 5 खोलिए — “वहाँ हमने पढ़ा था कि भरत एक राजा नहीं, एक जन-समूह था — और उसी से ‘भारत’ नाम बना।” यह जोड़ कक्षा को बहुत अच्छा लगता है। |
| 24–28 मि. | समय-रेखा (पृ. 108) — बुद्ध और महावीर का जन्म; उपनिषद्; वैदिक दर्शन। ★बिंदुदार सिरों का अर्थ बताइए — ‘तिथि अनिश्चित’। ! तीर की दिशा पर प्रश्न मत बनाइए (कारण 10-Verification-Log.md में)। |
| 28–32 मि. | शासन के संकेत — राजा, सभा, समिति; “सभा और समिति दोनों सामूहिकता को इंगित करते हैं।” व्यवसायों की सूची — किसान, बुनकर, कुम्हार, शिल्पकार, बढ़ई, आरोग्यकर्ता, नर्तक-नर्तकी, नाई, पुजारी। |
| 32–40 मि. | ★उपनिषद् और वेदांत — दो नई संकल्पनाएँ: पुनर्जन्म और कर्म। फिर ब्रह्म, और ! तुरंत यह भेद स्पष्ट कीजिए: ब्रह्म ≠ ब्रह्मा देव (पुस्तक स्वयं कोष्ठक में यह कहती है)। दो मंत्र लिखवाइए — अहम् ब्रह्मास्मि · तत् त्वम् असि। और आत्मन्; फिर सर्वे भवन्तु सुखिन:। |
गृहकार्य: आइए विचार करें (पृ. 110) — “सर्वे भवन्तु सुखिन:” जैसा संदेश देने वाली कोई और कहानी लिखिए, और बताइए कि उससे कौन-से मूल्य मिले।
कालांश 3 — उपनिषदों की तीन कथाएँ (पृ. 111–112)★
यह सबसे आनंददायक कालांश है, और सबसे अधिक याद रह जाने वाला भी। ! पर एक शर्त है — तीनों कथाएँ एक ही कालांश में सुनाइए, अलग-अलग नहीं। वरना उनका साझा सूत्र छूट जाता है।
लक्ष्य: विद्यार्थी तीनों कथाएँ और उनका साझा सूत्र बता सके।
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–3 मि. | ★पहले पुस्तक की घोषणा पढ़िए (पृ. 111) — “उपनिषदों की कई कथाओं से हमें प्रश्न पूछने के महत्व का पता चलता है। फिर चाहे ये प्रश्न किसी महिला, पुरुष या बच्चे ने पूछे हों।” फिर कहिए: “अब तीन कहानियाँ सुनिए, और अंत में मुझे बताइए कि तीनों में क्या समान है।” |
| 3–13 मि. | ★श्वेतकेतु (छांदोग्य उपनिषद्) — 12 वर्ष गुरुकुल, लौटा तो अहंकारी; पिता उद्दालक के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सका। दो उदाहरण अवश्य सुनाइए — बरगद का बीज (खाली दिखता है, पर पूरा वृक्ष उसमें है) और एक ही मिट्टी से अलग-अलग बर्तन। समापन: “तुम वही हो, श्वेतकेतु।” फिर पिछले कालांश का तत् त्वम् असि बोर्ड पर दिखाइए — यह वही है, कहानी बनकर। |
| 13–24 मि. | ★नचिकेता (कठोपनिषद्) — पिता का दान, बार-बार वही प्रश्न, पिता का क्रोध, यमलोक की यात्रा। यम ने पहले टालने का प्रयास किया — पर नचिकेता ने पीछा नहीं छोड़ा। उत्तर: आत्मा का न जन्म होता है, न मृत्यु; यह अमर है। |
| 24–34 मि. | ★★गार्गी और याज्ञवल्क्य (बृहदारण्यक उपनिषद्) — राजा जनक का शास्त्रार्थ; याज्ञवल्क्य ने अनेक विद्वानों को हराया; फिर गार्गी ने प्रश्न पूछे। ★यहाँ ठहरिए: “याज्ञवल्क्य ने उन्हें आगे प्रश्न पूछने से मना किया। …हालाँकि कुछ समय बाद गार्गी ने पुन: प्रश्न पूछा।” और तभी उत्तर मिला। |
| 34–40 मि. | ★★अब वह प्रश्न पूछिए जो आपने शुरू में वादा किया था — “तीनों में क्या समान है?” उत्तर कक्षा से निकलवाइए: तीनों में कोई प्रश्न पूछ रहा है — और तीनों में वह कोई बड़ा विद्वान नहीं है। दो बच्चे और एक स्त्री। गार्गी एक ऋषिका हैं — वही शब्द जो कालांश 2 में ऋचाओं के रचनाकारों के लिए आया था। |
कक्षा समाप्त करने के लिए: “इस अध्याय में हर बड़ा विचार किसी के प्रश्न पूछने से आया — और उन प्रश्न पूछने वालों में एक स्त्री थी और दो बच्चे।”
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 1 (पृ. 122) — “यदि आप नचिकेता होते तो यम से कौन-से प्रश्न पूछते? 100–150 शब्दों में लिखिए।”
कालांश 4 — बौद्ध मत (पृ. 110, 113–114)
लक्ष्य: विद्यार्थी बुद्ध की जीवन-कथा, ‘बुद्ध’ शब्द का अर्थ, और अहिंसा व संघ बता सके।
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–4 मि. | आरंभ का वाक्य पढ़िए (पृ. 110) — “कुछ अन्य दर्शनों का भी अविर्भाव हुआ, जिन्होंने वेदों की प्रभुता को नहीं स्वीकार किया और अपनी स्वयं की पद्धति विकसित की।” यह वाक्य महत्वपूर्ण है — यहीं से शाखा अलग होती है। |
| 4–10 मि. | जन्म — लुंबिनी (वर्तमान नेपाल), लगभग ढाई सहस्राब्दी पूर्व। ★फिर पुस्तक की ईमानदारी वाला वाक्य पढ़िए: “उनके जन्म के समय के विषय में विद्वानों में सर्वसम्मति नहीं है। अध्याय 4 में हमने 560 सा.सं.पू. को उनका अनुमानित जन्म वर्ष माना है। इससे हमारी यह कहानी आगे किसी भी प्रकार प्रभावित नहीं होगी।” अध्याय 4 से जोड़िए। |
| 10–20 मि. | ★जीवन-कथा — धीरे सुनाइए। राजमहल का सुरक्षित वातावरण; 29 वर्ष की आयु; रथ पर नगर-भ्रमण; और पहली बार देखा — एक वृद्ध, एक रोगी, एक शव। फिर एक संन्यासी, जो प्रसन्न और शांत लग रहा था। गृह-त्याग; पैदल यात्रा; बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान। |
| 20–27 मि. | ★खोज: ‘अविद्या’ और ‘मोह’ मानवीय कष्ट के स्रोत हैं। ‘बुद्ध’ = ‘ज्ञानी’ या ‘जागृत’ व्यक्ति। उपदेश: अहिंसा (मूल अर्थ — चोट या नुकसान न पहुँचाना), और आंतरिक अनुशासन। संघ — भिक्षुओं और भिक्षुणियों का समुदाय। |
| 27–34 मि. | ★★बुद्ध के दो कथन पढ़िए (पृ. 113)। पहले पर चर्चा कराइए (अभ्यास प्रश्न 3 यही है) — “जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता…” पूछिए: “तो बुद्ध के अनुसार शुद्ध कौन है?” उत्तर: “वह जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं” — यानी शुद्धता आचरण से आती है, कर्मकांड से नहीं। |
| 34–40 मि. | चित्र 1800 वर्ष पुरानी कृति (पृ. 114) और आइए पता लगाएँ — “किन देशों में आज भी बौद्ध मत प्रमुख है?” ★अब कालांश 1 का प्रश्न लौटाइए: “याद है, बुद्ध की मूर्ति भूटान की थी? अब समझ आया क्यों?” |
‘वृक्ष’ में जोड़िए: पहली बड़ी शाखा — बौद्ध मत।
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 2 — बौद्ध मत के केंद्रीय विचारों पर संक्षिप्त टिप्पणी।
कालांश 5 — जैन मत, और कथाएँ (पृ. 114–117)
लक्ष्य: विद्यार्थी जैन मत के तीन विचार बता सके, और बौद्ध-जैन की साझी बातें पहचान सके।
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–8 मि. | महावीर — छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में, वैशाली (बिहार) के समीप जन्म। 30 वर्ष की आयु में गृह-त्याग; 12 वर्ष बाद ‘अनंत’ ज्ञान। ‘महावीर’ = ‘महानायक’। ! यहीं बुद्ध से तुलना बोर्ड पर लिखवाइए — बुद्ध 29, महावीर 30; लुंबिनी बनाम वैशाली। यह सबसे प्रभावी जाल है। |
| 8–13 मि. | ★‘जैन’ शब्द (ध्यान रखें बॉक्स, पृ. 115) — ‘जिन’ = ‘विजेता’, पर किसी क्षेत्र या शत्रु पर नहीं — अविद्या और मोह पर विजय। ★यहाँ रुकिए: “ये वही दो शब्द हैं जो कल बुद्ध के लिए आए थे — अविद्या और मोह।” यह पुस्तक का ‘साझा तना’ वाला तर्क है। |
| 13–24 मि. | ★★जैन मत के तीन विचार, बोर्ड पर: अहिंसा (महावीर का कथन पढ़िए); अनेकांतवाद — ‘केवल एक’ पक्ष नहीं; सत्य के अनेक पक्ष हैं; अपरिग्रह — ‘असंग्रह’। फिर आपसी संबद्धता वाला वाक्य, और ★उसे कालांश 2 के उपनिषद् वाले वाक्य से जोड़िए — “सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और परस्पर निर्भर है।” दो अलग दर्शन, लगभग एक ही वाक्य। |
| 24–32 मि. | दो कथाएँ। वानर-राज (जातक) — बुद्ध वानरों के राजा; सैनिकों का हमला; वानर-राज ने अपने शरीर को पुल बना दिया और मृत्यु हो गई; राजा प्रभावित हुआ। रोहिनेय (जैन) — कुशल चोर; महावीर के कुछ वाक्य सुने; मंत्री के जाल से बचा; पछतावा, स्वीकारोक्ति, धन वापसी, भिक्षु बना। सीख: “हर व्यक्ति को जीवन में दूसरा अवसर मिलना चाहिए।” |
| 32–40 मि. | भित्तिचित्र (पृ. 117, नई दिल्ली के जैन मंदिर से) — सिंह और बैल एक ही पात्र से जल पीते हुए। पूछिए: “इसमें क्या विशेष है?” (स्वाभाविक शत्रु, साथ में — अहिंसा का दृश्य-रूप।) फिर ★★पृ. 117 का ‘आइए विचार करें’ पढ़िए — अहिंसा केवल शारीरिक नहीं, विचारों की हिंसा से भी संयम। इसे बुद्ध के दूसरे कथन से जोड़िए — “स्वयं पर विजय पाना अधिक बड़ी उपलब्धि है।” |
‘वृक्ष’ में जोड़िए: दूसरी बड़ी शाखा — जैन मत।
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 4 — जैन मत के मुख्य विचारों पर संक्षिप्त टिप्पणी।
कालांश 6 — साझा तना, और लोक-जनजातीय जड़ें (पृ. 118–123)
लक्ष्य: विद्यार्थी साझी संकल्पनाएँ बता सके, और लोक-जनजातीय आदान-प्रदान दोनों दिशाओं में समझा सके।
| समय | गतिविधि |
|---|---|
| 0–6 मि. | एलोरा की गुफाएँ (पृ. 118) — छठवीं से दसवीं शताब्दी सा.सं.; कुछ गुफाएँ हिंदू दर्शन से, अन्य बौद्ध और जैन मतों से। ★एक ही पहाड़, तीनों परंपराएँ — यह पूरे अध्याय का तर्क, पत्थर में बना हुआ। भिक्षुओं-भिक्षुणियों की यात्राएँ; गुफाओं में उनके नाम और पत्थर के बिस्तर। |
| 6–11 मि. | ! पृ. 118 का बॉक्स कक्षा में पढ़िए — पुस्तक क्यों ‘धर्म’ नहीं कहती। यह बच्चों को बताना चाहिए — वे इसे समझते हैं, और यह पूरे विषय का स्वर तय कर देता है। |
| 11–16 मि. | चार्वाक / लोकायत — भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य; मृत्यु के बाद जीवन असंभव; लोकप्रिय नहीं हुआ, विलुप्त हो गया। ★पुस्तक का कारण अवश्य पढ़िए: “हमने इसका उल्लेख यहाँ इसलिए किया ताकि यह दर्शाया जा सके कि यहाँ… व्यापक विविधता थी और लोग अपने अनुसार इन्हें चुनने के लिए स्वतंत्र थे।” |
| 16–21 मि. | ★★साझी संकल्पनाएँ (पृ. 119) — धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, दुखों और अज्ञानता के अंत की खोज। अब बोर्ड के वृक्ष पर लौटिए: “वास्तव में यह उस वृक्ष का तना है जिसके उदाहरण के साथ हमने इस अध्याय की शुरुआत की थी।” तना अब भर गया। |
| 21–27 मि. | लोक और जनजातीय जड़ें। मौखिक परंपराएँ — “वेदों के संदर्भ में यह लागू होता है” (कालांश 1 से कड़ी)। बॉक्स — जनजाति क्या है? ★और वह वाक्य ज़ोर देकर पढ़िए: “प्राचीन भारत में ‘जनजाति’ के लिए कोई शब्द नहीं था — जनजातियाँ केवल अलग-अलग जन थीं।” ‘जन’ अब तीसरी बार आया — अध्याय 5, कालांश 2, और अब यहाँ। आँकड़े: 2011 · 705 जनजातियाँ · लगभग 104 मिलियन। |
| 27–34 मि. | ★★आदान-प्रदान — दोनों दिशाओं में। बोर्ड पर दो तीर बनाइए: जनजातीय → प्रमुख: परंपरा के अनुसार जगन्नाथ मूल रूप से जनजाति देवता थे; देवी माताओं के रूप। प्रमुख → जनजातीय: हिंदू देवों को अपनाना; रामायण और महाभारत के जनजातीय रूप (पूर्वोत्तर से तमिलनाडु तक)। ! यदि केवल एक दिशा पढ़ाई गई, तो खंड का अर्थ ही बदल जाता है। फिर चार उदाहरण: टोडा · डोनीपोलो · खंडोबा · सिंगबोंगा। |
| 34–40 मि. | ★आंद्रे बेते का उद्धरण पढ़िए (पृ. 121) — और उसका असली भार बताइए: पहली दिशा सब मानते हैं; बेते दूसरी दिशा पर ज़ोर देते हैं — और वह भी “पूरे विकास-क्रम में।” फिर वटवृक्ष (पृ. 123) का कैप्शन पढ़कर सुनाइए। ★★और अंत में वह बात कहिए जो रूपक को पूरा करती है: “वटवृक्ष की शाखाएँ नीचे आकर ख़ुद जड़ें बन जाती हैं। इसीलिए यह चित्र इस अध्याय के लिए चुना गया है।” |
गृहकार्य: अभ्यास प्रश्न 6 — अपने स्थानीय क्षेत्र के लोकप्रिय देवी-देवताओं और त्योहारों की सूची।
मूल्यांकन का क्रम
| कब | क्या |
|---|---|
| कालांश 2 के बाद | 06-Flashcards.md के समूह 1–6 से मौखिक प्रश्नोत्तरी |
| कालांश 4 के बाद | 15-Student-Worksheet.md का भाग क और ख |
| कालांश 6 के बाद | 05-Question-Bank.md से लिखित परीक्षा |
| अलग से | 08-PARAKH-Question-Bank.md — योग्यता-आधारित, नए प्रकरणों पर |
पूर्व-ज्ञान — किन अध्यायों से जुड़ता है
| अध्याय | कड़ी |
|---|---|
| अध्याय 4 — इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत | सा.सं.पू. की गणना; और 560 सा.सं.पू. का बुद्ध वाला उदाहरण, जिसे पुस्तक यहाँ स्वयं दोहराती है |
| अध्याय 5 — भारत, अर्थात इंडिया | ‘जन’ और ‘भरत’; सप्तसिंधु; और “इंडिया अर्थात भारत” वाक्यांश |
| अध्याय 6 — भारतीय सभ्यता का प्रारंभ | “कुछ जड़ें सिंधु या हड़प्पा सभ्यता की ओर जाती हैं”; सरस्वती नदी और ऋग्वेद |
| अध्याय 8 (आगे) | पुस्तक दो बार कहती है — “हम अगले अध्याय में इस विषय को और भी विस्तार से बताएँगे”; और वटवृक्ष “अध्याय 7 और 8 की विषयवस्तुओं” का प्रतीक है |
आवश्यक सामग्री
- बोर्ड का एक कोना या चार्ट पेपर — वृक्ष का चित्र, जो छहों कालांश टँगा रहे
- पृ. 105 के तीन आवरण-चित्र — कालांश 1 के आरंभ के लिए, कैप्शन ढँके हुए
- पृ. 117 का भित्तिचित्र (सिंह और बैल) — कालांश 5 के लिए
- पृ. 123 का वटवृक्ष — कालांश 6 के समापन के लिए, बड़ा प्रिंट या प्रक्षेपण
- विश्व का मानचित्र — कालांश 4 की ‘बौद्ध बहुल देश’ वाली गतिविधि के लिए