अध्याय 7वैश्वीकरण

फ्लैशकार्ड16 मिनटस्रोत जाँचे गए

कार्ड से अभ्यास कीजिए

कीबोर्ड से: Space से कार्ड पलटिए, ← → से पिछला या अगला, 1 नहीं आता, 2 आता है।

कैसे इस्तेमाल करें: प्रश्न पढ़िए → उत्तर सोचिए → तब आगे देखिए। ★= अवश्य याद रखने योग्य · ! = सामान्य भूल

समूह 1 — अवधारणा (कार्ड 1–14)

1. वैश्वीकरण की ‘बुनियादी बात’ क्या है? → ★★प्रवाह

2. ★★चार प्रवाह कौन-से हैं? → विचार · पूँजी · वस्तु · लोग

3. ★★वैश्वीकरण में ‘सबसे ज़रूरी बात’ क्या है? → “विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव” — “जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है।”

4. ★★वैश्वीकरण किस प्रकार की परिघटना है? → बहुआयामी — “इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अवतार हैं और इनके बीच ठीक-ठीक भेद किया जाना चाहिए।”

5. ! क्या वैश्वीकरण केवल आर्थिक परिघटना है? → नहीं — “यह मान लेना ग़लत है कि वैश्वीकरण केवल आर्थिक परिघटना है।” और “यह मान लेना भी भूल होगी कि वैश्वीकरण एकदम सांस्कृतिक परिघटना है।”

6. ★★वैश्वीकरण का प्रभाव कैसा रहा है? → विषम — “यह कुछ समाजों को बाकियों की अपेक्षा और समाज के एक हिस्से को बाकी हिस्सों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित कर रहा है।”

7. वैश्वीकरण के विषम प्रभाव से क्या निष्कर्ष निकलता है? → “विशिष्ट संदर्भों पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना हम वैश्वीकरण के प्रभाव के बारे में सर्व-सामान्य निष्कर्ष निकालने से परहेज करें।”

8. ★जनार्दन की कहानी क्या दिखाती है? → सेवाओं का वैश्वीकरण — “दफ्तर में घुसने के साथ ही वह जॉन बन जाता है”; और “जनार्दन की छुट्टियाँ भी भारतीय कैलेंडर से नहीं बल्कि अमरीका के कैलेंडर से मेल खाती हैं।”

9. ★रामधारी की कहानी? → वस्तुओं की आवाजाही — साइकिल “बनी तो चीन में थी लेकिन बिक भारत में रही है”; और पिछले साल की ‘बार्बी डॉल’ जो अमरीका में बनी थी।

10. ★सारिका की कहानी? → ★★जीवन-मूल्यों के बीच दुविधा — परिवार में पहली पीढ़ी की शिक्षित; ऐसे अवसर “परिवार की महिलाएँ सोच भी नहीं सकती थीं”; कुछ रिश्तेदार विरोध कर रहे हैं।

11. ! पाँच उलटे उदाहरण कौन-से हैं? → किसानों की आत्महत्या (बहुराष्ट्रीय कंपनी के महंगे बीज) · भारतीय कंपनी ने यूरोपीय कंपनी खरीदी · खुदरा दुकानदारों का भय · फिल्म-कहानी की नकल · छात्राओं को उग्रवादी संगठन की धमकी

12. ★वैश्वीकरण के पाँच उलटे उदाहरणों से पहला निष्कर्ष? → “वैश्वीकरण हर अर्थ में सकारात्मक ही नहीं होता; लोगों पर इसके दुष्प्रभाव भी पड़ सकते हैं।”

13. वैश्वीकरण के पाँच उलटे उदाहरणों से दूसरा निष्कर्ष? → “ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जो मानते हैं कि वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव कम और नकारात्मक प्रभाव ज्यादा हैं।”

14. ★★वैश्वीकरण के पाँच उलटे उदाहरणों से तीसरा निष्कर्ष — जो सबसे महत्वपूर्ण है? → “वैश्वीकरण सिर्फ आर्थिक मसलों से नहीं जुड़ा और ज़रूरी नहीं कि प्रभाव की दिशा हमेशा धनी मुल्कों से ग़रीब मुल्कों की ओर गतिशील हो।”

समूह 2 — कारण (कार्ड 15–22)

15. “मौजूदा वैश्वीकरण में नया क्या है?” — क्योंकि प्रवाह तो हमेशा रहे हैं → “वैश्वीकरण मानव-इतिहास के अधिकांश समय जारी रहा है।”

16. ★★प्रवाह तो हमेशा रहे हैं, तो मौजूदा वैश्वीकरण में नयी बात क्या है? → “नयी बात है इन प्रवाहों की गति और इनके प्रसार का धरातल। ये दोनों बातें मौजूदा वैश्वीकरण को अनूठा बनाती हैं।”

17. ★★वैश्वीकरण का ‘अपरिहार्य कारण’ क्या है? → प्रौद्योगिकी — “हालाँकि वैश्वीकरण के लिए कोई एक कारक जिम्मेवार नहीं, फिर भी प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारण साबित हुई है।”

18. ★कौन-से तीन आविष्कार गिनाए गए हैं? → टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप — “इन्होंने विश्व के विभिन्न भागों के बीच संचार की क्रांति कर दिखायी है।”

19. ★★छपाई की तकनीक का उदाहरण क्या सिखाता है? → “शुरू-शुरू में जब छपाई (मुद्रण) की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी। इसी तरह आज हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव हमारे सोचने के तरीके पर पड़ेगा।”

20. ! क्या तकनीक अकेली वैश्वीकरण के लिए काफी है? → नहीं — “संचार-साधनों की तरक्की और उनकी उपलब्धता मात्र से वैश्वीकरण अस्तित्व में आया हो — ऐसी बात नहीं।”

21. ★★वैश्वीकरण के लिए प्रौद्योगिकी के अलावा और क्या चाहिए? → जुड़ाव की चेतना — “यहाँ ज़रूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे हैं कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।”

22. ★कौन-सी दो घटनाएँ ‘राष्ट्रीय-सीमाओं का जोर नहीं मानतीं’? → बर्ड फ्लू और सुनामी

समूह 3 — राजनीतिक प्रभाव (कार्ड 23–32)

23. ★★राजनीतिक प्रभाव के कितने पहलू हैं? → तीन — “इस सवाल का जवाब देते समय हमें कम से कम तीन पहलुओं का ध्यान रखना होगा।”

24. वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव का पहला पहलू? → ! राज्य की क्षमता में कमी — “वैश्वीकरण के कारण राज्य की क्षमता यानी सरकारों को जो करना है उसे करने की ताकत में कमी आती है।”

25. ★★वैश्वीकरण के दौर में किस राज्य ने किसकी जगह ली? → “कल्याणकारी राज्य की धारणा अब पुरानी पड़ गई है और इसकी जगह न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य ने ले ली है।”

26. न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य किन कामों तक सीमित रहता है? → “कानून और व्यवस्था को बनाये रखना तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा करना।”

27. ★★अब आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का प्रमुख निर्धारक कौन है? → बाज़ार — “लोक कल्याणकारी राज्य की जगह अब बाज़ार आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताओं का प्रमुख निर्धारक है।”

28. ★वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव का दूसरा पहलू? → राज्य की प्रधानता को चुनौती नहीं मिली — “राजनीतिक समुदाय के आधार के रूप में राज्य की प्रधानता को कोई चुनौती नहीं मिली है और राज्य इस अर्थ में आज भी प्रमुख है।”

29. ★राज्य की प्रधानता वाले दूसरे पहलू का सबसे मार्मिक हिस्सा? → “राज्य… बहुत सोच-समझकर अपने कदम उन्हीं दायरों से खींच रहे हैं जहाँ उनकी मर्जी हो।” — यानी पीछे हटना मजबूरी नहीं, चुनाव भी है।

30. ★★वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव का तीसरा पहलू — जो सबसे ज्यादा छूटता है? → “वस्तुत: कुछ मायनों में वैश्वीकरण के फलस्वरूप राज्य की ताकत में इजाफा हुआ है।”

31. ★वैश्वीकरण से राज्य की ताकत में इजाफा कैसे हुआ? → “अब राज्यों के हाथ में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी मौजूद है जिसके बूते राज्य अपने नागरिकों के बारे में सूचनाएँ जुटा सकते हैं। …उनकी क्षमता बढ़ी है; कम नहीं हुई।”

32. ★★राज्य की ताकत बढ़ने के बारे में निष्कर्ष? → “नई प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरूप राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।”

समूह 4 — आर्थिक प्रभाव (कार्ड 33–43)

33. आर्थिक वैश्वीकरण का नाम आते ही किन दो संस्थाओं का ध्यान आता है? → अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) — ! पर “वैश्वीकरण को इतने संकीर्ण नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।”

34. ★★आर्थिक वैश्वीकरण को समझने की ‘सही कसौटी’ क्या है? → “किसे वैश्वीकरण से सबसे ज्यादा फायदा हुआ और किसे सबसे कम। यह भी देखने की ज़रूरत है कि वैश्वीकरण के कारण किसने नुकसान उठाया।”

35. ! क्या सारे आर्थिक प्रवाह स्वैच्छिक होते हैं? → नहीं — “कुछ आर्थिक प्रवाह स्वेच्छा से होते हैं जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और ताकतवर देशों द्वारा जबरन लादे जाते हैं।”

36. वस्तुओं के प्रवाह की स्थिति? → “वस्तुओं के व्यापार में इजाफा हुआ है”; आयात पर प्रतिबंध कम हो गए।

37. पूँजी के प्रवाह की स्थिति? → “पूँजी की आवाजाही पर अब कहीं कम प्रतिबंध हैं” — “धनी देश के निवेशकर्ता… विकासशील देशों में निवेश कर सकते हैं जहाँ उन्हें ज्यादा मुनाफा होगा।”

38. !★★किस प्रवाह में सबसे कम बढ़ोतरी हुई और क्यों? → लोगों के प्रवाह में — कारण: “विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को बड़ी सतर्कता से अभेद्य बनाए रखते हैं ताकि दूसरे देशों के नागरिक विकसित देशों में आकर कहीं उनके नागरिकों के नौकरी-धंधे न हथिया लें।”

39. ★“एक ही नीति, अलग-अलग परिणाम” — पाठ के शब्दों में? → “हर जगह एक समान नीति अपना लेने का मतलब यह नहीं होता कि हर जगह परिणाम भी समान होंगे।”

40. ★आर्थिक वैश्वीकरण के आलोचकों का मुख्य तर्क? → “आबादी के एक बड़े छोटे तबके को फायदा होगा जबकि नौकरी और जन-कल्याण (शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई) के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोग बदहाल हो जाएँगे।”

41. ★आलोचकों की चिंता का समाधान क्या सुझाया जाता है, और उस पर क्या आपत्ति है? → ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ — “ताकि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं उन पर वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।” ! आपत्ति: “‘सामाजिक सुरक्षा-कवच’ की बात अव्यावहारिक है और इतना भर उपाय पर्याप्त नहीं होगा।”

42. ★★कुछ अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक वैश्वीकरण को क्या कहा है? → “विश्व का ‘पुन:उपनिवेशीकरण’”

43. ★आर्थिक वैश्वीकरण पर समर्थकों और मध्यमार्गियों के तर्क? → समर्थक: “इससे समृद्धि बढ़ती है और ‘खुलेपन’ के कारण ज्यादा से ज्यादा आबादी की खुशहाली बढ़ती है”; “अपरिहार्य है और इतिहास की धारा को अवरुद्ध करना कोई बुद्धिमानी नहीं।” मध्यमार्गी: ★★“वैश्वीकरण ने चुनौतियाँ पेश की हैं और सजग-सचेत होकर पूरी बुद्धिमत्ता से इसका सामना किया जाना चाहिए।”

समूह 5 — सांस्कृतिक प्रभाव (कार्ड 44–53)

44. ★वैश्वीकरण हमें कहाँ छूता है? → “हम घर में बैठे हों तब भी इसकी चपेट में होते हैं। हम जो कुछ खाते-पीते-पहनते हैं अथवा सोचते हैं — सब पर इसका असर नज़र आता है। हम जिन बातों को अपनी पसंद कहते हैं वे बातें भी वैश्वीकरण के असर में तय होती हैं।”

45. ★★‘सांस्कृतिक समरूपता’ का असली अर्थ क्या है? → ! “इसका यह अर्थ नहीं कि किसी विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है। विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।”

46. ★प्रभुत्वशाली संस्कृति के बारे में पाठ क्या कहता है? → “राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभुत्वशाली संस्कृति कम ताकतवर समाजों पर अपनी छाप छोड़ती है और संसार वैसा ही दीखता है जैसा ताकतवर संस्कृति इसे बनाना चाहती है।”

47. ★★‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ क्या है? → “विभिन्न संस्कृतियाँ अब अपने को प्रभुत्वशाली अमरीकी ढर्रे पर ढालने लगी हैं।”

48. ! मैक्डोनॉल्डीकरण का खतरा किसके लिए है? → “चूँकि इससे पूरे विश्व की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धीरे-धीरे खत्म होती है इसलिए यह केवल गरीब देशों के लिए ही नहीं बल्कि समूची मानवता के लिए खतरनाक है।”

49. ★‘सांस्कृतिक वर्चस्व’ का अर्थ? (वैश्वीकरण वाले पाठ में इसका हवाला आता है, पर यह अवधारणा पाठ्यक्रम से हटाए गए अध्याय ‘समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व’ की है) → जब किसी शक्ति के विचार, मूल्य और जीवन-शैली इतने सामान्य लगने लगें कि उनका विकल्प ही सोचा न जा सके — यहाँ सहमति बल से नहीं, आकर्षण से पैदा होती है।

50. ★★वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभावों के बारे में पाठ्यपुस्तक क्या चेतावनी देती है? → “यह मान लेना एक भूल है कि वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं। संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती। हर संस्कृति हर समय बाहरी प्रभावों को स्वीकार करते रहती है।”

51. ★‘बर्गर’ वाला उदाहरण? → “बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है इसलिए बर्गर से वस्तुत: कोई खतरा नहीं है। इससे हुआ मात्र इतना है कि हमारे भोजन की पसंद में एक चीज़ और शामिल हो गई है।”

52. ★★‘जीन्स और कुर्ता’ वाला उदाहरण? → “नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है… मज़ेदार बात तो यह है कि इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है। जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है।” — यह सिद्ध करता है कि सांस्कृतिक प्रभाव एकतरफा नहीं होता।

53. ★★‘सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण’ किसे कहते हैं? → “वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है। इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण कहते हैं।” ! पर — “इसका मतलब यह नहीं कि संस्कृतियों के मेलजोल में उनकी ताकत का सवाल गौण है।”

समूह 6 — भारत (कार्ड 54–60)

54. क्या भारत के लिए वैश्वीकरण नया है? → नहीं — “पूँजी, वस्तु, विचार और लोगों की आवाजाही का भारतीय इतिहास कई सदियों का है।”

55. ! औपनिवेशिक दौर में भारत क्या था? → “ब्रिटेन के साम्राज्यवादी मंसूबों के परिणामस्वरूप भारत आधारभूत वस्तुओं और कच्चे माल का निर्यातक तथा बने-बनाये सामानों का आयातक देश था।”

56. ★आज़ादी के बाद भारत ने क्या फ़ैसला किया? → “दूसरे पर निर्भर रहने के बजाय खुद सामान बनाया जाए”; और “दूसरों देशों को निर्यात की अनुमति नहीं होगी ताकि हमारे अपने उत्पादक चीजों को बनाना सीख सकें।” — इसे ‘संरक्षणवाद’ कहा गया।

57. ! संरक्षणवाद की क्या कीमत चुकानी पड़ी? → “कुछ ज़रूरी क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितने के वे हकदार थे।” और “भारत में आर्थिक-वृद्धि की दर धीमी रही।”

58. ★★1991 में क्या हुआ और क्यों? → “वित्तीय संकट से उबरने और आर्थिक वृद्धि की ऊँची दर हासिल करने की इच्छा से भारत में आर्थिक-सुधारों की योजना शुरू हुई।” — व्यापार और विदेशी निवेश पर बाधाएँ हटीं।

59. ★★भारत के लिए ‘अंतिम कसौटी’ क्या है? → “अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।”

60. ★भारत वैश्वीकरण को कैसे प्रभावित कर रहा है — चार उदाहरण? → (1) सेवाओं का निर्यात (जनार्दन का कॉल-सेंटर) (2) भारतीय कंपनी ने यूरोपीय कंपनी खरीदी (3) ‘जीन्स पर कुर्ता’ का निर्यात (4) ‘नीम’ के पेटेंट का विरोध और WSF की मुंबई-बैठक (2004)

समूह 7 — प्रतिरोध (कार्ड 61–69)

61. ★वामपंथी आलोचकों का तर्क? → “मौजूदा वैश्वीकरण विश्वव्यापी पूंजीवाद की एक ख़ास अवस्था है जो धनिकों को और ज्यादा धनी (तथा इनकी संख्या में कमी) और गरीब को और ज्यादा ग़रीब बनाती है।” और “राज्य के कमजोर होने से गरीबों के हित की रक्षा करने की उसकी क्षमता में कमी आती है।”

62. ★दक्षिणपंथी आलोचकों का तर्क? → राजनीतिक — राज्य के कमजोर होने की चिंता; “कम से कम कुछ क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता और ‘संरक्षणवाद’ का दौर फिर कायम हो।” सांस्कृतिक — “परंपरागत संस्कृति की हानि होगी और लोग अपने सदियों पुराने जीवन-मूल्य तथा तौर-तरीकों से हाथ धो देंगे।”

63. ★★वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलनों के बारे में सबसे ज़रूरी बारीकी? → “वैश्वीकरण-विरोधी बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं बल्कि वैश्वीकरण के किसी खास कार्यक्रम के विरोधी हैं जिसे वे साम्राज्यवाद का एक रूप मानते हैं।”

64. ★वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलनों की एक विडंबना? → “वैश्वीकरण-विरोधी आंदोलन भी विश्वव्यापी नेटवर्क में भागीदारी करते हैं और अपने से मिलती-जुलती सोच रखने वाले दूसरे देशों के लोगों से गठजोड़ करते हैं।”

65. ★सिएट्ल में क्या हुआ और कब? → 1999 — “विश्व व्यापार संगठन की मंत्री-स्तरीय बैठक हुई। यहाँ बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।” तर्क: “उदीयमान वैश्विक आर्थिक-व्यवस्था में विकासशील देशों के हितों को समुचित महत्त्व नहीं दिया गया है।”

66. ★★वर्ल्ड सोशल फोरम — तीन तिथियाँ? → पहली बैठक — 2001, ब्राजील के पोर्तो अलेग्रे में · चौथी — 2004, मुंबई में · हाल की — फरवरी 2024, नेपाल में

67. WSF में कौन-कौन शामिल होते हैं? → “मानवाधिकार-कार्यकर्त्ता, पर्यावरणवादी, मजदूर, युवा और महिला कार्यकर्त्ता” — जो नव-उदारवादी वैश्वीकरण का विरोध करते हैं।

68. ★★भारत में वैश्वीकरण-विरोध के चार रूप? → (1) राजनीतिक दलों की वामपंथी आवाज़ें और इंडियन सोशल फोरम (2) औद्योगिक श्रमिक और किसानों के संगठनों द्वारा बहुराष्ट्रीय निगमों के प्रवेश का विरोध (3) ★‘नीम’ के पेटेंट का कड़ा विरोध (4) दक्षिणपंथी खेमा — विदेशी टी.वी. चैनल, वैलेन्टाईन-डे और पश्चिमी पोशाकें

69. ★WSF का नारा, और उसकी अपनी आलोचना? → नारा: “एक और दुनिया मुमकिन है” — ! पर उसी पोस्टर में मुंबई प्रतिरोध 2004 WSF पर आरोप लगाता है: “अलोकतांत्रिक तौर-तरीके”, “साम्राज्यवादी देशों और बड़े व्यापार के धन पर निर्भरता”, और “एन.जी.ओ. साम्राज्यवाद के दलाल हैं।” → यानी वैश्वीकरण-विरोध भी एकजुट नहीं है।

⚡ अंतिम दौर — 60 सेकंड में

पूछा जाएतुरंत कहिए
! सबसे बड़ा जाल‘सांस्कृतिक समरूपता’ आलोचकों का तर्क है, पैरोकारों का नहीं