अध्याय 7वैश्वीकरण

पाठ योजना14 मिनटस्रोत जाँचे गए

कक्षा: 12 · विषय: राजनीति विज्ञान · पुस्तक: समकालीन विश्व राजनीति (पुस्तक 1) पाठ्यपुस्तक पृष्ठ: 99–112 · कुल कालांश: 5 (+1 वैकल्पिक गतिविधि) ★यह पुस्तक 1 का अंतिम अध्याय है — अंत में पूरी पुस्तक की समेकित पुनरावृत्ति के लिए 10 मिनट रखिए।

अध्याय-स्तरीय अधिगम-प्रतिफल

पाठ पूरा होने पर विद्यार्थी —

  1. वैश्वीकरण को ‘प्रवाह’ और ‘विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव’ के रूप में परिभाषित कर सकेंगे और चारों प्रवाह गिना सकेंगे।
  2. यह सिद्ध कर सकेंगे कि वैश्वीकरण एक बहुआयामी परिघटना है और उसका प्रभाव विषम है।
  3. वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी की भूमिका समझा सकेंगे — और यह भी कि तकनीक अकेली पर्याप्त नहीं।
  4. राज्य पर पड़ने वाले तीनों प्रभावों का संतुलित मूल्यांकन कर सकेंगे — क्षमता में कमी, प्रधानता बरकरार, और ताकत में इजाफा।
  5. आर्थिक वैश्वीकरण के पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्क रख सकेंगे और ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ की बहस समझा सकेंगे।
  6. सांस्कृतिक समरूपता और सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण में भेद कर सकेंगे।
  7. भारत के अनुभव — औपनिवेशिक दौर, संरक्षणवाद, 1991 के सुधार — का क्रम बता सकेंगे।
  8. वैश्वीकरण के वामपंथी और दक्षिणपंथी विरोध में अंतर कर सकेंगे और WSF के बारे में बता सकेंगे।

कालांश 1 — वैश्वीकरण क्या है?

पाठ्यपुस्तक: पृ. 99–102

समयगतिविधि
0–4 मिनट! पहले अनाथ-संदर्भ की चेतावनी दीजिए। “पृ. 107 पर लिखा है — ‘अमरीकी वर्चस्व वाले अध्याय तीन में… पढ़ चुके हैं’ — वह अध्याय पाठ्यक्रम से पूरी तरह हटा दिया गया है। वह पुस्तक में है ही नहीं। मैं कालांश 4 में वह अवधारणा अलग से समझाऊँगा।”
4–14 मिनट★★हुक — तीन कहानियाँ पढ़कर सुनाइए। जनार्दन (कॉल-सेंटर; “दफ्तर में घुसने के साथ ही वह जॉन बन जाता है”), रामधारी (चीन में बनी साइकिल, अमरीका में बनी बार्बी), सारिका (परिवार की पहली शिक्षित पीढ़ी)। फिर पूछिए — “इन तीनों में क्या साझा है?”
14–22 मिनट! अब पाँच उलटे उदाहरण। किसानों की आत्महत्या · भारतीय कंपनी का यूरोपीय अधिग्रहण · खुदरा दुकानदारों का भय · फिल्म-कहानी की नकल · छात्राओं को धमकी। ★तीन निष्कर्ष बोर्ड पर लिखवाइए — दुष्प्रभाव भी हैं · नकारात्मक मानने वाले ज्यादा हैं · “प्रभाव की दिशा हमेशा धनी से गरीब मुल्कों की ओर नहीं होती।”
22–32 मिनट★★परिभाषा। बोर्ड पर एक शब्द — प्रवाह। फिर चार तीर: विचार · पूँजी · वस्तु · लोग। और नीचे — ★“विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव”।
32–40 मिनट★★दो सूत्र-वाक्य लिखवाइए, ये प्रश्न 1 और 2 के सीधे उत्तर हैं: (1) “वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है — इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अवतार हैं।” (2) “वैश्वीकरण का प्रभाव बड़ा विषम रहा है।” और चेतावनी — “विशिष्ट संदर्भों पर ध्यान दिए बिना सर्व-सामान्य निष्कर्ष निकालने से परहेज करें।”

गृहकार्य: प्रश्न 1 से 5 (बहुविकल्पीय) हल कीजिए। प्रश्न 6 का उत्तर लिखिए।

कालांश 2 — कारण और राजनीतिक प्रभाव

पाठ्यपुस्तक: पृ. 102–104

समयगतिविधि
0–4 मिनटपुनरावृत्ति — चार प्रवाह और ‘पारस्परिक जुड़ाव’ मौखिक।
4–8 मिनट★पहला सवाल — “इसमें नया क्या है?” पाठ का उत्तर: “नयी बात है इन प्रवाहों की गति और इनके प्रसार का धरातल।”
8–18 मिनट★★प्रौद्योगिकी — ‘अपरिहार्य कारण’। टेलीग्राफ, टेलीफोन, माइक्रोचिप। ★और वह शानदार ऐतिहासिक समानांतर ज़रूर दीजिए — “जब छपाई की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी।” पूछिए — “तो आज की तकनीक किसकी आधारशिला रख रही है?”
18–24 मिनट! पर तकनीक अकेली काफी नहीं। ★“यहाँ ज़रूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे हैं कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।” — उदाहरण: बर्ड फ्लू और सुनामी सीमा नहीं मानते।
24–38 मिनट★★राजनीतिक प्रभाव — बोर्ड पर तीन खाने बनाइए और साथ-साथ भरिए। (1) क्षमता में कमी — कल्याणकारी राज्य → न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य; बाज़ार अब प्रमुख निर्धारक; बहुराष्ट्रीय निगम। (2) प्रधानता को चुनौती नहीं — “राज्य अभी भी महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं।” (3) ताकत में इजाफा — अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से सूचनाएँ; “राज्य अब पहले से ज्यादा ताकतवर हैं।”
38–40 मिनट★कार्टून (पृ. 104) — ‘कल’ और ‘आज’। “चीन और भारत के भूखे लोग तुम्हारा खाना खा जाएंगे” बनाम ”…तुम्हारी नौकरी खा जाएँगें।” कक्षा हँसती है और बात याद रह जाती है।

गृहकार्य: प्रश्न 7 और 8 के उत्तर लिखिए।

कालांश 3 — आर्थिक प्रभाव

पाठ्यपुस्तक: पृ. 104–106

समयगतिविधि
0–6 मिनट★पहले परिभाषा की समस्या। IMF और WTO का नाम तुरंत आता है — ! “हालाँकि वैश्वीकरण को इतने संकीर्ण नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।” ★★सही कसौटी बोर्ड पर: “किसे वैश्वीकरण से सबसे ज्यादा फायदा हुआ और किसे सबसे कम। यह भी देखने की ज़रूरत है कि किसने नुकसान उठाया।”
6–18 मिनट★★चार प्रवाहों की स्थिति — सारणी बनवाइए। वस्तु — प्रतिबंध कम हुए। पूँजी — कम प्रतिबंध; धनी देश का निवेशक विकासशील देशों में लगाता है। विचार — अबाध; इंटरनेट। !★लोग — नहीं बढ़ा! कारण — “विकसित देश अपनी वीजा-नीति के जरिए अपनी राष्ट्रीय सीमाओं को बड़ी सतर्कता से अभेद्य बनाए रखते हैं।” यह विषमता बोर्ड पर रेखांकित कीजिए।
18–24 मिनट★“एक ही नीति, अलग-अलग परिणाम।” “हर जगह एक समान नीति अपना लेने का मतलब यह नहीं होता कि हर जगह परिणाम भी समान होंगे।”
24–36 मिनट★★तीनों पक्ष बोर्ड पर तीन स्तंभों में। आलोचक — छोटे तबके को फायदा; जन-कल्याण पर आश्रित लोग बदहाल; ‘सामाजिक सुरक्षा कवच’ की माँग; और तीखा — “पुन:उपनिवेशीकरण।” समर्थक — समृद्धि, खुलापन, “अपरिहार्य है और इतिहास की धारा को अवरुद्ध करना कोई बुद्धिमानी नहीं।” मध्यमार्गी — “चुनौतियाँ पेश की हैं और सजग-सचेत होकर पूरी बुद्धिमत्ता से इसका सामना किया जाना चाहिए।”
36–40 मिनट★साइड-टिप्पणी (पृ. 106) पर 3 मिनट की चर्चा: “जब हम सामाजिक सुरक्षा-कवच की बात करते हैं तो इसका मतलब होता है कि कुछ लोग तो वैश्वीकरण के चलते बदहाल होंगे ही! तभी तो सामाजिक सुरक्षा-कवच की बात की जाती है। है न?”

गृहकार्य: प्रश्न 9 का उत्तर लिखिए।

कालांश 4 — सांस्कृतिक प्रभाव

पाठ्यपुस्तक: पृ. 106–108

समयगतिविधि
0–5 मिनट★हुक: “वैश्वीकरण के परिणाम… हम घर में बैठे हों तब भी इसकी चपेट में होते हैं। हम जो कुछ खाते-पीते-पहनते हैं अथवा सोचते हैं — सब पर इसका असर नज़र आता है।” पूछिए — “आज आपने जो पहना है, जो खाया है, जो सुना है — उसमें कितना ‘बाहर’ से आया?”
5–8 मिनट!! अब अनाथ-संदर्भ की भरपाई कीजिए। “पाठ कहता है कि हम ‘वर्चस्व का सांस्कृतिक अर्थ’ पढ़ चुके हैं — पर वह अध्याय हटा दिया गया है। इसलिए मैं वह अवधारणा अभी देता हूँ।” बोर्ड पर तीन पंक्तियाँ: सैन्य वर्चस्व = बल का असंतुलन · संरचनात्मक वर्चस्व = नियम बनाने की ताकत · ★सांस्कृतिक वर्चस्व = जब किसी के मूल्य इतने सामान्य लगने लगें कि विकल्प सोचा ही न जा सके।
8–20 मिनट★★सांस्कृतिक समरूपता। ! सबसे ज़रूरी बारीकी: “इसका यह अर्थ नहीं कि किसी विश्व-संस्कृति का उदय हो रहा है। विश्व-संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।” फिर ‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ और यह चेतावनी कि यह “केवल गरीब देशों के लिए ही नहीं बल्कि समूची मानवता के लिए खतरनाक है।”
20–32 मिनट★★और अब पलटिए — यह खंड का दिल है। “यह मान लेना एक भूल है कि वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं। संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती।” दो उदाहरण ज़रूर दीजिए — (1) “बर्गर मसाला-डोसा का विकल्प नहीं है” (2) ★“नीली जीन्स के ऊपर खादी का कुर्ता… और इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है जिसने हमें नीली जीन्स दी है।”
32–38 मिनट★★सांस्कृतिक वैभिन्नीकरण। “वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होते जा रही है।” — और संतुलन: “इसका मतलब यह नहीं कि संस्कृतियों के मेलजोल में उनकी ताकत का सवाल गौण है।”
38–40 मिनट★बॉक्स (पृ. 108) पढ़कर सुनाइए — “आह री किस्मत! फिर एक हिन्दुस्तानी! प्लीज किसी अमरीकी से बात कराइए…!” यह जनार्दन की कहानी का दूसरा पहलू है।

गृहकार्य: प्रश्न 10 का उत्तर लिखिए।

कालांश 5 — भारत, प्रतिरोध, और पुस्तक का समापन

पाठ्यपुस्तक: पृ. 108–111

समयगतिविधि
0–10 मिनट★★भारत की तीन-चरणीय कहानी — बोर्ड पर एक तीर-शृंखला। औपनिवेशिक दौर (“कच्चे माल का निर्यातक, बने-बनाये सामानों का आयातक”) → संरक्षणवाद (“खुद सामान बनाया जाए”; ! पर स्वास्थ्य, आवास और प्राथमिक शिक्षा उपेक्षित; वृद्धि-दर धीमी) → 1991 के आर्थिक सुधार।
10–14 मिनट★★और वह कसौटी बोर्ड पर लिखवाइए: “अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि-दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है कि आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बने।” यह प्रश्न 9 और 11 दोनों का केंद्र है।
14–26 मिनट★★प्रतिरोध — दो खाने बनाइए। वामपंथी — पूंजीवाद की खास अवस्था; धनी और धनी, गरीब और गरीब; राज्य कमजोर तो गरीबों की रक्षा नहीं। दक्षिणपंथी — राज्य का कमजोर होना; आर्थिक आत्मनिर्भरता और संरक्षणवाद; परंपरागत संस्कृति की हानि। ★★फिर वह बारीकी: “वैश्वीकरण-विरोधी बहुत से आंदोलन वैश्वीकरण की धारणा के विरोधी नहीं बल्कि वैश्वीकरण के किसी खास कार्यक्रम के विरोधी हैं जिसे वे साम्राज्यवाद का एक रूप मानते हैं।”
26–33 मिनट★सिएट्ल 1999 और ★★WSF — 2001 पोर्तो अलेग्रे · 2004 मुंबई · फरवरी 2024 नेपाल। भारत में — इंडियन सोशल फोरम; श्रमिक-किसान संगठन; ★‘नीम’ के पेटेंट का विरोध; दक्षिणपंथी खेमा — विदेशी टी.वी. चैनल, वैलेन्टाईन-डे, पश्चिमी पोशाकें।
33–40 मिनट★★पहले पृ. 99 का पोस्टर लौटकर दिखाइए — “एक और दुनिया मुमकिन है” और लाल पैनल की तीखी आलोचना (मुंबई प्रतिरोध 2004)। कहिए: “अध्याय जहाँ से शुरू हुआ था, वहीं लौट आया — और यह बताता है कि वैश्वीकरण-विरोध भी एकजुट नहीं है।” फिर पूरी पुस्तक की एक-पंक्ति पुनरावृत्ति (नीचे देखिए)।

गृहकार्य: प्रश्न 11 का उत्तर लिखिए और पूरी पुस्तक के सातों अध्यायों की एक-पंक्ति सूची बनाइए।

वैकल्पिक कालांश 6 — ‘आओ मिलजुल कर करें’ (पृ. 110)

चरणविवरण
1हर विद्यार्थी रोज़मर्रा के उत्पादों की सूची बनाए — खाद्य-उत्पाद, बिजली के उपकरण, सुख-सुविधा के सामान।
2अपने पसंदीदा टी.वी. कार्यक्रमों के नाम लिखें।
3अध्यापक सूची एकत्र करें; कक्षा को छोटे समूहों में बाँटें।
4हर समूह इन वस्तुओं के निर्माताओं और कार्यक्रमों के प्रायोजकों के नाम बताए।
5★★अध्यापक तीन वर्गों में सूचीबद्ध करें — (1) पूर्णतया विदेशी (2) पूर्णतया भारतीय (3) साझेदारी वाली कंपनियाँ।
समापन★अपेक्षित निष्कर्ष: “अधिकांश उत्पादों की बिनिर्माता कंपनियाँ विदेशी हैं जो स्थानीय कंपनी के साथ मिलकर उत्पादन करती हैं।” ! और दूसरा पहलू भी उठाइए — “विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ा है वैसे-वैसे हमारे छोटे स्वदेशी उद्योगों के ग्राहक कम हुए हैं और ये उद्योग बंद हो रहे हैं।”

अंतिम 10 मिनट — पूरी पुस्तक की समेकित पुनरावृत्ति★

यह पुस्तक 1 का अंतिम अध्याय है। कक्षा को सातों अध्याय एक साथ दिखाइए —

अध्यायएक पंक्ति में
1. दो ध्रुवीयता का अंतसोवियत संघ का विघटन और एक-ध्रुवीय विश्व का उदय
2. सत्ता के समकालीन केन्द्रयूरोपीय संघ, आसियान और चीन — नये शक्ति-केंद्र
3. समकालीन दक्षिण एशियापड़ोस की राजनीति और सार्क
4. अंतर्राष्ट्रीय संगठनसंयुक्त राष्ट्रसंघ — “इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी”
5. समकालीन विश्व में सुरक्षा“सुरक्षा किसकी?” — राज्य की या जनता की
6. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन“जवाब इस बात से तय होते हैं कि कौन देश कितना ताकतवर है”
7. वैश्वीकरण“विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव” — और उसका विषम प्रभाव

★★समापन-वाक्य कक्षा से कहिए: “पूरी पुस्तक एक ही सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है — शीतयुद्ध के बाद दुनिया में ताकत कहाँ चली गई? पहले चार अध्याय बताते हैं कहाँ; अगले तीन बताते हैं कि उसका असर आम आदमी पर क्या पड़ा।”

शिक्षक के लिए त्वरित संकेत

  • !! कालांश 4 में अनाथ-संदर्भ की भरपाई मत भूलिए। यह पिछले सब अनाथ-संदर्भों से गंभीर है — वह अध्याय मौजूद ही नहीं है।
  • ★यह अध्याय जान-बूझकर ‘दोनों पक्ष’ देता है — हर खंड में। राजनीतिक प्रभाव में तीन पहलू; आर्थिक में तीन पक्ष; सांस्कृतिक में समरूपता और वैभिन्नीकरण दोनों। कक्षा में किसी एक पक्ष को थोपिए मत — उत्तर-पत्र में भी संतुलन को ही ऊँचे अंक मिलते हैं।
  • ★प्रश्न 5 का जाल ज़रूर बताइए — ‘सांस्कृतिक समरूपता’ का तर्क आलोचकों का है, पैरोकारों का नहीं।
  • तीन उदाहरण जो बच्चे कभी नहीं भूलते — जनार्दन/जॉन · चीन की साइकिल · जीन्स के ऊपर खादी का कुर्ता। इन्हें बार-बार लौटाइए।
  • ! ‘वैश्वीकरण = पश्चिमीकरण’ और ‘वैश्वीकरण की शुरुआत 1991 में’ — दो सबसे आम भ्रांतियाँ। पहले ही दिन तोड़ दीजिए।
  • ★वैलेन्टाईन-डे और पश्चिमी पोशाक वाले उदाहरण संवेदनशील हैं। पाठ्यपुस्तक इन्हें तथ्य के रूप में दर्ज़ करती है, राय के रूप में नहीं। उसी लहजे में रहिए।