अध्याय 10विद्रोही और राज

परख प्रश्न10 मिनट

ढाँचा: भाग अ — जागरूकता (50%) | भाग आ — संवेदनशीलता (20%) | भाग इ — सृजनात्मकता (30%) | भाग ई — रूब्रिक

भाग अ — जागरूकता (Awareness)

1(केस-अध्ययन) हर छावनी में विद्रोह का क्रम लगभग एक-जैसा था — संकेत

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शस्त्रागार-ख़ज़ाना → जेल-टेलीग्राफ़-रिकॉर्ड रूम → रिकॉर्ड जलाना।
(क) निशानों की इस सूची से विद्रोहियों की राज-समझ के बारे में क्या पता चलता है?
(ख) ‘ढर्रे की समानता’ से इतिहासकार योजना-समन्वय का अनुमान कैसे निकालते हैं? दो अतिरिक्त साक्ष्य दीजिए।
[साक्ष्य-से-अनुमान]

उत्तर-दिशा (क) विद्रोही जानते थे कि राज हथियार + पैसा + क़ैद + संचार + काग़ज़ पर टिका है — प्रतीकों की सटीक पहचान; (ख) समानता संयोग से दुर्लभ; + रेजीमेंटों के पत्र (7वीं→48वीं), सिपाही-पंचायतें (हियर्से-प्रकरण, चार्ल्स बॉल)।

2(दावा-कारण)
अभिकथन (A): मेरठ के सिपाहियों ने दिल्ली पहुँचकर बहादुर शाह का आशीर्वाद माँगा।
कारण (R): मुग़ल बादशाह के नाम से विद्रोह को वैधता मिल सकती थी।

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सही उत्तर: (ब) दोनों सही; R, A की सही व्याख्या

3(दावा-कारण)
अभिकथन (A): NCERT कारतूस-अफ़वाह की राइट-रिपोर्ट को पूर्ण सत्य मानकर प्रस्तुत करती है।
कारण (R): पाठ कहता है — “इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता के बारे में कहना मुश्किल है।”

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उत्तर: A ग़लत, R सही — NCERT स्रोत देती है पर विश्वसनीयता पर सावधानी भी; अफ़वाह का महत्त्व उसकी सत्यता में नहीं, प्रभाव में है।

4(आँकड़ा-व्याख्या) अवध के आँकड़े — ताल्लुक़दारों के गाँव 67% → 38%; राजस्व-माँग में 30-70% वृद्धि; फॉरसिथ का अनुमान — 3/4 वयस्क पुरुष विद्रोह में।
(क) पहले दो आँकड़ों और तीसरे के बीच कारण-संबंध की शृंखला बनाइए।
(ख) फॉरसिथ का आँकड़ा किस पक्ष का अनुमान है — इससे उसकी विश्वसनीयता पर क्या असर?
[आँकड़ा-शृंखला]

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उत्तर-दिशा (क) बेदख़ली+माँग-वृद्धि → ताल्लुक़दार-किसान दोनों आहत → निष्ठा-तंत्र भंग → सिपाही-गाँव जुड़ाव → व्यापक भागीदारी; (ख) अंग्रेज़ अफ़सर का — शत्रु-पक्ष द्वारा इतना ऊँचा अनुमान विद्रोह की व्यापकता का और मज़बूत प्रमाण (अपने विरुद्ध साक्ष्य)।

5(वर्गीकरण) निम्न नेताओं को (दरबारी/रियासती | ग्रामीण-स्थानीय | धार्मिक) श्रेणियों में रखिए —
बहादुर शाह • शाह मल • मौलवी अहमदुल्ला • रानी लक्ष्मीबाई • गोनू • बिरजिस क़द्र • हाथी वाला फ़क़ीर • कुँवर सिंह • नाना साहिब

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उत्तर: दरबारी/रियासती — बहादुर शाह, रानी लक्ष्मीबाई, बिरजिस क़द्र, नाना साहिब, कुँवर सिंह (ज़मींदार) | ग्रामीण-स्थानीय — शाह मल, गोनू | धार्मिक — मौलवी अहमदुल्ला, फ़क़ीर।

6(स्रोत-मिलान) कथन

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स्रोत:
(क) “हलालख़ोर हरामख़ोर हो गए हैं” (ख) “मामला काबिल हाथों में है” (ग) “एक ही झटके में आपने मेरे पुरखों की ज़मीन छीन ली” (घ) “अगर एक हिंदू या मुसलमान का धर्म ही नष्ट हो गया…” (ङ) “पल में बिखर जाते हैं, पल में फिर जुट जाते हैं”
विकल्प: सिपाही-अर्ज़ी • दिल्ली उर्दू अख़बार • हनवंत सिंह • तहसीलदार (सिस्टन-प्रसंग) • ग्रामीण अवध की अफ़सर-रिपोर्ट

उत्तर: (क)-उर्दू अख़बार (ख)-तहसीलदार (ग)-हनवंत सिंह (घ)-सिपाही-अर्ज़ी (ङ)-अफ़सर-रिपोर्ट।

7(चित्र-विश्लेषण) ‘द रिलीफ़ ऑफ़ लखनऊ’ में तीन नायक केंद्र में, उजाले में हैं; शव-घायल अगले भाग में हैं।
(क) रचना (Composition) के ये दो निर्णय दर्शक की भावना को कैसे दिशा देते हैं?
(ख) यही घटना विद्रोही-पक्ष का कोई चित्रकार बनाता तो रचना कैसे बदलती? (दो परिवर्तन)
[दृश्य-साक्षरता]

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उत्तर-दिशा (क) निगाह नायकों पर — विजय-वीरता केंद्रीय भाव; क्षति ‘क़ीमत’ के रूप में हाशिये पर; (ख) संभवत: घेरा डालने वाले सिपाही केंद्र में; रेज़ीडेंसी ‘क़ब्ज़े के प्रतीक’ रूप में; अथवा बेगम हज़रत महल का खेमा।

8(तुलनात्मक) 1857 की घोषणाएँ बनाम दक्कन 1875 (अ.9) — दोनों में ‘काग़ज़/प्रतीकों’ पर हमले हुए। तीन समानताएँ, दो अंतर।

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उत्तर-दिशा समानताएँ — रिकॉर्ड/बही जलाना; उत्पीड़क-हिमायती निशाने; रूढ़ि/वैध-व्यवस्था की बहाली का स्वर; अंतर — 1857 में राज-परिवर्तन का लक्ष्य व वैकल्पिक सत्ता, 1875 में नहीं; 1857 सशस्त्र-सैनिक आधार वाला महाविद्रोह, 1875 सीमित-लक्षित।

9(अवधारणा-जाँच) “विद्रोही पूरी तरह अतीत लौटाना चाहते थे” — इस कथन की NCERT-आधार पर जाँच कीजिए।

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उत्तर-दिशा पक्ष — 18वीं सदी के मुग़ल जगत की पुनर्स्थापना, दरबारी संस्कृति, ‘बहाली’ की भाषा; प्रति-पक्ष — व्यवहार में सोपान-विरोध (संभ्रांत-बेइज़्ज़ती, बहीखाते), “संभवत: ज़्यादा समतापरक समाज की कल्पना”; निष्कर्ष — घोषणा-स्तर पर बहाली, व्यवहार-स्तर पर उससे आगे की झलक।

10(कालक्रम-तर्क) 30 जून 1857 (चिनहाट-हार) से मार्च 1858 (अवध-पुनर्नियंत्रण) तक लगभग नौ महीने लगे।
(क) इतना समय क्यों लगा — पाठ से तीन कारण।
(ख) ‘सिर्फ़ सैनिक विद्रोह’ बनाम ‘जन-आंदोलन’ बहस में यह अवधि किस पक्ष का साक्ष्य है?

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उत्तर-दिशा (क) गाँव-दर-गाँव प्रतिरोध; आम देहाती जनता ख़िलाफ़; ताल्लुक़दार-किसान की संयुक्त बागडोर; “पल में बिखरना-जुटना”; (ख) जन-आंदोलन पक्ष का — फ़ौजें छावनियाँ जीत सकती थीं, गाँव नहीं।

भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)

11(दृष्टिकोण-विविधता) 11 मई 1857, लाल क़िला — एक ही सुबह, तीन डायरियाँ (60-80 शब्द प्रत्येक):
(क) बहादुर शाह — भय, दुविधा, मजबूरी
(ख) मेरठ से आया घुड़सवार सिपाही — उम्मीद, धर्म-रक्षा, बादशाह से आस
(ग) क़िले का कोई दरबारी/सेवक — शिष्टाचार-भंग पर स्तब्धता, अनिश्चित भविष्य
[बहु-परिप्रेक्ष्य]

उत्तर देखिए

मूल्यांकन-बिंदु तीनों स्वरों में NCERT-तथ्य (रमज़ान-सहरी, हो-हल्ला, ‘नाममात्र’, बेधड़क प्रवेश); कोई स्वर व्यंग्यचित्र न बने।

12(भाषा की राजनीति) अंग्रेज़ विद्रोहियों को “अहसानफ़रामोश और बर्बर लोगों का झुंड” कहते थे; ब्रिटिश चित्रों में वे ‘दानव’; राष्ट्रवादी स्मृति में वही लोग ‘स्वतंत्रता-सेनानी’।
(क) एक ही समूह के लिए शब्दों का यह सफ़र क्या सिखाता है?
(ख) आज के इतिहास-लेखन में इनके लिए कौन-सा शब्द सबसे संतुलित लगता है — ‘विद्रोही’, ‘बाग़ी’, ‘क्रांतिकारी’, ‘सेनानी’? तर्क दीजिए।
[शब्द-संवेदनशीलता]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) नामकरण सत्ता-सापेक्ष; NCERT का ‘विद्रोही और राज’ तटस्थ-विश्लेषणात्मक चुनाव; (ख) खुला उत्तर — तर्क की गुणवत्ता देखें।

13(जेंडर-पड़ताल) रानी झाँसी की प्रशंसा ‘मर्दानी’ कहकर हुई; ब्रिटिश चित्रों में अंग्रेज़ औरतें या तो लाचार (इन मेमोरियम) या वीरांगना (मिस व्हीलर) — दोनों ही पुरुष-दर्शक की भावनाएँ जगाने के लिए।

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर-दिशा (क) स्त्री-वीरता को अपवाद/पुरुषोचित बनाना; (ख) ब्रिटिश — ‘इज़्ज़त-बचाओ’ से प्रतिशोध-औचित्य, ईसाइयत-प्रतीक; भारतीय — मातृभूमि-मुक्ति की प्रतीक-योद्धा; दोनों में स्त्री कथानक का साधन, स्वयं कथावाचक नहीं।

14(हिंसा-चित्रण की नैतिकता) तोप से उड़ाने के दृश्य ILN में छपे; जलते गाँवों (अ.9 के संथाल-चित्र भी) की तसवीरें ब्रिटेन में “गर्वपूर्वक” दिखीं।
(क) दंड को सार्वजनिक तमाशा बनाने का उद्देश्य क्या था?
(ख) आज के मीडिया में हिंसा-चित्रों के प्रसारण पर यह अध्याय क्या सोचने को कहता है?
[मीडिया-नैतिकता]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) “दहशत का प्रदर्शन” — दर्शकों में आतंक, शासकों में अपराजेयता-भाव; (ख) चित्र तटस्थ नहीं — किसे दिखाया, कैसे, किसके लिए — यही उनकी राजनीति; संयम-संवेदना का प्रश्न।

15(सहयोगात्मक बहस) दो दल —
पक्ष: “1857 धर्म-रक्षा का युद्ध था।” (कारतूस, अपीलें, धर्म युद्ध-भाषा, सिपाही-अर्ज़ी, पंडित-फ़कीर)
विपक्ष: “धर्म मुहावरा था; जड़ें भू-राजस्व, बेदख़ली, रोज़गार, नस्ली अपमान में थीं।” (एकमुश्त बंदोबस्त, कारीगर-तबाही, 1840s का दुर्व्यवहार, आज़मगढ़ के आर्थिक भाग)
संयुक्त निष्कर्ष में NCERT-संतुलन आए।
[संवाद-कौशल]

भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)

16(कल्पनाशील पुनर्रचना) “चपाती किसने भेजी?” — गाँव के चौकीदार की एक रात की कथा (एक पृष्ठ): रात में आगंतुक, चपाती, पाँच और बनाने का हुक्म, गाँव की अटकलें।
शर्त: NCERT की सीमा का सम्मान — कथा में भी रहस्य अनसुलझा रहे (“मतलब-मक़सद न तब स्पष्ट था और न आज”); कम-से-कम चार प्रामाणिक तथ्य।
[ऐतिहासिक कल्पना + स्रोत-मर्यादा]

17(डिज़ाइन-चुनौती) “दो दीवारें” — विद्यालय-प्रदर्शनी: एक दीवार पर 1857 की ब्रिटिश छवियाँ (रिलीफ़, इन मेमोरियम, जस्टिस, तोप-दृश्य), दूसरी पर भारतीय राष्ट्रवादी छवियाँ (रानी के पोस्टर, कविता-पंक्तियाँ)।
(क) हर छवि के नीचे दो-पंक्ति की व्याख्या-पट्टिका लिखिए — “यह छवि दर्शक से क्या करवाना चाहती है?”
(ख) बीच में एक तीसरा पैनल — “इतिहासकार की मेज़”: वही घटनाएँ स्रोत-सूची के साथ तटस्थ भाषा में। तीनों की भाषा का अंतर ही प्रदर्शनी का पाठ है।
[डिज़ाइन-चिंतन]

18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि बहादुर शाह नेतृत्व अस्वीकार कर देते…” — विद्रोह की वैधता, फैलाव और दमन पर तीन संभावित असर लिखिए; हर असर NCERT-तथ्य से बँधा हो।
[परिकल्पना-निर्माण]

उत्तर देखिए

(संकेत: वैधता-वाक्य; 12-13 मई की ख़बर से छावनियों का भड़कना; दिल्ली का सांकेतिक महत्त्व — दोनों पक्षों के लिए।)

19(विचार-संयोजन) आज़मगढ़ घोषणा हर तबके को उसकी क्षति गिनाती है — ज़मींदार से पंडित-फ़कीर तक। इसे आधुनिक चुनावी ‘घोषणा-पत्र’ की संरचना से मिलाइए — 150 शब्दों में: “1857 का घोषणा-पत्र: भारत का पहला बहु-वर्गीय राजनीतिक दस्तावेज़?” — शीर्षक के प्रश्न-चिह्न पर अपना निर्णय भी दीजिए।
[अतीत-वर्तमान संवाद]

20(भूमिका-लेखन) पन्च के दफ़्तर में एक दिन (सितंबर 1857) — ‘जस्टिस’ कार्टून छपने से पहले संपादक-चित्रकार का संवाद (80-100 शब्द): कानपुर की ख़बरें, पाठकों की मनोदशा, ‘न्याय’ की छवि क्यों चुनी। अंत में एक पंक्ति — आज का मीडिया-विद्यार्थी इस संवाद से क्या सीखे।
[स्रोत-निर्माण की प्रक्रिया समझना]

21(संक्षिप्त सृजन) “रिकॉर्ड रूम की राख” — 100 शब्दों का एकालाप: जले हुए रिकॉर्ड-दफ़्तर की राख बोलती है — उसमें क्या-क्या दर्ज था (लगान, बंधपत्र, मुकदमे), किसने-क्यों जलाया, और इतिहासकार अब क्या खो बैठा। (दोहरी चेतना: विद्रोही के लिए मुक्ति, इतिहासकार के लिए स्रोत-क्षति!)
[रूपक-लेखन]

भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक

आयामप्रारंभिक (1)दक्ष (2)उन्नत (3)
जागरूकतातिथि-नेता-स्थान में गड्डमड्डघटनाक्रम व स्रोत सही जोड़ता हैस्रोत की स्थिति (अख़बार/अर्ज़ी/चित्र/रिपोर्ट) से भार तौलता; ढर्रे-से-योजना जैसा अनुमान-तर्क बनाता है
संवेदनशीलता‘देशभक्त बनाम दुश्मन’ का सपाट ढाँचानामकरण-छवियों की पक्षधरता पहचानता हैबहु-स्वर लेखन; जेंडर-हिंसा-चित्रण पर सूक्ष्म, शालीन विश्लेषण
सृजनात्मकताकल्पना तथ्य-विहीन; काल-दोषतथ्य-सम्मत, ढाँचाबद्धस्रोत-मर्यादा (अनसुलझा रहस्य, निर्माण-प्रक्रिया) को रचना में बुनता है

भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30% शिक्षक-संकेत: प्रश्न 2, 3, 5, 6 लिखित-योग्य; 11, 15 समूह-कार्य; 16, 17, 21 पोर्टफोलियो। सृजनात्मक उत्तरों में न्यूनतम 4-6 सही NCERT-तथ्य अनिवार्य।