ढाँचा: भाग अ — जागरूकता (50%) | भाग आ — संवेदनशीलता (20%) | भाग इ — सृजनात्मकता (30%) | भाग ई — रूब्रिक प्रत्येक प्रश्न के साथ [कौशल] टैग तथा उत्तर-दिशा दी गई है।
भाग अ — जागरूकता (Awareness)
अ.1 केस/परिस्थिति-आधारित प्रश्न
1(केस-अध्ययन) एक पुरातत्त्वविद् हम्पी के शहरी केंद्र के उत्तर-पूर्वी कोने में खुदाई करते हुए परिष्कृत चीनी मिट्टी के टुकड़े पाती है। पास ही उसे मक़बरे और मस्जिदें भी मिलती हैं जिनका स्थापत्य मन्दिरों के मण्डपों जैसा है।
(क) चीनी मिट्टी के आधार पर वहाँ के निवासियों के विषय में क्या अनुमान लगाया गया है? यह निष्कर्ष क्यों नहीं है?
(ख) मक़बरों-मस्जिदों का मन्दिर-सदृश स्थापत्य किस ऐतिहासिक प्रक्रिया का प्रमाण है?
[साक्ष्य-से-अनुमान]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) आयातित विलासिता-वस्तु → संभवत: अमीर व्यापारी — पर NCERT “हो सकता है” कहती है, क्योंकि वस्तु मिलना निवासी की पहचान का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं; (ख) साझा शिल्पकार-तकनीक-सौंदर्यबोध — धार्मिक भिन्नता के बावजूद एक ही स्थापत्य-भाषा।
2(केस-अध्ययन) 1565 के बाद विजयनगर शहर उजड़ गया, फिर भी कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब के निवासी उसे ‘हम्पी’ नाम से याद रखते रहे, और 1800 में मैकेन्जी को पहली जानकारियाँ विरुपाक्ष मन्दिर के पुरोहितों की स्मृतियों से मिलीं।
(क) यह प्रकरण मौखिक परंपरा की किस शक्ति को दर्शाता है?
(ख) क्या अकेली मौखिक परंपरा से शहर का इतिहास लिखा जा सकता था? कौन-से अन्य स्रोत जोड़ने पड़े?
[स्रोत-मूल्यांकन]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) भौतिक विनाश के बाद भी स्मृति में जीवित रहना — नाम (पम्पादेवी→हम्पी) व विवाह-उत्सव आज तक; (ख) नहीं — पुरातत्त्व, अभिलेख, यात्री-वृत्तांत, चार भाषाओं का साहित्य मिलाना पड़ा (मिलान/Corroboration)।
3(डेटा-व्याख्या) नीचे की तालिका देखकर प्रश्नों के उत्तर दीजिए
उत्तर देखिए
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1512 | रायचूर दोआब पर अधिकार |
| 1514 | उड़ीसा के शासकों का दमन |
| 1520 | बीजापुर की पराजय |
| 1529 | कृष्णदेव राय की मृत्यु |
| 1542 | अरावीडु वंश का केंद्र पर नियंत्रण |
| 1565 | राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध |
(क) कृष्णदेव राय की मृत्यु और साम्राज्य की निर्णायक पराजय के बीच कितने वर्ष का अंतराल है? (ख) इस अंतराल में केंद्र कमज़ोर क्यों होता गया — दो कारण दीजिए। [कालानुक्रम-विश्लेषण]
उत्तर-दिशा (क) 36 वर्ष; (ख) उत्तराधिकारियों को विद्रोही नायकों/सेनापतियों की चुनौती; सामरिक समीकरणों का बदलना → दक्कन सल्तनतों की विजयनगर-विरोधी मैत्री; रामराय की फूट डालने की नीति का उल्टा पड़ना।
4(मानचित्र-व्याख्या) मानचित्र 1 (पृ. 174) में विजयनगर, बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा, कालीकट और गोवा को देखिए।
(क) विजयनगर की उत्तरी सीमा पर कौन-सी दो नदियों का क्षेत्र संघर्ष का केंद्र था और क्यों?
(ख) कालीकट और गोवा का महत्त्व घोड़ों के व्यापार से कैसे जुड़ा था?
[स्थानिक-चिंतन]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) तुंगभद्रा-कृष्णा (रायचूर दोआब) — उर्वर घाटी; (ख) पश्चिमी तट के बंदरगाह — अरब/पुर्तगाली घोड़ा-व्यापार के प्रवेश-द्वार (रज़्ज़ाक कालीकट ही उतरा था; 1510 में गोवा पुर्तगालियों के पास)।
5(दावा-कारण) नीचे दो कथन हैं —
अभिकथन (A): विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि-भूभाग को किलेबंदी के भीतर रखा।
कारण (R): मध्यकालीन घेराबंदियों का मुख्य उद्देश्य प्रतिपक्ष को खाद्य-सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था।
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ग) दोनों सही और R, A की सही व्याख्या है
6(दावा-कारण)
अभिकथन (A): हम विजयनगर के महलों की तुलना में मन्दिरों के विषय में कहीं अधिक जानते हैं।
कारण (R): मन्दिर पूरी तरह राजगिरी से बने थे, जबकि महलों की अधिरचना विकारी (नाशवान) सामग्री से बनी थी।
उत्तर देखिए
उत्तर: दोनों सही; R, A की सही व्याख्या है। (विस्तार: इसी से “साक्ष्य का पक्षपात” समझाइए — जो सामग्री टिकती है, उसी का इतिहास अधिक लिखा जाता है।)
7(वर्गीकरण) निम्न को धार्मिक केंद्र / राजकीय केंद्र / शहरी केंद्र में वर्गीकृत कीजिए —
विरुपाक्ष मन्दिर • महानवमी डिब्बा • चीनी मिट्टी के टुकड़े • कमल महल • विट्ठल मन्दिर • मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला • हज़ार राम मन्दिर • हाथियों का अस्तबल • रथ गलियाँ • छप्पर के आवास
उत्तर देखिए
उत्तर: धार्मिक — विरुपाक्ष, विट्ठल, रथ गलियाँ | राजकीय — महानवमी डिब्बा, कमल महल, हज़ार राम, अस्तबल | शहरी — चीनी मिट्टी, मुस्लिम मुहल्ला, छप्पर के आवास।
8(स्रोत-मिलान) प्रत्येक कथन का स्रोत-प्रकार पहचानिए — (पुरातत्त्व / अभिलेख / यात्री-वृत्तांत / साहित्य / मौखिक परंपरा)
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर: (क) साहित्य — अमुक्तमाल्यद (ख) पुरातत्त्व (ग) अभिलेख (घ) मौखिक परंपरा (ङ) यात्री-वृत्तांत — रज़्ज़ाक।
अ.2 चित्र/दृश्य-आधारित
9चित्र 7.2 (मैकेन्जी और उनके सहायक) में मैकेन्जी केंद्र में लाल वर्दी में खड़ा है; उसके देशज सूचनादाता किनारों पर हैं।
(क) चित्र-रचना (Composition) से चित्रकार क्या संदेश देना चाहता है?
(ख) यदि यही चित्र सूचनादाताओं में से किसी के वंशज बनवाते, तो रचना कैसे बदल सकती थी?
[दृश्य-साक्षरता]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) ज्ञान-निर्माण में यूरोपीय केंद्र, भारतीय परिधि — श्रेय की असमानता; (ख) संभवत: लच्छमैया/जैन पंडित केंद्र में, ग्रंथों-अभिलेखों के साथ — ज्ञान के वास्तविक वाहक के रूप में।
10चित्र 7.12 (महानवमी डिब्बा के उत्कीर्णन) में घोड़े, हाथी, सैनिक, नर्तक दिखते हैं, और पेस का विवरण भी महानवमी में शोभायात्रा, नृत्य, सेना-निरीक्षण बताता है।
(क) जब पत्थर का साक्ष्य और लिखित साक्ष्य ऐसे मेल खाते हैं, तो इतिहासकार के लिए इसका क्या मूल्य है?
(ख) एक उदाहरण अध्याय से दीजिए जहाँ ऐसा मेल नहीं मिलता और प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है।
[साक्ष्य-संयोजन]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) मिलान (Corroboration) से निष्कर्ष की विश्वसनीयता बढ़ती है; (ख) महानवमी डिब्बा का वास्तविक प्रयोजन — स्थान अपर्याप्त लगता है; सभा मंडप का उद्देश्य; “हाथियों के अस्तबल” का असली कार्य।
भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)
11(दृष्टिकोण-विविधता) 1565 के युद्ध को तीन दृष्टियों से एक-एक अनुच्छेद में लिखिए —
(क) विजयनगर के एक नागरिक की दृष्टि से, जिसका घर लूट में उजड़ गया
(ख) सल्तनत-गठबंधन के एक सैनिक की दृष्टि से, जो रामराय की चालों से त्रस्त था
(ग) एक आधुनिक इतिहासकार की दृष्टि से, जो इसे धार्मिक युद्ध कहने से इनकार करता है
[बहु-परिप्रेक्ष्य]
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-बिंदु प्रत्येक स्वर की प्रामाणिकता; (ग) में साक्ष्य का प्रयोग (कृष्णदेव का दावेदारों को समर्थन, “हिन्दू सूरतराणा”, बीजापुर का हस्तक्षेप); घृणा-भाषा से परहेज़।
12(हाशिये की आवाज़) पेस ने जलाशय पर काम करते 15-20 हज़ार लोगों को “चींटियों की तरह” लिखा। NCERT पूछती है कि श्रम देने वाले क्या सोचते थे — इसका उत्तर कोई स्रोत नहीं देता।
(क) “चींटियों की तरह” उपमा में क्या समस्या है? यह किसकी दृष्टि है?
(ख) आधुनिक इतिहास-लेखन ऐसे अनाम श्रमिकों तक पहुँचने के लिए कौन-से तरीक़े आज़मा सकता है? (कोई दो सुझाव)
[समावेशी इतिहास-दृष्टि]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) मनुष्य संख्या और दृश्य बन जाते हैं, कर्ता नहीं — यह ऊपर से देखने वाले विदेशी दरबारी-यात्री की दृष्टि है; (ख) श्रम-संगठन से जुड़े अभिलेख/मज़दूरी-रिकॉर्ड की खोज, औज़ारों-बस्तियों का पुरातत्त्व, तुलनात्मक अध्ययन, शिल्पी-जातियों की वंश-परंपराएँ व मौखिक इतिहास।
13(नैतिक विवेक) मैकेन्जी ने लिखा कि विजयनगर का अध्ययन कंपनी को स्थानीय लोगों को “प्रभावित करने” वाली संस्थाओं-कानूनों की जानकारी देगा।
(क) ज्ञान का उपयोग शासन के उपकरण के रूप में करने में क्या नैतिक समस्या है?
(ख) क्या इससे मैकेन्जी द्वारा जुटाई गई सामग्री अनुपयोगी हो जाती है? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
[नैतिक तर्क]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) ज्ञान संग्रह करने वाले और जिनके बारे में संग्रह हो रहा है, उनके बीच सत्ता-असंतुलन; सहमति व उद्देश्य का प्रश्न; (ख) नहीं — सामग्री मूल्यवान है, पर आलोचनात्मक दृष्टि से पढ़नी होगी (संग्रहकर्ता का उद्देश्य ध्यान में रखकर)। स्रोत को नकारना नहीं, सावधानी से प्रयोग करना।
14(समावेशिता) शहरी केंद्र में विविध संप्रदायों के छोटे मन्दिर, जैन मन्दिर, तथा मस्जिद-मक़बरे — सब मिले हैं; और मुस्लिम मुहल्ले का स्थापत्य मन्दिर-मण्डपों जैसा है।
(क) यह पुरातात्त्विक चित्र विजयनगर के समाज के विषय में क्या कहता है?
(ख) आज के नगर-जीवन के लिए इसमें क्या सीख है? (संक्षिप्त, उपदेश-रहित)
[सह-अस्तित्व की समझ]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) बहु-धार्मिक सह-निवास + साझा शिल्प-परंपरा — विविधता व्यवहार में सामान्य थी; (ख) साझा नागरिक-स्थान और शिल्प/कला की साझेदारी समुदायों को जोड़ती है — विद्यार्थी अपने परिवेश से उदाहरण दें।
15(सहयोगात्मक बहस) कक्षा को दो दलों में बाँटिए —
पक्ष: “किलेबंदी के भीतर खेत रखना दूरदर्शी नीति थी।”
विपक्ष: “यह अत्यधिक महँगा प्रदर्शन था जिसने संसाधन निगल लिए।”
प्रत्येक दल NCERT-साक्ष्य (रज़्ज़ाक, पेस, पुरातत्त्व, “अधिक महँगी तथा व्यापक नीति”) से कम से कम तीन तर्क तैयार करे। अंत में दोनों दल मिलकर एक संतुलित निष्कर्ष-अनुच्छेद लिखें।
[संवाद-कौशल]
भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)
16(कल्पनाशील पुनर्रचना) आप महानवमी के त्यौहार के अंतिम दिन विजयनगर में उपस्थित एक यात्री हैं। पेस-नूनिज़ की शैली में एक पृष्ठ का वृत्तांत लिखिए, जिसमें हों — मंच का दृश्य, अश्व-पूजा, शोभायात्रा, नायकों की भेंट, और सेना-निरीक्षण।
शर्त: कम से कम पाँच तथ्य NCERT से अक्षरश: सही हों; और अंत में एक पंक्ति ऐसी लिखिए जो आपके “यात्री” की अपनी सांस्कृतिक दृष्टि/पूर्वाग्रह प्रकट करे।
[ऐतिहासिक कल्पना + स्रोत-चेतना]
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-बिंदु तथ्य-शुद्धता; काल-दोष (Anachronism) से बचाव; अंतिम पंक्ति में “यात्री-दृष्टि की सीमा” की समझ।
17(डिज़ाइन-चुनौती) आपको हम्पी में “अदृश्य विजयनगर” नामक संग्रहालय-दीर्घा डिज़ाइन करनी है, जो वह दिखाए जो अब नहीं बचा — लकड़ी की संरचनाएँ, चटकीले रंग, कपड़े का कमरा, छप्पर के आवास, बाज़ार की चहल-पहल।
(क) दीर्घा के पाँच प्रदर्श (Exhibits) प्रस्तावित कीजिए — प्रत्येक के साथ बताइए कि वह किस NCERT-साक्ष्य पर आधारित है।
(ख) एक प्रदर्श ऐसा रखिए जो दर्शक को साक्ष्य की सीमा का अनुभव कराए।
[डिज़ाइन-चिंतन]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (उदाहरण) लकड़ी के स्तंभों वाला सभा मंडप का पुनर्निर्मित मॉडल (छेदों के साक्ष्य से); रंगीन प्लास्टर-सज्जा का डिजिटल अनुमान (फ़्रिट्ज़-मिशेल); पेस के वर्णन पर आधारित बाज़ार-ध्वनि-दृश्य; “विजय का भवन” का कपड़े का कमरा; (ख) एक ख़ाली कक्ष जिसकी पट्टिका पर केवल प्रश्न — “यह भवन किसने बनाया? हम नहीं जानते।”
18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि 1565 में राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध न हुआ होता…” — तो अगले पचास वर्षों में विजयनगर शहर, अमर-नायक और दक्कन सल्तनतों के संबंध किस दिशा में जा सकते थे? तीन संभावनाएँ लिखिए और प्रत्येक को अध्याय के किसी वास्तविक तथ्य/प्रवृत्ति से जोड़िए।
[परिकल्पना-निर्माण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (1) नायकों का स्वतंत्र होना फिर भी संभव था — प्रवृत्ति 1529 से ही दिख रही थी; (2) सल्तनतों से समीकरण फिर बदलते — “हमेशा शत्रुतापूर्ण नहीं” का पैटर्न; (3) पुर्तगाली भूमिका बढ़ती — 1498/1510 की प्रवृत्ति। (मूल्यांकन: कल्पना नहीं, साक्ष्य-आधारित बहिर्वेशन।)
19(विचार-संयोजन) अध्याय 5 (यात्रियों के नज़रिये) में आपने इब्न बतूता और बर्नियर पढ़े; इस अध्याय में पेस, नूनिज़, रज़्ज़ाक।
“विदेशी यात्री भारत का दर्पण भी हैं और उस दर्पण में अपनी शक्ल भी” — इस सूत्र पर दोनों अध्यायों के एक-एक उदाहरण से 150 शब्दों की टिप्पणी लिखिए।
[अंतर-अध्याय संश्लेषण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा पेस की “रोम जितना विशाल” तुलना / बर्नियर की यूरोप-श्रेष्ठता; रज़्ज़ाक का दरबारी दृष्टिकोण; यात्री जो दर्ज़ करता है उसमें उसका अपना समाज झलकता है।
20(पुनर्नामकरण-अभ्यास — चित्र 7.13-7.15 के इन-टेक्स्ट प्रश्न का विस्तार) “कमल महल” और “हाथियों का अस्तबल” — दोनों नाम आधुनिक अनुमान हैं।
(क) प्रत्येक भवन के लिए दो-दो नए नाम प्रस्तावित कीजिए — एक उसकी बनावट पर, एक उसके संभावित कार्य पर आधारित।
(ख) एक पंक्ति में बताइए कि नामकरण इतिहास-लेखन को कैसे प्रभावित करता है।
[भाषा और इतिहास]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (उदाहरण) कमल महल → “नव-शिखर मंडप” (बनावट: नौ मीनारें) / “मंत्रणा-भवन” (कार्य: परिषदीय सदन); (ख) नाम अपेक्षा गढ़ देता है — “अस्तबल” सुनते ही हम प्रमाण से पहले कार्य मान लेते हैं।
21(सृजनात्मक लेखन — संक्षिप्त) हिरिया नहर की आत्मकथा 100 शब्दों में लिखिए — संगम वंश में जन्म से लेकर आज भग्नावशेषों के बीच बहने तक। इसमें कम से कम तीन ऐतिहासिक तथ्य आएँ।
[संक्षेपण + तथ्य-निष्ठा]
भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक
तीनों आयामों के लिए स्तर-निर्धारण
| आयाम | प्रारंभिक (1) | दक्ष (2) | उन्नत (3) |
|---|---|---|---|
| जागरूकता | तथ्य पहचानता है पर स्रोत-प्रकार में भ्रम (यात्री/अभिलेख/पुरातत्त्व) | तथ्य + स्रोत-प्रकार सही जोड़ता है; सरल अनुमान कर लेता है | साक्ष्यों का मिलान करता है; “अनुमान बनाम निष्कर्ष” का भेद व NCERT की अनिश्चितता-भाषा (“संभवत:”, “1336?”) पकड़ता है |
| संवेदनशीलता | एक ही दृष्टिकोण से लिखता है; “हिंदू बनाम मुस्लिम” जैसी सरल द्विभाजक भाषा | दो दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है; अनाम श्रमिकों के प्रश्न को पहचानता है | बहु-परिप्रेक्ष्य + साक्ष्य-सीमा की चेतना; औपनिवेशिक/यात्री-दृष्टि के पूर्वाग्रह की शालीन आलोचना करता है |
| सृजनात्मकता | कल्पना तथ्यों से कटी हुई; काल-दोष सामान्य | कल्पना अधिकतर तथ्य-सम्मत; ढाँचा स्पष्ट | कल्पना साक्ष्य-नियंत्रित; स्रोत-दृष्टि/सीमा को रचना में ही बुनता है (जैसे यात्री का पूर्वाग्रह दर्शाना) |
सुझाया गया भार
| आयाम | भार |
|---|---|
| जागरूकता | 50% |
| संवेदनशीलता | 20% |
| सृजनात्मकता | 30% |
शिक्षक हेतु संकेत
- प्रश्न 5, 6 (दावा-कारण) व 7, 8 (वर्गीकरण/मिलान) लिखित परीक्षा में सीधे प्रयोग योग्य हैं।
- प्रश्न 11, 15 समूह-गतिविधि के लिए; प्रश्न 16, 17, 21 पोर्टफोलियो/गृह-प्रकल्प के लिए उपयुक्त।
- सृजनात्मक उत्तरों में तथ्य-शुद्धता की न्यूनतम सीमा (कम से कम 3–5 सही NCERT-तथ्य) अनिवार्य रखिए — यही PARAKH में “कल्पना” और “मनगढ़ंत” का अंतर है।