अध्याय 12संविधान का निर्माण

परख प्रश्न10 मिनट

ढाँचा: भाग अ — जागरूकता (50%) | भाग आ — संवेदनशीलता (20%) | भाग इ — सृजनात्मकता (30%) | भाग ई — रूब्रिक

भाग अ — जागरूकता (Awareness)

1(केस-अध्ययन) सभा के 82% सदस्य एक ही पार्टी के थे — फिर भी NCERT कहती है कि बहसें वास्तविक और तीखी थीं।
(क) कांग्रेस के भीतर की कौन-सी विविधताएँ इसे संभव बनाती थीं?
(ख) राष्ट्रीय आंदोलन ने सदस्यों को कौन-सा ‘कौशल’ सिखाया था जो सभा में काम आया?
[पाठ-विश्लेषण]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) समाजवादी ↔ ज़मींदार-हिमायती; साम्प्रदायिक-निकट ↔ पक्के धर्मनिरपेक्ष; (ख) “वाद-विवाद करना और मत-भेदों पर बात-चीत कर समझौतों की खोज करना।”

2(दावा-कारण)
अभिकथन (A): संविधान सभा को पूर्णत: प्रतिनिधि संस्था नहीं कहा जा सकता।
कारण (R): उसके सदस्य 1945-46 के सीमित मताधिकार वाले प्रांतीय चुनावों से बनी विधायिकाओं द्वारा परोक्ष रूप से चुने गए थे।

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) दोनों सही; R, A की सही व्याख्या

विस्तार फिर भी नेहरू का उत्तर — वैधता का स्रोत चुनाव-विधि नहीं, जनता की इच्छा व आंदोलन-विरासत।

3(दावा-कारण)
अभिकथन (A): विभाजन के बाद कांग्रेस-नेतृत्व प्रांतीय स्वायत्तता के पहले के अपने रुख़ से पलट गया।
कारण (R): प्रांतों को स्वायत्तता का पुराना वादा काफी हद तक मुस्लिम लीग को भरोसा दिलाने की कोशिश था, जो विभाजन के बाद अप्रासंगिक हो गया।

उत्तर देखिए

उत्तर: दोनों सही; R, A की सही व्याख्या — साथ में हिंसा-नियंत्रण व आर्थिक नियोजन के नए तर्क।

4(आँकड़ा-व्याख्या) तीन आँकड़े — 10-15% (1935 तक मताधिकार), 82% (सभा में कांग्रेसी), 100% (संविधान द्वारा वयस्क मताधिकार)।
(क) पहले और तीसरे आँकड़े के बीच की छलाँग को NCERT ‘ख़ास किस्म का भरोसा’ क्यों कहती है?
(ख) दूसरा आँकड़ा पहले का ही परिणाम कैसे है?
[आँकड़ा-शृंखला]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) अन्य लोकतंत्रों (US/UK) में मताधिकार चरणों में — संपत्ति→शिक्षा→वर्ग→स्त्री; भारत ने बिना पूर्वोदाहरण एक झटके में सबको दिया; (ख) सीमित मताधिकार के चुनावों में सम्पन्न-शिक्षित मतदाता → कांग्रेस-प्रभुत्व वाली विधायिकाएँ → 82%।

5(वर्गीकरण) वक्तव्यों को वक्ता से मिलाइए — पंत • रंगा • जयपाल सिंह • खाण्डेलकर • वेलायुधन • हंसा मेहता • मुदालियार • सन्तनम:

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर: (क)-खाण्डेलकर (ख)-रंगा (ग)-पंत (घ)-वेलायुधन (ङ)-हंसा मेहता (च)-मुदालियार (छ)-जयपाल सिंह (ज)-सन्तनम।

6(स्रोत-तुलना) स्रोत 3 (पटेल) और स्रोत 4 (पंत) — दोनों पृथक निर्वाचिका के विरुद्ध हैं, पर तर्क-शैली भिन्न।
(क) पटेल का तर्क मुख्यत: अतीत से आता है और पंत का भविष्य से — कैसे?
(ख) दोनों में से कौन-सा तर्क अल्पसंख्यक-श्रोता को अधिक संबोधित है, और क्यों?
[तर्क-संरचना]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) पटेल — इतिहास का हिसाब: विष, विभाजन, शरारत का बीज; पंत — परिणाम-चित्र: स्थायी अलगाव, निराशा, हवाबंद कमरा; (ख) पंत का — वह अल्पसंख्यकों के अपने हित की भाषा में बोलता है (“तुम्हारे लिए आत्मघाती”), पटेल का स्वर राष्ट्र-क्षति का।

7(अवधारणा-जाँच) “संविधान सभा में ‘अल्पसंख्यक’ एक नहीं, चार बहसें थीं।” — धार्मिक (बहादुर), आर्थिक (रंगा), सामाजिक-हाशिया (नागप्पा-वेलायुधन), आदिवासी (जयपाल सिंह) — प्रत्येक की समस्या-परिभाषा और प्रस्तावित समाधान की तालिका बनाइए।

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा प्रतिनिधित्व→पृथक निर्वाचिका; ग़रीबी-शोषण→परिस्थितियाँ+सीढ़ी; हाशियाकरण→अपंगता-खात्मा+आरक्षण; बेदखली-हिकारत→संरक्षण+सीट-आरक्षण+मेलजोल।

8(कालक्रम-तर्क) इन पाँच घटनाओं को क्रम में रखकर कारण-शृंखला बनाइए: उद्देश्य प्रस्ताव • प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस • सभा का पहला अधिवेशन • धुलेकर का राजभाषा-भाषण • संविधान पर हस्ताक्षर।

उत्तर देखिए

उत्तर: 16-8-1946 → 9-12-1946 → 13-12-1946 → 13-9-1949 → दिसंबर 1949; शृंखला-तर्क: हिंसा की छाया में सभा बैठी → दृष्टि-घोषणा → तीन साल की बहसें (भाषा अंत तक विवादित) → समापन।

9(स्रोत-स्थिति) संविधान सभा की बहसें (CAD) इतिहासकार के लिए किस प्रकार का स्रोत हैं? पिछले अध्यायों के स्रोतों (पाँचवीं रिपोर्ट, पाक्षिक रिपोर्टें, आत्मकथा) से तीन बिंदुओं पर तुलना कीजिए — (क) कौन बोल रहा है, (ख) किसके लिए रिकॉर्ड हुआ, (ग) क्या छूट सकता है।
[स्रोत-आलोचना]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा सार्वजनिक, शब्दश:, प्रकाशन-चेतना के साथ बोले गए भाषण; श्रोता = सदन+प्रेस+भविष्य; छूटता है — गलियारे की सौदेबाज़ी, समितियों का बंद-कक्ष कार्य, वे स्वर जो सभा तक पहुँचे ही नहीं (रंगा का ‘ट्रस्टी’-कथन स्वयं यह स्वीकारता है)।

10(नक़्शा-तर्क) भाषा समिति का फार्मूला तीन स्तरों पर काम करता है — संघ (हिंदी-राजभाषा), संक्रमण (15 वर्ष अंग्रेज़ी), प्रांत (क्षेत्रीय भाषा)। समझाइए कि यह त्रि-स्तरीय ढाँचा दुर्गाबाई (वर्चस्व-भय) और धुलेकर (हिंदी-गौरव) — दोनों को आंशिक संतोष कैसे देता है, और किसे क्या नहीं मिलता।

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा धुलेकर को हिंदी का दर्जा मिलता है पर ‘राष्ट्रभाषा’ शब्द व तत्काल-प्रभुत्व नहीं; दुर्गाबाई-पक्ष को समय (15 वर्ष), प्रांतीय भाषा-अधिकार व ‘राजभाषा’ की सीमित परिभाषा मिलती है, पर हिंदुस्तानी की समावेशी कल्पना खो जाती है।

भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)

11(दृष्टिकोण-विविधता) 9 दिसंबर 1946 की शाम — तीन डायरियाँ (60-80 शब्द प्रत्येक):
(क) सभा-सदस्य — पहले अधिवेशन से लौटा; उत्साह + बाहर की हिंसा की चिंता
(ख) कलकत्ता का शरणार्थी युवक — अख़बार में सभा की ख़बर पढ़कर (“मेरे लिए इसमें क्या है?”)
(ग) रियासत का दीवान — महाराजा को सभा के बारे में सतर्क सलाह लिखता हुआ
[बहु-परिप्रेक्ष्य]

उत्तर देखिए

मूल्यांकन-बिंदु तीनों में NCERT-तथ्य (हिंसा-सिलसिला; लीग-बहिष्कार; ‘स्वतंत्र सत्ता के सपने’); तीसरे में एक-तिहाई भू-भाग वाला संदर्भ आए तो उत्कृष्ट।

12(असहमति का शिष्टाचार) धुलेकर की शैली (“उन्हें चले जाना चाहिए”) और चेट्टियार की शैली (“एहतियात… थोपने का सवाल नहीं”) — दोनों हिंदी/एकता के पक्षधर हैं।
(क) दोनों की भाषा का श्रोताओं पर संभावित असर तुलनात्मक रूप से लिखिए।
(ख) अध्यक्ष की टिप्पणी (“इस तरह बात करके… आगे नहीं बढ़ा पाएँगे”) लोकतांत्रिक बहस का कौन-सा नियम सिखाती है?
[संवाद-नैतिकता]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा आक्रामकता लक्ष्य को ही हानि (दुर्गाबाई का ‘सकते में हूँ’; ‘गहरी कड़वाहट’); नियम — तर्क की शक्ति ≠ स्वर की कठोरता; सुने जाने की शर्त सम्मान है।

13(समानुभूति-लेखन) खाण्डेलकर का वाक्य — “हमारे दिमाग, हमारी देह काम नहीं करती और अब हमारा हृदय भी भावशून्य हो चुका है।”
(क) यह वाक्य दमन के मनोवैज्ञानिक आयाम के बारे में क्या कहता है जो ‘आरक्षण’ जैसे उपाय से सीधे नहीं सधता?
(ख) सभा का यह स्वीकार कि “कानून भर से सोच नहीं बदलती” — आज के विद्यालय-जीवन में इसका एक व्यावहारिक अर्थ लिखिए।
[मूल्य-विवेचन]

14(स्त्री-स्वर) हंसा मेहता ने आरक्षित सीटें ठुकराईं (स्रोत 8); उसी सभा में 15 महिला सदस्य थीं — 300 में।
(क) ‘विशेषाधिकार नहीं — बराबरी’ की उनकी स्थिति के पक्ष में दो तर्क दीजिए।
(ख) 5% उपस्थिति का तथ्य इस स्थिति के सामने कौन-सा कठिन प्रश्न रखता है? (दोनों पक्ष सम्मानपूर्वक)
[नैतिक द्वंद्व]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) पृथक-बहस से सीखा सबक़ — विशेष बर्ताव स्थायी ‘अन्यता’ बना सकता है; सहयोग की शर्त बराबरी; (ख) बिना सक्षम-कारी उपायों के ‘बराबरी’ औपचारिक रह सकती है — रंगा की ‘सीढ़ी’ वाली दलील स्त्री-प्रश्न पर भी लागू हो सकती थी; उत्तर खुला रहे।

15(सहयोगात्मक बहस) दो दल — “नेहरू सही थे: सभा की शक्ति जनता की इच्छा थी” बनाम “लाहिड़ी सही थे: बंदूकों के साये में स्वायत्तता अधूरी थी।” दोनों दल स्रोत 1-2 व §2.1 के साक्ष्य लें; संयुक्त निष्कर्ष में यह आए कि दोनों दृष्टियाँ मिलकर सभा की वास्तविक स्थिति समझाती हैं।
[संवाद-कौशल]

भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)

16(कल्पनाशील पुनर्रचना) “रजिस्टर पर पंद्रहवाँ हस्ताक्षर” — महिला-सदस्य तालिका से कोई एक सदस्य चुनिए (जैसे दक्षियानी वेलायुधन या बेगम एजाज रसूल)। उनके पहले दिन का एक पृष्ठ का संस्मरण लिखिए — रजिस्टर पर हस्ताक्षर का क्षण, सदन का दृश्य, मन में चलती उम्मीदें-आशंकाएँ। शर्त: न्यूनतम पाँच NCERT-तथ्य (तिथि, क्षेत्र, समकालीन घटनाएँ)।
[ऐतिहासिक कल्पना]

17(डिज़ाइन-चुनौती) “बहस-कक्ष संग्रहालय” — संविधान सभा पर एक प्रदर्शनी-कक्ष डिज़ाइन कीजिए: चार कोने = चार महाबहसें (दृष्टि/अल्पसंख्यक/केंद्र-राज्य/भाषा); हर कोने में — एक उद्धरण-पट्ट, एक प्रतीक-वस्तु (स्वयं सोचिए: जैसे हवाबंद डिब्बा? सीढ़ी? तराजू?), और दर्शक के लिए एक मतदान-प्रश्न। केंद्र में क्या रहेगा — तर्क सहित।
[डिज़ाइन-चिंतन]

18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि पृथक निर्वाचिका रह जाती…” — पंत और बहादुर दोनों के तर्कों को कसौटी बनाकर तीन संभावित परिणाम लिखिए (राजनीतिक दल-संरचना, अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक संबंध, चुनाव-प्रचार की भाषा)। (सावधानी: निश्चयवादी भविष्यवाणी नहीं — ‘तर्कसंगत संभावना’ की भाषा।)
[परिकल्पना-निर्माण]

19(अंतर-पाठ संश्लेषण) अध्याय 11 का गाँधी-अम्बेडकर संवाद (पूना-पूर्व) और अध्याय 12 की पृथक निर्वाचिका-बहस — 150 शब्दों में टिप्पणी: “1932 की बहस 1947 में कैसे लौटी — और विभाजन ने उसका उत्तर कैसे बदल दिया?” (अम्बेडकर द्वारा माँग छोड़ने तक।)
[अंतर-अध्याय संश्लेषण]

20(भूमिका-लेखन) “तीन अख़बार, एक फार्मूला — 14 सितंबर 1949” — भाषा-समझौते पर तीन संपादकीय के पहले अनुच्छेद (60-70 शब्द): (क) इलाहाबाद का हिंदी दैनिक, (ख) मद्रास का अंग्रेज़ी दैनिक, (ग) लखनऊ का उर्दू अख़बार। अंत में एक वाक्य — तीनों में साझा चिंता क्या है।
[स्रोत-निर्माण की समझ]

21(संक्षिप्त सृजन) “संविधान बोलता है” — 100 शब्दों का एकालाप: हस्ताक्षर-समारोह (दिसंबर 1949) की मेज़ पर रखा संविधान अपनी जन्म-कथा सुनाता है — किन आवाज़ों से बना, किन समझौतों से, किस भरोसे (वयस्क मताधिकार) के साथ। तीन NCERT-तथ्य अनिवार्य।
[रूपक-लेखन]

भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक

आयामप्रारंभिक (1)दक्ष (2)उन्नत (3)
जागरूकतानाम-तिथियाँ अटकते हैंचार महाबहसों का ढाँचा व वक्ता-तर्क सहीCAD की स्रोत-सीमाएँ पहचानता है; बहसों को कारण-शृंखला में जोड़ता है
संवेदनशीलताएक पक्ष को ‘सही’ घोषित कर देता हैविरोधी पक्षों के तर्क न्यायपूर्वकअसहमति-शिष्टाचार, प्रतिनिधित्व-द्वंद्व (हंसा मेहता-प्रश्न) पर परिपक्व संतुलन
सृजनात्मकताकल्पना तथ्य-विहीनतथ्य-सम्मत, ढाँचाबद्धरचना में बहस-चेतना बुनी (संपादकीय-भेद; प्रतीक-चयन का तर्क)

भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30% शिक्षक-संकेत: प्रश्न 2, 3, 5, 8 लिखित-योग्य; 11, 12, 15 समूह/मौखिक; 16, 17, 21 पोर्टफोलियो; ‘कक्षा-संविधान सभा’ (पाठ योजना, कालांश 2) के साथ प्रश्न 15 जोड़ें। सृजनात्मक उत्तरों में न्यूनतम 4-6 सही NCERT-तथ्य अनिवार्य।