अध्याय 9उपनिवेशवाद और देहात

परख प्रश्न10 मिनट

ढाँचा: भाग अ — जागरूकता (50%) | भाग आ — संवेदनशीलता (20%) | भाग इ — सृजनात्मकता (30%) | भाग ई — रूब्रिक

भाग अ — जागरूकता (Awareness)

1(केस-अध्ययन) 1797 की बर्दवान-नीलामी में कलेक्टर ने पाया कि 95% से अधिक ख़रीद राजा के अपने नौकरों-एजेंटों ने की थी।
(क) यह ‘फ़र्जी बिक्री’ किस क़ानूनी प्रावधान (चूक

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नीलामी) की काट थी?
(ख) इस प्रकरण से NCERT का कौन-सा बड़ा सूत्र सिद्ध होता है — क़ानून और जनता के संबंध के बारे में?
[नियम-प्रतिक्रिया विश्लेषण]

उत्तर-दिशा (क) इस्तमरारी बंदोबस्त + सूर्यास्त विधि की नीलामी-व्यवस्था; (ख) प्रस्तावना का सूत्र — लोग क़ानून का पालन करते हुए भी अन्यायपूर्ण लगने वाले क़ानूनों का विरोध करते थे और “उनके परिणामों में कुछ फेर-बदल कर देते थे।”

2(दावा-कारण)
अभिकथन (A): इस्तमरारी बंदोबस्त की राजस्व-माँग प्रारंभ में बहुत ऊँची रखी गई।
कारण (R): माँग सदा के लिए तय हो रही थी, अत: भविष्य में कीमतें-उत्पादन बढ़ने पर कंपनी उस वृद्धि में हिस्सा नहीं माँग सकती थी — इस ‘प्रत्याशित हानि’ से बचना था।

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सही उत्तर: (ब) दोनों सही; R, A की सही व्याख्या

3(दावा-कारण)
अभिकथन (A): दक्कन दंगा आयोग ने विद्रोह का सारा दोष साहूकारों पर डाला।
कारण (R): साक्ष्यों में सरकारी राजस्व-माँग की कोई भूमिका थी ही नहीं।

उत्तर देखिए

उत्तर: A सही, R ग़लत/संदिग्ध — आयोग से विशिष्ट रूप से पूछा गया था कि क्या सरकारी माँग कारण थी, और NCERT टिप्पणी करती है कि औपनिवेशिक सरकार असंतोष का कारण अपनी कार्रवाई को मानने को “कदापि तैयार नहीं” थी — यानी निष्कर्ष सरकारी सरोकार से रंगा था; 1820s की कठोर वसूली व 50-100% माँग-वृद्धि की भूमिका पाठ स्वयं दिखाता है।

4(आँकड़ा-व्याख्या) तालिका देखिए

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सूचक18381851
संथाल गाँव401,473
संथाल जनसंख्या3,00082,000+
(क) 13 वर्षों की यह वृद्धि किस औपनिवेशिक व्यवस्था का परिणाम थी?
(ख) इसी वृद्धि का ‘दूसरा पक्ष’ — किन दो समूहों की क्या कीमत चुकी? (पहाड़िया; स्वयं संथाल)
[आँकड़े का दोहरा पाठ]

उत्तर-दिशा (क) दामिन-इ-कोह (1832) — सीमांकित बसावट, अनुदान-शर्तें; कंपनी-राजस्व भी बढ़ा; (ख) पहाड़िया — बंजर ऊपरी पहाड़ियों में सिमटे, झूम असंभव, ग़रीबी; संथाल — कर-दिकू-ज़मींदार के शिकंजे में, जिसकी परिणति 1855-56।

5(वर्गीकरण) निम्न को (बंगाल / राजमहल / दक्कन) क्षेत्रों में छाँटिए —
सूर्यास्त विधि • दामिन-इ-कोह • रैयतवाड़ी • जोतदार • दिकू • भाड़ा-पत्र • लठियाल • क्लीवलैंड • रिकार्डो • पाँचवीं रिपोर्ट • सिधू मांझी • मिश्रधन-बांड

उत्तर देखिए

उत्तर: बंगाल — सूर्यास्त विधि, जोतदार, लठियाल, पाँचवीं रिपोर्ट | राजमहल — दामिन-इ-कोह, दिकू, क्लीवलैंड, सिधू मांझी | दक्कन — रैयतवाड़ी, भाड़ा-पत्र, रिकार्डो, मिश्रधन-बांड।

6(स्रोत-मिलान) कथन

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स्रोत:
(क) “जोतदार बहुत ही हठीले और ज़िद्दी हैं” (ख) “उन्हें ग़रीबी और बरबादी का सामना करना पड़ा” (ग) “कुल्हाड़ी… नहीं, यह नहीं — कमी है तो बस प्रगति की” (घ) “वे झुंड बनाकर ऋणदाताओं के घर जाते हैं” (ङ) “मैं हर माह चार रुपए किराया दूँगा”
विकल्प: पाँचवीं रिपोर्ट • बुकानन (दिनाजपुर) • बुकानन (राजमहल) • नेटिव ओपिनियन • भाड़ा-पत्र

उत्तर: (क)-बुकानन-दिनाजपुर (ख)-पाँचवीं रिपोर्ट (ग)-बुकानन-राजमहल (घ)-नेटिव ओपिनियन (ङ)-भाड़ा-पत्र।

7(चित्र-विश्लेषण) चित्र 9.8 (होजेज का रमणीय गाँव, 1782) और चित्र 9.13 (जलते संथाल गाँव, 1856) — दोनों ब्रिटिश दर्शकों के लिए बने।
(क) दोनों चित्र अपने-अपने समय में ब्रिटिश दर्शक से क्या कहलवाना चाहते थे?
(ख) ‘चित्र = तटस्थ साक्ष्य’ की धारणा पर इनसे क्या आघात पड़ता है?
[दृश्य-साक्षरता]

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उत्तर-दिशा (क) होजेज — रूमानी ‘अज्ञात-सुंदर पूर्व’ (प्रकृति-पूजा); ILN — ‘अजेय साम्राज्य’ का गर्व, विद्रोह-दमन की क्षमता; (ख) चित्र भी चुने हुए दृष्टिकोण हैं — कौन बनवा रहा है, किसके लिए, यही अर्थ तय करता है।

8(गणितीय-जागरूकता) स्रोत 10 के अनुसार 100 रु. का ऋण 3-2 आने प्रतिशत मासिक ब्याज पर; हर 3 साल में मिश्रधन का नया बांड।
(क) ‘ब्याज मूलधन से अधिक नहीं’ वाले प्रथागत मानक के अनुसार इस ऋण पर अधिकतम कितनी वसूली वैध होती?
(ख) 12 वर्षों में वास्तविक ब्याज (1,000 पर 2,028-10-3) मानक का लगभग कितना गुना है?
[संख्यात्मक तर्क]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) मूलधन के बराबर तक — यानी कुल अधिकतम दुगुना; (ख) ब्याज अकेला मूलधन के दुगुने से अधिक — मानक का 2+ गुना; यही ‘रूढ़ि-उल्लंघन’ का अंकगणित है।

9(तुलनात्मक) इस्तमरारी बनाम रैयतवाड़ी — चार आधारों पर तुलना कीजिए: (क) किससे बंदोबस्त, (ख) माँग की अवधि, (ग) मध्यस्थ की स्थिति, (घ) राज्य की आय-वृद्धि की गुंजाइश।

उत्तर देखिए

उत्तर: ज़मींदार बनाम सीधे रैयत; सदा के लिए बनाम 30-वर्षीय पुनर्सर्वेक्षण; मध्यस्थ केंद्रीय बनाम अनुपस्थित; वृद्धि-गुंजाइश शून्य बनाम प्रत्येक सर्वेक्षण पर दर-वृद्धि।

10(अंतर-अध्याय) अध्याय 8 का मुग़ल ज़मींदार बनाम इस अध्याय का बंगाली ज़मींदार (1793 के बाद) — तीन अंतर।

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा मुग़ल — जाति+ख़िदमत से हैसियत, किले-सेनाएँ, वसूली का हिस्सा; औपनिवेशिक — ‘समाहर्ता मात्र’, सेनाएँ भंग-कचहरियाँ अधीन, स्थायी नकद माँग व नीलामी-जोखिम; पर दोनों में समानता — व्यवहार में सत्ता बनाए रखने के रास्ते खोज लेना।

भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)

11(दृष्टिकोण-विविधता) एक ही जंगल — तीन आँखें। 60-80 शब्दों में तीन अनुच्छेद:
(क) बुकानन की डायरी का अंश — राजमहल की घाटी देखते हुए
(ख) पहाड़िया मुखिया का अपने समुदाय से कथन — उसी घाटी के बारे में
(ग) संथाल बसने वाले का गीत/स्मृति — उसी घाटी में पहला हल चलाते हुए
[बहु-परिप्रेक्ष्य]

उत्तर देखिए

मूल्यांकन-बिंदु (क) में ‘उत्पादकता-प्रगति’ शब्दावली; (ख) में पहचान-जीविका-आशंका; (ग) में यात्रा-अंत/‘दामिन’ की उम्मीद — तीनों NCERT-सम्मत; कोई भी स्वर व्यंग्यचित्र न बने।

12(हाशिये की आवाज़) NCERT लिखती है कि पहाड़िया मुखिया भत्ता स्वीकारने पर “अपने समुदाय में अपनी सत्ता खो बैठे।”
(क) भत्ते जैसा ‘लाभ’ सत्ता-क्षति में क्यों बदला?
(ख) आज विकास-योजनाओं में समुदाय-प्रमुखों की भागीदारी के लिए इस प्रकरण से क्या सीख निकलती है?
[संस्था-संवेदनशीलता]

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उत्तर-दिशा (क) मुखिया की वैधता समुदाय से आती थी; सरकारी वेतनभोगी बनते ही वह ‘ऊपर का आदमी’ हो गया — प्रतिनिधि से कर्मचारी; (ख) बाहरी प्रोत्साहन समुदाय की आंतरिक वैधता-संरचना को समझे बिना दिए जाएँ तो नेतृत्व ही टूट जाता है।

13(भाषा की राजनीति) औपनिवेशिक शब्दावली — वनवासियों के लिए “असभ्य, बर्बर, उपद्रवी, क्रूर”; स्रोत 7 में रैयतों के लिए “अपराधी, जासूसी, गुप्तचर”; बुकानन का “नीचता से रहते हैं”।
(क) ये शब्द वर्णन हैं या निर्णय? इनसे नीतियों (संहार, दमन) को कैसे वैधता मिली?
(ख) इन्हीं तीन प्रसंगों के लिए तटस्थ/सम्मानजनक वाक्य प्रस्तावित कीजिए।
[भाषा-संवेदनशीलता]

14(न्याय-बोध) दक्कन का रैयत कहता — “हम कर्ज़ से नहीं, बेइंसाफ़ी से लड़े।”
(क) ‘ब्याज मूलधन से अधिक नहीं’ जैसे प्रथागत मानक को नैतिक अर्थव्यवस्था क्यों कहा जा सकता है?
(ख) क्या आज के उपभोक्ता-क़ानूनों (ब्याज-सीमा, वसूली-नियम) में वही तर्क दिखता है? एक उदाहरण।
[नैतिक तर्क]

उत्तर देखिए

उत्तर-दिशा (क) समुदाय-स्वीकृत ‘उचित’ की सीमा — बाज़ार नहीं, नैतिकता तय करती थी; उल्लंघन = विद्रोह-योग्य अन्याय; (ख) RBI की ब्याज/वसूली-एजेंट संबंधी सीमाएँ, सूदखोरी-निषेध क़ानून — राज्य द्वारा ‘उचित’ की पुनर्स्थापना।

15(सहयोगात्मक बहस) दो दल —
पक्ष: “1875 में बही-खाते जलाना विध्वंस था — क़ानून हाथ में लेना अनुचित।”
विपक्ष: “जब क़ानून (परिसीमन-क़ानून तक) ही ऋणदाता का हथियार बन जाए, तो काग़ज़ जलाना प्रतिरोध की भाषा है।”
प्रत्येक दल NCERT-साक्ष्य से तीन-तीन तर्क; अंत में संयुक्त संतुलित अनुच्छेद — जिसमें यह भी आए कि विद्रोहियों ने व्यक्ति नहीं, दस्तावेज़ निशाना बनाए (अधिकतर साहूकार भागे, मारे नहीं गए)।
[संवाद-कौशल]

भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)

16(कल्पनाशील पुनर्रचना) “सूर्यास्त से पहले” — 1797 की एक शाम की कथा (एक पृष्ठ): बर्दवान के राजा का दीवान भुगतान की समय-सीमा, माता के नाम हस्तांतरण और नीलामी की एजेंट-योजना पर मंत्रणा कर रहा है।
शर्त: छह NCERT-तथ्य (सूर्यास्त विधि, स्त्री-संपत्ति नियम, बेनामी, बोली-इनकार-चक्र…) सही संदर्भ में; काल-दोष रहित।
[ऐतिहासिक कल्पना]

17(डिज़ाइन-चुनौती) “तीन क्षेत्र, एक प्रदर्शनी” — विद्यालय-प्रदर्शनी के तीन कोने डिज़ाइन कीजिए (बंगाल/राजमहल/दक्कन)। प्रत्येक कोने के लिए: एक केंद्रीय वस्तु (जैसे — जला हुआ बही-खाता का प्रतिरूप), एक स्रोत-उद्धरण, एक प्रश्न-पट्टिका दर्शकों के लिए। चौथा कोना — “स्रोतों पर संदेह”: पाँचवीं रिपोर्ट/आयोग/ILN की पक्षधरता दिखाने वाला।
[डिज़ाइन-चिंतन]

18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि अमेरिकी गृहयुद्ध पाँच वर्ष और चलता…” — दक्कन के रैयत, ऋणदाता और बम्बई-निर्यातकों के लिए तीन संभावनाएँ लिखिए; प्रत्येक को अध्याय के वास्तविक तथ्य से बाँधिए।
[परिकल्पना-निर्माण]

उत्तर देखिए

(संकेत: तेज़ी दीर्घ होती पर ‘अधिकांश किसान कर्ज़ में और दबे’ वाली प्रवृत्ति भी; 1875 टलता या और बड़ा होता?)

19(विचार-संयोजन) संथालों की ‘यात्रा’ के गीत दामिन में ‘पूर्ण विराम’ पाते हैं — पर 20 साल में वही दामिन कर-दिकू-ज़मींदार का शिकंजा बन जाता है।
“वादा की गई ज़मीन” (Promised Land) के टूटने की यह कथा — 150 शब्दों में एक भावपूर्ण किंतु तथ्य-निष्ठ टिप्पणी लिखिए, जिसका अंत 1855 के विद्रोह-संकल्प (“अपना शासन”) पर हो।
[संश्लेषण-लेखन]

20(भूमिका-लेखन) आयोग के समक्ष तीन बयान (प्रत्येक 60-80 शब्द) — दक्कन दंगा आयोग की सुनवाई: (क) मीरगाँव का रैयत (स्रोत 8 की भाषा में), (ख) सूपा का साहूकार (अपना बचाव — जोखिम, वसूली-कठिनाई), (ग) ज़िला कलेक्टर (राजस्व-वसूली का पक्ष)। अंत में एक पंक्ति — आयोग ने किसकी सुनी और क्यों।
[बहु-स्वर + स्रोत-चेतना]

21(संक्षिप्त सृजन) कुदाल और हल का संवाद — 100 शब्दों में: दोनों औज़ार आपस में बात करते हैं — कौन किसका प्रतीक, किसने क्या खोया-पाया। कम-से-कम तीन तथ्य (झूम-पोटाश, दामिन, संथाल-कपास…) आएँ।
[रूपक-लेखन]

भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक

आयामप्रारंभिक (1)दक्ष (2)उन्नत (3)
जागरूकताक्षेत्र-शब्दावली में गड्डमड्ड (जोतदार/रैयतवाड़ी/दिकू)तीनों क्षेत्रों के तथ्य-तंत्र अलग-अलग सहीस्रोत की संस्था-स्थिति (संसद-समिति/कंपनी-कर्मचारी/सरकारी आयोग) से साक्ष्य का भार तौलता है
संवेदनशीलताउपनिवेश/वनवासी पर सपाट-उपदेशात्मकऔपनिवेशिक शब्दावली की निर्णय-प्रकृति पहचानता हैनैतिक-अर्थव्यवस्था, वैधता-संरचना जैसे सूक्ष्म तर्क; बहु-स्वर में सम्मानजनक भाषा
सृजनात्मकताकल्पना तथ्य-विहीन; काल-दोषतथ्य-सम्मत, ढाँचाबद्धस्रोत-पक्षधरता को रचना में ही बुनता है (जैसे प्रश्न 20 का अंतिम वाक्य)

भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30% शिक्षक-संकेत: प्रश्न 2, 3, 5, 6, 9 लिखित परीक्षा-योग्य; 11, 15, 20 समूह/मौखिक; 16, 17, 21 पोर्टफोलियो। सृजनात्मक उत्तरों में न्यूनतम 5-6 सही NCERT-तथ्य अनिवार्य।