अध्याय 4विचारक, विश्वास और इमारतें

परख प्रश्न15 मिनट

अध्याय 4 — विचारक, विश्वास और इमारतें (ईसा पूर्व 600 – ईसा संवत् 600) | कक्षा XII

PARAKH = Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Development — NEP 2020 के अंतर्गत NCERT की स्वायत्त इकाई (स्थापना 2023)। तीन मूल आयाम: जागरूकता (Awareness) • संवेदनशीलता (Sensitivity) • सृजनात्मकता (Creativity) निष्पादन-स्तर: प्रारंभिक (Beginner) → दक्ष (Proficient) → उन्नत (Advanced)

! शिक्षक हेतु विशेष सूचना: इस अध्याय में अनेक धार्मिक परंपराएँ आती हैं। संवेदनशीलता वाले प्रश्नों में मूल्यांकन तर्क की गुणवत्ता और भाषा के संयम पर करें। किसी विद्यार्थी से अपनी व्यक्तिगत आस्था बताने की अपेक्षा न करें। सभी परंपराओं को समान गंभीरता से देखना ही अपेक्षित कौशल है।

भाग अ — जागरूकता (Awareness)

अ-1. केस/स्रोत-आधारित प्रश्न

केस 1 — एक मूर्ति, चार सवाल

साँची के तोरणद्वार पर एक स्त्री की मूर्ति है जो पेड़ पकड़कर झूल रही है। शुरू में विद्वान असमंजस में थे — “इस मूर्ति का त्याग और तपस्या से कोई रिश्ता नज़र नहीं आता था।”

1इस मूर्ति की पहचान क्या है और विद्वानों ने इसे किस विधि से समझा?

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(दक्ष)

2इस मूर्ति से जुड़ी लोक-मान्यता क्या थी, और उसे बौद्ध स्तूप पर क्यों स्थान मिला?

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(दक्ष)

3★NCERT इससे कौन-सा बड़ा निष्कर्ष निकालती है?

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(उन्नत)

4यदि विद्वानों ने केवल बौद्ध ग्रंथ पढ़े होते और संस्कृत साहित्य नहीं, तो वे इस मूर्ति के बारे में क्या मान बैठते?

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(उन्नत)

केस 2 — दो दर्शन, एक ही ग्रंथ में

(क) “सुख और दुख मानो पूर्व निर्धारित मात्रा में माप कर दिए गए हैं। इसे संसार में बदला नहीं जा सकता।” (ख) “दान, यज्ञ या चढ़ावा जैसी कोई चीज़ नहीं होती… मृत्यु के बाद कोई नहीं बचता।”

5दोनों उपदेशकों के नाम व उनकी परंपराएँ लिखिए।

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(प्रारंभिक)

6ये दोनों उद्धरण किस ग्रंथ में सुरक्षित हैं — और यह तथ्य अपने-आप में क्यों महत्त्वपूर्ण है?

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(उन्नत)

7! इन परंपराओं के बारे में हमारी जानकारी की सबसे बड़ी सीमा क्या है? इस सीमा का इतिहास-लेखन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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(उन्नत)

8NCERT स्वयं पूछती है — “क्या इन लोगों को नियतिवादी या भौतिकवादी कहना आपको उचित लगता है?” अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।

उत्तर देखिए

(उन्नत)

केस 3 — एक स्तूप, दो नियति

अमरावती: 1796 में खोज → पत्थर उठाए गए → 1854 में मद्रास → 1850 के दशक में कलकत्ता, मद्रास, लंदन → आज “सिर्फ़ एक छोटा सा टीला” साँची: 1818 में खोज → तीन तोरणद्वार खड़े → पेरिस/लंदन भेजने का सुझाव → स्थल पर ही संरक्षण → आज UNESCO विश्व धरोहर

9दोनों की भिन्न नियति का मुख्य कारण NCERT क्या बताती है?

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(दक्ष)

10एच.एच. कोल का सिद्धांत क्या था, और वह अमरावती पर क्यों लागू नहीं हो सका?

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(दक्ष)

11यदि अमरावती की खोज 1818 के बाद हुई होती, तो क्या परिणाम भिन्न होता? अपने उत्तर के तीन आधार दीजिए।

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(उन्नत)

12भोपाल की बेगमों के किन तीन निर्णयों ने साँची को बचाने में भूमिका निभाई?

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(दक्ष)

केस 4 — प्रतीकों की भाषा

प्रारंभिक मूर्तिकारों ने बुद्ध को मानव रूप में न दिखाकर प्रतीकों से दर्शाया — रिक्त स्थान, स्तूप, चक्र।

13प्रत्येक प्रतीक किस घटना/दशा को दर्शाता है?

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(प्रारंभिक)

14NCERT कहती है — “पेड़ का तात्पर्य केवल एक पेड़ नहीं था।” इस वाक्य का पद्धतिगत अर्थ समझाइए।

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(उन्नत)

15! जेम्स फ़र्गुसन ने साँची को ‘वृक्ष और सर्प पूजा का केंद्र’ क्यों माना? उनकी भूल से इतिहासकार को क्या सीख मिलती है?

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(उन्नत)

16यदि आपको कोई अपरिचित प्रतीक-आधारित कलाकृति मिले, तो उसे समझने के लिए आप क्रमशः कौन-से तीन कदम उठाएँगे?

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(उन्नत)

अ-2. दावा-कारण (Assertion–Reason)

निर्देश: (अ) दोनों सही, कारण सही व्याख्या (ब) दोनों सही, कारण सही व्याख्या नहीं (स) दावा सही, कारण गलत (द) दावा गलत, कारण सही

17दावा (A): स्तूप बनाने की परंपरा बौद्ध धर्म से ही आरंभ हुई।
कारण (R): स्तूपों में बुद्ध से जुड़े अवशेष गाड़े जाते थे।

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उत्तर: (द) (NCERT: “स्तूप बनाने की परंपरा बुद्ध से पहले की रही होगी, लेकिन वह बौद्ध धर्म से जुड़ गई”)

18दावा (A): बुद्ध के संभाषण उनके जीवनकाल में लिख लिए गए थे।
कारण (R): उनकी मृत्यु के बाद वेसली में एक सभा बुलाकर शिक्षाओं का संकलन किया गया।

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उत्तर: (द)

19दावा (A): साँची की सभी मूर्तियाँ बौद्ध मत से सीधी जुड़ी हैं।
कारण (R): शालभंजिका, गजलक्ष्मी और सर्प जैसे प्रतीक लोक परंपराओं से आए।

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उत्तर: (द)

20दावा (A): प्रारंभिक बौद्ध परंपराओं में ईश्वर की केंद्रीय भूमिका थी।
कारण (R): बुद्ध ने मध्यम मार्ग की शिक्षा दी।

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उत्तर: (द) (NCERT: “भगवान का होना या न होना अप्रासंगिक था”)

21दावा (A): महिलाएँ और शूद्र पुराणों को सुन सकते थे।
कारण (R): पुराण संस्कृत श्लोकों में लिखे गए थे और ऊँची आवाज़ में पढ़े जाते थे।

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उत्तर: (अ)

22दावा (A): ‘हीनयान’ शब्द उस परंपरा ने स्वयं अपने लिए चुना था।
कारण (R): पुरातन परंपरा के अनुयायी ख़ुद को थेरवादी कहते थे।

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उत्तर: (द)

23दावा (A): सबसे प्राचीन कृत्रिम गुफाएँ बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनीं।
कारण (R): ये गुफाएँ ईसा पूर्व तीसरी सदी में असोक के आदेश से बनवाई गई थीं।

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उत्तर: (द) (वे आजीविक संप्रदाय के संतों के लिए थीं)

अ-3. डेटा/चित्र-व्याख्या

24चित्र 4.10 (क) मापचित्र है और चित्र 4.3 छायाचित्र। बताइए कि कौन-सी विशेषताएँ नक्शे में और कौन-सी ऊर्ध्वस्थ परिप्रेक्ष्य में अधिक स्पष्ट होती हैं।

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(उन्नत — NCERT का चर्चा-प्रश्न)

25कालरेखा 1 देखिए। छठी सदी ई.पू. में तीन चीज़ें एक साथ उभरीं — कौन-सी? इस समकालीनता से क्या निष्कर्ष निकलता है?

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(उन्नत)

26कालरेखा 2 में 1888 का ट्रेज़र-ट्रोव एक्ट है। यह क़ानून किस समस्या के उत्तर में आया होगा — अध्याय के किस खंड से यह जुड़ता है?

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(उन्नत)

27मानचित्र 1 में बौद्ध स्थलों का वितरण देखिए। कौन-से स्थल उत्तर भारत में हैं और कौन-से दक्कन/दक्षिण में? इस वितरण से बौद्ध धर्म के प्रसार के बारे में क्या पता चलता है?

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(उन्नत)

अ-4. वर्गीकरण व मिलान

28निम्न को उनके ग्रंथ/परंपरा से मिलाइए: थेरीगाथा • उत्तराध्ययन सूत्र • छांदोग्य उपनिषद • महापरिनिब्बान सुत्त • विनय पिटक

उत्तर देखिए

बौद्ध (सुत्त पिटक) / जैन / वैदिक-उपनिषद / बौद्ध (विनय) (दक्ष)

29निम्न को ‘बौद्ध मत से सीधे जुड़ा’ अथवा ‘लोक परंपरा से आया’ में वर्गीकृत कीजिए:
चक्र • शालभंजिका • स्तूप-प्रतीक • गजलक्ष्मी • रिक्त स्थान • सर्प • हाथी (उन्नत)

30स्तूप के पाँच भागों को उनके विवरण से मिलाइए: अंड • हर्मिका • यष्टि • वेदिका • तोरणद्वार (प्रारंभिक)

31निम्न व्यक्तियों को उनके योगदान से मिलाइए: कनिंघम • एच.एच. कोल • जेम्स फ़र्गुसन • जॉन मार्शल • सुल्तानजहाँ बेगम (दक्ष)

भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)

32★अनजाने के प्रति दृष्टि: NCERT बताती है कि यूरोपीय विद्वानों को कई सिरों-हाथों वाली मूर्तियाँ “विकृत लगती थीं और कई बार वे घृणा से भर जाते थे।” — किसी अपरिचित सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सामने पड़ने पर एक विद्यार्थी को क्या दृष्टिकोण अपनाना चाहिए?

उत्तर देखिए

(उन्नत)

33नामकरण की राजनीति: ‘हीनयान’ नाम महायान के अनुयायियों ने दिया, जबकि उस परंपरा ने स्वयं को थेरवाद कहा। किसी समूह को उसके अपने नाम से पुकारना क्यों महत्त्वपूर्ण है? इस सिद्धांत के दो और उदाहरण अध्याय 1 व 3 से दीजिए।

उत्तर देखिए

(उन्नत)

34अनेक परंपराओं का सह-अस्तित्व: एक ही युग में वैदिक, उपनिषदीय, जैन, बौद्ध, आजीविक और लोकायत परंपराएँ साथ-साथ थीं और आपस में तर्क करती थीं। इस वाद-विवाद की संस्कृति से आज के समाज को क्या सीख मिल सकती है?

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(उन्नत)

35जिनके ग्रंथ नष्ट हो गए: आजीविक व लोकायत परंपराओं की जानकारी हमें केवल उनके विरोधियों के ग्रंथों से मिलती है। यह स्थिति न्यायसंगत चित्रण के लिए क्या चुनौती खड़ी करती है?

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(उन्नत)

36★थेरीगाथा और दासी की आवाज़: पुन्ना एक दासी थी और उसकी रचना एक बौद्ध ग्रंथ में सुरक्षित रही। NCERT पूछती है — “पुन्ना जैसी दासी संघ में क्यों जाना चाहती थी?” अपने उत्तर में उसकी सामाजिक स्थिति और संघ की समानता — दोनों पर विचार कीजिए।

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(उन्नत)

37धरोहर किसकी? अमरावती की मूर्तियाँ आज चेन्नई, लंदन और अमरावती में बँटी हैं। एच.एच. कोल का सिद्धांत था — असली कृतियाँ खोज की जगह पर। इस मुद्दे के दोनों पक्षों के तर्क समान गंभीरता से प्रस्तुत कीजिए।

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(उन्नत)

38समूह-कार्य (सहयोगात्मक बहस): कक्षा को दो समूहों में बाँटिए —
(क) “प्राचीन कलाकृतियाँ खोज की जगह पर ही रहनी चाहिए”
(ख) “बड़े संग्रहालयों में वे अधिक लोगों तक पहुँचती हैं और बेहतर सुरक्षित रहती हैं”
प्रत्येक समूह NCERT के साक्ष्य से तर्क दे और दूसरे का सम्मानपूर्वक खंडन करे।

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(उन्नत)

39समानता का आदर्श: “एक बार संघ में आ जाने पर सभी को बराबर माना जाता था क्योंकि… उन्हें अपनी पुरानी पहचान को त्याग देना पड़ता था।” — किसी संस्था में पुरानी पहचान का त्याग समानता लाने में कैसे मदद करता है? क्या इसकी कोई सीमा भी हो सकती है?

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(उन्नत)

40अहिंसा की प्रासंगिकता: NCERT स्वयं पूछती है — “क्या बीसवीं सदी में अहिंसा की कोई प्रासंगिकता है?” इसे इक्कीसवीं सदी तक बढ़ाकर एक संतुलित अनुच्छेद लिखिए।

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(दक्ष)

41श्रम और गुमनामी: एलोरा के तक्षक ने लिखा — “हे भगवान यह मैंने कैसे बनाया!” — पर उसका नाम हम नहीं जानते। वहीं साँची के दान-अभिलेखों में सैकड़ों सामान्य स्त्री-पुरुषों के नाम दर्ज हैं। इस अंतर पर टिप्पणी कीजिए।

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(उन्नत)

भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)

इ-1. कल्पनाशील पुनर्रचना

42आप साँची के एक दानदाता हैं — एक शिल्पकार, व्यापारी या भिक्खुनी। अपने दान-अभिलेख की रचना कीजिए (जैसा NCERT के चित्र 4.9 में है) और फिर 100 शब्दों में बताइए कि आपने दान क्यों दिया।

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(दक्ष)

43थेरीगाथा की शैली में: किसी अन्य साधारण कामकाजी व्यक्ति (जैसे कुम्हार, बुनकर, माली) के दृष्टिकोण से एक लघु-पद्य रचिए जिसमें वह किसी प्रचलित प्रथा पर तर्कपूर्ण प्रश्न उठाए।

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(उन्नत)

44आप 1818 के साँची में खड़े एक अधिकारी हैं। तोरणद्वारों को लंदन भेजने के पक्ष और विपक्ष में एक आधिकारिक ज्ञापन (Memo) लिखिए, और अंत में अपनी सिफ़ारिश दीजिए।

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(उन्नत)

45कुटागारशाला में एक दिन: 64 संप्रदायों के युग में एक वाद-विवाद सभा का दृश्य लिखिए जिसमें एक नियतिवादी, एक भौतिकवादी और एक बौद्ध शिक्षक भाग ले रहे हों। प्रत्येक का तर्क NCERT के स्रोत 3 व §5 पर आधारित हो।

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(उन्नत)

इ-2. समस्या-समाधान व अभिकल्प

46★प्रतीक-अभिकल्प: आपको किसी आधुनिक विचार (जैसे शिक्षा, समानता या पर्यावरण) को बिना शब्दों के, केवल प्रतीक से दर्शाना है — ठीक वैसे जैसे बुद्ध को चक्र या रिक्त स्थान से दर्शाया गया। अपना प्रतीक बनाइए और समझाइए कि 2000 साल बाद कोई इसे कैसे समझ पाएगा।

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(उन्नत)

47संग्रहालय-अभिकल्प: एक दीर्घा डिज़ाइन कीजिए जिसका शीर्षक हो — “परंपराओं का संवाद”। कौन-सी पाँच वस्तुएँ रखेंगे और प्रत्येक के साथ क्या लिखेंगे?

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(उन्नत)

48संरक्षण-नीति: आप ASI के अधिकारी हैं। किसी नये खोजे गए स्तूप के लिए पाँच-सूत्री संरक्षण-नीति बनाइए — जिसमें कोल के सिद्धांत और आधुनिक चुनौतियों (जैसे अजंता का शैल-स्खलन) दोनों का ध्यान हो।

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(उन्नत)

49मूर्तिकला-पाठ: NCERT का चित्र 4.32 और 4.33 देखिए। वास्तुकला, पेड़-पौधे, जानवर व लोगों के काम-धंधों को पहचानकर बताइए कि कौन-सा ग्रामीण और कौन-सा शहरी परिदृश्य है — और अपने प्रत्येक निर्णय का साक्ष्य दीजिए।

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(उन्नत — NCERT प्र. 7)

इ-3. परिकल्पना व प्रति-तथ्यात्मक चिंतन

50यदि आजीविक व लोकायत ग्रंथ बच जाते: इस अध्याय के कौन-से हिस्से बदल जाते? कम-से-कम तीन बिंदु दीजिए।

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(उन्नत)

51यदि साँची भी अमरावती की तरह बिखर जाता: आरंभिक बौद्ध धर्म के बारे में हमारी समझ में कौन-कौन से रिक्त स्थान रह जाते?

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(उन्नत)

52यदि बौद्ध साहित्य का अनुवाद फ़र्गुसन के समय हो चुका होता: क्या वे साँची को ‘वृक्ष और सर्प पूजा का केंद्र’ कहते? इससे अनुवाद की भूमिका के बारे में क्या पता चलता है?

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(उन्नत)

53भविष्य-कल्पना: 4000 ई. में कोई इतिहासकार आज के भारत की केवल इमारतों और मूर्तियों से हमारी धार्मिक-सांस्कृतिक दुनिया समझने का प्रयास करता है। वह क्या सही समझेगा, क्या गलत, और क्या उसे बिलकुल नहीं दिखेगा?

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(उन्नत — §11 व निष्कर्ष-अनुच्छेद पर)

इ-4. विचारों का संयोजन

54★‘परंपराओं का संवाद’ का सामान्य सिद्धांत: शालभंजिका, गजलक्ष्मी, सर्प, स्थानीय देवताओं का विष्णु-रूप में समावेश, और महायान में मुक्तिदाता की कल्पना — इन सबको जोड़कर बताइए कि धार्मिक परंपराएँ कैसे विकसित होती हैं। फिर इस सिद्धांत की एक सीमा भी बताइए।

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(उन्नत)

55‘नामकरण-जाल’ का संश्लेषण: अध्याय 1 का ‘पुरोहित-राजा’, अध्याय 3 का ‘राक्षस’ व ‘म्लेच्छ’, और अध्याय 4 का ‘हीनयान’ — चारों को जोड़कर एक सामान्य नियम बनाइए कि इतिहासकार को नामों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।

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(उन्नत)

56★चारों अध्यायों का संश्लेषण: “साक्ष्य का प्रकार बदलता गया — भौतिक → अभिलेखीय → साहित्यिक → दृश्य — पर इतिहासकार की समस्या नहीं बदली।” प्रत्येक अध्याय से दो-दो उदाहरण लेकर इस कथन का परीक्षण कीजिए।

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(उन्नत — सर्वोच्च स्तर)

57‘मौन का साक्ष्य’ की परिणति: अध्याय 2 (कलिंग-अभिलेख उड़ीसा में नहीं मिला), अध्याय 3 (संस्कृत पाठ निषादी पर मूक), और अध्याय 4 का निष्कर्ष (“बहुत से रीति-रिवाज… दर्ज नहीं किए गए”) — तीनों को जोड़कर बताइए कि किसी स्रोत की चुप्पी को इतिहासकार कैसे पढ़े।

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(उन्नत)

58साक्ष्य की चार भाषाएँ: एक ही ऐतिहासिक प्रश्न चुनिए (जैसे “सामान्य लोगों का जीवन कैसा था?”) और बताइए कि भौतिक, अभिलेखीय, साहित्यिक और दृश्य — चारों प्रकार के साक्ष्य उसका क्या-क्या उत्तर दे सकते हैं, और प्रत्येक की सीमा क्या है।

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(उन्नत)

भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक (Rubric)

स्तरजागरूकतासंवेदनशीलतासृजनात्मकता
प्रारंभिकतथ्य याद हैं, पर नए संदर्भ में लागू नहीं कर पाताकेवल एक दृष्टिकोण देखता हैप्रत्यक्ष/नकल-आधारित उत्तर
दक्षतथ्य + संकल्पना को नए उदाहरण पर लागू करता हैदोनों पक्ष प्रस्तुत करता है; भाषा संयतनया उदाहरण/संयोजन बनाता है
उन्नतसाक्ष्य से निष्कर्ष निकालता है और उसकी सीमा भी बताता हैअनेक परंपराओं को समान गंभीरता से देखता है; भाषा-संयम स्पष्टमौलिक परिकल्पना + आत्म-समीक्षा

शिक्षक-निर्देश

  • सुझाया भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30%।
  • ‘उन्नत’ प्रश्नों का एक ही उत्तर नहीं होता — मूल्यांकन तर्क की गुणवत्ता पर करें।
  • ★प्रश्न 55, 56, 57 व 58 चारों अध्यायों को जोड़ते हैं — ये वार्षिक परीक्षा के लिए सर्वोत्तम हैं और पूरे भाग-1 की समझ जाँचते हैं।
  • प्रश्न 42, 46, 47 व 49 उत्कृष्ट परियोजना कार्य बनते हैं। (प्रश्न 49 स्वयं NCERT का प्रश्न 7 है।)
  • ! भाग-आ में भाषा का संयम व सभी परंपराओं के प्रति समान आदर भी मूल्यांकन का अंग बनाइए — यही इस अध्याय में PARAKH की ‘संवेदनशीलता’ का मर्म है।

स्रोत