ढाँचा: भाग अ — जागरूकता (50%) | भाग आ — संवेदनशीलता (20%) | भाग इ — सृजनात्मकता (30%) | भाग ई — रूब्रिक प्रत्येक प्रश्न के साथ [कौशल] टैग तथा उत्तर-दिशा।
भाग अ — जागरूकता (Awareness)
1(केस-अध्ययन) 1665 ई. में एक गाँव पर सूखा पड़ा। जमा (निर्धारित राजस्व) पुरानी दर से माँगा गया। किसानों ने पंचायत को सामूहिक दरख़्वास्त दी; समझौता नहीं हुआ।
(क) NCERT के अनुसार अब किसानों के पास कौन-सा “बड़ा प्रभावी हथियार” बचा था, और यह प्रभावी क्यों था?
(ख) राज्य की किस व्यवस्था (जमा बनाम हासिल) में इस स्थिति का समाधान निहित था?
[अवधारणा-अनुप्रयोग]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) गाँव छोड़कर भाग जाना — ज़मीन सुलभ, श्रम की प्रतियोगिता; (ख) हासिल = वास्तविक वसूली — “स्थानीय हालात की वजह से कभी-कभी इतनी वसूली संभव नहीं”; औरंगज़ेब का 1665 का हुक्म — मौजूदात की जाँच कर “किफ़ायत व कल्याण” से जमा तय हो।
2(दावा-कारण)
अभिकथन (A): मुग़ल राज्य कपास और गन्ने जैसी फ़सलों की खेती को बढ़ावा देता था।
कारण (R): इन जिन्स-ए-कामिल फ़सलों से राज्य को ज़्यादा कर मिलता था।
उत्तर देखिए
सही उत्तर: (ब) दोनों सही; R, A की सही व्याख्या
3(दावा-कारण)
अभिकथन (A): हमें मुग़लकालीन महिलाओं की पंचायत-दरख़्वास्तों में उनके नाम नहीं मिलते।
कारण (R): महिलाएँ दरख़्वास्त देती ही नहीं थीं।
उत्तर देखिए
उत्तर: A सही, R ग़लत — महिलाएँ दरख़्वास्तें देती थीं (बेवफ़ाई-विरोध, अनदेखी-आरोप), पर उनका हवाला “मर्द की माँ, बहन या पत्नी” के रूप में दिया जाता था। (विस्तार-प्रश्न: यह अभिलेखन-प्रथा इतिहास-लेखन के लिए क्या समस्या पैदा करती है?)
4(डेटा-व्याख्या) आइन के आँकड़े: आगरा — 39 फ़सलें; दिल्ली — 43; बंगाल — केवल चावल की 50 किस्में। तथा: 1600–1700 के बीच आबादी +5 करोड़ (~33%)।
(क) फ़सल-विविधता के ये आँकड़े कृषि की किस प्रकृति की ओर संकेत करते हैं?
(ख) फ़सल-विविधता और आबादी-वृद्धि के बीच NCERT क्या संबंध देखती है?
[आँकड़ा-विश्लेषण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) बहु-फ़सली, लचीली, क्षेत्र-अनुकूलित खेती — 2-3 फ़सलें प्रति वर्ष; (ख) “कृषि उत्पादन के विविध और लचीले तरीक़ों का एक बड़ा नतीजा — आबादी धीरे-धीरे बढ़ने लगी” (भूखमरी-महामारी के बावजूद)।
5(वर्गीकरण) निम्न शब्दों को सही श्रेणी में रखिए — (भूमि-वर्ग / वसूली-विधि / अधिकारी / सामाजिक समूह)
पोलज • कणकुत • अमील-गुज़ार • हलालख़ोरान • चचर • लाँग बटाई • अमीन • मल्लाहज़ादे • बंजर • भाओली • दीवान • सदगोप
उत्तर देखिए
उत्तर: भूमि-वर्ग — पोलज, चचर, बंजर | वसूली-विधि — कणकुत, लाँग बटाई, भाओली | अधिकारी — अमील-गुज़ार, अमीन, दीवान | सामाजिक समूह — हलालख़ोरान, मल्लाहज़ादे, सदगोप।
6(स्रोत-मिलान) कथन
उत्तर देखिए
स्रोत जोड़िए:
(क) “एक लमहे में ही वीरान भी हो जाते हैं और बस भी जाते हैं” (ख) “कुल्हाड़ियों की आवाज़ सुनकर शेर डर गए” (ग) “पैसे के मुकाबले रुपये की क़ीमत बढ़ा देते हैं” (घ) “सारा सोना-चाँदी आख़िरकार यहीं पहुँच जाता है” (ङ) “खुशकिस्मती के इस गुलाब बाग को सींचने के लिए मैंने हौज़ बनाया”
विकल्प: बाबरनामा • चंडीमंगल • तैवर्नियर • कारेरी • अबुल फ़ज़्ल
उत्तर: (क)-बाबरनामा (ख)-चंडीमंगल (ग)-तैवर्नियर (घ)-कारेरी (ङ)-अबुल फ़ज़्ल।
7(मानचित्र-चिंतन) कारेरी के विवरण (स्रोत 8) के आधार पर विश्व-मानचित्र पर चाँदी के भारत पहुँचने के तीन अलग-अलग मार्ग तीरों से बनाइए और प्रत्येक पर एक पड़ाव-नगर लिखिए।
[स्थानिक-चित्रण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (1) अमेरिका → यूरोप → ऑटोमन/तुर्की → मोचा (लाल सागर) → भारत; (2) यूरोप → फ़ारस (बसरा, फ़ारस की खाड़ी) → भारत; (3) जापान (खानें) → डच जहाज़ → भारत; (+ पूर्वी व्यापार — पेगू, स्याम, सीलोन से वापसी में बहुमूल्य धातु)।
8(चित्र-विश्लेषण) चित्र 8.9 में शाहजहाँ नीलगाय का शिकार करते दिखाया गया है; NCERT कहती है कि चित्रकार ऐसे दृश्य डालते थे “जो सद्भावनापूर्ण शासन का संकेत देता था।”
(क) शिकार-अभियान को दरबारी विचारधारा ‘जनता से जुड़ने’ का साधन कैसे बताती थी?
(ख) यही जानकारी हमें किन स्रोतों से मिलती है, और इसमें क्या सावधानी चाहिए?
[दृश्य-साक्षरता + स्रोत-आलोचना]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) शिकार के बहाने कोने-कोने का दौरा; समस्याओं-शिकायतों पर व्यक्तिगत गौर; (ख) दरबारी इतिहासकारों से — “दरबारी इतिहासकारों की मानें तो…” — यह राज्य की आत्म-छवि है, स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
9(तुलनात्मक-जागरूकता) अध्याय 7 के अमर-नायक और इस अध्याय के ज़मींदार की तुलना कीजिए
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर-दिशा अमर-नायक — राय द्वारा दिए गए क्षेत्र, स्थानांतरण-योग्य पद; ज़मींदार — पुश्तैनी-स्थानीय हैसियत (जाति+ख़िदमत), सनद से मान्य, खरीदी-बेची जाने वाली ज़मींदारी; दोनों — कर-वसूली + निजी सेना; दोनों में राज्य के साथ सहयोग-तनाव का दोहरा रिश्ता।
10(अवधारणा-जाँच) “जजमानी व्यवस्था मुग़ल काल की सर्वव्यापी ग्रामीण व्यवस्था थी।” — इस कथन की NCERT-आधार पर जाँच कीजिए।
[तथ्य-शुद्धता]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा ग़लत सरलीकरण — ‘जजमानी’ शब्द 18वीं सदी के बंगाल-स्रोतों से (लोहार-बढ़ई-सुनार को “रोज़ का भत्ता और खाने के लिए नकदी”); NCERT स्पष्ट कहती है — यह शब्द “सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में बहुत इस्तेमाल नहीं होता था”; उस काल में अदायगी के कई रूप थे (फ़सल-हिस्सा, ज़मीन, मीरास/वतन, विनिमय, नकद)।
भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)
11(हाशिये की आवाज़) NCERT लिखती है — “हालाँकि खेती लायक ज़मीन की कमी नहीं थी, फिर भी कुछ जाति के लोगों को सिर्फ़ नीच समझे जाने वाले काम ही दिए जाते थे। इस तरह वे ग़रीब रहने के लिए मजबूर थे।”
(क) यह वाक्य ग़रीबी के किस कारण-सिद्धांत को उलट देता है? (“ग़रीब मेहनत नहीं करते” बनाम…)
(ख) पंचायत जैसी ‘न्याय-संस्था’ भी इस अन्याय में कैसे भागीदार थी? दो प्रमाण दीजिए।
[संरचनात्मक-अन्याय की समझ]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) ग़रीबी व्यक्तिगत दोष नहीं, सामाजिक संरचना (जाति) की मजबूरी थी — अवसर ही बंद थे; (ख) पंचायत में “नीच” कामगारों की जगह नहीं; पंचायत का काम ही जाति की हदें लागू करना था (निष्कासन-दंड, विवाह-निगरानी)।
12(दृष्टिकोण-विविधता) एक ही कर-वसूली को तीन आवाज़ों में लिखिए (प्रत्येक 60-80 शब्द):
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ग) पंचायत का बुज़ुर्ग — जो समझौते की कोशिश कर रहा है [बहु-परिप्रेक्ष्य]
मूल्यांकन-बिंदु हर स्वर में उसकी संस्थागत स्थिति झलके; तथ्य NCERT-सम्मत (जमा-हासिल, ख़ातिरदारी-ख़र्च, रिवाजी हक़); तीसरे स्वर में “न्यूनतम बुनियादी साधन” की भाषा आए तो उत्कृष्ट।
13(जेंडर-संवेदनशीलता) अध्याय दो विपरीत तथ्य देता है — (i) महिलाएँ “महत्त्वपूर्ण संसाधन” मानी जाती थीं, (ii) फिर भी बेवफ़ाई के शक पर ही उन्हें भयानक दंड मिल सकते थे और दरख़्वास्तों में उनके नाम तक दर्ज नहीं होते थे।
(क) ‘संसाधन’ मानना सम्मान का पर्याय क्यों नहीं है? इस अध्याय के प्रमाणों से समझाइए।
(ख) फिर भी महिलाओं की कर्तृत्व-शक्ति (Agency) के तीन प्रमाण अध्याय से दीजिए।
[जेंडर-विश्लेषण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) संसाधन = उपयोग व नियंत्रण की वस्तु — प्रजनन-शक्ति पर काबू, मर्द-मुखिया व्यवस्था; (ख) पंचायत में दरख़्वास्तें देना; पंजाब में ज़मीन-बाज़ार में विक्रेता; ज़मींदारी सँभालना (राजशाही की कर्ता-धर्ता स्त्री); बाज़ारों-नियोक्ता घरों में श्रम।
14(शब्द की राजनीति) ‘जंगली’ शब्द — तब का अर्थ (जंगल से गुज़ारा) बनाम आज का प्रचलित अर्थ (असभ्य)।
(क) एक ही शब्द के अर्थ का यह पतन किन ऐतिहासिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है?
(ख) आज हम वनवासी समुदायों के लिए कौन-से शब्द प्रयोग करते हैं और क्यों? (संविधान/क़ानून की शब्दावली — अनुसूचित जनजाति, वनवासी)
[भाषा-संवेदनशीलता]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा (क) बसे हुए कृषि-समाज व राज्य की दृष्टि से जंगल = मवास/उलट-फेर का इलाका → जंगल के लोगों का ‘अन्य’ बनना; औपनिवेशिक वर्गीकरणों ने इसे और कठोर किया; (ख) सम्मानजनक-क़ानूनी शब्दावली का महत्त्व; शब्द बदलने से दृष्टि बदलने की शुरुआत होती है।
15(सहयोगात्मक बहस) दो दल —
पक्ष: “मुग़ल भू-राजस्व व्यवस्था किसान-हितैषी लचीली व्यवस्था थी।” (प्रमाण: नक़द/जीन्स विकल्प, भूमि-वर्ग-आधारित दरें, 1665 का ‘कल्याण’-हुक्म, बटाई की रज़ामंदी)
विपक्ष: “यह अधिकतम निचोड़ने की व्यवस्था थी।” (प्रमाण: “राज्य अपना हिस्सा ज़्यादा से ज़्यादा रखने की कोशिश करता था”, ज़बरन उगाही की दरख़्वास्तें, भागते किसान, भ्रष्ट मंडल)
अंत में संयुक्त निष्कर्ष-अनुच्छेद।
[संवाद-कौशल]
भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)
16(कल्पनाशील पुनर्रचना) एक पाहि-काश्त किसान की डायरी के तीन पन्ने लिखिए — (1) अपने पुराने गाँव में अत्यधिक कर की माँग वाला दिन, (2) पंचायत में सामूहिक दरख़्वास्त और असफल समझौते का दिन, (3) नये गाँव में पहली बुवाई का दिन।
शर्त: कम से कम छह NCERT-तथ्य (शब्दावली सहित — जमा, मुक़द्दम, रिवाजी हक़ आदि) सही संदर्भ में आएँ; काल-दोष (मोबाइल, अंग्रेज़ी-मास आदि) न हों।
[ऐतिहासिक कल्पना]
17(डिज़ाइन-चुनौती) आपको “मुग़लकालीन गाँव” का एक संग्रहालय-मॉडल (डायोरामा) बनाना है।
(क) मॉडल में आठ अनिवार्य तत्त्व चुनिए — प्रत्येक के लिए NCERT-आधार बताइए (जैसे: सराफ़ की दुकान — तैवर्नियर; हदों पर काँटों के निशान — §1.2; मंडल की बैठक; रहट…)
(ख) मॉडल में एक जानबूझकर छोड़ी गई जगह रखिए जिस पर पट्टिका लगे — “यहाँ उन लोगों का घर था जिन्हें गाँव की हदों के बाहर रखा गया।” — समझाइए कि यह खाली जगह क्या सिखाती है।
[डिज़ाइन-चिंतन + समावेश]
18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि नयी दुनिया की चाँदी भारत न आती…” — मुग़ल अर्थव्यवस्था के तीन पहलुओं (नकदी-कर, सिक्का-ढलाई, निर्यात-व्यापार) पर संभावित असर लिखिए; प्रत्येक को अध्याय के वास्तविक तथ्य से जोड़िए।
[परिकल्पना-निर्माण]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा चाँदी-स्रोतहीन भारत में मुद्रा-संकुचन → नकदी-कर कठिन → जीन्स-वसूली पर निर्भरता बढ़ती; ढलाई-विस्तार रुकता; निर्यात वस्तु-विनिमय पर लौटता; (जोड़ — “भारत के लिए अच्छा था क्योंकि यहाँ चाँदी के प्राकृतिक संसाधन नहीं थे”)।
19(विचार-संयोजन) चंडीमंगल का कालकेतु (जंगल साफ़ कर राज्य बसाता नायक) और आज का विकास-विस्थापन विमर्श (बाँध/खनन से वन-समुदायों का विस्थापन) — दोनों को जोड़ते हुए 150 शब्दों की टिप्पणी लिखिए: “जंगल किसके लिए ‘खाली’ होता है?”
[अतीत-वर्तमान संवाद]
उत्तर देखिए
मूल्यांकन-बिंदु कविता में जंगल ‘साम्राज्य की स्थापना’ के लिए खाली कराया गया — पर वहाँ पहले से जीवन था (शेर ‘भाग निकले’); आज की समानता विद्यार्थी स्वयं खोजे; उपदेश नहीं, विश्लेषण।
20(भूमिका-लेखन) अबुल फ़ज़्ल आज के युग में एक ‘डेटा-वैज्ञानिक’ होता? — स्रोत 9 की उसकी छह विधियों को आधुनिक शोध-शब्दावली (प्राथमिक स्रोत, साक्षात्कार, अभिलेखागार, सत्यापन/क्रॉस-चेकिंग, संशोधन/ड्राफ़्ट) से मिलाइए और 100 शब्दों में तय कीजिए — उसकी सबसे बड़ी आधुनिक खूबी और सबसे बड़ी अ-आधुनिक सीमा क्या थी।
[अवधारणा-अनुवाद]
उत्तर देखिए
उत्तर-दिशा खूबी — बहु-स्रोत सत्यापन, पाँच ड्राफ़्ट, अंक+शब्द दोहराव; सीमा — वित्तपोषक ही विषय था (अकबर) — आज इसे ‘हितों का टकराव’ कहेंगे।
21(संक्षिप्त सृजन) आइन की एक ‘सरकार-तालिका’ स्वयं बनाइए — अपने ज़िले/तहसील के लिए आठ खानों (परगनात, क़िला…, ज़मींदार-फ़ौज) की तर्ज़ पर आज के आठ खाने प्रस्तावित कीजिए (जैसे: तहसील, थाना, नपी भूमि, राजस्व, अनुदान…)। कौन-सा खाना आज अनावश्यक होगा और क्यों?
[संरचना-हस्तांतरण]
भाग ई — मूल्यांकन रूब्रिक
| आयाम | प्रारंभिक (1) | दक्ष (2) | उन्नत (3) |
|---|---|---|---|
| जागरूकता | शब्दावली में भ्रम (जमा/हासिल, खुद/पाहि) | शब्दावली सही; स्रोत-कथन जोड़ लेता है | आँकड़ों से तर्क बनाता है; स्रोत की स्थिति (दरबारी/यात्री/काव्य) पहचान कर सावधानी बरतता है |
| संवेदनशीलता | जाति-जेंडर प्रश्नों पर सपाट/उपदेशात्मक | संरचनात्मक कारण पहचानता है | बहु-स्वर लेखन; हाशिये की चुप्पी को साक्ष्य-समस्या के रूप में देखता है; भाषा शालीन-विश्लेषणात्मक |
| सृजनात्मकता | कल्पना तथ्यों से कटी; काल-दोष | तथ्य-सम्मत, ढाँचाबद्ध | कल्पना में स्रोत-चेतना बुनी हुई; अतीत-वर्तमान सेतु सुसंगत |
भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30%
शिक्षक-संकेत: प्रश्न 2, 3, 5, 6 लिखित परीक्षा-योग्य; 12, 15 समूह-कार्य; 16, 17, 21 पोर्टफोलियो। सृजनात्मक उत्तरों में न्यूनतम 5-6 सही NCERT-तथ्य अनिवार्य।