Chapter 1पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

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NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6), परिचय और अध्याय 1

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कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन) · पृष्ठ — 1 से 26

यह पन्ना किसलिए — किताब हाथ में लेकर पढ़ाते समय साथ रखने के लिए। हर कार्ड किताब के कुछ पन्नों का है: उन पन्नों की ज़रूरी पंक्तियाँ, उनके चित्र कक्षा में कैसे खोलें, और बच्चे कहाँ अटकते हैं। कार्ड के ऊपर लिखा है कि वह पाठ योजना के किस कालांश का है।

सारे पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं; हर कार्ड के शीर्षक में उसके पृष्ठ लिखे हैं। उद्धरण-चिह्न सिर्फ़ किताब के अपने शब्दों पर लगे हैं, उसी वर्तनी में जो किताब में छपी है। जहाँ किताब कहती है या किताब बताती है जैसे शब्दों के बाद उद्धरण-चिह्न नहीं, वहाँ किताब की बात हमारे शब्दों में है। बच्चों से पूछने के तिरछे छपे सवाल, चित्रों पर काम के क़दम और बच्चे यहाँ अटकते हैं वाली बातें हमारी ओर से हैं; जो गतिविधि किताब की नहीं, उसके आगे हमारी ओर से अलग से लिखा है। गतिविधियों और प्रश्नावली के उत्तर, परिभाषाएँ और संख्याओं की तालिका शिक्षक संदर्शिका में हैं; यहाँ उनके लिंक हैं, ताकि दोनों पन्नों में दो अलग उत्तर न हों।

पाठ योजना · शिक्षक संदर्शिका · स्लाइड का पाठ · इंटरैक्टिव अध्याय · रिवीजन नोट्स

अध्याय के कई चित्र हमने दोबारा बनाए हैं; वे रिवीजन नोट्स और स्लाइड के पाठ में हैं। नीचे के कार्ड किताब के अपने छपे चित्रों पर काम करवाते हैं।

किताब का परिचय, अध्याय से पहले

पृष्ठ 1–2 — पूरी किताब का नक्शा, और एक चित्र से उठते सवाल

पाठ योजना के छह कालांश पृष्ठ 7 से शुरू होते हैं; परिचय के ये छह पन्ने किसी कालांश में नहीं हैं। हमारी ओर से सुझाव: सत्र के पहले दिन, अध्याय 1 शुरू करने से पहले, एक कालांश इन पर दीजिए।

पाँच विषयों वाला चित्र। बीच में सामाजिक विज्ञान है और उसके चारों ओर पाँच विषय, हर विषय के साथ उसके अध्यायों के नाम। बच्चों से पहले यह पूछिए: हमारा पहला अध्याय, “पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति”, किस विषय में है? उस विषय में और कौन-से अध्याय हैं? फिर हर विषय का नाम एक-एक बच्चे से पढ़वाइए।

पहाड़, झील और सड़क वाला चित्र। चित्र में पहाड़, झील, एक छोटा घर और सड़क हैं। किताब पूछती है: “झील में जल कहाँ से आ रहा है?” और “सड़क का निर्माण किसने एवं क्यों किया?” फिर कहती है: “अपने उत्तरों को लिखिए एवं अपने साथियों के साथ इस पर चर्चा कीजिए।” बच्चे पहले लिखें, फिर बोलें; लिखने का समय मत काटिए।

हमारी ओर से — सवालों को विषयों से जोड़िए। बॉक्स के हर सवाल के आगे बच्चे पाँच विषयों वाले चित्र से उस विषय का नाम लिखें जिससे सवाल मेल खाता है। बॉक्स के नीचे किताब ख़ुद यही पूछती है: “ऊपर दिए गए हमारे प्रश्न सामाजिक विज्ञान से किस प्रकार संबंधित है?” सही-ग़लत मत ठहराइए; एक सवाल दो विषयों का भी हो सकता है।

पृष्ठ 3–6 — सामाजिक विज्ञान क्या है, और यह किताब कैसे पढ़ें

हमारा समय। किताब कहती है: “हम असाधारण संभावनाओं के युग में असामान्य चुनौतियों के साथ जीवन-यापन कर रहे हैं।” बच्चों से दोनों तरफ़ के एक-एक उदाहरण अपने आसपास से पूछिए: कोई नई सुविधा, और कोई नई मुश्किल।

उपविषयों के नाम। भूगोल, इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र जैसे कई नाम एक साथ आते हैं, और सूची के ठीक बाद किताब कहती है: “इन शब्दों से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है!” फिर: “इसकी जगह हमने पाँच प्रमुख विषयों का उपयोग किया है।” यहाँ पृष्ठ 1 का पाँच विषयों वाला चित्र फिर दिखा दीजिए।

पहले विषय का सवाल। हमारा अध्याय पहले विषय में है, और किताब उसी के बारे में पूछती है: “यह विषय महत्वपूर्ण क्यों है, जबकि हम मोबाइल पर शानदार मानचित्र प्राप्त कर सकते हैं?” हमारी ओर से: यह सवाल बच्चों से पूछिए, उनके उत्तर चार्ट के कोने में लिख लीजिए, और अध्याय पूरा होने पर उन पर लौटिए।

सही प्रश्न पूछना। किताब कहती है: “सामाजिक विज्ञान भी सही प्रश्न पूछने की कला के विषय से संबंधित है।” किताब यह भी बताती है कि हर अध्याय की शुरुआत ‘महत्वपूर्ण प्रश्न’ से की गई है। यहीं बच्चों को पृष्ठ 7 खुलवाकर पहले अध्याय के तीन प्रश्न दिखा दीजिए।

विषयों का मेल। किताब बताती है कि भूगोल के अध्यायों में शतरंज का खेल और कुछ प्राचीन तमिल कविताएँ बच्चों को रुचिकर लगेंगी। पृष्ठ 12 का शतरंज का पटल अभी दिखा दीजिए, और पूछिए: भूगोल की किताब में शतरंज क्यों होगा? उत्तर कालांश 3 में मिलेगा। विषयों को मिलाकर पढ़ने के पक्ष में किताब का अपना सवाल है: “जब जीवन अनगिनत तत्वों का मिश्रण करता है, तो हमें क्यों नहीं करना चाहिए?”

किताब के साथ, पन्ना-दर-पन्ना

पृष्ठ 7–8 — आर्यभट्ट, तीन प्रश्न, और एक छोटा नगर

कालांश 1 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: नक्शा खोलिए, ग्लोब घुमाइए, घड़ी चलाइए

अध्याय कहाँ से शुरू होता है। पहली पंक्ति आर्यभट्ट की है:

“पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है। यह सभी स्थलीय और जलीय प्राणियों से घिरी हुई है।”

नाम के साथ किताब “लगभग 500 सा.सं.” लिखती है। पूछिए: आर्यभट्ट ने पृथ्वी को किस आकार का बताया? यही बात पृष्ठ 12 पर लौटेगी, जब पृथ्वी को कागज़ पर उतारने की मुश्किल आएगी।

पुराना विश्व मानचित्र। अध्याय के पहले पन्ने के चित्र में दुनिया दो बड़े वृत्तों में बँटी दिखती है। पूछिए: पृथ्वी तो एक गोला है; यह नक्शा उसे कागज़ पर दो वृत्तों में क्यों दिखा रहा है? अभी उत्तर मत दीजिए; यह सवाल कालांश 2 में संतरे के छिलके से खुलेगा।

तीन महत्वपूर्ण प्रश्न। अध्याय की शुरुआत का बॉक्स पूरे अध्याय का नक्शा है: मानचित्र और उसके घटक; निर्देशांक, अक्षांश और देशांतर; और देशांतर से स्थानीय और मानक समय।

हमारी ओर से — तीनों प्रश्न चार्ट पेपर पर। तीनों प्रश्न चार्ट पेपर पर लिखकर दीवार पर लगा दीजिए; बोर्ड पर लिखा अगले दिन तक नहीं बचेगा। हर कालांश के अंत में पूछिए: आज किस प्रश्न का कौन-सा हिस्सा खुला? कालांश 6 में किताब के सार के चार बिंदु इन्हीं तीन प्रश्नों के नीचे लगेंगे।

चित्र 1.1, एक काल्पनिक लघु नगर। किताब पूछती है कि आप रेलवे स्टेशन पर उतरे हैं और बैंक जाना है, तो किस मार्ग से जाएँगे; कोई दूसरा मार्ग है या नहीं; और बैंक से बाज़ार कैसे पहुँचेंगे। वह उद्यान, विद्यालय और संग्रहालय ढूँढ़ने को भी कहती है।

चित्र 1.1 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)।

  1. पहले ऊपर दाएँ कोने के चार तीर दिखाइए और उन पर छपे दिशाओं के नाम पढ़वाइए। किताब कहती है कि ये तीर कुछ ख़ास दिशाएँ बताते हैं, और यह बात आगे खुलेगी; पूरी बात पृष्ठ 10 पर है।
  2. एक बच्चा उँगली से स्टेशन से बैंक तक का रास्ता बताए, दूसरा कोई और रास्ता।
  3. फिर पूछिए: इस चित्र में सड़कें और झील किस ओर से देखी हुई लगती हैं? और भवन?

बच्चे यहाँ अटकते हैं। इस चित्र में सड़कें और झील ऊपर से देखी हुई बनी हैं, पर भवन सामने से देखे हुए छोटे चित्रों जैसे। इसलिए कुछ बच्चे पूरे मानचित्र को सामने से खींची तस्वीर समझ लेते हैं। तीसरे सवाल पर रुकिए। पृष्ठ 9 पर किताब कहती है: “मानचित्र में आप सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे आप उसे ऊपर से देखते हैं।” भवनों के इन छोटे चित्रों को किताब पृष्ठ 11 पर “लघु आरेख (ड्राइंग्स)” कहती है।

पृष्ठ 9–11 — मानचित्र के तीन घटक

कालांश 1 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: मानचित्र: दूरी, दिशा, प्रतीक

पन्ने की धुरी। “किसी भी मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं— दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।” किताब यह भी कहती है कि “मानचित्र अनेक प्रकार के होते हैं”, और उनमें से तीन के उदाहरण देती है; और “एटलस (मानचित्रावली) मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।” इन शब्दों के अर्थ संदर्शिका के मुख्य शब्द में हैं।

आगे के चित्र अभी से खोलकर रखिए। मानचित्रों के प्रकार बताते हुए किताब अध्याय 5 के चित्र 5.2 और आगे के चित्र 6.3 और 8.1 की ओर भेजती है। चित्र 5.2 पर स्केल भी समझना है और प्रश्नावली का पहला प्रश्न भी, इसलिए उस पन्ने में पर्ची लगा दीजिए। बाक़ी दो का अभी नाम भर बताइए।

चित्र 1.1 पर किताब के तीन सवाल, और विद्यालय का मानचित्र। पहले तीन सवाल पूरी कक्षा साथ करे; फिर तीन-चार बच्चों के समूह अपने विद्यालय का मानचित्र बनाएँ, जैसा किताब कहती है। तुलना करते समय क्या देखें, यह संदर्शिका की गतिविधियों के उत्तर में है। अलग-अलग समूहों ने एक ही चीज़ के लिए अलग-अलग चिह्न बनाए हों, तो उन्हें मिटवाइए मत; प्रतीक चिह्नों की बात पर यही अंतर काम आएगा।

दूरी। लघु नगर के लिए किताब मानकर चलती है कि 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर; चित्र 5.2 के लिए वह बताती है कि 2.5 से.मी. = 500 किलोमीटर। चित्र 5.2 खोलकर नीचे बाएँ कोने का रूलर जैसा स्केल दिखाइए।

बच्चे यहाँ अटकते हैं। 2.5 से.मी. = 500 कि.मी. पढ़कर कई बच्चे मान लेते हैं कि 1 से.मी. भी 500 कि.मी. का है। बोर्ड पर दोनों स्केल लिखकर पूछिए: 1 से.मी. कितने का? हिसाब संदर्शिका के प्रश्न 1 में है। खेल-मैदान वाली गतिविधि (40 मीटर × 30 मीटर, 1 सेंटीमीटर = 10 मीटर) रूलर से कॉपी में करवाइए। किताब विकर्ण की लंबाई भी पूछती है, इसलिए रेखाचित्र नाप से ही बनवाइए, अंदाज़े से नहीं।

दिशा-चक्र। चक्र पर उँगली रखकर पढ़वाइए: उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, और इनके बीच की चार मध्यवर्ती दिशाएँ। फिर किताब की यह बात दिखाइए: “अधिकतर मानचित्रों में ‘उ.’ अक्षर से अंकित एक तीर होता है, जो उत्तर दिशा को इंगित करता है।” अब चित्र 1.1 के ऊपर दाएँ कोने के तीर फिर देखिए।

हमारी ओर से — कक्षा में खड़े होकर। सब बच्चे खड़े होकर उत्तर की ओर इशारा करें। अलग-अलग हाथ उठें, तो पहले विद्यालय के मुख्य द्वार की दिशा आप बता दीजिए, फिर दोबारा करवाइए। ज़मीन पर चॉक से आठ दिशाओं वाला चक्र बनवाइए, बीच में एक बच्चा खड़ा हो और बाक़ी बताएँ कि उसके उत्तर-पूर्व में कौन है।

चित्र 1.1 पर सही-ग़लत। हमारी ओर से एक तरीका: हर कथन में दूसरी जगह पर खड़े होकर पहली को देखिए; बच्चे यहीं उलटा पढ़ते हैं। उत्तर और दो लगभग-सही कथनों पर बातचीत संदर्शिका की गतिविधियों के उत्तर में है।

प्रतीक चिह्न। किताब कहती है कि लघु नगर के मानचित्र में भवनों के छोटे चित्र हैं, पर बड़े नगर या देश के मानचित्र पर इन सबके लिए जगह नहीं होगी; इसलिए चिह्नों का उपयोग होता है। और: “सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने भारत (या भारत के भागों) के मानचित्रों के लिए प्रतीक चिह्नों का एक संकलन निर्धारित किया है।”

चित्र 1.2 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। पहले चिह्नों के नाम हथेली से ढककर बच्चों से अंदाज़ा लगवाइए कि कौन-सा चिह्न किस चीज़ का है; फिर नाम खोलकर मिलवाइए। रंग अलग-अलग पूछिए: नदी और तालाब किस रंग में हैं? कुआँ और नहर किस रंग में? हरे रंग में कौन-से चिह्न हैं, और लाल में कौन-से? बच्चे देखेंगे कि पानी की हर चीज़ नीली नहीं छपी; कुआँ और नहर काले हैं। रंगों वाली यह बात प्रश्नावली के प्रश्न 3 में काम आएगी। विद्यालय के मानचित्र में समूहों ने अपने-अपने चिह्न बनाए थे; अब पूछिए कि सबके लिए एक जैसे चिह्न क्यों ज़रूरी हैं।

अपने स्थान या गाँव का मानचित्र। किताब कहती है कि उसमें चतुर्दिश दिखाएँ और चित्र 1.2 के कुछ चिह्न लगाएँ। हमारी ओर से: इसे गृहकार्य में दीजिए।

पृष्ठ 12 — संतरे का छिलका और ग्लोब

कालांश 2 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: गोल पृथ्वी, चपटा कागज़

मुश्किल क्या है। “पृथ्वी का मानचित्रण कुछ अधिक कठिन है क्योंकि हमारे ग्रह का आकार चपटा नहीं है।” किताब पृथ्वी को “लगभग गोलाकार” कहती है, क्योंकि वह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है; आगे वह उसे व्यावहारिक दृष्टि से गोलाकार मानकर चलती है।

संतरे वाली गतिविधि। दो-तीन संतरे कक्षा में लाइए। किताब के कहे अनुसार छिलका तीन या चार टुकड़ों में उतरवाइए और मेज़ पर चपटा बिछवाइए। पहले अंदाज़ा लगवाइए कि बिछेगा या नहीं, फिर करके देखिए। किताब का निष्कर्ष: “किनारों को तोड़े बिना आप यह नहीं कर सकते।” फिर पृष्ठ 7 का दो वृत्तों वाला नक्शा दिखाकर पूछिए (हमारी ओर से): क्या यह नक्शा भी पृथ्वी को छिलके की तरह खोलकर बिछाने जैसा है?

ग्लोब। किताब बताती है कि ग्लोब आम तौर पर धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड से बनता है, और वह पृथ्वी का ही नहीं, चंद्रमा, मंगल ग्रह, तारों और तारा-मंडल आदि का भी हो सकता है। किताब की बात: ग्लोब “किसी समतल मानचित्र की तुलना में पृथ्वी के भूगोल का बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।”

ग्लोब देखते दो बच्चे। किताब के इस चित्र में ग्लोब पर महाद्वीप दिखते हैं, रेखाएँ साफ़ नहीं। इसलिए कक्षा का ग्लोब सामने रखिए और पूछिए: इस ग्लोब पर कौन-सी रेखाएँ दिख रही हैं? कुछ आड़ी और कुछ खड़ी क्यों हैं? रेखाओं के नाम अभी मत बताइए; वे कालांश 3 और 4 में आएँगे।

हमारी ओर से — एक खुला सवाल। ग्लोब बेहतर है, तो एटलस में मानचित्र क्यों होते हैं? किताब इसका उत्तर इस पन्ने पर नहीं देती; बच्चों से अपने कारण निकलवाइए (थैले में रखना, बहुत-सी बारीक बातें दिखाना), और कोई एक उत्तर सही मत ठहराइए।

पृष्ठ 12–13 — बाज़ार की दुकान और शतरंज का पटल

कालांश 3 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: निर्देशांक

बाज़ार का संदेश। किताब के बाज़ार में “सीधी पंक्तियों में समान आकार की दुकानें” हैं। आप एक स्टेशनरी की दुकान पर मित्र से मिलना चाहते हैं, पर मित्र नहीं जानता कि दुकान कहाँ है; इसलिए आप उसे यह संदेश देते हैं: “प्रवेश द्वार से 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान पर सायं 6 बजे मुझसे मिलें।” पूछिए: इस संदेश में दुकान का पता कौन-सी दो संख्याएँ बता रही हैं? (सायं 6 बजे समय है, पता नहीं; कुछ बच्चे तीनों संख्याएँ गिन लेते हैं।)

हमारी ओर से — कक्षा की बेंचें। कहिए: तीसरी पंक्ति का चौथा बच्चा खड़ा हो। फिर उलटकर: चौथी पंक्ति का तीसरा बच्चा। दो अलग बच्चे खड़े होंगे। इससे बच्चे ख़ुद देख लेते हैं कि दो संख्याओं का क्रम भी पते का हिस्सा है।

शतरंज के पटल पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। शतरंज न जानने वाले बच्चों को खेल के नियम नहीं चाहिए; यह पटल सिर्फ़ खानों के पते का उदाहरण है।

  1. ऊपर और नीचे के किनारों पर ‘क’ से ‘ज’ तक के अक्षर, और दोनों ओर 1 से 8 तक के अंक दिखाइए।
  2. ‘घ’ वाला स्तंभ और 2 वाली पंक्ति उँगली से मिलवाइए; यही ‘घ’ 2 है। पूछिए: इस खाने में अब कोई मोहरा क्यों नहीं है?
  3. किताब की चाल पढ़वाइए: “प्यादा ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4 की ओर आगे बढ़ा है।” फिर बच्चे ‘घ’ 4 पर प्यादा ढूँढ़ें।

बच्चे यहाँ अटकते हैं। कोई बच्चा पहले अंक और फिर अक्षर लिखे, तो उसे किताब का क्रम दिखाइए: पहले अक्षर, फिर अंक। काले पक्ष की चाल वाली गतिविधि के कई सही उत्तर हैं; एक नमूना और जाँचने की बात संदर्शिका की गतिविधियों के उत्तर में है।

दोनों उदाहरण एक विचार। दुकान और शतरंज के बाद किताब कहती है: “इन दो उदाहरणों में प्रयुक्त प्रणाली को निर्देशांक प्रणाली कहा जा सकता है।” और मानचित्र पर किसी स्थान की स्थिति इसी प्रणाली से तय होती है। इस कड़ी को जल्दी मत निपटाइए: दो संख्याओं वाला पता समझ में आ जाए, तो अक्षांश और देशांतर उसी पते की दो संख्याएँ बन जाते हैं।

पृष्ठ 13–14 — अक्षांश: भूमध्य रेखा से दूरी

कालांश 3 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: अक्षांश और देशांतर

ग्लोब हाथ में लेकर। ग्लोब घुमाइए और किताब की पंक्ति पढ़वाइए: “जब यह घुमाया जाता है तो ऊपरी और निचले स्तर पर स्थित बिंदु दो ध्रुव हैं।” फिर किताब की कल्पना करवाइए: भूमध्य रेखा पर खड़े होकर किसी एक ध्रुव की ओर चलें, तो भूमध्य रेखा से दूरी बढ़ती जाती है। “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।”

चित्र 1.3 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। चित्र में दो रेखाएँ लाल हैं, भूमध्य रेखा और प्रमुख याम्योत्तर; बाक़ी नीली। पहले लाल भूमध्य रेखा पर एक किनारे से दूसरे किनारे तक उँगली चलवाइए, फिर 60° उ. वाली रेखा पर। पूछिए: कौन-सी रेखा छोटी दिखती है? सबसे ऊपर कितने अंश लिखा है, और वहाँ क्या है? फिर पूछिए कि भूमध्य रेखा किस महाद्वीप के ऊपर से जाती दिख रही है। प्रमुख याम्योत्तर के साथ लगे तीर “उत्तरी अक्षांश” और “दक्षिणी अक्षांश” भी पढ़वाइए।

हमारी ओर से — धागा। ग्लोब पर भूमध्य रेखा के साथ धागा लपेटकर काटिए, फिर 60° उ. के साथ। दोनों धागे साथ रखकर दिखाइए। किताब भी कहती है कि उत्तर या दक्षिण की ओर बढ़ने पर अक्षांश के वृत्त छोटे होते जाते हैं; प्रश्नावली के प्रश्न 7 का पहला कथन इसी पर है।

जलवायु। किताब कहती है: “भूमध्य रेखा के चारों ओर जलवायु सामान्यतः गरम (इसे उष्ण भी कहा जाता है) होती है।” ध्रुवों की ओर बढ़ने पर वह जलवायु को शीतोष्ण बताती है, और ध्रुवों के निकट “शीत (ठंडी)”। हमारी ओर से: “सामान्यतः” शब्द पर ध्यान दिलाइए; किताब इसे हर जगह का पक्का नियम नहीं बता रही। ऐसा क्यों होता है, यह किताब विज्ञान पर छोड़ती है (“आप विज्ञान में पढ़ेंगे कि ऐसा क्यों होता है”); बच्चे पूछें तो यही कहिए।

बच्चे यहाँ अटकते हैं। अक्षांश की रेखा पूर्व से पश्चिम चलती है, पर नापती है उत्तर या दक्षिण की दूरी; बच्चे इन दोनों को एक कर देते हैं। यह और ऐसी बाक़ी भूलें संदर्शिका की दस आम भूलें में हैं; पहली दो इन्हीं पन्नों की हैं।

पृष्ठ 14–16 — देशांतर, ग्रिनिच और ग्रिड

कालांश 4 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: अक्षांश और देशांतर

किताब की कल्पना। उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तक जाना है। किताब कहती है: “आप पाएँगे कि यूरोप और अफ्रीका के मार्ग से जाने की जगह आप एशिया के मार्ग से भी जा सकते हैं और दूरी एक समान होगी।” ग्लोब पर दोनों रास्ते उँगली से दिखाइए। ऐसी रेखाओं के बारे में किताब कहती है: “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।” ध्रुव से ध्रुव तक उँगली चलवाइए; बच्चे देखेंगे कि उँगली आधा चक्कर ही लगाती है।

ग्रिनिच। देशांतर नापने के लिए एक संदर्भ रेखा चाहिए। किताब बताती है: “वर्ष 1884 में कुछ देशों ने तय किया कि इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरने वाली याम्योत्तर, प्रमुख याम्योत्तर के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक मानी जाएगी।” इसे 0° देशांतर लिखा जाता है, और पश्चिम हो या पूर्व, मान 0° से 180° तक बढ़ता है। किताब के उदाहरण पढ़वाइए: न्यूयॉर्क 74° प., दिल्ली 77° पू., टोक्यो 140° पू.। फिर पूछिए: इनमें से कौन ग्रिनिच के पश्चिम में है?

180° वाला बॉक्स। “180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर हैं। इसलिए इस देशांतर को प. या पू. न लिखकर 180° ही लिखा जाता है।” ग्लोब पर ग्रिनिच के ठीक पीछे की रेखा दिखाइए: पूर्व से चलें या पश्चिम से, उँगलियाँ यहीं मिलती हैं।

दो निर्देशांक। “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।” किताब का उदाहरण है “दिल्ली 29° उ. अक्षांश और 77° पू. देशांतर पर स्थित है”, और साथ में वह ख़ुद लिखती है: “यद्यपि यह डिग्री आनुमानिक रूप से पूर्ण है, किंतु सटीक नहीं है।” बाज़ार के संदेश से जोड़िए: वहाँ पंक्ति और दुकान थीं; यहाँ वे दो संख्याएँ कौन-सी हैं? चित्र 1.3 की नीली रेखाएँ मिलकर ग्रिड बनाती हैं, जिन्हें किताब ग्रिड रेखाएँ भी कहती है। उसी चित्र के तीर “पश्चिमी देशांतर” और “पूर्वी देशांतर” पढ़वाइए; फिर बच्चे ग्रिड का एक खाना चुनें और उसके चारों ओर की रेखाओं के अंश पढ़ें।

चित्र 1.4 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। इसमें तीन ग्लोब हैं। पहले पर ग्रिनिच याम्योत्तर और भूमध्य रेखा के नाम पढ़वाइए; दूसरा ग्लोब पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में कटा है, तीसरा उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में। पूछिए: पहले ग्लोब की कौन-सी रेखा दूसरे ग्लोब को काट रही है, और कौन-सी तीसरे को? फिर: दिल्ली 29° उ., 77° पू. पर है; तो भारत किन दो गोलार्धों में है?

मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर और पेरिस वाली गतिविधि के लिए ग्लोब या मानचित्रावली चाहिए, जिस पर अक्षांश और देशांतर साफ़ अंकित हों। पढ़ने का तरीका संदर्शिका की गतिविधियों के उत्तर में है; अलग एटलस में एक-दो अंश का फ़र्क़ आए, तो उसे ग़लत मत मानिए।

टेबल लैंप। इन्हीं पन्नों में किताब टेबल लैंप को सूर्य मानकर ग्लोब घुमाने को कहती है, ताकि दिखे कि कहीं प्रात:काल है, कहीं मध्याह्न, सायं या रात्रि। यह हिस्सा समय वाले कालांश 5 में कीजिए; नीचे पृष्ठ 19–21 का कार्ड देखिए।

पृष्ठ 16–18 — उज्जयिनी की मध्य रेखा, और भारत का फैलाव

कालांश 4 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: उज्जयिनी की मध्य रेखा

बॉक्स की पहली पंक्ति। “वास्तव में ग्रिनिच याम्योत्तर, पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर रेखा नहीं है।” किताब बताती है कि यूरोप से अनेक शताब्दियों पहले भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर थी, जिसे मध्य रेखा कहा जाता था, और जो उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) के मध्य से गुजरती थी; लगभग 1500 वर्ष पहले खगोलविद वराहमिहिर भी यहीं रहे। और: “भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश और देशांतर से परिचित थे।”

चित्र 1.5 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)।

  1. बिंदुओं वाली खड़ी रेखा पर उँगली रखवाइए और उस पर लिखा मान पढ़वाइए।
  2. चित्र में निशानों की कुंजी पढ़वाइए: वृत्त “प्राचीन नगर” का निशान है, चौकोर “आधुनिक नगर” का।
  3. वृत्त वाले नगर ऊपर से नीचे पढ़वाइए; ज़्यादातर पुराने नामों के साथ आज का नाम भी छपा है, कुरूक्षेत्र का एक ही नाम छपा है।
  4. चौकोर निशान वाले नगर अलग से पढ़वाइए; ये आज के नगर हैं।
  5. पूछिए: कौन-से पुराने नगर रेखा के बिल्कुल पास हैं, और कौन थोड़ा दूर? कारण किताब बॉक्स में देती है: “देशांतर को मापने के लिए सही-सही समय रखना आवश्यक है और यह वर्तमान की तुलना में तब उतना सटीक नहीं था।”

बच्चे यहाँ अटकते हैं। चौकोर वाले नगरों को पुराने नगरों के नए नाम समझ लेते हैं; यह संदर्शिका की दस आम भूलें में नौवीं भूल है।

किताब जितना कहती है, उतना ही कहिए। चित्र 1.5 का मान पुरानी मध्य रेखा का है। किताब यह नहीं कहती कि आज का भारतीय मानक समय इसी रेखा पर है, और न यह कि मध्य रेखा किस वर्ष से चली। चित्र 1.5 पैमाने पर नहीं बना, इसलिए उस पर दूरी मत नपवाइए। ये दोनों बातें संदर्शिका की सावधानी में हैं।

चित्र 1.6 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। चित्र के नीचे लिखा है कि यह “भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रकाशित” मानचित्र है। उस पर अक्षांश की तीन रेखाएँ (10° उ., 20° उ., 30° उ.) और देशांतर की तीन रेखाएँ (70° पू., 80° पू., 90° पू.) छपी हैं; पहले यही पढ़वाइए। फिर पूछिए: भारत का सबसे दक्षिणी हिस्सा 10° उ. से ऊपर है या नीचे? सबसे पूर्वी हिस्सा 90° पू. से आगे है या पीछे? इसके बाद चित्र के नीचे का वाक्य पढ़वाइए: “भारत का अक्षांश लगभग 8° उ. से 37° उ. तक फैला हुआ है और देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. तक फैला हुआ है”। ये चार संख्याएँ मानचित्र पर नहीं छपीं, केवल चित्र के नीचे लिखी हैं; बच्चे इन्हें मानचित्र पर न ढूँढ़ें। हमारी ओर से: देशांतर का यह फैलाव (97 − 68 = 29°) कालांश 5 में बहुत काम आएगा।

पृष्ठ 19–21 — हर 15° पर एक घंटा: स्थानीय और मानक समय

कालांश 5 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: देशांतर से समय

टेबल लैंप से शुरुआत (पृष्ठ 15)। किताब कहती है कि टेबल लैंप को ग्लोब से थोड़ा दूर रखिए, उसे सूर्य मानिए, और ग्लोब को पूर्व की ओर घुमाइए; तब दिखेगा कि कहीं प्रात:काल है, कहीं मध्याह्न, सायं या रात्रि। हमारी ओर से: पर्दे खींचकर कक्षा में थोड़ा अँधेरा कर लीजिए, और लैंप न हो तो टॉर्च से काम चलाइए। पूछिए: जब भारत रोशनी में आता है, तब ग्रिनिच कहाँ है? किताब यहीं से समय पर आती है: “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।”

15° का हिसाब। “एक पूरा चक्कर 360° है, अतः इसका अर्थ है — प्रति घंटा 15°(15×24 = 360)।” बोर्ड पर उलटा भी करवाइए: 360 ÷ 24। फिर किताब का नियम: “यदि ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे मध्याह्न है, तो प्रत्येक 15° याम्योत्तर पर स्थानीय समय का एक घंटा जुड़ता जाता है।” किताब के उदाहरण में 15° पू. पर 1 बजे और 30° पू. पर 2 बजे हैं; पश्चिम की ओर 15° प. पर प्रात: 11 और 30° प. पर प्रात: 10, “और इसी क्रम में समय घटता जाएगा।”

चित्र 1.7 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। नीचे की पंक्ति पर उँगली रखवाइए (45° प. से 45° पू.), फिर ऊपर की पंक्ति (9 पूर्वाह्न से 3 अपराह्न)। हर रंग की पट्टी के बीच की काली रेखा दिखाइए; चित्र के नीचे लिखा है: “प्रत्येक रंग एक याम्योत्तर पर केंद्रित 15° का एक क्षेत्र है।” पूछिए: नीचे एक काली रेखा से अगली तक बढ़ने पर ऊपर समय कितना बदला? हर रंग कितने अंश का है?

हमारी ओर से: चित्र 1.7 के नीचे के वाक्य में “अक्षांश” छपा है, पर नीचे की पंक्ति देशांतर की है। कक्षा में क्या कहें, यह संदर्शिका के दो जगहें जहाँ किताब को ध्यान से पढ़िए में है।

बच्चे यहाँ अटकते हैं। पूर्व की ओर जाते हुए बच्चे समय घटा देते हैं। याद रखने का एक तरीका (हमारी ओर से): पूर्व में सूरज पहले निकलता और पहले ढलता है, इसलिए वहाँ की घड़ी आगे।

पोरबंदर और तिनसुकिया। इस गतिविधि में किताब ख़ुद संकेत देती है कि दोनों के देशांतर में 30° के अंतर पर विचार करें। पहले भारत के किसी मानचित्र पर दोनों शहर दिखाइए, गुजरात और असम; फिर पूछिए कि अँधेरा पहले कहाँ होगा और क्यों। उत्तर और दूसरी गतिविधि (गुजरात और असम के वही दो मित्र, मानक समय के साथ) संदर्शिका की गतिविधियों के उत्तर में हैं।

स्थानीय से मानक समय। किताब मानती है कि “यह विधि किसी देश के अंदर अनेक स्थानीय समयों के उपयोग के संदर्भ में उचित नहीं होगी।” इसलिए अधिकतर देश अपने मध्य से गुजरने वाली याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय अपनाते हैं। भारत का मानक समय: “भारतीय मानक समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम या आई.एस.टी.) ग्रिनिच (जिसे ग्रिनिच मीन टाइम या जी.एम.टी. भी कहा जाता है) पर स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।”

हमारी ओर से — दो घड़ियाँ। कागज़ की दो घड़ियाँ बनवाइए, एक पर पोरबंदर लिखिए और एक पर तिनसुकिया। पहले दोनों पर स्थानीय समय लगवाइए, उतने अंतर के साथ जितना बच्चों ने 30° के संकेत से निकाला; फिर दोनों पर एक ही मानक समय। बच्चे देखेंगे कि घड़ी एक होने पर भी आसमान अलग-अलग रहता है।

चित्र 1.8 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। ऊपर की पट्टी के अंक पढ़वाइए; फिर देशों पर लिखे अंक: भारत के पास +5½, चीन पर +8। किताब कहती है कि धन वाले अंक जी.एम.टी. में जोड़ने के और ऋण वाले घटाने के हैं। पूछिए: समय क्षेत्रों की रेखाएँ देशांतर रेखाओं जैसी सीधी क्यों नहीं हैं? किताब का उत्तर: “इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का पालन करते हुए प्रत्येक देश के मानक समय का ध्यान रखना पड़ता है।” चीन और भारत के समय का हिसाब संदर्शिका के बच्चे ये सवाल पूछेंगे में है। चित्र पर लिखा है: “मानचित्र पैमाने पर आधारित नहीं है।” इस पर दूरी मत नपवाइए।

रूस की घड़ी। “ध्यान रखें” वाले बॉक्स में किताब बताती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं, और रूस में पूर्व से पश्चिम की ओर यात्रा में घड़ी 10 बार बदलनी पड़ेगी। पूछिए: क्षेत्र 11, तो घड़ी 10 बार ही क्यों बदली? हमारी ओर से: बच्चे ग्यारह खाने बनाकर गिनें; घड़ी एक खाने से दूसरे में जाते समय बदलती है।

पृष्ठ 21–22 — अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

कालांश 6 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: देशांतर से समय

चित्र 1.8 फिर खोलिए। बाएँ किनारे पर खड़ी लिखी “अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा” दिखाइए। ऊपर की पट्टी में +12 और –12 उसी के दोनों ओर हैं; किताब कहती है: “+12 और –12 समय क्षेत्र इस रेखा पर एक-दूसरे को छूते हैं।” बच्चों से रेखा को ऊपर से नीचे तक उँगली से चलवाइए और पूछिए कि वह कहाँ-कहाँ मुड़ती है।

दिन घटे या बढ़े। किताब के दोनों वाक्य बोर्ड पर लिखिए: “यदि आप पूर्व की ओर से यात्रा करते हुए इसे पार करते हैं, तो आप एक दिन (मान लीजिए, सोमवार से रविवार) घटाएँगे।” और “यदि आप पश्चिम की ओर से इसे पार करते हैं, तो आप एक दिन (रविवार से सोमवार) जोड़ेंगे।” “पूर्व की ओर से” को बच्चे दो तरह पढ़ लेते हैं; इसका अर्थ और चित्र 1.8 के +12, –12 से इसकी जाँच संदर्शिका के दो जगहें जहाँ किताब को ध्यान से पढ़िए में है।

रेखा टेढ़ी क्यों। किताब कहती है कि यह रेखा “कुछ देशों में एक ही दिन का विभाजन होने से बचने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।” पूछिए: अगर रेखा किसी देश के बीच से जाती, तो उस देश में क्या होता?

चित्र 1.9 पर ऐसे काम कराइए (हमारी ओर से)। किताब के शब्दों में यह “भारत पर केंद्रित ग्लोब” है, जो कुछ देशों का मानक समय जी.एम.टी. के संबंध में दिखाता है। इस पर देशों के नाम नहीं, केवल अंक छपे हैं। बच्चे आकार देखकर भारत ढूँढ़ें और उसका अंक पढ़ें; फिर चित्र 1.8 में भारत का अंक देखकर बताएँ कि दोनों में एक ही बात दो तरह लिखी है (+5.5 और +5½)। फिर ऐसे अंक ढूँढ़वाइए जिनमें आधा घंटा जुड़ा हो। पूछिए: हर देश का अंक पूरा घंटा ही क्यों नहीं है? किताब इसका कारण नहीं देती; इतना ही कहिए कि अधिकतर देश अपने बीच से गुज़रने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय अपनाते हैं, जैसा पृष्ठ 20 पर पढ़ा।

पृष्ठ 22–23 — आगे बढ़ने से पहले: किताब का अपना सार

कालांश 6 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: सार और आख़िरी जाँच

किताब अध्याय का सार चार बिंदुओं में ख़ुद देती है। इन्हें दोबारा मत लिखवाइए; बच्चों के पास किताब है।

हमारी ओर से — सार को तीन प्रश्नों से मिलाइए। कालांश 1 वाले चार्ट पेपर पर तीनों महत्वपूर्ण प्रश्न लगे हैं। बच्चे सार का हर बिंदु पढ़कर बताएँ कि वह किस प्रश्न का उत्तर है, और उसे उस प्रश्न के नीचे लिख दें। तिथि रेखा वाला बिंदु किस प्रश्न के नीचे जाए, इस पर कक्षा में बहस होने दीजिए; वह तीसरे प्रश्न से सबसे पास है, क्योंकि वह भी देशांतर और समय की बात है।

पृष्ठ 23–26 — प्रश्नावली, वर्ग पहेली और नूडल्स

कालांश 6 · पाठ योजना में यह कालांश

इनके उत्तर यहाँ दोहराए नहीं गए, ताकि दो पन्नों में दो अलग उत्तर न हों। सब शिक्षक संदर्शिका में हैं:

प्रश्न 1 से पहले। इसके लिए अध्याय 5 का चित्र 5.2 चाहिए; पृष्ठ 9–11 वाले कार्ड में उस पन्ने पर पर्ची लगाने की बात थी। हाशिये में किताब “मुहाना” का अर्थ भी देती है; पहले वह पढ़वाइए, फिर नपवाइए।

प्रश्न 5 समूह में है। किताब कहती है कि समूह चर्चा करें और हर समूह 100–150 शब्दों का उत्तर लिखे। समूहों के उत्तर एक-दूसरे को पढ़कर सुनाने दीजिए; किताब भी उत्तरों की तुलना करने को कहती है।

वर्ग पहेली। ग्रिड एक पन्ने पर है और संकेत अगले पन्ने पर, इसलिए बच्चों को पन्ना पलटते रहना पड़ेगा। जोड़ियों में, पेंसिल से भरवाइए। पहले वे संकेत करवाइए जिनके उत्तर छोटे हैं; उनके अक्षर लंबे उत्तरों में मदद करते हैं। हर खाने में एक अक्षर कैसे बैठता है, यह संदर्शिका की कुंजी के नीचे लिखा है।

नूडल्स। अध्याय के अंत का यह पन्ना टिप्पणी और चित्र बनाने के लिए है; पन्ने के नीचे किताब बताती है कि यह शब्द नोट्स और डूडल्स को मिलाकर बना है। हमारी ओर से सुझाव: बच्चे यहाँ अपना आठ दिशाओं वाला चक्र, या अपने गाँव का छोटा मानचित्र बनाएँ।

अभ्यास के लिए बच्चों को प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड दीजिए।