Chapter 1पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति

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NCERT, समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6), अध्याय 1

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कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन) · पृष्ठ — 7 से 26 · कालांश — 6, हर एक 40 मिनट

इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले एक नज़र में वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, तैयारी वाली तालिका में समझाए गए हैं। प्रोजेक्टर न हो तो भी हर कालांश किताब, बोर्ड, चार्ट पेपर और ग्लोब से चल जाएगा।

अध्याय का बड़ा विचार — किसी जगह को ठीक-ठीक बताने के लिए एक ऐसा तरीका चाहिए जिसे सब समझें। मानचित्र यह काम दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्नों से करता है। पूरी पृथ्वी के लिए दो संख्याएँ चाहिए: अक्षांश और देशांतर। और देशांतर से ही किसी जगह का समय भी तय होता है। अध्याय इसी क्रम में चलता है, और छह कालांश भी।

सारे पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। उद्धरण-चिह्न सिर्फ़ किताब के अपने शब्दों पर लगे हैं, उसी वर्तनी में जो किताब में छपी है; वे किस पृष्ठ के हैं, यह हर कार्ड की पहली पंक्ति में लिखा है। जो बात किताब की नहीं, हमारी अपनी है, उसके साथ हमारी ओर से लिखा है, और जो जोड़-घटाव हमने किया है, उसके साथ हमारा हिसाब।

एक नज़र में — 6 कालांश और उनकी सामग्री

छह कालांश, एक सीढ़ी

कालांश 1मानचित्र और उसके तीन घटकदूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न
कालांश 2पृथ्वी गोल है, कागज़ चपटासंतरे का छिलका, और ग्लोब
कालांश 3निर्देशांक का विचार, और अक्षांशबाज़ार की दुकान, शतरंज का खाना, भूमध्य रेखा
कालांश 4देशांतर, और उज्जयिनीग्रिनिच की याम्योत्तर, और भारत की मध्य रेखा
कालांश 5समय क्षेत्रस्थानीय समय, मानक समय, समय क्षेत्र
कालांश 6अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांशपहले दिन के तीन प्रश्न, अब उत्तर के साथ
हर कालांश के पृष्ठ, स्लाइड और बाक़ी सामग्री नीचे की तालिका में।
कालांश और टॉपिकपृष्ठस्लाइडइंटरैक्टिवप्रश्न बैंकफ़्लैशकार्ड
1 · मानचित्र और उसके तीन घटक7–11शुरू की तीन स्लाइड, फिर इसी नाम वाला हिस्साशुरुआत, मानचित्र: दूरी, दिशा, प्रतीकक1–5 · ख1–3 · ग2 · घ1–3 · ङ1 · च1 · छ1, 4, 51–14
2 · पृथ्वी गोल है, कागज़ चपटा12इसी नाम वाला हिस्सागोल पृथ्वी, चपटा कागज़ख4 · ग1 · ङ215–20
3 · निर्देशांक का विचार, और अक्षांश12–14इसी नाम वाला हिस्सानिर्देशांक, अक्षांश और देशांतरक6–7 · ख5–6 · घ4–5 · छ321–27
4 · देशांतर, और उज्जयिनी14–18इसी नाम वाला हिस्साअक्षांश और देशांतर, उज्जयिनी की मध्य रेखाक8–12 · ख7 · ग3–4 · घ6 · ङ3 · च2, 428–39
5 · समय क्षेत्र15, 19–21इसी नाम वाला हिस्सादेशांतर से समयक13–15 · ग5–6 · घ7 · ङ4–5 · च3 · छ240–49
6 · अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांश21–25इसी नाम वाला हिस्सा, फिर किताब की प्रश्नावलीतिथि रेखा, सार और आख़िरी जाँचख8 · घ8 · ङ6, फिर पूरा प्रश्न बैंक50–54, फिर अंतिम पाँच मिनट

प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खंड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, और छ मानचित्र और क्रियाकलाप। फ़्लैशकार्ड वाले खाने में कार्डों के नंबर हैं। प्रश्न बैंक को कालांशों में बाँटना हमारी ओर से है।

पढ़ाने से पहले

तैयारी

हिस्सा या औज़ारयह क्या हैकैसे तैयार करें
किताबहर कार्ड की पहली पंक्ति में उस कालांश के पृष्ठ लिखे हैं।वे पृष्ठ एक दिन पहले ख़ुद पढ़ लीजिए। कार्ड में उद्धरण-चिह्नों वाली पंक्तियाँ किताब में ढूँढकर पेंसिल से निशान लगा लीजिए, ताकि बच्चों से वहीं से पढ़वा सकें।
स्लाइडछह हिस्सों वाली स्लाइड, हर कालांश का एक हिस्सा। स्लाइड शो पर्दे पर चलाने के लिए है, और स्लाइड का पाठ पढ़कर तैयारी के लिए।स्लाइड शो का PDF उतारकर फ़ोन या लैपटॉप में रख लीजिए। प्रोजेक्टर न हो तो भी कालांश चलेगा: हर चरण किताब, बोर्ड और चार्ट पेपर से हो सकता है।
इंटरैक्टिव अध्यायइंटरैक्टिव अध्याय में बच्चे ख़ुद नक्शा पढ़ते, संतरा छीलते, शतरंज की चाल चलते और समय निकालते हैं। हर कार्ड में उसके हिस्से की सीधी कड़ी है।एक बार पूरा ख़ुद चलाकर देखिए। प्रोजेक्टर हो तो कक्षा में चलाइए; न हो तो बच्चों को घर पर फ़ोन पर खोलने के लिए कहिए।
लक्ष्यकालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्या कर पाए।कालांश के बीच में एक बार लक्ष्य फिर पढ़िए और देखिए कि कक्षा उस ओर जा रही है या नहीं।
साथ ले जाइएउस दिन कक्षा में लगने वाली चीज़ें।एक दिन पहले जुटा लीजिए; पूरी सूची नीचे सामग्री वाली तालिका में है।
40 मिनटमिनट-दर-मिनट चरण। हर चरण के आगे लिखा है कि वह कितने मिनट से कितने मिनट तक है।कोई चरण लंबा खिंचे तो भी आख़िरी चरण मत छोड़िए; उसी में निकास-पर्ची है। समय कम पड़े तो बीच का कोई चरण छोटा कीजिए।
चित्रकिताब के चित्रों के आधार पर हमारे बनाए चित्र, और बक्सों वाले चित्र। चित्र 1.3, 1.4, 1.8 और 1.9 यहाँ दोबारा नहीं बनाए गए; उनके लिए बच्चे किताब खोलें।बक्सों वाले हर चित्र के कोने में PNG बटन है; उससे चित्र उतारकर फ़ोन पर दिखा सकते हैं या छपवा सकते हैं।
बोर्ड-कार्यकालांश के अंत तक बोर्ड पर क्या बना होना चाहिए।बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए बोर्ड की हर बात उसी कालांश में कॉपी में उतरवाइए। जो बात कई दिन दिखनी है, वह चार्ट पेपर पर लिखकर दीवार पर टाँगिए।
यहाँ बच्चे अटकेंगेवे जगहें जहाँ बच्चे अक्सर ग़लती करते हैं, और कमज़ोर और तेज़ विद्यार्थियों के लिए सुझाव।कालांश से पहले पढ़ लीजिए, ताकि ग़लती आते ही पहचान लें।
निकास-पर्चीआख़िरी चार मिनट में एक-दो छोटे सवाल। हर विद्यार्थी पुरानी कॉपी के कागज़ की पर्ची पर उत्तर लिखकर कक्षा से जाते समय आपको देता है।पर्चियाँ उसी दिन देख लीजिए। यह जाँच आपके अपने लिए है: पता चलता है कि अगले कालांश की शुरुआत में किन बच्चों के साथ क्या फिर से करना है।
प्रश्न बैंकप्रश्न बैंक के सात खंड हैं, क से छ तक; कोड पढ़ने का तरीका ऊपर तालिका के नीचे है।गृहकार्य के कोड कार्ड में दिए हैं। उत्तर प्रश्न बैंक में ही हैं।
फ़्लैशकार्डफ़्लैशकार्ड के 54 कार्ड, छह सेट में, हर कालांश का एक सेट।बच्चे घर पर दोहराएँ; अगले कालांश की शुरुआत में दो-तीन कार्ड मौखिक पूछ लीजिए।

हर कालांश से पहले

  1. आज का कार्ड पूरा पढ़िए, फिर किताब के वे पृष्ठ।
  2. साथ ले जाइए वाली चीज़ें जुटाइए।
  3. पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ देखिए, और जिन बच्चों को कोई बात फिर समझानी है उनके नाम लिख लीजिए।
  4. देख लीजिए कि तीन प्रश्नों वाला चार्ट दीवार पर टँगा है।

सामग्री — यह जुटा लीजिए

#क्याकिस कालांश में
1ग्लोब, कम से कम एक; हो सके तो हर समूह के लिए एक2 से 6
2एक पुरानी गेंद, जिस पर चॉक से रेखाएँ खींची जा सकें; ग्लोब कम हों तो यही काम आएगी3, 4
3संतरे या मौसमी, हर समूह के लिए एक; बच्चे इन्हें हाथ से छीलेंगे, चाकू की ज़रूरत नहीं2
4सुतली या मोटा धागा, एक-एक हाथ के कुछ टुकड़े3, 4
5एक टॉर्च। किताब टेबल लैंप कहती है; लैंप न हो तो टॉर्च से भी यही काम होगा5
6चार्ट पेपर (तीन-चार) और मोटा स्केच पेन1, 3, 5, 6
7रंगीन चॉकहर कालांश
8स्केल (रूलर), हर विद्यार्थी के पास1
9एटलस, अगर विद्यालय में हो4, 5
10निकास-पर्ची के लिए पुरानी कॉपियों के कागज़ के छोटे टुकड़ेहर कालांश

कक्षा-व्यवस्था

  • बच्चों को चार-चार के समूहों में बैठाइए, पूरे अध्याय भर वही समूह। किताब भी पृष्ठ 9 पर तीन या चार विद्यार्थियों के समूह बनाने को कहती है।
  • तीन प्रश्न चार्ट पर। पृष्ठ 7 पर किताब तीन प्रश्नों से अध्याय शुरू करती है। ये तीनों चार्ट पेपर पर बड़े अक्षरों में लिखकर कक्षा की दीवार पर टाँगिए; कालांश 6 में इन्हीं के उत्तर लिखे जाएँगे। चार्ट टाँगना संभव न हो तो हर कालांश की शुरुआत में इन्हें बोर्ड के कोने में फिर लिख दीजिए।
  • कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर यही तीन प्रश्न लिखे, और हर प्रश्न के नीचे चार-पाँच पंक्तियाँ ख़ाली छोड़े। कालांश 1 से 6 तक जो सीखें, उसका एक-एक वाक्य यहाँ जुड़ता जाएगा।
  • कक्षा में उत्तर दिशा। कालांश 1 से पहले पता कर लीजिए कि आपकी कक्षा में उत्तर किस ओर है, और उस दीवार पर ‘उ.’ लिखी एक पर्ची चिपका दीजिए। (हमारी ओर से)
  • बोर्ड हर कालांश में नया। हर कार्ड का बोर्ड-कार्य उसी कालांश में बनता है और कॉपी में उतरता है।

अधिगम प्रतिफल

#प्रतिफलकालांशजाँच
1मानचित्र और एटलस का अर्थ, और किताब में बताए गए मानचित्र के तीन प्रकार बता पाएगा1चित्र 1.1 वाले तीन सवाल
2मानचित्र के तीन घटक उदाहरण के साथ बता पाएगा, और स्केल से मानचित्र पर दूरी बना पाएगा1मैदान वाली गतिविधि, निकास-पर्ची 1
3आठ दिशाएँ पहचानकर चित्र 1.1 पर दिशा वाले कथन जाँच पाएगा1पृष्ठ 10 के चार कथन
4बता पाएगा कि ग्लोब, समतल मानचित्र से पृथ्वी को बेहतर क्यों दिखाता है2संतरे वाली गतिविधि, निकास-पर्ची 2
5बाज़ार और शतरंज के उदाहरण से निर्देशांक का विचार समझा पाएगा, और अक्षांश बता पाएगा3शतरंज की चाल, निकास-पर्ची 3
6देशांतर और प्रमुख याम्योत्तर समझा पाएगा, और किसी जगह के दो निर्देशांक लिख पाएगा4निकास-पर्ची 4
7उज्जयिनी की मध्य रेखा के बारे में किताब की बातें बता पाएगा4मौखिक सवाल, प्रश्न बैंक ङ3
8देशांतर के अंतर से स्थानीय समय का अंतर निकाल पाएगा, और स्थानीय और मानक समय का अंतर बता पाएगा5निकास-पर्ची 5, प्रश्नावली का प्रश्न 2
9बता पाएगा कि अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पार करने पर तिथि कैसे बदलती है6निकास-पर्ची 6, वर्ग पहेली (प्रश्न 8)

कालांश-दर-कालांश

कालांश 1 — मानचित्र और उसके तीन घटक

किताब — पृष्ठ 7–11 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड, फिर इसी नाम वाला हिस्सा · इंटरैक्टिव — शुरुआत, मानचित्र: दूरी, दिशा, प्रतीक

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी मानचित्र के तीन घटक एक-एक उदाहरण के साथ बता पाए, स्केल से एक छोटी दूरी कागज़ पर बना पाए, और चित्र 1.1 पर आठ दिशाएँ पढ़ पाए।

साथ ले जाइए — तीन प्रश्नों वाला चार्ट, हर विद्यार्थी का स्केल (रूलर), रंगीन चॉक, निकास-पर्ची के कागज़।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · आर्यभट्ट और तीन प्रश्न. पृष्ठ 7 पर आर्यभट्ट की पंक्ति एक बच्चे से पढ़वाइए: “पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है।” फिर दीवार पर टँगे चार्ट से किताब के तीन महत्वपूर्ण प्रश्न पढ़िए और बताइए कि छह कालांश बाद हम इन्हीं के उत्तर लिखेंगे।
  2. 5–10 मिनट · रास्ता कैसे ढूँढेंगे? पूछिए: आप पहली बार किसी नए नगर में हैं और रेलवे स्टेशन से बैंक जाना है, रास्ता कैसे ढूँढेंगे? दो-तीन उत्तर सुनिए। फिर पृष्ठ 9 की पंक्ति पढ़िए: “मानचित्र में आप सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे आप उसे ऊपर से देखते हैं।” हर बच्चा अपनी बेंच को ऊपर से देखकर कॉपी में बस एक आयत बनाए, उस पर किताब और बस्ता कहाँ रखा है। (हमारी ओर से)
  3. 10–16 मिनट · चित्र 1.1 पढ़िए. समूह किताब में चित्र 1.1 खोलें और पृष्ठ 9 के तीन सवाल करें: “चिकित्सालय को अंकित कीजिए।”, “नीले रंग से दिखाए गए क्षेत्र क्या दर्शा रहे हैं?” और “विद्यालय, नगर पंचायत या सार्वजनिक उद्यान में से रेलवे स्टेशन से कौन-सा स्थान सबसे अधिक दूरी पर है?” फिर बताइए: “एटलस (मानचित्रावली) मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।” किताब मानचित्र के तीन प्रकार बताती है: भौतिक, राजनैतिक और थिमैटिक। अंत में बोर्ड पर लिखिए: “किसी भी मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं— दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।”
  4. 16–23 मिनट · दूरी और स्केल. पढ़िए: “मानचित्र का प्रत्येक सेंटीमीटर धरातल पर एक निश्चित दूरी का प्रतिनिधित्व करता है।” फिर पृष्ठ 10 की गतिविधि कॉपी में करवाइए: “मान लीजिए कि यह 40 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा आयताकार क्षेत्र है। इसे अपने रूलर की सहायता से 1 सेंटीमीटर = 10 मीटर के स्केल पर सटीक ढँग से खींचिए।” हमारा हिसाब: 40 मीटर के लिए 4 सेंटीमीटर, 30 मीटर के लिए 3 सेंटीमीटर। अब बच्चे रूलर से विकर्ण नापें; यह 5 सेंटीमीटर आता है, यानी 50 मीटर।
  5. 23–30 मिनट · दिशा. सब खड़े हों और ‘उ.’ वाली पर्ची की ओर हाथ करें; फिर पूर्व, दक्षिण, पश्चिम। किताब कहती है: “अधिकतर मानचित्रों में ‘उ.’ अक्षर से अंकित एक तीर होता है, जो उत्तर दिशा को इंगित करता है।” चारों दिशाओं के बारे में: “इन्हें चतुर्दिश या प्रधान बिंदु भी कहा जाता है।” आठ दिशाओं वाला तारा बोर्ड पर बनाइए। फिर समूह चित्र 1.1 पर पृष्ठ 10 के चार कथन जाँचें, जैसे “बाजार, चिकित्सालय के उत्तर में है।”
  6. 30–36 मिनट · प्रतीक चिह्न. पढ़िए: “प्रतीक चिह्न मानचित्रों का एक और महत्वपूर्ण घटक है।” और बताइए कि “सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने भारत (या भारत के भागों) के मानचित्रों के लिए प्रतीक चिह्नों का एक संकलन निर्धारित किया है।” चित्र 1.2 से हर समूह पाँच ऐसे चिह्न चुने जो उसके गाँव या मोहल्ले के मानचित्र में लगेंगे, और कॉपी में बनाए।
  7. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची. पर्ची पर: मानचित्र के तीन घटक लिखिए, और हर एक के साथ एक उदाहरण।

चित्र 1.1: एक छोटा नगर (चरण 3 और 5)

उत्तरदक्षिणपूर्वपश्चिमरेलवे स्टेशनझीलआवासीय भवनचिकित्सालयनगर पंचायतबैंकसार्वजनिकउद्यानविद्यालयबाजारसंग्रहालय
चित्र 1.1 — एक काल्पनिक लघु नगर का मानचित्रकिताब के पृष्ठ 8 के चित्र 1.1 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

मानचित्र के तीन घटक (चरण 3 से 6)

मानचित्र के तीन घटक

मानचित्रसतह, जैसे ऊपर से देखी गईएटलस में ऐसे ही मानचित्रों का संग्रह
दूरीस्केल सेमानचित्र का 1 सेंटीमीटर, धरातल पर तय दूरी
दिशा‘उ.’ वाला तीरचार प्रधान और चार मध्यवर्ती दिशाएँ
प्रतीक चिह्नछोटे तय निशानभारतीय सर्वेक्षण विभाग का संकलन
NCERT, पृष्ठ 9–11

आठ दिशाएँ (चरण 5)

उत्तरदक्षिणपूर्वपश्चिमउत्तर-पश्चिमउत्तर-पूर्वदक्षिण-पश्चिमदक्षिण-पूर्व
आठ दिशाएँ: चार प्रधान और चार मध्यवर्तीकिताब के पृष्ठ 10 के चित्र के आधार पर हमारा बनाया चित्र

प्रतीक चिह्न (चरण 6)

बड़ी लाइनछोटी लाइनRSरेलवे स्टेशनपक्की सड़ककच्ची सड़कअंतर्राष्ट्रीय सीमाराज्य सीमाजिला सीमानदीकुआँतालाबनहरसेतुमंदिरगिरजाघरमस्जिदछत्रीPOडाकघरPTOडाक एवं टेलीग्राफकार्यालयPSपुलिस स्टेशनबस्तियाँकब्रिस्तानवृक्षघास
चित्र 1.2 — मानचित्रों में सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले प्रतीक चिह्नकिताब के पृष्ठ 11 के चित्र 1.2 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

बोर्ड-कार्य

  • बीच में: मानचित्र के तीन घटक: दूरी, दिशा, प्रतीक चिह्न, हर एक के नीचे एक उदाहरण।
  • बाईं ओर: मैदान का हिसाब, 40 मीटर = 4 सेंटीमीटर, 30 मीटर = 3 सेंटीमीटर, विकर्ण 5 सेंटीमीटर = 50 मीटर।
  • दाईं ओर: आठ दिशाओं वाला तारा, ऊपर ‘उ.’।
  • यह सब उसी कालांश में कॉपी में उतरवाइए।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो बच्चों को बताइए कि वहाँ का कस्बा इंटरैक्टिव का अपना बनाया हुआ है, किताब का चित्र 1.1 नहीं। पृष्ठ 9 और 10 के सवाल किताब के चित्र पर ही कीजिए। वहाँ का स्केल वाला खेल मैदान का विकर्ण पूछता है, इसलिए पहले बच्चे कॉपी में रूलर से नाप लें, फिर खेल में भरें।
  • कई बच्चे स्केल उलटा लगा देते हैं और 40 मीटर के लिए 40 सेंटीमीटर खींचने लगते हैं। पूछिए: 10 मीटर के लिए कितने सेंटीमीटर? फिर 40 के लिए?
  • दिशा पूछने पर बच्चे कक्षा की दीवार या बोर्ड की ओर इशारा करते हैं, मानचित्र के तीर की ओर नहीं। हर बार पहले मानचित्र पर ‘उ.’ ढूँढने को कहिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी पहले केवल चार प्रधान दिशाएँ पक्की करें। चित्र 1.1 पर उनसे बस इतना पूछिए: झील, स्टेशन के किस ओर है?
  • तेज़ विद्यार्थी पृष्ठ 10 के चारों कथन जाँचकर हर ग़लत कथन को सही करके लिखें, और अपने समूह को समझाएँ।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 7): मानचित्र के तीन घटक, हर एक का एक उदाहरण। जिनकी पर्ची में एक भी घटक छूटा, उनसे कालांश 2 की शुरुआत में मौखिक पूछिए।
  • गृहकार्य: कॉपी के पहले पन्ने पर किताब के तीन प्रश्न लिखिए। प्रश्नावली (पृष्ठ 23) के प्रश्न 1, 3 और 4 कॉपी में कीजिए; प्रश्न 1 के लिए किताब के अध्याय 5 का चित्र 5.2 देखिए। पृष्ठ 11 की गतिविधि शुरू कीजिए: “अपने घर, विद्यालय और कुछ अन्य महत्वपूर्ण भू-चिह्नों सहित अपने स्थान या अपने गाँव का एक मानचित्र बनाइए।” इसे घर पर पूरा करवाना और कालांश 3 तक जमा करवाना हमारी ओर से है। प्रश्न बैंक से घ1–3।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–14।

कालांश 2 — पृथ्वी गोल है, कागज़ चपटा

किताब — पृष्ठ 12 · स्लाइड — इसी नाम वाला हिस्सा · इंटरैक्टिव — गोल पृथ्वी, चपटा कागज़

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी संतरे वाले प्रयोग के सहारे बता पाए कि गोल पृथ्वी को समतल कागज़ पर ज्यों का त्यों क्यों नहीं उतारा जा सकता, और ग्लोब पृथ्वी को बेहतर क्यों दिखाता है।

साथ ले जाइए — हर समूह के लिए एक संतरा या मौसमी, ग्लोब, रंगीन चॉक, निकास-पर्ची के कागज़।

40 मिनट

  1. 0–4 मिनट · पिछली पर्चियाँ. कालांश 1 की पर्चियों में जो घटक सबसे ज़्यादा छूटा, उसे दो-तीन बच्चों से उदाहरण के साथ पूछिए। फ़्लैशकार्ड 1–14 में से दो कार्ड मौखिक पूछिए।
  2. 4–8 मिनट · अनुमान. पूछिए: क्या संतरे का छिलका मेज़ पर बिना फटे बिल्कुल सपाट बिछ सकता है? हाथ उठवाकर हाँ और ना गिनिए, और गिनती बोर्ड के कोने में लिख दीजिए।
  3. 8–18 मिनट · संतरे का प्रयोग. हर समूह किताब की गतिविधि करे: संतरे को ऐसे छीलिए कि छिलके के केवल तीन-चार टुकड़े बनें, फिर उन्हें मेज़ पर चपटा करने की कोशिश कीजिए। छिलका हाथ से उतारिए, चाकू की ज़रूरत नहीं (यह सलाह हमारी ओर से है)। हर समूह बताए कि दबाने पर किनारों का क्या हुआ। किताब का निष्कर्ष भी यही है: किनारे तोड़े बिना छिलका चपटा नहीं होता।
  4. 18–24 मिनट · किताब क्या कहती है. यह वाक्य पढ़वाइए और बोर्ड पर लिखिए: “कागज के एक समतल पृष्ठ पर एक गोलाकार वस्तु को यथावत चित्रित करना संभव नहीं है।” किताब यह भी बताती है कि पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है। अब बोर्ड के कोने वाली गिनती से अनुमान मिलाइए।
  5. 24–32 मिनट · ग्लोब. ग्लोब हर समूह के पास से घुमाइए। किताब कहती है कि ग्लोब का आकार पृथ्वी जैसा गोलाकार है, इसलिए वह समतल मानचित्र की तुलना में पृथ्वी के भूगोल का बेहतर प्रतिनिधित्व करता है। बच्चे यह वाक्य किताब में ढूँढकर रेखांकित करें। फिर समूहों से पूछिए: ग्लोब की एक कमी और मानचित्र की एक सुविधा बताइए। (हमारी ओर से: ग्लोब पर पूरी पृथ्वी एक साथ नहीं दिखती और उसे मोड़कर बस्ते में नहीं रख सकते; मानचित्र मुड़ जाता है और उस पर किसी छोटे इलाके का ब्योरा बड़ा दिखाया जा सकता है।)
  6. 32–36 मिनट · अगला सवाल. बोर्ड के कोने में लिखिए: ग्लोब पर किसी जगह का पता कैसे बताएँ? बच्चे कॉपी में अपना अनुमान एक पंक्ति में लिखें; कालांश 3 इसी सवाल से शुरू होगा।
  7. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची. पर्ची पर: ग्लोब, समतल मानचित्र से पृथ्वी को बेहतर क्यों दिखाता है? संतरे वाले प्रयोग से एक वाक्य जोड़िए।

गोल पृथ्वी, चपटा कागज़ (चरण 3 से 5)

गोल पृथ्वी, चपटा कागज़

संतरे का छिलकातीन-चार टुकड़ों में छीलामेज़ पर चपटा करने की कोशिश
समतल कागज़गोल वस्तु यथावत नहीं बनतीइसलिए पृथ्वी का मानचित्रण कठिन
ग्लोबपृथ्वी जैसा गोलाकारसमतल मानचित्र से बेहतर प्रतिनिधित्व
NCERT, पृष्ठ 12

बोर्ड-कार्य

  • बीच में ऊपर से नीचे: संतरे का छिलका, किनारे टूटते हैं, समतल कागज़ पर गोल पृथ्वी यथावत नहीं, ग्लोब बेहतर।
  • बाईं ओर: फटे किनारों वाले छिलके का सादा चित्र।
  • कोने में: अनुमान की गिनती, और अगला सवाल।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो संतरे वाला हिस्सा असली संतरे के बाद चलाइए, उसकी जगह नहीं। हाथ से दबाकर फटता छिलका बच्चे ज़्यादा याद रखते हैं।
  • कुछ बच्चे निष्कर्ष निकालते हैं कि मानचित्र बेकार है। उन्हें बताइए कि किताब ग्लोब को केवल बेहतर कहती है; रोज़ के काम मानचित्र से ही चलते हैं, जैसा कालांश 1 में देखा।
  • बच्चे पूछेंगे कि पृथ्वी पूरी गोल नहीं तो कैसी है। किताब इतना ही कहती है कि वह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है; इससे आगे मत ले जाइए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी बस एक वाक्य पक्का करें: संतरे का छिलका बिना फटे सपाट नहीं होता, वैसे ही गोल पृथ्वी कागज़ पर ज्यों की त्यों नहीं उतरती।
  • तेज़ विद्यार्थी सोचें कि फिर भी हम ज़्यादातर समतल मानचित्र ही क्यों इस्तेमाल करते हैं, और दो कारण लिखें।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 7): ग्लोब बेहतर क्यों, और संतरे वाले प्रयोग का एक वाक्य। जिनकी पर्ची में केवल ग्लोब गोल है, जैसा अधूरा उत्तर हो, उनसे अगले कालांश में संतरे वाली बात जोड़कर फिर पूछिए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक से ख4, ग1 और ङ2। गाँव या मोहल्ले का मानचित्र जारी रखिए।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 15–20।

कालांश 3 — निर्देशांक का विचार, और अक्षांश

किताब — पृष्ठ 12–14 · स्लाइड — इसी नाम वाला हिस्सा · इंटरैक्टिव — निर्देशांक, अक्षांश और देशांतर

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बाज़ार और शतरंज के उदाहरण से समझा पाए कि किसी जगह का पता दो संख्याओं से बनता है, और बता पाए कि अक्षांश भूमध्य रेखा से दूरी मापता है।

साथ ले जाइए — ग्लोब या पुरानी गेंद, सुतली के तीन टुकड़े, रंगीन चॉक, निकास-पर्ची के कागज़।

40 मिनट

  1. 0–4 मिनट · पिछली पर्चियाँ. कालांश 2 की पर्चियों से एक-दो बातें दोहराइए, फिर कोने वाला सवाल पढ़िए: ग्लोब पर किसी जगह का पता कैसे बताएँ? दो बच्चों के अनुमान सुनिए।
  2. 4–10 मिनट · बाज़ार में एक संदेश. बच्चे किताब में बाज़ार वाला संदेश पढ़ें। उसमें दुकान का पता दो गिनतियों से दिया गया है: कौन-सी पंक्ति, और उस पंक्ति में कौन-सी दुकान। पूछिए: दुकान ढूँढने के लिए कितनी संख्याएँ लगीं? फिर हर बच्चा अपनी जगह का पता इसी तरह बोले, जैसे तीसरी पंक्ति की दूसरी बेंच। (हमारी ओर से)
  3. 10–17 मिनट · शतरंज की बिसात. बिसात का चित्र दिखाइए। किताब के उदाहरण में सफ़ेद प्यादा ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4 पर गया है; बोर्ड पर यही लिखिए। फिर किताब के ‘आइए पता लगाएँ’ वाले खाने का काम: काले पक्ष की ओर से उसी तरीके से अपनी चाल लिखिए। शिक्षक संदर्शिका का उत्तर ‘घ’ 7 से ‘घ’ 5 है। अंत में पढ़िए: “इन दो उदाहरणों में प्रयुक्त प्रणाली को निर्देशांक प्रणाली कहा जा सकता है।”
  4. 17–25 मिनट · ध्रुव और भूमध्य रेखा. ग्लोब या गेंद पर उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव दिखाइए। गेंद के ठीक बीच सुतली लपेटिए: यह भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) है। फिर सुतली ध्रुव की ओर खिसकाकर लपेटिए और बच्चे देखें कि घेरा छोटा होता जाता है। (सुतली वाला तरीका हमारी ओर से है।)
  5. 25–31 मिनट · अक्षांश. पढ़िए: “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।” भूमध्य रेखा 0° है, और ध्रुवों के लिए किताब कहती है: “इसे 90° उ. और 90° द. के रूप में लिखा जाता है।” बच्चे किताब में चित्र 1.3 खोलें (यहाँ दोबारा नहीं बनाया गया) और उस पर भूमध्य रेखा और उत्तर ध्रुव ढूँढें। चित्र में दक्षिणी ध्रुव नहीं दिखता; दोनों ध्रुव असली ग्लोब या गेंद पर दिखाइए।
  6. 31–36 मिनट · अक्षांश और जलवायु. पढ़िए: “अक्षांश और जलवायु के बीच एक संबंध है।” और “उत्तर या दक्षिण ध्रुव के निकट जलवायु शीत (ठंडी) होती है।” पूछिए: 90° उ. के पास ठंड होगी या भूमध्य रेखा के पास? बच्चे उत्तर किताब के वाक्य से जोड़ें।
  7. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची. पर्ची पर: शतरंज की बिसात और ग्लोब में एक समानता लिखिए।

शतरंज की बिसात (चरण 3)

ककखखगगघघङङचचछछजज1122334455667788
शतरंज की बिसात: हर खाने का पता एक अक्षर और एक संख्याकिताब के पृष्ठ 12 के चित्र के आधार पर हमारा बनाया चित्र; बाकी मोहरे नहीं दिखाए; बिंदुदार प्यादा और तीर हमने जोड़े हैं, ताकि प्यादे की चाल दिखे

पते के लिए दो संख्याएँ (चरण 2 से 5)

पते के लिए दो संख्याएँ

बाज़ारपंक्ति और दुकानदो गिनतियों से दुकान का पता
शतरंजअक्षर और अंक‘घ’ 2 से ‘घ’ 4
ग्लोब पर पहली संख्याअक्षांशभूमध्य रेखा से दूरी, 0° से 90° उ. या 90° द. तक
ग्लोब पर दूसरी संख्यादेशांतरइसे कालांश 4 में पढ़ेंगे
NCERT, पृष्ठ 12–14

बोर्ड-कार्य

  • बाईं ओर: बाज़ार का संदेश और शतरंज की चाल, हर एक के नीचे लिखिए: दो संख्याएँ।
  • बीच में: एक वृत्त, उसके बीच भूमध्य रेखा 0°, ऊपर 90° उ., नीचे 90° द., और बीच में दो-तीन छोटे होते घेरे।
  • दाईं ओर: ध्रुव के निकट जलवायु शीत (ठंडी)।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो बाज़ार और शतरंज वाले हिस्से चरण 2 और 3 में चलाइए; शतरंज में बच्चे काले पक्ष की चाल ख़ुद चुनें, फिर कॉपी में अक्षर-अंक से अक्षर-अंक के रूप में लिखें।
  • बच्चे अक्सर अक्षांश को ध्रुव से नापने लगते हैं। हर बार पूछिए: गिनती कहाँ से शुरू होती है? भूमध्य रेखा से।
  • 90° लिखते समय उ. या द. छोड़ देते हैं। बताइए कि अकेला 90° अधूरा पता है: उत्तर ध्रुव या दक्षिण ध्रुव?
  • कमज़ोर विद्यार्थी सुतली वाली गेंद ख़ुद हाथ में लेकर भूमध्य रेखा और दोनों ध्रुव दिखाएँ, फिर बोलें: भूमध्य रेखा 0°, ध्रुव 90°।
  • तेज़ विद्यार्थी कक्षा की बेंचों का एक ग्रिड बनाएँ, पंक्तियों को अक्षर और बेंचों को अंक देकर, और पाँच साथियों के पते लिखें।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 7): शतरंज की बिसात और ग्लोब में एक समानता। उत्तर में दो संख्याओं से पता बताने वाली बात न हो, तो अगले कालांश की शुरुआत में बाज़ार वाला संदेश फिर पढ़वाइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक से क6–7, ख5–6, घ4–5 और छ3। किताब की प्रश्नावली के प्रश्न 7 में जो कथन अक्षांश के बारे में हैं, उन्हें कारण के साथ सही या ग़लत लिखिए। गाँव या मोहल्ले का मानचित्र आज जमा कीजिए।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 21–27।

कालांश 4 — देशांतर, और उज्जयिनी

किताब — पृष्ठ 14–18 · स्लाइड — इसी नाम वाला हिस्सा · इंटरैक्टिव — अक्षांश और देशांतर, उज्जयिनी

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी मापता है, किसी जगह के दोनों निर्देशांक पढ़ पाए, और जान पाए कि भारत में बहुत पहले उज्जयिनी से होकर जाने वाली रेखा प्रमुख याम्योत्तर का काम करती थी।

साथ ले जाइए — ग्लोब या सुतली वाली गेंद, एटलस (जितने मिल सकें), चार्ट पेपर, रंगीन चॉक, निकास-पर्ची के कागज़।

40 मिनट

  1. 0–3 मिनट · पिछली पर्चियाँ. समानता वाली पर्चियों से दो अच्छे उत्तर पढ़कर सुनाइए। पूछिए: ग्लोब पर पते की पहली संख्या कौन-सी है?
  2. 3–8 मिनट · ध्रुव से ध्रुव तक. पूछिए: ग्लोब पर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तक कितनी रेखाएँ खींची जा सकती हैं? सुतली को एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक तानकर दिखाइए। पढ़िए: “ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।”
  3. 8–14 मिनट · ग्रिनिच, 0°. किताब में 1884 वाला वाक्य पढ़वाइए, जिसमें ग्रिनिच से होकर जाने वाली याम्योत्तर की बात है। फिर: “इसे 0° देशांतर के रूप में अंकित किया जाता है।” और “देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का एक माप है।” बच्चे किताब का ‘ध्यान रखें’ वाला खाना पढ़कर अपने शब्दों में बताएँ कि उसमें 180° की रेखा के बारे में क्या कहा गया है।
  4. 14–20 मिनट · तीन शहर, दो निर्देशांक. किताब के तीन देशांतर बोर्ड पर लिखिए: न्यूयॉर्क 74° प., दिल्ली 77° पू., टोक्यो 140° पू.। पढ़िए: “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।” दिल्ली के डिग्री के बारे में किताब ख़ुद कहती है: “यद्यपि यह डिग्री आनुमानिक रूप से पूर्ण है, किंतु सटीक नहीं है।”
  5. 20–24 मिनट · चित्र 1.4 और चार शहर. बच्चे किताब में चित्र 1.4 देखें (यहाँ दोबारा नहीं बनाया गया): ग्रिनिच याम्योत्तर पृथ्वी को पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में बाँटती है, और भूमध्य रेखा उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में। किताब के ‘आइए पता लगाएँ’ में मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर और पेरिस के निर्देशांक ढूँढने हैं; किताब इनके मान नहीं देती। एटलस हों तो समूह अभी ढूँढें, नहीं तो यह घर का काम है।
  6. 24–33 मिनट · उज्जयिनी. पढ़िए: “वास्तव में ग्रिनिच याम्योत्तर, पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर रेखा नहीं है।” किताब बताती है कि भारत में उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) से होकर जाने वाली रेखा को मध्य रेखा कहा जाता था। फिर: “लगभग 1500 वर्ष पूर्व प्रसिद्ध खगोलविद वराहमिहिर भी यहाँ रहे और अपना कार्य किया।” “भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश और देशांतर से परिचित थे।” “उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं के लिए एक प्रमुख संदर्भ बन गया था।” अब चित्र 1.5 पर बच्चे 75.8° पू. की रेखा और उसके पास के प्राचीन नगर पढ़ें; उज्जयिनी और माहिष्मति लगभग ठीक रेखा पर हैं।
  7. 33–36 मिनट · भारत का फैलाव. चित्र 1.6 दिखाइए। पूछिए: भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में है या दक्षिण में, और ग्रिनिच के पूर्व में या पश्चिम में? (चित्र में अक्षांश लगभग 8° उ. से 37° उ. और देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. है।)
  8. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची. पर्ची पर: ग्रिनिच से होकर जाने वाली याम्योत्तर का देशांतर कितना है? भारत में पुराने समय की प्रमुख याम्योत्तर किस नगर से होकर जाती थी?

चित्र 1.5: उज्जयिनी की मध्य रेखा (चरण 6)

75.8° पू.कुरूक्षेत्ररोहितक/रोहतकदिल्लीमालवंगरा/नगरउज्जयिनी/उज्जैनमाहिष्मति/महेश्वरमुंबईकोलकाताबेंगलुरुचेन्नईकुमारी/कन्या कुमारीप्राचीन नगरआधुनिक नगर
चित्र 1.5 — उज्जयिनी की मध्य रेखा (75.8° पू.), उसके पास के प्राचीन नगर और आज के पाँच शहरकिताब के पृष्ठ 17 के चित्र 1.5 के आधार पर हमारा बनाया चित्र; शहर उनकी असली जगह पर, मालवंगरा/नगर किताब के चित्र के अनुसार; उभार: Natural Earth (public domain); आज की सीमाएँ नहीं दिखाई गई हैं

चित्र 1.6: भारत का फैलाव (चरण 7)

70° पू.80° पू.90° पू.10° उ.20° उ.30° उ.37° उ.अक्षांश8° उ.68° पू.देशांतर97° पू.
चित्र 1.6 — भारत का फैलाव: अक्षांश लगभग 8° उ. से 37° उ. तक, देशांतर लगभग 68° पू. से 97° पू. तककिताब के पृष्ठ 18 के चित्र 1.6 के आधार पर हमारा बनाया चित्र; भारत की सीमा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के उसी मानचित्र में देखिए; उभार: Natural Earth (public domain); आज की सीमाएँ नहीं दिखाई गई हैं

बोर्ड-कार्य

  • बाईं ओर: एक वृत्त, ध्रुव से ध्रुव तक बीच की रेखा पर 0° (ग्रिनिच), उसके बाएँ प. और दाएँ पू.।
  • बीच में: तीन शहरों की तालिका (शहर, देशांतर), और नीचे: अक्षांश और देशांतर मिलकर दो निर्देशांक।
  • दाईं ओर: उज्जयिनी, मध्य रेखा, 75.8° पू.। यह हिस्सा चार्ट पेपर पर भी बनवा लीजिए, कालांश 5 में ग्रिनिच और भारत के समय की बात इसी से जुड़ेगी।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो उज्जयिनी वाला हिस्सा चरण 6 में, किताब के वाक्य पढ़ने के बाद चलाइए, ताकि बच्चे नगरों के नाम पहले किताब में देख लें।
  • बच्चे देशांतर लिखते समय प. या पू. छोड़ देते हैं, जैसे केवल 77°। अक्षांश की तरह यहाँ भी अधूरा पता है: ग्रिनिच के पूर्व में या पश्चिम में?
  • कुछ बच्चे मान लेते हैं कि उज्जयिनी की रेखा पर ही आज का भारत का समय चलता है। किताब यह नहीं कहती; उत्तर किताब के वाक्यों तक रखिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी केवल दो बातें पक्की करें: ग्रिनिच 0°, और देशांतर के साथ पू. या प. ज़रूर लिखना है।
  • तेज़ विद्यार्थी एटलस से चारों शहरों के निर्देशांक ढूँढकर बताएँ कि कौन-सा शहर भूमध्य रेखा के सबसे पास है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 8): ग्रिनिच का देशांतर और उज्जयिनी का नाम। जिन्होंने 0° की जगह कुछ और लिखा, उनसे कालांश 5 की शुरुआत में ग्लोब पर ग्रिनिच की रेखा दिखवाइए।
  • गृहकार्य: एटलस में ढूँढिए कि आपके ज़िले के पास से कौन-सी अक्षांश और देशांतर रेखाएँ गुज़रती हैं, और कल कक्षा में बताइए। जो समूह कक्षा में चार शहर पूरे न कर पाए, वे घर पर करें। प्रश्न बैंक से क8–12, ख7, ग3–4, घ6, ङ3, च2 और च4। प्रश्न 7 में जो कथन देशांतर के बारे में हैं, उन्हें कारण के साथ सही या ग़लत लिखिए। प्रश्न 6 पढ़कर रखिए; उस पर कालांश 5 और 6 में बात होगी।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 28–39।

कालांश 5 — समय क्षेत्र

किताब — पृष्ठ 15, 19–21 · स्लाइड — इसी नाम वाला हिस्सा · इंटरैक्टिव — समय

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि हर 15° याम्योत्तर पर स्थानीय समय एक घंटा बदलता है, स्थानीय समय और मानक समय में अंतर कर पाए, और जान पाए कि भारतीय मानक समय ग्रिनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

साथ ले जाइए — ग्लोब, टेबल लैंप या टॉर्च, कालांश 4 का चार्ट, रंगीन चॉक, निकास-पर्ची के कागज़।

40 मिनट

  1. 0–3 मिनट · पिछली पर्चियाँ. ग्रिनिच 0° और उज्जयिनी की बात दो बच्चों से दोहरवाइए। ज़िले वाली रेखाएँ जिन्होंने ढूँढीं, उनसे सुनिए।
  2. 3–8 मिनट · लैंप और ग्लोब. पढ़िए: “एक टेबल लैंप को अपने ग्लोब से थोड़ा दूर रखिए और कल्पना कीजिए कि यह सूर्य है, जो पृथ्वी को प्रकाशित कर रहा है।” बिजली न हो तो टॉर्च से काम चलेगा (हमारी ओर से)। ग्लोब धीरे घुमाइए; बच्चे देखें कि एक ओर रोशनी है और दूसरी ओर अँधेरा।
  3. 8–12 मिनट · देशांतर और समय. पूछिए: जब हमारी कक्षा में सुबह है, तब क्या पूरी पृथ्वी पर सुबह है? फिर पढ़िए: “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।”
  4. 12–17 मिनट · हर 15° पर एक घंटा. पढ़िए: “यदि ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे मध्याह्न है, तो प्रत्येक 15° याम्योत्तर पर स्थानीय समय का एक घंटा जुड़ता जाता है।” और “यदि 15° पू. पर दोपहर 1:00 बजे का स्थानीय समय है, तो 30° पू. पर दोपहर 2 बजे होंगे तथा इसी क्रम में समय आगे बढ़ता है।” किताब का हिसाब: 15 × 24 = 360, यानी हर घंटे 15°। हमारा हिसाब: 60 मिनट ÷ 15 = 4, यानी हर 1° पर 4 मिनट; यह किताब में नहीं लिखा है।
  5. 17–21 मिनट · चित्र 1.7. चित्र दिखाइए। बच्चे पढ़ें: 30° पू. पर कितने बजे हैं? 45° प. पर? किताब के कैप्शन में नीचे की पंक्ति को अक्षांश कहा गया है, पर वे संख्याएँ देशांतर हैं; बच्चों को यह साफ़ बता दीजिए।
  6. 21–26 मिनट · पोरबंदर और तिनसुकिया. बच्चे किताब में फ़ोन वाली बातचीत पढ़ें; उसमें यह वाक्य आता है: “लेकिन यहाँ तो अभी भी दिन का प्रकाश है!” किताब का संकेत है कि दोनों शहरों के देशांतर में 30° का अंतर है। पूछिए: अँधेरा पहले कहाँ होगा, और कितना पहले? हमारा हिसाब: 30 × 4 मिनट = 120 मिनट, यानी 2 घंटे। शिक्षक संदर्शिका का उत्तर: तिनसुकिया पूर्व में है, वहाँ पहले अँधेरा होगा।
  7. 26–32 मिनट · मानक समय. पढ़िए: “लेकिन यह विधि किसी देश के अंदर अनेक स्थानीय समयों के उपयोग के संदर्भ में उचित नहीं होगी।” और “इसी कारण अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।” किताब बताती है कि भारतीय मानक समय ग्रिनिच के समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। प्रश्नावली का प्रश्न 2 (लंदन और भारत का समय) मौखिक कीजिए।
  8. 32–36 मिनट · समय क्षेत्र. पढ़िए: “समय क्षेत्र को विभाजित करने वाली रेखाएँ पूर्णतया सीधी नहीं होती हैं।” कारण किताब में है: अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का पालन करते हुए हर देश के मानक समय का ध्यान रखना पड़ता है। फिर किताब याद दिलाती है कि हर देश का एक ही मानक समय हो, ऐसा ज़रूरी नहीं: “यह हर एक देश में एक जैसा नहीं होता।” किताब के अनुसार रूस, कनाडा या संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश एक समय क्षेत्र के लिए बहुत बड़े हैं: संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 और रूस में 11 समय क्षेत्र हैं, और रूस के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में घड़ी 10 बार बदलनी पड़ती है। चित्र 1.8 और 1.9 बच्चे किताब में देखें (यहाँ दोबारा नहीं बनाए गए); चित्र 1.8 पर भारत +5½ ढूँढें।
  9. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची. पर्ची पर: स्थानीय समय और मानक समय में एक अंतर लिखिए।

चित्र 1.7: स्थानीय समय (चरण 5)

9पूर्वाह्न45° प.10पूर्वाह्न30° प.11पूर्वाह्न15° प.12मध्याह्न0°1अपराह्न15° पू.2अपराह्न30° पू.3अपराह्न45° पू.15°
चित्र 1.7 — प्रमुख याम्योत्तर के दोनों ओर स्थानीय समय: नीचे देशांतर, ऊपर समय; हर रंग एक याम्योत्तर पर केंद्रित 15° का क्षेत्रकिताब के पृष्ठ 19 के चित्र 1.7 के आधार पर हमारा बनाया चित्र

स्थानीय समय से समय क्षेत्र तक (चरण 4 से 8)

स्थानीय समय से समय क्षेत्र तक

स्थानीय समयहर 15° पर एक घंटाएक ही देश में कई समय
मानक समयदेश के मध्य से गुज़रने वाली याम्योत्तर पर आधारितभारत: ग्रिनिच से 5 घंटे 30 मिनट आगे
समय क्षेत्ररेखाएँ पूर्णतया सीधी नहींसंयुक्त राज्य अमेरिका 6, रूस 11
NCERT, पृष्ठ 19–21

बोर्ड-कार्य

  • बाईं ओर: 15° = 1 घंटा, और नीचे हमारा हिसाब: 1° = 4 मिनट।
  • बीच में: पोरबंदर (पश्चिम) और तिनसुकिया (पूर्व), बीच में 30°, नीचे 2 घंटे।
  • दाईं ओर: स्थानीय समय, मानक समय, समय क्षेत्र, तीर से जोड़कर।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो समय वाला हिस्सा चरण 4 के बाद चलाइए; बच्चे पहले कॉपी में घंटे जोड़ें, फिर पर्दे पर मिलाएँ।
  • पूर्व और पश्चिम में समय आगे या पीछे होने पर बच्चे सबसे ज़्यादा उलझते हैं। हर बार लैंप वाला ग्लोब घुमाकर पूछिए: सूरज की रोशनी पहले किस शहर तक पहुँचेगी?
  • बच्चे 4 मिनट वाले हिसाब को किताब की बात समझ लेते हैं। बताइए कि यह हमारा हिसाब है, किताब केवल 15° पर एक घंटा कहती है।
  • कमज़ोर विद्यार्थी केवल चित्र 1.7 पढ़ें: 0° पर 12 बजे, हर पट्टी पूर्व की ओर एक घंटा आगे।
  • तेज़ विद्यार्थी किताब के उदाहरण से आगे सोचें: 45° पू. पर कितने बजे होंगे, और 45° प. पर?

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 9): स्थानीय समय और मानक समय में एक अंतर। जो दोनों को एक ही समझें, उनसे कालांश 6 की शुरुआत में पोरबंदर-तिनसुकिया का उदाहरण फिर करवाइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न 2 कॉपी में लिखिए। प्रश्न 5 समूहों को बाँटिए; हर समूह किताब के कहे अनुसार 100–150 शब्दों का उत्तर लिखे और कालांश 6 के बाद जमा करे। प्रश्न 6 पूरा कीजिए। प्रश्न 7 में जो कथन समय के बारे में हैं, उन्हें कारण के साथ सही या ग़लत लिखिए। प्रश्न बैंक से क13–15, ग5–6, घ7, ङ4–5, च3 और छ2।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 40–49।

कालांश 6 — अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांश

किताब — पृष्ठ 21–25 · स्लाइड — अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांश, फिर किताब की प्रश्नावली · इंटरैक्टिव — तिथि रेखा, सार

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा पार करने पर तिथि बदलती है और यह रेखा टेढ़ी-मेढ़ी क्यों है, पहले दिन के तीन प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिख पाए, और प्रश्नावली के बाकी प्रश्न पूरे करने की राह पर हो।

साथ ले जाइए — ग्लोब, कालांश 4 का चार्ट, वर्ग पहेली की फ़ोटोकॉपी हो सके तो (नहीं तो किताब ही), निकास-पर्ची के कागज़।

40 मिनट

  1. 0–4 मिनट · एक सवाल. पूछिए: क्या कोई ऐसी रेखा है, जिसे पार करते ही कैलेंडर की तारीख़ बदल जाए? दो-तीन अनुमान सुनिए। पिछली पर्चियों से स्थानीय और मानक समय का एक अच्छा उत्तर पढ़कर सुनाइए।
  2. 4–10 मिनट · तिथि रेखा. बच्चे किताब में अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा की परिभाषा पढ़ें। फिर पढ़िए: “+12 और –12 समय क्षेत्र इस रेखा पर एक-दूसरे को छूते हैं।” पूछिए: +12 वाला क्षेत्र ग्रिनिच से कितने घंटे आगे है, और –12 वाला कितने घंटे पीछे?
  3. 10–16 मिनट · रेखा पार की, तो तिथि बदली. किताब में दो वाक्य हैं: एक रेखा को पूर्व की ओर पार करने का, एक पश्चिम की ओर का। बच्चे दोनों पढ़ें और बोर्ड की दो खानों वाली तालिका भरें: किस ओर पार किया, और तिथि का क्या हुआ। पश्चिम वाले वाक्य का अंत है: “(रविवार से सोमवार) जोड़ेंगे।”
  4. 16–20 मिनट · रेखा टेढ़ी-मेढ़ी क्यों. पढ़िए: “यह कुछ देशों में एक ही दिन का विभाजन होने से बचने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।” बच्चों को याद दिलाइए कि कालांश 5 में समय क्षेत्रों की रेखाएँ भी सीधी नहीं थीं।
  5. 20–26 मिनट · सार और तीन प्रश्न. बच्चे किताब के ‘आगे बढ़ने से पहले’ वाले चार बिंदु बारी-बारी पढ़ें। फिर कॉपी के पहले पन्ने पर लिखे तीन प्रश्नों के उत्तर अब अपने शब्दों में लिखें, हर प्रश्न का एक-दो वाक्य।
  6. 26–36 मिनट · प्रश्नावली. प्रश्न 6 से शुरू कीजिए: घर पर किया गया उत्तर दो-तीन बच्चे सुनाएँ। फिर प्रश्न 7 के सही-ग़लत कथन: जो घर पर हो चुके, उनके कारण पर बात कीजिए, बाकी अभी कीजिए। आख़िरी मिनटों में प्रश्न 8 की वर्ग पहेली जोड़ियों में शुरू करवाइए। सबके उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं।
  7. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची. पर्ची पर: कोई जहाज़ अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पश्चिम की ओर पार करे, तो उसके कैलेंडर की तिथि का क्या होगा? किताब के वाक्य से उत्तर दीजिए।

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (चरण 2 से 4)

अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा

तिथि रेखा+12 और –12 समय क्षेत्रयहाँ एक-दूसरे को छूते हैं
तिथि बदलती हैपश्चिम की ओर पाररविवार से सोमवार
टेढ़ी-मेढ़ी क्योंकुछ देशों मेंएक ही दिन का विभाजन न हो
NCERT, पृष्ठ 21–22

वर्ग पहेली (चरण 6)

123456789101112
वर्ग पहेली: हर सफ़ेद खाने में एक अक्षरकिताब के पृष्ठ 24 की वर्ग पहेली के आधार पर हमारा बनाया चित्र

बोर्ड-कार्य

  • बाईं ओर: दो खानों की तालिका, किस ओर पार किया और तिथि का क्या हुआ। बच्चे किताब से भरें।
  • बीच में: एक टेढ़ी-मेढ़ी खड़ी रेखा, उसके एक ओर +12 और दूसरी ओर –12।
  • दाईं ओर: कालांश 1 वाले तीन प्रश्न, हर एक के आगे उस कालांश की संख्या जिसमें उसका उत्तर मिला।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो तिथि रेखा वाला खेल चरण 3 में, बच्चों के तालिका भरने के बाद चलाइए; पहले अनुमान, फिर पर्दा।
  • पूर्व और पश्चिम की ओर पार करने पर बच्चे दिन जोड़ना और घटाना उलट देते हैं। हर बार किताब का वाक्य फिर पढ़वाइए, अपने मन से नियम मत बनवाइए।
  • बच्चे पूछते हैं कि रेखा के पास रहने वाले लोगों का क्या होता है। किताब का उत्तर यही है कि रेखा टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुज़रती है, ताकि किसी देश में एक ही दिन बँट न जाए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी प्रश्नावली में प्रश्न 7 के कथन जोड़ी में करें, और सार के चार बिंदुओं में से एक-एक अपने शब्दों में बोलें।
  • तेज़ विद्यार्थी वर्ग पहेली पूरी करें, और अपने साथियों के लिए पाँच संकेतों वाली एक छोटी पहेली इसी अध्याय से बनाएँ।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 7): तिथि रेखा पश्चिम की ओर पार करने पर तिथि का क्या होता है। जिनका उत्तर उलटा है, उनके साथ अगले दिन किताब का वाक्य फिर पढ़िए।
  • गृहकार्य: प्रश्न 7 और प्रश्न 8 पूरे कीजिए। प्रश्न 5 का समूह-उत्तर जमा कीजिए। प्रश्न बैंक से ख8, घ8 और ङ6, फिर पूरा प्रश्न बैंक दोहराने के लिए।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 50–54, और ‘अंतिम पाँच मिनट’ वाला सेट।

पूरे अध्याय के लिए

अलग-अलग बच्चों के लिए

बच्चेक्या कीजिए
पढ़ने में धीमेहर कालांश में पहले ठोस चीज़: मानचित्र पर उँगली, संतरा, सुतली वाली गेंद, लैंप वाला ग्लोब। फिर एक वाक्य, जो वे बोलकर दोहराएँ।
जो जल्दी कर लेते हैंहर कार्ड में तेज़ विद्यार्थी वाले काम: बेंचों का ग्रिड, एटलस में चार शहर, 45° पू. और 45° प. का समय, अपनी वर्ग पहेली।
जिन्हें देखने में कठिनाई हैगेंद पर गोंद से चिपकी सुतली को छूकर भूमध्य रेखा और ध्रुव पहचानें; दिशाएँ कक्षा में खड़े होकर, शरीर घुमाकर। (हमारी ओर से)
जो किसी दिन नहीं आएउस कालांश के फ़्लैशकार्ड, और इंटरैक्टिव अध्याय का वही हिस्सा; अगले दिन उस कालांश की निकास-पर्ची का सवाल मौखिक।
जिन्हें हिंदी के कठिन शब्द रोकते हैंयाम्योत्तर, अक्षांश, देशांतर, निर्देशांक कक्षा की दीवार वाले चार्ट पर, हर एक के साथ एक छोटा चित्र।

सतत मूल्यांकन

साधनकबक्या देखिए
निकास-पर्चीहर कालांश के आख़िरी चार मिनटवही एक बात, जो उस कालांश का लक्ष्य है; जिनसे छूटी, उनसे अगले कालांश की शुरुआत में मौखिक पूछिए।
गाँव या मोहल्ले का मानचित्रकालांश 1 से 3दिशा का तीर, कुछ प्रतीक चिह्न, और दूरी का अंदाज़: तीनों घटक हैं या नहीं।
संतरे का प्रयोग, समूह मेंकालांश 2समूह अपने शब्दों में बता पाता है या नहीं कि किनारे क्यों टूटे।
शतरंज की चालकालांश 3चाल अक्षर और अंक, दोनों से लिखी है या नहीं।
ज़िले की रेखाएँ, एटलस सेकालांश 5 की शुरुआतअक्षांश के साथ उ. और देशांतर के साथ पू. लिखा है या नहीं।
पोरबंदर और तिनसुकियाकालांश 5बच्चा पहचानता है या नहीं कि पूर्व वाले शहर में अँधेरा पहले होगा।
प्रश्नावली और वर्ग पहेलीकालांश 6 और उसके बादसही-ग़लत कथनों में कारण लिखा है या केवल सही या ग़लत।

लिखित मूल्यांकन

अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा। प्रश्न प्रश्न बैंक से लिए जा सकते हैं; उसके खंड क से छ तक प्रकार के हिसाब से बँटे हैं, जैसा नीचे पहले स्तंभ में लिखा है।

प्रकारसंख्याक्या पूछें
वस्तुनिष्ठ (खंड क)5मानचित्र के घटक, ग्लोब, अक्षांश, देशांतर और समय से एक-एक।
रिक्त स्थान (खंड ख)3भूमध्य रेखा 0°, ग्रिनिच 0°, ध्रुव 90° जैसे सीधे तथ्य।
सही या ग़लत (खंड ग)3कारण के साथ।
अति लघूत्तरीय (खंड घ)3एक वाक्य वाले उत्तर: मानक समय, निर्देशांक, तिथि रेखा।
लघूत्तरीय (खंड ङ)2स्थानीय और मानक समय का अंतर; ग्लोब और मानचित्र की तुलना।
दीर्घ (खंड च)1उज्जयिनी की मध्य रेखा, या समय क्षेत्र।
मानचित्र और क्रियाकलाप (खंड छ)1किसी छोटे मानचित्र पर दिशा, प्रतीक और दूरी पढ़ना।

प्रोजेक्ट और गतिविधि

  • अपने गाँव या मोहल्ले का मानचित्र. किताब की गतिविधि: “अपने घर, विद्यालय और कुछ अन्य महत्वपूर्ण भू-चिह्नों सहित अपने स्थान या अपने गाँव का एक मानचित्र बनाइए।” कालांश 1 में शुरू, कालांश 3 में जमा। अच्छे मानचित्र कक्षा की दीवार पर लगाइए।
  • विद्यालय का मानचित्र, समूहों में. किताब का कक्षा-क्रियाकलाप: “प्रत्येक समूह से अपने विद्यालय तथा उस तक जाने वाले कुछ मार्गों और पड़ोस के भवनों का मानचित्र बनाने को कहिए।” अंत में सब समूहों के मानचित्रों की तुलना कीजिए, जैसा किताब कहती है। इसके लिए अध्याय के बाद का एक अतिरिक्त कालांश चाहिए।
  • प्रश्न 5, समूह-उत्तर. कालांश 5 में बाँटा, कालांश 6 के बाद जमा।
  • ज़िले का पता. कालांश 4 के गृहकार्य से हर बच्चे की ढूँढी रेखाएँ एक चार्ट पर इकट्ठी कीजिए, और कक्षा मिलकर तय करे कि अपने ज़िले का लगभग अक्षांश और देशांतर क्या लिखें। (हमारी ओर से)

शिक्षक के लिए सावधानियाँ

  • उज्जयिनी. किताब उज्जयिनी की मध्य रेखा के लिए कोई वर्ष नहीं देती; “लगभग 1500 वर्ष पूर्व” वराहमिहिर के लिए है। किताब यह भी नहीं कहती कि भारतीय मानक समय इसी रेखा पर आधारित है। बच्चे पूछें तो उत्तर किताब के वाक्यों तक रखिए।
  • चित्र 1.7 का कैप्शन. किताब का कैप्शन नीचे की पंक्ति को अक्षांश कहता है, जबकि वे संख्याएँ (45° प. से 45° पू.) देशांतर हैं। हमारे चित्र में यह ठीक लिखा है।
  • हमारा हिसाब. हर 1° पर 4 मिनट, और पोरबंदर-तिनसुकिया के बीच लगभग 2 घंटे, दोनों हमारा हिसाब हैं; किताब केवल हर 15° पर एक घंटा और 30° का संकेत देती है।
  • दिल्ली का देशांतर. दिल्ली के लिए दी गई डिग्री के बारे में किताब ख़ुद कहती है कि वह आनुमानिक है, सटीक नहीं। चार शहरों (मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर, पेरिस) के मान किताब में नहीं हैं; एटलस से लीजिए।
  • जो चित्र दोबारा नहीं बने. चित्र 1.3, 1.4, 1.8 और 1.9 यहाँ नहीं हैं; बच्चे किताब में देखें। चित्र 1.5 और 1.6 में आज की सीमाएँ नहीं दिखाई गई हैं; भारत की सीमा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्र में देखिए।
  • संतरा. छिलका हाथ से उतारिए; कक्षा में चाकू की ज़रूरत नहीं। यह सलाह हमारी ओर से है।